EWS के लिए पंचायत-निकाय चुनाव में आरक्षण की मांग:अलग आयोग बनाने पर भी दिया जोर, अधिकारों को लेकर विप्र फाउंडेशन के किया प्रदर्शन
झुंझुनूं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के संवैधानिक अधिकारों और उनके सही तरीके से लागू करने की मांग को लेकर विप्र फाउंडेशन (जिला इकाई) ने प्रदर्शन किया। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम मांग-पत्र सौंपा। इसमें EWS वर्ग को अन्य आरक्षित वर्गों की तरह सभी सुविधाएं और अधिकार देने के साथ दो प्रमुख मांगें रखी गईं। 103वें संविधान संशोधन का दिया हवाला विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि संविधान के 103वें संशोधन के तहत सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा, रोजगार और समान अवसर देने के लिए 10 प्रतिशत EWS आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर आज भी इस वर्ग के लोगों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। इसी को देखते हुए सरकार से जल्द जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है। पंचायत और निकाय चुनाव में आरक्षण की मांग फाउंडेशन ने मांग की कि आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में EWS वर्ग के लिए सीटें आरक्षित की जाएं। इससे राजनीति और लोकतंत्र में इस वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। EWS आयोग बनाने की मांग मांग-पत्र में राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र और मजबूत EWS आयोग बनाने की मांग भी की गई है। फाउंडेशन का कहना है कि यह आयोग आय सीमा, पात्रता, प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं के सही तरीके से लागू होने की निगरानी करेगा। विप्र फाउंडेशन के जिला संयोजक उमाशंकर महमिया और संगठन महामंत्री रामगोपाल महमिया ने सरकार से आग्रह किया कि EWS वर्ग के हितों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए इन मांगों पर जल्द विचार कर जरूरी कार्रवाई की जाए। मांग-पत्र सौंपने के दौरान कमलकांत शर्मा, नीरज शर्मा, राजदीप महर्षि, संजय शर्मा, ममता शर्मा, एडवोकेट अंजू शर्मा, पूनम शर्मा, विद्या पुरोहित, आशा शरण, उषा शर्मा सहित विप्र फाउंडेशन के कई पदाधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।

