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पहले परीक्षा-रद्द, फिर एग्जाम सेंटर में बारिश में भीगी आंसर-शीट:हादसे में घायल मां एग्जाम सेंटर लेकर बेटे को पहुंची थी; पढ़ें नीट में पास स्टूडेंट्स की कहानी

नीट परीक्षा में पास हुए कई स्टूडेंट्स की ऐसी कहानियां भी सामने आई, जिनमें बच्चों और उनके पेरेंट्स ने एक-दूसरे के लिए मोटिवेशन का काम किया। कोटा के आर्यन की नीट में 3164वीं रैंक आई। उन्होंने कहा- पहली नीट परीक्षा में मेरे 648 अंक आए, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई। वहीं दोबारा हुई परीक्षा में केंद्र में मेरी सीट खिड़की के पास थी। परीक्षा शुरू होने के एक घंटे बाद तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। खिड़की से आती बारिश की बूंदों से उत्तर पुस्तिका भीग गई थी। कोशिश करते हुए कॉपी को बचाया। वहीं बिहार के पटना के रहने वाले रणवीर की 39वीं रैंक आई है। रणवीर की मां निशि सिंह ने बताया- एग्जाम से दो दिन पहले टेम्पो पलटने से मेरे सिर में चोट लग गई थी। इसके बाद भी बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए एग्जाम के दिन उसे सेंटर पर छोड़ने गई थी। बता दें कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी का रिजल्ट एनटीए ने गुरुवार देर रात घोषित कर दिया है। परिणामों में कोटा कोचिंग के स्टूडेंट्स ने सफलता हासिल की है। पढ़ें ऐसे स्टूडेंट्स की कहानी। पहली परीक्षा रद्द होने पर नहीं हारी हिम्मत बूंदी जिले के छोटे से गांव भवानीपुरा के रहने वाले आर्यन की नीट में 3164वीं रैंक आई है। वे सालों से परिवार के साथ कोटा रह रहे हैं। पिता मुरलीधर स्टेशनरी का काम करके किसी तरह परिवार का खर्च चलाते हैं। आर्यन ने कहा- घर इतना छोटा है कि पढ़ाई के लिए अलग कमरा नहीं है। एक कमरे में पूरा परिवार खाना खाता, उठता-बैठता और रात को सोता है। आर्यन ने कहा- उसी कमरे के एक कोने में बैठकर मैंने घंटों पढ़ाई की। उन्होंने कहा- 3 मई को हुई नीट में मेरे 648 अंक आए। इस सफलता से परिवार खुश हुआ। घर में जश्न मनाया गया। सभी को भरोसा था कि अब सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलना तय है, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैंने दोबारा तैयारी शुरू की। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा दी। आर्यन ने कहा- परीक्षा से पहले आसमान में बादल छाए हुए थे। परीक्षा केंद्र में मेरी सीट खिड़की के पास थी। टेबल लैब की ढलान वाली थी, जिस पर लिखना मुश्किल था। परीक्षा शुरू होने के करीब एक घंटे बाद तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। खिड़की से आती बारिश की बूंदें उत्तर पुस्तिका तक पहुंचने लगीं। कागज भीगने लगे और लिखना कठिन होता गया, लेकिन मैं रुका नहीं। जितना बचा सकता था, उतना बचाते हुए मैंने पूरी परीक्षा दी। अब रिजल्ट आया तो मेरे 610 नंबर आए। इन अंकों के आधार पर मुझे अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने की संभावना है। मेरे पिता को पैरालाइसिस है। एक्सीडेंट में घायल हुई मां, बेटे को परीक्षा सेंटर पर लेकर गई बिहार के पटना के रहने वाले रणवीर ने कोटा में रहकर नीट की कोचिंग की। उनकी 39वीं रैंक आई है। रणवीर की मां निशि सिंह ने बताया- एग्जाम से दो दिन पहले बच्चे का सेंटर देखने जा रही थी। तब टेम्पो पलटने से मेरे सिर में चोट लग गई थी। इसके बाद भी बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए एग्जाम के दिन उसे सेंटर पर छोड़ने गई थी। बेटे ने बहुत मेहनत की है, जिसकी बदौलत मुझे ये सफलता मिली है। सबसे बड़ी बात यह है कि रणवीर, उसकी मां और बहन तीनों कोटा रहे थे, लेकिन रणवीर मां और बहन से अलग रूम लेकर रहता था, ताकि पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो। रणवीर ने बताया- सफलता के लिए टीचर्स जो आपको गाइड कर रहे हैं, वह बात जरूर मानो। रिफ्रेश करने के लिए यूट्यूब शॉर्ट देखते थे आयुष ऑल इंडिया रैंक नंबर चार पर रहे आयुष मूल रूप से नवादा (बिहार) के वरीसालीगंज गांव के रहने वाले हैं। आयुष ने कोटा में रहकर नीट की तैयारी की है। पिता सुनील कुमार का बिजनेस है। आयुष के 10वीं में 96.2% और 12वीं में 93.8 प्रतिशत नंबर आए थे। आयुष के परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। आयुष ने बताया- बचपन से मेरा सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का था। नियमित पढ़ाई, नीट की तैयारी, लगातार रिवीजन और रेगुलर टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहे। खुद को रिलेक्स करने के लिए मोबाइल भी चलाता था। मोबाइल पर यूट्यूब शॉट्‌र्स (वीडियो) देखना पसंद है। आयुष ने बताया- जब नीट रद्द हुई, उस समय स्कोर 695 बन रहा था। इस बार नंबर और बढ़ गए। पेपर रद्द हुआ तो टेंशन नहीं थी, क्योंकि तैयारी पूरी थी। गौरव बोले- जैसा टीचर ने गाइड किया, वैसा ही किया अलवर के रहने वाले गौरव सिंह ने 9वीं रैंक हासिल की है। गौरव के पिता राजेश कुमार आर्मी में हैं। कोटा में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट गौरव ने बताया- मां सीमा देवी मेरे और बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं। उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया। नीट की तैयारी के दौरान मैंने डेली क्लास अटेंड की। एनसीईआरटी की बुक्स को कई बार पढ़ा। कंटीन्यू रिवीजन किया और टेस्ट को पूरी गंभीरता से दिया। स्मार्टफोन यूज करता था, लेकिन उसका मिसयूज नहीं करता था। क्लासरूम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। टीचर्स ने जो बताया, जो गाइड किया, मैंने वैसे ही किया। पूरी रात पढ़ाई करता था, दोपहर में क्लास लेता था कोटा के रहने वाले कार्तिक ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल की है। कार्तिक ने बताया- मैं रात को पढ़ाई को प्राथमिकता देता था। सेल्फ स्टडी के लिए रात 9:30-10 बजे से सुबह चार से पांच बजे पढ़ता था। दोपहर में कोचिंग के बाद शाम को पावर नेप (ब्रेक) लेता और फिर रात को पढ़ाई का वही शेड्यूल रहता। मेरे पिता इंजीनियर हैं। उन्होंने भी कोटा में ही इंजीनियरिंग की तैयारी और पढ़ाई की थी। मैं खुद को रिलेक्स करने के लिए फुटबॉल खेलता था। पेपर रद्द हुआ तो डिमोटीवेट हुई थी कोटपूतली राजस्थान की रहने वाली अनुष्का ने भी कोटा में पढ़ाई की है। अनुष्का की 58वीं रैंक आई है। उन्होंने आठवीं कक्षा से तैयारी शुरू कर दी थी। क्लास टीचर्स जो बताते थे, वह किया। क्लास में जो पढ़ाया, वह अच्छे से तैयार किया और हर टेस्ट दिया। रिलेक्स रहने के लिए घर पर मां से बात कर लिया करती थी। लास्ट पेपर जब रद्द हुआ तो डिमोटीवेट हो गई थी, लेकिन फिर लगा कि अच्छा मौका है। रैंक सुधार सकते है। कृतिक ने हासिल की 18वीं रैंक कृतिक ने बताया- क्लास में जो पढ़ाया जाता था। उन्हें रिवाइज करता था। सिलेबस होने के बाद फिजिक्स और कैमिस्ट्री को दी। कंसेप्ट क्लियर करने में ज्यादा समय दिया है। पढ़ाई का फिक्स शेड्यूल नहीं था बिहार के रहने वाले मोहम्मद फवाज ने 81वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने भी कोटा में रहकर पढ़ाई की है। फवाज ने बताया- पढ़ाई का कोई फिक्स शेड्यूल नहीं था। 6 से आठ घंटे सेल्फ स्टडी कर लिया करते थे। पेपर रद्द हुआ, तब भी ज्यादा टेंशन नहीं थी। लगभग सेम ही मार्क्स आए हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग बोला-चुनावों में देरी के लिए सरकार जिम्मेदार:हाईकोर्ट में कहा- आयोग दो दिन में निकाय-पंचायत चुनाव की घोषणा को तैयार

प्रदेश में पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव में देरी के लिए हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। हाईकोर्ट में आयोग की तरफ से राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने साफ कहा कि निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में एससी, एसटी और महिला आरक्षण तय किए बिना चुनाव नहीं हो सकते। ​आरक्षण की लॉटरी निकालना पंचायतीराज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग का काम है। हमने इसके लिए छह चिट्ठियां लिखी हैं। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह गुरुवार को वीसी के जरिए पेश हुए। राजेश्वर सिंह ने आयोग के बचाव में तर्क देते हुए साफ कर दिया कि आयोग तो दो दिन में चुनाव की घोषणा को तैयार है, लेकिन उसे सरकार ने आरक्षण तय करके ही नहीं दिया। सरकार आरक्षण तय करके दें राजेश्वर सिंह ने हाईकोर्ट में कहा- राज्य निर्वाचन आयोग अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार है। हमने वोटर लिस्ट तैयार कर ली है, इसके अलावा दूसरे राज्यों से ईवीएम की भी व्यवस्था कर रखी है। जितनी तैयारी चुनाव के लिए हो सकती है, सारी तैयारियां पूरी हैं। सबसे बड़ी बाधा पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में वार्डों और उनके चेयरपर्सन का रिजर्वेशन है, वो राज्य सरकार की तरफ से पूरा नहीं किया गया है। एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं को आरक्षण देना हमारी कानूनी और संवैधानिक बाध्यता है। पिछली बार हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट के बिना भी चुनाव करवा सकते हैं। एससी-एसटी और महिलाओं का आरक्षण राज्य सरकार को ही तय करना है। इसके लिए इनको हम छह चिट्ठियां लिख चुके हैं। तीन चिट्ठी पंचायती राज और तीन स्वायत्त शासन विभाग को लिख चुके हैं। राजेश्वर सिंह ने हाईकोर्ट में कहा- उसके जवाब में इन्होंने यह अवगत करवाया कि ओबीसी कमीशन 14 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देगा और उसके बाद आरक्षण की लॉटरी निकालेंगे। वार्डों को एएसी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित करने का काम ये 21 अगस्त तक पूरा करेंगे। राजेश्वर सिंह ने कहा- ऐसी स्थिति में हम लोगों के लिए बड़ा मुश्किल है कि हम कैसे चुनाव की घोषणा करें? यह तय करना मुश्किल होगा। आज हम अगर चुनाव की प्रक्रिया घोषित भी कर देते हैं तो यह पता करना मुश्किल होता है कि किस कैटेगरी का व्यक्ति किस वार्ड से चुनाव लड़ेगा? सरकार रिजर्वेशन तय करके दे दे तो हम 2 दिन में चुनाव की घोषणा करने को तैयार हैं। हम ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट बिना भी चुनाव करवा सकते हैं, लेकिन एससी, एसटी, महिला आरक्षण की रिपोर्ट नहीं मिली। कोर्ट में चुनाव आयोग और सरकार का तर्क राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा- पिछली बार कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा था कि ओबीसी कमीशन अपनी रिपोर्ट नहीं देता तो उसके बावजूद भी हम चुनाव करवा सकते हैं। केवल एससी,एसटी और महिलाओं को रिजर्वेशन देते हुए चुनाव करवा सकते हैं। लेकिन एससी, एसटी और महिलाओं का आरक्षण तय करना है, वह भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। चुनाव की तारीखों पर कि हमने 90 दिन का शेड्यूल चुनाव के लिए दिया। हम टाइम बढ़ाने की एप्लीकेशन दायर कर रहे राजेश्वर सिंह ने कहा- सरकार ने कहा था टाइम बढ़ाने की एप्लीकेशन दायर करने जा रहे हैं। उसमें उन्होंने बताया कि 14 अगस्त तक ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट आएगी, 21 अगस्त तक लॉटरी निकाल कर दे देंगे। लॉटरी निकलने का काम राज्य सरकार के अफसर करते हैं। चुनावों में देरी के लिए हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार 31 जुलाई तक पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव नहीं करवाने पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग को फटकार लगाते हुए नाराजगी जाहिर की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि जब हमने 31 जुलाई तक चुनाव करवाने के आदेश दिए थे तो फिर 14 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की तारीख कहां से ले आए? 20 जुलाई को इस मामले में जब सुनवाई हो तो आरक्षण की लॉटरी की तारीख, चुनाव घोषणा की तारीख और ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट की जुलाई की तारीख चाहिए।यह अगस्त नहीं होनी चाहिए। हम 14 अगस्त तक इंतजार नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा था- 14 अगस्त भारत के लिए कोई अच्छा दिन नहीं है। यह तारीख कहां से आई, यह भारत के लिए बहुत बुरा दिन था। इसी दिन ब्रिटिशर्स ने भारत के दो टुकड़े किए थे। हाईकोर्ट ने देरी पर यसह भी कहा था कि अगर राज्य निर्वाचन आयोग से नहीं होत तो हम रिटायर्ड जज को नियुक्त कर देते हैं, वो चुनाव करवा देंगे। — ये खबर भी पढ़िए- हाईकोर्ट बोला- 5 दिन में पंचायत-निकाय चुनाव की तारीख बताएं:राज्य चुनाव आयुक्त से कहा- आप क्यों चाहते हैं कि हम अवमानना की कार्रवाई शुरू करें पंचायत-निकाय चुनाव नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी:कहा-इलेक्शन कमीशन सक्षम नहीं तो हम किसी को अपॉइंट कर देते हैं; CEC को तलब किया

नारनौल पुलिस ने 1.18 करोड़ की ठगी का आरोपी पकड़ा:अब तक 17 हो चुके गिरफ्तार; ज्यादा मुनाफे का लालच दे फंसाते थे

हरियाणा के नारनौल साइबर थाना पुलिस ने 1.18 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रतापनगर, जोधपुर निवासी दिव्यांशु के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी टेलीग्राम टास्क फ्रॉड से जुड़े साइबर अपराधियों के लिए कमीशन के आधार पर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल करता था। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की गई राशि में से एक लाख रुपए सीधे उसके बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। अब तक 16 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में पुलिस पहले ही 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब तक कुल 17 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 20 हजार रुपए नकद, 26 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, 59 एटीएम कार्ड, 22 चेकबुक, आठ कैशबुक, 12 पासबुक, 17 सिम कार्ड सहित अन्य सामान बरामद किया जा चुका है। लिंक के जरिये टेलीग्राम ग्रुप में फंसाया मामले के अनुसार, गांव खैराना निवासी सुनील कुमार ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे टेलीग्राम पर घर बैठे ऑनलाइन काम करने का एक संदेश प्राप्त हुआ। इसके बाद एक वेब लिंक के माध्यम से उसका एक वेबसाइट पर पंजीकरण कराया गया और उसे एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ दिया गया। ग्रुप में उसे प्रतिदिन कुछ ऑनलाइन टास्क पूरे करने के लिए कहा जाता था। शुरुआती दौर में टास्क पूरा करने पर उसके खाते में कुछ पैसे दिखाए गए, जिसे उसने अपने बैंक खाते में भी ट्रांसफर कर लिया। इससे उसका विश्वास बढ़ गया। ज्यादा मुनाफे का दिया लालच इसके बाद साइबर ठगों ने उसे अधिक मुनाफे का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करवाने शुरू कर दिए। शिकायतकर्ता ने अपनी जमा पूंजी के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लेकर विभिन्न तिथियों में कुल 1,18,47,353 रुपए जमा कर दिए। हालांकि, वेबसाइट पर उसके खाते में 1,52,03,443 रुपए प्रदर्शित हो रहे थे, लेकिन उसे कोई राशि वापस नहीं मिली। उल्टा ठग लगातार उससे और पैसे जमा करवाने का दबाव बनाते रहे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी, जो अब भी जारी है।

अवैध-खनन से बने गड्ढे में डूबने से चचेरे-भाइयों की मौत:एक का पैर फिसला तो दूसरा बचाने बचाने कूदा था, एक घंटे बाद निकाले जा सके शव

बाड़मेर में अवैध खनन से बने गहरे गड्ढे में पैर फिसलने से एक भाई गिर गया, उसे डूबता देख दूसरा भाई बचाने कूदा। मौके पर मौजूद तीसरे साथी ने शोर मचाया, लेकिन तब तक दोनों चचेरे भाई डूब चुके थे। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सेना को सूचना दी। एक घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों चचेरे भाइयों को बाहर निकाला जा सका। उन्हें जिला हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना बाड़मेर जिले के ग्रामीण थाना क्षेत्र के दरूड़ा गांव में शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पास संचालित स्टोन क्रेशरों द्वारा अवैध खनन किया जाता है। खनन के कारण जमीन में गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें पानी भर जाता है। इसी कारण हादसा हुआ। घर से आधा किलोमीटर दूर हुआ हादसा
मृतक के चाचा सुरताराम ने बताया कि दरूड़ा गांव निवासी देवराम(18) पुत्र किशनाराम, उसका चचेरा भाई किरताराम(20) पुत्र गणेशकुमार और गांव का ही एक अन्य युवक प्रवीण किसी से मिलने के लिए घर से निकले थे। घर से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित स्टोन क्रेशर के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे हैं। वहां से गुजरने के दौरान देवराम का पैर फिसल गया और वह गड्ढे में गिर गया। उसे बचाने के लिए किरताराम ने भी छलांग लगा दी, लेकिन वह भी डूब गया। दोनों को डूबता देख प्रवीण ने परिजनों और आसपास के लोगों को सूचना दी। इसके बाद जसाई से आर्मी को बुलाया गया। अवैध खनन से बने हैं 50–100 फीट गहरे गड्ढे
सुरताराम ने बताया कि दरूड़ा गांव में करीब 20–30 स्टोन क्रेशर संचालित हैं। क्रेशर संचालकों ने अवैध खनन कर जगह-जगह 50–100 फीट गहरे गड्ढे कर दिए हैं। इनमें पानी भरा रहता है। गांव जाने का रास्ता भी इन गड्ढों के पास से होकर गुजरता है, जिससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। करीब एक घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलने पर आर्मी के जवान गहरे गड्ढे में उतरे और करीब एक घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों युवकों को बाहर निकाला गया। इस बीच ग्रामीण थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। दोनों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनों के परिवार किसान है। पुलिस बोली- दोनों के शव जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाए हैं
ग्रामीण थाना के एएसआई ज्ञानसिंह ने बताया कि दो युवकों के डूबने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। सिविल डिफेंस और आर्मी की टीम ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। दोनों शवों को जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

NEET में श्रीगंगानगर के सूर्यांश की AIR 465वीं रैंक:बोले- 10वीं और 12वीं की बुक्स पढ़ने से काफी मदद मिली

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG का रिजल्ट गुरुवार रात को जारी किया गया। श्रीगंगानगर के सूर्यांश मल्होत्रा की आल इंडिया 465 वीं रैंक आई है। सूर्यांश ने 720 में से 671 अंक हासिल किए हैं। कैटिगिरी में सूर्यांश की 289वीं रैंक है। सूर्यांश परफेक्ट एज्युकेशन का छात्र है। हर रोज पढ़ाई जरूरी सूर्यांश ने कहा- वह 6 से 7 घंटे रेगुलर स्टेडी करते थे। इसके साथ 10th-12th की किताबों और परफेक्ट एजुकेशन से मिले वर्कशीट और नोट्स से पढ़ने में काफी मदद मिली। जिसकी वजह से उसने एग्जाम पास कर लिया। सूर्यांश के पिता ऋषिराज मल्होत्रा सेशन कोर्ट में एलडीसी हैं और माता पूनम मल्होत्रा श्रीगंगानगर सेशन कोर्ट में क्रिमिनल एडवोकेट हैं। वहीं, नोजगे पब्लिक स्कूल की छात्रा जिया मित्तल ने ऑल इंडिया 1851वीं रैंक हासिल की है। जिया ने 645 नंबर हासिल किए हैं। इसके साथ ही आकाश इंस्टीट्यूट, श्रीगंगानगर के छात्र राघव सोएन ने 1074वीं रैंक हासिल की है। राघव के 720 में से 656 नंबर आए हैं। नीट में 11.21 लाख स्टूडेंट मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। जबकि 10 लाख स्टूडेंट 213 नंबर (कटऑफ) भी नहीं ला पाए। इस बार कटऑफ में 69 नंबर की बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान के रहने वाले 2 स्टूडेंट टॉप-10 में हैं। उपलक्ष्य गोयल ने तीसरी और अलवर के गौरव सिंह ने 9वीं रैंक हासिल की है। पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया। कोटा में रहकर कोचिंग करने वाले बिहार के आयुष बालोटिया की चौथी रैंक है। नीट का एक्जाम क्रैक करने वाले स्टूडेंट्स की दैनिक भास्कर फोटो पब्लिश करेगा। इन नंबरों पर भेजें अपनी फोटो-9413166980

स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 30 बच्चे बीमार:उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत के बाद अस्पताल में कराया भर्ती

बारां जिले में मिड-डे मील खाने के बाद 30 स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी, पेट दर्द और घबराहट होने पर बच्चों को तत्काल एंबुलेंस और निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत में सुधार है। मामला अटरू ब्लॉक स्थित केरवालिया देवपुरा के सरकारी स्कूल का है। डीईओ सीताराम गोयल ने बताया- गवर्नमेंट प्राथमिक स्कूल केरवालिया देवपुरा में शुकवार दोपहर को 43 बच्चों में से 38 ने मिड-डे मील खाया था। भोजन के बाद करीब 30 बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत हुई, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अभिभावक भी बड़ी संख्या में स्कूल पहुंच गए। बच्चों को तुरंत एंबुलेंस और निजी वाहनों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोठपुर पहुंचाया गया। डीईओ और एडीएम मौके पर पहुंचे घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिला शिक्षा अधिकारी सीताराम गोयल और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) भंवरलाल जनागल ने स्थिति का जायजा लिया और बच्चों के इलाज की जानकारी ली। प्रशासन ने मिड-डे मील के सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रखवाए हैं। संभवतया मिर्ची तेज होने के कारण बिगड़ी तबीयत जिला शिक्षा अधिकारी सीताराम गोयल ने प्रारंभिक तौर पर बताया कि खाने में मिर्ची तेज होने के कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी हो सकती है। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कालूलाल मीणा और डॉक्टर ओमप्रकाश सुमन ने पुष्टि की कि सभी बच्चों का अस्पताल में प्राथमिक इलाज कराया गया। तबीयत में सुधार होने पर सभी को घर भेजा इलाज के बाद बच्चों की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें घर भेज दिया गया है। वर्तमान में कोई भी बच्चा अस्पताल में भर्ती नहीं है और सभी स्वस्थ हैं। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने का कारण भोजन था या कोई अन्य वजह। वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

राजस्थान के 51 हॉस्पिटल RGHS से निलंबित:24 अस्पतालों पर 3 करोड़ जुर्माना; जयपुर के मणिपाल, सोनी और इंडस समेत 9 हॉस्पिटल शामिल

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार ने 51 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया। वहीं 24 अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपए का भी जुर्माना लगाया है। इसमें जयपुर के मणिपाल, सोनी, नारायणा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, महावीर जयपुरिया हॉस्पिटल और इंडस हॉस्पिटल समेत 9 अस्पताल शामिल हैं। सरकार ने यह कार्रवाई पिछले 3 महीने में की है। आज (शुक्रवार) रिपोर्ट जारी की गई है। वहीं उदयपुर के पारस जेके हॉस्पिटल, डूंगरपुर का जील हॉस्पिटल और अजमेर के मार्बल सिटी हॉस्पिटल सहित कुल 24 अस्पतालों के खिलाफ रिकवरी और जुर्माने की कार्रवाई की। चिकित्सा मंत्री बोले- भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जाएगा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकार ने RGHS में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। वित्तीय अनियमितता, फर्जी क्लेम और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी है। प्रमुख शासन सचिव बोलीं- गंभीर अनियमितताएं सामने आई प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया- ऑडिट के दौरान अस्पतालों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इनमें फर्जी या डुप्लीकेट दस्तावेज के आधार पर क्लेम, जरूरत से ज्यादा जांचें कराना, एक ही पैकेज की सेवाओं को अलग-अलग दिखाकर अतिरिक्त भुगतान लेना, आवश्यक दस्तावेज के बिना क्लेम प्रस्तुत करना और ओपीडी मरीजों को अनुचित तरीके से आईपीडी में भर्ती दिखाकर भुगतान लेना जैसी गड़बड़ियां शामिल हैं। सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है RGHS की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने सभी मामलों की विस्तृत सुनवाई कर उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्यों की जांच के बाद कार्रवाई के आदेश दिए। राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने कहा- सरकार का उद्देश्य राजकोष के प्रत्येक रुपए का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके लिए ऑडिट सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा- भविष्य में भी फर्जी बिलिंग, अनियमित क्लेम, प्रक्रियागत उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ इसी तरह कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

हाईवे पर बिखरे बिजनेसमैन के शव के टुकड़े:डंपर ने कुचला, आंतें बाहर निकल गई, 200 मीटर तक बाइक को घसीटते ले गया

डीडवाना-कुचामन जिले में तेज रफ्तार डंपर ने बाइक सवार बिजनेसमैन को कुचल दिया। बाइक को 200 मीटर तक घसीटते हुए ले गया। हादसे में मार्बल व्यापारी का शव दो टुकड़ों में बंट गया। आंतें बाहर निकल गईं। घटना के बाद गुस्साए ग्रामीण और परिजनों ने स्टेट हाईवे 2B ( पराली-खाटू ) पर जाम लगा दिया। 5:30 घंटे की समझाइश के बाद शाम 5 बजे धरना हटाया। घटना मकराना थाना क्षेत्र के घाटी चौराहे की शुक्रवार सुबह 11 बजे की है। थाना अधिकारी पंकज मांजू ने बताया- मार्बल व्यापारी गौड़ाबास (मकराना) निवासी मकसूद (38) की मौत हो गई। मकसूद के परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। सबसे छोटा बेटा दो साल का है। घटना के बाद डंपर ड्राइवर मौके भागते समय पास में लगे सीसीटीवी में नजर आ रहा है। पुलिस ने बताया- मकसूद बाइक से अपनी मार्बल खदान पर घाटी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे डंपर ने बाइक को टक्कर मार दी। बाइक, डंपर के आगे के हिस्से में फंस गई। ड्राइवर बाइक को 200 मीटर तक घसीटते हुए ले गया। हादसे में मकसूद के शव के दो टुकड़े हो गए। घटना के बाद डंपर का ड्राइवर मौके से फरार हो गया। घटना के बाद सुबह 11:30 बजे परिजन और ग्रामीणें ने स्टेट हाईवे 2B पर जाम लगा दिया। सूचना पर मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत सहित कई मार्बल व्यापारी मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। लोगों ने ड्राइवर की गिरफ्तारी और मृतक परिवार को संविदा पर नौकरी देने की मांग की। विधायक ने कहा-ड्राइवर तेज रफ्तार से रॉन्ग साइड में डंपर चला रहा था। स्पीड इतनी थी कि गाड़ी के ब्रेक तक नहीं लगे। हादसे में मकसूद के शरीर के दो टुकड़े हो गए और बाइक डंपर के नीचे फंस गई। पुलिस अगर डंपर ड्राइवरों को लेकर अभियान चलाती तो युवक की मौत नहीं होती। पुलिस-प्रशासन की समझाइश के बाद परिजनों ने शाम 5:30 बजे धरना समाप्त किया। परिजनों का आरोप-नशे में था डंपर ड्राइवर मकसूद के रिश्तेदार अब्दुल करीम सिसोदिया ने बताया- डंपर ड्राइवर नशे में गाड़ी चला रहा था। जिसके चलते यह हादसा हुआ। पुलिस सख्ती करती तो ऐसा नहीं होता। अब्दुल करीम ने कहा- मकसूद के परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी गौसिया (11) छठवीं क्लास में पढ़ती है। बड़ा बेटा अबु (5) पहली क्लास में पढ़ता है। जबकि सबसे छोटा बेटा दानियाल अभी 2 साल का है। मकसूद अपने भाई-बहन में सबसे छोटे थे। थाना अधिकारी पंकज मांजू ने बताया- फरार डंपर ड्राइवर की तलाश की जा रही है। परिजनों की ओर से रिपोर्ट नहीं दी गई है। शव को उप जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया है। … यह खबर भी पढ़ें किराना व्यापारी का शव हाईवे पर टुकड़ों में मिला:अनगिनत गाड़ियां कुचलती हुईं निकलीं, बॉडी को पोटली में बांधकर ले जाया गया पाली में बाइक सवार किराना व्यापारी शव ब्यावर-पिंडवाड़ा नेशनल हाईवे-162 पर फेंक दिया गया। उसके ऊपर से अनगिनत गाड़ियां गुजर गईं, जिससे बॉडी के टुकड़े पूरी सड़क पर बिखर गए। (पढ़ें पूरी खबर)

मेड़ता की निष्ठा ने हासिल की ऑल इंडिया 712वीं रैंक:पिता और बड़े पापा का सपना किया पूरा

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार देर रात NEET-UG 2026 का रिजल्ट जारी किया। नागौर जिले के मेड़ता निवासी निष्ठा शर्मा, पुत्री स्वर्गीय जितेंद्र कुमार शर्मा, ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 712वीं रैंक और जनरल कैटेगरी में 433वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। निष्ठा ने बताया कि यह सफलता उनके दिवंगत पिता और बड़े पापा के सपनों को समर्पित है। उनके पिता जितेंद्र कुमार शर्मा पेशे से वकील थे, जबकि उनकी मां अध्यापक हैं। जून 2022 में एक सड़क हादसे में पिता का निधन हो गया था। इसके बाद 21 जून 2026 को, री-नीट परीक्षा देने के बाद परिवार के साथ ओंकारेश्वर जाते समय उनके बड़े पापा देवेंद्र कुमार व्यास को रास्ते में अचानक हार्ट अटैक आ गया। परिवार उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। निष्ठा ने भावुक होकर कहा, “पापा और बड़े पापा का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं। अगर आज वे दोनों हमारे बीच होते तो मेरी इस सफलता पर सबसे ज्यादा खुश होते। वे मुझे प्यार से ‘गुनगुन’ कहकर बुलाते थे।” शैक्षणिक रिकॉर्ड में भी निष्ठा हमेशा अव्वल रही हैं। उन्होंने 12वीं बोर्ड में 96 प्रतिशत और 10वीं बोर्ड में 91.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। NEET की तैयारी के लिए वह सीकर में रहकर कोचिंग कर रही थीं। निष्ठा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपनी मां, पूरे परिवार और शिक्षकों के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार के हौसले और मार्गदर्शन ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी। उल्लेखनीय है कि री-नीट परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित हुई थी, जिसका परिणाम गुरुवार देर रात घोषित किया गया संस्कार एकेडमी नागौर के 8 विद्यार्थीयों का Govt Medical college के लिए हुआ चयन। वही इसी एकेडमी से एक साधारण किसान परिवार के सोनेली निवासी दो सगे भाईयों राज व रवि का चयन हुआ। नागौर के खजवाना गाँव निवासी प्रिन्स पुत्र घनश्याम मुण्डेल ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 3778 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 8604 रैंक हासिल की है। प्रिन्स के पिता किसान है माता किरण कुमारी गृहणी है। नागौर के भवाद गाँव निवासी सुमित शर्मा पुत्र जगदीश प्रसाद ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 4010 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 32791रैंक हासिल की है। सुमित शर्मा के पिता किसान है माता नर्बदा देवी गृहणी है। नागौर के बच्छवारी गाँव निवासी मनीषा पुत्र हनुमान राम ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 2131 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 5179 रैंक हासिल की है। मनीषा के पिता किसान है माता मैना देवी गृहणी है। नागौर के कुम्हारी गाँव निवासी नकी अली पुत्र अल्लाह बक्ष ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 1551 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 13703 रैंक हासिल की है। नकी अली के पिता व्यवसायी है माता सायरा बानो गृहणी है। नागौर के सोनेली गाँव निवासी रविन्द्र भांबू पुत्र कैलाश कुमार ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 14497 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 30032 रैंक हासिल की है। रविन्द्र भांबू के पिता किसान है माता लिछमा गृहणी है। नागौर के सोनेली गाँव निवासी राज भांबू पुत्र कैलाश कुमार ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 3122 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 7294 रैंक हासिल की है। राज भांबू के पिता किसान है माता लिछमा गृहणी है। नागौर के सेनणी गाँव निवासी उपासना पुत्री बलवीर सिंह ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 3049 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 7140 रैंक हासिल की है। उपासना के पिता अध्यापक है माता चम्पा देवी गृहणी है। नागौर के झुझण्डा निवासी नवीन जेठू पुत्र धर्माराम जेठु ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 13998 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 29053 रैंक हासिल की है। उपासना के पिता किसान है माता सन्तोष देवी गृहणी है। नागौर के खैराट निवासी प्रियंका गोदारा पुत्री भींयाराम राम गोदारा ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 3102 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 7255 रैंक हासिल की है। पिता भींयाराम राम गोदारा किसान है और माँ गृहणी। डीडवाना-कुचामन जिले के खरेश गाँव निवासी प्रतिभा चौधरी पुत्री किशना राम ने NEET एग्जाम में OBC कैटेगरी में 2808 रैंक हासिल की। वही ऑल इंडिया 6648 रैंक हासिल की है।प्रियंका के माता पिता दोनों सरकारी टीचर है। संजय लोमरोड़ ने हासिल की ऑल इंडिया 155532वीं रैंक खजवाना निवासी संजय लोमरोड़ के पिता कमलेश लोमरोड़ पुलिस विभाग में सेवा दे रहे हैं। संजय ने NEET-UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 155532 और OBC कैटेगरी में 7263वीं रैंक हासिल की है। संजय ने बताया कि नियमित पढ़ाई और लगातार तैयारी से उन्हें यह सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक होने से उनका हौसला थोड़ा जरूर टूटा था, लेकिन पेपर अच्छा हुआ और मेहनत का परिणाम मिला। अलाय की निकिता जांगू को मिली ऑल इंडिया 24000वीं रैंक नागौर के अलाय निवासी निकिता जांगू पुत्री भागीरथ राम ने NEET परीक्षा में OBC कैटेगरी में 11674वीं रैंक हासिल की है। वहीं उनकी ऑल इंडिया रैंक 24000 रही है। निकिता के पिता भागीरथ राम किसान हैं और उनकी मां गृहणी हैं। निकिता ने बताया कि उनकी तैयारी में सबसे ज्यादा सहयोग टीचर्स और माता-पिता का रहा। परिवार से लगातार मोटिवेशन मिलता रहा, जिसकी वजह से उन्हें यह सफलता मिली। घोड़ारण की बरखा चौधरी को मिली 30581वीं रैंक नागौर के घोड़ारण निवासी बरखा चौधरी पुत्री गोपाल सिंह चौधरी ने NEET परीक्षा में OBC कैटेगरी में 14794वीं रैंक हासिल की है। वहीं उनकी ऑल इंडिया रैंक 30581 रही है। बरखा के पिता टीकमचंद व्यवसायी हैं और उनकी मां गृहणी हैं। बरखा ने बताया कि नीट पेपर लीक होने के बाद उनका हौसला थोड़ा टूट गया था क्योंकि उन्हें दोबारा उसी परीक्षा की तैयारी करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि पेपर अच्छा था, इसलिए उनकी रैंक भी अच्छी आई है। ताऊसर की खुशी कच्छावा को मिली 22681वीं रैंक नागौर के ताऊसर निवासी खुशी कच्छावा पुत्री टीकमचंद ने NEET परीक्षा में OBC कैटेगरी में 10829वीं रैंक हासिल की है। वहीं उनकी ऑल इंडिया रैंक 22681 रही है। खुशी के पिता टीकमचंद व्यापारी हैं और उनकी मां गृहणी हैं। खुशी ने कहा कि अच्छे स्कोर के लिए केवल पढ़ाई करना काफी नहीं है, बल्कि समय पर रिवीजन करना भी जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि नियमित टेस्ट देने से लगातार सुधार होता है। 21 जून को हुई थी री-नीट परीक्षा री-नीट परीक्षा 21 जून को आयोजित की गई थी। गुरुवार देर रात इसका रिजल्ट जारी किया गया। रिजल्ट जारी होने के बाद CONCEPT Institute नागौर के चार स्टूडेंट्स के चयन की जानकारी सामने आई है। NEET रिजल्ट से जुड़ी अपनी जानकारी, वीडियो और फोटो अभ्यर्थी मोबाइल नंबर 9950040143 पर भेज सकते हैं।

हाईकोर्ट ने कहा- एक समय में एक पुलिसकर्मी दो-जगह कैसे?:यह मानवीय रूप से संभव नहीं; एनडीपीएस मामले में दोषी की सजा को किया सस्पेंड

राजस्थान हाईकोर्ट ने नशीली दवाओं के स्टॉक रखने के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा सस्पेंड करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। जस्टिस अनिल उपमन की कोर्ट ने कहा- पूरे मामले में जिस कॉन्स्टेबल की सूचना पर कार्रवाई करना बताया गया है, वह कार्रवाई के समय घटना स्थल पर मौजूद था। वहीं उसी कॉन्स्टेबल को ठीक उसी समय दूसरी जगह हुई कार्रवाई में भी उपस्थित होना पाया गया है। ऐसे में एक समय में एक ही पुलिसकर्मी दो अलग-अलग जगह की कार्रवाई में कैसे उपस्थित हो सकता है। कोर्ट ने कहा- यह मानवीय रूप से तो संभव नहीं है। अदालत ने कहा- इस मामले में जब्ती की कार्रवाई 6:40 बजे की गई। वहीं घटनास्थल से 8 किलोमीटर दूर दूसरे मामले में जब्ती की कार्रवाई 7:10 बजे की गई। कोर्ट ने आरोपी की सजा को निलंबित करते हुए डीजीपी से कहा- वे पूरे मामले में स्वतंत्र जांच करके तीन महीने में रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने यह आदेश आरोपी कमल रामचंदानी के सजा स्थगन के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए। मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं लिए नमूने आरोपी के अधिवक्ता शांतनु बंसल ने कोर्ट को बताया- पुलिस के अनुसार कॉन्स्टेबल गिरधारी लाल की सूचना पर मुरलीपुरा थाना पुलिस ने 31 जनवरी 2022 को मुरलीपुरा स्कीम सर्किल स्थित कमल मेडिकल एंड प्रोविजनल स्टोर पर कार्रवाई करते हुए नशीली दवाओं का स्टॉक बरामद किया। आरोपी के पास इन दवाओं के संबंध में खरीद का बिल और कोई वाउचर नहीं मिला। इसके बाद आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया, लेकिन मामले में कानून प्रवाधानों का पालन नहीं किया गया। जब्ती के बाद अगले दिन 1 फरवरी को पुलिस ने नमूने एफएसएल को भेज दिए। वहीं एनडीपीएस एक्ट में मजिस्ट्रेट के सामने ही नमूने लेने का प्रावधान है। जब्ती की कार्रवाई भी इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर स्तर के पुलिस अधिकारी के द्वारा ही की जा सकती है। इस मामले में मौके पर पहुंची औषधि नियंत्रण अधिकारी अरुणा मीणा ने बयानों में कहा- मेरे घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही दवाओं की बरामदगी हो चुकी थी। यह बरामदगी कॉन्स्टेबल गिरधारी लाल द्वारा की गई थी। मामले में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं
अपील में कहा गया कि मामलें में पुलिस ने कोई स्वतंत्र गवाह नहीं बनाया। सभी गवाह पुलिसकर्मी ही थे। जब्ती अधिकारी ने अपनी जिरह में स्वीकार किया है कि कथित बरामदगी ऐसे स्थान से हुई, जहां अनेक अन्य दुकानें स्थित थी और वहां सामान्यत लोगों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। लेकिन उसके बाद भी तलाशी और जब्ती की पूरी कार्रवाई में किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया। पुलिस केवल यह कहकर अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती है कि कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र गवाह बनने के लिए तैयार नहीं हुआ।