5 हजार कमाने वाली महिला को 2 करोड़ का नोटिस:घर पर मिली सूखी रोटी; शराब माफिया ने गरीबों के आधार-अकाउंट नंबर से लिए ठेके
नाम पुष्पा देवी, उम्र 60 साल। अपने गुजर-बसर के लिए पड़ोसियों के बच्चों को संभालती हैं। इसके बदले महीने के 2 से 5 हजार रुपए मिलते हैं। इन्हें आबकारी विभाग से करीब 2 करोड़ रुपए का जुर्माना भरने का नोटिस मिला है। पड़ताल करने भास्कर टीम इनके घर पहुंची तो पुराना दरवाजा, खिड़की में रखी सूखी रोटी दिखी। इनकी आर्थिक स्थिति वाकई दयनीय थी। अलवर जिले में आपको पुष्पा देवी जैसे कई गरीब लोग मिल जाएंगे, जिन्हें ऐसी पेनल्टी के नोटिस मिले हैं। दरअसल, इन सभी के नाम करोड़ों के शराब ठेके थे। तय समय में शराब की निश्चित मात्रा न बेचने पर इन्हें ये नोटिस मिले थे। शराब ठेकेदारों ने इन्हें 10 से 15 हजार रुपए का लालच देकर इनके नाम से लाइसेंस लेकर पूरा खेल किया था। सिर्फ अलवर ही नहीं, राजस्थान के कई शहरों में शराब माफियाओं ने आबकारी विभाग को ऐसे ही चूना लगाया है और पूरे राजस्थान में विभाग का ऐसे ठेकेदारों पर करीब 160 करोड़ रुपए बकाया हो गया है। अलवर में ऐसी दुकानों से अकेले वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही विभाग को करीब 50 से 60 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जिसकी रिकवरी आज भी विभाग नहीं कर पाया है। शराब माफिया ये खेल कैसे खेलते हैं? गरीबों को फंसाकर फायदा खुद कैसे उठाते हैं और सरकार को कैसे चूना लगाते हैं? पढ़िए, भास्कर की खास पड़ताल में… सिलसिलेवार पढ़िए- पूरा मामला शराब ठेकेदार बिचौलिए का लेते हैं सहारा शराब ठेकेदार गरीबों को फंसाने के लिए किसी लोकल मीडिएटर का सहारा लेते हैं। अलवर में भास्कर टीम 3 पीड़ितों के घर पहुंची। तीनों पीड़ितों ने एक कॉमन नाम लिया, वो था- दुर्गेश पारीक उर्फ भुल्ली। भुल्ली शराब ठेकेदारों और गरीब परिवारों के बीच की कड़ी बना। ये शराब ठेकेदारों के इशारे पर ऐसे भोले-भाले लोगों को ढूंढता है, जिनकी कमाई कम हो और उनके नाम कोई बड़ी संपत्ति भी न हो। इसके बाद हर महीने 10 से 12 हजार देने का झांसा देकर आधार कार्ड, खाता नंबर और अन्य कागज ले लेता है। भुल्ली गरीबों के कागजात को शराब ठेकेदारों तक पहुंचाता है। इसके बाद ठेकेदार गरीबों के नाम शराब ठेके का लाइसेंस लेते हैं। जिसे वे अपने मुनाफे के लिए इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण से समझिए विभाग को कैसे लगाते हैं चूना मान लीजिए शराब ठेकेदार का नाम लालाराम है। उसके नाम से शराब ठेका है। उसने गरीब व्यक्ति सुनील के नाम एक और शराब ठेके का लाइसेंस ले लिया। लालाराम ने अपने ठेके का पूरा माल बेचने के लिए धांधली की। उसने अपनी दुकान से भी माल बेचा और अपना माल सुनील के नाम से ली गई दुकान पर भी जाकर बेचा। ऐसा करके उसने कम समय में अपनी दुकान का सारा माल बेचकर आबकारी के नियम की पूरी पालना की और गलत तरीके से मुनाफा भी कमाया। वहीं सुनील तय समय पर माल नहीं बेचने पर करोड़ों रुपए के जुर्माने की भेंट चढ़ गया। अलवर में कैसे फंसे लोग, पीड़ित और उनके परिवार की जुबानी पूरी कहानी पीड़ित 1- पहले हम पुष्पा देवी के घर पहुंचे तो देखा कि उनके पास रहने को ठीक तरह से जगह तक नहीं है। करोड़ों रुपए की शराब की दुकान होने की बात उनसे पूछी तो चौंकाने वाला खुलासा किया। महिला ने बताया कि ठेकेदार दुर्गेश पारीक उर्फ भुल्ली ने उससे पेंशन शुरू कराने के नाम पर आधार कार्ड और खाता नंबर लिया था। उसने बताया कि खाता भी नया खुलवाया था। यह खाता मेरे बेटे अजय ने अपने दोस्त राजेश के कहने पर खुलवाया था। पुष्पा के नाम से 2024-25 में अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ के लीली व जावली में दो शराब की दुकानें चल चुकी हैं। पीड़ित 2- अपनाघर शालीमार निवासी रूपा देवी के नाम दो करोड़ रुपए की शराब की दो दुकानें हैं। महिला के बेटे राजेश गुप्ता ने बताया कि दुर्गेश उर्फ भुल्ली ठेकेदार ने मुझे झांसे में लेकर मम्मी के कागज ले लिए। उसे पता नहीं था कि शराब के ठेके उनके नाम से लिए जाएंगे। फिर मोटी रिकवरी उनके हिस्से में आ जाएगी, यह किसी ने नहीं बताया। अब मां की पेंशन बंद हो गई है और बहन व जीजा ने मां के खाते में मकान बेचने पर 20 लाख रुपए जमा कराए हैं। वो पैसा भी अकाउंट में ब्लॉक कर दिया गया है, जिससे पूरा परिवार तनाव में है। पीड़ित 3- लादिया मोहल्ला निवासी 45 साल के युवक वेदप्रकाश के नाम साल 2024-25 में 9 करोड़ रुपए कीमत के शराब के दो ठेके चले हैं। उनकी मां सरोज ने बताया कि भुल्ली ने हमारे साथ धोखा किया है। बेटे को शराब पिलाकर उसने आधार कार्ड और खाता नंबर ले लिए। भुल्ली ने बेटे को सात हजार रुपए दिए थे, लेकिन वो भी छोटा-मोटा काम करने के बदले दिए थे। अब सरकारी नोटिस आने पर इस घपले का पता लगा। हम कैसे हर्जाना भरें, हम तो दो रुपए भी देने की स्थिति में नहीं हैं। हमारे पास तो आटा लाने के भी पैसे नहीं रहते हैं। शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए धांधली नियम के अनुसार- गरीबों की दुकान से तय समय में शराब नहीं बिकने पर 7 दिन में इनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाना चाहिए था। इसके बावजूद अलवर के इन पीड़ितों का लाइसेंस साल भर 2024-25 में चालू रखा। मार्च 2025 में इनका लाइसेंस निरस्त किया गया। ऐसे में सीधे तौर पर इन्हें फंसाने वाले शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया। अलवर में शराब ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से 60 करोड़ का घाटा सूत्रों के अनुसार- शराब ठेकेदार गरीब लोगों के नाम पर ली दुकान पर अपना माल बेचकर कम समय में मोटा मुनाफा कमाते हैं। उनके इस काले कारनामे में आबकारी विभाग के कई अफसरों की मिलीभगत होना भी सामने आया है। सरकार के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए आबकारी अधिकारी ने सालभर (2024-2025) ‘मिलीभगत का खेल’ खेला और डिफॉल्टर शराब दुकानों को समय पर निरस्त करने के बजाय वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन का इंतजार किया। इस पूरे खेल में न केवल राजस्व को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि उन्हीं डिफॉल्टर ठेकेदारों को नए नामों से दोबारा दुकानें भी आवंटित कर दी गई हैं। इसका नतीजा रहा कि अलवर जिला शराब के ठेकों से प्राप्त रेवेन्यू में सबसे पीछे चला गया। 2024-2025 में करीब 50 से 60 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। ये वो दुकानें हैं जिनको गरीबों के नाम आवंटित कराया गया। आबकारी विभाग कैसे करेगा वूसली? करोड़ों रुपए की इस चपत के बाद अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस राशि की वसूली की है। अलवर में भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट में साफ हो गया है कि जिन लोगों के नाम पर पहले ये दुकानें थीं, वे केवल कागजी मोहरे थे। उनके पास इतनी संपत्ति या बैंक बैलेंस भी नहीं है कि सरकार उनकी जमीन या कोई स्थायी संपत्ति कुर्क करके इस 50 से 60 करोड़ रुपए की भरपाई कर सके। यानी, सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसे लोगों को आगे किया गया, जिनसे भविष्य में वसूली की कोई गुंजाइश ही न बचे। 160 करोड़ रुपए बाकी, 200 के पास संपत्ति नहीं तत्कालीन आबकारी अधिकारी अर्चना जैमन का हाल में ट्रांसफर हुआ है। उन्होंने कहा- यह सही है कि राजस्थान में 216 में से 200 मामलों में अनुज्ञाधारकों के पास कोई संपति नहीं है। अधिकतर प्रकरण 2023 से पहले के होंगे। इन मामलों में वसूली की जाएगी। एसडीआरआई (स्टेट डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) लिंक निकाल रहा है। उस समय दुकान चलाने वाले दस्तावेजों में मोबाइल नंबर किसके थे। उस नंबर के सही मिलने पर वसूली की जाएगी। पिछले साल हमने पौने दो करोड़ रुपए की रिकवरी की है। अब करीब 160 करोड़ रुपए बकाया है। आबकारी विभाग पर उठे सवाल

