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निगम उपायुक्त ने एलीवेटेड रोड के पेचवर्क का निरीक्षण किया:सोनी बोले- गुणवत्ता से समझौता नहीं, उदियापोल से शुरू मरम्मत कार्य अब पूरे शहर में होगा

उदयपुर में एलीवेटेड रोड पर चल रहे पेचवर्क का नगर निगम के उपायुक्त डॉ. नरेश सोनी औचक निरीक्षण किया। अधीक्षण अभियंता मनीष अरोड़ा के साथ शुक्रवार को निरीक्षण के दौरान सोनी ने सड़क मरम्मत की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री, सड़क की लेवलिंग और काम की प्रगति देखी। मौके पर अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को तय मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण काम करने के निर्देश दिए। साथ ही समय पर काम पूरा करने और यातायात प्रभावित नहीं होने के भी निर्देश दिए। उपायुक्त डॉ. नरेश सोनी ने कहा- सड़क मरम्मत में किसी भी तरह की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। पेचवर्क पूरी तकनीकी गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि बारिश के दौरान सड़कें सुरक्षित रहें और लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। कलेक्टर ने किया था 8 जुलाई को दौरा डॉ. नरेश सोनी ने अधिकारियों से कहा- काम तय समय सीमा में पूरा किया जाए। मरम्मत के दौरान यातायात व्यवस्था भी सुचारू रखी जाए, जिससे लोगों को आने-जाने में दिक्कत नहीं हो। इससे पहले 8 जुलाई को जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने भी एलीवेटेड रोड क्षेत्र का निरीक्षण कर सड़क मरम्मत का काम जल्द और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद निगम ने यहां पेचवर्क शुरू कराया था। उपायुक्त ने बताया- सड़क मरम्मत की शुरुआत उदियापोल क्षेत्र से की गई। फिलहाल एलीवेटेड रोड के आसपास के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर तेजी से पेचवर्क किया जा रहा है। बारिश के मौसम में सड़कें सही रखें डॉ. नरेश सोनी ने कहा- यह काम पूरा होने के बाद शहर के अन्य प्रमुख मार्गों और अलग-अलग क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से पेचवर्क कराया जाएगा। इससे बारिश के मौसम में सड़कें सुरक्षित रहेंगी और लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी। उपायुक्त ने अधिकारियों को सभी कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही हर स्तर पर नियमित निरीक्षण कर काम की निगरानी करने को कहा। निरीक्षण के दौरान अधिशाषी अभियंता अखिल गोयल, सहायक अभियंता सुनील प्रजापत सहित नगर निगम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रतापगढ़ में ड्रग तस्कर पर बड़ी कार्रवाई:1.04 करोड़ रुपए की संपत्ति फ्रीज, 492 किलो से ज्यादा डोडाचूरा बरामद किया था

प्रतापगढ़ पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करों के आर्थिक नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है। ऑपरेशन ‘त्रिनेत्र’ के तहत एक ड्रग तस्कर घनश्याम कलाल की 1 करोड़ 4 लाख रुपए की चल और अचल संपत्तियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ(1) के तहत फ्रीज कर दिया गया है। मामला 22 दिसंबर 2023 का है। पुलिस को गांव संचई में एक पलटी हुई कार की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची टीम ने कार से 492.850 किलोग्राम डोडा चूरा बरामद किया था। इस संबंध में थाना प्रतापगढ़ में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी 8 साल की सजा काट रहा था जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में घनश्याम कलाल निवासी रिछा की संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद उसे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया। घनश्याम कलाल पहले से ही थाना धमोतर में एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषसिद्ध होकर 8 वर्ष के कारावास और एक लाख रुपए के अर्थदंड की सजा काट रहा है। संपत्ति को किया फ्रीज वित्तीय जांच में यह सामने आया कि अभियुक्त ने मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन से ग्राम रिछा में अपनी पत्नी मैनाबाई चौधरी के नाम पर करीब 60 लाख रुपए का आलीशान मकान, ग्राम पड़ुनी में अपने नाम पर 40 लाख रुपए का फार्म हाउस और लगभग 4 लाख रुपए की मारुति सुजुकी ऑल्टो कार खरीदी थी। पुलिस ने इन सभी संपत्तियों को अवैध आय से अर्जित मानते हुए फ्रीज करने की कार्रवाई की है।

कोटपूतली में UCC पर जनसुनवाई:आमजन से मांगे सुझाव, ऑनलाइन 400 शब्द में दे सकेंगे

कोटपूतली में राजस्थान समान नागरिक संहिता-2026 पर संभाग स्तरीय और जिला स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। विधेयक प्रारूप समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने इसकी अध्यक्षता की। जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता की मौजूदगी में जनप्रतिनिधियों, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, विधिवेत्ताओं, सामाजिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और आमजन ने VC के माध्यम से अपने सुझाव दिए। सभी लोगों से सुझाव मांगे समिति अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि राजस्थान सरकार समान नागरिक संहिता के संबंध में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है। इसी उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और आमजन से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। सिंह ने यह भी बताया कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी सुझावों और विचारों का गहन विश्लेषण किया जाएगा। इन्हीं सुझावों के आधार पर समान नागरिक संहिता विधेयक का प्रारूप तैयार किया जाएगा। गंभीरता से किया जाएगा विचार उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति समर्थन, संशोधन और असहमति सहित सभी प्रकार के सुझावों का स्वागत करती है और उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे यूसीसी पर अपने सुझाव दें, ताकि राज्य में एक मजबूत, न्यायसंगत और व्यावहारिक समान नागरिक संहिता कानून बनाया जा सके। समिति सदस्यों ने बताया कि विधेयक के प्रारूप को समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए आमजन जनसुनवाई के अतिरिक्त वेबसाइट https://ucc.rajasthan.gov.in के माध्यम से भी अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। राजस्थान के सभी जनआधार कार्ड धारकों को इस संबंध में एसएमएस भी भेजे गए हैं। 400 शब्दों तक दे सकेंगे सुझाव वेबसाइट पर सुझाव देने के लिए मोबाइल नंबर या जनआधार नंबर दर्ज करना होगा, जिसके बाद पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। ओटीपी डालने के बाद व्यक्तिगत या संस्थागत विकल्प चुनना होगा। इसके पश्चात एक फॉर्म खुलेगा, जिसमें दिए गए प्रश्नों के लिए ‘हां’ या ‘नहीं’ का विकल्प चुना जा सकता है। नागरिक 400 शब्दों तक के सुझाव भी दे सकते हैं और सुझाव या ज्ञापन की पीडीएफ प्रति भी संलग्न की जा सकती है।

फलोदी में खाद्य सुरक्षा विभाग ने 6450 बोतलें सीज की:एनर्जी ड्रिंक की भ्रामक लेबलिंग की, जांच के लिए सैंपल जोधपुर भेजे

फलोदी में खाद्य सुरक्षा विभाग ने न्यू स्टिंग एनर्जी की 6450 बोतलें सीज की हैं। इन बोतलों पर ‘एनर्जी’ शब्द का भ्रामक लेबलिंग किया गया था। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश भर में चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। 6450 बोतलें सीज मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप सिंह राठौड़ ने बताया- खाद्य सुरक्षा अधिकारी निर्मल कुमार महर्षि ने फलोदी स्थित एक बेवरेजेज गोदाम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें कैफिनेटेड बेवरेज न्यू स्टिंग एनर्जी की 6450 बोतलें मिलीं, जिन पर भ्रामक रूप से ‘एनर्जी’ लिखा हुआ था। इन बोतलों को सीज कर उनके नमूने लिए गए। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, कैफीनेटेड बेवरेजेस पर ‘स्टीमूलेट्स माइंड’, ‘एनरर्जाइज बॉडीज’, ‘एनर्जी ड्रिंक’ या ‘स्पोर्ट्स ड्रिंक’ जैसे शब्दों का उल्लेख करना भ्रामक प्रचार की श्रेणी में आता है। जांच के लिए जोधपुर भेजा गया एफएसएसएआई ने इस संबंध में कई नामी बेवरेज ब्रांडों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह भी बताया गया है कि अधिक कैफीन वाली ये एनर्जी ड्रिंक गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के लिए हानिकारक हो सकती हैं। सीज की गई बोतलों से लिए गए नमूनों को जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला जोधपुर भेजा गया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जयपुर पहुंचे दिग्गज अभिनेता कुमुद मिश्रा, कैमरे से बनाई दूरी:12 जुलाई को नाटक 'पुराने चावल' की देंगे प्रस्तुति; शुभ्रज्योति बराट भी करेंगे अभिनय

बॉलीवुड और रंगमंच के अभिनेता कुमुद मिश्रा शुक्रवार को जयपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर उजागर ड्रामैटिक एसोसिएशन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर डिजाइनर्स (IIID) जयपुर चैप्टर के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कुमुद मिश्रा ने कैमरे से दूरी बनाए रखी और वीडियो बनाने से मना करते रहे। कुमुद मिश्रा 12 जुलाई को बिड़ला ऑडिटोरियम में देश के चर्चित हिंदी नाटकों में शामिल ‘पुराने चावल’ के मंचन में मुख्य भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर अभिनेता शुभ्रज्योति बराट भी उनके साथ मंच साझा करेंगे। नाटक के मंचन के बाद ‘डिजाइन, स्टोरी, स्पेस और परफॉर्मेंस’ विषय पर विशेष पैनल डिस्कशन भी आयोजित किया जाएगा। ‘पुराने चावल’ प्रसिद्ध अभिनेता-निर्देशक सुमीत व्यास की ओर से निर्देशित चर्चित हिंदी नाटक है। जो विश्वप्रसिद्ध नाटककार नील साइमन के क्लासिक नाटक ‘द सनशाइन बॉयज’ से प्रेरित है। नाटक में यह दिखेगी कहानी यह नाटक दो ऐसे पुराने दोस्तों और हास्य कलाकारों की कहानी है, जिन्होंने करीब 42 साल तक साथ काम किया। आपसी मतभेदों के चलते अलग हो गए। सालों बाद जब उन्हें फिर से एक साथ मंच पर आने का अवसर मिलता है तो उनके रिश्तों की खटास, पुरानी यादें, अहंकार, दोस्ती और भावनात्मक संघर्ष दर्शकों के सामने हास्य और संवेदनशीलता के साथ उभरकर आते हैं। यही वजह है कि यह नाटक केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दोस्ती, रिश्तों और जीवन के बदलते रंगों पर भी गहरा संदेश देता है। यह नाटक मुंबई की प्रतिष्ठित थिएटर संस्था डी फॉर ड्रामा द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे पहले भी इसका जयपुर में सफल मंचन हो चुका है और रंगमंच प्रेमियों ने इसे भरपूर सराहना दी थी। अभिनय के धुरंधर हैं कुमुद मिश्रा नाटक में मुख्य भूमिका निभा रहे कुमुद मिश्रा भारतीय रंगमंच और बॉलीवुड के सबसे सशक्त अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अभिनय करियर की शुरुआत थिएटर से की और वर्षों तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) और देश के विभिन्न रंगमंच समूहों के साथ काम किया। उनकी अभिनय शैली की सबसे बड़ी विशेषता पात्रों को सहज और वास्तविक रूप में प्रस्तुत करना है। कुमुद मिश्रा ने रॉकस्टार, रांझणा, सुल्तान, एम.एस. धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी, ऐरलिफ्ट, मुल्क, आर्टिकल 15, थप्पड़, राम सिंह चार्ली, टाइगर जिंदा है, जॉली एलएलबी 2, भूल भुलैया 2, मिशन मजनू, मिशन रानीगंज जैसी अनेक चर्चित फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी वे आर्या, डॉ. अरोड़ा, आईसी 814: द कंधार हाइजैक जैसी चर्चित वेब सीरीज में अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं। थिएटर में नियमित रूप से वे सक्रिय रहते हैं। शुभ्रज्योति बराट भी रंगमंच का बड़ा नाम नाटक के दूसरे प्रमुख कलाकार शुभ्रज्योति बराट भी भारतीय थिएटर और फिल्मों का जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने लंबे समय तक रंगमंच पर काम करने के बाद फिल्मों और वेब सीरीज में अलग पहचान बनाई। वे अपने प्रभावशाली संवाद, सहज अभिनय और मंच पर मजबूत उपस्थिति के लिए जाने जाते हैं। हिंदी फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ-साथ थिएटर में उनका योगदान लगातार सराहा जाता रहा है। ‘पुराने चावल’ में उनका अभिनय नाटक की भावनात्मक और हास्यपूर्ण प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।

DLC दरों में 40% वृद्धि प्रस्ताव का क्रेडाई-राजस्थान का विरोध:कहा- बिना सर्वे, जनप्रतिनिधियों से राय लिए बढ़ोतरी करना अनुचित

राजस्थान सरकार द्वारा प्रचलित डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरों में 40 प्रतिशत तक वृद्धि करने की प्रस्तावित योजना का क्रेडाई राजस्थान ने विरोध किया। संगठन ने कहा- यदि बिना विस्तृत सर्वे और वास्तविक बाजार दरों के आकलन के डीएलसी दरों में एक साथ इतनी वृद्धि की जाती है तो इसका सीधा असर आमजन, रियल एस्टेट उद्योग, निवेश और राज्य सरकार के राजस्व पर पड़ेगा। क्रेडाई राजस्थान के चेयरमैन अनुराग शर्मा ने कहा- समाचार पत्रों से जानकारी मिली कि राज्य सरकार डीएलसी दरों में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही है। जबकि सामान्यतः डीएलसी दरों का निर्धारण जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा संबंधित क्षेत्रों की वास्तविक बाजार कीमतों का अध्ययन कर किया जाता है। इस बार बिना गुण-दोषों का परीक्षण किए सभी आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी की संपत्तियों की डीएलसी दरों में वृद्धि का प्रस्ताव असंगत और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। 2024 से लगातार बढ़ रही डीएलसी दरें अनुराग शर्मा ने बताया- राज्य सरकार ने वर्ष 2024 के बजट में डीएलसी दरों में 10 प्रतिशत वृद्धि लागू की थी, जो 1 अप्रैल 2024 से प्रभावी हुई। इसके बाद 10 अक्टूबर 2025 को सड़क की चौड़ाई के आधार पर डीएलसी दरों में 10, 15 और 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि की गई। वहीं निर्माण दरों में भी 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा चुकी है। इससे स्टांप ड्यूटी का भार पहले ही काफी बढ़ चुका है। संगठन ने कहा- लगातार बढ़ती डीएलसी दरों का असर केवल रियल एस्टेट कारोबार पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। ‘रियल एस्टेट उद्योग पर आएगी मंदी’ चेयरमैन अनुराग शर्मा ने कहा- वर्तमान में वैश्विक परिस्थितियों और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण निर्माण लागत पहले से ही बढ़ी हुई है। ऐसे समय यदि बिना ठोस विश्लेषण के डीएलसी दरों में भारी वृद्धि की जाती है तो रियल एस्टेट उद्योग गंभीर मंदी का शिकार हो सकता है। उन्होंने कहा- कृषि के बाद रियल एस्टेट सबसे बड़ा रोजगार देने वाला उद्योग है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 381 से अधिक छोटे-बड़े उद्योग जुड़े हुए हैं। उद्योग प्रभावित होने से रोजगार के अवसर घटेंगे और राज्य सरकार के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 15 हजार करोड़ के राजस्व लक्ष्य पर भी असर की आशंका अनुराग शर्मा ने बताया- वर्ष 2024-25 में राजस्थान सरकार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन से 10,542 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है। उनका कहना है कि यदि डीएलसी दरें अव्यावहारिक रूप से बढ़ाई गईं तो संपत्ति खरीद-बिक्री प्रभावित होगी और सरकार के लिए यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। शहरी सेवा शिविरों में पट्टे लेना भी होगा महंगा क्रेडाई ने कहा- राज्य सरकार आमजन को राहत देने के उद्देश्य से शहरी सेवा शिविर चला रही है, लेकिन यदि डीएलसी दरें बढ़ती हैं तो इन शिविरों के माध्यम से मिलने वाले पट्टों पर भी अधिक शुल्क देना पड़ेगा। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। ‘डीएलसी बढ़ने से आमजन पर बढ़ेगा करों का भार’ क्रेडाई राजस्थान के अध्यक्ष रविंद्र प्रताप सिंह ने कहा- डीएलसी दरें अधिकांश करों और शुल्कों का आधार होती हैं। ऐसे में इनके बढ़ने से आमजन को विभिन्न विभागों में अधिक कर और शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि अन्य विकसित राज्यों की तर्ज पर कर व्यवस्था को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए। ‘जनप्रतिनिधियों की राय के बिना नहीं हो निर्णय’ महासचिव आशीष अग्रवाल ने कहा- पूर्व में डीएलसी दरों में संशोधन से पहले क्रेडाई और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाते थे, जिससे दरें व्यावहारिक रहती थीं। इस बार बिना व्यापक परामर्श के वृद्धि का प्रस्ताव स्थापित परंपराओं के विपरीत है। ‘राइजिंग राजस्थान’ और बढ़ती लागत में विरोधाभास कार्यकारी अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा- एक ओर राज्य सरकार ‘राइजिंग राजस्थान’ अभियान के जरिए निवेश आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी ओर डीएलसी दरें बढ़ाकर परियोजनाओं की लागत बढ़ाई जा रही है। इससे नए निवेश और रियल एस्टेट परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। रजिस्ट्रेशन शुल्क में संशोधन की मांग वाइस चेयरमैन राजेंद्र सिंह पचार ने कहा- राजस्थान में पहले से ही स्टांप ड्यूटी अधिक है। इसके अलावा संपत्ति मूल्य का 1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता है, जिसकी पहले अधिकतम सीमा दो लाख रुपए थी, लेकिन अब यह सीमा समाप्त हो चुकी है। उनका कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में यह व्यवस्था अधिक महंगी है और इसे जनहित में संशोधित किया जाना चाहिए। इसका असर सरकार पर भी पड़ेगा, जहां सरकार का एक विभाग राजस्व करोड़ों में अर्जित करेगा। वहीं सरकार को जब नेशनल हाईवे या अन्य प्रोजक्ट के लिए जमीन लेनी होगी तो महंगी जमीन खरीदनी पड़ेगी। आयकर का भी बढ़ सकता अतिरिक्त बोझ क्रेडाई राजस्थान के प्रवक्ता मदन यादव ने कहा- डीएलसी दरों में वृद्धि होने से संपत्ति खरीदने वाले लोगों को अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी के साथ-साथ कई मामलों में आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है। सरकार से विस्तृत सर्वे कराने की मांग क्रेडाई राजस्थान के कोषाध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल ने राज्य सरकार से मांग की कि डीएलसी दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि से पहले सभी क्षेत्रों का वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर विस्तृत सर्वे कराया जाए। जनप्रतिनिधियों और संबंधित हितधारकों से सुझाव लेने के बाद ही नई डीएलसी दरें लागू की जाएं।

म्यांमार के 3-रोहिंग्या आरोपियों को हाईकोर्ट से झटका,जमानत याचिका खारिज:पहचान छिपाकर भारत में रह रहे थे; बांग्लादेश से 30 लड़कियों को लाकर अलग-अलग राज्यों में बेचा

राजस्थान हाईकोर्ट ने म्यांमार के रहने वाले 3 रोहिंग्या आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने मोहम्मद उस्मान, शफी आलम उर्फ शोफी आलम और रबी उल इस्लाम की जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया। तीनों आरोपियों पर आरोप है कि वे पिछले कई सालों से भारत में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे। इस दौरान वे कई बार अवैध तरीके से बांग्लादेश भी गए। साल 2023 में अपनी गिरफ्तारी से पहले ये आरोपी बांग्लादेश से 30 लड़कियों को अवैध रूप से भारत लेकर आए थे। इन्होंने इन लड़कियों को हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, असम और राजस्थान में लाकर बेच दिया। देशभर में इन आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के कई मामले दर्ज हैं। NIA ने खुफिया इनपुट के आधार पर इन्हें राजस्थान और हरियाणा से गिरफ्तार किया था। साल 2024 में जयपुर की एनआईए की विशेष अदालत से जमानत खारिज होने के बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। रोहिंग्या लड़कियों को भारतीय समाज में बसाने की थी साजिश NIA की ओर से पैरवी करते हुए वकील स्नेहदीप ख्यालिया ने कोर्ट को बताया कि ये तीनों आरोपी साल 2011-12 में सीमा पार करके बांग्लादेश के रास्ते भारत आए थे। इनमें से मोहम्मद उस्मान जम्मू-कश्मीर में, शफी आलम तेलंगाना में और रबी उल इस्लाम नूंह (हरियाणा) में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे। तीनों ने भारत में फर्जी दस्तावेजों के जरिए आधार कार्ड बनवाए, मोबाइल सिम लीं और बैंक खाते भी खुलवा लिए थे। इनकी साजिश रोहिंग्या लड़कियों को भारतीय समाज में स्थापित (बसाने) करने की थी, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जा सके। इसी साजिश के तहत इन्होंने कई लड़कियों को भारत लाकर अलग-अलग शहरों में उनकी शादियां भी करवाईं। गवाहों और पीड़ितों के बयान होना अभी बाकी वकील स्नेहदीप ख्यालिया ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि यदि आरोपियों को जमानत मिलती है, तो उनके देश छोड़कर भागने का पूरा खतरा रहेगा। इस मामले में अभी कई महत्वपूर्ण गवाहों, पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज होना बाकी हैं। ऐसे में आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, आरोपियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि इस मामले में तीनों को झूठा फंसाया गया है। केस में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और आरोपी पिछले 2 साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं। चूंकि ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाए। दोनों पक्षों की गंभीर बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

कांग्रेस ने यूसीसी जनसुनवाई का बहिष्कार किया:मसौदा सार्वजनिक करने की मांग की, पारदर्शी शासन व्यवस्था के विपरीत बताया

खैरथल-तिजारा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बलराम यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनसुनवाई का बहिष्कार करते हुए कहा कि बिना कानून का मसौदा सार्वजनिक किए किसी भी प्रकार की जनसुनवाई आयोजित करना लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शी शासन व्यवस्था के विपरीत है। जनसुनवाई केवल औपचारिकता-बलराम यादव बलराम यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अभी तक यूसीसी का कोई आधिकारिक प्रारूप जनता के सामने प्रस्तुत नहीं किया है। न तो कानून के प्रस्तावित प्रावधान सार्वजनिक किए गए हैं और न ही किसी पोर्टल अथवा अन्य माध्यम से नागरिकों को उनका अध्ययन कर सुझाव देने का अवसर दिया गया है। ऐसी स्थिति में जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, क्योंकि जब लोगों को यह जानकारी ही नहीं होगी कि प्रस्तावित कानून में क्या प्रावधान हैं, तो वे सार्थक सुझाव या आपत्तियां कैसे प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण कानून पर जनसुझाव लेने से पहले उसका मसौदा सार्वजनिक करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। इससे समाज के सभी वर्गों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलता है तथा कानून निर्माण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जनभागीदारी पर आधारित बनती है। वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने का तरीका बताया बलराम यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता का ध्यान प्रदेश की वास्तविक समस्याओं से हटाने के लिए ऐसे संवेदनशील मुद्दों को आगे ला रही है। उन्होंने कहा कि धर्म,जाति और जनजाति जैसे विषयों पर राजनीति कर समाज में वैमनस्य का वातावरण बनाना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए उचित नहीं है। कांग्रेस पार्टी ऐसे हर प्रयास का विरोध करती है जिससे प्रदेश की सामाजिक समरसता,भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका हो। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के सामने अनेक गंभीर चुनौतियां हैं। सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है,नकली दवाइयों के कारण मरीजों की मृत्यु जैसी दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है और पेपर लीक जैसी घटनाओं से उसका भविष्य प्रभावित हो रहा है। किसान बीज एवं यूरिया की कमी से परेशान हैं, कृषि विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं तथा अनेक क्षेत्रों में पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी गंभीर अभाव बना हुआ है।

कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में खामियां, सचिव ने लगाई फटकार:भोजन खराब, क्षमता से अधिक छात्राएं मिलीं; व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश

बासकृपालनगर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में भोजन व्यवस्था, छात्रावास और भवन की स्थिति सहित कई खामियां सामने आई। इस खैरथल-तिजारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजीत कुडी ने स्कूल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मानकों के अनुरू नहीं मिली गुणवत्ता
निरीक्षण के दौरान सचिव ने भोजनालय, रसोईघर, छात्रावास, शयनकक्ष, कक्षाओं, स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। छात्राओं को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। स्टाफ और छात्राओं के लिए अलग-अलग बन रहा भोजन
जांच में ये भी सामने आया कि छात्राओं और स्कूल स्टाफ के लिए अलग-अलग भोजन तैयार किया जा रहा था और निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं हो रहा था। इस पर अजीत कुडी ने नाराजगी जताते हुए भोजन की गुणवत्ता और रसोई की साफ-सफाई में तत्काल सुधार के निर्देश दिए। कमरों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
छात्रावास निरीक्षण के दौरान कई कमरों में निर्धारित क्षमता से अधिक छात्राएं रहने की बात सामने आई। कमरों में अत्यधिक गर्मी, पर्याप्त जगह का अभाव और कूलर जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने पर सचिव ने इसे छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। स्कूल प्रशासन ने बताया कि अन्य छात्रावासों की बालिकाओं को यहां स्थानांतरित किए जाने के कारण यह स्थिति बनी है, जिस पर सचिव ने व्यवस्थाएं शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए। निरीक्षण में स्कूल के कुछ कमरे जर्जर अवस्था में भी पाए गए। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को मौखिक रूप से दी जा चुकी है। सचिव ने निर्देश दिए कि जर्जर भवनों की स्थिति से जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल लिखित रूप में अवगत कराया जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। सचिव अजीत कुडी ने छात्राओं से सीधे संवाद कर शिक्षा, आवास, भोजन, खेलकूद और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने छात्राओं को उनके विधिक अधिकारों और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करते हुए किसी भी समस्या की जानकारी निसंकोच साझा करने के लिए प्रेरित किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य वार्डन और प्रधानाध्यापिका प्रारंभ में स्कूल में उपस्थित नहीं मिलीं। बाद में उन्हें मौके पर बुलाया गया। इस पर सचिव ने नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने की हिदायत दी। अटेंडेंस और स्टॉक रजिस्टर देखा
सचिव ने स्टाफ की उपस्थिति पंजिका, भंडार गृह के स्टॉक रजिस्टर और अन्य अभिलेखों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही प्राथमिक उपचार किट और आवश्यक दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान कनिष्ठ सहायक पुनीत शर्मा, पीएलवी सूरज कछवाहा, विद्यालय स्टाफ एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।

दही-घी की जांच में मिली मिलावट:रिपोर्ट में मिर्ची असुरक्षित, 3 फर्म के खिलाफ कोर्ट में पेश होंगे मामले

बाड़मेर में शुद्ध आहार मिलावट अभियान चल रहा है। इसके तहत अलग-अलग फर्म से खाद्य पदार्थ के सैंपल लिए गए। नमूनों की जांच के बाद लाल मिर्च पाउडर असुरक्षित पाए गए। वहीं दही, घी जांच रिपोर्ट में नॉन स्टैडर्ड पाए गए हैं। अब फ्रूड इंस्पेक्टर इन सभी जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले बनाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णुराम विश्नोई ने बताया- खाद्य सुरक्षा एवं औषधि कंट्रोल जयपुर के आयुक्त टी. शुभ मंगला एवं जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल के निर्देशन में जिले भर में शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान चलाया जा रहा है। फ्रूड इंस्पेक्टर राजेश कुमार जागिड़ ने जिले भर में अलग-अलग जगहों से लाल मिर्च, दही, लूज घी के सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को जांच के लिए पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री जोधपुर भेजे गए। जांच में लाल मिर्च पाउडर असुरक्षित, दही, लूज घी नॉन स्टैडर्ड सीएमएचओ विष्णुराम विश्नोई ने बताया- मैसर्स बशीर किराना स्टोर रामसर से खाद्य पदार्थ लाल मिर्च पाउडर की जांच रिपोर्ट में असुरक्षित पाया गया। वहीं मैसर्स कृष्णा होटल एंड रेस्टोरंट खाद्य पदार्थ दही और मैसर्स श्री शंखेश्वर ट्रेडिंग कंपनी हमीरपुरा बाड़मेर लूज घी अमानक पाए है। अब संबंधित फर्म के खिलाफ मामला बनाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा।