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हत्या के आरोपियों का सिर मुंडवाकर फटे कपड़ों में घुमाया:लंगड़ाते हुए चले, हत्यारों को व्यापारी के घर लेकर पहुंची, क्राइम सीन रीक्रिएट कराया

अलवर शहर में बुजुर्ग व्यापारी की हत्या के दोनों आरोपियों की पुलिस ने परेड निकाली। दोनों हत्यारे फटे कपड़ों में लंगड़ाते हुए चल रहे थे और सिर मुंडा हुआ था। पुलिस रविवार सुबह दोनों आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर गई और वारदात का सीन रीक्रिएट कराया। आरोपियों को देखने के लिए भीड़ जमा हो गई। इस दौरान लोगों ने “अलवर पुलिस जिंदाबाद” के नारे लगाए और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। दरअसल, बुजुर्ग दिनेश अग्रवाल (80) अलवर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल के मामा और पूर्व CMHO डॉ. सुबोध अग्रवाल के चचेरे भाई थे। अजय अग्रवाल साल 2023 में कांग्रेस के टिकट पर अलवर शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। अब वे कांग्रेस में नहीं हैं। देखिए पुलिस की कार्रवाई के PHOTOS… पुलिस ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट किया कोतवाली थाना प्रभारी रमेश सैनी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ कर यह जाना गया कि वे किस रास्ते से घर में घुसे, हत्या और लूट की वारदात कैसे की और बाद में किस रास्ते से फरार हुए। पुलिस इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है। एक अन्य आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच में सामने आया है कि बदमाशों ने 9 जुलाई की रात वारदात को अंजाम दिया था। प्रारंभिक जांच में हत्या के बाद घर से हजारों रुपए की लूट की बात भी सामने आई है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश और लूटे गए सामान की बरामदगी में जुटी हुई है। बेटे के घर नहीं पहुंचे तो किया फोन बहू रीमा अग्रवाल ने बताया- मेरे ससुर दिनेश चंद अग्रवाल खदाना मोहल्ले वाले मकान में अकेले रहते थे। वे स्वाभिमानी थे और बुढ़ापे में भी अपना सारा काम खुद ही करते थे। वे रोजाना रात का खाना खाने के लिए खदाना मोहल्ले से एक किलोमीटर दूर स्कीम नंबर 4 में हमारे घर आते थे। जब गुरुवार (9 जुलाई) शाम वे खाना खाने नहीं पहुंचे तो करीब 7:30 बजे मेरे पति विकास ने उन्हें फोन किया। उनका लैंडलाइन नंबर बंद आया। इसके बाद मेरे पति वहां पहुंचे तो मेरे ससुर कमरे में चारपाई पर मृत पड़े मिले। बदमाशों ने उनके हाथ, पैर और मुंह को कपड़ों से कसकर बांध रखा था, ताकि वे चिल्ला नहीं सकें। घर की अलमारियां टूटी हुई थीं और सारा सामान बिखरा पड़ा था। — ये खबर भी पढ़ें… जीएसटी अफसर के घर को लूटने वाले लंगड़ाते हुए चले:पुलिस ने परेड निकाली, सीन रीक्रिएट कराया; शक नहीं हो इसलिए 5-6 बार कपड़े बदले अलवर की शालीमार सोसायटी में जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर ओमप्रकाश के घर हुई लूट के मामले में पुलिस ने चार बदमाशों को शनिवार शाम गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपियों को मौका तस्दीक कराने के लिए घटना स्थल यानी जीएसटी अधिकारी के घर पर लेकर पहुंची। चारों आरोपी लंगड़ाते हुए चले। (पढ़िए पूरी खबर)

अयोध्या में श्रद्धालु घटे, होटल ऑक्यूपेंसी 25% ही बची:राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद हालात बदले, दुकानदारों की कमाई घटी

सुबह के दस बजे हैं… रामपथ पर स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वार से रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालु आगे बढ़ रहे हैं। कोई रामधुन गा रहा है, तो कोई ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष कर रहा है। इस कतार में लगकर साफ हो जाता है कि रामलला के प्रति आस्था अटूट और अटल है, लेकिन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लोगों द्वारा चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद यहां बहुत कुछ बदल गया है। रामपथ पर चंदन, माला की दुकान चलाने वाले एक युवक कहते हैं- श्रद्धालुओं की संख्या पहले की तुलना में 25% ही है। यहीं प्रसाद का ठेला लगाने वाले एक युवक ने बताया कि 10 दिन पहले तक रोज 4-5 हजार रु. तक बिक्री कर लेते थे। अब एक हजार भी मुश्किल है। नया घाट पर फूल-माला बेचने सूर्य प्रकाश की भी यही पीड़ा है, जो दिनभर में 1000 से 1500 रु. तक बिक्री करते थे। अब बमुश्किल 500 रु. कमा पाते हैं।’ ई-रिक्शा चलाने वाले अजय कहते हैं, अब रिक्शे का किराया और अपना खर्च भी नहीं निकल रहा है। सुबह नाश्ते के वक्त रामपथ पर एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट की सभी टेबल खाली मिलीं। मैनेजर ने बताया कि दस दिन से यही हाल है। वो इसके लिए चढ़ावा चोरी के साथ ही स्कूल खुलने और बारिश को भी जिम्मेदार बताते हैं। हालांकि ज्यादातर स्थानीय दुकानदारों, ऑटो, ई-रिक्शा और होटल वालों की मानें तो श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम हो गई है और चढ़ावा विवाद इसका बड़ा कारण है। पहले औसतन रोज एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु आते थे, वो आंकड़ा 60-70 हजार पर आ गया है। गुजरात से आए युवा सुमित कहते हैं, ‘मैं दूसरी बार आया हूं। तब दर्शन में चार घंटे लगे थे, इस बार एक घंटे में दर्शन हो गया।’ अयोध्या होटल्स एसो. के प्रवक्ता अरुण अग्रवाल कहते हैं, ‘अभी मिड-सेगमेंट होटलों की ऑक्यूपेंसी 25% बची है। इन्हीं के ग्राहक सबसे ज्यादा थे। अयोध्या के आसपास करीब 100 नए होटल बन रहे हैं। अगर धार्मिक पर्यटन की रफ्तार जल्द न बढ़ी तो निवेश पर भी असर पड़ेगा।’ एक ट्रैवल एजेंसी के संचालक ने बताया कि ज्यादातर श्रद्धालु आसपास के हैं, जिन्हें न होटल की जरूरत है न टैक्सी की। संतों का मत; कोई बोला- नया ट्रस्ट बनाएं, तो किसी ने इसे आस्था तोड़ने की साजिश बताया सिद्धपीठ श्री हनुमत निवास के महंत आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण कहते हैं कि यह व्यवस्था की गलती है, संस्था की नहीं। इसकी आड़ में आस्था तोड़ने की सियासी साजिश चल रही है, लेकिन यह साजिश कभी सफल नहीं होगी। इसका पूरा सच जल्द सामने आ जाएगा। मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा- कुछ छोटे कर्मचारियों की चूक है, उन पर कार्रवाई हुई है। इसमें चंपत राय की कोई गलती नहीं है। हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे भंग करने और अयोध्या के साधु-संतों का नया ट्रस्ट बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, जरूरत पड़ी तो हम इसके लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। दंतधावन कुंड मंदिर के महंत विवेक आचारी ने ट्रस्ट में शंकराचार्यों और पीठाधीश्वरों को शामिल करने की बात कही। महंत जन्मेजय शरण ने अयोध्या के संतों को ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व की मांग उठाई। यूपी में 9 महीने बाद चुनाव… भाजपा का पूरा फोकस डैमेज कंट्रोल पर राजनीतिक परीक्षा यह विवाद चढ़ावा चोरी या जांच तक सीमित नहीं रहा। राम मंदिर भाजपा और संघ के लंबे वैचारिक आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीक रहा है। उसी मंदिर के ट्रस्ट पर सवाल उठे, तो विपक्ष को भाजपा को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है। यूपी चुनाव में करीब नौ महीने बाकी हैं, इसलिए विवाद भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है। डैमेज कंट्रोल शुरुआती चुप्पी साधने के बाद भाजपा और संघ इसका जवाब दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि एसआईटी जांच जारी है, दोषियों पर कार्रवाई हो चुकी है और ट्रस्ट में बड़े सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। रणनीतिक विराम बंगाल के नतीजों के बाद जनगणना के चलते राजनीतिक हलकों में यूपी में समयपूर्व चुनावों की चर्चा थी। पर, ट्रस्ट विवाद के बाद भाजपा अभी इस विकल्प पर आगे बढ़ने के पक्ष में नहीं है। बिना इस राजनीतिक शोर के थमे चुनाव से नुकसान का डर है। घमासान सीएम योगी आदित्यनाथ ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी है। वहीं, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, यह आस्था का मामला है। जांच में लीपापोती नहीं होने दी जाएगी। सपा इसे संसद के मानसून सत्र में भी उठाएगी।

यूरोप की सिलिकॉन वैली बना विलनियस:देश की आबादी 29 लाख, 6 यूनिकॉर्न काम कर रहीं; स्टार्टअप के मामले में दुनिया में 13वें नंबर पर

सुबह के करीब दस बजे हैं। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस की साइबर सिटी में कांच की ऊंची इमारतों के बीच तेज कदमों से युवा प्रोफेशनल्स गुजर रहे हैं। एक तरफ नॉर्ड सिक्योरिटी जैसे दुनियाभर में मशहूर यूनिकॉर्न का दफ्तर है, तो कुछ ही कदम पर हॉस्टिंगर का। हॉस्टिंगर यानी एक ऐसा स्टार्टअप जिसके यूजर 150 से ज्यादा देशों में हैं। यहां फ्यूचर, एआई और स्टार्टअप जैसे शब्द हर बातचीत में सुनाई देते हैं। विलनियस को अब यूरोप की ‘सिलिकॉन वैली’ भी कहा जाने लगा है। यूरोप के इस छोटे से देश लिथुआनिया की आबादी मात्र 29 लाख के करीब है, लेकिन यहां हजारों स्टार्टअप काम कर रहे हैं। आकार और आबादी में भले ही यह देश छोटा है, लेकिन सोच बड़ी और ग्लोबल है। यूनिकॉर्न लिथुआनिया की सीईओ गिन्तारे वेरबिकाइते बताती हैं कि आज विलनियस यूरोप की सबसे तेजी से बढ़ती स्टार्टअप सिटी है। इस मामले में दुनिया में भी ये 13वें नंबर पर है। यहां कारोबार स्थानीय नहीं, वैश्विक सोच के साथ शुरू होता है। यहां के लोग कहते हैं कि जब हम कोई स्टार्टअप शुरू करते हैं तो उसे दुनिया की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाते हैं, क्योंकि हम सिर्फ लिथुआनिया तक सीमित रहना नहीं चाहते हैं। आबादी यानी प्रति व्यक्ति के हिसाब से लिथुआनिया दुनिया के सबसे अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप वाले देशों में है। यहां विंटेड, नॉर्ड सिक्योरिटी, बीसीजी, फ्लो, कास्ट एआई और ऑक्सीलैब्स, छह यूनिकॉर्न कंपनियां हैं। विंटेड ने यूनिकॉर्न बिल्ड करने का एक अलग मॉडल पेश किया है। उसने पुराने कपड़े खरीदने और बेचने का ऑनलाइन मॉडल शुरू किया और वो यहां की पहली यूनिकॉर्न बनी। इन्वेस्ट लिथुआनिया की स्ट्रैटजिस्ट डायना गिरडेनाइट कहती हैं कि बढ़ती स्किल्ड वर्कफोर्स, फाइनेंशियल इन्सेंटिव और सरकार की नीतियां जैसे प्रमुख कारण हैं, जिनके कारण लिथुआनिया स्टार्टअप पावरहाउस बन रहा है। सीखने-सिखाने का कल्चर, भारत इनका बड़ा बाजार चार कारण… लिथुआनिया कैसे बन रहा स्टार्टअप पावरहाउस 1. तेजी से बढ़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम देश में 300 से ज्यादा फिनटेक कंपनियां काम कर रही हैं। 2020 से 2025 के बीच स्टार्टअप इकोसिस्टम का मूल्य 5.9 गुना बढ़कर करीब 1.56 लाख करोड़ रु. हो गया। 2025 में स्टार्टअप्स ने करीब 2400 करोड़ रु. की वेंचर कैपिटल जुटाई। 2. वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा एक्सेल, जनरल कैटलिस्ट, इनसाइट पार्टनर जैसी विश्व की प्रमुख निवेशक कंपनियां, जिन्होंने फेसबुक, स्पाॅटिफाई, एयर बीएनबी जैसी कंपनियों में निवेश किया है, वे भी लिथुआनिया के स्टार्टअप्स में निवेश कर रही हैं। सार्वजनिक वाई-फाई स्पीड में लिथुआनिया पहले स्थान पर व साइबर सुरक्षा सूचकांक में छठे स्थान पर है। 3. एआई प्रतिभा से बनी मजबूत नींव देश में 77,600 से अधिक आईसीटी (सूचना और संचार तकनीक) विशेषज्ञ कार्यरत हैं। सरकार ने एआई विकास के लिए करीब 457 करोड़ रु. से अधिक का निवेश किया और 2018 में ही राष्ट्रीय एआई रणनीति लागू कर दी। 13 हजार छात्र आईसीटी की पढ़ाई कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर रीस्किलिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 4. कंपनी शुरू करना आसान यहां नई कंपनी का रजिस्ट्रेशन कुछ ही दिनों में हो जाता है। सरकारी प्रक्रियाएं सरल और ऑनलाइन होने से उद्यमियों का समय और लागत दोनों बचते हैं। कॉर्पोरेट प्रॉफिट टैक्स 0-16% के बीच, फ्री इकोनॉमिक जोन में पहले 10 वर्षों तक 0% टैक्स, RD प्रोत्साहन, पेटेंट बॉक्स, तेज लाइसेंसिंग प्रक्रिया, विश्वस्तरीय डिजिटल नेटवर्क और 2030 तक 100% रिन्यूएबल बिजली का लक्ष्य- ये तमाम ऐसे कारण हैं जिनके कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

तालाब में नहाते समय 6 डूबे, 4 भाई-बहनों की मौत:परिवार में अब केवल माता-पिता बचे; छुट्टियों के लिए आई भांजी भी हादसे का शिकार

डूंगरपुर के बड़ी गांव में वात्रक तालाब में नहाने पहुंचे 4 भाई-बहनों की डूबने से मौत हो गई। इनमें 3 सगे और एक उनकी फुफेरी बहन है। वहीं, 2 बच्चों को उनमें से एक के पिता ने बचा लिया। मृतकों में से एक लड़की गुजरात के पालनुपर की रहने वाली है। जबकि, तीन बड़ी गांव के ही निवासी हैं। तीनों की मौत के बाद परिवार में अब केवल माता-पिता बचे हैं। घटना रविवार सुबह 10 बजे की है। नहाते समय तालाब की गहराई में चले गए थे धम्बोला थाना पुलिस के अनुसार हादसे में बड़ी गांव के रहने वाले बाबूसिंह डामोर की बड़ी बेटी हिना (24), बेटा प्रतीक (20), छोटी बेटी इशिता (15) की मौत हो गई। बच्चों की फुफेरी बहन रौनक (20) पुत्री गौतम भाई परमार निवासी पालनपुर ने भी दम तोड़ दिया। हादसे में राजवीर पुत्र कोहरा डामोर, जयसिंह पुत्र सुरेश डामोर को बचा लिया। दोनों घायल सीमलवाड़ा हॉस्पिटल में एडमिट हैं। 11 साल का जयसिंह नहाते समय गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। हिना, प्रतीक, रौनक और इशिता उसे बचाने के लिए गए। सभी ने एक दूसरे को पकड़ लिया। सभी पानी में डूबने लगे। बच्चों के चिल्लाने पर सबसे पहले जयसिंह के पिता सुरेश दौड़कर आए। बेटे जयसिंह को बाहर निकाला। फिर राजवीर को बाहर निकाला। तीसरी बार फिर एनिकट में कूदे लेकिन तब तक 4 भाई बहन डूब गए थे। अब देखिए- हादसे जुड़ी PHOTOS… परिवार के सभी बच्चों की मौत किसान बाबूसिंह डामोर के 2 बेटियां और एक बेटा ही थे। अब परिवार में कोई बच्चा नहीं है। बड़ी बेटी हिना गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी। जबकि भाई प्रतीक ने 12वीं कक्षा पास करने के बाद फर्स्ट ईयर में एडमिशन के लिए आवेदन किया था। सबसे छोटी बहन इशिता 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। डामोर की भांजी रौनक 4 दिन पहले ही मामा के घर आई थी। वो भी मामा के बच्चों के साथ तालाब में नहाते हुए हादसे का शिकार हो गई। रौनक के परिवार के लोग सूचना के बाद पालनपुर से रवाना हो गए। पिता ने बेटे और उसके साथी को बचाया हादसे में बचे दो बच्चों जयसिंह और राजवीर को जयसिंह के पिता ने बचा लिया। जानकारी के अनुसार जयसिंह के पिता सुरेश सिंह तालाब के पास ही थे। वे बच्चों का शोर सुनकर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपने बेटे और राजवीर को पानी से बाहर खींचा। वे बाकी 4 और बच्चों को बचाते उससे पहले ही वे डूब गए। …. ये खबर भी पढ़िए… 8 फीट गहरे टैंक में डूबने से 2-मासूमों की मौत:घर के पास खेलते समय पानी में गिरीं, चप्पलों से हुई पहचान करीब 2 महीने पहले जयपुर के शिप्रापथ इलाके में दो मासूम बच्चियों की पानी के टैंक में डूबने से मौत हो गई थी। घटना जगन्नाथपुरी सेकेंड क्षेत्र की थी। पूरी खबर पढ़िए… अलवर में 10 फीट गहरे हौद में डूबे दो दोस्त,मौत:’बचाओ-बचाओ’ चिल्लाते रहे, नहाने के लिए उतरे थे, बाहर खड़े दोस्तों ने ग्रामीणों को बुलाया अलवर में खेत में बने 10 फीट गहरे फार्म पॉन्ड (हौद) में डूबने से दो मासूम दोस्तों की दर्दनाक मौत हो गई। हौद में डूबते ही दोनों बच्चे ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाने लगे, जबकि बाहर खड़े उनके 4 अन्य साथी ग्रामीणों को बुलाने के लिए दौड़े। ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और उनकी सांसें थम चुकी थी। पूरी खबर पढ़िए…

कोटा-यूनिवर्सिटी में 10 करोड़ का चंबल प्रोजेक्ट तैयार:उद्घाटन के इंतजार में 1500 छात्र खारा पानी पीने को मजबूर, टेस्टिंग हुई सफल,पाइपलाइन बिछ गई

कोटा यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार चंबल के मीठे पानी को कैंपस तक लाने का 10 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। पानी की विशाल टंकी बनकर तैयार है, पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और सिस्टम की टेस्टिंग भी पूरी तरह सफल रही है। लेकिन इस गर्मी और उमस के बीच यूनिवर्सिटी के छात्रों को यह पानी सिर्फ इसलिए नसीब नहीं हो रहा है, क्योंकि सिस्टम को अब तक एक ‘उद्घाटन की तारीख’ का इंतजार है। यूनिवर्सिटी कैंपस में बनाई गई इस पानी की टंकी का उद्घाटन पहले 9 जुलाई को होना संभावित था, लेकिन किन्हीं अज्ञात कारणों से यह कार्यक्रम टल गया। आज भी यूनिवर्सिटी के करीब 1500 नियमित छात्र में बोरवेल का खारा पानी पीने को मजबूर हैं। कोटा यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 2003 में हुई थी। स्थापना के बाद से ही कैंपस में मीठे पानी की किल्लत बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि उद्घाटन के वीआईपी कल्चर को छोड़कर तुरंत पानी की सप्लाई शुरू की जाए।
पथरीली जमीन का खारा पानी और 10 करोड़ का चंबल प्रोजेक्ट कोटा यूनिवर्सिटी में कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ और सवाई माधोपुर के करीब 213 से अधिक कॉलेज जुड़े हैं, जिनमें नामांकित छात्रों की कुल संख्या 3 लाख से अधिक है। यूनिवर्सिटी कैंपस की जमीन पथरीली होने के कारण यहां का ग्राउंड वॉटर (भूजल) बेहद खराब और खारा है, जिससे कैंपस के पेड़-पौधे तक सूख जाते हैं। समस्या के स्थायी समाधान के लिए अकेलगढ़ वाटर फिल्टर प्लांट से यूनिवर्सिटी कैंपस तक पानी पहुंचाने के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक का बजट मंजूर किया गया था। पीएचईडी (PHED) और यूनिवर्सिटी के आपसी तालमेल से अब यह काम पूरा हो चुका है। मुख्य ओवरहेड टैंक (पानी की टंकी) बनकर तैयार है, डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और पानी का प्रेशर व लीकेज जांचने के लिए टेस्टिंग का काम भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। आगामी सप्ताह में उद्घाटन की पूरी उम्मीद यूनिवर्सिटी के कुलगुरू प्रो. बी.पी. सारस्वत के अनुसार, 23 साल के लंबे इंतजार के बाद यूनिवर्सिटी को चंबल का मीठा पानी मिलने जा रहा है। पाइपलाइन बिछने के बाद उसकी टेस्टिंग और चेकिंग का काम भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है। पहले इसका उद्घाटन 9 जुलाई को होना संभावित था, लेकिन कुछ कारणों से यह नहीं हो सका, अब आगामी सप्ताह में इसके उद्घाटन की पूरी उम्मीद है। छात्रों को नलकूप का पानी, स्टाफ के लिए रोज आते हैं 100 कैंपर हालांकि, इस उद्घाटन के इंतजार के बीच कैंपस के भीतर पानी को लेकर एक ‘दोहरा सिस्टम’ चल रहा है। छात्रों के लिए लगे वॉटर कूलर्स में आज भी नलकूप (बोरिंग) का खारा पानी आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और स्टाफ के लिए रोज बाहर से 100 से अधिक पानी के कैंपर मंगवाए जाते हैं। दोपहर होते-होते ये कैंपर भी खत्म हो जाते हैं, जिसके बाद स्टाफ को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।

वेस्ट मोटी ऊन से बना रहे लेडीज-पर्स और माउस पैड:टोंक में वैज्ञानिक ने 10 साल रिसर्च की, ऑफिस फाइल और ब्लेजर भी तैयार किए

एक समय जो मोटी ऊन किसानों के लिए बेकार मानी जाती थी। जिस मोटी ऊन को बेकार समझकर किसान फेंक दिया करते थे या फिर औने-पौने दामों में बेच दिया करते थे। वहीं अब फैशन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स का हिस्सा बन रही है। भेड़ की मोटी ऊन अब सिर्फ नमदा या सस्ते हस्तशिल्प तक सीमित नहीं रही है। आधुनिक टेक्सटाइल तकनीक ने इसकी तस्वीर बदल दी है। अब इन मोटी ऊन से अब लेडीज पर्स, माउस पैड, ऑफिस फाइल, ब्लेजर, नेहरु जैकेट, रजाई और जैवअपघटित पौध बैग जैसी चीजें तैयार की जा रही है। यह उपलब्धि टोंक के मालपुरा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर (मालपुरा) के वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग (TMTC) के वैज्ञानिकों ने करीब एक दशक के अनुसंधान के बाद हासिल की है। ऐसे आया पहली बार आइडिया डॉ. सिको जोस ने बताया- भेड़ के मांस की मांग लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही ऊन का उत्पादन भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। हालांकि, अधिकांश ऊन मोटे किस्म की होती है, जिसका अब तक पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा था। इसके कारण भेड़पालकों को अपनी ऊन का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था। उन्होंने बताया- इसी स्थिति को देखते हुए मोटी ऊन के बेहतर उपयोग के लिए बुनियादी अनुसंधान की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग एवं टेक्सटाइल केमिस्ट्री डिवीजन ने मोटी ऊन को मूल्य संवर्धित उत्पादोंं में बदलने के उद्देश्य से पिछले एक दशक में विभिन्न शोध एवं प्रयोग (रिसर्च एक्सपेरिमेंट) शुरू किए। मोटी ऊन की नॉन-बोवन शीट तैयार की करीब दस महीने पहले संस्थान में स्थापित लगभग ढाई करोड़ रुपए की आधुनिक मशीन की मदद से मोटी ऊन की नॉन-बोवन शीट तैयार की गई, जिसके आधार पर कई उपयोगी उत्पाद विकसित किए गए हैं। इनमें से दो उत्पादों की तकनीक महाराष्ट्र की एक निजी फर्म को हस्तांतरित (Technology Transfer) भी की जा चुकी है। इस उपलब्धि से भविष्य में मोटी ऊन की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे भेड़पालकों को उनकी ऊन का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। इस अनुसंधान में विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सिको जोस तथा वैज्ञानिक डॉ. विनोद कदम की अहम भूमिका रही।
डेढ़ दर्जन से अधिक वस्तुएं तैयार करने की तकनीक विकसित तीनों वैज्ञानिकों ने लगातार प्रयोग कर मोटी ऊन को आधुनिक टेक्सटाइल तकनीकों के माध्यम से उपयोगी उत्पादों हैंड बैग, माउस पैड,ऑफिस फाइल बैग, रजाई, कंबल, पौधों के जैव अपघटित बैग, विभिन्न प्रकार के ऊनी उत्पाद सहित डेढ़ दर्जन से अधिक वस्तुएंं तैयार करने की सफल तकनीक विकसित की। कंपोजिट निर्माण तकनीकों का उपयोग डॉ. जोस ने बताया- इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यवस्थित रणनीति अपनाई गई। इसके तहत फाइबर संशोधन (Fiber Modification) और कंपोजिट निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया। मोटी ऊन पर नेचुरल रबर लेटैक्स, जैवअपघटनीय (Biodegradable) पॉलीमर और पोलीयूरेथेन की कोटिंग कर उसके लचीलेपन, टिकाऊपन, जल प्रतिरोधक क्षमता तथा सतह के स्पर्श अनुभव में उल्लेखनीय सुधार किया गया। इसके साथ ही कच्चे माल का ग्रेडिंग और प्रसंस्करण की प्रक्रियाओं का मानकीकरण किया गया, ताकि तैयार उत्पादोंं की गुणवत्ता एक समान बनी रहे। साथ ही, डॉ. सिको जोस ने बताया- आईसीएआर केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (ICAR-CSWRI), अविकानगर में कम कीमत वाली मोटी ऊन से रजाई तैयार की जा रही है। सामान्यतः इस प्रकार की मोटी ऊन कपड़ा निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, लेकिन संस्थान ने इसे उपयोगी उत्पाद में बदलने की तकनीक विकसित की है। मोटी ऊन से तैयार हो रहे जैवअपघटित पौध बैग डॉ. सिको जोस ने बताया- आईसीएआर-सीएसडब्ल्यूआरआई ने प्लास्टिक नर्सरी बैग के सतत (सस्टेनेबल) विकल्प के रूप में मोटी ऊन से जैवअपघटित (Biodegradable) पौध बैग भी तैयार किए हैं। इन बैगों के निर्माण की प्रक्रिया मोटी ऊन के रेशों की सफाई और उन्हें खोलने से शुरू होती है। इसके बाद निडल-पंच (Needle Punch) तकनीक की सहायता से नॉन-वोवन ऊनी शीट तैयार की जाती है। फिर इस शीट को नर्सरी और बागवानी की आवश्यकता के अनुसार काटकर खुले मुंह वाले बैग के आकार में सिल दिया जाता है। उद्योग को बेची दो उत्पादों की तकनीक संस्थान ने मोटी ऊन से तैयार रजाई और नर्सरी पौध बैग बनाने की तकनीक महाराष्ट्र की एक निजी फर्म को गैर-एकाधिकार लाइसेंस (Non-exclusive License) के माध्यम से हस्तांतरित कर दी है। अब यह फर्म बड़े स्तर पर इन उत्पादोंं का उत्पादन कर बाजार में उतारेगी। इससे मोटी ऊन की मांग बढ़ेगी। मोटी ऊन से तैयार किए जाने वाले उत्पादोंं में आवश्यकता के अनुसार लगभग 20 से 30 प्रतिशत प्राकृतिक रबर लेटैक्स का उपयोग किया जाता है। इससे ऊनी रेशों की मजबूती बढ़ती है और तैयार उत्पाद अधिक टिकाऊ बनते हैं। टेक्सटाइल तकनीकों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने कहा- डॉ. सिको जोस की यह सफलता पूरे संस्थान के लिए गौरव का विषय है। यह संस्थान वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग पिछले कई वर्षों से ऊन अनुसंधान और आधुनिक टेक्सटाइल तकनीकों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। खासकर मोटी ऊन को काफी उपयोगी बना दिया है। मोटी ऊन चुनौती लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बनी संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. अमरसिंह मीना ने बताया- केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान का अंतरराष्ट्रीय पहचान पर उत्कृष्ट प्रदर्शन का लंबा इतिहास रहा है। इससे पहले भी संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर, डॉ. सिको जोस तथा कई अन्य वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट रिसर्च कार्यों के लिए विश्व की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक रैंकिंग में स्थान मिल चुका है। अविकानगर संस्थान केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कृषि एवं ऊन अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है। भेड़ पालकों द्वार मोटी ऊन को व्यर्थ मानकर फेंकते है, यह अब उपयोगी बनती जा रही है। 30 रुपए से 300 रुपए किलो बिकती है ऊन ऊन तीन किस्म की होती है। मोटी, मध्यम और सबसे बारीक। अभी सबसे बारीक (सबसे कम मोटी) ऊन करीब 300 रुपए किलो, मध्यम मोटाई की उन करीब 150 रुपए प्रतिकिलो और सबसे मोटी ऊन 30 से 40 रुपए मिलती है। लागत और बाजार तक पहुंचने का सफर डॉ. सिको जोस ने बताया- मोटे ऊनी रेशों का खुरदरापन, कड़ापन और चुभने वाला स्वभाव इनके उपयोग में सबसे बड़ी बाधा है। यही कारण है कि इनका कपड़ा और अन्य प्रीमियम उपभोक्ता उत्पादों के निर्माण में सीधे तौर पर उपयोग सीमित रहा है। उन्होंने बताया कि प्रसंस्करण के दौरान मोटी ऊन के साथ कई तकनीकी चुनौतियां सामने आती हैं। इनमें रेशों की कम एकजुटता (Cohesion), अत्यधिक रेशों का झड़ना और चिकनी सतह तैयार करने में कठिनाई होती है। इसके अलावा, उपभोक्ता भी मोटी ऊन से बने उत्पादोंं को महीन ऊन के उत्पादोंं की तुलना में कम गुणवत्ता वाला मानते हैं। डॉ. जोस के अनुसार, मोटी ऊन से बने उत्पादोंं के विकास और व्यावसायीकरण में तकनीकी, आर्थिक और बाजार से जुड़ी अनेक चुनौतियां रही हैं। मोटी ऊन के गुणों और उसके उपयोग के फायदों के बारे में लोगों में पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण भी इसकी मांग सीमित रही। वहीं, कम कीमत वाले सिंथेटिक रेशों और आयातित उत्पादोंं से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ी चुनौती रही, क्योंकि वे कम लागत में समान स्पर्श का अनुभव प्रदान करते हैं।

जेरोधा के फाउंडर ने साझा किया उम्मीद का फॉर्मूला:परिणाम चाहे जो भी हो, आप कभी अगला कदम उठाना बंद न करें

मेरे लिए उम्मीद का मतलब सिर्फ यह सोच लेना नहीं है कि सब ठीक हो जाएगा। उम्मीद तब ताकत बनती है, जब उसके साथ किसी समस्या को हल करने का स्पष्ट उद्देश्य जुड़ा हो। अगर आप उस उद्देश्य पर टिके रहते हैं और जल्दी हार नहीं मानते, तो सही समय आने पर किस्मत भी आपका साथ देती है। अगर कोई उद्यमी कहता है कि उसे कभी डर नहीं लगा, तो या तो उसने बहुत कठिन काम नहीं किया या फिर वह सच नहीं बोल रहा। जेरोधा के शुरुआती वर्षों में हमारे पास न ज्यादा पैसा था, न कोई बड़ा नाम। हर दिन अनिश्चितता थी। मैंने एक बात सीखी कि जिंदगी और बिजनेस में कई बार सबसे बड़ा फायदा उसी को मिलता है, जो सबसे लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता रखता है। सही समय और सही जगह पर होना जरूरी है, लेकिन उसके लिए पहले आपको खेल में बने रहना पड़ता है। इसलिए मैंने हमेशा कोशिश की कि खर्च कम रहे, अपनी पहचान न खोऊं और दूसरों की दौड़ देखकर अपनी दिशा न बदलूं। मेरे लिए उम्मीद का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा। उम्मीद का मतलब है कि परिणाम चाहे जो भी हो, आप कभी भी अगला कदम उठाना बंद न करें। यही आपको सफल बनाएगा। भारत के भविष्य से मुझे उम्मीद है मुझे सबसे ज्यादा उम्मीद उन संस्थापकों से मिलती है, जिनसे मैं रैनमैटर के जरिए मिलता हूं। वे जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, बचत, निवेश और डीप-टेक जैसी वास्तविक समस्याओं पर काम कर रहे हैं। लेकिन मेरी बड़ी चिंता भारत का रोजगार है। हमारे पास सबसे बड़ी युवा आबादी है। अगर उनके लिए पर्याप्त और सार्थक रोजगार नहीं बना पाए, तो अवसर चुनौती बन सकता है। उद्यमिता सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचनी चाहिए। मैं युवाओं से सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अपनी तुलना किसी और की टाइमलाइन से मत कीजिए। एआई को लेकर चिंता वास्तविक है, लेकिन सोशल मीडिया इस डर को कई गुना बढ़ा देता है। एआई नौकरियों का स्वरूप बदलेगा, लेकिन भारत की सबसे बड़ी चुनौती आज भी पर्याप्त रोजगार पैदा करना है। इसलिए मैं अपनी ऊर्जा चिंता करने में नहीं, बल्कि रोज कुछ नया सीखने में लगाऊंगा। लगातार अपस्किलिंग, जिज्ञासा और सीखते रहने की आदत ही भविष्य में सबसे ज्यादा काम आएगी। उम्मीद के पोर्टफोलियो में ये 5 चीजें जरूरी हैं… मैं सलाह देने से हमेशा बचता हूं, क्योंकि बिजनेस में मेरी सफलता में किस्मत की भी भूमिका रही है, लेकिन उम्मीद के पोर्टफोलियो में ये पांच चीजें जरूर होनी चाहिए। 1. भरोसा। भारत पर भरोसा, क्योंकि मुझे लगता है कि अगले कुछ दशकों में दुनिया के सबसे बड़े अवसर यहीं बनने वाले हैं।
2. स्किल। जिससे आप हर दिन एक फीसदी बेहतर बन सकें।
3. स्वास्थ्य। अगर स्वास्थ्य अच्छा नहीं है, तो उपलब्धियों का महत्व बहुत कम रह जाता है।
4. रिश्ते। जो लोग दिल से आपकी सफलता चाहते हैं, वे आपकी सबसे मूल्यवान लेकिन अक्सर अनदेखी संपत्ति हैं। रिश्तों को संभालकर रखना जरूरी है।
5. धैर्य। बाजार हो, बिजनेस हो या जिंदगी, सबसे ज्यादा इनाम आखिरकार धैर्य रखने वालों को मिलता है। स्ट्रोक जिंदगी का सबसे बड़ा सबक था 2024 में स्ट्रोक आने के बाद मैंने बहुत करीब से समझा कि जिंदगी में वास्तव में क्या मायने रखता है। बिजनेस चलता रहता है। टीम अपना काम संभाल लेती है। आखिर में आपके पास आपका स्वास्थ्य, आपका परिवार और आपका अपना जीवन ही बचता है। अच्छी कंपनियां भरोसे, धैर्य और समस्याओं को हल करने से बनती हैं हमने रैनमैटर फाउंडेशन शुरू ​किया है। इसके जरिए नए स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं। जब मैं रैनमैटर के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश करता हूं तो सबसे पहले यह नहीं देखता कि कंपनी कितनी तेजी से बढ़ सकती है या उसकी वैल्यूएशन क्या होगी। मैं यह देखता हूं कि संस्थापक जिस समस्या पर काम कर रहा है, क्या वह सच में उसके प्रति जुनूनी है या नहीं। मेरे अनुभव में वही संस्थापक लंबे समय तक टिकते हैं जो स्टार्टअप बनाने के लिए नहीं, बल्कि किसी असली समस्या का समाधान खोजने के लिए काम करते हैं। आगे वही बढ़ता है जिसे अपने काम से प्यार हो। मैंने यह भी देखा है कि सबसे मजबूत कंपनियां अक्सर सबसे शांत संस्थापकों ने बनाई हैं। वे कम बोलते हैं और ज्यादा काम करते हैं। रैनमैटर में हमने पिछले कुछ वर्षों में जलवायु, स्वास्थ्य, निवेश और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में 160 से ज्यादा स्टार्टअप्स का साथ दिया है। हमारे सीटीओ और सह-संस्थापक कैलाश लंबे समय से जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे हैं। उनके साथ काम करते हुए मुझे महसूस हुआ कि खेती, पानी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सही लोगों को धैर्य के साथ पूंजी मिले तो वे बड़ा बदलाव ला सकते हैं। विदेशी बाजार जादुई समाधान नहीं है जेरोधा के जरिए हमने गिफ्ट सिटी के माध्यम से भारतीय निवेशकों के लिए अमेरिकी शेयरों में निवेश का रास्ता खोला है। आने वाले समय में युवा अलग-अलग देशों और अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश के बारे में सोचेंगे। हालांकि विदेशी बाजार कोई जादुई समाधान नहीं है। वहां भी जोखिम हैं। करेंसी का उतार-चढ़ाव, टैक्स और बाजार की वैल्यूएशन जैसी बातें समझना जरूरी है। एआई निवेश को भी बदलने वाला है हमारे साथी कैलाश का भी मानना है कि भविष्य में निवेशक अपनी पसंद के किसी भी एआई इंटरफेस से ऑर्डर दे सकेंगे और ब्रोकर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मजबूत बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना होगी। एआई आपके लिए डेटा का विश्लेषण कर सकता है, लेकिन यह तय नहीं कर सकता कि आपकी जोखिम उठाने की क्षमता क्या है, आपके जीवन के लक्ष्य क्या हैं और आपको कितना निवेश करना चाहिए। यह फैसला हमेशा इंसान को ही लेना होगा। आखिरकार, मैंने हमेशा यही सीखा है कि अच्छी कंपनियां सिर्फ टेक्नोलॉजी से नहीं बनतीं। वे भरोसे, धैर्य और लगातार सही समस्याओं को हल करने की कोशिश से बनती हैं। वही सिद्धांत स्टार्टअप पर भी लागू होता है और निवेश पर भी।

डिलीवरी एजेंट जबरन घर में घुसा, प्राइवेट पार्ट दिखाए:बेंगलुरु की महिला का आरोप- मना करने के बावजूद वॉशरूम गया, अश्लील हरकत की; आरोपी गिरफ्तार

बेंगलुरु में फ्लिपकार्ट के एक डिलीवरी एजेंट को महिला के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान विजय मल्लिकार्जुन कामत के रूप में हुई है। महिला ने बताया कि डिलीवरी एजेंट पार्सल देने उसके घर आया था। महिला ने कहा- मैं घर में अकेली थी। डिलीवरी एजेंट ने पार्सल देने के बाद वॉशरूम इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी, लेकिन मैंने उसे कई बार मना किया। मैंने उससे कहा कि वह किसी पड़ोसी से मदद ले सकता है। इसके बावजूद आरोपी जूते-चप्पल उतारकर जबरन फ्लैट के अंदर घुस गया। महिला का आरोप है कि वॉशरूम से बाहर आने के बाद आरोपी ने अपने प्राइवेट पार्ट दिखाए और अश्लील हरकत की। महिला ने वॉशरूम से निकलते समय डिलीवरी एजेंट का वीडियो भी बनाया जिसमें उसकी पैंट की जिप खुली दिखाई दी। घटना के दो विजुअल्स- महिला बोली- अपने ही घर में अपमानित महसूस हुआ, सदमे में थी बेंगलुरु में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले 1. अप्रैल 2026: डिलीवरी एजेंट पर मारपीट और यौन उत्पीड़न का आरोप बेंगलुरु के तिरुमलाशेट्टीहल्ली इलाके में 28 साल की महिला ने शैडोफैक्स कंपनी के डिलीवरी एजेंट पर मारपीट, यौन उत्पीड़न और धमकी देने का आरोप लगाया था। महिला का आरोप था कि अपार्टमेंट के गेट पर हुए विवाद के दौरान एजेंट ने उसके साथ मारपीट की, अश्लील हरकत की और कपड़े खींचने की कोशिश की। घटना सीसीटीवी में कैद हुई थी। 2. अक्टूबर 2025: ब्राजीलियन मॉडल से छेड़छाड़ का मामला बेंगलुरु के आरटी नगर में ब्लिंकिट के एक डिलीवरी एजेंट को 21 साल की ब्राजीलियन मॉडल से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि ऑर्डर देने के दौरान एजेंट ने उसके साथ गलत तरीके से छूकर अश्लील हरकत की। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। ——————— यह खबर भी पढ़ें… बेंगलुरु में बॉयफ्रेंड को कुर्सी से बांधकर जिंदा जलाया:युवती ने सरप्राइज का झांसा देकर आंखों पर पट्टी, हाथ-पैर बांधे; आग लगाकर वीडियो भी बनाया कर्नाटक के बेंगलुरु में पुलिस ने एक युवती को बॉयफ्रेंड की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, युवती ने सरप्राइज देने का झांसा देकर युवक की आंखों पर पट्टी बांधी। फिर कुर्सी पर बैठाकर रस्सी से हाथ-पैर बांधे और जिंदा जला दिया। पूरी खबर पढ़ें…

बॉयफ्रेंड ने किया नाबालिग गर्लफ्रेंड को किडनैप:लुधियाना में बहन को रोते हुए वीडियो भेजा, बोली- मुझे ले जाओ; इंस्टाग्राम से शुरू हुई लव स्टोरी

लुधियाना में बॉयफ्रेंड ने नाबालिग गर्लफ्रेंड को किडनैप कर लिया है। उसने गर्लफ्रेंड को अपनी कैद में रखा है। नाबालिग बार-बार अपनी बहन को वॉट्सएप के जरिए वीडियो और ऑडियोमैसेज भेज रही है। लड़की ने अपनी बहन को जो वीडियो भेजा है, उसमें वह जोर-जोर से रो रही है, हालांकि उसमें वह कुछ बोल नहीं रही है। इसके अलावा नाबालिग ने वॉट्सएप पर वॉइस मैसेज भेजे हैं, जिसमें वह कह रही है कि “जीजा जी आपने मुझे अपनी बेटी माना है, एक बार मुझसे बात कर लो।” बॉयफ्रेंड इतना शातिर है कि वह जब भी मैसेज करवा रहा है, सिर्फ वॉट्सऐप पर वॉइस मैसेज कर रहा है ताकि पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस न कर सके। पुलिस ने आरोपी बॉयफ्रेंड पर केस दर्ज कर लिया है। दोनों की दोस्ती इंस्टाग्राम पर हुई थी। बॉयफ्रेंड और नाबालिग गर्लफ्रेंड की लव स्टोरी… युवक ने नाबालिगा को कैसे किडनैप किया, जानिए… आरोपी को पकड़ने के लिए लगाया ट्रैप
थाना जमालपुर जांच अधिकारी पलविंदर पाल का कहना है कि आरोपी शातिर है। वह नॉर्मल कॉल के जरिए बात नहीं कर रहा है, बल्कि लगातार वॉट्सएप के जरिए वॉइस मैसेज भेज रहा है। उन्होंने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए साइबर सेल की मदद से जाल बिछाया गया है। आरोपी के खिलाफ नाबालिग के अपहरण (BNS 137-2) और गलत इरादे से फुसलाने (BNS 96) का पर्चा दर्ज कर दिया है। चूंकि लड़की नाबालिग है, इसलिए उसकी सहमति कानूनन मान्य नहीं है। पुलिस जल्द ही आरोपी को पकड़ लेगी।

एयरफोर्स जवान का हाथ तोड़ा, कुल्हाड़ी से सिर फोड़ा:सगे भतीजों और उसके साथियों ने हमला बोला, छोटे भाई को कैंपर गाड़ी से टक्कर मारी

जमीन पर अवैध कब्जे और तारबंदी हटाने को लेकर सगे भतीजों ने एयर फोर्स जवान भागाराम (47) और उनके छोटे भाई ओम प्रकाश (39) पर हमला बोल दिया। दोनों भाइयों को कुल्हाड़ी, सरियों और लाठियों से पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। यह घटना जोधपुर के विवेक विहार थाना क्षेत्र के गुढ़ा विश्नोइयां (मंगल नगर) की है। गंभीर रूप से घायल एयरफोर्स जवान भागाराम को मिलिट्री हॉस्पिटल (MH) में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। इस मामले में पुलिस ने 7 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। रविवार दोपहर तक किसी की गिरफ्तारी भी नहीं हुई थी। तारबंदी उखाड़ने का वीडियो बनाया तो चढ़ा दी कैंपर गाड़ी ओमप्रकाश (39) पुत्र घेवरराम विश्नोई ने शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे विवेक विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि यह विवाद उनके सगे भाई रामसिंह के बेटों से चल रहा है। 10 जुलाई की सुबह करीब 10:30 बजे आरोपी जेसीबी (JCB) और बजरी से भरा डम्पर लेकर जबरन उनके खेत में घुसे और वहां की गई तारबंदी को उखाड़ने लगे। जब ओमप्रकाश ने इस अवैध कब्जे का अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया, तो उनका सगा भतीजा अशोक भड़क गया। अशोक ने जान से मारने की नीयत से अपनी सफेद रंग की कैंपर गाड़ी ओमप्रकाश के पीछे दौड़ा दी और जोरदार टक्कर मारकर उन्हें जमीन पर गिरा दिया। ओमप्रकाश के गिरते ही आरोपी राकेश, मनीष और महेंद्र ने लोहे के पाइप और लाठियों से उनके सिर और शरीर पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। बीच-बचाव करने आए एयरफोर्स जवान के सिर पर मारी कुल्हाड़ी ओमप्रकाश की चीख-पुकार सुनकर उनकी पत्नी हेमा और बड़े भाई (एयरफोर्स जवान) भागाराम दौड़कर मौके पर पहुंचे। भागाराम ने जब अपने भाई को बचाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन पर भी रहम नहीं खाया। आरोपी पिंटू और उनके साथ आई एक महिला ने जान से मारने की नीयत से भागाराम के सिर पर कुल्हाड़ी से सीधा वार कर दिया। इसी बीच महेंद्र ने लाठी और अशोक ने लोहे की रॉड से हमला बोल दिया। सिर पर होने वाले वार को रोकने के लिए जब जवान ने अपना हाथ आगे किया, तो रॉड के भारी प्रहार से उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया। आरोपी दोनों भाइयों को मरा हुआ समझकर, उनका मोबाइल लेकर मौके से फरार हो गए। पुलिस पर गंभीर आरोप इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार ने विवेक विहार थाना पुलिस की मिलीभगत और ढिलाई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ओमप्रकाश ने बताया कि हमलावर (भतीजे अशोक व मनीष) आदतन अपराधी प्रवृत्ति के हैं और उनकी ऊंची राजनीतिक जान-पहचान है। इस घटना से पहले भी पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए। अस्पताल में दे रहे धमकी पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अब जब जवान अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है, तब उन्हें थाने के भीतर से ही फोन कर धमकाया जा रहा है। आरोपियों के रसूखदार मददगार कह रहे हैं कि राजीनामा कर लो, नहीं तो तुम्हारे खिलाफ महिलाओं से छेड़छाड़ का झूठा मामला दर्ज करवाकर पूरी जिंदगी जेल में सड़वा देंगे। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेक विहार थाना पुलिस ने आरोपी अशोक, मनीष, पिंटू, महेंद्र और राकेश उर्फ विकास सहित 2 महिलाओं के खिलाफ मारपीट करने, तोड़फोड़ और दंगे करने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच एएसआई (ASI) भरतलाल को सौंपी गई है। घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। पिछले साल भी हुआ था विवाद जांच अधिकारी एएसआई भरत लाल मीणा के मुताबिक, जिस जमीन को लेकर यह खूनी संघर्ष हुआ, उस पर आरोपी पक्ष (अशोक) ने कोर्ट से यथास्थिति (स्टे) ले रखा है। कोर्ट का स्टे होने के बावजूद दूसरा पक्ष (ओमप्रकाश, जिसने थाने में रिपोर्ट दी है) उस जमीन पर गया और उसने वहां खेती करने की कोशिश की। इसी बात को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। उनके बीच लाठी-डंडे चले। जानलेवा हमला हो गया। यह जमीन का विवाद नया नहीं है। पिछले साल भी इस जमीन पर दोनों पक्षों के बीच भारी विवाद हुआ था। पुलिस की सफाई- आरोप निराधार पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए राजनीतिक दबाव और रसूखदारों को बचाने के आरोपों पर पुलिस ने सफाई दी है। जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुलिस निष्पक्षता से काम कर रही है। बिना देर किए मुकदमा दर्ज किया ओमप्रकाश की ओर से शनिवार (11 जुलाई) को थाने में लिखित रिपोर्ट दी गई थी। पुलिस ने बिना किसी देरी के रिपोर्ट के आधार पर तुरंत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने बताया कि मामला दर्ज होते ही 11 जुलाई को ही घायलों का मेडिकल (MLC) करवाने के लिए अस्पताल में तहरीर भेज दी गई थी। आज (12 जुलाई) पुलिस टीम ने घटना स्थल का मुआयना किया है और सबूत जुटाए हैं। एएसआई ने साफ कहा कि पुलिस पर अपराधियों से मिलीभगत के जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। पुलिस का किसी भी पक्ष से कोई व्यक्तिगत लेना-देना नहीं है, कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है। ओमप्रकाश को मिली छुट्टी, जवान का इलाज जारी पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के दिन दोनों भाइयों को अस्पताल ले जाया गया था। इनमें से छोटे भाई ओमप्रकाश को प्राथमिक उपचार के बाद उसी दिन (10 जुलाई) अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। सिर में कुल्हाड़ी की गंभीर चोट और हाथ टूटने के कारण एयरफोर्स के जवान भागाराम का सैन्य अस्पताल (मिलिट्री हॉस्पिटल) में अभी भी इलाज चल रहा है। —– यह खबर भी पढ़िए… 70 साल की मां को बेटे ने मार डाला:पलंग पर सोई बुजुर्ग पर लाठियों से वार किए; भाई को देख घर से भागा बीकानेर में बेटे ने लाठी से पीट-पीटकर अपनी 70 साल की बुजुर्ग मां को मार डाला। इसके बाद रात को अपनी पत्नी को जगा कर बताया कि मां मर चुकी है। (पूरी खबर पढ़ें) बारात से लौट रहे दो पक्ष भिड़े, 5 घायल; एक जोधपुर रेफर; जमीनी विवाद में चली लाठियां, पत्थर फेंके फलोदी थाना क्षेत्र के लोर्डिया गांव के पास बारात से लौट रहे दो पक्षों में जमीनी विवाद को लेकर झड़प हो गई। इस दौरान तीन केंपर गाड़ियों में सवार होकर आए लोगों ने एक पक्ष पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और पत्थरबाजी भी की। झगड़े में 5 लोग घायल हो गए। हमलावर मौके से फरार हो गए। (पूरी खबर पढ़ें)