अलवर में 72 घंटे बाद खुले श्रीजगन्नाथजी मंदिर के पट:भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु; आज रूपबास रवाना होंगे सीतारामजी
अलवर के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को 72 घंटे बाद श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिए गए। पट खुलते ही मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक उल्लास से गूंज उठा। महिलाओं ने श्रीकृष्ण की वेशभूषा धारण कर हाथों में बांसुरी लेकर भजनों पर मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। अखंड संकीर्तन समाप्त दोपहर करीब पौने 12 बजे परंपरा के अनुसार भगवान श्री सीताराम जी का ध्वजारोहण किया गया। पूर्व महापौर घनश्याम गुर्जर ने मंदिर शिखर पर ध्वजा चढ़ाई। इसके साथ ही 72 घंटे से चल रहे अखंड संकीर्तन का विधिवत समापन हुआ। जलाभिषेक के बाद नए पोशाक पहनाई मंदिर के महंत पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीजगन्नाथ जी का 11 पवित्र नदियों के जल से अभिषेक कर नए वस्त्र धारण कराए गए हैं। मंदिर की रसोइयां भी मंगलवार से फिर शुरू हो गई हैं। शाम को भगवान श्री सीताराम जी सजे-धजे रथ में सवार होकर सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर से रूपबास के लिए रवाना होंगे, जहां भगवान जगन्नाथ के विवाह समारोह की तैयारियों का अवलोकन करेंगे। बुधवार शाम को करेंगे नगर भ्रमण इसके बाद बुधवार शाम भगवान श्रीजगन्नाथ जी इंद्रविमान पर सवार होकर शाही लवाजमे के साथ बारात के रूप में नगर भ्रमण करेंगे। करीब छह किलोमीटर लंबी यह भव्य यात्रा लगभग 14 घंटे में पूरी होगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रभु के दर्शन करेंगे। महंत पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि अलवर को राजस्थान का सिंहद्वार माना जाता है। यहां ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जब भी भगवान श्रीजगन्नाथ रथयात्रा पर निकलते हैं, तब वर्षा अवश्य होती है और प्रभु अपने भक्तों के साथ-साथ तपते अलवर को भी शीतलता प्रदान करते हैं।

