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डीपसीक के सीईओ बने सबसे अमीर एआई स्टार्टअप फाउंडर:8वीं में कॉलेज मैथ्स सुलझाने वाले लियांग अब 3.47 लाख करोड़ के मालिक हैं

चीन की एआई कंपनी डीपसीक के संस्थापक और सीईओ लियांग वेनफेंग (41) दुनिया के सबसे अमीर एआई स्टार्टअप फाउंडर बन गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, कंपनी के नए फंडिंग राउंड के बाद उनकी नेटवर्थ करीब 3.47 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है, जो पहले 1.61 लाख करोड़ रुपए थी। इस बढ़ोतरी के साथ वे ओपनएआई के को-फाउंडर ग्रैग ब्रोकमैन और एंथ्रोपिक के फाउंडर व सीईओ डारियो अमोदेई से आगे निकल गए हैं। पढ़िए लियांग के जीवन से जुड़े किस्से… लगन- एआई मॉडल में इतना डूबे कि अधूरे घर में टेंट लगाकर रहने लगे थे लियांग हर मशीन को समझने की जिद लियांग बचपन से जिज्ञासु थे। स्कूल में जो भी कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक मशीन हाथ लगती, उसे खोलकर ठीक करने लगते। कई बार पुर्जे निकालने और उसे ठीक करने के चक्कर में घरवालों और शिक्षकों की डांट भी खाई, लेकिन आदत नहीं बदली। यही जिद आगे एआई चिप बनाने में उनके काम आई। स्कूल में बन गए मैथ जीनियस वे आठवीं में ही कॉलेज स्तर का गणित पढ़ने लगे। एक बार शिक्षक ने कॉलेज लेवल का सवाल देकर परखा, लेकिन लियांग ने कुछ मिनटों में उसका हल निकाल दिया। इसके बाद उन्हें स्कूल में ‘मैथ जीनियस’ कहा जाने लगा। इसमें माता-पिता का काफी रोल है। पेशे से शिक्षक लियांग के माता-पिता ने कभी बेटे के रिजल्ट या रैंक पर ज्यादा जोर नहीं दिया। वे बस यही पूछते ‘आज क्या नया सीखा?’ या ‘कौन-सी नई समस्या हल की?’ वे जवाब याद करने से ज्यादा सवालों के हल खोजते थे। चिप्स पर लगाया दांव 2019 में जब कंपनियां एआई को गंभीरता से नहीं ले रही थीं, तब लियांग ने एआई मॉडल बनाने के लिए 10 हजार चिप खरीदी। लोगों ने इसे मूर्ख व फिजूलखर्ची बताया। लियांग ने कहा, ‘एआई के दौर में चिप्स नहीं मिलेंगी।’ बाद में लोगों को यह बात समझ आई। एआई मॉडल में इतना डूबे कि अधूरे घर में टेंट लगाकर रहते थे इंजीनियरिंग में मास्टर्स लियांग काम को लेकर इतने जुनूनी थे कि नया घर खरीदने के बाद भी उसे पूरा नहीं कराया। उनका पूरा ध्यान कोड और एआई मॉडल बनाने पर था। रहने के लिए उन्होंने अधूरे मकान के अंदर ही एक टेंट लगा लिया और वहीं रातें बिताने लगे। कुछ साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 2025 में डीपसीक की सफलता के बाद चीनी नववर्ष पर उनके गांव मिलिलिंग में स्वागत के पोस्टर लग गए। तब लियांग नहीं मिले तो लोग उनके दादा के साथ ही फोटो खिंचवाकर लौट जाते।

वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान पहली बार मिस वर्ल्ड में हिस्सा लेगा; 24 वर्षीय अनीका जमाल इकबाल रिप्रेजेंट करेंगी

पाकिस्तान पहली बार मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में आधिकारिक तौर पर हिस्सा लेने जा रहा है। 24 साल की अनीका जमाल इकबाल को मिस वर्ल्ड पाकिस्तान 2026 का ताज पहनाया गया है। वह मिस वर्ल्ड के 73 साल के इतिहास में पाकिस्तान का पहला आधिकारिक प्रतिनिधित्व करेंगी। अनीका फिलहाल अकाउंटिंग और ऑडिटिंग में मास्टर्स कर रही हैं। वह इससे पहले मिस अर्थ, मिस ग्लोबल, मिस कॉस्मो, मिस इको इंटरनेशनल और मिस ऑरा इंटरनेशनल जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पेजेंट में पाकिस्तान को रिप्रेजेंट कर चुकी हैं। मिस पाकिस्तान वर्ल्ड संगठन की अध्यक्ष सोनिया अहमद ने इसे पाकिस्तान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। 2002 में बना यह संगठन पिछले दो दशक से अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी प्रतियोगिताओं के लिए पाकिस्तानी प्रतिभागियों को तैयार कर रहा है। हालांकि मिस वर्ल्ड में यह पाकिस्तान की पहली आधिकारिक एंट्री होगी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… एंडी बर्नहम बने लेबर पार्टी के नए नेता, सोमवार को PM पद की शपथ लेंगे एंडी बर्नहम को शुक्रवार को ब्रिटेन की सत्ताधारी लेबर पार्टी का नया नेता चुन लिया गया है। 56 वर्षीय बर्नहम अगले हफ्ते 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे। बर्नहम पिछले महीने कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद नेतृत्व की दौड़ में एकमात्र उम्मीदवार थे। सोमवार को किंग चार्ल्स तृतीय उन्हें नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसके बाद स्टार्मर औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपेंगे। बर्नहम ब्रिटेन के एक दशक में सातवें प्रधानमंत्री होंगे। अपने पहले भाषण में बर्नहम ने कहा कि यह लेबर पार्टी के लिए बदलाव लाने का आखिरी मौका है। उन्होंने कहा, “मैं नेतृत्व के लिए तैयार हूं।” उन्होंने स्टार्मर के काम की सराहना करते हुए कहा कि वह एक ऐसी नई राह पर चलेंगे, जिसमें राजनीतिक माहौल कम जहरीला होगा और वेस्टमिंस्टर की केंद्रीय शक्ति कम होगी। चीन के चोंगकिंग में भूस्खलन से कई मकान ढहे; कई लोगों के मलबे में दबने की आशंका दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग शहर के पेंगशुई काउंटी में शुक्रवार सुबह हुए भूस्खलन से कई रिहायशी मकान ढह गए। हादसा उस समय हुआ, जब प्रशासन पहाड़ी से पत्थर गिरने की चेतावनी के बाद 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का अभियान चला रहा था। इसी दौरान सुबह 9:08 बजे बड़ा भूस्खलन हुआ और कई लोग मलबे में दब गए। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, अब तक 9 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। हालांकि, मलबे में फंसे लोगों की संख्या का सत्यापन अभी जारी है। सरकारी प्रसारक CCTV के मुताबिक, सुबह करीब 8 बजे एक सामुदायिक कर्मचारी ने पहाड़ी से पत्थर गिरते देख प्रशासन को सूचना दी थी। चेतावनी जारी होने के बाद निकासी अभियान शुरू किया गया, लेकिन उसके करीब एक घंटे बाद ही भूस्खलन हो गया। जापान के पूर्व मंत्री बोले- भारत के रवैये से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट लेट हुआ; वादे नहीं निभाए, बार-बार फैसला बदला भारत-जापान के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारतीय पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। X पर की गई पोस्ट में उन्होंने लिखा कि प्रोजेक्ट के लेट होने की सबसे बड़ी वजह भारत का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं। उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गया। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलता रहा। उन्होंने यह भी लिखा कि इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। माकिहारा के मुताबिक, जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। पूर्व मंत्री ने अपनी पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की एक रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया है कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया। हालांकि, ये आरोप हिदेकी माकिहारा की X पोस्ट और उनके साझा किए गए लेख पर आधारित हैं। भारत सरकार या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पूरी खबर पढ़ें चीन ने ब्रेन-चिप तकनीक में मारी बाजी: पहली कॉमर्शियल चिप का सफल प्रत्यारोपण चीन ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक में अहम उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार व्यावसायिक रूप से स्वीकृत ब्रेन चिप का सफल प्रत्यारोपण किया है। शंघाई में सोमवार को हुई सर्जरी में NEO नाम की चिप एक ऐसे मरीज के मस्तिष्क की सतह पर लगाई गई, जिसकी 10 वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में स्पाइनल कॉर्ड को गंभीर चोट लगी थी और लंबे इलाज के बावजूद उसके हाथों की कार्यक्षमता पूरी तरह वापस नहीं आ सकी थी। सर्जरी के दौरान सिक्के के आकार की NEO चिप को मस्तिष्क की सतह पर स्थापित किया गया। यह चिप मस्तिष्क के संकेतों को पढ़कर कंप्यूटर तक भेजती है। कंप्यूटर इन संकेतों को कमांड में बदलकर रोबोटिक ग्लव संचालित करता है, जिससे मरीज हाथों की गतिविधियां करने में सक्षम हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की हालत स्थिर है। चिप ने स्थिर और उच्च गुणवत्ता वाले ब्रेन सिग्नल रिकॉर्ड किए हैं। NEO चिप को चीन की मेडिकल रेगुलेटरी अथॉरिटी ने मार्च में मंजूरी दी थी। इसके साथ ही यह क्लिनिकल ट्रायल से आगे बढ़कर अस्पतालों में व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध हो गई है। इस उपलब्धि के साथ चीन की स्टार्टअप Neuracle को ब्रेन-चिप के व्यावसायीकरण की दौड़ में इलॉन मस्क की न्यूरालिंक से आगे माना जा रहा है, क्योंकि न्यूरालिंक को अभी अमेरिका में पूर्ण व्यावसायिक मंजूरी नहीं मिली है। रूस का दावा- यूक्रेन के ड्रोन केंद्रों और ब्लैक सी बंदरगाहों पर किए सटीक हमले रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी सेना ने बुधवार रात यूक्रेन के ड्रोन निर्माण एवं भंडारण केंद्रों, ओडेसा और युज़नी बंदरगाहों की सैन्य अवसंरचना तथा ईंधन भंडार पर सटीक हमले किए। मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक ढांचे और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुंचाना था। रूसी मंत्रालय के मुताबिक, कीव में उन परिसरों को निशाना बनाया गया जहां मध्यम और लंबी दूरी के ड्रोन तथा उनके पुर्जों का निर्माण और भंडारण किया जाता था। रूस ने कहा कि ओडेसा और युज़नी बंदरगाहों पर स्थित सैन्य कार्गो और ईंधन भंडारण सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा यूक्रेनी सेना के लिए उपयोग किए जाने वाले पांच ईंधन भंडारण टैंक नष्ट करने का भी दावा किया गया है। युगांडा में स्कूल बस हादसा, 20 बच्चों समेत 21 की मौत; एजुकेशनल टूर से लौट रहे थे छात्र पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में एक स्कूल बस हादसे में 20 बच्चों समेत एक शख्स की मौत हो गई। AP के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार रात पूर्वी युगांडा के कपचोरवा जिले में हुआ। पुलिस के मुताबिक, सभी छात्र एजुकेशनल टूर के तहत सिपी फॉल्स घूमकर लौट रहे थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि चालक ने बस से नियंत्रण खो दिया। इसके बाद बस सड़क से उतरकर एक चट्टान से टकराई और पलट गई। हादसे में कई बच्चों समेत 3 लोग घायल भी हुए हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने फिलहाल घायलों की सटीक संख्या नहीं बताई है। फ्रांस में असिस्टेड डाइंग बिल को संसद की मंजूरी: लाइलाज बीमारी से जूझ रहे वयस्कों को सख्त शर्तों पर मिलेगी अनुमति फ्रांस की नेशनल असेंबली ने असिस्टेड डाइंग (चिकित्सकीय सहायता से जीवन समाप्त करने) संबंधी विधेयक को 291-241 वोटों से अंतिम मंजूरी दे दी है। कानून लागू होने पर असाध्य और जानलेवा बीमारी से पीड़ित पात्र वयस्क मरीज डॉक्टर की निगरानी में सख्त शर्तों के तहत घातक दवा लेकर अपना जीवन समाप्त कर सकेंगे। हालांकि, कानून लागू होने से पहले इसे संवैधानिक परिषद की मंजूरी मिलना जरूरी होगा। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उन्होंने 2022 में फ्रांसीसी जनता से किया गया वादा पूरा किया है। विधेयक के तहत केवल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के फ्रांसीसी नागरिक या कानूनी निवासी, जो लाइलाज और जानलेवा बीमारी के अंतिम चरण में हों तथा असहनीय पीड़ा झेल रहे हों, आवेदन कर सकेंगे। मरीज का आवेदन पहले चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम जांचेगी। समीक्षा के लिए 15 दिन का समय होगा और कम से कम दो दिन की विचार-अवधि के बाद मरीज को दोबारा अपनी सहमति देनी होगी। मंजूरी मिलने पर वह घर या स्वास्थ्य केंद्र सहित अपनी पसंद की जगह पर दवा ले सकेगा। कानून में केवल मानसिक पीड़ा को पात्रता का आधार नहीं माना गया है। गंभीर मानसिक रोगों या अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से पीड़ित लोग इसके दायरे में नहीं आएंगे। पूरी प्रक्रिया का खर्च फ्रांस की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा प्रणाली वहन करेगी।

अमेरिका का भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक:कंट्रोल टावर को बनाया निशाना; लगातार छठी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की

अमेरिका ने शुक्रवार को लगातार छठी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इस दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट को भी निशाना बनाया गया। हमले में पोर्ट के कंट्रोल (निगरानी) टावर को नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कंट्रोल टावर के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीर भी शेयर की है। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर ने चाबहार पोर्ट और कंट्रोल टावर पर अमेरिकी हमले की पुष्टि की है। पिछले एक हफ्ते में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। CENTCOM ने कहा कि हमलों में तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। भारत ने इसके विकास में निवेश किया है और इसका संचालन भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) कर रही है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराता है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान बोला- अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम होगा: ईरानी सांसद बेहनाम सईदी ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया, तो अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम कर दिया जाएगा। 2. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर खतरा बढ़ा: ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे पर हमला करता है तो वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने के लिए तैयार रहें। 3. होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 9 जहाज गुजरे: समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को सिर्फ 9 जहाजों ने होर्मुज पार किया। मंगलवार को यह संख्या 13 थी। 4. होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं होगी: भारत सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं। 5. कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला: ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ट्रम्प बोले- 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई:चीन ने 22 करोड़ वोटर्स का डेटा चुराया, खुफिया एजेंसियों ने जानकारी छिपाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को चुनाव सुरक्षा पर राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी। ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक यानी डिक्लासिफाई कर रही है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी इन दस्तावेजों के मुताबिक, चीन ने 2020 के चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा चुराया था। ट्रम्प के अनुसार, 18 राज्यों का वोटर डेटा हैक या हासिल किया गया। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि CIA, FBI और दूसरी खुफिया एजेंसियों को इसकी जानकारी थी, लेकिन इसे राष्ट्रपति, कांग्रेस और जनता से छिपाया गया। हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सार्वजनिक दस्तावेज उनके सभी दावों की स्पष्ट पुष्टि नहीं करते। वहीं, 2020 के चुनाव के बाद हुई जांच, ऑडिट, पुनर्गणना और अदालतों की सुनवाई में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के सबूत नहीं मिले थे। ट्रम्प के चुनाव सुरक्षा संबोधन की 5 बड़ी बातें 1. अमेरिका में 2.78 लाख गैर-नागरिक वोटर रजिस्टर्ड ट्रम्प ने कहा कि DHS की जांच में करीब 2.78 लाख गैर-नागरिक संघीय चुनावों के लिए वोटर के रूप में रजिस्टर्ड मिले। उनका दावा है कि असली संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है। 2. वोटिंग मशीनें हैक होने का दावा: ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी वोटिंग मशीनें, वोटर डेटाबेस और बैलेट काउंटिंग सिस्टम साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील हैं। उन्होंने रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया को संभावित खतरा बताया। 3. जांच और कार्रवाई का आदेश: ट्रम्प ने चुनाव सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज डिक्लासिफाई करने का ऐलान किया और DNI, FBI, CIA व न्याय विभाग से मामले की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर आपराधिक केस दर्ज करने को कहा। 4. मीडिया पर आरोप- धांधली छिपाने में शामिल ट्रम्प ने NBC और ABC पर उनका संबोधन नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मीडिया का एक हिस्सा चुनावी धांधली की सच्चाई सामने नहीं आने देना चाहता और साजिश का हिस्सा है। 5. चुनावी सिस्टम में सुधार जरूरी ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका को दुनिया का सबसे सुरक्षित और निष्पक्ष चुनावी सिस्टम चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा टूट चुका है और चुनाव सुरक्षा किसी एक पार्टी नहीं, पूरे देश का मुद्दा है। ट्रम्प के संबोधन से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

बांग्लादेश ने भारत की जगह चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट:बदले में ₹7 हजार करोड़ का सॉफ्ट लोन; भारत ने ₹9 हजार करोड़ का ऑफर दिया था

बांग्लादेश और चीन के संबंधों में ‘चीनी’ कुछ ज्यादा ही घुलने लगी है। बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने तीस्ता नदी प्रोजेक्ट में भारत के इन्वेस्टमेंट ऑफर को ना कर इसे चीन को सौंप दिया है। चीन लगभग 9 हजार करोड़ रुपए के तीस्ता रिवर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट (TRMP) में ₹7 हजार करोड़ सॉफ्ट लोन के रूप में देगा। बांग्लादेश को इसे 50 साल में चुकाना होगा। जबकि भारत ने चीन को बाहर रखने के लिए 2024 में तत्कालीन शेख हसीना सरकार को 9 हजार करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं किया। अब रहमान सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना से समझौता किया है। इस जीटूजी एग्रीमेंट के तहत चीन के इंजीनियरों का दल पिछले हफ्ते ही बांग्लादेश आया था। लगभग 50 इंजीनियरों और टेक्नीकल स्टाफ ने तीस्ता कैचमेंट एरिया का सर्वे किया। इस मानसून में तीस्ता नदी का सर्वे करेगा चीन सूत्रों के अनुसार इस मानसून के दौरान चीन का दल तीस्ता नदी के फ्लो का आकलन कर बांध, जेट्‌टी और अन्य निर्माण कार्यों का प्लान तैयार करेगा। साथ ही इस सीजन में तीस्ता कैचमेंट एरिया में सिल्ट (तलछट) की सफाई में भी चीन ने सहयोग का वादा किया है। बांग्लादेश की मांग थी कि तीस्ता के रन ऑफ (अतिरिक्त बहाव) को चीन इसी मानसून में रोके। जिससे कि अगले साल से प्रस्तावित प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले ही बांग्लादेश तीस्ता नदी के पानी का खरीफ ​की बुआई के लिए ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर सके। चीन सेना के इंजीनियर भी प्रोजेक्ट कंपनी में 1. पूर्वोत्तर का एंट्री पॉइंट: परियोजना क्षेत्र (नीलफामारी और रंगपुर) भारतीय सीमा से 10-12 किमी जबकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) से 22 किमी दूर है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को जोड़ता है। पूर्वोत्तर के एंट्री पॉइंट के लिए खतरा हो सकता है। 2. पावर चाइना कंपनी सेना से जुड़ी: पावर चाइना स्वतंत्र व्यावसायिक कंपनी नहीं, बल्कि चीन की सैन्य-नागरिक फ्यूजन नीति से गहराई से जुड़ी सरकारी कंपनी है। ये कंपनी एशिया और अफ्रीका में कई मल्टी पर्पज प्रोजेक्ट्स काे चला रही है। कंपनी में चीन सेना की इंजीनियरिंग काेर के भी लाेग होते हैं। 3. दो-मोर्चों पर चुनौती: सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता है कि सैकड़ों चीनी इंजीनियरों और तकनीशियनों की भारत की पूर्वोत्तर की संवेदनशील सीमा पर लंबे समय तक मौजूदगी भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी। भारत के पूर्वी मोर्चे पर चीन अपनी पैठ को और बढ़ाने में जुट सकता है। बड़ी डिफेंस डील की तैयारी, चीन फाइटर जेट देगा सूत्रों के अनुसार पीएम तारिक रहमान के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल शमशुल इस्लाम ने हाल में चीन के राजदूत के साथ मुलाकात की थी। इसमें बांग्लादेश को चीन के साथ जे सीरीज फाइटर जेट्स देने पर चर्चा हुई। बताया जाता है कि चीन अक्टूबर में 12 जेट्स की पहली खेप देने वाला है। ————————- भारत-बांग्लादेश से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश ने भारत से छीनकर चीन को दिया मोंगला पोर्ट; सिर्फ 80 किमी दूर बैठेगा चीन, ये कितनी बड़ी चिंता 22 से 26 जून 2026 तक बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान चीन में थे। इसी दौरान बांग्लादेश ने अपने मोंगला पोर्ट का प्रोजेक्ट भारत से छीनकर चीन को दे दिया। यानी हमारे तट से महज 80 किमी दूर मोंगला पोर्ट पर चीन बैठेगा। पूरी खबर पढ़ें…

विश्व कप मैच के बाद फॉकलैंड पर फिर भिड़े अर्जेंटीना-ब्रिटेन:ब्रिटिश वॉरशिप के समुद्री इलाके में घुसने का आरोप; खिलाड़ियों के बैनर से विवाद बढ़ा

फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराने के कुछ घंटों बाद अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच फॉकलैंड द्वीप को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। अर्जेंटीना ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी का वॉरशिप HMS मेडवे बिना अनुमति उसके समुद्री क्षेत्र में घुस आया।

अर्जेंटीना ने इसे सैन्य घुसपैठ करार दिया। विदेश मंत्री पाब्लो क्विर्नो ने कहा कि इस मामले में ब्रिटिश दूतावास के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं ब्रिटेन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यात्रा की जानकारी पहले ही अर्जेंटीना सरकार को दे दी गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थी। यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब इंग्लैंड को हराकर फाइनल में पहुंचने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर ‘लास माल्विनास सन अर्जेंटीना’ (माल्विनास अर्जेंटीना का है) लिखा बैनर लहराया। अर्जेंटीना में फॉकलैंड को माल्विनास कहा जाता है। इस घटना के बाद दोनों देशों का पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया। अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति ने इंग्लैंड को समुद्री लुटेरा कहा मैच से पहले अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया वियारुएल ने इंग्लैंड को आक्रमणकारी और कब्जा करने वाले समुद्री लुटेरे तक कहा था। मैच जीतने के बाद उन्होंने खिलाड़ियों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “फॉकलैंड अर्जेंटीना का है। हमें स्टेडियम में यह बैनर ले जाने से रोका गया, लेकिन वे भूल गए कि माल्विनास हमारे खून और हमारे दिल में बसता है।” ब्रिटेन ने नाराजगी जताई, कहा- खेल में राजनीति न हो वहीं, ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी पीटर काइल ने खिलाड़ियों के बैनर को पूरी तरह अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल में राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और फीफा को जांच करनी चाहिए कि कहीं खिलाड़ियों ने राजनीतिक संदेश देने संबंधी नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया। उन्होंने कहा, “राजनीति को फुटबॉल से दूर रहना चाहिए। आगे क्या कार्रवाई होगी, इसका फैसला अब फीफा करेगा।” फॉकलैंड को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन में 44 साल से विवाद फॉकलैंड द्वीप का मामला ब्रिटेन और अर्जेंटीना दोनों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। दोनों देश इस पर दावा करते हैं। अर्जेंटीना इस द्वीप को माल्विनास कहता है। फॉकलैंड दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित हैं और अर्जेंटीना से सिर्फ 500 किमी दूर है। वहीं ब्रिटेन से यह 13,000 किमी दूर स्थित है। अर्जेंटीना ऐतिहासिक रूप से इस द्वीप को अपना बताता आया है। अर्जेंटीना का कहना है कि ये द्वीप उसके पास होने चाहिए, क्योंकि ये उसके इलाके के करीब हैं। वहीं ब्रिटेन कहता है कि वहां रहने वाले लोग खुद को ब्रिटिश मानते हैं और उन्होंने वोट करके भी ब्रिटेन के साथ रहने की इच्छा जताई है, इसलिए यह उसका क्षेत्र है। 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने सेना भेजकर सिर्फ 10 हफ्ते में इन्हें वापस हासिल किया था। अर्जेंटीना के आत्मसमर्पण करने से पहले लगभग 650 अर्जेंटीनाई सैनिक और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे। फॉकलैंड पर ब्रिटेन का रुख क्या है ब्रिटेन ने दोहराया कि फॉकलैंड द्वीप के लोगों ने कई बार जनमत के जरिए ब्रिटिश क्षेत्र बने रहने की इच्छा जताई है। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा- ब्रिटेन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। फॉकलैंड द्वीप के लोग ब्रिटिश हैं और अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार उन्हीं के पास है।

बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका:ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा

म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।

जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री के बाद अब रक्षामंत्री को भी हटाया:ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ा था, फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 साल के फेडोरोव यूक्रेन के ड्रोन युद्ध कार्यक्रम का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते थे। उन्हें यूक्रेन में ड्रोन और रोबोट की मदद से युद्ध लड़ने की रणनीति का प्रमुख समर्थक माना जाता था। उनके हटने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि रूस जैसी बड़ी सेना का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की नई तकनीक और ड्रोन पर आधारित रणनीति आगे भी पहले की तरह जारी रहेगी या नहीं। फेडोरोव को हटाया जाना जेलेंस्की सरकार में बड़े बदलाव का हिस्सा है। इसी फेरबदल में प्रधानमंत्री को भी हटाया गया है। पहले डिजिटल मंत्री थे, फिर बने रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री बनने से पहले फेडोरोव यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (ई-गवर्नेंस) मंत्री थे। वे कई वर्षों तक जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद तकनीकी सलाहकार भी रहे। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने सेना में नई तकनीक, ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया। उसी दौरान यूक्रेन के कई पुराने ड्रोन प्रोजेक्ट सफल होने लगे। यूक्रेन ने रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लगातार ड्रोन हमले किए और कब्जे वाले क्रीमिया को निशाना बनाकर वहां रूसी सेना की आपूर्ति और ठिकानों पर हमले किए। इन सफलताओं से यूक्रेन में लोगों का भरोसा बढ़ा कि नई तकनीक के जरिए रूस का मुकाबला किया जा सकता है। शुरुआत से ही सेना के जनरलों से मतभेद रहे कई रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री फेदोरोव को हटाने के पीछे भ्रष्टाचार या नाकामी नहीं, बल्कि सेना के शीर्ष जनरलों और कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के साथ उनका गहरा मतभेद था। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के तुरंत बाद से ही फेडोरोव की उनसे बहस होने लगी थी। फेडोरोव का मानना था कि भविष्य का युद्ध ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक से लड़ा जाएगा। लेकिन सिरस्की का कहना था कि यह सोच पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना था कि युद्ध जीतने के लिए अब भी सैनिकों को मोर्चे पर जाकर लड़ना पड़ेगा। केवल ड्रोन से युद्ध नहीं जीता जा सकता। दोनों के बीच आपसी बातचीत भी बंद हो गई थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कमान के इस टकराव को सुलझाने के लिए सेना के जनरलों का पक्ष लिया और फेदोरोव को हटाने का फैसला किया। रक्षा उद्योग की बड़ी कंपनियां भी नाराज हो गईं फेडोरोव ने हथियार खरीदने की व्यवस्था बदलने की कोशिश की। इससे अरबों डॉलर के रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठेकेदार उनके विरोधी बन गए। उन्होंने ब्रेव-1 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसे लोग ‘हथियारों का अमेजन’ कहते थे। इसके जरिए सैनिक अपनी जरूरत के कुछ हथियार और उपकरण खुद ऑनलाइन चुन सकते थे और मंगा सकते थे। इसके अलावा उन्होंने डॉटचेन नाम का एक और प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। इन दोनों सिस्टम की वजह से हथियार खरीदने की पारंपरिक सरकारी प्रक्रिया कमजोर होने लगी। इससे हथियार कंपनियों की लॉबिंग और बंद कमरों में होने वाले रक्षा सौदों पर असर पड़ा। यही वजह थी कि कई बड़े रक्षा ठेकेदार उनके खिलाफ हो गए। सेना के भीतर भी विरोध था सेना के कुछ अधिकारियों का कहना था कि फेडोरोव के पास सैन्य अनुभव नहीं था। उनके आलोचकों का कहना था कि वे युद्ध का अनुभव रखने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि अच्छी प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) देने वाले व्यक्ति हैं। उनके कई वरिष्ठ सहयोगी भी पहले डिजिटल मंत्रालय में काम करते थे। वे सेना से नहीं आए थे। इस वजह से भी सेना के भीतर उनके नेतृत्व पर सवाल उठते रहे। फेडोरोव के एक वरिष्ठ सहयोगी ने स्केल्या (Skelya) नाम की हमलावर सैन्य यूनिट की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि उस यूनिट को लड़ाई में भारी नुकसान हुआ। इसके जवाब में स्केल्या यूनिट ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें युद्ध की इतनी समझ है तो वे खुद मोर्चे पर जाकर हमला करके दिखाएं। यह विवाद भी काफी चर्चा में रहा। रक्षामंत्री की लोकप्रियता भी परेशानी बन गई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फेडोरोव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। वे ड्रोन कार्यक्रम का चेहरा बन चुके थे और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। कीव स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक पेंटा सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रमुख वोलोदिमिर फेसेन्को ने कहा, “जेलेंस्की चाहते हैं कि सरकार में सबसे बड़ा चेहरा वही बने रहें।” फेसेन्को ने यह भी कहा कि फेडोरोव को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा था। संभव है कि जेलेंस्की ने इसे भी अपने लिए राजनीतिक खतरे के रूप में देखा हो। यूक्रेन की समाचार वेबसाइट उक्राइन्स्का प्रावदा के मुताबिक, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने राजनीतिक सहयोगियों से कहा कि फेडोरोव, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग के बीच बढ़ते विवाद अब उनके लिए संभालना मुश्किल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह बनी कि आखिरकार जेलेंस्की ने उन्हें रक्षा मंत्री के पद से हटाने का फैसला किया।

जापान राजवंश में उत्तराधिकारी का संक​ट:किंग नारुहितो को बेटा नहीं, बेटी को हक नहीं; सरकार नए सम्राट की तलाश में जुटी

जापान में सानाए ताकाइची ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रचा है, लेकिन दुनिया के सबसे पुराने जापान के राजवंश में राजगद्दी महिला को सौंपने पर रोक है। करीब 2600 साल पुराना यह राजवंश अब उत्तराधिकारी के संकट से जूझ रहा है। मौजूदा कानून के अनुसार, केवल सम्राट का बेटा ही सम्राट बन सकता है। इस समय पूरे राजवंश में केवल चार पुरुष बचे हैं। इनमें सम्राट नारुहितो (66), उनके छोटे भाई आकिशिनो (60) और चाचा हिताची (90) हैं। आकिशिनो का एक बेटा 19 वर्षीय हिसाहितो हैं। 40 वर्षों में राजवंश में वयस्क होने वाले वे पहले पुरुष हैं। सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी 24 वर्षीय प्रिंसेस आइको हैं। हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश जापानी आइको को ‘साम्राज्ञी’ के रूप में देखना चाहते हैं, लेकिन इसमें 1889 का ‘इंपीरियल हाउस लॉ’ बाधक है। इस कानून में महिलाओं के राजगद्दी संभालने पर रोक है। साथ ही अगर कोई राजकुमारी किसी आम नागरिक से शादी करती है, तो उसे राजपरिवार छोड़ना होता है। रूढ़िवादी जापानी इस कानून के प्रबल समर्थक हैं। वहीं, राजवंश में उत्तराधिकार संकट से निपटने के लिए ताकाइची सरकार ने संसद में बिल पेश किया है। इसके तहत 1947 में राजवंश परिवार से अलग की गई शाखाओं के अविवाहित पुरुषों को गोद लेकर उत्तराधिकारियों का दायरा बढ़ाया जाएगा। लेकिन इस बिल में राजकुमारी आइको या उनके होने वाले बच्चों के लिए कोई जगह नहीं है। चुओ यूनिवर्सिटी में शाही वंशावली के विशेषज्ञ प्रो. माकोटो ओकावा के अनुसार, ‘इतिहास में जापान में आठ महिला सम्राट (1889 से पहले) रह चुकी हैं। इसलिए महिलाओं को बाहर रखना कोई ऐतिहासिक परंपरा नहीं, बल्कि एक सोच है। जब तक महिलाओं को उत्तराधिकार से बाहर रखा जाएगा, तब तक राजपरिवार में स्थिरता लाना संभव नहीं होगा।’ 1947 में राजपरिवार का दायरा घटाने से समस्या
जापान में 592 से 1771 तक 8 महिलाओं ने सम्राट के रूप में शासन किया था, पर 1889 के कानून ने इस सिलसिले को रोक दिया। अगर भविष्य में नारुहितो की कोई संतान नहीं होती या केवल बेटियां होती हैं, तो इस राजवंश का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। बता दें कि 1947 में जापान के संविधान में संशोधन किया गया, जिससे 11 राजकुमारों को अपने पद से हटना पड़ा और वे आम नागरिक बन गए।

कनाडा में जंगल की आग के बीच फंसी ट्रेन:ट्रक से भिड़ंत, कर्मचारियों ने पैदल भागकर जान बचाई; घटना का वीडियो वायरल

कनाडा के ओंटारियो प्रांत में भीषण जंगल की आग के बीच कैनेडियन नेशनल रेलवे के कर्मचारी मौत के बेहद करीब पहुंच गए। धुएं के कारण विजिबिलिटी लगभग खत्म हो गई थी। इसी दौरान एक ट्रक में आग लग गई और वह ट्रेन से टकरा गया। हालांकि, सभी कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंजन के चारों ओर धधकती आग, वीडियो में कैद हुआ खौफनाक मंजर वायरल वीडियो में ट्रेन के इंजन की खिड़कियों के बाहर चारों ओर जंगल में आग की ऊंची लपटें दिखाई देती हैं। आसमान नारंगी रंग का नजर आता है और कर्मचारी तत्काल निकासी की मांग करते सुनाई देते हैं। वीडियो ने सोशल मीडिया पर रेलवे सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। ट्रक में लगी आग, ट्रेन से टकराया CN रेलवे के अनुसार, घने धुएं के बीच एक ट्रक आग की चपेट में आ गया और ट्रेन से टकरा गया। इसके बाद सभी कर्मचारी पैदल ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। हालांकि, किसी भी कर्मचारी को चोट नहीं आई। रेल संचालन रोका, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को निकाला घटना के बाद CN रेलवे ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाके में सभी रेल सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कंपनी ने आर्मस्ट्रॉन्ग कस्बे के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। यह इलाका उत्तर-पश्चिमी ओंटारियो में जंगल की आग से प्रभावित है। विपक्ष ने उठाए सुरक्षा पर सवाल ओंटारियो की NDP के विधायक सोल ममाक्वा ने कहा कि वीडियो रिकॉर्ड करने वाले कर्मचारी को कंपनी की कार्रवाई का डर है, क्योंकि ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाना कंपनी की नीति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उस समय कर्मचारी की प्राथमिकता अपनी जान बचाना थी और कंपनी को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय उनका सहयोग करना चाहिए। तीन ट्रेनें जंगल की आग वाले इलाके में खड़ीं ओंटारियो प्रांतीय पुलिस (OPP) ने बताया कि कॉलिन्स फर्स्ट नेशन के पास ज्वलनशील सामग्री ले जा रही तीन ट्रेनें जंगल की आग के कारण रोक दी गई हैं। फिलहाल आम लोगों के लिए तत्काल खतरा नहीं बताया गया है, लेकिन रेलवे और आपातकालीन एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं। उत्तर-पश्चिमी ओंटारियो में 150 जगहों में जंगल की आग प्रदेश में करीब 150 जगहों पर जंगल की आग जल रही हैं। कई समुदायों में अनिवार्य निकासी के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में प्रतिबंधित अग्नि क्षेत्र (Restricted Fire Zone) लागू कर दिया है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा आपातकालीन जरूरत का सामान तैयार रखने की अपील की है।