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3 साल में सिर्फ 36 बुजुर्गों तक पहुंची कृषक सम्मान पेंशन, वजह- जानकारी और सत्यापन की अड़चन

लघु एवं सीमांत बुजुर्ग किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए संचालित वृद्धजन कृषक सम्मान पेंशन योजना का लाभ ब्यावर जिले में अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन साल में जिले के केवल 36 किसानों को ही योजना का लाभ मिल सका, जबकि पूरे राजस्थान में इसी अवधि में 1 लाख 81 हजार 672 किसानों को पेंशन स्वीकृत हुई। विभागीय जानकारी के अनुसार योजना के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले लघु एवं सीमांत कृषक बुजुर्गों को प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। इसके बावजूद जिले में जानकारी के अभाव, दस्तावेजों की कमी और ऑनलाइन सत्यापन की लंबी प्रक्रिया के कारण कई पात्र बुजुर्ग योजना से वंचित रह रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों को आवेदन के लिए ई-मित्र केंद्रों पर जाना पड़ता है। आवेदन के दौरान किसी भी दस्तावेज में त्रुटि मिलने पर उन्हें बार-बार ई-मित्र और संबंधित विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बुजुर्गों के लिए यह प्रक्रिया आसान नहीं होने से आवेदन बीच में ही अटक जाते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का राजस्थान का मूल निवासी तथा लघु या सीमांत किसान होना अनिवार्य है। इसके अलावा बैंक खाते का आधार से लिंक होना जरूरी है। भूमि धारण प्रमाण-पत्र का ऑनलाइन सत्यापन तहसीलदार या नायब तहसीलदार स्तर से किया जाता है। कई मामलों में यह प्रक्रिया 30 दिन से अधिक समय तक लंबित रहने से भी पेंशन स्वीकृत होने में देरी हो जाती है। अन्य योजना के लाभ में पात्रता नहीं- विभाग : विभागीय अधिकारियों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ ले रहा है तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होता। वहीं ऑनलाइन आवेदन में गलत दस्तावेज अपलोड करने या पात्रता संबंधी शर्तें पूरी नहीं होने पर आवेदन निरस्त हो जाता है।

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