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राजस्थान के हर 10वें सरकारी स्कूल में बिजली नहीं:7,200 स्कूलों में 1 शिक्षक, 140 में शून्य विद्यार्थी…पर 189 टीचर

राजस्थान में स्कूलों की संख्या और शिक्षक-छात्र अनुपात देखने पर शिक्षा व्यवस्था संतुलित नजर आती है। 1,06,445 स्कूल, 7,93,158 शिक्षक और 1.59 करोड़ विद्यार्थी हैं। औसत छात्र-शिक्षक अनुपात 20:1 है। लेकिन यूडाइस 2025-26 रिपोर्ट बताती है कि तस्वीर अलग है। 7,200 स्कूल ऐसे हैं जहां एक शिक्षक है। इनमें 1 लाख 78 हजार 531 विद्यार्थी हैं। दूसरी ओर, 140 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी विद्यार्थी नहीं है, लेकिन 189 शिक्षक हैं। मूलभूत सुविधा की बात करें तो कुल स्कूलों में से 98,399 (92.4%) में बिजली कनेक्शन है, जबकि 97,405 (91.5%) स्कूलों में कार्यशील बिजली उपलब्ध है। सरकारी स्कूलों की स्थिति निजी स्कूलों से कमजोर है। 69,983 सरकारी स्कूलों में से 63,809 (91.2%) में बिजली कनेक्शन है और 63,117 (90.2%) में बिजली है। यानी करीब हर दस में एक सरकारी स्कूल आज भी कार्यशील बिजली से वंचित है। असमानता… देश में पहली बार एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या घटी… लेकिन अब भी एक लाख से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं देशभर में एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है। 2025 सत्र में 1,04,125 की तुलना में 2026 सत्र में 1,00,843 बचे हैं। हालांकि, आंध्र प्रदेश में बीते साल 3,445 एकल शिक्षक स्कूल बढ़ गए। महाराष्ट्र में 1,117 स्कूल, राजस्थान में 1,063 स्कूल, कर्नाटक में 693 स्कूल, झारखंड में 655 स्कूल, असम में तमिलनाडु में 286 स्कूल, असम में भी ऐसे 339 स्कूल, हरियाणा में 212 स्कूल, हिमाचल प्रदेश में 164 स्कूल और बिहार में 141 स्कूल बढ़े।

लंबित कृषि कनेक्शन जारी करने की मांग

चूरू | सातड़ा गांव व आस-पास की ढाणियों में लंबित कृषि कनेक्शन जारी करने की मांग को लेकर कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष आदूराम न्यौल ने ऊर्जा मंत्री, डिस्कॉम चेयरमैन व जोधपुर डिस्कॉम एमडी को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में लिखा है कि आरडीएसएस के तहत कई गांवों व ढाणियों में किसानों के कृषि कनेक्शन नहीं हुए हैं। इस संबंध में अधिकारी भी कुछ नहीं कर रहे हैं। ज्ञापन में जिम्मेदार अधिकारियों को पाबंद कर लंबित कनेक्शन जारी करने की मांग की गई।

बड़, पीपल, नीम लगाने का अभियान शुरू

सादुलपुर | संत कबीर मानव धर्म चेतन आश्रम संत रतनदास महाराज द्वारा शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में निशुल्क पौधरोपण का अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक नीम, बड़, पीपल लगवाने के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं। पौधरोपण का किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, बल्कि आश्रम की तरफ से यह सुविधा निशुल्क रहेगी।

इमरजेंसी-भर्ती फिलहाल पुरानी बिल्डिंग में ही:SMS के नए कार्डियक सेंटर में ट्रायल शुरू, ओपीडी में पहले दिन 482 मरीज

एसएमएस हॉस्पिटल में लंबे इंतजार के बाद बुधवार से नए कार्डियक सेंटर में दिल के मरीजों का इलाज शुरू हो गया। फिलहाल यहां ट्रायल के तौर पर ओपीडी और जांचें शुरू की गई हैं। इमरजेंसी केस और भर्ती की व्यवस्था अभी पुरानी बिल्डिंग में ही रहेगी। पहले दिन नई बिल्डिंग की ओपीडी में 482 मरीज इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 31 मरीजों को भर्ती के लिए पुरानी बिल्डिंग में भेजा गया। नई बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी शुरू होते ही मरीजों और परिजनों की भीड़ नजर आई। पहले दिन 54 मरीजों की सीटीएमटी और 150 मरीजों की 2डी इको जांच हुई। इसके साथ ही ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, सोनोग्राफी जैसी जांचें भी यहीं शुरू कर दी गई हैं। करीब 80 करोड़ रुपए की लागत से तैयार कार्डियक सेंटर पूरी तरह शुरू होने के बाद दिल के मरीजों को पर्ची, ओपीडी, जांच, भर्ती और ऑपरेशन के लिए अलग-अलग बिल्डिंगों में नहीं भटकना पड़ेगा। हालांकि नई बिल्डिंग में पार्किंग और रैंप को लेकर पहले विवाद सामने आ चुका है। अब मोबाइल में नेटवर्क नहीं आने की समस्या भी मरीजों के लिए परेशानी बन रही है। कॉल करने के लिए मरीजों और परिजनों को बार-बार बाहर जाना पड़ रहा है। कार्डियक सेंटर में ट्रायल रन के तौर पर बुधवार से ओपीडी शुरू की गई है। 2डी इको, सोनोग्राफी, टीएमटी सहित कई जांचें भी नए भवन में हो रही हैं। कुछ दिन में भर्ती वार्ड और इमरजेंसी भी शिफ्ट कर दिए जाएंगे। मरीजों को एक ही जगह सुविधाएं मिलेंगी। -डॉ. सुनील शर्मा, नोडल अधिकारी

सरकार की सख्ती; पुलिस ने खामियों का सर्वे कराया:रोड समतल करें और हर 5 से 10 किमी पर रम्बल स्ट्रिप्स लगाएं, इससे ड्राइवर अलर्ट रहेंगे

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर लगातार बढ़ रहे हादसों को रोकने के लिए सरकार की सख्ती के बाद पुलिस ने खामियों का सर्वे कराया है। जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने सर्वे में सामने आई कमियों को दूर कराने के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा है। इसमें रोड अलाइनमेंट और समतलीकरण दुरुस्त कराने, हर 5 से 10 किमी पर रम्बल स्ट्रिप्स लगाने, रेस्ट एरिया बढ़ाने और एक्सप्रेस-वे को सीसीटीवी कवरेज में लेने जैसे सुझाव दिए गए हैं। आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि एक्सप्रेस-वे पर कई जगह सड़क समतल नहीं है। कुछ स्थानों पर अचानक गड्ढेनुमा स्ट्रक्चर और सड़क की असमानता के कारण तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित हो रहे हैं। ऐसे स्थानों को चिह्नित कर रोड अलाइनमेंट और समतलीकरण ठीक कराने की जरूरत है। रात में लंबी दूरी तय करने वाले चालकों को नींद की झपकी आने का खतरा रहता है। इसलिए प्रत्येक 5 से 10 किलोमीटर पर पर्याप्त संख्या में रम्बल स्ट्रिप्स लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि वाहन चालक अलर्ट रहें। साथ ही दुर्घटना संभावित स्थानों पर अतिरिक्त चेतावनी संकेतक और रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड लगाने की भी अनुशंसा की गई है। इंटरकनेक्टिविटी प्वाइंट पर अचानक लेन बदलने से हादसे सर्वे में सामने आया कि इंटरकनेक्टिविटी प्वाइंट पर चालक अचानक लेन बदलते हैं। इससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है। आईजी ने सुझाव दिया है कि ऐसे प्वाइंट से करीब एक किलोमीटर पहले ही नीचे उतरने के लिए अलग लेन निर्धारित की जाए। साथ ही बड़े आकार के संकेतक बोर्ड लगाए जाएं, ताकि चालक समय रहते अलर्ट हो सकें और अचानक कट न मारें। जयपुर-बांदीकुई के बीच रेस्ट एरिया नहीं, मुख्य मार्ग पर खड़े हो रहे वाहन जयपुर से बांदीकुई के बीच रेस्ट एरिया नहीं है। ऐसे में भारी वाहनों के चालक टायर गर्म होने या विश्राम के लिए वाहनों को मुख्य मार्ग पर ही खड़ा कर देते हैं। यह हादसों का बड़ा कारण बन सकता है। पत्र में इस हिस्से में रेस्ट एरिया विकसित करने का सुझाव दिया गया है। रेस्ट एरिया में ट्रक चालकों के लिए सस्ती दरों पर भोजनालय की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि चालक भोजन या आराम के लिए गलत जगह वाहन न रोकें। जून में 34 हादसे, 40 मौतें 1 जुलाई को दौसा में हुए हादसे के बाद आईजी राहुल प्रकाश ने एक्सप्रेस-वे का खुद निरीक्षण किया था। इसके बाद कमेटी से भी विजिट कराई गई। दौसा-अलवर क्षेत्र में पिछले दिनों हादसे लगातार बढ़े हैं। एक्सप्रेस-वे पर यातायात भी बढ़ रहा है। पिछले साल जून में 170 किलोमीटर के क्षेत्र में 25 हादसे हुए थे, जिनमें 21 लोगों की मौत हुई थी। इस साल जून में 34 हादसे हुए, जिनमें 40 लोगों की मौत हुई और 65 लोग घायल हुए। ट्रॉमा सेंटर और रेस्क्यू संसाधन बढ़ाने का सुझाव अलवर-दौसा क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर बनाने की जरूरत बताई गई है। साथ ही प्रत्येक रेस्ट एरिया में दमकल, एम्बुलेंस, क्रेन, वेल्डिंग मशीन, कटिंग उपकरण और प्रशिक्षित ऑपरेटर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है। इससे हादसे के बाद घायलों को समय पर मदद मिल सकेगी और वाहन में फंसे लोगों को जल्द निकाला जा सकेगा। कैमरे बदलें, ओवरस्पीडिंग व नो-पार्किंग पर ई-चालान हों आईजी ने एक्सप्रेस-वे को सीसीटीवी कवरेज में लेने का सुझाव भी दिया है। इससे ओवरस्पीडिंग और नो-पार्किंग एरिया में खड़े वाहनों के ऑटोमैटिक ई-चालान हो सकेंगे। पहले लगाए गए कई कैमरे खराब हो चुके हैं। इन्हें बदलकर बेहतर क्वालिटी के कैमरे लगाने की जरूरत बताई गई है। एक्सप्रेस-वे पर लगातार बढ़ रहे हादसों को रोकने के लिए कमेटी से सर्वे कराया है। जो खामियां मिली हैं, उन्हें दुरुस्त कराने के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा है।
– राहुल प्रकाश, रेंज आईजी, जयपुर

सादुलपुर में भी आज संगठनात्मक बैठक लेंगे

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सचिव व प्रदेश सह प्रभारी चिरंजीव राव गुरुवार को संगठनात्मक बैठक लेंगे। कांग्रेस देहात ब्लॉक अध्यक्ष अशोक पूनिया ने बताया कि मोहता वाटिका में गुरुवार को सुबह 10 बजे होने वाली संगठनात्मक बैठक को सह प्रभारी चिरंजीव राव, पूर्व विधायक डॉ. कृष्णा पूनिया सहित अन्य वक्ता संबोधित करेंगे। शहर ब्लॉक अध्यक्ष सीताराम प्रजापत ने बताया कि बैठक को लेकर तैयारियां पूरी की जा चुकी है।

प्लॉट की रजिस्ट्री पर 45 हजार तक खर्च बढ़ेगा:डीएलसी की नई दरें तय: 5 से 40 प्रतिशत का ट्रेंड टूटा, सिर्फ 2 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी

शहर सहित जिले में आवासीय और व्यावसायिक जमीनों की नई डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी (डीएलसी) दरें लागू करने की तैयारी है। राज्य सरकार के आदेश पर कलेक्टर गौरव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई की बैठक में नई दरों को हरी झंडी दे दी गई है। इससे पहले दरें साल 2024 में बढ़ाई गई थीं। बदलाव में राहत की बात यह है कि इस बार 5 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी का ट्रेंड तोड़ते हुए महज 2 से 15% का इजाफा किया गया है। यह प्रति वर्गमीटर 500 से लेकर अधिकतम 5,000 रुपए तक है। फिलहाल डीआईजी स्टांप रागिनी डामोर की टीम कुछ क्षेत्रों की दरों में आंशिक संशोधन कर रही है। इस खाके को इसी सप्ताह अंतिम रूप देकर अगले सप्ताह से बढ़ी हुई डीएलसी दरें लागू कर दी जाएंगी। भुवाणा क्षेत्र और सवीना कृषि मंडी क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक दोनों श्रेणियों की डीएलसी दरों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ग्रामीण अंचल में कोटड़ा में सबसे कम, वाड़ा-ढीकली में सर्वाधिक बढ़ोतरी की गई है। झाड़ोल और फलासिया में हाईवे से 100 मीटर तक की दूरी पर दरें 10% और 100 मीटर से अधिक दूरी के अंदरूनी इलाकों के लिए 5% बढ़ाई गई हैं। बैठक में शहर विधायक ताराचंद जैन, गोगुंदा विधायक प्रतापलाल भील, मावली विधायक पुष्करलाल डांगी, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी आदि मौजूद थे। भास्कर एक्सप्लेनर जानिए दरों का नया गणित और आपकी जेब पर असर 70 वार्ड… जहां 60-100 फीट सड़क नहीं, वहां दर नहीं बढ़ाई
कलेक्टर अग्रवाल के निर्देश पर शहरवासियों को राहत देने के लिए सड़कों की चौड़ाई और व्यावसायिक गतिविधियों के आधार पर दरों को संतुलित किया गया है। जहां 60 से 100 फीट चौड़ी सड़कें नहीं हैं, वहां की वृद्धि दर शून्य (0%) तय की गई है। वॉलसिटी के 17 वार्डों में डीएलसी दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। वार्ड संख्या 5, 12, 13, 15, 34 और 49 से 60 तक आवासीय व व्यावसायिक दोनों श्रेणियों की दरें पहले जैसी ही रहेंगी। वहीं, शेष 53 वार्डों में केवल व्यावसायिक (कॉमर्शियल) डीएलसी दरों में 10% की बढ़ोतरी की गई है। वार्ड 1 से 4, 6 से 11, 14, 16 से 33, 35 से 48 और 61 से 70 तक आवासीय दरों में बदलाव नहीं होगा। पैराफेरी-हाईवे बेल्ट… 5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी

महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों, पुलिस हर कदम पर आपके साथ : एसपी

पुलिस प्रशासन द्वारा जिले में महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे महिला सुरक्षा संकल्प अभियान के तहत बुधवार को जिला मुख्यालय पर टाउन हॉल में महिलाओं से संवाद व सम्मान समारोह हुआ। समारोह में आए एसपी निश्चय प्रसाद एम ने उपस्थित महिलाओं से संवाद करते हुए सुरक्षा संबंधी कानूनों की जानकारी दी। एसपी ने कहा कि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और किसी भी विपरीत परिस्थिति में मुखर होकर आवाज उठाएं, पुलिस हर मोड़ पर उनके साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि डीजीपी के निर्देशानुसार यह राज्य स्तरीय अभियान 1 जुलाई से 29 जुलाई तक चलाया जा रहा है। टाउन हॉल में जहां 400 से अधिक महिलाएं उपस्थित थीं, वहीं जिले के अधीनस्थ थानों के अटल सेवा केंद्रों के जरिए करीब दो हजार महिलाएं ऑनलाइन जुड़ीं। उत्कृष्ट कार्य करने वाली 29 महिलाओं को सम्मानित किया गया। एसआईयूसीएडब्ल्यु की एएसपी डॉ. कृष्णा ने आभार जताया। समारोह में सुरक्षा सखी, महिला सीएलजी सदस्य, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, साथिन, आशा सहयोगिनी, एनएसएस/एनसीसी कैडेट्स, स्कूल-कॉलेज की शिक्षिकाएं आदि शामिल हुई।

युवती का अपहरण कर ले जाने का आरोप आक्रोशित ग्रामीणों का थाने में 2 घंटे प्रदर्शन

भास्कर न्यूज | चौथ का बरवाड़ा पुलिस थाने में बुधवार को गुणशीला गांव के लोगों ने एक युवती के अपहरण का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। परिजनों ने कहा कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। महिलाएं भी थाने पहुंचीं। युवती की बरामदगी को लेकर धरने पर बैठ गईं। परिजनों ने बताया कि तीन दिन पहले रिपोर्ट देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने कहा कि गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है। तलाश जारी है। करीब 2 घंटे हंगामे के बाद ग्रामीणों ने जल्द कार्रवाई के भरोसे पर प्रदर्शन खत्म किया। बुधवार दोपहर युवती के परिजनों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण थाने पहुंचे। महिलाओं और पुरुषों ने प्रदर्शन किया। पीड़ित पक्ष ने थाने में रिपोर्ट देकर बताया कि 22 वर्षीय युवती बीएड द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह गांव से चौथ का बरवाड़ा इंटर्नशिप के लिए आई थी। आरोप है कि रितेश मीणा निवासी गुणशीला और उसका साथी राजेंद्र वर्मा निवासी रिंगस जिला सीकर कई दिनों से युवती की रैकी कर रहे थे। 5 जुलाई को आरोपियों ने चौथ का बरवाड़ा से युवती को बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया। उसे अज्ञात स्थान पर ले गए। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि रिपोर्ट देने के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं हुई। समझाइश के बाद ग्रामीण लौट गए। थाना प्रभारी महेंद्र शर्मा ने कहा कि पहले ही दिन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। लड़की 22 वर्षीय बालिग है। तलाश के लिए टीम लगाई गई है। युवती को ढूंढकर वापस लाने का प्रयास जारी है।

पांचना विवाद भड़का:30 स्थानों पर हाईवे जाम, वाहनों के पहिए थमे… हजारों लोग रास्तों में फंसे; किसानों ने कहा…48 घंटे में पानी नहीं तो आंदोलन

20 साल बाद करौली और सवाई माधोपुर के लिए उम्मीद लेकर खत्म हुआ ‘पांचना जल विवाद’ फिर उबल उठा है। एक ओर कमांड क्षेत्र के किसान नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने पर सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं सोशल मीडिया पर टिप्पणी से आहत गुर्जर समाज ने आंदोलन शुरू कर दिया है। दोनों पक्षों ने नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और अन्य मार्गों पर 30 स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिए जाम लगा दिया है। बुधवार को राजस्थान रोडवेज और निजी बसों के पहिए थम गए। करीब 20 हजार से अधिक यात्री रास्तों में फंसे रहे। मरीज अस्पताल नहीं पहुंच सके। कमांड क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि समझौते का पालन नहीं हुआ, जबकि दूसरी ओर गुर्जर समाज कथित अभद्र टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज है। बुधवार देर रात तक पुलिस-प्रशासन से बातचीत जारी रही लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 6 जुलाई को जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, डॉ. किरोड़ी मीणा, करौली और सवाई माधोपुर जिला प्रशासन, सचिव कृष्ण कुणाल तथा दोनों पक्षों की समितियों के बीच लिखित सहमति बनी थी। दिन में …बांध पर तकनीकी सुधार हुआ; देर रात…वार्ता का नतीजा नहीं निकला दोषियों को गिरफ्तार करो, आमजन को परेशान मत करो…: बैंसला गुर्जर नेता विजय बैंसला ने कहा कि समाज के लोगों और महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं। कमांड क्षेत्र की नहरों में टेस्टिंग के लिए पानी छोड़ा गया था और यदि कोई तकनीकी गड़बड़ी आई है तो प्रशासन उसे ठीक भी कर रहा है। ऐसे में जाम लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि अभद्र टिप्पणी करने वालों को गिरफ्तार किया जाए तथा 24 घंटे में जाम खत्म हो, अन्यथा पूरे देश में आंदोलन करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही भड़काऊ सामग्री को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर नियंत्रण की भी मांग की। तकनीकी खामी थी तो पानी क्यों छोड़ा गया, रोकना था कटकड़ मोड़ पर जाम पर बैठे किसानों का कहना है कि कमांड क्षेत्र की नहरों में अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि तय समय में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा तो आंदोलन पूरे राजस्थान में करेंगे। किसानों का तर्क है कि अगर कमांड क्षेत्र में नहरों से पानी छोड़ने में तकनीकी परेशानी आई थी, तो शासन व प्रशासन को पांचना लिफ्ट से बांध का पानी छोड़ने की प्रक्रिया को रोकना चाहिए था। इधर, पांचना संघर्ष समिति के सदस्य अशोक सिंह धावाई ने कहा कि यह समझौता 39 गांवों के किसानों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया था। समझौते के तुरंत बाद एक नेता विशेष के समर्थकों द्वारा उनकी दिवंगत माता के बारे में सोशल मीडिया पर अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। ऑपरेटिंग रोड क्षतिग्रस्त होने से पानी का प्रवाह कम भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ने की टेस्टिंग के दौरान बांध के गेटों के संचालन के लिए बनी ऑपरेटिंग रोड क्षतिग्रस्त हो गई। इसके कारण गेट पूरी क्षमता से नहीं खुल सके और पानी का प्रवाह प्रभावित हुआ। जानकारी के अनुसार 6 जुलाई की रात को ही मथुरा और देवली से तकनीकी टीम बुलाकर मरम्मत कार्य शुरू कराया गया। पूरी रात काम चलता रहा और 7 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे दोबारा गेटों का संचालन शुरू किया गया। पानी धीरे-धीरे आगे बढ़ा और 8 जुलाई की शाम तक कमांड क्षेत्र के अंतिम छोर तक पहुंच पाया।