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हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं पर रहेगी हर तीसरे दिन नजर:मुख्य सचिव ने दिखाई सख्ती, सुरक्षित प्रसव के लिए नई रणनीति, 24 घंटे तक होगी विशेष निगरानी

राजस्थान में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और हर गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को और अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की समीक्षा बैठक लेकर कहा- हर हाई रिस्क गर्भवती महिला की व्यक्तिगत निगरानी की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं की नामवार सूची तैयार कर उसे संबंधित एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) से जोड़ा जाए। प्रत्येक महिला की नियमित मॉनिटरिंग हो और जरूरत पड़ने पर समय रहते उसे बड़े अस्पताल में रेफर किया जाए। उन्होंने सोमवार सुबह सभी जिलों में एएनएम की बैठक लेकर हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। प्रसव के बाद 24 घंटे तक विशेष निगरानी मुख्य सचिव ने कहा- अस्पतालों में प्रसव के बाद पहले 24 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए धात्री महिलाओं की लगातार निगरानी की जाए, उनके पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए और किसी भी प्रकार की जटिलता सामने आने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाए। बैठक में लेबर रूम प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, एनेस्थीसिया, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चेन और रेफरल सिस्टम जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SOP) का सख्ती से पालन करें, ताकि प्रसव के दौरान किसी तरह की लापरवाही न हो। इन जिलों में सबसे अधिक हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में सामने आया कि जुलाई माह में सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू जिलों में सबसे अधिक हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं चिन्हित हुई हैं। इन जिलों में विशेष निगरानी और अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन 6 ग्राम या उससे कम है या जो गंभीर एनीमिया से पीड़ित हैं और उनकी डिलीवरी की तारीख नजदीक है, उन्हें समय रहते ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एफसीएम इंजेक्शन या आयरन सुक्रोज थेरेपी उपलब्ध कराई जाए। ऐसी महिलाओं की सूची जिला स्तर पर तैयार रखी जाए और संबंधित एएनएम हर तीसरे दिन उनकी स्वास्थ्य जांच करे। सुरक्षित प्रसव की पहले से होगी तैयारी प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा- केवल इलाज ही नहीं, बल्कि प्रसव की पूर्व योजना (Birth Planning) भी बेहद जरूरी है। गर्भवती महिला का किस अस्पताल में प्रसव होगा, जरूरत पड़ने पर रेफरल कैसे होगा और सभी जरूरी जानकारियां ममता कार्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज हों, यह सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सा विभाग की ओर से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, उनकी नियमित निगरानी और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि हर गर्भवती महिला को समय पर उपचार मिले, जटिलताओं की समय रहते पहचान हो और सुरक्षित संस्थागत प्रसव के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

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