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सलूंबर के देवपुरा में 80 ग्रामीणों की जांच:10 टीबी संदिग्ध मिले, 11 जुलाई से जनसंख्या जागरूकता सप्ताह

सलूंबर जिले के जयसमंद ब्लॉक के देवपुरा ग्रामीण सेवा शिविर में ग्रामीणों की टीबी जांच की गई। इसके साथ ही, 11 जुलाई से पूरे जिले में विश्व जनसंख्या सप्ताह मनाया जाएगा, जिसमें परिवार कल्याण और जनसंख्या स्थिरता पर जागरूकता अभियान चलेगा। 80 ग्रामीणों की जांच की गई जयसमंद ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष पाठक ने बताया कि जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनैद पी.पी. और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विष्णु दयाल मीणा के निर्देशन में देवपुरा में विशेष टीबी जांच शिविर आयोजित हुआ। शिविर में पहली बार अत्याधुनिक पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन का उपयोग कर 80 ग्रामीणों की जांच की गई। इन जांचों के दौरान 10 ग्रामीण टीबी संदिग्ध पाए गए। इन सभी संदिग्ध मरीजों को आगे की पुष्टि, विस्तृत जांच और उपचार के लिए चिन्हित किया गया है। इस शिविर में डॉ. सौरभ बाबलिया, स्थानीय सीएचओ, एएनएम, आशा सहयोगिनियों, रेडियोग्राफर हेमंत चौबीसा और लोकेश मीणा सहित पूरी चिकित्सा टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। 11 से 18 जुलाई तक चलेगा विश्व जनसंख्या सप्ताह स्वास्थ्य विभाग ने आगामी 11जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर जिलेभर में 11से 18जुलाई तक विश्व जनसंख्या सप्ताह मनाने की तैयारियां पूरी कर ली हैं।इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर परिवार नियोजन,मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य,छोटे परिवार के लाभ और आधुनिक परिवार कल्याण साधनों की जानकारी देंगी।साथ ही विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम,परामर्श शिविर और विशेष सेवाएं भी आयोजित की जाएंगी।

3 दिन में अतिक्रमण हटाने की चेतावनी:बस्तियों में पहुंचकर प्रशासन ने मार्किंग की; कब्जा नहीं हटाया तो हर्जाना वसूलेंगे

नगर परिषद जैसलमेर एक बार फिर शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा बुलडोजर एक्शन लेने की तैयारी में है। बुधवार को परिषद की टीम ने तोता राम की ढाणी के पास, होटल कॉम्प्लेक्स और बब्बर मगरा के पीछे स्थित बस्तियों में पहुंचकर अवैध निर्माणों पर लाल निशान लगाने की कार्रवाई की। 3 दिन का अल्टीमेटम नगर परिषद के राजस्व अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि इस बेशकीमती सरकारी जमीन पर परिषद की महत्वाकांक्षी ‘बृजराज सिंह कॉलोनी’ प्रस्तावित है, जिस पर लोगों ने अवैध रूप से कच्चे-पक्के कब्जे कर रखे हैं। प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए 3 दिन का अंतिम अल्टीमेटम दिया है कि वे अपना अवैध निर्माण खुद ही हटा लें, अन्यथा परिषद इन्हें ध्वस्त कर देगी। दोबारा चिह्नित किए अवैध निर्माण नगर परिषद ने हाल ही में इस इलाके से अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की थी। उस दौरान स्थानीय निवासियों द्वारा परिषद की टीम का भारी विरोध भी किया गया था और मामला काफी गरमा गया था। लेकिन, सरकारी जमीन को भू-माफियाओं और अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए प्रशासन एक बार फिर पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। विरोध की आशंका को देखते हुए बुधवार को राजस्व अधिकारी पवन कुमार की अगुवाई में टीम ने मौके पर जाकर पूरी मुस्तैदी से लाल निशान लगाने का काम पूरा किया। खुद हटा लें कब्जा, वरना भुगतना होगा हर्जाना राजस्व अधिकारी पवन कुमार ने स्पष्ट किया कि चिह्नित किए गए सभी अतिक्रमण पूरी तरह अवैध हैं। परिषद ने तीन दिन की मोहलत इसलिए दी है ताकि लोग अपनी कीमती सामग्री और कच्चा-पक्का निर्माण खुद सुरक्षित हटा सकें। यदि तय समय सीमा के भीतर जगह खाली नहीं की गई, तो नगर परिषद की जेसीबी बिना किसी पूर्व सूचना के अवैध निर्माणों को ढहा देगी। इस दौरान होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी खुद अतिक्रमणकारियों की होगी और परिषद कार्रवाई का खर्च भी वसूल सकती है।

प्रतापगढ़ पुलिस ने 70 लाख की संपत्ति की फ्रीज:दो ड्रग तस्करों पर कार्रवाई, फ्रीजिंग बोर्ड भी लगाए

ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपित तस्करों की करीब 70 लाख रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्ति फ्रीज कर दी है। पुलिस ने संबंधित कृषि भूमि पर फ्रीजिंग के बोर्ड भी लगा दिए हैं। कोटड़ी थाना अधिकारी रोहित कुमार ने बताया कि एसपी बी. आदित्य के निर्देशन में जिलेभर में ऑपरेशन त्रिनेत्र चलाया जा रहा है। अभियान के तहत मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कोटड़ी निवासी अकबर खान पठान और नयुम खान पठान की संपत्तियां फ्रीज की गई हैं। एमडी ड्रग्स मामले में हुई थी गिरफ्तारी पुलिस के अनुसार, हथुनिया थाना पुलिस ने 31 अक्टूबर को अकबर खान पठान को 2 किलो 227 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। इस दौरान तस्करी में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई थी। पूछताछ में सामने आया कि वह यह मादक पदार्थ नयुम खान पठान को सप्लाई करने जा रहा था। इसके बाद 12 अप्रैल को नयुम खान को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आई करोड़ों की नहीं, 70 लाख की संपत्ति पुलिस जांच में दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत पहले से कई मामले दर्ज होना सामने आया। गोपनीय जांच में पता चला कि अकबर खान ने कोटड़ी गांव में पांच बीघा और नयुम खान ने दो बीघा कृषि भूमि खरीदी हुई है। दोनों संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 70 लाख रुपये आंका गया।

बारां पुलिस ने 2.14 करोड़ के मादक पदार्थ नष्ट किए:89 मामलों में जब्त स्मैक, गांजा, डोडा-चूरा जलाया; विशेष अभियान के तहत कार्रवाई

बारां जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे 15 दिवसीय विशेष अभियान के तहत बुधवार को रिजर्व पुलिस लाइन में 89 एनडीपीएस मामलों में जब्त 2 करोड़ 14 लाख 25 हजार 85 रुपए मूल्य के अवैध मादक पदार्थों को नष्ट किया गया। पुलिस मुख्यालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में स्मैक, चरस, गांजा, अफीम डोडा चूरा और नशा करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को अग्नि के हवाले किया गया। अप्रैल से अब तक जिले में 5.72 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ नष्ट किए जा चुके हैं। विशेष अभियान के तहत कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने बताया कि यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के निर्देशानुसार 26 जून से 10 जुलाई तक चलाए जा रहे 15 दिवसीय विशेष अभियान के तहत की गई। जिला स्तर पर गठित ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी ने एनडीपीएस एक्ट के 89 प्रकरणों में जब्त मादक पदार्थों का विधिवत निस्तारण किया। क्या-क्या किया गया नष्ट नष्ट किए गए मादक पदार्थों में 146 ग्राम 468 मिलीग्राम स्मैक, 31 ग्राम चरस, 133 किलो 385 ग्राम गांजा एवं गांजे के पौधे तथा 787 किलो 915 ग्राम अफीम डोडा चूरा शामिल था। इसके अलावा स्मैक और गांजा पीने में उपयोग किए जाने वाले उपकरण भी नष्ट किए गए। 2.14 करोड़ से अधिक की थी कीमत जब्त मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत 2 करोड़ 14 लाख 25 हजार 85 रुपए आंकी गई। इसमें स्मैक की कीमत 29.29 लाख रुपए, चरस की 7,750 रुपए, गांजे की 66.69 लाख रुपए और अफीम डोडा चूरा की 1.18 करोड़ रुपए शामिल थी। अप्रैल से अब तक 5.72 करोड़ के मादक पदार्थ नष्ट पुलिस के अनुसार, इससे पहले 30 अप्रैल 2024 को ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी ने 95 प्रकरणों में जब्त 3 करोड़ 58 लाख 3 हजार 900 रुपए मूल्य के मादक पदार्थों को नष्ट किया था। इसके साथ ही 30 अप्रैल से 8 जुलाई के बीच कुल 184 प्रकरणों में जब्त 5 करोड़ 72 लाख 28 हजार 985 रुपए मूल्य के अवैध मादक पदार्थों का निस्तारण किया जा चुका है।

सीकर में रोडवेजकर्मी बोले- कंडक्टर से मारपीट बर्दाश्त नहीं करेंगे:चूरू में कंडक्टर-ड्राइवर से मारपीट के आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग

सीकर के रोडवेज डिपो में ड्राइवर-कंडक्टरों और अन्य कर्मचारियों ने बुधवार को प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सीकर के कंडक्टर से चूरू में हुई मारपीट मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की। रोडवेजकर्मियों ने नारे लगाते हुए लोक परिवहन और प्राइवेट बस की मनमानी पर लगाम लगाने की मांग की। राजस्थान रोडवेज वर्कर्स यूनियन (सीटू) के सहसचिव अरविंद मील ने बताया- सीकर डिपो में उप महासचिव श्योदाना राम शेषमा के नेतृत्व में चूरू में कंडक्टर सुरेंद्र कुमार के साथ कनेक्ट चौराहे पर प्राइवेट बस वालों के गुंडों ने मारपीट की। घटना के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने लोक परिवहन बसों, अवैध प्राइवेट बसों और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान गोपालस्वरूप जांगिड़, दिलीप मिश्रा, धुड़ाराम गुर्जर, कृष्ण जोशी, अशोक भाखर, विकास बिजारणियां, अरविंद मील, सत्यपाल सिंह मैकेनिक, नारायण सिंह, भोलाराम गुर्जर, जमनालाल घोषल्या, कुंभाराम चौधरी, नेमीचंद जाखड़, सुरेश चौधरी, गिरवर सिंह और रविंद्र फगेड़िया समेत काफी रोडवेज-कंडक्टर मौजूद थे। कर्मचारी से मारपीट बर्दाश्त नहीं सीटू के प्रदेशाध्यक्ष रामदेव सिंह टाकरिया ने कहा- ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी के साथ इस तरह की मारपीट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वर्कर्स यूनियन ने इस संबंध में चूरू के जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा- पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो चक्का जाम और आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस घटना के बारे में राजस्थान रोडवेज के उच्च प्रबंधन और परिवहन आयुक्त को भी जानकारी दी है।

जीमण लंदन-2026 में वेदांता चेयरमैन ने गाया राजस्थानी भजन:खाने में दाल-बाटी चूरमा, खीर-जलेबी का लिया स्वाद; 10 विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान

लंदन में आयोजित जीमण लंदन-2026 इस साल यूके में बसे राजस्थानी समुदाय का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन साबित हुआ। स्कॉटलैंड, मैनचेस्टर, बर्मिंघम, लीसेस्टर, लीड्स, कार्डिफ़, मिल्टन कीन्स, साउथहॉल, हाउंस्लो, नॉटिंघम सहित यूके के हर हिस्से से परिवार लंदन पहुंचे। इस बार घुड़दौड़ उद्योग से जुड़े राजस्थान मूल के कई परिवारों और पेशेवरों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया, जिससे समुदाय की विविधता और उपस्थिति और मजबूत हुई। देखिए- कार्यक्रम से जुड़ी PHOTOS RAUK की दस साल की यात्रा रही प्रमुख आकर्षण RAUK की दस साल की यात्रा भी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। संगठन ने पिछले एक दशक में यूके में राजस्थानी संस्कृति को जीवित रखने, समुदाय को जोड़ने और नई पीढ़ी तक परंपराएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी यात्रा को संजोते हुए RAUK ने अपनी कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण किया, जिसमें पिछले दस सालों के कार्यक्रमों, उपलब्धियों, समुदाय निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण का विस्तृत दस्तावेज़ शामिल है। हरेंद्र सिंह जोधा ने बताया कि इस साल जीमण में अब तक की सबसे ज्यादा उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे यह कार्यक्रम भारत के बाहर आयोजित होने वाले सबसे बड़े राजस्थानी सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बन गया। नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि संगठन ने परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई है। वेदांता के चेयरमैन ने राजस्थानी भजन गाया कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने मंच पर राजस्थानी भजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थानी अपनायत और मेहमाननवाज़ी दुनिया में सबसे बेहतरीन है। उनकी पत्नी किरण अग्रवाल के साथ RAUK की दस साल की सांस्कृतिक यात्रा पर आधारित कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण किया गया। राजस्थानी गीतों पर थिरके सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को राजस्थान की रंगीन परंपराओं से भर दिया। मंच पर ‘शुभ दिन आयो, घणी खम्मा, घूमर, लुक छुप ना जाओ, बाजोटियो, लाल पीली अंखियां, मीरा बाई एकली खड़ी, रंगीलो म्हारो ढोलना, रील बना दो, पीली लुंगड़ी, जाला सैं, कालीयो कूद पड़ियो, बन्नी रील, रांपीर–तेरह ताली, हथ में तलवारा, दल बाटी चूरमा थीम डांस, एक बार आओ जी जवई जी और चल्ला चल्ला रे’ जैसे गीतों पर प्रस्तुतियां हुईं। बच्चों और युवाओं ने पारंपरिक नृत्यों को आधुनिक अंदाज़ में पेश किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि राजस्थानी संस्कृति नई पीढ़ी में भी उतनी ही जीवंत है।
दिगपाल सिंह और ऐश्वर्या गोयल ने कार्यक्रम में दस वार्षिकी यात्रा पर प्रकाश डाला । 10 विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान राजस्थानी भोजन ने कार्यक्रम को घर जैसा स्वाद दिया। दाल-बाटी चूरमा, खीर‑जलेबी, पुरी‑सब्ज़ी, बर्फ गोला और अन्य पारंपरिक व्यंजनों ने मेहमानों को राजस्थान की मिट्टी की याद दिला दी। कार्यक्रम में समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। जीमण लंदन 2026 ने यह सिद्ध किया कि प्रवासी राजस्थानी समुदाय अपनी संस्कृति को न केवल संजोता है, बल्कि उसे नई पीढ़ियों तक गर्व के साथ पहुंचाता है। यह आयोजन यूके में राजस्थान की आत्मा का एक भव्य और यादगार उत्सव बनकर उभरा। कार्यक्रम में आलोक शर्मा, अनुभव चौधरी, आदित्य शक्तावत ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया ।

छोटी खाटू में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई:भ्रामक प्रचार पर पेप्सिको स्ट्रिंग के 15,780 कैन-बोतलें सीज, सैंपल जांच के लिए भेजे

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने छोटी खाटू में एक बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने एनर्जी ड्रिंक के नाम पर भ्रामक प्रचार के आरोप में पेप्सिको स्ट्रिंग के 15,780 कैन और बोतलें सीज कीं। यह कार्रवाई छोटी खाटू स्थित एक गोदाम में की गई। उत्पाद का नमूना जांच के लिए जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक टीम ने खंडेलवाल एजेंसी, छोटी खाटू के गोदाम का निरीक्षण किया। अभिहित अधिकारी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. नरेंद्र चौधरी ने बताया कि एफएसएसएआई एक्ट के तहत कैफिनेटेड बेवरेज का नमूना लिया गया और 15,780 कैन व बोतलें सीज की गईं। डॉ. चौधरी ने स्पष्ट किया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार कैफिनेटेड बेवरेज के लेबल पर “स्टिम्युलेट्स माइंड”, “एनर्जाइज बॉडी”, “एनर्जी ड्रिंक” या “स्पोर्ट्स ड्रिंक” जैसे दावे करना भ्रामक प्रचार माना जाता है। सीएमएचओ ने आगे बताया कि एफएसएसएआई ने इस संबंध में देश की कई प्रमुख बेवरेज कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उन्होंने यह भी बताया कि अधिक कैफीन वाले ऐसे पेय पदार्थ गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। विभाग ने बताया कि नमूनों की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी बाबूलाल और सहायक कर्मचारी राजूराम शामिल थे।

ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन में लापरवाही पड़ी भारी:उपभोक्ता आयोग ने मानी परिवहन विभाग की गलती, 8 हजार मुआवजे का आदेश

बारां जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन गलत व्यक्ति के नाम दर्ज करने और शिकायत के बाद भी सुधार नहीं करने पर परिवहन विभाग को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने विभाग को वाहन का नियमानुसार नवीनीकरण करने के साथ परिवादी मुरलीधर मालव को 8 हजार रुपए (5 हजार मानसिक क्षति और 3 हजार परिवाद व्यय) देने का आदेश दिया है। ट्रैक्टर खरीदने के बाद शुरू हुई परेशानी आदर्श नगर, कोटा रोड निवासी मुरलीधर मालव ने बताया कि उन्होंने बूंदी निवासी एक व्यक्ति से ट्रैक्टर खरीदा था। पुराने रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त होने के बाद उन्होंने वाहन के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। इस दौरान परिवहन विभाग ने ऑनलाइन प्रक्रिया का हवाला देकर उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाए। गलत व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया रजिस्ट्रेशन परिवादी के अनुसार, लगातार प्रयासों के बावजूद विभाग ने ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन उनके नाम करने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया। इस त्रुटि को सुधारने के लिए उन्होंने लिखित आवेदन भी दिया, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। आयोग ने माना सेवा में कमी इसके बाद मुरलीधर मालव ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान आयोग ने रिकॉर्ड का परीक्षण कर पाया कि परिवहन विभाग ने ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन गलत तरीके से किया था, जो सेवा में स्पष्ट कमी है। नवीनीकरण और मुआवजे का आदेश आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार और सदस्य अनिल शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि यदि वाहन की वैधता अवधि शेष है और परिवादी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो विभाग नियमानुसार वाहन का नवीनीकरण करे। साथ ही विभाग को 5 हजार रुपए मानसिक क्षति और 3 हजार रुपए परिवाद व्यय के रूप में अदा करने के निर्देश दिए। आयोग के रीडर योगेश कुमार ने निर्णय की जानकारी दी।

फसल देखते समय किसान की तबीयत बिगड़ी, मौत:अचानक पेट में तेज दर्द हुआ, अचेत होकर गिरे; अस्पताल में मृत घोषित

प्रतापगढ़ जिले के चुपना गांव में खेत पर फसल देखते समय एक किसान की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक की पहचान 40 वर्षीय विक्रम पुत्र रामेश्वर डांगी के रूप में हुई है। यह घटना बुधवार सुबह हुई। जानकारी के अनुसार, विक्रम बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे अपने मौसी के लड़के सोनू कुमार डांगी के साथ खेत पर गया था। इसी दौरान उसे अचानक पेट में तेज दर्द उठा और वह अचेत होकर गिर पड़ा। सोनू कुमार ने तत्काल परिजनों और पुलिस को सूचना दी। परिजन विक्रम को अचेत अवस्था में जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अरनोद थाना के हेड कांस्टेबल दिनेश दास ने बताया कि बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे मृतक के मौसी के लड़के सोनू कुमार डांगी की रिपोर्ट पर मर्ग दर्ज किया गया। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक विक्रम विवाहित था। उसके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। वह खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।

यूडीएच मंत्री बोले- निकाय-पंचायत चुनाव पर सरकार की तैयारी पूरी:फैसला निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग के हाथ में; कांग्रेस पर साधा निशाना

राजस्थान में लंबे समय से लंबित नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने साफ किया है कि राज्य सरकार अपने स्तर पर चुनाव से जुड़ी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर चुकी है। अब चुनाव कार्यक्रम घोषित करना राज्य निर्वाचन आयोग और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर है। उन्होंने विपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ कांग्रेस चुनाव में देरी का मुद्दा उठा रही है, वहीं दूसरी ओर ओबीसी राजनीतिक आरक्षण भी बनाए रखना चाहती है। दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक निकाय और पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं होने पर कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए यूडीएच मंत्री ने कहा कि सरकार ने परिसीमन और पुनर्सीमांकन का कार्य मार्च 2026 में ही पूरा कर दिया था। सरकार के स्तर पर अब कोई लंबित प्रक्रिया नहीं बची है। चुनाव की चाबी अब निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग के पास खर्रा ने कहा कि संविधान के अनुसार निकाय और पंचायत चुनाव कराने का अधिकार राज्य निर्वाचन आयोग के पास है। वहीं ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करना राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की जिम्मेदारी है। ऐसे में चुनाव की अगली प्रक्रिया दोनों आयोगों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगी। ट्रिपल टेस्ट के लिए वैज्ञानिक आंकड़ों पर जोर यूडीएच मंत्री ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकायों में ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण देने से पहले ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। इसके तहत वास्तविक जनसंख्या, स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग की स्थिति और उनके प्रतिनिधित्व का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग इसी आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक आवश्यकता है। इसलिए सरकार चाहती है कि रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यात्मक और कानूनी रूप से मजबूत हो, ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया किसी न्यायिक विवाद में न फंसे।
आंकड़ों में विसंगतियों से बढ़ी देरी खर्रा ने बताया कि आयोग को स्थानीय स्तर से जो आंकड़े प्राप्त हुए थे, उनके सत्यापन के दौरान कई विसंगतियां सामने आई। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान कई सूचनाएं वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती मिलीं। इसी कारण अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में अपेक्षा से अधिक समय लग गया। उन्होंने कहा कि अब आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि वह जल्द से जल्द फील्ड सत्यापन पूरा कर ट्रिपल टेस्ट के अनुरूप अंतिम रिपोर्ट तैयार करे, ताकि चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सके। मंत्री ने चुनाव में देरी का एक कारण मानव संसाधनों की कमी को भी बताया। उनके अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), सर्वेक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्य एक साथ चलने से आयोग के सामने कर्मचारियों की उपलब्धता चुनौती बनी रही। इसी कारण रिपोर्ट तैयार करने की गति प्रभावित हुई। झाबर सिंह खर्रा ने कहा- विधानसभा के बजट सत्र में भी यह मुद्दा उठा था। उस समय सरकार ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों से स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि वे चाहते हैं कि ओबीसी राजनीतिक आरक्षण के बिना चुनाव करा दिए जाएं तो वे लिखित में अपनी सहमति दें।सरकार उस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने ऐसा कोई लिखित प्रस्ताव नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आज वही विपक्ष चुनाव में देरी को मुद्दा बना रहा है, जबकि उस समय उसने स्पष्ट रुख नहीं अपनाया। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट तैयार होने पर जल्द होगा चुनाव यूडीएच मंत्री ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला साल 2022-23 में आया था, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। अगर कांग्रेस गंभीर होती तो उसी समय राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद इस विषय को प्राथमिकता दी गई और आयोग का गठन कर आवश्यक कार्रवाई शुरू कराई गई। खर्रा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को जल्द से जल्द फील्ड वेरिफिकेशन पूरा कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जैसे ही यह रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को मिलेगी, ओबीसी राजनीतिक आरक्षण पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा और उसके बाद निकाय एवं पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।