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युवक पर कुल्हाड़ी से हमला, सिर में धंसी:कोटा में 3 घंटे चला ऑपरेशन; डॉक्टर बोले- हालत नाजुक, अगले 8 दिन महत्वपूर्ण

बारां जिले में रात में सो रहे युवक पर बदमाश ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। कुल्हाड़ी युवक के सिर में धंस गई। युवक के चिल्लाने पर पास में सो रही पत्नी उठी तो आसपास कोई नहीं था। युवक के सिर में कुल्हाड़ी धंसी थी और तेजी से खून बह रहा था। आसपास के लोगों की मदद से घायल को भंवरगढ़ अस्पताल पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद बारां जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहां भी डॉक्टर कुल्हाड़ी नहीं निकाल सके। इसके बाद युवक को परिजन सुबह 5 बजे कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लाए। जहां दोपहर 3:40 बजे डॉक्टरों ने ऑपरेशन शुरू किया। करीब 3 घंटे चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टर्स की टीम ने कुल्हाड़ी निकाली। मामला भंवरगढ़ थाना क्षेत्र के आमापुरा शनिवार रात करीब दो बजे का है। डॉक्टर रिजवीस ने बताया- बारां के आमापुरा निवासी रामजीलाल (30) के सिर में कुल्हाड़ी अंदर तक धंस गई है। इससे ब्रेन को गंभीर क्षति हुई है। 3 घंटे चला ऑपरेशन, डॉक्टर बोले- 8 दिन महत्वपूर्ण अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. एस.एन. गौतम के निर्देशन में टीम ने तीन घंटे से अधिक समय तक यह जटिल ऑपरेशन किया। डॉ. कनिष्क गोयल और डॉ. अलंकार शर्मा की टीम ने मरीज के सिर में धंसी कुल्हाड़ी को सफलतापूर्वक निकाला। डॉ. गौतम ने बताया कि कुल्हाड़ी के साथ जंग और गंदगी भी दिमाग के अंदर पहुंचने से संक्रमण का गंभीर खतरा बना हुआ था। ऑपरेशन के दौरान चार यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि मरीज की सीटी स्कैन कराना, मरीज को बेहोश कर कृत्रिम सांस की ट्यूब डालना और गिरते ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना सबसे बड़ी चुनौतियां रहीं। डॉक्टर बोले-अगले 5 से 8 दिन बेहद महत्वपूर्ण मरीज की ट्रेकियोस्टॉमी भी करनी पड़ी। इसमें मरीज की गर्दन के सामने और सांस नली में छोटा सा छेद बनाया जाता है। छेद में विशेष ट्यूब (ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब) डाली जाती है, ताकि नाक या मुंह के बजाय इस ट्यूब से फेफड़ों तक हवा पहुंचाई जा सके। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया है। उसकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। अगले 5 से 8 दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पत्नी ने कहा- हमला कर भागा बदमाश घायल रामजीलाल की पत्नी ममता ने बताया- घटना रात करीब 2 बजे हुई है। उस समय मैं, पति और मेरी बेटी घर में सो रहे थे। तभी एक अज्ञात व्यक्ति घर में घुसा और पति रामजीलाल के सिर पर कुल्हाड़ी से हमला कर फरार हो गया। हमले के बाद पति के चिल्लाने पर परिवार उठा और चीख-पुकार मच गई। इसके बाद आसपास के लोगों की मदद से पति को अस्पताल लेकर गई। ममता ने कहा- मेरे पति का किसी से कोई झगड़ा नहीं है। वह ट्रैक्टर चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आखिर हमला किसने और क्यों किया, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल रामजीलाल का इलाज कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। परिजनों के अनुसार- सुबह करीब 5 बजे कोटा के अस्पताल पहुंचने के बाद भी सिर में धंसी कुल्हाड़ी को अभी तक नहीं निकाला जा सका है। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस टीम का सर्च अभियान भंवरगढ़ थाना अधिकारी गोपीलाल आर्या ने बताया- देर रात करीब 2:30 बजे घटना की सूचना मिलने पर पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। घायल को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक इलाज के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए पहले बारां और फिर कोटा रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि रात में ही पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में लगा दी गई थीं और आसपास के क्षेत्रों में लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। घायल के बयान दर्ज करने के लिए एसआई को कोटा भेजा गया है। जल्द ही हमलावर को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

स्पोर्ट्स अपडेट:हर्षित चोट के कारण इंग्लैंड वनडे और वरुण जिम्बाब्वे टी-20 सीरीज से बाहर, प्रिंस यादव और रवि बिश्नोई को मौका

भारतीय तेज गेंदबाज हर्षित राणा और स्पिनर वरुण चक्रवर्ती चोट के कारण आगामी सीरीज से बाहर हो गए हैं। हर्षित इंग्लैंड वनडे सीरीज का हिस्सा थे, जबकि वरुण को जिमबाब्वे टी-20 के लिए चुना गया था। हर्षित की जगह प्रिंस यादव वनडे स्क्वाड का हिस्सा होंगे। वहीं वरुण की जगह रवि बिश्नोई को मौका दिया गया है। दोनों चोटिल खिलाड़ी इलाज के लिए बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) जाएंगे। —————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… पहले वनडे- वेस्टइंडीज ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराया:19 साल के विटैल लॉयस को डेब्यू मैच में 3 विकेट; होप-कार्टी में शतकीय साझेदारी वेस्टइंडीज ने पहले वनडे में न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराया। टीम 5 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गई है। गयाना में शनिवार को कैरेबियाई टीम ने 268 रन का लक्ष्य 48.5 ओवर में 3 विकेट पर हासिल किया। केसी कर्टी ने 95 रन बनाए, जबकि कप्तान शाई होप 54 रन बनाकर नाबाद लौटे। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 131 रन की मैच विनिंग पार्टनरशिप की। पूरी खबर पढ़ें…

मां दुनिया में नहीं, बकरी का दूध पी रहा नवजात:परिजन बोले- वह दर्द से तड़प रही थी, नॉर्मल डिलीवरी करवाना चाहते थे डॉक्टर

बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत के बाद राज्य सरकार से आई टीम अस्पताल में जांच में जुटी है। 3 प्रसूताओं के परिजन उन्हें ले गए। 1 प्रसूता का लक्ष्मी का परिवार सामने आया है, परिजनों का आरोप है कि हीमोग्लोबिन कम आने के बाद भी डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी करवाने की बात कही। इसके बाद खून चढ़ाया तब भी लक्ष्मी दर्द से तड़प रही थी।
इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। पीछे बचा लक्ष्मी का नवजात बेटा बिलखता है तो परिजनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। कोई उपाय नहीं होने पर उसे बकरी का दूध पिलाया जा रहा है।
मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन का कहना है- पांच डॉक्टरों की टीम गठित की है। टीम को अति शीघ्र जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। पढ़िए बांसवाड़ा से प्रसूता लक्ष्मी की मौत की ये रिपोर्ट… 1. 8 जुलाई को कराया था भर्ती, हीमोग्लोबिन 7.40 ग्राम आया परिजनों के अनुसार लक्ष्मी अपने पीहर में थी। उसे 8 जुलाई को दोपहर 2 बजे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शाम 5 बजे आई ब्लड रिपोर्ट में उसका हीमोग्लोबिन 7.40 ग्राम आया था। परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद हॉस्पिटल स्टाफ ने उन्हें बताया कि डिलीवरी नॉर्मल हो जाएगी। परिजनों का कहना है कि रात करीब 12 बजे स्टाफ ने उन्हें बताया कि महिला को तुरंत खून चढ़ाने की जरूरत है। इसके बाद परिवार ने जनामेड़ी गांव से अपने दो रिश्तेदारों को बुलाया, लेकिन कम उम्र होने के कारण वे ब्लड डोनेट नहीं कर पाए। इसके बाद रात 3 बजे एक अन्य रिश्तेदार युवक को बुलाया गया और रिप्लेसमेंट में ब्लड देने के बाद लक्ष्मी को पहली यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। मृतका के ससुर पप्पू लाल चरपोटा ने बताया कि 9 जुलाई की सुबह डॉक्टरों ने एक और यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने के लिए कहा, जिसके बाद परिजनों ने एक परिचित को बुलाकर खून की व्यवस्था की। सुबह 11 बजे महिला का सिजेरियन किया गया। इसके बाद सुबह 11:30 बजे उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। 2. दूसरी यूनिट ब्लड चढ़ाने के दौरान बिगड़ी तबीयत परिजनों के मुताबिक दोपहर 12 बजे जनरल वार्ड में ही लक्ष्मी को दूसरी यूनिट ब्लड चढ़ाया जाने लगा। उनका आरोप है कि यह ब्लड बिना किसी जरूरी री-चेक या रिपोर्ट के सीधे चढ़ा दिया गया। खून चढ़ने के दौरान ही लक्ष्मी की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे तेजी से पसीना आने लगा और घबराहट होने लगी। परिजनों के अनुसार वह दर्द से तड़पने लगी थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को महिला की बिगड़ती हालत के बारे में बताया। उन्होंने दर्द कम करने के लिए इंजेक्शन लगाने की भी मांग की। आरोप है कि स्टाफ ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और कहा कि ऑपरेशन के बाद ऐसा होता है तथा ब्लड की बोतल पूरी चढ़ने तक दूसरी दवा नहीं दी जा सकती। 3. ब्लड रिएक्शन और वाइटल्स मॉनिटर नहीं करने का आरोप परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला के शरीर में ब्लड रिएक्शन हो रहा था। उनका कहना है कि ब्लड चढ़ाने से पहले, ब्लड चढ़ने के दौरान और उसके बाद भी बीपी, पल्स समेत अन्य वाइटल्स की सही तरीके से निगरानी नहीं की गई। परिजनों के अनुसार यदि समय रहते ब्लड रोककर इलाज शुरू किया जाता तो लक्ष्मी की जान बचाई जा सकती थी। रात में हालत ज्यादा बिगड़ी, आईसीयू में हुई मौत परिजनों के अनुसार दिनभर दर्द से जूझने के बाद रात 11 बजे लक्ष्मी की हालत फिर ज्यादा बिगड़ गई और वह दोबारा तड़पने लगी। इसके बाद उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन रात करीब डेढ़ बजे उसकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि उन्होंने हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से मांगी गई हर व्यवस्था समय पर पूरी की और जरूरत के मुताबिक खून का इंतजाम भी किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी बहू को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हॉस्पिटल के PMO ड़ॉ. राजीव गौतम ने बताया कि पांच डॉक्टरों की टीम गठित की है। जिसमें एनेस्थीसिया ड़ॉ. ममता डामोर, ज्यूरिस्ट सुनील मईड़ा, सर्जन वारुलाल डामोर, फिजिशियन ड़ॉ. मयंक शर्मा, गायनिक कीर्तिश जैन शामिल हैं। टीम को अति शीघ्र जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। नवजात को पिलाया जा रहा बकरी का दूध लक्ष्मी अपने पीछे एक नवजात बच्चे को छोड़ गई है। परिवार के लोगों का कहना है कि जिस बच्चे को इस समय अपनी मां का दूध मिलना चाहिए था, वह अब मां के बिना है। घर में जब बच्चा भूख से रोता है तो परिवार के लोगों की आंखें भर आती हैं। मां के नहीं रहने के कारण फिलहाल उसकी भूख मिटाने के लिए उसे बकरी का दूध पिलाया जा रहा है।

संडे प्रोफाइल : मरीन ली पेन:फ्रांस में बढ़ते दक्षिणपंथ की सबसे बड़ी आवाज हैं ली पेन

फ्रांस की प्रमुख विपक्षी पार्टी नेशनल रैली की नेता मरीन ली पेन अदालत के फैसले के बाद फिर राजनीतिक वापसी की उम्मीदों को लेकर चर्चा में हैं। देश में दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव से उनके समर्थकों में नया उत्साह दिखाई दे रहा है। फ्रांस की प्रमुख विपक्षी पार्टी नेशनल रैली की नेता मरीन ली पेन का राजनीतिक सफर संघर्ष, विवाद और वापसी की कोशिशों से भरा रहा है। तीन बार राष्ट्रपति चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने 2027 के चुनाव में उतरने का इरादा जताया है। हाल ही में अदालत के फैसले ने उनके राजनीतिक भविष्य को फिर चर्चा में ला दिया है। पेरिस की एक अदालत ने 2024 में यूरोपीय संघ के फंड के दुरुपयोग मामले में ली पेन को दोषी ठहराते हुए उनके चुनाव लड़ने पर पांच साल की रोक लगाई थी। इसके बाद उनकी पार्टी ने 30 वर्षीय जोर्डन बारडेला को संभावित चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन 7 जुलाई को अपील कोर्ट ने प्रतिबंध की अवधि कम कर दी, जिसके बाद ली पेन ने 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया। 57 वर्षीय ली पेन इससे पहले 2012, 2017 और 2022 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुकी हैं। 2017 और 2022 में उन्हें इमैनुअल मैक्रों से हार मिली थी। हालांकि हर चुनाव में उनका वोट प्रतिशत बढ़ा है। ली पेन को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता जीन मैरी ली पेन ने नेशनल फ्रंट पार्टी बनाई थी, जिसकी पहचान प्रवासियों के विरोध और कट्टर दक्षिणपंथी विचारों से जुड़ी रही। मरीन ने पार्टी की छवि बदलने के लिए इसका नाम नेशनल रैली रखा था। वे अब भी इमिग्रेशन नियंत्रण, फ्रांसीसी नागरिकों को नौकरियों में प्राथमिकता और यूरोपीय संघ की नीतियों की आलोचक हैं। उन्होंने युवाओं के लिए टैक्स राहत, न्यूनतम वेतन बढ़ाने और ऊर्जा पर करों में कटौती जैसे वादे किए हैं। वे यूरोपीय संघ से दूरी, रूस के साथ बेहतर संबंध और फ्रांस की संप्रभुता बढ़ाने की समर्थक रही हैं। उनकी राजनीति को अक्सर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट नीति से जोड़ा जाता है। कानून की पढ़ाई करने वाली ली पेन ने 1998 में राजनीति में प्रवेश किया था। आज वे फ्रांस में बढ़ते दक्षिणपंथी रुझान की सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। हालांकि अदालत की निगरानी के बीच 2027 की राह उनके लिए आसान नहीं होगी।

ब्रिटेन में भीषण गर्मी:AC वाले दफ्तरों में स्टाफ की मौजूदगी 75% तक बढ़ी, AC ऑफिस की भी डिमांड बढ़ी

ब्रिटेन में साल की तीसरी भीषण गर्मी के बीच कर्मचारी घर की उमस में काम करने के बजाय एयर-कंडीशन्ड दफ्तरों का रुख कर रहे हैं। ब्रिटेन के कई हिस्सों में तापमान 40° डिग्री के पार चला गया है। पारंपरिक ब्रिटिश घर गर्मी को रोकने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं, जिसके कारण लोग ‘वर्क फ्रॉम होम’ के बजाय एसी लगे दफ्तरों में जाकर काम करना पसंद कर रहे हैं। दफ्तरों में उपस्थिति कोविड के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। लंदन में कंपनियों को ऑफिस स्पेस दिलाने वाली ‘एडॉप्ट वर्कस्पेस’ ने भी कहा कि गर्म मौसम में उनके साथ जुड़े कई सर्विस प्रोवाइडर्स के यहां एसी ऑफिस की डिमांड दोहरे अंकों में बढ़ी है। गौरतलब है कि लंदन में प्रदूषण रोकने के लिए स्थानीय काउंसिलों ने घरों में एसी न लगाने और लगे हुए एसी हटाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि एसी के बजाय पंखे चलाएं और खिड़की-दरवाजे खोलकर रखें। तीन साल में एसी वाले घरों की संख्या दोगुनी ब्रिटेन में एयर कंडीशनिंग (एसी) वाले घरों की संख्या तीन वर्षों में दोगुनी होकर 40 लाख तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घर से काम करने के चलन और बढ़ती भीषण गर्मी के कारण पोर्टेबल पंखों और एसी की मांग में सालाना 79% का उछाल आया है। इन 40 लाख घरों में से 19 लाख में स्थायी एसी इकाइयां लगी हैं। लंदन की फ्लेक्सिबल ऑफिस कंपनी ‘ऑफिस स्पेस इन टाउन’ के मुताबिक ‘रेड अलर्ट’ वाले गर्म दिनों में उनके दफ्तरों में मौजूदगी 75% बढ़ गई। कंपनी के अनुसार लोग घरों में गर्मी से परेशान हैं इसलिए ठंडी जगह चुन रहे हैं, ताकि आराम से काम कर सकें और उनकी कार्यक्षमता बनी रहे।

स्कूल के बाहर खड़ी-स्कूटी से 20 सेकंड में मोबाइल चोरी:डिक्की लॉक करना भूल गई थी छात्रा; पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी

जोधपुर में एक बदमाश स्कूल के बाहर खड़ी स्कूटी से मोबाइल चुराकर फरार हो गया। बदमाश ने महज 20 सेकंड में इस वारदात को अंजाम दिया। चोरी की यह पूरी वारदात CCTV कैमरे में कैद हो गई है, जिसका फुटेज भी सामने आया है। फुटेज में बदमाश इधर-उधर देखते हुए स्कूटी के पास आता है और फिर मोबाइल उठाकर तुरंत फरार हो जाता है। रातानाडा थाना पुलिस शिकायत मिलने के बाद आरोपी की तलाश में जुट गई है। पीड़ित भारत जैन ने रातानाडा थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 11वीं कक्षा में सेंट पैट्रिक विद्या भवन स्कूल में पढ़ती है। हमेशा की तरह शनिवार को भी वह स्कूटी से स्कूल गई थी। संभवतः वह स्कूटी की डिक्की लॉक करना भूल गई थी और डिक्की के अंदर ही उसका मोबाइल रखा हुआ था। जब वह दोपहर 11:30 बजे स्कूल की छुट्टी के बाद वापस लौटी, तो उसे डिक्की से मोबाइल गायब मिला। इसके बाद जब स्कूल के सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए, तब पता चला कि सुबह करीब 10:30 बजे एक चोर डिक्की खोलकर मोबाइल चुरा ले गया था। मैंने रातानाडा थाना पहुंचकर रिपोर्ट दी। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस फुटेज के आधार पर चोर का पता करने में जुटी हुई है। पहले देखिए, चोरी से जुड़ी 2 PHOTOS…

टॉप-10-कंपनियों में से 4 की वैल्यू ₹93 हजार करोड़ बढ़ी:HDFC बैंक टॉप गेनर, वैल्यू ₹35,808 करोड़ बढ़ी; रिलायंस-एयरटेल का मार्केट कैप भी बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते उतार-चढ़ाव के बीच देश की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से चार के मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी मार्केट कैप में कुल 92,995.48 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी में प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज HDFC बैंक और टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल सबसे आगे रहे। दूसरी ओर, बाकी छह कंपनियों को बाजार की सुस्ती के कारण नुकसान उठाना पड़ा और उनकी वैल्यूएशन में सामूहिक रूप से 49,294.13 करोड़ रुपए की गिरावट आई। चार हफ्तों की तेजी पर लगा ब्रेक पिछले कारोबारी हफ्ते में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे पिछले चार हफ्तों से चली आ रही लगातार तेजी का सिलसिला टूट गया। पूरे हफ्ते के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 194.52 अंक या 0.25% गिरकर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 63.95 अंक या 0.26% की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ। HDFC बैंक और भारती एयरटेल सहित 4 कंपनियों को फायदा टॉप-10 कंपनियों की लिस्ट में जिन चार कंपनियों ने अपने निवेशकों को फायदा पहुंचाया, उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, भारती एयरटेल और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) शामिल हैं। वैल्यूएशन के मामले में HDFC बैंक को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। बैंक का मार्केट कैप 35,808.09 करोड़ रुपए बढ़कर 12,69,454.42 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। शुक्रवार को मार्केट में रही थी तेजी शुक्रवार यानी 10 जुलाई को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 828 अंक (1.08%) की तेजी के साथ 77,569 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 244 अंकों (1.02%) की तेजी रही, ये 24,206 पर पहुंच गया था।

ट्विशा शर्मा के स्किन टिश्यू जिम बेल्ट पर मिले:दिल्ली AIIMS ने 11 पेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी

भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत मामले में दिल्ली AIIMS के मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल हुई जिम बेल्ट पर स्किन टिश्यू मिलने और बेल्ट के निशानों का गर्दन पर मिले लिगेचर मार्क से मेल खाने की बात सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली AIIMS के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 11 पेज की अंतिम रिपोर्ट 10 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी। रिपोर्ट की अनुपालन प्रति मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई है। मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को दूसरा पोस्टमॉर्टम करने के साथ घटना स्थल का निरीक्षण भी किया था। बताया जा रहा है कि हिस्टोपैथोलॉजिकल और अन्य लैब जांच में जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू की पुष्टि हुई है। साथ ही बेल्ट पर मौजूद निशानों और ट्विशा की गर्दन पर मिले लिगेचर मार्क के बीच वैज्ञानिक समानता पाई गई है। रिपोर्ट तैयार करने से पहले विशेषज्ञों ने करीब एक महीने तक विभिन्न वैज्ञानिक परीक्षण और फॉरेंसिक विश्लेषण किए। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं, CBI करेगी जांच में इस्तेमाल दिल्ली AIIMS के फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता ने रिपोर्ट की सामग्री पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उनका कहना है कि मेडिकल बोर्ड ने सभी संभावित पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर निष्कर्ष तैयार किए हैं। कोर्ट के निर्देशों के चलते रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ था दूसरा पोस्टमॉर्टम 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली थीं। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। शुरुआती जांच और पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठने के बाद परिजन ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद दिल्ली AIIMSसे दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने और बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए गए। दूसरा पोस्टमॉर्टम क्यों कराना पड़ा? पहले पोस्टमॉर्टम के दौरान कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल की गई जिम बेल्ट मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं की गई थी। इसी कारण मौत के कारण और इस्तेमाल हुई सामग्री को लेकर कई सवाल बने रहे। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली AIIMS के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया था। अब यह अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई की जांच में अहम वैज्ञानिक साक्ष्य मानी जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो रही कोर्ट में पेशी बता दें कि गिरिबाला सिंह फिलहाल भोपाल सेंट्रल जेल के महिला बंदी वार्ड में बंद हैं, जबकि समर्थ सिंह भोपाल सेंट्रल जेल के ‘बी’ खंड स्थित बिल्डिंग सेंटर में न्यायिक हिरासत में है। दोनों को कोर्ट के आदेश पर 2 जून को जेल भेजा गया था, तब से उनकी हर सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी कराई जा रही है। केस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्विशा केस- CBI ने 80kg की डमी फंदे पर लटकाई:सास-पति के सामने सीन रीक्रिएट, अबॉर्शन की सलाह देने वाली डॉक्टर से पूछताछ होगी ट्विशा केस-CBI के सवालों से घबराईं पूर्व जज गिरिबाला सिंह:एंग्जाइटी-घबराहट की शिकायत की; सीसीटीवी, बॉडी पर चोटों के निशान को लेकर जवाब तलब

फीफा वर्ल्ड कप का नया स्टार:पेरू में 559 नवजातों के नाम हालेंड के नाम पर, 91 बच्चों का पूरा नाम ही ‘अर्लिंग हालेंड’

फुटबॉल का जुनून पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है, लेकिन दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में इसका एक अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर अर्लिंग हालेंड 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप में अपने शानदार प्रदर्शन से फैंस के दिलों पर राज कर रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि पेरू में माता-पिता अपने नवजात बच्चों का नाम इस ‘गोल मशीन’ के नाम पर रख रहे हैं। पेरू की नेशनल आइडेंटिटी रजिस्ट्री के अनुसार, हाल ही में पैदा हुए सैकड़ों बच्चों का नाम इस 25 वर्षीय फुटबॉलर के नाम पर रखा गया है। 468 बच्चों का नाम या सरनेम ‘हालेंड’ रखा गया है। 91 नवजातों का पूरा नाम ‘अर्लिंग हालेंड’ दर्ज किया गया है। रजिस्ट्री के प्रवक्ता इवान टोरेस ने एक टीवी चैनल को बताया कि पेरू के लोग अक्सर फुटबॉल सितारों से प्रेरित होकर बच्चों के नाम रखते हैं। वर्ल्ड कप शुरू होने और नॉर्वे के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के बाद हालेंड के नाम पर बच्चों का नाम रखने का ग्राफ बढ़ा है। टोरेस ने कहा, ‘हालेंड अब पेरू के भी हैं।’ वर्ल्ड कप 2026 में हालेंड का जादू इस विश्व कप में नॉर्वे के इस खिलाड़ी का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने अब तक सिर्फ 4 मैचों में 7 गोल दागे हैं। ब्राजील के खिलाफ ऐतिहासिक जीत में उनके दो गोल की बदौलत नॉर्वे ने पहली बार क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। अन्य फुटबॉलर्स का भी रहा है जलवा पेरू में फुटबॉल सितारों के नाम पर बच्चों का नाम रखने का यह ट्रेंड नया नहीं है। संन्यास ले चुके ब्राजील के नेमार इसमें सबसे आगे हैं। फुटबॉलर- नाम नेमार- 33809 मेसी- 3402 यमाल- 1241 रोनाल्डो- 1185

आंध्र के अनंतपुर में खेल गरीबी से निकलने का जरिया:स्पोर्ट्स विलेज ने इंटरनेशनल खिलाड़ी दिए, 350 से ज्यादा प्लेयर्स को सरकारी नौकरियां मिलीं

आंध्र प्रदेश का अनंतपुर जिला अपनी भौगोलिक चुनौतियों, सूखी जमीन और लगातार पड़ने वाले सूखे के लिए जाना जाता है। यहां की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन अनियमित बारिश और सीमित संसाधनों के कारण लोगों की आय और जीवन स्तर हमेशा संघर्षपूर्ण रहा है। रोजगार के अन्य विकल्पों की कमी ने युवाओं और महिलाओं के लिए मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, लेकिन इसी बंजर और चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच ‘रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट’ (आरडीटी) पूरे ग्रामीण समाज की दिशा बदल रहा है। 1969 में विसेंट और ऐनी फेरर द्वारा स्थापित इस संस्था ने स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ-साथ एक अनूठा प्रयोग किया—खेलों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का हथियार बनाना। 70 के दशक में साधारण कबड्डी और क्रिकेट टूर्नामेंट से शुरू हुआ यह सफर, साल 2000 में ‘अनंतपुर स्पोर्ट्स एकेडमी’ (एएसए) की स्थापना के साथ एक बड़े आंदोलन में बदल गया। आज यह अकादमी ‘एक्सेस, एजुकेट और एम्पावर’ (पहुंच, शिक्षा और सशक्तिकरण) के सिद्धांत पर काम करते हुए तीन स्तरों पर संचालित होती है। सबसे पहले, सुदूर गांवों में फैले 100 से ज्यादा ग्रासरूट सेंटर्स से प्रतिभाओं को खोजा जाता है। इसके बाद उन्हें बेहतर ग्राउंड, लाइब्रेरी और कंप्यूटर जैसी सुविधाओं वाले 4 विशेष स्पोर्ट्स-एजुकेशन सेंटर्स तक लाया जाता है। जो खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं, उन्हें ‘अनंतपुर स्पोर्ट्स विलेज’ (एएसवी) की एलीट रेजिडेंशियल एकेडमी में चुना जाता है। यहां उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और ट्रेनिंग का पूरा खर्च स्कॉलरशिप के जरिए उठाया जाता है। आर्चरी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, जूडो और टेनिस सहित कुल 10 खेलों में आज 16,400 से अधिक बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। इस पहल की सबसे बड़ी कामयाबी गांवों में लड़कियों को लेकर सोच बदलना है। ‘रूरल गर्ल्स एथलेटिक्स मीट’ और गर्ल्स स्पोर्ट्स लीग जैसी कोशिशों के कारण आज खेल कार्यक्रमों में 59% हिस्सेदारी लड़कियों की है। इसके अलावा, स्पेशल ओलंपिक्स और व्हीलचेयर टेनिस के जरिए दिव्यांग और बौद्धिक रूप से कमजोर बच्चों को भी मुख्यधारा में शामिल किया जा रहा है। 1200 से अधिक युवाओं को कोचिंग और रेफरी की ट्रेनिंग दी गई है। लड़कियों के लिए फीमेल एथलीट लीडरशिप प्रोग्राम और बिजनेस वर्कशॉप चलाए जा रहे हैं। इस पूरी मेहनत का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। सालों में 2 लाख से ज्यादा ग्रामीण बच्चों को ट्रेनिंग मिल चुकी है, जिनमें से 2000 से अधिक बच्चे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। एम. जगदीश (सॉफ्टबॉल) और एम. अनुषा (फुटबॉल) जैसे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का झंडा बुलंद किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि 350 से ज्यादा युवाओं ने खेलों के दम पर रेलवे, सेना और शिक्षा जैसे सरकारी विभागों में नौकरी हासिल की है। संध्या डी., लोलिता मैरी और भवानी जैसे नाम आज अपने परिवारों के लिए आय का स्थायी जरिया बन चुके हैं। दशकों पहले शुरू हुए गांव के छोटे टूर्नामेंट आज इस बात का सशक्त प्रमाण हैं कि अगर ग्रामीण विकास में खेलों को सही तरीके से पिरोया जाए, तो वह न केवल एक व्यक्ति की जिंदगी संवारता है, बल्कि पूरे समाज को सशक्त और आत्मविश्वास से भर देता है।