शहीद के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति नहीं, हाईकोर्ट सख्त:कार्मिक और सैनिक कल्याण विभाग को नोटिस; एक सप्ताह में जवाब मांगा
झुंझुनूं में शहीद के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई। राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कार्मिक विभाग और सैनिक कल्याण विभाग को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। दरअसल झुंझुनूं जिले के घनडावा गांव निवासी लालचंद ने वर्ष 2023 में शहीद सैनिक के आश्रित के तौर पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। प्रार्थी ने ‘राजस्थान मृत सशस्त्र बल कार्मिक (शहीद) के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति नियम-2022’ के तहत जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, चिड़ावा के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने यह आवेदन जिला कलेक्टर, झुंझुनू को भेज दिया था। जिन्होंने आगे मार्गदर्शन के लिए इसे संयुक्त शासन सचिव, कार्मिक विभाग, जयपुर को प्रेषित किया। नियमों के बदलाव से फंसा पेंच आवेदन प्रक्रिया के दौरान, कार्मिक विभाग ने 17 अक्टूबर 2024 को एक आदेश जारी किया, जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद के लिए शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाकर ‘सेकेंडरी’ (10वीं) कर दिया गया। इसी नई शैक्षणिक योग्यता का आधार बनाकर जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, चिड़ावा ने 31 अक्टूबर 2025 को प्रार्थी का आवेदन निरस्त कर दिया। फिर दी कोर्ट में चुनौती आवेदन का नियम विरुद्ध निरस्त होने पर प्रार्थी ने अधिवक्ता संजीव महला और विजय पूनियां के माध्यम से उच्च न्यायालय जयपुर में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता संजीव महला ने तर्क दिया कि प्रार्थी ने अपना आवेदन 2023 में किया था, जबकि शैक्षणिक योग्यता संबंधी नियम 2024 में बनाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवेदन के बाद बने नियम प्रार्थी पर लागू नहीं होने चाहिए। अधिवक्ता ने यह कहा कि कोई भी कानून ‘भूतलक्षी’ (पुराने समय से) प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट का आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश गणेश राम मीणा ने प्रार्थी के पक्ष और वकीलों द्वारा दिए गए तर्कों पर सहमति जताई। कोर्ट ने अब कार्मिक विभाग और सैनिक कल्याण विभाग को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

