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अंता-मांगरोल के लिए नहर में पानी छोड़ने की मांग उठी

भास्कर न्यूज | बारां अंता विधायक प्रमोद जैन भाया ने मानसून की बेरूखी, बारिश में हो रही देरी को देखते हुए कोटा के संभागीय आयुक्त सीएडी को पत्र भेजा है। पत्र में चंबल की दांयी मुख्य नहर में तुरंत सिंचाई पानी प्रवाहित करने की मांग की है। विधायक भाया ने लिखा है कि बारां जिले के अंता विधानसभा क्षेत्र में अंता, मांगरोल तहसील के हजारों किसानों ने धान, सोयाबीन, मक्का सहित खरीफ फसलों की बुवाई समय पर कर दी। अपेक्षित बारिश नहीं हुई। फसलों के विकास पर संकट है। खेतों की नमी लगातार घट रही है। किसानों की मेहनत, आजीविका पर असर की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि चंबल की दांयी मुख्य नहर इस इलाके में सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। समय रहते नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो हजारों किसानों की फसलें प्रभावित होंगी। किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। विधायक ने सीएडी प्रशासन से कहा है कि किसानों की स्थिति, क्षेत्र की जरूरत को गंभीरता से लिया जाए। दांयी मुख्य नहर में जल्द पर्याप्त मात्रा में सिंचाई पानी छोड़ने के निर्देश जारी किए जाएं। इससे अंता, मांगरोल के किसानों की खरीफ फसल सुरक्षित रहेगी। किसानों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन संवेदनशीलता, प्राथमिकता के आधार पर जल्द सकारात्मक फैसला ले। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। फसलों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अंकुरित सोयाबीन में कर रहे खरपतवार नाशक स्प्रे

भास्कर न्यूज | सकतपुर कस्बे सहित आसपास के कई गांवों में प्री-मानसून की बारिश के दौर के बाद कई खेतों में किसानों ने सोयाबीन की बुवाई कर दी थी। कई किसानों ने मानसून की बारिश के बाद बुवाई की। इस समय खेतों में सोयाबीन की फसल अंकुरित होने लगी है। जिससे खेत हरे-भरे नजर आने लगे हैं। खेतों में सोयाबीन की फसल में उग रही खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसान दवाइयों का स्प्रे कर रहे हैं।

बाबा अब्दुल गफूर शाह नक्शबंदी का उर्स संपन्न

बारां | कोटा जिले के कनवास कस्बे में बालापुरा स्थित बाबा अब्दुल गफूर शाह नक्शबंदी का 19वां उर्स उल्लास के साथ मनाया गया। दरगाह के गद्दी नशीन अब्दुल हकीम नक्शबंदी ने बताया कि दूर दराज से आए जायरीनों ने आस्ताने पर फूल, इत्र, चादर पेश कर दुआएं मांगी। दरगाह सदर अब्दुल आसिफ खान ने बताया कि महफिले कव्वाली में हिफजुर रहमान व मोहम्मद हुसैन ने हम्दे पाक, नाते पाक और कौमी एकता के कलाम सुनाकर जायरीनों को मंत्रमुग्ध किया। मुख्य अतिथि अमीन पठान, एमडी चोपदार, जूनियर अन्नू कपूर उर्फ इकबाल मंसूरी, सदर जावेद जेड, अरबाज खान, सदर कालू भाई, इकबाल मंसूरी, मुमताज मंसूरी, असरार भाई हरीश इंद्राणी, समाजसेवी रईस सिद्दीकी का स्वागत किया। साथ ही लंगर बनवाकर जायरीनों को खिलाया गया। उर्स की व्यवस्थाओं में कमेटी के सदर अब्दुल आसिफ खान, सरपरस्त अब्दुल शकूर कुरैशी, सदर जावेद जेड, सदर लियाकत अली आदि ने सहयोग किया।

आयुर्वेद विभाग में डॉ. उदय सिंह ने संभाला कार्यभार

भरतपुर। आयुर्वेद विभाग में उप निदेशक पद पर नियुक्त किए गए डॉ. उदय सिंह धाकड़ ने शनिवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया। इससे पहले वे आरबीएम अस्पताल में पदस्थापित थे। इस अवसर पर डॉ. धाकड़ ने कहा कि राज्य सरकार की आयुर्वेद एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।साथ ही विभागीय सेवाओं को प्रभावी बनाया जाएगा।

एमएसजे में नए प्राचार्य ने संभाला पदभार

भरतपुर| वनस्पति शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ.संजय कुमार ने महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को कार्यभार संभाल लिया है। डॉ. संजय ने राजस्थान सरकार उच्च शिक्षा ग्रुप-3 विभाग के शासन उप सचिव के आदेशानुसार प्राचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण किया है। डॉ. संजय कुमार इससे पूर्व राजकीय महाविद्यालय पहाड़ी में प्राचार्य के पद पर कार्यरत थे। मीडिया प्रभारी डॉ.अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि डॉ.संजय कुमार इससे पूर्व भी महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग में 27 वर्षों तक संकाय सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं।

स्वास्थ्य मंदिर ने स्कूल बच्चों को स्लेट-कॉपी, किताबें बांटी

भरतपुर | शनिवार को स्वास्थ्य मंदिर आश्रम ने शिक्षा मित्र प्रकल्प के तहत नगला जोधसिंह के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के सभी छात्रों को स्लेट, पेंसिल, कॉपी, किताब और स्टेशनरी दी। स्वास्थ्य मंदिर के वृद्धाश्रम में रह रहे सीनियर सिटीजन भामाशाह राघवेंद्र गुप्ता ने कहा कि बच्चों को शिक्षा की बुनियादी जरूरत मिलना जरूरी है। देश की बढ़ोतरी के लिए बच्चों का शिक्षित होना जरूरी है। बच्चों की शिक्षा परिवार, समाज और देश के विकास के लिए जरूरी है। स्वास्थ्य मंदिर शिक्षा मित्र प्रकल्प के तहत लगातार सरकारी स्कूलों में गरीब बच्चों को स्टेशनरी बांटता रहता है। स्लिम एरिया में भी सामग्री वितरित की जाती है। अब तक स्वास्थ्य मंदिर की ओर से 5000 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जुड़ी सामग्री दी जा चुकी है। 100 से अधिक बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराकर उन्हें शिक्षा से जोड़ा जा चुका है। जो बच्चे गरीब हैं, शिक्षा सामग्री नहीं खरीद सकते, वे स्वास्थ्य मंदिर आकर निशुल्क सामग्री ले सकते हैं। स्कूल की प्रतिभा शर्मा, प्रियेश अंग्रे और अन्य अध्यापकों ने सहयोग किया। भरतपुर। बच्चों को पाठय सामग्री देते हुए।

सोलर प्लांट की 70 फीट केबल चोरी

भास्कर न्यूज | राज्यावास राजस्व गांव तेजपुरा में अज्ञात बदमाश एक खेत से सोलर प्लांट की करीब 70 फीट केबल काटकर ले गए। चोर मोटर के बोल्ट भी खोलकर अपने साथ ले गए। पीड़ित रतनलाल तेली ने बताया कि शुक्रवार रात अज्ञात चोरों ने धापूबाई और बालूलाल तेली के खेत में वारदात को अंजाम दिया। शनिवार सुबह परिजन खेत पहुंचे तो चोरी का पता चला। रतनलाल तेली ने बताया कि क्षेत्र में सोलर प्लांट की केबल चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। करीब एक माह पहले अमलोई गांव में किशन जाट के खेत से भी सोलर प्लांट की केबल चोरी हुई थी। वहीं राज्यावास में मांगीलाल गाडरी के खेत को भी चोरों ने निशाना बनाया था। लगातार हो रही चोरियों से किसानों में चिंता और रोष है।

स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की आरटीआई रिपोर्ट में खुलासा:सुविवि को मिली चंपा बाग की 1255 करोड़ की जमीन, भूमाफियाओं ने बसा दी कॉलोनियां

स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की आरटीआई रिपोर्ट ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच के गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए वर्ष 1981 में अवाप्ति अधीन की गई चंपा बाग और निरंजनी अखाड़ा की 14.5900 हेक्टेयर (1,56,988.4 वर्गफीट) जमीन पर रसूखदारों ने अवैध कॉलोनियां, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट और बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दीं। जून 2025 की उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की न्यूनतम आवासीय नीलामी दर 8,000 रुपए प्रति वर्गफीट के आधार पर इस घोटाले से विश्वविद्यालय को 12,55,90,72,000 रुपए (करीब 1,255.90 करोड़ रुपए) की भारी-भरकम चपत लगी है। ये जानकारियां आरटीआई में सुविवि के पूर्व छात्र व एडवोकेट शक्ति सिंह भाटी को मिली हैं। इस घोटाले और घोर लापरवाही के सामने आने के बाद निधि अंकेक्षण विभाग ने कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और निजी हित धारकों को फायदा पहुंचाने के आरोप में सुविवि के तत्कालीन तीन भू-सम्पदा अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई कराने के लिए संयुक्त सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को मामला भेजा है। कोर्ट के आदेश के बाद भी 5 महीने तक दबाई अवाप्ति की फाइल राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कई स्थगन आदेशों को खारिज करते हुए जमीन पर विश्वविद्यालय का मालिकाना हक पूरी तरह बहाल कर दिया था। इसके बावजूद सुविवि के लापरवाह अधिकारी अवाप्ति की अगली प्रक्रिया के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजने की फाइल 5 महीने से अधिक (18 दिसंबर 2024 से 24 मई 2025 तक) कुलपति कार्यालय में दबाकर बैठे रहे। ऑडिट दल के कड़े हस्तक्षेप के बाद जून 2025 में जिला कलेक्टर को पत्र भेजा गया, लेकिन तब तक भू-माफियाओं को अवैध निर्माण और डिस्ट्रेस सेल का पूरा मौका मिल चुका था। सुविवि प्रशासन इस विवादित भूमि को जिला प्रशासन से अवाप्त कराने के लिए कानूनी दांवपेंच खेलता आ रहा था, लेकिन जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजकर अवाप्ति राशि करीब 693.33 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि के चलते हाथ खड़े कर दिए हैं। अब सुविवि के पास कोर्ट-सरकार से इस भूमि को वापस लेने के अलावा दूसरा कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। स्टे के दौरान भी तन गए रिसॉर्ट्स, होटल्स और रेस्त्रां: अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार चंपा बाग की अवाप्ति अधिसूचना प्रभावी होने के बावजूद भू-माफियाओं ने कानून की धज्जियां उड़ाकर अवैध कॉलोनियां काट दीं। वर्ष 2014 की कई सेल डीड में साफ लिखा गया कि जमीन सुविवि के अवाप्ति चक्र में है, यदि अधिग्रहित हुई तो विक्रेता की जिम्मेदारी नहीं होगी। इसे डिस्ट्रेस सेल दिखाकर स्टांप ड्यूटी की चोरी की गई। स्थगन आदेशों के दौरान भी चम्पाबाग का परकोटा ढहाया गया और वहां धड़ल्ले से अवैध सड़कें निकाली गईं। इसी भूमि पर बिना किसी भू-उपयोग परिवर्तन (कन्वर्जन) के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रहीं। हद तो तब हो गई जब मास्टर प्लान की 60 फीट सड़क सीमा में आ रहे पक्के निर्माण के बदले तत्कालीन यूआईटी (अब यूडीए) ने 1,98,52,000 रुपए का मुआवजा भी बांट दिया। कानून तोड़ने वालों पर नरमी न बरतें: ऑडिट रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के कनीज़ अहमद बनाम साबुद्दीन मामले का हवाला देते हुए कहा है कि जानबूझकर कानून तोड़ने वालों पर नरमी न बरती जाए और न अवैध निर्माण रेगुलराइज हो। विभाग ने निर्देश दिया है कि अवाप्ति प्रक्रिया को तुरंत लॉजिकल एंड तक पहुंचाया जाए, अन्यथा समय बीतने पर यह अवाप्ति स्वतः निरस्त हो जाएगी। साथ ही यूडीए, नगर निगम और उप-पंजीयक कार्यालय को पत्र लिखकर इस भूमि की रजिस्ट्री, पट्टा वितरण व नामांतरण पर रोक लगाने को कहा गया है।

अस्पताल में मरीजों को फल बांटे

बारां| भारत विकास परिषद शाखा बारां ने परिषद का 64वां स्थापना दिवस पीड़ित मानवता की सेवा के रूप में मनाया। शहीद राजमल मीणा राजकीय चिकित्सालय के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विभाग में सेवा कार्यक्रम हुआ। शाखा अध्यक्ष नरेश लाभी ने बताया कि परिषद अपने 63 वर्षों के सेवा इतिहास को आगे बढ़ाते हुए 64वें स्थापना दिवस को जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित कर रही है। इसी क्रम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विभाग में भर्ती और उपचाररत महिलाओं और बच्चों को ताजे फल दिए गए। आम जूस के पैकेट भी बांटे। अध्यक्ष लाभी ने कहा कि पीड़ित, रोगी और जरूरतमंद की सेवा ही सच्ची मानव सेवा है। कार्यक्रम में वीरेंद्र माथुरिया, राजेंद्र विजय, श्याम बंसल, प्रवीण बंसल, कमलेश जैन, अम्बिका प्रकाश शर्मा, पवन मित्तल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

उप स्वास्थ्य केंद्र पर सीएचओ की नियुक्ति की मांग

राज्यावास | समवर्ती ग्राम पंचायत मुख्यालय पीपली डोडियान के उप स्वास्थ्य केंद्र पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति की मांग उठी है। गांव के बंटी शर्मा ने बताया कि केंद्र पर अभी एक एएनएम है। एएनएम का ज्यादा समय आंगनबाड़ी में टीकाकरण, बच्चों की जांच में निकल जाता है। इस वजह से उप स्वास्थ्य केंद्र अधिकतर समय बंद रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत मुख्यालय होने के बावजूद यहां अब तक सीएचओ की सुविधा नहीं मिली। करीब 3500 से ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रहीं। सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ भी समय पर नहीं मिल रहा। सामान्य बीमारी या अचानक स्वास्थ्य समस्या होने पर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों को इलाज के लिए दूर के स्वास्थ्य केंद्रों में जाना पड़ता है। इससे समय, पैसा, मेहनत ज्यादा लगती है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत मुख्यालय पर सीएचओ की नियुक्ति होने से गांव में ही प्राथमिक इलाज मिलेगा। टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, सरकारी योजनाएं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सकेगा। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने के बाद भी समाधान नहीं हुआ। इससे गांव में रोष है।