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सुबह 5 बजे आया धमकी भरा ई-मेल,9 घंटे बाद पढ़ा:परिसर में 7 RDX और सायनाइड गैस होने का दावा, अजमेर RTO को बम से उड़ाने की मिली थी धमकी

अजमेर में जयपुर रोड स्थित RTO कार्यालय को गुरुवार को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया। आरटीओ की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजे गए धमकी भरे मेल में ईमेल भेजने वाले ने परिसर में 7 RDX और जहरीली सायनाइड गैस होने का दावा किया था। जानकारी के अनुसार, धमकी भरा ईमेल सुबह 5 प्राप्त हुआ, लेकिन उसे 9 घंटे बाद दोपहर 2 बजे पढ़ा गया। सूचना मिलते ही पुलिस, सीआईडी, डॉग स्क्वायड और डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम मौके पर पहुंची। सर्च ऑपरेशन में पूरे परिसर की बारीकी से जांच की गई, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हुआ है। धमकी भरा ईमेल सुबह 5 बजे आरटीओ की ऑफिशियल मेल आईडी पर पहुंच गया था, लेकिन अधिकारियों ने इसे दोपहर 2 बजे देखा। जबकि मेल में कार्यालय को दोपहर 1:10 बजे उड़ाने का अल्टीमेटम दिया गया था। यानी जब तक मेल पढ़ा गया, धमकी में दिया गया समय निकल चुका था। बिजली और नेटवर्क का हवाला, देर से खुला मेल एडिशनल आरटीओ प्रकाश टहल्यानी ने बताया कि ईमेल सुबह करीब 5 बजे आया था। कार्यालय में बिजली और नेटवर्क की समस्या के कारण समय पर मेल एक्सेस नहीं हो सका। दोपहर करीब 2 बजे जब मेल चेक किया गया तो धमकी की जानकारी मिली। इसके बाद तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस को सूचना दी गई। धमकी मिलने के बाद डीटीओ राजीव शर्मा ने तुरंत एसपी कार्यालय को सूचना दी। आरटीओ में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने वाहन संबंधी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेते हुए पूरे परिसर को तत्काल खाली कराया गया। कर्मचारियों को बाहर निकालकर चलाया सर्च ऑपरेशन सिविल लाइंस थाना प्रभारी शंभू सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही डीएसपी (जोन प्रथम), सिविल लाइंस थाना पुलिस, सीआईडी, डॉग स्क्वायड और डिजास्टर मैनेजमेंट की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुरक्षा के मद्देनजर कर्मचारियों और आम लोगों को कार्यालय से बाहर निकाला गया। इसके बाद डेढ़ से दो घंटे तक भवन और परिसर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई। जांच के दौरान कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। मेल में धार्मिक अपमान का जिक्र प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमकी भरे मेल में खुद को एक कथित इस्लामिक संगठन से जुड़ा बताया गया है। मेल में पैगंबर मोहम्मद साहब के कथित अपमान का बदला लेने की बात लिखी गई है। फिलहाल पुलिस इस दावे की सत्यता की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां ई-मेल की तकनीकी पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मेल किस आईपी एड्रेस और किस सर्वर से भेजा गया। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां अजमेर में इससे पहले भी दरगाह, कलेक्ट्रेट और डाक विभाग को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी है। अधिकांश मामलों में जांच के बाद धमकियां फर्जी साबित हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर बार किसी भी सूचना को गंभीरता से लेते हुए पूरी जांच करती है।

नीरजा-मोदी स्कूल में अमायरा की मौत से पहले का VIDEO:कई बार टीचर के पास गई थी; परिवार बोला-बेटी मदद मांगती रही, किसी ने नहीं सुनी

जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में चौथी मंजिल से कूदने वाली छात्रा अमायरा की मौत के करीब 8 महीने बाद एक और वीडियो सामने आया है। परिजन का कहना है- इस 8 मिनट के सीसीटीवी वीडियो में दिख रहा है कि कुछ बच्चे डिजिटल स्लेट पर कुछ लिखकर अमायरा को दिखाते हैं, जिससे वह परेशान हो जाती है। परेशान अमायरा कई बार अपनी सीट छोड़कर क्लास टीचर के पास जाती है। टीचर से बातचीत करती है। बातचीत के दौरान ही वह अचानक क्लास से बाहर निकल जाती है। कॉरिडोर से तेजी से सीढ़ियों की तरफ जाती हुई दिखाई देती है। ग्राउंड फ्लोर से तेजी से चौथी मंजिल तक पहुंचती है। इसके बाद वह दर्दनाक घटना होती है। वीडियो सामने आने के बाद परिवार ने पुलिस की चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जांच अधूरी है। मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी गंभीर धाराएं नहीं जोड़ी गईं। परिवार का कहना है कि बच्ची कई बार मदद मांगती रही, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। पहले देखिए, वीडियो में क्या दिखा… सहेली के साथ डांस क्लास में जाती है अमायरा के पिता विजय मीणा ने बताया- इस फुटेज में सबसे पहले अमायरा क्लास में आती दिख रही है। इसके बाद अन्य बच्चे भी क्लास में पहुंचते हैं। शुरुआती फुटेज में अमायरा सामान्य दिखाई देती है। थोड़ी देर बाद वह सहेली के साथ डांस क्लास जाती है। डांस क्लास में हिस्सा लेती है। अमायरा को डिजिटल स्लेट पर कुछ दिखाते हैं बच्चे डांस क्लास से लौटने के बाद क्लासरूम में कुछ बच्चे टेप से खेलते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान अमायरा के आगे बैठे कुछ बच्चे डिजिटल स्लेट निकालते हैं, जबकि ऐसी स्लेट क्लास में लाने की अनुमति नहीं थी। बच्चे स्लेट पर कुछ लिखकर अमायरा को दिखाते हैं। आपस में भी साझा करते हैं। इसके बाद अमायरा असहज और परेशान दिखाई देने लगती है। वीडियो में दिख रहा है कि अमायरा कई बार अपनी सीट छोड़कर क्लास टीचर के पास जाती है। उनसे बातचीत करती है। इसी दौरान एक अन्य छात्र भी टीचर के पास जाकर अमायरा की ओर इशारा करते हुए कुछ कहता नजर आता है। बातचीत के बाद दोनों बच्चे अपनी सीट पर लौट जाते हैं। कुछ देर बाद फिर अमायरा टीचर के पास पहुंचती है। इस बीच एक अन्य छात्र भी टीचर के पास जाता है। कुछ बच्चे खड़े दिखाई देते हैं। एक अन्य टीचर भी क्लास में नजर आती है। टीचर अमायरा को वापस सीट पर भेज देती है। दूसरे छात्र को अपने पास बुला लेती हैं। बदलते हाव-भाव और फिर अचानक क्लास से बाहर वीडियो में क्लास टीचर बच्चों के बीच जाकर बात करती भी दिख रही है। इसी दौरान अमायरा अपना हाथ पहले मुंह और फिर सिर पर रखती है। इसके बाद वह एक छात्रा के पास जाती है। कुछ देर रुकती है, फिर अपनी सीट पर लौट जाती है। कुछ देर बाद अमायरा आखिरी बार टीचर के पास जाती है। बातचीत के दौरान वह अचानक क्लास से बाहर निकल जाती है। वीडियो में वह कॉरिडोर से तेजी से सीढ़ियों की ओर जाती हुई दिखाई देती है। वह ग्राउंड फ्लोर से तेजी से चौथी मंजिल तक पहुंचती है। इसके बाद वह दर्दनाक घटना हो जाती है। पेरेंट्स ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल अमायरा के पिता विजय मीणा और मां शिवानी ने पुलिस की चार्जशीट पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पुलिस ने मामले में चालान तो पेश किया, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया। पिता विजय मीणा का आरोप है कि स्कूल मालिक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदु दुबे को आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे आरोपों में शामिल नहीं किया गया। केवल लापरवाही और सबूत छुपाने के आरोपों तक सीमित रखा गया है। पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी। मां बोलीं- पुलिस हमें ही प्रताड़ित करती रही मां शिवानी ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान पुलिस ने हमसे ऐसे सवाल पूछे, मानो हमारी बच्ची मानसिक रूप से अस्वस्थ थी। मैं रोज बेटी से स्कूल के बारे में पूछती थी, लेकिन महज डेढ़ घंटे के भीतर ऐसा क्या हुआ कि बच्ची ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। बच्ची कई बार मदद मांगती रही, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। परिजनों का कहना है कि अमायरा को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया था और पुलिस की चार्जशीट इस पहलू को पर्याप्त महत्व नहीं देती। जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट जाएंगे परिवार ने कहा- हम चार्जशीट का अदालत में विरोध करेंगे और आत्महत्या के लिए उकसाने सहित अन्य गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग करेंगे। जरूरत पड़ने पर राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इस मामले में राजस्थान अभिभावक संघ भी परिवार के समर्थन में आया है। संघ ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा आंदोलन किया जाएगा। चौथी मंजिल से लगाई थी छलांग 1 नवंबर 2025 को मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में चौथी क्लास की छात्रा अमायरा (9) ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पूरे देश में गहरा आक्रोश देखने को मिला था। परिवार का आरोप है कि अमायरा को स्कूल के कुछ बच्चे लगातार बुली (प्रताड़ित) करते थे। इस संबंध में कई बार क्लास टीचर और स्कूल प्रशासन को शिकायत भी दी गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। परिजनों ने यह आरोप भी लगाया कि घटना के बाद जहां बच्ची गिरी थी, वहां से खून के धब्बे साफ करवा दिए गए, जिससे अहम सबूत प्रभावित हुए थे। चार्जशीट में ये हैं आरोपी पुलिस की ओर से पेश चार्जशीट में स्कूल मालिक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, शिक्षिका पुनीता शर्मा और सफाईकर्मी राम को आरोपी बनाया गया है। हालांकि परिवार का कहना है कि आरोपों की गंभीरता के अनुरूप धाराएं नहीं लगाई गईं और कई जिम्मेदार लोगों को राहत दी गई है। डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने कहा- जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही चार्जशीट अदालत में पेश की गई है। जांच में जो तथ्य स्थापित हुए, उन्हीं के आधार पर आरोप तय किए गए हैं। अब मामले में अंतिम निर्णय चार्जशीट, सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर कोर्ट में किया जाएगा। … अमायरा मौत केस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अमायरा मौत मामला,परिवार बोला-बच्ची को आत्महत्या के लिए मजबूर किया:पुलिस ने हमें ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, चार्जशीट पर परिजनों ने उठाए सवाल अपशब्दों से नाराज होकर 4th मंजिल से कूदी थी छात्रा:नीरजा मोदी स्कूल टीचर ने जांच कमेटी के सामने किया खुलासा, मैडम ने रेलिंग से नीचे देखा था नीरजा मोदी स्कूल में 4th फ्लोर से कूदी छात्रा,मौत, VIDEO:पसलियां टूटी; स्कूल प्रबंधन ने सबूत मिटाए, पिता ने FIR दर्ज कराई

जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी:लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए भारत ही नहीं, अब दुनियाभर में अपनाया जा रहा ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’

आयुर्वेद की प्रसिद्ध अवधारणा ‘दिनचर्या’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी आधुनिक जीवनशैली से पहले थी। तय समय पर जागना, सही वक्त पर खाना, कसरत, पूरी नींद और खान-पान में संयम इसका मूल मंत्र है। विज्ञान भी अब इन आदतों को सही मानता है, बस भाषा अलग है। मसलन सर्केडियन साइकल, मेटाबॉलिज्म और बिहेवियरल साइंस। इसी वैज्ञानिक सोच पर टिके आधुनिक आयुर्वेदिक ब्रांड कपिवा के संस्थापक और सीईओ अमीव शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पढ़िए मुख्य अंश: आपके नजरिए से विज्ञान आधारित आयुर्वेद क्या है? आज लोग लंबा जी तो रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वे स्वस्थ भी हों। यहीं आयुर्वेद की सबसे बड़ी भूमिका है। लेकिन आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प मानना गलत होगा। गंभीर संक्रमण, हार्ट अटैक, कैंसर, ट्रॉमा जैसे हालात में एविडेंस-बेस्ड इलाज ही जरूरी है। इसका सही रास्ता है इंटीग्रेशन। आधुनिक चिकित्सा डायग्नोसिस (जांच) और इमरजेंसी केयर में आगे है, जबकि आयुर्वेद लाइफस्टाइल गाइडेंस और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है। यही वजह है कि लाइफ क्वालिटी सुधारने के लिए अब भारत ही नहीं, पूरी दुनिया ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’ अपना रही है। आयुर्वेदिक ब्रांड्स को मिले-जुले रिस्पॉन्स के बीच कपिवा अपनी जगह कैसे बना रहा है? कपिवा नाम तीन आयुर्वेदिक दोष- कफ, पित्त और वात से बना है। पिछले पांच दशकों में कोई बड़ा आयुर्वेदिक ब्रांड नहीं उभरा। 2016 में शुरू हुई कपिवा आज सालाना ~500 करोड़ का टर्नओवर पार कर चुका है। इसमें से 70% कारोबार रिपीट ग्राहकों से आता है। अब कंपनी के प्रोडक्ट्स देश के 400 से ज्यादा शहरों में एक लाख से अधिक स्टोर्स में उपलब्ध हैं। ये डायबिटीज के मरीजों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। कंपनी अपनी एप ‘कपिवा डॉट इन’ के अलावा अमेजन जैसी साइट्स पर भी सप्लीमेंट सेगमेंट में अग्रणी है। कपिवा एम्स जैसे संस्थानों में डॉक्टरों के साथ भी काम करता है। यही नहीं, चीन में भी हर तीन में से एक प्रिस्क्रिप्शन में आयुर्वेदिक दवा शामिल होती है। ऐसा यूं ही नहीं है। कपिवा के चीफ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. आर. गोविंदराजन एम फार्म और पीएचडी हैं। आयुर्वेद को लेकर आप जागरूकता कैसे बढ़ा रहे हैं? अब तक ‘वर्ड ऑफ माउथ’ ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत रही है। पिछले 10 वर्षों में कंपनी हर महीने करीब पांच लाख लोगों तक पहुंच रही है। अब हम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी गंभीरता से फोकस कर रहे हैं। विज्ञान की आधुनिक दुनिया में आयुर्वेद एलोपैथी से कैसे मुकाबला करेगा? इस मामले में इंटीग्रेशन की जरूरत है। आयुर्वेद के लिए वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है। सिर्फ पुराना होने से कोई भी नुस्खा कारगर नहीं हो जाता। कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और फॉर्मुलेशन की सुरक्षा, सही खुराक और असर साबित करने के लिए सख्त क्लीनिकल ट्रायल जरूरी है। इस दिशा में रिसर्च बढ़ रही है। सबसे असरदार तरीकों को व्यापक स्वीकृति मिल रही है। हेल्दी एजिंग, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, स्ट्रेस रिडक्शन और सस्टेनेबल लिविंग आज दुनियाभर की प्राथमिकताएं बन चुकी हैं। यही वे क्षेत्र हैं, जहां आयुर्वेद का योगदान मायने रखता है।

PCC चीफ के भाई हिरासत में, पूछताछ के बाद छोड़ा:इंदौर में ड्रग्स के साथ पकड़ाए आरोपियों ने लिया नाम; कांग्रेस बोली- बदले की कार्रवाई

इंदौर पुलिस ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के छोटे भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी को ड्रग सप्लाई से जुड़े मामले में हिरासत में लिया है। पुलिस का दावा है कि ब्राउन शुगर के साथ पकड़े गए दो आरोपियों से पूछताछ में नाना का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गुरुवार दोपहर हिरासत में लिया। देर रात उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। कांग्रेस ने कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि राजेंद्र नगर पुलिस ने रेतमंडी चौराहा स्थित डी-मार्ट के पास से इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और रोनी को गिरफ्तार किया था। तलाशी में उनके पास से करीब 10 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद हुई। पूछताछ में दोनों ने नाना पटवारी और मानव गंगवानी का नाम लिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों से पूछताछ की, लेकिन फिलहाल उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। जरूरत पड़ने पर दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। डीसीपी बोले- सीडीआर और अन्य सबूतों की जांच डीसीपी रावत ने बताया कि मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), आपसी बातचीत और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
NDPS एक्ट में कार्रवाई, 5 घंटे जांच के बाद गिरफ्तारी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई होने के कारण पुलिस ने मौके पर एफएसएल टीम को बुलाया। करीब पांच घंटे तक मौके पर जांच और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की गई। इसके बाद नाना को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ शुरू की गई। जीतू पटवारी ने कहा-बदले की कार्रवाई कर रही सरकार इधर, गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद जीतू पटवारी ने अपने कानूनी सलाहकारों से चर्चा की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर आंदोलन की घोषणा के बाद सरकार दबाव बनाने के लिए यह कार्रवाई कर रही है। जीतू पटवारी ने भी सोशल मीडिया पर इसे “बदले की कार्रवाई” बताया। नाना पटवारी के खिलाफ 10 केस दर्ज नाना के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्हें 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान भी गिरफ्तार किया गया था। उन पर करीब सात साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में फरार रहने का आरोप था। साल 2025 में इंदौर के तेजाजी नगर थाने में नाना और उनके दो सहयोगियों के खिलाफ FIR कराई गई थी। शिकायतकर्ता नरेंद्र मेहता ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन पर धोखे से कब्जा करने का प्रयास किया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। महिला ने लगाया था छेड़छाड़ का आरोप नवंबर 2018 में नाना पटवारी पर धारा 354 (क) के तहत केस दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाए हैं कि नाना के साथ क्रुणाल पटवारी, चेतन पटवारी, सुदील चौधरी, गब्बू पटवारी और अन्य 40-50 लोग कार-बाइक से मेरे घर पहुंचे। फिर जबरदस्ती अंदर घुस आए। नाना के हाथ में पिस्टल जबकि बाकी के हाथ में चाकू और तलवार थी। नाना पटवारी ने मेरा हाथ बुरी नीयत से पकड़ा था। खुशी सुसाइड केस में भी आया था नाम जुलाई 2018 में इंदौर में 37 वर्षीय खुशी कूलवाल ने सुसाइड किया था। हाई प्रोफाइल पार्टियों में अक्सर दिखने वाली खुशी ने महालक्ष्मी नगर स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगा ली थी। जांच के दौरान पुलिस ने उसके करीबी लोगों से पूछताछ की थी। कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम भी जांच में सामने आया था। हालांकि, पूछताछ के बाद उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। 2025 में यह मामला फिर चर्चा में आया, जब पुलिस ने ड्रग कनेक्शन समेत अन्य पहलुओं पर जांच शुरू की। पुलिस यह पड़ताल कर रही है कि मामले का हाई प्रोफाइल पार्टियों से क्या कनेक्शन है? खुशी कूलवाल किन लोगों के संपर्क में थी? आत्महत्या से पहले की परिस्थितियों में किन लोगों की क्या भूमिका रही? ये खबर भी पढ़ें…. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से सांठगांठ के आरोप लगाने के मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर पटवारी की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। पढ़ें पूरी खबर…

कॉकरोच पार्टी फाउंडर दीपके ने पुलिस के पैर पकड़े:जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की इजाजत मांगी, कहा- हड़ताली छात्रों को बारिश से बचाना है

नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 20 दिन से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने गुरुवार को पुलिसवालों के पैर पकड़े और हाथ जोड़े। वे टेंट लगाने की इजाजत मांग रहे थे ताकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बारिश से बचाया जा सके। दीपके ने इस घटना का वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा- भूख हड़ताल पर बैठे स्टूडेंट्स बारिश में भीग रहे हैं। मैंने पुलिस अधिकारियों से जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की परमिशन मांगी है। उन्होंने दूसरे वीडियो में पुलिस पर तिरपाल लाने की कोशिश कर रहे स्टूडेंट्स के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया। दीपके ने लिखा- महिला स्टूडेंट्स को पुरुष पुलिसवालों ने धक्का दिया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 3 तस्वीरें… वांगचुक भी प्रदर्शन में शामिल, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग CJP का 8 शहरों में प्रदर्शन CJI की टिप्पणी के बाद बनी CJP, युवाओं को कॉकरोच कहा था अभिजीत AAP के स्ट्रैटजिस्ट रह चुके 30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं।
————————————- ये खबर भी पढ़ें… पेपर लीक विवाद के बाद बदलाव, 2027 में NEET परीक्षा 6 दिन चलेगी, कम्प्यूटर बेस्ड होगी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2027 में कम से कम छह दिन चलेगी। यह पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराई जाएगी। परीक्षा के लिए देश भर में 1 हजार से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। NEET पेपर लीक विवाद के बाद यह बदलाव किए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

कांग्रेस बोली-एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से बढ़ेगा आम आदमी पर बोझ:गाड़ियों के इंजन जल्दी खराब होंगे; कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी

केंद्र सरकार की E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी ने गुरुवार को श्रीगंगानगर जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर जमकर नारेबाजी की और ‘केंद्र सरकार मुर्दाबाद’ व ‘E20 नीति वापस लो’ जैसे नारे लगाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा और गाड़ियों के इंजन जल्दी खराब हो जाएंगे। महंगाई और इंजन खराब होने की जताई चिंता
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस नीति से पुरानी गाड़ियों वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका आरोप है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों के इंजन और पार्ट्स जल्दी खराब होंगे, जिससे मरम्मत का खर्च बढ़ेगा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए यह अतिरिक्त बोझ है और पुरानी गाड़ियों के मालिकों को इंजन खराब होने की चिंता सताने लगी है। तकनीकी अध्ययन और जनमत की उठाई मांग
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि नई गाड़ियों पर E20 के दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर विशेषज्ञ भी चिंता जता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने इस नीति को लागू करने से पहले न तो आम जनता से राय ली और न ही पर्याप्त तकनीकी अध्ययन कराया।

जिंदा कोबरा लेकर अस्पताल पहुंचा युवक, बोला- इलाज करो:सांप पकड़ते समय डिब्बे में बंद कर रहा था; अचानक उंगली पर काट गया

पाली में स्नेक कैचर कोबरा को डिब्बे में बंद कर अस्पताल में पहुंच गया। 4 फीट का कोबरा डिब्बे में ही फुफकार मार रहा था। ऐसे में स्टाफ और अस्पताल में बैठे लोग घबरा गए। स्नेक कैचर डॉक्टर से बोला- 12 सालों से सांप पकड़ रहा हूं। पहली बार काटा है, मेरा इलाज करो। डॉक्टरों ने सांप को देखते हुए इलाज शुरू किया है। स्नैक कैचर बांगड़ अस्पताल के ओल्ड ICU में भर्ती है। सांप पकड़ कर डिब्बे में डालने के दौरान कोबरा ने उंगली पर काट लिया था। बोला- 10 हजार सांप पकड़ चुका पाली जिले के तख्तगढ़ के रहने वाले स्नेक कैचर संजय वाल्मीकि (40) ने बताया- मैं पिछले 12-13 सालों से सांपों का रेस्क्यू कर रहा हूं। अब तक करीब 10 हजार सांपों को पाली-जालोर समेत अन्य इलाकों से पकड़ा है। उनका रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा है। डिब्बे में डालने के दौरान काटा संजय ने बताया- बुधवार शाम को भी तखतगढ़ में चौधरियों के मोहल्ले में एक घर में आए सांप को पकड़ने गए थे। यहां ये सांप एक पाइप में बैठा था। यहां से ये निकला तो पत्थर के नीचे बैठ गया। पत्थर हटाकर इसे हाथ में लिया और डिब्बे में डालने लगा तो कोबरा ने उंगली पर डस लिया। इसके बाद मैं इसे डिब्बे बंदकर बांगड़ हॉस्पिटल ले आया। संजय इस सांप को लेकर बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचे तो उनके हाथ में डिब्बे में बंद कोबरा सांप फुफकार रहा था। इसे देख कर स्टाफ और अन्य लोग भी घबरा गए। खाना खा रही महिला को सांप ने काटा: पाली शहर में गुरुवार सुबह उम्मेद मिल में खाना खा रही एक महिला मजदूर को सांप ने काट लिया। पाली शहर के न्यू शक्ति नगर निवासी मंजू (39) पत्नी सुभाष ने बताया कि वह मिल में काम कर रही थी। लंच होने पर उसने साथी मजदूरों के साथ बैठकर खाना खाया किया। उसके बाद मिल में ही एक चबूतरे पर बैठी थी। जैसे ही पैर लटकाए चबूतरे में हुए एक छोटे गड्‌ढे में बैठे सांप ने उनके पैर पर काट लिया। साथी मजदूर उसे तुरंत इलाज के लिए पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। बरामदे में सो रही महिला को सांप ने काटा: पाली शहर के निकट स्थित बूसी गांव निवासी 21 साल की राधिका पत्नी लोकेश बुधवार रात को घर में सो रही थी। लाइट जाने पर कमरे से निकलकर वह बरामदे में आकर सो गई। रात करीब 2 बजे बरामदे में सोते समय सांप ने उसके पैर पर काट लिया। जिसे इलाज के लिए परिजन पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां इलाज जारी है। सांप के काटने से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जहरीला सांप लेकर हॉस्पिटल पहुंचा, बोला- इसने काट लिया:स्टाफ सहम गया, रात को टॉयलेट जाते समय सीढ़ियों पर कॉमन करैत पैर से लिपटा किसान के पैर में सांप (कॉमन करैत) ने काट (डस) लिया। उसने बिना समय गंवाए सांप को पकड़कर बोतल में डाला और उसे लेकर हॉस्पिटल पहुंच गया। पूरी खबर पढ़ें…

बद्रीनाथ- VIP दर्शन से 1.63 करोड़ की आय पर विवाद:उपाध्यक्ष बोले- बिना बोर्ड मंजूरी के शुल्क लागू किया; चढ़ावा के बाद दो नए मामले चर्चा में

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा हेराफेरी विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब दो नए वित्तीय मामले चर्चा में आ गए हैं। पहला मामला VIP दर्शन के लिए प्रति श्रद्धालु 1100 रुपए शुल्क वसूलने का है, जिससे अब तक करीब 1.63 करोड़ रुपए जमा होने का दावा किया जा रहा है। दूसरा मामला VIP मेहमानों के ठहरने और खानपान के नाम पर कथित फर्जी बिल बनाए जाने का है। दोनों मामलों को लेकर श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बोर्ड की मंजूरी के बिना शुल्क लागू करने पर सवाल उठाए हैं, जबकि CEO सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि यह व्यवस्था भीड़ नियंत्रण और अनधिकृत वसूली रोकने के लिए लागू की गई थी। जून के अंतिम सप्ताह से लागू हुई व्यवस्था चारधाम यात्रा के पीक सीजन में बद्रीनाथ धाम में रोज हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे थे। इसी दौरान कुछ श्रद्धालुओं को सामान्य कतार से अलग विशेष व्यवस्था के तहत दर्शन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए प्रति व्यक्ति 1100 रुपए शुल्क लिया गया और आधिकारिक रसीद भी जारी की गई। विवाद तब शुरू हुआ जब यह सवाल उठा कि इस शुल्क को लागू करने से पहले BKTC बोर्ड से औपचारिक मंजूरी ली गई थी या नहीं। CEO बोले- पारदर्शिता के लिए किया व्यवस्थित BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि VIP दर्शन शुल्क कोई नई व्यवस्था नहीं थी, बल्कि पहले से चली आ रही प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया। उनके अनुसार यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में लोग विभिन्न माध्यमों से प्रोटोकॉल या VIP श्रेणी में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे सामान्य श्रद्धालुओं की कतार और भीड़ प्रबंधन प्रभावित होता है। रांगड़ ने कहा कि इसी वजह से मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत शुल्क आधारित व्यवस्था लागू की गई, ताकि VIP प्रोटोकॉल का अनावश्यक उपयोग रोका जा सके और भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ बाहरी लोग दिव्यांग और अन्य विशेष श्रेणियों का दुरुपयोग कर श्रद्धालुओं से पैसे लेकर वैकल्पिक रास्तों से दर्शन करा रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए अधिकृत और रसीद आधारित व्यवस्था लागू की गई। CEO के मुताबिक प्रत्येक श्रद्धालु को आधिकारिक रसीद जारी की गई और पूरी राशि सीधे समिति के खाते में जमा हुई है। उन्होंने दावा किया कि अब तक लगभग 1.63 करोड़ रुपए समिति के खाते में जमा हो चुके हैं और पूरी प्रक्रिया दस्तावेजों में दर्ज है। उपाध्यक्ष का आरोप- बोर्ड से मंजूरी नहीं ली गई BKTC के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि VIP दर्शन शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पारित नहीं हुआ। सती के अनुसार मंदिर समिति के नियमों के तहत किसी भी नए शुल्क को लागू करने या शुल्क दरों में बदलाव से पहले बोर्ड की मंजूरी आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि यह विषय न तो बोर्ड के समक्ष रखा गया और न ही उपाध्यक्ष या अन्य सदस्यों की औपचारिक सहमति ली गई। उन्होंने कहा कि यदि शुल्क लागू किया गया है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्णय किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत लिया गया। सती ने उदाहरण देते हुए कहा कि पूजा शुल्क समेत अन्य वित्तीय निर्णय हमेशा बोर्ड की मंजूरी के बाद लागू किए जाते हैं। ऐसे में VIP दर्शन शुल्क पर भी वही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उनका विरोध श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था बनाने से नहीं, बल्कि संस्थागत मंजूरी के बिना वित्तीय निर्णय लेने से है। उनके मुताबिक पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उपाध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि उनके पास ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें समिति के कुछ अतिथियों को बिना शुल्क के VIP दर्शन कराए गए। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि शुल्क किन लोगों से लिया गया और किन्हें छूट दी गई। VIP मेहमानों के नाम पर कथित फर्जी बिल VIP दर्शन शुल्क के अलावा BKTC पर VIP मेहमानों और जनप्रतिनिधियों के नाम पर कथित फर्जी बिल बनाने के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायतों के अनुसार कई नेताओं और अतिथियों के नाम पर ठहरने और खानपान का खर्च दिखाया गया, जबकि संबंधित लोगों ने दावा किया कि उन्होंने अपना खर्च स्वयं उठाया था। मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने प्रारंभिक जांच में कई भुगतानों को संदिग्ध मानते हुए विस्तृत जांच की सिफारिश की है। जांच में शामिल दस्तावेजों के अनुसार विभिन्न आवासों में VIP मेहमानों के ठहरने और खानपान से जुड़े खर्च का रिकॉर्ड भी सामने आया है। नेताओं ने खर्च दिखाने से किया इनकार जांच के दौरान विधायक आशा नौटियाल के नाम पर 37,500 रुपए और भाजपा नेत्री नेहा जोशी के नाम पर करीब 40 हजार रुपए खर्च दर्शाया गया। दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने BKTC से कोई सुविधा नहीं ली और अपना पूरा खर्च स्वयं वहन किया था। हेलीकॉप्टर कंपनी के जवाब से बढ़ा संदेह जांच के दौरान एक विशेष अतिथि के नाम पर करीब 60 हजार रुपए खर्च दर्शाया गया था। जब संबंधित एविएशन कंपनी से जानकारी मांगी गई तो कंपनी ने बताया कि यात्री का पूरा खर्च उसने स्वयं उठाया था। इसके बाद जांच समिति ने भुगतान संबंधी दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी। पूर्व कार्यकाल के फैसले भी जांच के घेरे में जांच रिपोर्ट में व्यवस्थापक को करीब छह लाख रुपए अग्रिम राशि जारी किए जाने का मामला भी सामने आया है। समिति का मानना है कि लंबित बिलों के निस्तारण के बजाय अग्रिम राशि जारी करना वित्तीय नियमों के अनुरूप नहीं था। हालांकि संबंधित अधिकारियों का कहना है कि उस समय बोर्ड का गठन नहीं हुआ था और यात्रा व्यवस्थाओं को देखते हुए तत्काल निर्णय लेने पड़े थे। बाद में बोर्ड बैठक में इन खर्चों को मंजूरी दे दी गई थी। बोर्ड से शुरू विवाद, अब खुलकर आई खींचतान दैनिक भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार BKTC उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बीच मतभेद प्रशासनिक भवन के पास एक बोर्ड लगाने के मुद्दे से शुरू हुए थे। बाद में यही असहमति प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों तक पहुंच गई। सूत्रों का दावा है कि VIP दर्शन शुल्क और अन्य मामलों को लेकर मौजूदा विवाद उसी खींचतान की अगली कड़ी है। हालांकि इस पर दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दान-चढ़ावा हेराफेरी मामले में SIT भी कर रही जांच इधर, बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच भी तेज हो गई है। चमोली पुलिस ने DSP मदन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में छह सदस्यीय SIT गठित की है। टीम बद्रीनाथ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण कर चुकी है और CCTV फुटेज तथा दस्तावेज जुटा रही है। SIT घटना वाले दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक की फुटेज खंगाल रही है और मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर रही है। इस मामले में वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और उन्हें निलंबित भी किया गया है। अब VIP दर्शन शुल्क, कथित फर्जी बिल और दान-चढ़ावा हेराफेरी तीनों मामलों की विभागीय, प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर जांच चल रही है। ‘चोर चाहे कितना भी रसूखदार हो, बख्शा नहीं जाएगा’ कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि सरकार किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या चोरी के मामलों में कोई नरमी नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का काम अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है और दोषियों को उनके कृत्य की सजा दिलाई जाएगी। मंत्री ने कहा कि आरोपी कौन है, उसका कितना रसूख है या उसके किससे संबंध हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि “चोर के साथ वही सुलूक होगा, जो एक चोर के साथ होना चाहिए।” ———— ये खबर भी पढ़ें : बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद- सस्पेंड निजी सचिव पर FIR: CM बोले- यह मां-बाप की हत्या जैसा महापाप; जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनी बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेरफेर मामले में पहली बड़ी आपराधिक कार्रवाई हुई है। मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की तहरीर पर निलंबित निजी सचिव प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 और 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी खबर…

पिता बोले-मेरी बेटी का बाल विवाह रुकवा दो:मेरे ससुराल और घरवालों ने 4.50 लाख में बेच दिया; पुलिस ने परिवार को किया पाबंद

‘ मेरे ससुराल और घरवालों ने मिलकर मेरी 14 साल की बेटी को बेच दिया है। 4.50 लाख रुपए में सौदा हुआ है। धार्मिक आयोजन की आड़ में मेरी नाबालिग बेटी की शादी कर देंगे। मेरे समझाने पर भी मान नहीं रहे हैं। स्कूल टीचर, पटवारी इस पर नजर रखें। मेरी बेटी का बाल-विवाह रुकवा दो।’ ये कहना है भीलवाड़ा के रहने वाले पिता का है। जिन्होंने वीडियो शेयर कर पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने परिवार को पाबंद कर दिया है। पहले आपके लिए ये जानना जरूरी… वीडियो जारी कर पिता ने लगाई गुहार वीडियो में पिताने आरोप लगाया है कि बेटी की शादी के लिए कथित तौर पर 4.50 लाख रुपए का लेन-देन हुआ है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में किसी धार्मिक कार्यक्रम की आड़ में विवाह कराने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में उनके पास कुछ रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया गया है। कहा-समझाने पर भी नहीं मान रहे पिता ने कहा कि वह गुजरात में रहकर नौकरी करता है। बेटी को बेचने की जानकारी मिलने के बाद परिवार को समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। वीडियो पोस्ट कर पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों से बाल विवाह तुरंत रुकवाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

लैंसेट की स्टडी; कुपोषण का दोहरा बोझ:बचपन में दुबले, पर 9 साल की उम्र में मोटे हो रहे कई बच्चे

भारत में बच्चों के कुपोषण की तस्वीर बदल रही है। चुनौती अब सिर्फ भोजन की कमी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कुपोषण और मोटापे के दोहरे बोझ में बदल रही है। एक ताजा स्टडी के मुताबिक अब एक ही बच्चा बचपन में पहले दुबलापन और कुछ ही वर्षों बाद मोटापे का शिकार हो रहा है। इसे वैज्ञानिक ‘डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन’ यानी कुपोषण के दोहरे बोझ के रूप में देख रहे हैं। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए और द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक नए अध्ययन में कुछ बच्चों को जन्म से नौ वर्षों तक ट्रैक किया गया। इस स्टडी में शामिल बच्चों में पाया गया कि अधिकांश का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) उनके पहले पांच वर्षों के दौरान सेहतमंद स्तर पर था। सात साल की उम्र में करीब 26% बच्चे दुबले थे, जबकि 5.2% अधिक वजन या मोटापे का शिकार थे। नौ साल तक पहुंचते-पहुंचते मोटापा और अधिक वजन करीब 3 गुना बढ़कर 14.6% हो गया, जबकि करीब 21.6% बच्चे अब भी कम वजन के या दुबले रहे। 5 साल तक के बच्चों में घट रहा कुपोषण – सरकारी डेटा सरकार द्वारा पोषण ट्रैकर के जरिए 7.7 करोड़ से ज्यादा बच्चों को ट्रैक किया जाता है। इसके मुताबिक बीते 3 वर्षों में कुपोषण की स्थिति में सुधार हुआ है। 0-5 वर्ष की आयु के 63 लाख बच्चों की ट्रैकिंग के आधार पर बौनापन, कम वजन के मामले घटे हैं। स्थिति मई 23 मई 26
बौनापन 38% 30%
कम वजन 18% 12%
कुपोषण 07% 03%
(स्रोत- पोषण ट्रैकर) पोषण – भोजन की कमी नहीं, गुणवत्ता-प्रोसेस्ड फूड चुनौती सीएमसी वेल्लोर की बीना कोशी के मुताबिक, ‘देश में पोषण की चुनौती अब केवल भोजन की कमी नहीं रही। भोजन की गुणवत्ता, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, कम शारीरिक गतिविधि और गर्भावस्था में मां की सेहत भी चुनौती है।’ ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पांच साल से कम उम्र के करीब 30% बच्चे ठिगने हैं और 17.3% बच्चे लंबाई के अनुपात में कम वजन से प्रभावित हैं। ये एशिया के औसत से ज्यादा है।