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बूंदी विधायक ने शहरी सेवा शिविर को बताया विफल:कहा- सरकार के अभियान में तैयारी की कमी, निरीक्षण में मिली कई कमियां

बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने बूंदी नगर परिषद में आयोजित शहरी सेवा शिविर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें शिविर में कई कमियां मिलीं। विधायक शर्मा ने इस अभियान को ‘पूर्णतया विफल’ बताया। शर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी के जल्दबाजी में यह अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के अभियानों में जैसी तैयारी होती थी, वैसी वर्तमान में नहीं दिख रही। अधिकारियों को भी परेशानी हो रही है और केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। अभियान को बंद करने की दी सलाह
उन्होंने बताया कि पिछली सरकार में लाखों पट्टे दिए गए थे, जबकि वर्तमान अभियान में सैकड़ों की संख्या भी पार नहीं हुई है। विधायक ने सरकार को बिना तैयारी के चल रहे इस अभियान को बंद करने की सलाह दी। विधायक शर्मा के शिविर में पहुंचते ही, कई आवेदनकर्ताओं ने अपने काम नहीं होने की शिकायत की। उन्होंने विधायक को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना पत्र सौंपे। इस पर विधायक शर्मा ने नगर परिषद आयुक्त को तत्काल इन कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया। विधायक ने आयुक्त को दिए निर्देश
विधायक शर्मा ने आयुक्त से शिविर में विभिन्न योजनाओं से संबंधित आंकड़े भी मांगे। उन्होंने आयुक्त को निर्देश दिए कि शिविर में प्राप्त सभी पट्टों और अन्य कार्यों के आवेदनों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।
आयुक्त ने विधायक शर्मा को आश्वासन दिया कि नियमानुसार प्राप्त सभी आवेदनों का शीघ्र समाधान किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान वार्ड पार्षद प्रेम प्रकाश एवरग्रीन, समाजसेवी संजय शर्मा और विशाल शर्मा भी विधायक के साथ मौजूद रहे।

गुजरात में शेर का किसान पर हमला, VIDEO:हाथ जबड़े में आधे घंटे दबाए रखा, फिर छोड़ा; एक और व्यक्ति पर भी हमले की कोशिश की

गुजरात में भावनगर के पालीताना तालुका में सोमवार सुबह शेर ने किसान पर हमला कर दिया। किसान कालूभाई बोगभाई परमार ने बताया कि शेर ने मेरी पीठ पर वार किया और मुझे गिरा दिया। फिर उसने मेरा हाथ अपने मुंह में पकड़ लिया। उसने मुझे करीब आधे घंटे तक पकड़े रखा। कालूभाई ने बताया, ‘मैं लगातार उससे छूटने की कोशिश करता रहा। मैंने उसे खरोंचा भी, लेकिन उसकी पकड़ मजबूत थी।’ शेर ने इसके पहले एक और व्यक्ति पर हमले की कोशिश की, लेकिन उसने भाग कर खुद को घर में बंद कर लिया। भावनगर, गिर नेशनल पार्क के इलाके में है। यहां अक्सर घरों और खेतों के आसपास शेर देखे जा सकते हैं। घायल किसान बोला- मैंने शेर को खरोंचा
किसान कालूभाई बोगभाई परमार ने बताया, ‘मैं सुबह 10:30 बजे अपनी गाय को चारा खिलाने जा रहा था। तभी यह घटना हुई। मैंने खुद को बचाने के लिए शेर को खरोंचा, जिससे उसने मेरा हाथ छोड़ दिया।’ उन्होंने बताया, ‘मैं तुरंत वहां से भागा। इसके बाद शेर मेरी गाय के पीछे चला गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि शेर जमीन पर बैठा है और आदमी को दबाए हुए है। शेर ने आदमी के पैर पर काट लिया। आदमी अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।’ घटना की 4 फोटोज… पहले एक और व्यक्ति पर हमला करने की कोशिश की शेर के हमले से बचने वाले हेमूभाई गढ़वी ने बताया, ‘मैं सुबह दूध लेकर आया था, सुबह 8:30 से 9 बजे के बीच का समय था। घर में सब लोग चिल्लाने लगे कि भाई, शेर हमारी बाड़ में घुस आया है। मैं दौड़कर वहां गया। जब मैंने अपनी भैंस को छोड़ा, शेर सीधे मेरी ओर दौड़ा तो मैं जान बचाने भागा और पास में अपने भाई के घर में घुस गया और दरवाजा बंद कर लिया। मेरी भैंस भी भागी, लेकिन वहीं गिर गई। इससे शेर का ध्यान मेरी ओर से हट गया और मैं और मेरी मां दोनों बच गए। उसके बाद शेर वहां से भाग गया। कुछ देर बाद कालूभाई मेरे घर की तरफ आए तो शेर ने उन पर हमला कर दिया। गांव में दहशत, शेर को पकड़ने की कोशिश जारी गरजिया गांव की सरपंच के पति सावजीभाई ने बताया कि उन्होंने इस घटना की सूचना वन विभाग को दी। वन विभाग की टीम डेढ़ घंटे में मौके पर पहुंच गई। शेर को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। इस घटना के बाद गरजिया गांव और आसपास के इलाकों के पशुपालकों में अपने पशुओं और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता और दहशत का माहौल है। डरे हुए बच्चे स्कूल नहीं गए। पालीताना तालुका पंचायत सदस्य चेतन डाभी ने कहा, हमने वन विभाग से अपील की है कि यहां के शेरों को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया जाए। गांव में सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण हमने वन विभाग को कई बार सूचित किया है, लेकिन फिर भी वन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। —————————————– ये खबर भी पढ़ें: गुजरात में 12 शेर, MP में 10 बाघों की मौत:इनके CDV वायरस से मरने का दावा, वन-विभाग ने अब तक रिपोर्ट नहीं की जारी एशियाटिक लायंस के लिए फेमस गुजरात के पूर्वी और पश्चिमी गिर फॉरेस्ट में 12 शेरों की मौत का मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। वन विभाग ने 30 से अधिक शेरों को एनीमल केयर सेंटर में रखा है। हालांकि, शेरों की लेबोरेटरी रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं की गई है। पढ़ें पूरी खबर…

हिंदू एक शादी करता है…ऐसा कानून सभी के लिए हो:CM बोले- इसी महीने आएगा यूनिफॉर्म सिविल कोड; सतगढ़ी इंडस्ट्रियल पार्क से देंगे 15 हजार रोजगार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- एमपी में इसी महीने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) आएगा। हिंदू भाई एक शादी करता है और सात फेरे लेता है, तो सभी के लिए ऐसा ही कानून होना चाहिए। कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती है। वह फिर दावा करेगी कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ है। कांग्रेसियों को याद रखना चाहिए कि एक समान नागरिक संहिता हर हाल में लागू की जाएगी। इसके लिए प्रदेश की जनता से राय ली गई है। 10 लाख से अधिक सुझाव मिले हैं। हम चाहते तो सीधे विधानसभा में कानून ला सकते थे, लेकिन जनता की राय के आधार पर फैसला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री यादव ने यह बात सोमवार को भोपाल के सतगढ़ी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमिपूजन करने के बाद कही। वर्क-लिव-ग्रो मॉडल पर विकसित होगा इंडस्ट्रियल पार्क सीएम ने कहा- करीब 173 एकड़ में बनने वाला यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क ‘वर्क-लिव-ग्रो’ मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यहां उद्योगों के साथ कर्मचारियों के रहने, कौशल विकास और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे उद्योगों को बेहतर माहौल मिलेगा और निवेश की उम्मीद बढ़ेगी। पार्क में हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग, गारमेंट, टॉयज, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स और नई तकनीक से जुड़े उद्योग स्थापित किए जाएंगे। यह परियोजना भोपाल को औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनाएगी। इससे 15 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 10 हजार लोगों की क्षमता वाला कन्वेंशन सेंटर बनेगा स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क के तहत 25 एकड़ में विश्वस्तरीय कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर भी बनाया जाएगा। इसकी क्षमता 10 हजार से ज्यादा लोगों की होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इनमें से 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतर चुका है। हमारी सरकार विरासत के साथ विकास के लक्ष्य पर भी लगातार काम कर रही है। सीएम बोले- यूका की जगह पर अस्पताल बनाएंगे सीएम यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों की गति बढ़ रही है, इसलिए कांग्रेसियों की छाती पर सांप लोट रहा है। कांग्रेस ने यूनियन कार्बाइड (यूका) के आरोपियों को बचाने का काम किया। उन्हें विमान देकर भगा दिया था। हमने यूका का कचरा हटाया। वहां स्मारक बनाएंगे। अस्पताल भी बनाया जाएगा, जो लोगों को जीवन देने का काम करेगा। संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में क्या कहा गया है? संविधान के अनुच्छेद 44 के भाग- 4 में यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा है। राज्य के नीति-निदेशक तत्व से संबंधित इस अनुच्छेद में कहा गया है कि ‘राज्य, देशभर में नागरिकों के लिए एक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कराने का प्रयास करेगा।’ हमारे संविधान में नीति निदेशक तत्व सरकारों के लिए एक गाइड की तरह है। इनमें वे सिद्धांत या उद्देश्य बताए गए हैं, जिन्हें हासिल करने के लिए सरकारों को काम करना होता है। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… यूसीसी के सपोर्ट में 71% मुस्लिम महिलाएं मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले आम नागरिकों से सुझाव लिए गए हैं। इनमें मुस्लिम पुरुषों में केवल 38% ने यूसीसी का समर्थन किया, जबकि 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 10.5 हजार यानी 71% ने यूसीसी के पक्ष में सुझाव दिया है। पढ़ें पूरी खबर…

बिजली-कनेक्शन के लिए अब नहीं काटने होंगे दफ्तर के चक्कर:जयपुर डिस्कॉम में बिजली सेवाएं हुईं ऑनलाइन, हर स्तर पर तय होगी जिम्मेदारी, जानिए कैसे

जयपुर डिस्कॉम के बिजली उपभोक्ताओं को अब नया कनेक्शन, बिजली लोड बढ़ाने और कनेक्शन डिस्कनेक्ट करने के लिए बिजली दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। डिस्कॉम ने इन सुविधाओं को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया है। इसके तहत अब बिजली का नया कनेक्शन, बिजली लोड बढ़ाने और कनेक्शन डिस्कनेक्ट करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। सभी आवेदन निगम के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे और हर स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। नई व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना, फाइलों में होने वाली देरी खत्म करना और तय समय में सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए आवेदन से लेकर स्वीकृति और कार्य पूरा होने तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से मॉनिटर की जाएगी। आवेदन के बाद ऐसे होगी कार्रवाई ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारी दस्तावेजों की जांच करेंगे। आवश्यकता होने पर मौके का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण में बिजली लाइन, ट्रांसफार्मर की उपलब्ध क्षमता और तकनीकी मानकों की जांच होगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ऑनलाइन स्वीकृति जारी की जाएगी और निर्धारित समय में कार्य पूरा कराया जाएगा। हर अधिकारी की तय होगी जिम्मेदारी SOP में सहायक अभियंता (AEN), कनिष्ठ अभियंता (JEN), कार्यालय स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं। किस अधिकारी को आवेदन जांचना है, किसे निरीक्षण करना है और किसे अंतिम स्वीकृति देनी है, इसकी पूरी कार्यप्रणाली निर्धारित कर दी गई है। इससे किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी होने पर जवाबदेही तय की जा सकेगी। शिकायतों के निस्तारण पर भी जोर नई व्यवस्था में केवल आवेदन प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि शिकायतों के समाधान पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए और सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट किए जाएं। उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा? नई SOP लागू होने से नए कनेक्शन और लोड बढ़ाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी होगी। उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा, आवेदन की स्थिति ऑनलाइन पता चल सकेगी और तय समय में सेवाएं मिलने से अनावश्यक देरी और शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है।

5000 में घर चलाएं या 3000 रुपए किराया दें:तबादले-वेतन कटौती से नाराज सफाई कर्मचारियों ने निकाली रैली, प्रशासन को दिया अल्टीमेटम

अजमेर नगर निगम में कार्यरत स्थाई और अस्थाई सफाई कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन पर उतर चुके हैं। सोमवार को वाल्मीकि समाज संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों सफाई कर्मचारियों ने डाक बंगले से कलेक्ट्रेट तक आक्रोश रैली निकाली। कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए 24 घंटे के भीतर मांगों पर निर्णय लेने का अल्टीमेटम दिया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे शहर की सफाई व्यवस्था ठप कर दी जाएगी। इसके तहत सामूहिक अवकाश, झाड़ू डाउन आंदोलन, अधिकारियों का घेराव और पूर्ण हड़ताल जैसे कदम उठाए जाएंगे। तबादलों और वेतन कटौती पर जताया विरोध संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन सफाई कर्मचारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रहा है। ज्ञापन में मांग की गई कि स्थाई और अस्थाई सफाई कर्मचारियों को 1 जून 2026 से पहले की तरह उनके मूल वार्डों और मुख्य मार्गों पर ही तैनात किया जाए। इसके साथ ही 2 जुलाई 2026 को उपायुक्त द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को तत्काल रद्द करने, अस्थाई कर्मचारियों के पेंडिंग भुगतान की व्यवस्था करने और ठेकेदार द्वारा वेतन से काटे गए दो-दो हजार रुपए वापस दिलाने की मांग भी की गई। कर्मचारियों ने पूर्व में जिलाधीश की मौजूदगी में हुए समझौते का हवाला देते हुए बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था समाप्त कर पहले की तरह उपस्थिति दर्ज करने की मांग रखी। वहीं स्वास्थ्य निरीक्षक, जमादार और सफाई कर्मचारियों के स्थानांतरण से पहले ट्रेड यूनियन को विश्वास में लेने की भी मांग की गई। 5000 में घर चलाएं या ₹3000 किराया दें’ कर्मचारी नेता सन्नी गोयर ने कहा कि नगर निगम प्रशासन लगातार वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारियों पर अत्याचार कर रहा है। कर्मचारियों के कार्यस्थल दूर-दराज के क्षेत्रों में बदल दिए गए हैं, जिससे आने-जाने में ही करीब तीन हजार रुपए खर्च हो जाएंगे।
उन्होंने कहा, “एक कच्चा कर्मचारी पांच हजार रुपए में अपना घर चलाए, बच्चों का पालन-पोषण करे या आने-जाने का किराया दे? प्रशासन कर्मचारियों की समस्याएं सुनने को तैयार नहीं है।” गोयर ने कहा कि प्रशासन को 24 घंटे का समय दिया गया है। यदि समाधान नहीं हुआ तो होटल, अस्पताल सहित पूरे शहर में सफाई कार्य बंद कर दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी। उग्र आंदोलन की चेतावनी संघर्ष समिति के अध्यक्ष मुकेश हेनवाल, उपाध्यक्ष विजय कुमार धंजा, सन्नी गोयर, सुमित गोडाले और महामंत्री संजय सोनवाल सहित अन्य पदाधिकारियों के सिग्नेचर वाले ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि मांगें पूरी नहीं होने पर सफाई कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर पूर्ण हड़ताल करेंगे। इसके अलावा अधिकारियों का घेराव, गेट मीटिंग और झाड़ू डाउन आंदोलन भी किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

कैप्टन के पिता ने बेटे को पीटा,महिला टंकी पर चढ़ी-VIDEO:बोली- शादी में फोटोग्राफी की थी, घर बुलाकर मारपीट कर लेपटॉप-मोबाइल छीना

अलवर शहर में एक महिला पानी की टंकी पर चढ़ गई। महिला का आरोप है कि आर्मी कैप्टन के पिता ने उसके फोटोग्राफर बेटे के साथ मारपीट की। उसे घर पर बुलाकर जबरन मोबाइल और लेपटॉप छीन लिया। अरावली विहार थाने में 2 महीने पहले शिकायत दी थी। इसके बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। तब तंग आकर उसे यह कदम उठाना पड़ा। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि कैप्टन की शादी के लिए फोटोग्राफी के लिए 71 हजार रुपए तय हुए थे, जिसमें से हमने 55 हजार रुपए दे दिए थे। इसके बाद भी फोटोग्राफर ने ज्यादा पैसों की डिमांड की। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने महिला से समझाइश कर 30 मिनट बाद टंकी से नीचे उतारा।
कैप्टन के परिवार पर फोटोग्राफर को बंधक बनाने का आरोप शहर के यशवंत सीनियर सैकंडरी स्कूल में सोमवार सुबह तिजारा फाटक निवासी महिला मिथलेश सुबह करीब 11 बजे पानी की टंकी पर चढ़ गई। काफी समझाइश के बाद उसे नीचे उतारा गया। टंकी से नीचे उतरने के बाद महिला रोती रही। महिला के बेटे दीपक ने बताया कि 30 अप्रैल को आर्मी कैप्टन की शादी में केवल अलवर के कार्यक्रम के लिए फोटोग्राफी की बुकिंग तय हुई थी, जिसे मैंने पूरा कर दिया। आखिरी वक्त में उन्होंने गुरुग्राम चलने का दबाव बनाया। “शादी के बाद डाटा देने के लिए उन्होंने मुझे घर बुलाया। वहां कैप्टन के पिता ने मुझे धमकाया कि ‘CO से फोन करवाकर थाने में इलाज करवा दूंगा’।” उन्होंने मेरा आईफोन, लेपटॉप और डाटा पेन ड्राइव छीन लिया। इसके बदले में मुझसे 2 लाख रुपए का चेक मांगा गया। जब मैंने मना किया तो मारपीट कर खाली कागज पर जबरन लिखवा लिया कि ‘’मैं अपनी मर्जी से सामान छोड़ कर जा रहा हूं।” पीड़ित महिला का आरोप है कि अरावली विहार थाने में रिपोर्ट देने के बावजूद पुलिस ने मदद करने के बजाय उन्हें फटकार कर भगा दिया। डेढ़-दो महीने तक कोई सुनवाई नहीं होने पर मजबूरी में मां को टंकी पर चढ़ना पड़ा। कैप्टन की मां बोली- 71 हजार तय थे, 55 हजार दे चुके दूसरी पक्ष की महिला प्रेमवती (कैप्टन की मां) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए फोटोग्राफर पर ही धोखा देने का आरोप लगाया है। महिला ने कहा कि “मेरा बेटा कैप्टन है और बहू लेफ्टिनेंट। फोटोग्राफी के लिए 71 हजार रुपए तय हुए थे, जिसमें से हमने 55 हजार रुपए (40 हजार लग्न पर, 11 हजार एडवांस और बाकी बारात के दिन) दे दिए थे। इसके बावजूद बारात जब बड़ौदामेव पहुंची, तो उसने और पैसों की मांग की। फिर फोन बंद कर दिया। इस कारण गुरुग्राम में ऐन वक्त पर दूसरा फोटोग्राफर एडवांस देकर बुलाना पड़ा, जिससे हमारा नुकसान हुआ। प्रेमवती का दावा है कि दीपक का सामान उनके पास सुरक्षित है। तीनों मां-बेटे खुद हिसाब करने आए थे और दीपक ने खुद लिखकर दिया था कि वह ‘डेढ़ लाख रुपए देकर अपना सामान ले जाएगा।’ ऐसा लिखते हुए उनका वीडियो भी बनाया गया है।

पहाड़ी पर ड्रोन से 7 हजार सीड बॉल डाले:पहले सीड बॉल किए तैयार फिर 20 हेक्टेयर में की सीडिंग; अब सितंबर में होगा सर्वे

चित्तौड़गढ़ जिले की बस्सी सेंचुरी में जंगल बढ़ाने के लिए वन विभाग ने इस बार नई तकनीक अपनाई है। सेंचुरी के बिछोर नाका क्षेत्र की दुर्गम पहाड़ी पर ड्रोन के जरिए करीब 7 हजार सीड बॉल, 20 से 25 किलो स्थानीय पौधों के बीज और 30 से 35 किलो घास के बीज डाले गए हैं। यह काम डीएफओ राहुल झाझरिया के निर्देशन में किया गया। वन विभाग अब सितंबर और फरवरी 2027 में सर्वे कर इस प्रयोग के नतीजों का आकलन करेगा। 20 हेक्टेयर क्षेत्र चुना, जहां पेड़ों की संख्या सबसे कम थी वन विभाग ने इस अभियान के लिए बस्सी सेंचुरी के बिछोर नाका का करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र चुना। इस हिस्से में पेड़ों की संख्या काफी कम है और प्राकृतिक हरियाली भी कमजोर हो चुकी है। विभाग का मानना है कि बारिश के साथ बीज अंकुरित होने पर आने वाले समय में यहां हरियाली बढ़ सकती है। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 7 हजार सीड बॉल तैयार किए गए। इनके अलावा 20 से 25 किलो स्थानीय पौधों के बीज और 30 से 35 किलो घास के बीज भी ड्रोन के जरिए पूरे इलाके में फैलाए गए। बीजों का चयन स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया, ताकि अंकुरित होने के बाद पौधे आसानी से बढ़ सकें और जंगल का प्राकृतिक स्वरूप विकसित हो सके। पहले सीड बॉल तैयार किए, फिर ड्रोन से सीडिंग बस्सी के एसीएफ यशवंत कंवर ने बताया कि इस अभियान की तैयारी कई दिन पहले शुरू कर दी गई थी। सबसे पहले मिट्टी और सूखी घास की मदद से सीड बॉल तैयार किए गए। हर सीड बॉल के बीच में जगह छोड़ी गई, जिसमें बाद में बीज डाले गए। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले खैर, बेर और क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली दूसरी स्थानीय प्रजातियों के बीज सीड बॉल में भरकर उन्हें दोबारा मिट्टी से बंद किया गया। कुल मिलाकर करीब 7 हजार सीड बॉल तैयार किए गए। इसके बाद 27 और 28 जून को ड्रोन की मदद से इन्हें पहाड़ियों पर गिराया गया। एक बार में ड्रोन करीब 15 से 20 किलो वजन लेकर उड़ान भरता था और पूरे इलाके में अलग-अलग स्थानों पर बीज फैलाता गया। सीड बॉल के साथ बिना बॉल वाले सामान्य बीज और घास के बीज भी डाले गए, ताकि अलग-अलग स्तर पर हरियाली विकसित हो सके। तीन स्तर पर हरियाली बढ़ाने की योजना एसीएफ यशवंत कंवर ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल बड़े पेड़ उगाना नहीं है। योजना के तहत ऊंचे पेड़ों के साथ झाड़ियां और जमीन पर घास भी विकसित करने की कोशिश की जा रही है। इससे जंगल की प्राकृतिक संरचना मजबूत होगी, जमीन को सुरक्षा मिलेगी और वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। 60 से 70 डिग्री ढलान वाली पहाड़ी पर पहुंचना था चुनौती जिस पहाड़ी पर यह काम किया गया, वहां 60 से 70 डिग्री तक ढलान है। आम लोगों का वहां पहुंचना लगभग संभव नहीं है। वन विभाग की टीम भी ट्रैक करके बड़ी मुश्किल से वहां पहुंची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। रास्ता नहीं होने के कारण टीम को खुद रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ना पड़ा। निरीक्षण के बाद तय किया गया कि इस इलाके में ड्रोन के जरिए बीज डालना सबसे बेहतर विकल्प रहेगा। पहले ड्रोन से सर्वे, अब सितंबर और फरवरी 2027 में होगी जांच वन विभाग ने इस अभियान से पहले 27 जून को ड्रोन से पूरे क्षेत्र की फोटोग्राफी कराई, ताकि इलाके में पहले से मौजूद हरियाली और पेड़ों की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। इसके अगले दिन पूरे क्षेत्र में ड्रोन से सीड बॉल और अन्य बीजों की सीडिंग की गई। अब सितंबर में पहली बार इस इलाके का सर्वे किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि कितने बीज अंकुरित हुए और कितना असर दिखाई दिया। इसके बाद फरवरी 2027 में दोबारा निरीक्षण होगा। दोनों चरणों के परिणामों की तुलना कर यह तय किया जाएगा कि ड्रोन से सीड बॉल डालने का यह प्रयोग कितना सफल रहा। फिलहाल वन विभाग इसे जंगल बढ़ाने की नई पहल के रूप में देख रहा है। अगर रिजल्ट अच्छे रहे तो भविष्य में बस्सी सेंचुरी के दूसरे दुर्गम इलाकों और अन्य वन क्षेत्रों में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

चौक में सो रहे बुजुर्ग दंपती से मारपीट, गहने छीने:बेटे के कमरे की बाहर से कुंडी लगाई; गले में पहली ज्वेलरी तोड़कर भागे

भीलवाड़ा के दाता कला गांव में बीती रात तीन बदमाशों ने लूट की नीयत से एक घर में घुसकर चौक में सो रहे वृद्ध दंपती पर हमला कर दिया। बदमाश महिला के गले में पहनी रामनामी लूटकर फरार हो गए। विरोध करने पर बदमाशों ने लट्ठ व अन्य हथियारों से हमला कर वृद्ध को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के दौरान बदमाशों ने कमरे में सो रहे बेटे के कमरे की बाहर से कुंडी भी बंद कर दी, जिससे वह बाहर निकलकर माता-पिता का बचा नहीं सके। बुजुर्ग दंपति से की मारपीट मामला मांडल थाना क्षेत्र का है,यहां दाता कला निवासी बालूलाल जाट (65) अपनी पत्नी रामू देवी (60) के साथ घर के चौक में सो रहे थे। देर रात तीन अज्ञात बदमाश घर में घुसे और रामू देवी के गले में पहनी रामनामी लूटकर भागने लगे। इसी दौरान बालूलाल की नींद खुल गई। उन्होंने शोर मचाया तो बदमाशों ने लट्ठ व अन्य हथियारों से उन पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने आई रामू देवी के साथ भी मारपीट की गई। बेटे के कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी घटना के दौरान कमरे में सो रहे पुत्र ओमप्रकाश के कमरे की बदमाशों ने बाहर से कुंडी बंद कर दी, जिससे वह बाहर नहीं निकल सका और माता-पिता को बचाने में असमर्थ रहा। शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग जागने लगे तो तीनों बदमाश रामनामी लेकर मौके से फरार हो गए। जांच में जुटी पुलिस पीड़ित परिवार की ओर से मांडल थाने में दी गई लिखित रिपोर्ट में तीन अज्ञात बदमाशों के खिलाफ घर में घुसकर लूट और मारपीट का मामला दर्ज कराया गया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा आसपास के लोगों से पूछताछ कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। घायल दंपत्ति का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। इनपुट क्रेडिट: जितेंद्र सिंह गौड़, मांडल

सरकारी हॉस्पिटल में पंखा और प्लास्टर गिरा,डॉक्टर का सिर फटा:महिला मरीज पर भी मलबा गिरा, पीएमओ बोलीं- बजट होने के बावजूद विभाग ने मरम्मत नहीं करवाई

अलवर के सेटेलाइट हॉस्पिटल में सोमवार सुबह छत का प्लास्टर और पंखा डॉक्टर और महिला मरीज पर गिर गया। इससे डॉक्टर का सिर फट गया। वहीं, महिला को भी गंभीर चोट लगी। घटना हॉस्पिटल के ओपीडी रूम नंबर-7 की है। जहां सीनियर डॉक्टर सीताराम अग्रवाल मरीजों को देख रहे थे। घायल सीनियर डॉक्टर सीताराम अग्रवाल ने बताया- सुबह करीब साढ़े 10 बजे एक महिला मरीज की जांच कर रहा था। इसी दौरान अचानक छत से मोटा प्लास्टर और पंखा गिर गया। हादसे के बाद मैं और मरीज बड़ी मुश्किल से बाहर निकल पाए। मेरा सिर फट गया, जिसके कारण कई टांके लगाने पड़े। घटना की तस्वीरें… महिला की नाक पर तीन टांके आए पीएमओ डॉ. प्रमीला मीणा ने बताया- हादसे के समय टीना (25) नाम की महिला थायरॉयड की जांच कराने आई थी। टीना मूल रूप से लक्ष्मणगढ़ की रहने वाली है। अभी कालाकुआं क्षेत्र में रहती है। उसकी नाक पर गंभीर चोट आई है, तीन टांके लगे हैं। इसके अलावा उसके दाहिने हाथ और पैर में भी गंभीर चोट आई है। प्राथमिक इलाज के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। डॉक्टर सीताराम अग्रवाल का इलाज अस्पताल में ही जारी है। डॉ. प्रमीला मीणा ने बताया- अस्पताल भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पिछले करीब 10 महीनों से सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। करीब चार महीने पहले मरम्मत कार्य के लिए लगभग 15.5 लाख रुपए भी स्वीकृत कराकर विभाग को भेज दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई। हादसा टाला जा सकता था उन्होंने कहा- समय रहते मरम्मत होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। हादसे के बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मौके पर पहुंचकर भवन का निरीक्षण कर रहे हैं।

9 राज्यों में 42 हजार बुजुर्गों का नेटवर्क:एक-दूसरे की मदद कर 70% बुजुर्ग आत्मनिर्भर हुए; सुनामी के बाद तमिलनाडु से शुरू हुए सेल्फ-हेल्प ग्रुप

बिहार के सुपौल जिले के 75 वर्षीय मोहन मंडल गांव में बुजुर्गों के एक समूह का हिस्सा हैं। इसमें हमउम्र साथी एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं और सरकारी योजनाओं से जुड़ने में मदद करते हैं। मोहन को भी एक साथी ने इलाज के लिए ‘वय वंदना कार्ड’ बनाने के लिए प्रेरित किया। उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह कार्ड कभी उनकी जिंदगी बचाएगा। कुछ दिन बाद ही मोहन मंडल को ब्रेन स्ट्रोक आया। इलाज का खर्च लाखों रुपए था। ऐसे समय में गांव के ग्रुप ने परिवार को योजना में सूचीबद्ध अस्पताल तक पहुंचाया। वहां उनका ऑपरेशन हुआ। तीन लाख रुपए खर्च हुए। आज मोहन स्वस्थ हैं। अब दूसरे बुजुर्गों को भी जरूरत के खर्चों के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित करते हैं। यूएन पॉपुलेशन अवॉर्ड से सम्मानित हेल्पएज इंडिया ने सुनामी के बाद इस तरह के समूहों की नींव रखी थी। आज मोहन जैसे करीब 42 हजार बुजुर्ग देशभर के 9 राज्यों में फैले ऐसे 3 हजार ग्रुप्स से जुड़े हुए हैं। समूह के हर बुजुर्ग के पास 1.19 लाख रुपए हो गए हैं सुपौल में बुजुर्ग हर महीने 50-50 रु. जमा करते हैं। 15 साल में समूह अपने सदस्यों में 2.33 करोड़ रु. का लोन दे चुका है। इससे 13 लाख रु. की आय हुई। अब ग्रुप के प्रत्येक सदस्य की हिस्सेदारी 1.19 लाख रु. है। लोग उन्हें लखपति बुजुर्ग कहते हैं। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी एल्डर सेल्फ हेल्प ग्रुप मॉडल अपनाने का फैसला किया है। इसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में शामिल किया है। एक-दूसरे की मदद के मंच के तौर पर शुरू हुआ था ग्रुप साल 2004 में आई सुनामी से प्रभावित बुजुर्गों के लिए 2005 में चेन्नई में पहला एल्डर सेल्फ हेल्प ग्रुप बना। इसके बाद देशभर में शुरू किया गया। एक ग्रुप में 55 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के 10-20 बुजुर्ग होते हैं। संस्था गांवों में जाकर ऐसे लोगों की पहचान करती है, जो आर्थिक, सामाजिक या स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे होते हैं। सदस्य नियमित बैठक करते हैं। बचत करते हैं। एक-दूसरे को ऋण देते हैं और स्थानीय समस्याओं पर मिलकर काम करते हैं। इन ग्रुप्स के 70% बुजुर्ग पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गए हैं। (जैसा दैनिक भास्कर के राजेश को बताया)