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सतीश पूनिया बोले-'दिल्ली जाओ,कुर्सी बचाओ' यह कांग्रेस में होता है:मैं कार्यकर्ताओं से कहता हूं- जो ऊंट रखेगा उसे टिकट मिलेगा

राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने कहा- दिल्ली जाने का मतलब पैरवी करना होता है। योजनाओं का रिव्यू कर बजट लाना होता है। यह कांग्रेस में होता है कि ‘दिल्ली जाओ, कांग्रेस बचाओ’। पूर्व सीएम अशोक गहलोत को लेकर भी पूनिया ने कहा- रिफाइनरी के काम को लेकर उन्हें कंजूसी न करके इसकी तारीफ करनी चाहिए। मीडिया ने जब ऊंटों के संरक्षण को लेकर सवाल किया गया, तो वे बोले- मैं कार्यकर्ताओं से मजाक में कहता हूं कि जो ऊंट रखेगा, उसे टिकट मिलेगा। नई जिम्मेदारी मिलने पर पूनिया ने कहा- मैंने भी सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम किया था, समय के साथ मेरी भूमिका बदलती रही। जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने सोमवार को ये बातें कहीं। राहुल गांधी और गहलोत किसी सिस्टम को मानने को तैयार नहीं मीडिया ने सवाल पूछा कि सीएम बार-बार दिल्ली जाते हैं और विपक्ष बयान देता है कि कुछ बदलने वाला है। इस पर पूनिया ने कहा- दिल्ली जाने का मतलब योजनाओं का रिव्यू कर उनका बजट लाना और प्रदेश के लिए पैरवी करना होता है। पूनिया ने आगे कहा- सीएम ने भी कहा था कि जब भी मैं दिल्ली जाता हूं, कुछ न कुछ लेकर आता हूं और वे लेकर भी आए। यह कांग्रेस में जरूर होता है कि ‘दिल्ली जाओ, कुर्सी बचाओ’। यह बीजेपी में नहीं होता। परिसीमन को लेकर पूनिया ने कहा- यह सब एक सिस्टम का हिस्सा है। लेकिन राहुल गांधी, कांग्रेस और अशोक गहलोत किसी भी सिस्टम को मानने को तैयार नहीं हैं। लोग घोषणा और भाषण नहीं, परिणाम देखते हैं मीडिया ने सतीश पूनिया से रिफाइनरी के क्रेडिट लेने को लेकर सवाल किया गया, तो पूनिया ने कहा- लोग घोषणा और भाषण नहीं, परिणाम देखते हैं। 2013 में जब उनकी विदाई तय हो चुकी थी, तब सोनिया गांधी को बुलाकर इसकी शुरुआत की गई थी। राजस्थान में एक मिजाज रहा है कि केंद्र और राज्य में एक सरकार नहीं रही। केंद्र में मोदी की सरकार थी और राज्य में गहलोत की सरकार थी, तो गहलोत सरकार में जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा- गहलोत ने केंद्र सरकार की योजनाओं को विफल किया। रिफाइनरी की घोषणा भले ही गहलोत ने की हो, लेकिन उसे धरातल पर लाने का काम बीजेपी ने किया है। अशोक गहलोत को इस काम की प्रशंसा करनी चाहिए। ऐसी कई योजनाएं और बातें हैं, जिन पर उन्हें उदारता रखते हुए तारीफ करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। पूनिया बोले- प्रदेश में ऊंट संरक्षण पर चल रहा है रिसर्च दरअसल, सतीश पूनिया रविवार को बीकानेर गए थे। यहां वे नेशनल केमल रिसर्च सेंटर भी गए थे। पूनिया ने बताया- हम किताबों में पढ़ते हैं कि ऊंट रेगिस्तान का जहाज है। जहां भी राजस्थान की बात होती है, वहां ऊंट जरूर होता है। बीकानेर का राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र (नेशनल केमल रिसर्च सेंटर) ऊंटों की प्रजाति और संरक्षण के लिए काम कर रहा है। ऊंट के प्रोडक्ट्स जैसे दूध और आइसक्रीम बन रहे हैं। एक रिसर्च चल रही है कि रायका और रेबारी समाज के लोग जो ऊंट चराते हैं, उनमें डायबिटीज नहीं होती। इस रिसर्च को लेकर टीम काम कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि कार्यकर्ताओं को ऊंट बचाने के लिए क्या मैसेज देंगे, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा- मैं कार्यकर्ताओं को मजाक में यही कहता हूं कि जो ऊंट रखेगा, उसे टिकट मिलेगा।

वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्य, मुस्लिमों का प्रदर्शन:कहा-हमने कभी अयोध्या-मथुरा की कमेटियों में जगह नहीं मांगी; सारंग बोले-धर्म के चश्मे से न देखें

देश में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों की नियुक्ति हुई है। मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया है। सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के विरोध में सोमवार को भोपाल के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इन दो हिंदू सदस्यों की वक्फ बोर्ड में नियुक्ति अब जानिए मुस्लिम संगठन क्यों कर रहे फैसले का विरोध? ‘बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं’ ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ मुस्लिम समाज की धार्मिक और सामाजिक संस्था है, जहां लोग अपनी संपत्ति अल्लाह की रजा के लिए वक्फ करते हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड का गठन दो दिन पहले हुआ है, जिसमें पहली बार दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों को शामिल किया गया है। कमेटी इसी नियुक्ति का विरोध कर रही है। जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड के गठन का आरोप शमशुल हसन ने अयोध्या, सोमनाथ और मथुरा की धार्मिक संस्थाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि जब मुस्लिम समाज ने कभी उन संस्थाओं के प्रबंधन में प्रतिनिधित्व की मांग नहीं की, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की जरूरत क्यों महसूस की गई। शमशुल हसन ने आरोप लगाया कि नए कानून के लागू होने के तुरंत बाद जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि नए सदस्यों की नियुक्ति करनी थी, तो मुस्लिम समाज के योग्य और अनुभवी लोगों, जैसे सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी। कांग्रेस विधायक बोले- मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल करने के मामले में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी थी, जो सनव्वर पटेल को इतनी जल्दबाजी करनी पड़ी। मध्य प्रदेश शासन ने एक और गलती की है। दो अन्य समाज के लोगों को रखने का प्रावधान है, शासन ने तीन रख दिए। आयुक्त भी अन्य कास्ट के हैं। तानाशाही नहीं चलेगी, मनमानी नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता मुख्यमंत्री मोहन यादव के पोस्टर लेकर पहुंचे। उन्होंने वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को सरकार का हस्तक्षेप बताया। प्रदर्शनकारियों ने “वक्फ बोर्ड में तानाशाही नहीं चलेगी”, “मनमानी नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए और नए वक्फ बोर्ड के गठन पर पुनर्विचार की मांग की। अयोध्या समेत अन्य मंदिरों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया गया और सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी हुई। सरकार से आदेश वापस लेने की मांग उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियां धार्मिक आस्था और समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके प्रबंधन में ऐसे लोगों को शामिल किया जाना चाहिए, जिन पर समुदाय को विश्वास हो। उनका दावा था कि इस फैसले से मुस्लिम समाज में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आदेश वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि निर्णय पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशभर में व्यापक रूप दिया जाएगा। कानून के दूरगामी और सकारात्मक नतीजे आएंगे: सारंग प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि वक्फ कानून-2026 लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना है, जो खुशी और गर्व की बात है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि इस कानून के दूरगामी और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। सारंग ने कहा कि वक्फ बोर्ड को मस्जिद प्रबंधन समिति से जोड़कर देखना गलत है। वक्फ बोर्ड का दायरा केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी जिम्मेदारियां अधिक व्यापक हैं। ‘फैसले से वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी’ वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने का श्री हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच ने स्वागत किया है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि इस फैसले से वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। इंदौर के मालपानी और राघौगढ़ के भार्गव बने सदस्य मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया है। सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सरकार का दावा है कि वह वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के प्रावधानों के तहत बोर्ड का गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। नए बोर्ड में 10 सदस्य हैं। इससे पहले वक्फ अधिनियम-1995 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड के सदस्य केवल मुस्लिम समुदाय से ही होते थे। केंद्र सरकार ने पिछले साल लागू किया था वक्फ संशोधन कानून सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे थे। अदालत ने पूछा कि यदि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जा सकता है, तो क्या भविष्य में मुसलमानों को भी हिन्दू धार्मिक ट्रस्टों के प्रबंधन में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी? मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति संजय कुमार और केवी विश्वनाथन भी शामिल थे, ने संशोधित कानून के विभिन्न प्रावधानों पर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। पीठ ने ‘वक्फ बाय यूजर’ की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। इस व्यवस्था के तहत यदि कोई संपत्ति लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए उपयोग में रही है, तो उसे औपचारिक दस्तावेजों के अभाव में भी वक्फ संपत्ति माना जा सकता है।

बीकानेर में नवजात के बाद मां की भी मौत:पीबीएम हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी थी तबीयत

बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल में रविवार की रात एक और प्रसूता की मौत हो गई। नापासर के कुचौर की रहने वाली लीला(27), पत्नी रेखाराम की जनाना अस्पताल की ओटी में 3 जुलाई को सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद उनके नवजात शिशु की मौत हो गई थी, जिसके बाद रविवार की रात महिला ने भी ट्रोमा आईसीयू में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। फिलहाल महिला के इलाज की फाइल लेने के बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट डॉ. बी.सी. घीया ने बताया- प्रसव के बाद ज्यादा ब्लीडिंग होने से प्रसूता की हालत गंभीर हो गई। उन्हें तत्काल ट्रॉमा आईसीयू में शिफ्ट कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और उनकी मौत हो गई। नवजात की मौत के बाद बिगड़ती गई प्रसूता की तबीयत
कांग्रेस नेता रामनिवास कूकणा ने बताया- लीला को प्रसव पीड़ा होने पर पीबीएम हॉस्पिटल लाया गया था। 3 जुलाई को जनाना अस्पताल की ओटी में उनकी सिजेरियन डिलीवरी कराई गई। ऑपरेशन के बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। इसके बाद लीला की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। प्रसूता की मौत के बाद परिजन पीबीएम अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर एकत्रित हो गए। घटना की सूचना मिलने पर कांग्रेस नेता रामनिवास कूकना भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। कूकना ने बताया कि मामले को लेकर प्रशासन से बातचीत की जा रही है। बता दें कि पिछले एक महीने में पीबीएम हॉस्पिटल में लीला समेत 3 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में हॉस्पिटल में इलाज की व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों की चिंताएं बढ़ गई है। फिलहाल मामले को लेकर हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सिलसिलेवार पढ़िए- एक महीने में हुआ घटनाक्रम ………………………… पीबीएम हॉस्पिटल से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… बीकानेर के सरकारी हॉस्पिटल में एक और प्रसूता की मौत:सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल हो गई थी; अब तक 2 की जान गई बीकानेर के सरकारी हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत:सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल हो गई थी, 20 दिन से वेंटिलेटर पर थी चिकित्सा-मंत्री बोले- ‘पैदल नाचती हुई आईं थी या बीमार होकर’:कहा- 1000 में से 2 की डेथ हो जाती है, दुरुस्त लोगों को आप नहीं देख रहे सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी, 6 महिलाओं की किडनी फेल:बीकानेर के PBM अस्पताल में लापरवाही, एक मरीज वेंटिलेटर पर; अधीक्षक बोले- जांच कमेटी बनाई बाजार से मंगवाकर लगाए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन:प्रसूताओं की किडनी फेल होती रही, हॉस्पिटल प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान, 7 दिन बाद बनाई कमेटी प्रसूताओं की किडनी फेल मामले में डॉक्टर्स को क्लीन चिट!:जांच टीम ने इलाज में लापरवाही नहीं मानी; ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का रिकॉर्ड लिया कांग्रेस-पुलिसकर्मियों में धक्का-मुक्की, पूर्व सभापति ने उतारा शर्ट:सर्किट हाउस के गेट पर चिपकाया ज्ञापन, चूड़ियां रखीं

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती:PM मोदी बोले- आर्टिकल 370 हटाना उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि; अमित शाह पैतृक घर जाकर श्रद्धांजलि देंगे

भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की सोमवार को 125वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाना उनके बलिदान को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि थी। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण के लिए संघर्ष किया और इसी आंदोलन के दौरान 1953 में श्रीनगर में हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया। प्रधानमंत्री ने अखबारों में प्रकाशित अपने लेख में लिखा कि डॉ. मुखर्जी ने हमेशा ‘इंडिया फर्स्ट’ और भारतीय मूल्यों को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने ऐसे संस्थानों और व्यवस्थाओं की नींव रखी, जो अपने समय से आगे की सोच को दिखाती थीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को एक दिन के दौरे पर पश्चिम बंगाल जाएंगे। अमित शाह सबसे पहले कोलकाता के ईको पार्क पहुंचेंगे। यहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रतिमा का भूमि पूजन और शिलान्यास करेंगे। इसके बाद वह भवानीपुर स्थित मुखर्जी के पैतृक आवास जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लेकर PM के लेख में 5 बड़ी बातें… —————–

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती:PM मोदी बोले- आर्टिकल 370 हटाना उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि; शाह ने पैतृक घर जाकर श्रद्धांजलि दी

भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की सोमवार को 125वीं जयंती है। इस मौके पर PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2019 में कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35A हटाना उनके बलिदान को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि थी। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण के लिए संघर्ष किया और इसी आंदोलन के दौरान 1953 में श्रीनगर में हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया। मोदी ने अखबारों में प्रकाशित अपने लेख और वीडियो मैसेज में कहा कि डॉ. मुखर्जी ने हमेशा ‘इंडिया फर्स्ट’ और भारतीय मूल्यों को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने ऐसे संस्थानों और व्यवस्थाओं की नींव रखी, जो अपने समय से आगे की सोच को दिखाती थीं। अमित शाह ने डॉ. मुखर्जी और उनके पिता को श्रद्धांजलि दी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कोलकाता के ईको पार्क में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रतिमा के निर्माण के लिए भूमिपूजन कर आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया। इससे पहले अमित शाह ने कोलकाता के भवानीपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक आवास का दौरा किया। वहां उन्होंने डॉ. मुखर्जी और उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लेकर PM के लेख और वीडियो की 5 बड़ी बातें… —————–

'क्या ताजमहल तेजो महालय मंदिर था':इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र-ASI से मांगा जवाब; सर्वे कमिश्नर नियुक्त करने की मांग पर सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को ताजमहल में तेजो महालय मंदिर होने पर सुनवाई की। इसका सर्वे करने के लिए एडवोकेट कमीशन नियुक्त करने की मांग पर केंद्र सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) से जवाब मांगा। पूछा, क्या ताजमहल तेजो महालय मंदिर था? जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने इस पर केंद्र और ASI को अपने काउंटर-एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया। दरअसल, ताजमहल को लेकर पिछले कुछ सालों से यह सवाल उठाया जा रहा है कि यह मकबरा है या मंदिर? ताजमहल के बारे में दावा किया जाता है कि इसके परिसर में लॉर्ड श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर है। अब जानिए पूरा मामला यह विवाद 2015 में आगरा में दायर एक सिविल मुकदमे से जुड़ा है। उस मुकदमे में हरि शंकर जैन और अन्य भक्तों ने दावा किया था कि ताजमहल असल में ‘तेजो महालय’ था। यह भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर था। जिसे बाद में मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल में मुमताज महल के मकबरे में बदल दिया गया था। उन्होंने इस बात की घोषणा करने, हिंदुओं को स्मारक के अंदर दर्शन, पूजा और आरती करने की अनुमति देने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ताजमहल का निरीक्षण करना जरूरी है। जिससे उनके दावे का समर्थन करने वाले वास्तुशिल्प और संरचनात्मक विशेषताओं का दस्तावेजीकरण हासिल किए जा सकें। एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की थी ताजमहल ASI के नियंत्रण में एक संरक्षित स्मारक है। इसलिए याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे उन हिस्सों तक स्वतंत्र रूप से नहीं पहुंच सकते या उनकी तस्वीरें नहीं ले सकते। जिन पर वे ट्रायल कोर्ट के सामने भरोसा करना चाहते हैं। इसी वजह से याचिकाकर्ताओं ने साल-2017 में एक अर्जी दायर की थी। इसमें ताजमहल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने और ट्रायल कोर्ट के सामने रिपोर्ट पेश करने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई थी। जुलाई- 2019 में खारिज कर दी गई थी अर्जी ट्रायल कोर्ट ने जुलाई- 2019 में यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी थी कि कमिश्नर नियुक्त करने का कोई औचित्य नहीं है। इसी मुकदमे के ट्रायल के दौरान परिसर के सर्वेक्षण के लिए एडवोकेट कमीशन नियुक्त करने का प्रार्थना पत्र दिया गया था। दोनों अदालतों (सिविल जज सीनियर डिवीजन और अपर जिला जज) ने इस पर कोई भी आदेश देने से मना कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। यह याचिका भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय जरिए हरिशंकर जैन समेत 5 अन्य भक्तों की ओर से संयुक्त रूप से की गई है। याचिका में भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और दो अन्य को विपक्षी बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि स्मारक की भौतिक विशेषताओं, वास्तुशिल्प गुणों और अन्य दृश्य पहलुओं को केवल मौखिक सबूतों से प्रभावी ढंग से साबित नहीं किया जा सकता। अब ताजमहल के बारे में पढ़िए… एपिग्राफिका इंडिका में बटेश्वर शिलालेख के अनुसार, राजा परमाल देव ने फिटकरी के समान सफेद रंग का शिवजी का मंदिर 1194 ईस्वी में बनवाया था। ताज गार्डेन, जिसका मूल नाम चारबाग है। इसके निर्माण का वर्णन बाबर ने अपनी पुस्तक बाबरनामा में किया है। बाबर ने अपनी पुस्तक में ताजमहल के नीचे कुओं के निर्माण का भी वर्णन किया है। हुमायूंनामा में भी ताजमहल का उल्लेख है। आगरा गजेटियर, ASI बुलेटिन और रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के जनरल के अनुसार, ताजमहल का शिल्पकार विवादित है। कब-कब विवाद सामने आया? आगे स्लाइड में जानिए-
————————— ये खबर भी पढ़ें… शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम परशुरामपुरी होगा:1.60 लाख होमगार्ड्स का कैशलेस इलाज, योगी कैबिनेट से 28 प्रस्ताव पास
लखनऊ में सीएम योगी की अध्यक्षता में सोमवार सुबह 10 बजे कैबिनेट बैठक हुई। इसमें 28 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें तीन प्रमुख प्रस्ताव हैं। पहला- यूपी के होमगार्ड्स और उनके परिवार के लिए अब 5 लाख रुपए तक की कैशलेस इलाज सुविधा मिलेगी। पढ़ें पूरी खबर…

स्कूल बस से भिड़ी लोक परिवहन की बस:पीछे से आकर टकराई, बच्चों को बैठाने सड़क किनारे रुकी थी बाल-वाहिनी; बड़ा हादसा टला

झुंझुनूं मंडावा मोड़ से चूरू बाईपास जाने वाले मार्ग पर आज सुबह सड़क हादसा हो गया। गांधी नगर के सामने बच्चों से भरी एक स्कूल बस को पीछे से आ रही तेज रफ्तार लोक परिवहन बस ने जोरदार टक्कर मार दी। गनीमत रही कि एक बड़ा हादसा टल गया और सभी बच्चे सुरक्षित हैं। घटना आज सुबह करीब 7:30 बजे की है। जानकारी के अनुसार, टैगोर स्कूल की बस बच्चों को बैठाने के लिए सड़क किनारे रुकी थी। तभी सगीरा सर्किल की ओर से आ रही लोक परिवहन बस बेकाबू होकर स्कूल बस से पीछे से भिड़ गई। देखें मौके की तस्वीरें… महिला गंभीर घायल हादसे के समय सड़क किनारे साफ-सफाई का काम कर रही एक महिला बस की चपेट में आ गई। इस दुर्घटना में महिला के सिर में गंभीर चोट आई है। शम्मी पत्नी जगदीश निवासी तारानगर घायल हो गई। सिर और पैर में चोट आई है। वहीं, लोक परिवहन बस में सवार यात्रियों को मामूली झटके लगे, लेकिन किसी को गंभीर चोट नहीं आई। बच्चे सहमे टक्कर के बाद स्कूल बस में सवार बच्चे डर गए और वहां अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही अभिभावकों में हड़कंप मच गया और वे तुरंत अस्पताल पहुंचे। स्कूल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बच्चों को सुरक्षित निकाल कर दूसरी बस के जरिए स्कूल भेजा। घायलों का उपचार जारी प्राथमिक जानकारी के अनुसार बस में सवार एक बच्चे को हल्की चोट आई है, जिसे तुरंत निजी अस्पताल ले जाकर उपचार दिया गया। एहतियात के तौर पर कुछ अन्य बच्चों को भी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। सफाईकर्मी महिला का गंभीर स्थिति में अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि लोक परिवहन बस का चालक समय पर ब्रेक नहीं लगा सका और हादसा हो गया।

उदयपुर में दिन और रात के तापमान में कमी आई:दोपहर बाद रुक-रुक कर हल्की बारिश, कल भी ऑरेंज अलर्ट, जानिए इस हफ्ते कैसा रहेगा मौसम

उदयपुर में मानसून की एंट्री के बाद से रोजाना रुक-रुक कर बारिश हो रही है। एक दिन पहले रविवार शाम को जिले में तेज बारिश हुई। मौसम विभाग ने भी मानसून की सबसे ज्यादा एक्टिविटी वाले जिलों में उदयपुर को शामिल किया है। उदयपुर में आज दोपहर बाद शहर के अलग-अलग इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई। मौसम दिनभर बदलता रहा सुबह बादल छाए हुए थे। उसके बाद धूप निकली और इसके बाद फिर बादलों ने डेरा डाला। शाम साढ़े चार बजे बाद शहर में बूंदाबांदी के साथ हल्की बारिश हुई। इस बीच आज उदयपुर का अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे पहले रविवार को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री से. रहा। उदयपुर में दिन और रात, दोनों के तापमान में कमी आई है। न्यूनतम तापमान में अधिक गिरावट दर्ज होने से सुबह और रात के समय मौसम अपेक्षाकृत अधिक ठंडा महसूस हुआ, जबकि दिन का तापमान भी रविवार की तुलना में 1.2 डिग्री से. कम रहा। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने मंगलवार को उदयपुर जिले में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां पर तेज बारिश होने की संभावना जताई है। मौसम एक्सपर्ट भूगोल विषय के सहायक आचार्य डॉ. आर.एस.देवड़ा ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के सिस्टम की वजह से मानसून को अच्छी नमी मिल रही है। इसके चलते पूर्वी तट से लगे क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि राजस्थान के दक्षिणी और पूर्वी भाग में वर्षा होगी। मेवाड के अधिकांश हिस्सों में तीन से चार दिनों तक बादल छाए रहने के साथ भारी बारिश की संभावना है। तापमान स्थिर बना रहेगा। उमस वाली गर्मी महसूस होगी
इधर बीते चौबीस घंटे में उदयपुर शहर में सर्वाधिक करीब डेढ़ इंच और बागोलिया बांध और स्वरूपसागर पर एक-एक इंच बारिश हुई है। उदयपुर में आज सुबह 8 बजे तक पिछले चौबीस घंटे की बारिश (मिलीमीटर में) पिछले सात दिनों का उदयपुर का तापमान (डिग्री से. में)

नागौर के पूर्व-सरपंच के भाई की मौत पर बवाल:भाई ने कहा- 5-6 महीने से रची जा रही थी साजिश, 4 घंटे प्रदर्शन के बाद FIR

नागौर की पीह ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच और पूर्व छात्र नेता अमरचंद जाजड़ा के बड़े भाई देवकरण जाजड़ा (35) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। विरोध में सोमवार सुबह से ही अजमेर के जेएलएन (JLN) अस्पताल की मोर्चरी के बाहर परिजनों, ग्रामीणों और समाज के लोगों का भारी धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया। करीब 4 घंटे तक चले इस तीखे विरोध और पुलिस द्वारा हत्या और लूट का मामला दर्ज करने के बाद ही परिजन पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हुए। मौके पर 2 डीएसपी (DSP) सहित 4 थानों का भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों से लंबी समझाइश की, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। पीह के पूर्व सरपंच अमरचंद जाजड़ा ने कहा- मेरे भाई की मौत सामान्य नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। पिछले पांच-छह महीनों से देवकरण की हत्या की साजिश रची जा रही थी। संदिग्ध लोगों के नाम पुलिस को दिए जा चुके हैं और उन्हें तत्काल हिरासत में लेने की मांग की गई है। मामला व्यापारिक रंजिश से जुड़ा हो सकता है। देवकरण रविवार सुबह करीब 11:30 बजे घर से निकले थे। शाम करीब 4:30 बजे गेगल थाना पुलिस का फोन आया कि उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें जेएलएन (JLN) अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ‘मेरे पीछे पुलिस लगी है… मुझे बचाओ’ पुलिस के अनुसार, रविवार( 5 जुलाई) को चाचियावास गांव के नदी क्षेत्र में देवकरण की लग्जरी कार कीचड़ में फंस गई थी। इसके बाद बदहवास हालत में खेतों की ओर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वे लगातार चिल्ला रहे थे कि, “मेरे पीछे पुलिस लगी है… मुझे बचाओ…” इसके बाद वे एक ग्रामीण के मकान में घुस गए, पानी मांगा और काफी घबराए हुए दिखाई दिए। झाड़ियों में छिपने की कोशिश की, अपने सिर पर पत्थर भी मारे और कुछ देर बाद एक मकान की दीवार के पास अचेत होकर गिर पड़े। सूचना पर पहुंची पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह दर्ज हुई FIR कार्यालय से प्रस्थान और पुलिस का फोन
अमरचंद जाजड़ा ने रिपोर्ट में बताया- मेरा भाई देवकरण जाजड़ा 5 जुलाई 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे अजमेर-नागौर रोड स्थित शिवजी चौराहे पर अपने निजी कार्यालय से कार लेकर निकला था। उस समय उसके पास कार में एक आईपैड, ब्राउन रंग का हैंडबैग, तीन मोबाइल फोन और गाड़ी की चाबी थी। साथ ही, उसने हाथ में सोने का कड़ा और गले में सोने की चेन भी पहन रखी थी। शाम करीब 5 बजे गेगल थाना सीआई नरपतराम का फोन आया कि देवकरण की तबीयत ठीक नहीं है और वे तुरंत जेएलएन अस्पताल पहुंचें। हत्या का षड्यंत्र और कीमती सामान गायब होने का आरोप
देवकरण के साथ उठने-बैठने वाले परिचित लोगों और अज्ञात व्यक्तियों ने मिलकर कोई जहरीला पदार्थ दिया और उसकी हत्या का षड्यंत्र रचा। देवकरण के पास मौजूद आईपैड, हैंडबैग, तीनों मोबाइल फोन, गाड़ी की चाबी, हाथ का सोने का कड़ा और गले की सोने की चेन भी मौके से गायब मिले। अमरचंद ने पुलिस से गायब हुए उक्त कीमती सामान की बरामदगी करने और भाई की हत्या का षड्यंत्र रचने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है। पुलिस जुटा रही वैज्ञानिक साक्ष्य एडिशनल एसपी (ग्रामीण) डॉ. लालचंद कायल ने बताया- परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराने की तैयारी की जा रही है। एफएसएल (FSL) टीम ने घटनास्थल, कार और आसपास से साक्ष्य जुटाए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। —— ये खबर भी पढ़िए.. पूर्व सरपंच के भाई की संदिग्ध स्थिति में मौत:आरोप- नशीला पदार्थ देकर की हत्या; अजमेर के जेएलएन अस्पताल में जुटे लोग नागौर के पीह गांव के पूर्व सरपंच और प्रशासक अमरचंद जाजड़ा के भाई देवकरण जाजड़ा की अजमेर में संदिग्ध स्थिति में रविवार को मौत हो गई। पढ़ें पूरी खबर

एलडीसी परीक्षा में खिड़की से पेपर बाहर भेजने का आरोप:प्रशासन ने रिपोर्ट कर्मचारी चयन बोर्ड भेजी, निर्देश अनुसार कार्रवाई होगी

जैसलमेर में रविवार को एलडीसी (लिपिक ग्रेड-द्वितीय) परीक्षा के दौरान राजकीय मॉडल स्कूल सेंटर पर लगे नकल के आरोपों के मामले में सोमवार को प्रशासन ने रिपोर्ट राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को भेज दी। अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) परसाराम सैनी ने बताया कि परीक्षार्थियों की शिकायतों के आधार पर प्रकरण तैयार कर बोर्ड को भेजा गया है। अब बोर्ड से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। रविवार को मॉडल स्कूल सेंटर पर लगे थे आरोप रविवार को सुरक्षा के दावों के बीच जैसलमेर के 19 परीक्षा केंद्रों पर एलडीसी (लिपिक ग्रेड-द्वितीय) परीक्षा दो पारियों में हुई थी। इसी दौरान राजकीय मॉडल स्कूल सेंटर पर परीक्षा शुरू होने के बाद परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया कि खिड़की के रास्ते प्रश्न पत्र किसी अज्ञात व्यक्ति को दिया गया। साथ ही प्रशासन पर लापरवाही और खिड़की के रास्ते पेपर बाहर भेजकर नकल कराने के गंभीर आरोप भी लगाए गए। इसके बाद सेंटर पर विवाद की स्थिति बन गई। एडीएम पुलिस बल के साथ पहुंचे, वीक्षकों से पूछताछ की घटना की जानकारी मिलने के बाद अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) परसाराम सैनी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने वीक्षकों से पूछताछ की और परीक्षार्थियों को शांत कराया। साथ ही निष्पक्ष जांच का भरोसा भी दिया। शिकायतों के आधार पर तैयार किया गया प्रकरण सोमवार को प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की। एडीएम परसाराम सैनी ने बताया कि परीक्षार्थियों द्वारा रिलीवर पर नकल करवाने के लगाए गए आरोपों के आधार पर एक विस्तृत प्रकरण तैयार किया गया है। यह रिपोर्ट सोमवार को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को भेज दी गई है। बोर्ड के निर्देशों के बाद होगी आगे की कार्रवाई प्रशासन ने साफ किया है कि परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एडीएम परसाराम सैनी के अनुसार, अब बोर्ड से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। रविवार को छात्रों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया गया था, जिस पर अब कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।