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टाटा मोटर्स फाइनेंस और उसके 8 अधिकारियों पर FIR दर्ज:स्क्रैप कारोबारी से 46.66 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

अलवर में पुराने वाहनों के स्क्रैप कारोबारी ने टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड और उसके आठ अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। कोर्ट के आदेश पर अरावली विहार थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संजय कॉलोनी निवासी और ‘गणपति स्क्रैप’ के संचालक अशोक कुमार ने शिकायत में बताया कि वह टाटा मोटर्स फाइनेंस के अधिकृत ऑनलाइन खरीदार हैं। वर्ष 2023 और 2024 के दौरान उन्होंने कंपनी की ऑनलाइन नीलामी में पांच वाहनों की खरीद के लिए 46 लाख 66 हजार 500 रुपए जमा कराए थे। रकम जमा कराने के बाद भी नहीं ट्रांसफर किए वाहन शिकायत के अनुसार कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि जब्त वाहनों को कोर्ट या संबंधित अधिकारी से रिलीज कराकर आवश्यक दस्तावेज (फॉर्म-35 और 36) पूरे करने के बाद वाहन उनके नाम ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। लेकिन न तो वाहन उन्हें सौंपे गए और न ही दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। अशोक कुमार का आरोप है कि जिन वाहनों के लिए उन्होंने भुगतान किया, उनमें से कुछ को उनके मूल मालिक पहले ही छुड़ा चुके थे, जबकि कुछ वाहन राज्य सरकार द्वारा राजसात कर नीलाम किए जा चुके थे। इसके बावजूद कंपनी ने उनसे पूरी रकम वसूल ली। परिवादी ने बताया कि उन्होंने कई बार कंपनी से वाहन उपलब्ध कराने या जमा राशि लौटाने की मांग की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। आरोप है कि 17 जून 2026 को कंपनी अधिकारियों ने वाहन देने और रकम वापस करने से भी इनकार कर दिया। पुलिस ने इन 8 अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की FIR कोर्ट के आदेश की पालना में अरावली विहार थाना पुलिस ने टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड और उसके विभिन्न अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जिन अधिकारियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है उनमें नीरज धवन – मैनेजिंग डायरेक्टर,संदीप वर्मा – रीजनल मैनेजर, गौरव – जनरल कलेक्शन अधिकारी,विजय दीक्षित – रीजनल कलेक्शन हेड, मनीष रोशन – रीजनल कलेक्शन हेड, राजेश अग्रवाल – ब्रांच हेड ऑल राजस्थान,अनिल झालाना – आरबीएम को-ऑर्डिनेटर, ऑल इंडिया और ब्रांच मैनेजर शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सीकर में 2 पड़ोसी नाबालिग लड़कियां लापता:शाम के समय घर से निकली, परिवार ने एक युवती पर शक जताया

सीकर जिले में 2 पड़ोसी नाबालिग लड़कियों के अचानक लापता होने का मामला सामने आया है। दोनों 17 जुलाई की शाम करीब 5:30 बजे घर से बिना बताए कहीं चली गईं। परिजनों ने एक अन्य युवती पर अपहरण का शक जताते हुए पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया है। पुलिस मामला दर्ज कर दोनों नाबालिगों की तलाश में जुट गई है। एक नाबालिग लड़की की मां ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया- मेरी बेटी पड़ोस में रहने वाली अपनी सहेली (जो खुद भी नाबालिग है) के साथ 17 जुलाई की शाम को घर से निकली थी, जिसके बाद वे वापस नहीं लौटीं। दोनों परिवारों को एक अन्य युवती पर शक है, जिसका मोबाइल नंबर भी पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों नाबालिग लड़कियों के परिवार मूल रूप से दूसरे राज्य के रहने वाले हैं। वे वर्तमान में काम के सिलसिले में सीकर आए हुए हैं और यहां किराए के मकान में रह रहे हैं। 18 साल की युवती भी लापता सीकर में ही एक अन्य घटना में 18 वर्षीय युवती के लापता होने का मामला भी सामने आया है। वह 18 जुलाई की दोपहर को घर से बिना बताए कहीं चली गई। लापता होने के बाद से युवती का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। पुलिस इस मामले में भी गुमशुदगी दर्ज कर युवती की तलाश कर रही है।

गवर्नमेंट कॉलेज में एनसीसी भर्ती आयोजित:80 सीटों के लिए 158 अभ्यर्थी आए, शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा का आयोजन

करौली के गवर्नमेंट कॉलेज में सोमवार को एनसीसी की 80 सीटों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई। इसमें कुल 158 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जिनमें 135 छात्र और 23 छात्राएं शामिल थीं। चयन के लिए शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया। कॉलेज के एनसीसी प्रभारी महेंद्र मीणा ने बताया कि यह भर्ती प्रक्रिया 14 राज बटालियन, कोटा के निर्देशन में संपन्न हुई। सूबेदार जय सिंह, हवलदार मोहम्मद नासिर और प्रदीप सिंह ने चयन प्रक्रिया का संचालन किया। अभ्यर्थियों की शारीरिक क्षमता का आकलन करने के लिए दौड़, पुश-अप और सिट-अप सहित विभिन्न फिटनेस परीक्षण किए गए। इसके उपरांत लिखित परीक्षा भी आयोजित की गई। अधिकारियों ने बताया कि सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर योग्य अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।

डूंगरपुर कलेक्ट्रेट पर पुलिस और स्टूडेंट्स में हुई धक्का-मुक्की:एसबीपी कॉलेज से निकाली आक्रोश रैली, जमकर की नारेबाजी

देश में हाल ही में हुए नीट, यूजीसी और सीबीएसई पेपर लीक मामलों को लेकर छात्रों का विरोध जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को डूंगरपुर में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ शहर में आक्रोश रैली निकाली। छात्रों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। एसएफआई के झंडे और “मोदी सरकार चुप्पी तोड़ो, छात्रों को जवाब दो” लिखे नारों की तख्तियां थामे छात्र सड़क पर उतरे। एसएफआई ने एसबीपी कॉलेज से कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली। इस दौरान छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट में प्रवेश का प्रयास किया, जिस पर पुलिस के साथ उनकी धक्का-मुक्की भी हुई। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर जताया रोष
आक्रोश रैली का नेतृत्व कर रहे एसएफआई के राजस्थान राज्य उपाध्यक्ष फाल्गुन बरंडा ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर वामपंथी संगठनों और छात्रों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से दिए जा रहे धरने को दिल्ली पुलिस ने बलपूर्वक हटा दिया, जो निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार से आवाज को दबाया जाना तानाशाही है। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद एसएफआई ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने, विवादों में घिरी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और भविष्य में परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा व्यवस्था और सिस्टम में बड़े बदलाव किए जाने की मांग की गई है।

बीकानेर में 300 प्राइवेट स्कूल बंद, शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन:बोले-हर महीने निरीक्षण बंद हो; पुलिस ने रोकने के लिए गेट पर लगाया ताला

प्राइवेट स्कूलों में हर महीने निरीक्षण के शिक्षा विभाग के आदेश के विरोध में सोमवार को बीकानेर के करीब 300 निजी स्कूल बंद रहे। प्राइवेट स्कूल संचालकों, शिक्षकों और स्टाफ ने कलेक्ट्रेट से शिक्षा निदेशालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। बाद में अतिरिक्त निदेशक शैलेंद्र देवड़ा के साथ वार्ता हुई, जिसमें एक-एक बिन्दू पर चर्चा हुई। इस दौरान शिक्षा मंत्री और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शन के चलते शिक्षा निदेशालय का मुख्य गेट भी बंद कर दिया गया, जिससे अपने काम से पहुंचे अभ्यर्थियों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह 11 बजे कलेक्ट्रेट से निकाला पैदल मार्च हर महीने प्राइवेट स्कूलों के निरीक्षण के आदेश के विरोध में सोमवार सुबह करीब 11 बजे दो हजार से अधिक स्कूल संचालक, शिक्षक और स्टाफ कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए। यहां से सभी रैली के रूप में शिक्षा निदेशालय पहुंचे और मुख्य द्वार के बाहर धरना देकर सरकार के आदेशों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बीच निदेशालय का गेट बंद, कई लोग नहीं जा सके अंदर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सदर थाना पुलिस ने शिक्षा निदेशालय के मुख्य गेट पर ताला लगवा दिया। इसके बाद निजी सुरक्षा गार्डों ने किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इससे अपने काम से पहुंचे लोगों को भी परेशानी हुई। भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक अभ्यर्थी हाईकोर्ट का आदेश लेकर निदेशालय पहुंचा था, लेकिन उसे भी अंदर नहीं जाने दिया गया। वहीं, आरटीई के तहत प्रवेश नहीं मिलने की शिकायत लेकर आई एक महिला अभ्यर्थी भी मुख्य द्वार बंद होने के कारण अधिकारियों से नहीं मिल सकी। आदेश वापस नहीं हुआ तो प्रदेशभर में हड़ताल की चेतावनी प्रदर्शन के दौरान प्राइवेट स्कूल संगठन सेवा के प्रदेशाध्यक्ष कोडाराम भादू ने कहा – यदि हर महीने स्कूलों के निरीक्षण का आदेश वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के निजी स्कूल अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने बताया कि संगठन की मांगों में निरीक्षण का आदेश वापस लेना, आरटीई की बकाया राशि का भुगतान, बिना फीस ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) देने का आदेश रद्द करना, नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का भुगतान करना तथा कोचिंग संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण या पाबंदी लगाना शामिल है।

सीएम बोले- साइबर अपराध बड़ी चुनौती, पुलिस पूरी तरह तैयार:साइबर फ्रॉड के खिलाफ देशभर में शुरू हुआ अभियान; दैनिक भास्कर की पहल से लोगों में बढ़ेगी जागरूकता

देशभर में सोमवार से दैनिक भास्कर और एस के फाइनेंस की ओर से साइबर सुरक्षा अभियान की शुरुआत हुई। जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा- आज के समय में साइबर क्राइम सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। सरकार साइबर अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार काम कर रही है। राजस्थान में R4C, साइबर हेल्पलाइन 1930 और ‘ऑपरेशन एंटीवायरस’ जैसे नवाचारों के जरिए साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा – राजस्थान में हमने पुलिस प्रशासन को भी पूरी तरह मुस्तैद किया है। साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए व्यवस्थाएं और संसाधन बढ़ाए हैं, ताकि राजस्थान ही नहीं, राज्य के बाहर होने वाले साइबर अपराधों की भी जानकारी समय पर मिले और अपराधियों को रोका व दंडित किया जा सके। हमारी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। मैं दैनिक भास्कर की पूरी टीम का धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने इस विषय पर इतना बड़ा अभियान शुरू किया है। कई सहयोगी संस्थाएं भी इसमें जुड़ी हैं, उनका भी आभार व्यक्त करता हूं। मुख्यमंत्री ने आमजन से अपील करते हुए कहा- साइबर अपराध ऐसा अपराध है। जिसमें कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता और वे इसकी चंगुल में फंस जाते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को बहुत सतर्कता और समझदारी से काम लेना चाहिए। हमारी पुलिस साइबर अपराधियों पर नकेल कसने और उन्हें सजा दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अभियान से इस लड़ाई को और मजबूती मिलेगी।
एक करोड़ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य एस के फाइनेंस के एमडी एवं सीईओ राजेंद्र कुमार सेतिया ने कहा- उनकी कंपनी लेंडिंग बिजनेस से जुड़ी है, इसलिए साइबर सुरक्षा के जोखिमों को बहुत करीब से समझती है।
उन्होंने बताया – हमारे पास करीब 25 लाख ग्राहकों का डेटा है। उनके परिवारों को जोड़ें तो यह अभियान करीब एक करोड़ लोगों तक पहुंच सकता है। हमारा प्रयास है कि सरकार के सहयोग से साइबर सुरक्षा का यह संदेश राजस्थान के हर नागरिक और पूरे देश के लोगों तक पहुंचे। अभियान के तहत एक ऑनलाइन डिजिटल संकल्प भी शुरू किया गया है। कोई भी व्यक्ति वेबसाइट के माध्यम से इसमें शामिल होकर साइबर सुरक्षा का संकल्प ले सकता है। एस के फाइनेंस के कर्मचारी भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा।
अब बैंक लूटने के लिए गन की जरूरत नहीं दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर एल.पी. पंत ने कहा- साइबर फ्रॉड आज महामारी की तरह पूरे देश में फैल रहा है। पहले बैंक लूटने के लिए हथियारों की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब सिर्फ आपके मोबाइल नंबर और कुछ जानकारी के जरिए आपका बैंक खाता खाली किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसी उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होकर खुद को ऑनलाइन ठगी से बचा सकें। पोस्टर विमोचन के दौरान ये रहे मौजूद पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर एल.पी. पंत, राजस्थान बिजनेस हेड बी.एस. शेखावत, एस के फाइनेंस के एमडी एवं सीईओ राजेंद्र सेतिया, जेईसीआरसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के वाइस चेयरमैन अर्पित अग्रवाल सहित दैनिक भास्कर, एसके फाइनेंस, KGK Realty और जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह अभियान दैनिक भास्कर और एसके फाइनेंस की ओर से संयुक्त रुप से प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि KGK Realty और जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी इसके को-पावर्ड पार्टनर हैं। अभियान का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराध से बचाव के प्रति जागरूक करना है।

हिमाचल में सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन:धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, शिमला, मंडी, सोलन और कुल्लू में सड़कों पर उतरे लोग

देश की राजधानी दिल्ली में चल रहे आंदोलन के समर्थन में आज (सोमवार को) हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में भी छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए। पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में शिमला, सोलन और कुल्लू सहित विभिन्न स्थानों पर रैलियां और धरने आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने सोनम वांगचुक की रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और एनटीए को रद्द करने की मांग की। इन मांगों के पूरा नहीं होने पर आंदोलन को उग्र करने की भी चेतावनी दी गई। सोलन में भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र, युवा, किसान और मजदूरों ने प्रदर्शन किया। सीटू, एसएफआई और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने चिल्ड्रन पार्क से पुराने विश्राम गृह तक रोष रैली निकाली। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। पेपर लीख से लाखों युवा परेशान: मोहित सीटू के जिला महासचिव मोहित वर्मा ने कहा कि पिछले एक महीने से देशभर में पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन हटाया गया। उनके समर्थन में ही देशभर के विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। शिमला के शेर-ए-पंजाब के पास प्रदर्शन शिमला में शेर-ए-पंजाब के समीप युवाओं ने धरना देकर ‘सोनम वांगचुक जिंदाबाद’ और ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। कुल्लू में डीसी ऑफिस के बाहर धरना कुल्लू में भी डीसी ऑफिस के बाहर भी सीटू और सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक से युवाओं का भविष्य संकट में है। उन्होंने सोनम वांगचुक की रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों और युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

चूरू में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का फूटा आक्रोश:बाल विकास अधिकारी से लगाई गुहार, कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन

चूरू में ग्रामीण और शहरी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सहायिकाओं ने सोमवार दोपहर बाल विकास अधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर बाल विकास अधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संजू प्रजापत ने बताया कि वे वर्षों से महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत निष्ठापूर्वक कार्य कर रही हैं। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे 18 जुलाई 2026 को जयपुर में जारी सहमति पत्र से पूरी तरह सहमत नहीं हैं।
उनका कहना है कि उनकी न्यायोचित मांगों का अब तक संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है। इसलिए, जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने की अनुमति दी जाए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने प्रशासन से आग्रह किया कि वे उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लें और उनकी आवाज को राज्य सरकार तक पहुंचाकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इस प्रदर्शन के दौरान गायत्री देवी, पूनम शर्मा, भारती शर्मा, मोनू, माया, सुमित्रा, लक्ष्मी गोस्वामी, मंजू, उषा, कमला, आशा शर्मा, विमला जाट, अनिता, संतोष, सरोज, किरण स्वामी, माया सैनी, सुनीता मीणा, कृष्णा राजपुरोहित, जुलेखा, नीलम पारीक, पार्वती और सरिता सहित कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं मौजूद रही।

इंजेक्शन लगाने पर नीला पड़ा शरीर,मुंह से निकलने लगा झाग:7 दिन से बुखार से पीड़ित महिला की मौत; परिजनों का इलाज में लापरवाही का आरोप

कोटा के रावतभाटा इलाके में रविवार रात 10 बजे 7 दिनों से बुखार से पीड़ित एक महिला मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला के मुंह से झाग निकलने लगे और उसका शरीर नीला पड़ गया। गंभीर हालत में उसे कोटा के अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी है और मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आज (सोमवार) कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमॉर्टम करवाया जा रहा है। मृतका ललिता रावत (34) न्यू मार्केट रावतभाटा की निवासी थी। पिछले 7 दिन से बुखार से पीड़ित थी। ड्रिप चढ़ाने के बाद महिला को लगने लगी ठंड पति हिम्मत सिंह ने बताया कि ललिता की 7 दिन से तबीयत खराब थी। उसे बुखार आया था। रावतभाटा सरकारी हॉस्पिटल में दो दिन ड्रिप चढ़वाई थी। इसके बाद उसकी तबीयत थोड़ी ठीक हो गई थी। लेकिन दो दिन बाद वापस से बुखार आ गया। 19 जुलाई रविवार को फिर से रावतभाटा सरकारी हॉस्पिटल में दिखाया। ड्यूटी डॉक्टर ने जांच लिखी और सुबह के वक्त ड्रिप चढ़ाई। इससे ललिता को थोड़ा आराम मिला। शाम को फिर बुलाया। रविवार होने के चलते हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं था। शाम 7 बजे करीब फिर से एक ड्रिप चढ़ाई। ड्रिप चढ़ाने के कुछ देर बाद ललिता का शरीर वाइब्रेट ( धूजने) होने लगा और ठंड लगने लगी। स्टाफ को बुलाकर ड्रिप बंद करवाई। ललिता को ठंड लग रही थी। इस बारें में हॉस्पिटल स्टाफ को बताया, इसके बाद स्टाफ ने एक इंजेक्शन लगाया। जिससे ललिता का शरीर वाइब्रेट होना बंद हुआ। इंजेक्शन लगाया तो महिला के मुंह से निकलने लगा झाग उन्होंने आगे बताया कि कुछ देर बाद स्टाफ ने कूल्हे पर इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगाने के बाद से ही ललिला को चक्कर आने लगे, मुंह खराब हो गया। उसे मुंह से बोला नहीं जा रहा था। वो पसीना-पसीना हो गई और मुंह से झाग निकलने लगा। इस दौरान शरीर नीला पड़ गया। ज्यादा तकलीफ होता देख रविवार रात 10 बजे उसे कोटा रेफर कर दिया गया। उसे तुरंत एंबुलेंस की मदद से कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लेकर आए, जहां डॉक्टर ने चेक कर मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि ललिता के पहले कोई बीमारी नहीं थी। रावतभाटा के सरकारी अस्पताल में इलाज में लापरवाही के चलते ललिता की मौत हुई है। कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को लिखित में शिकायत दी है। डॉक्टर और स्टाफ का नाम पता नहीं है। हिम्मत सिंह ने बताया वह सिलाई का काम करते हैं। उनके दो बच्चे 14 साल व 12 साल के हैं। पिछले सात दिन से महिला थी बीमार रावतभाटा थाना ASI शांतिलाल बुनकर ने बताया कि महिला 7 दिन से बीमार थी। पति ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दी है। डॉक्टर और स्टाफ कौन थे। इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमॉर्टम करवाया जा रहा है। परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जाएगी।

उदयपुर में सरकारी स्कूल की छत गिरने का डर:बच्चों को बचाने कमरों में कांटे बिछाए; टीचर बोले- अधिकारियों को बताया लेकिन कुछ नहीं हुआ

उदयपुर की वल्लभनगर तहसील के एक सरकारी स्कूल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि छत के कभी भी गिरने की संभावना बनी हुई है। हादसे की आशंका को लेकर स्कूल स्टाफ ने कमरों और बरामदे में कांटेदार झाड़ियां बिछा दी हैं। ताकि कोई बच्चा गलती से भी कमरों मे न चला जाए। मामला माल की टूस पंचायत के फलेट गांव के सरकारी मिडिल स्कूल का है। इसकी हालत बेहद चिताजनक बनी हुई है। स्कूल स्टाफ का कहना है कि छुट्टी के बाद भी बच्चे खेलने के लिए आते-रहते हैं। उस वक्त उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं होता। स्कूल में दो ही रूम ठीक हालत में है। इनमें सभी 8 क्लास संचालित होती हैं। कक्षा पहली से 5वीं तक एक रूम में और कक्षा 6 से 8वीं तक दूसरे रूम में चलती हैं। कई बार अधिकारियों को बता चुके, कुछ नहीं हुआ: शिक्षक स्कूल के शिक्षक देवेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया- कमरे और बरामदों की छत से प्लास्टर पूरी तरह झड़ चुका है। छत में लगे सरिए जंग से गल चुके हैं। तेज बारिश में छत के गिरने का डर लगा रहता है। इसलिए हम पहले ही हादसे से सतर्क हैं। बच्चों को भी जर्जर कमरे वाले एरिया में जाने से मना कर दिया है। स्कूल में करीब 60 बच्चे हैं और 4 लोगों का स्टाफ है। शिक्षक ने बताया- हमने कई बार अपने शिक्षा अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। एनएसयूआई नेता बोले-क्या बड़े हादसे का इंतजार? वल्लभनगर निवासी और एनएसयूआई जिला देहात सचिव पूरण कुमार मेघवाल ने बताया कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार​ किया जा रहा है। पहले भी जर्जर भवन गिरने से बच्चों की मौतें हो चुके हैं तो सरकार को मानूसन से पहले ही जर्जर भवनों की सुध लेनी चाहिए थी।