ब्रेकिंग न्यूज़
INS महेंद्रगिरि नौसेना में शामिल, स्वदेशी मिसाइल-सेंसर से लैस:75% से ज्यादा हिस्सा भारत में बना; राजनाथ बोले- आंध्र प्रदेश बनेगा देश का ड्रोन हब

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम नेवल डॉकयार्ड में INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल (कमीशन) किया। महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A की नीलगिरि कैटेगरी का छठा स्टेल्थ फ्रिगेट (युद्धपोत) है। इसे बनाने में 75% से ज्यादा स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। INS महेंद्रगिरि स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस है। यह हवाई हमलों, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है। यह हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल में आठ ड्रोन कंपनियों के समूह के साथ ‘ड्रोन सिटी’ विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत ‘डायमंड सिटी’ और बेंगलुरु ‘सिलिकॉन वैली’ के नाम से जाना जाता है, उसी तरह आने वाले समय में कुरनूल देश का ड्रोन हब बनेगा। INS महेंद्रगिरि की तस्वीरें… INS महेंद्रगिरि की खासियत अब जानिए प्रोजेक्ट 17A के बारे में… प्रोजेक्ट-17A (Project 17A) के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल 7 स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से 4 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई बना रहा है। 3 युद्धपोत गार्डन रीच शिप बिल्डर्स कोलकाता बना रहा है। प्रोजेक्ट-17A, प्रोजेक्ट-17 (शिवालिक क्लास) का एडवांस्ड वर्जन है। इसमें पहली बार भारत में बड़े युद्धपोतों के निर्माण में इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन (ब्लॉक निर्माण) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इसमें जहाज के अलग-अलग हिस्से पहले तैयार किए जाते हैं और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा युद्धपोत बनाया जाता है। इससे निर्माण का समय कम होता है और गुणवत्ता बेहतर रहती है। भास्कर नॉलेज: पर्वतों-नदियों के नाम पर युद्धपोतों के नाम रखे INS महेंद्रगिरि का नाम जिस महेंद्रगिरि पर्वत पर रखा गया है, उसका धार्मिक महत्व भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्वत भगवान परशुराम की तपस्थली थी। रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारतीय नौसेना अपनी कई युद्धपोतों के नाम देश के ऐतिहासिक पर्वतों, नदियों और विरासत से जुड़े स्थलों पर रखती है, जिससे सैन्य परंपरा और सांस्कृतिक पहचान दोनों को सम्मान मिलता है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… इंडियन नेवी ने समुद्री लुटेरों का हमला किया नाकाम:अदन की खाड़ी में INS त्रिकंड के मार्कोस कमांडो को देखते ही भाग निकले लुटेरे भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS त्रिकंड ने 1 जुलाई की रात अदन की खाड़ी में एक व्यापारी जहाज पर समुद्री लुटेरों के हमले की कोशिश नाकाम कर दी। जहाज MV Golden Arsenal पर एक भारतीय चालक दल का सदस्य भी मौजूद था और यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहा था। पूरी खबर पढ़ें…

ऑपरेशन थिएटर में फैला संक्रमण, 7 प्रसूताओं की मौत:भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में सिजेरियन में लापरवाही, गंदे उपकरणों के इस्तेमाल का आरोप

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। सभी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू भेजा, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी बीच एमसीएच के ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच (कल्चर टेस्ट) रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं, बांसवाड़ा के सरकारी हॉस्पिटल में भी शुक्रवार (10 जुलाई) सुबह दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों ने पहली बार संतान को जन्म दिया था। इससे पहले मई में कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत हुई थी। जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। दो की इलाज के दौरान मौत हुई थी। सभी केसों में गंभीर लापरवाही के आरोप भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में इस साल मार्च से अब तक कुल 9 प्रसूताओं की मौत हुई है। इनमें से 5 मौत इसी जुलाई में अब तक हुई हैं। सभी केसों में परिजनों ने हॉस्पिटल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। शुक्रवार (10 जुलाई) को जिले के पोटला निवासी संगीता जीनगर (32) तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में हंगामा भी किया था। डेली 30-40 ऑपरेशन, लेकिन उपकरणों के सिर्फ 5 सेट एमसीएच में सिजेरियन ऑपरेशन के लिए नियमित उपयोग के केवल पांच और इमरजेंसी के तीन सर्जिकल सेट हैं। जबकि यहां रोज 30 से 40 सिजेरियन हो रहे हैं। किसी भी सर्जिकल सेट को दोबारा उपयोग से पहले तय स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कम से कम तीन घंटे लगते हैं। लेकिन ऑपरेशन का दबाव क्षमता से कहीं अधिक होने के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। ओटी की कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव आने से संक्रमण की आशंका ने हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हॉस्पिटल प्रशासन ने क्या कहा? महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ अरुण गौड़ का कहना है कि – अस्पताल में किसी तरह की लापरवाही सामने नहीं आई है। अधिकांश मरीज पहले से रेफर होकर गंभीर स्थिति में यहां पहुंचते हैं। चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण ऐसी मौतें हो जाती हैं। वहीं, मातृ और शिशु चिकित्सालय प्रबंधन का कहना है कि मौतों की वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया, सीजर पीआईएच, एक्लेम्पिसया और अन्य प्रसूति जटिलताएं रहीं। बांसवाड़ा में भी 2 प्रसूताओं की मौत, इंजेक्शन के सैंपल लिए बांसवाड़ा के भी महात्मा गांधी हॉस्पिटल में शुक्रवार सुबह दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों ने पहली बार संतान को जन्म दिया था। आईसीयू में भर्ती सवनिया निवासी लक्ष्मी गंभीर एनीमिया (शरीर में खून की कमी) से पीड़ित थीं, जबकि कानेला निवासी लीला की मौत बीपी बढ़ने से हुई। मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने पांच डॉक्टरों की टीम गठित की है। वहीं, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड से इस्तेमाल किए गए तीन इंजेक्शनों के सैंपल भी लिए गए हैं। 2 और प्रसूताओं की मौत की आशंका हॉस्पिटल से जुड़े सूत्रों का कहना है बीते कुछ दिनों में 2 और प्रसूताओं की मौत हुई है। इनमें से एक की मौत ऑपरेशन के बाद हुई थी। वहीं, एक गर्भवती युवती को इमरजेंसी में भर्ती किया गया था। जहां आईसीयू में उसकी मौत हुई थी। हालांकि, इन दोनों मौतों को लेकर हॉस्पिटल प्रशासन ने कोई पुष्टि नहीं की है। …. राजस्थान में प्रसूताओं की मौत से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… कोटा मेडिकल कॉलेज में हुई हर मौत की वजह अलग:सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की जान गई थी, जांच रिपोर्ट आई कोटा में 5 प्रसूताओं (महिलाओं) की मौत के असल कारण सामने आ गए हैं। 3 अलग-अलग जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर हाई लेवल कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप दी है। पूरी खबर पढ़िए…

पंजाब कांग्रेस बागी गुट से बघेल की 2 घंटे मीटिंग:बोले- हाईकमान को दूंगा पूरी रिपोर्ट, जीतने वाले को ही टिकट मिलेगी

पंजाब कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले टूट का खतरा बना हुआ है। पूर्व CM व जालंधर सांसद चरणजीत चन्नी की अगुआई वाले कांग्रेस के बागी गुट और AICC प्रभारी भूपेश बघेल की चंडीगढ़ में राणा गुरजीत के घर करीब 2 घंटे मीटिंग चली। मीटिंग के बाद बघेल ने कहा- मैं लगातार 5 दिन से चंडीगढ़ में हूं। सभी नेताओं से मिला हूं। मुझे आज राणा गुरजीत ने न्योता दिया था। सभी साथियों से बात हुई। मुलाकात हुई। उन्होंने अपनी बात रखी है। जो पार्टी हाईकमान का फैसला है, किसी को एतराज नहीं है। कुछ बातें हैं, जिसको हमारे साथियों ने रखा। मैंने सभी साथियों को भरोसा दिलाया कि मैं इंचार्ज होने के नाते सभी के हितों का ध्यान रखूंगा। जो जीतने लायक है, उसे जरूर टिकट मिलेगी। कोई भी ये न सोचे कि उसके सिर पर किसी का हाथ नहीं है। मैं अपनी पूरी रिपोर्ट हाईकमान को दूंगा। मीटिंग का समय सुबह 11 बजे तय किया गया था, लेकिन भूपेश बघेल करीब सवा घंटे की देरी से पहुंचे थे। मीटिंग खत्म होने के बाद वह पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वडिंग के साथ डिफेंडर गाड़ी में रवाना हुए। ड्राइवर सीट पर राजा वडिंग, जबकि उनके साथ वाली सीट पर भूपेश बघेल बैठे नजर आए। कांग्रेस हाईकमान ने चन्नी को 2-3 नेताओं के साथ मिलने को कहा था। फिर भी चन्नी गुट के करीब 80 नेताओं ने यहां पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन किया। मीटिंग से पहले बागी गुट ने पूर्व CM चरणजीत चन्नी को 2027 के चुनाव के लिए मुख्यमंत्री चेहरा बनाने की मांग की। मीडिया से बातचीत में चन्नी ने कहा- हम मीटिंग में आए हैं। अंदर बैठकर बात करेंगे। तेल देखेंगे, तेल की धार देखेंगे। हमारा स्टैंड क्लियर है। इससे साफ है कि बघेल की मीटिंग में कोई फैसला न हुआ तो चन्नी बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि मीटिंग के बाद चन्नी का कोई बयान सामने नहीं आया। चन्नी गुट का कहना है कि अगर उन्हें प्रधान नहीं बनाना तो फिर CM चेहरा घोषित करें ताकि उनके नाम पर पंजाब में वोटें मांगी जा सकें। हालांकि हाईकमान पहले ही कह चुका है कि वह अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान पद से नहीं हटाएंगे। चन्नी गुट की शर्त के मुताबिक इस मीटिंग में प्रधान राजा वड़िंग को नहीं बुलाया गया है। उधर, चन्नी गुट से प्रभारी की मीटिंग के बीच प्रधान राजा वड़िंग ने कहा- मैं मीटिंग में नहीं जा रहा हूं। जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज होता है, वह मध्यस्थता करते हैं। जरूरी नहीं की हर जगह अध्यक्ष जाएं। कुछ बातें उन्हें भी करनी होती हैं। कांग्रेस में एकता है, तभी बैठक हो रही है। वहीं मीटिंग के बीच वड़िंग के सर्मथक पूर्व कांग्रेस MLA कुलबीर सिंह जीरा ने एक फोटो जारी की। जिसके कैप्शन में लिखा- जंगल में सियार और दूसरे जानवर चाहे कितने भी हों, लेकिन शेर एक ही होता है। और वह अकेला होकर भी पूरे जंगल पर राज करता है। यह सिर्फ बात नहीं, बल्कि साफ संदेश है। मीटिंग से पहले हुईं 2 बड़ी बातें… बघेल 4 दिन बाद चन्नी से मिलने क्यों आए?
चरणजीत चन्नी व उनका गुट राजा वड़िंग की प्रधानगी में 2027 का चुनाव नहीं लड़ना चाहता। हाईकमान ने वड़िंग की प्रधानगी बरकरार रखी तो चन्नी गुट नाराज हो गया। इसके बाद चन्नी ने AICC के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल का बायकॉट कर दिया। चन्नी सीधे राहुल गांधी से मिलना चाहते थे, लेकिन टाइम नहीं मिला। हाईकमान ने उन्हें बघेल से मिलने को कहा। बघेल को भी चन्नी से मिलने के लिए कहा गया। इस मुलाकात के बाद बघेल अपनी पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल को देंगे। एक्सपर्ट बोले- चन्नी को साइडलाइन नहीं कर सकती कांग्रेस
पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर डॉ कृष्ण कुमार रत्तू का मानना है कि चरणजीत सिंह चन्नी बड़े दलित-सिख नेता हैं। पंजाब में करीब 32% दलित वोट बैंक को देखते हु उन्हें साइडलाइन करना कांग्रेस हाईकमान के लिए आसान नहीं है। सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि मीटिंग में कोई फैसला नहीं होगा क्योंकि बघेल के पास वो शक्तियां नहीं हैं जो चन्नी गुट की शिकायतों पर फैसला ले सके। अगर राहुल गांधी से बात करने के बाद अगर कांग्रेस हाईकमान ने बीच का रास्ता नहीं निकाला तो पार्टी टूट की तरफ जाएगी इस मामले की पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

भास्कर अपडेट्स:गुजरात के जूनागढ़ में कार की ट्रक से टक्कर, 4 लोगों की मौत, 4 घायल; अस्थियां विसर्जित करने जा रहा था परिवार

गुजरात के जूनागढ़ जिले में शनिवार सुबह सड़क हादसे में एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई। 4 अन्य घायल हो गए। हादसा माजेवाड़ी गांव के पास उस समय हुआ, जब बनासकांठा जिले का परिवार एक रिश्तेदार की अस्थियां विसर्जित करने के लिए सोमनाथ जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, कार सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में सवार 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में चार अन्य लोग घायल हुए हैं। इनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे की वजह पता नहीं चली है। आज की अन्य खबरें… पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने के लिए 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित पश्चिम बंगाल सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) का मसौदा तैयार करने और उसे लागू करने के लिए 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। राज्य सरकार की योजना है कि अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र में UCC विधेयक पेश किया जाए। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी (स्वदेशी) समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। मुंबई में ब्रेक फेल होने से बेकाबू हुई BEST बस; 6 गाड़ियों को मारी टक्कर, 2 घायल मुंबई के अंधेरी वेस्ट में शुक्रवार शाम ब्रेक फेल होने के कारण एक बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) बस बेकाबू हो गई और कई वाहनों से टकरा गई। हादसा शाम करीब 6:10 बजे SV रोड, अंबोली के पास हुआ। बस तिलक नगर से अंधेरी बस स्टेशन जा रही थी। इसी दौरान कथित तौर पर ब्रेक फेल होने से उसने 4 कारों, एक ऑटो और एक टेंपो को टक्कर मार दी। हादसे में दो लोग घायल हो गए। दोनों की हालत स्थिर बताई गई है। सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड और पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव के साथ यातायात सामान्य कराया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। उमर अब्दुल्ला बोले- हमें अभी तक दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली; जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर होने वाले प्रदर्शन के लिए उनकी पार्टी को अब तक अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इस कार्यक्रम को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को श्रीनगर में एक बैठक को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस कई दिनों से प्रदर्शन की अनुमति लेने का प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाना नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रमुख मांग रही है। पार्टी ने इस प्रदर्शन के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के 52 नेताओं को आमंत्रित किया है। दरअसल, अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करते हुए जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया था और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा- डी.के. शिवकुमार सिर्फ राज्य में घूम रहे हैं केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर आरोप लगाया कि वे प्रगति समीक्षा और SIR के नाम पर राज्यभर में ट्रिप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राज्य के सिंचाई और जल हितों के मामले में गैरजिम्मेदारी का परिचय दे रहे हैं। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में जेडी(एस) नेता कुमारस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री के हालिया कलबुर्गी, बीदर और बेलगावी दौरे से किसानों, खेतिहर मजदूरों और सूखा प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कृष्णा-गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना पर मुख्यमंत्री का बयान राज्य के जल हितों की समझ की कमी को दर्शाता है। ED ने रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े केस में कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी ED ने शुक्रवार को हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा और अन्य के खिलाफ स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चल रही यह जांच गुरुग्राम जिले के मानेसर-शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ी हुई है। इससे पहले, 15 अप्रैल को विशेष अदालत ने जुलाई 2025 में ED की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था और वाड्रा व अन्य को पेश होने के लिए कहा था।

BJP वर्किंग कमेटी की मुस्लिम-मेंबर…फोन उठाते ही कहती हैं-जय श्रीराम:3 बजे नमाज, 7.30 बजे हनुमान मंदिर जाती हैं बिलकिस; बोलीं- परिवार के कारण शादी नहीं की

सुबह 3 बजे नमाज और साढ़े 7 बजे हनुमान मंदिर में पूजा… यह पहचान है 1980 से भाजपा से जुड़ीं और प्रदेश कार्यसमिति की इकलौती मुस्लिम महिला सदस्य बिलकिस जहां की। करीब 45 साल पहले भाजपा का दामन थामने वाली बिलकिस राम मंदिर आंदोलन में कारसेवक भी रहीं। 18 राजनीतिक मुकदमे झेले और आज भी संगठन को ही अपना सबसे बड़ा नेता मानती हैं। दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में बिलकिस ने अपनी राजनीतिक यात्रा, संघर्ष, राम मंदिर आंदोलन, ‘जय श्रीराम’, कांग्रेस, संगठन और निजी जीवन से जुड़े कई सवालों के बेबाक जवाब दिए। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश…। सवाल: भाजपा ने आपको प्रदेश कार्यसमिति में क्यों शामिल किया? जवाब: संगठन को मेरी जरूरत थी। मैंने 1980 में भाजपा जॉइन की थी। उस समय की नेता रजिया सुल्तान मुझे पार्टी में लेकर आई थीं। तब मेरी किसी से ज्यादा पहचान भी नहीं थी। सवाल: कांग्रेस के शासनकाल में आप भाजपा से कैसे जुड़ीं? इसके पीछे क्या कारण था? जवाब: कांग्रेस हमेशा से नाकारा पार्टी रही है। उसने कभी जनता के लिए काम नहीं किया। अभी भोपाल में कांग्रेस के दो विधायक हैं, लेकिन वे आज तक क्षेत्र के दौरे पर नहीं आए। जब परिसीमन के बाद हमारा क्षेत्र उत्तर से मध्य विधानसभा में आया, तब ध्रुव नारायण सिंह विधायक बने। उन्होंने अलीगंज से बिट्टन मार्केट तक कई विकास कार्य कराए। उनके बाद सुरेंद्र नाथ सिंह विधायक बने। वे भी लगातार क्षेत्र का दौरा करते थे और लोगों से मिलते थे। लेकिन कांग्रेस के विधायक बनने के बाद से आज तक उन्होंने (कांग्रेस विधायक ने) क्षेत्र का दौरा नहीं किया। वे केवल स्वागत समारोहों में नजर आते हैं। सवाल: भाजपा से जुड़ने के बाद क्या आपको अपने समाज की ओर से किसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा? जवाब: मैं शिया बोहरा समाज से आती हूं। मुझे अपने समाज की ओर से कभी कोई परेशानी नहीं हुई। जब मैंने 2002 में पहली बार चुनाव लड़ा था, तब दाउदी बोहरा समाज ने मेरा पूरा समर्थन किया था। मैंने अब तक तीन चुनाव लड़े हैं। इनमें से दो चुनावों में मुझे मुस्लिमों का वोट नहीं मिला, लेकिन हिंदू समाज और बोहरा समाज ने मेरा पूरा साथ दिया। सवाल: भाजपा में इतने लंबे समय से हैं। क्या आपने कभी विधानसभा का टिकट मांगा? जवाब: नहीं, मैंने कभी विधानसभा का टिकट नहीं मांगा। पार्षद का टिकट भी सिर्फ एक बार मांगा था। उसके बाद दो बार पार्टी ने खुद मुझे टिकट दिया और मैं दोनों बार चुनाव जीती। सवाल: प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाए जाने से पहले क्या पार्टी से कोई चर्चा हुई थी? जवाब: नहीं, इस बारे में पार्टी से कोई बातचीत नहीं हुई थी। संगठन ने सीधे मुझे कार्यसमिति का सदस्य बना दिया। इससे पहले भी मैं तीन बार प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य रह चुकी हूं। सवाल: क्या आप भाजपा के अन्य कार्यकर्ताओं की तरह ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाती हैं? जवाब: हां, हमें ‘जय श्रीराम’ बोलने में कोई परेशानी नहीं है। हम शिया बोहरा समाज से आते हैं। ‘जय श्रीराम’ हमारे लिए राष्ट्रीय नारा है। हिंदू और मुस्लिम, दोनों इसे समझते हैं। सवाल: आपकी राजनीति में कहां तक जाने की इच्छा है? जवाब: मेरी चेयरमैन बनने की इच्छा थी, लेकिन जो संगठन करेगा वह ठीक है। सवाल: आप सदस्य बन गई हैं, क्या आगे विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा है? जवाब: मैं ये पार्टी पर छोड़ती हूं। पार्टी जाने, लेकिन मुझे भोपाल के मध्य-उत्तर से लड़ाया जाए तो मैं जरूर लड़ूंगी। सवाल: आपके परिवार में कौन-कौन हैं? जवाब: हमारे परिवार में चार बहनें और एक भाई थे। भाई और उनकी पत्नी, दोनों का निधन हो चुका है। अब मैं और मेरी एक बहन हैं। मैंने अपनी बहन की शादी कर दी, लेकिन खुद शादी नहीं की। राजनीति में सक्रिय होने के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर आ गई थी। भाई के निधन के बाद घर संभालने वाला कोई नहीं था, इसलिए मैंने विवाह नहीं किया। सवाल: पिछले तीन मुख्यमंत्रियों में किसका काम आपको सबसे बेहतर लगा? जवाब: मुझे शिवराज सिंह चौहान का काम सबसे अच्छा लगा। हनुमान भक्त भी हैं बिलकिस जहां बिलकिस जहां रोज सुबह 3 बजे अलीगंज की मस्जिद में नमाज अदा करती हैं। इसके बाद पिछले 22 वर्षों से वह नियमित रूप से सुबह 7:30 बजे कमला पार्क स्थित हनुमान मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करती हैं। बिलकिस भगवान हनुमान को ‘बाबाजी’ कहकर संबोधित करती हैं। उनका मानना है कि बाबाजी ने जीवन के हर कठिन दौर में उनका साथ दिया है। यही वजह है कि वह प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखती हैं। वह मक्का, जेद्दा, ईरान और मिस्र जैसे मुस्लिम तीर्थस्थलों की यात्रा कर चुकी हैं। इसके अलावा तीन बार माता वैष्णो देवी के दर्शन भी कर चुकी हैं। राम मंदिर आंदोलन में रहीं कारसेवक 1990 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान बिलकिस जहां कारसेवक के रूप में अयोध्या जा रही थीं। रास्ते में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में उन्हें अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ रोक लिया गया था और तीन दिन तक वहीं रखा गया। तुर्क आक्रमणकारी महमूद गजनवी का पुतला दहन करने के मामले में उन्हें एक दिन जेल भी जाना पड़ा था। 1993 का चुनाव: खून बहता रहा, फिर भी नहीं छोड़ा मैदान 1993 के विधानसभा चुनाव में वह भोपाल उत्तर सीट से भाजपा प्रत्याशी रमेश शर्मा ‘गुट्टू भैया’ के लिए प्रचार कर रही थीं। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पथराव में उनके माथे पर गंभीर चोट लगी और काफी खून बहा, लेकिन उन्होंने प्रचार नहीं छोड़ा। उन्हें रोकने के लिए उनके खिलाफ 18 राजनीतिक मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उल्लेखनीय है कि भोपाल उत्तर विधानसभा सीट पर भाजपा के इतिहास में यह अब तक की एकमात्र जीत रही है। भाजपा की पहली मुस्लिम महिला बूथ एजेंट राजनीति के शुरुआती दौर में वह मुस्लिम बहुल सैफिया कॉलेज मतदान केंद्र पर भाजपा की इकलौती महिला बूथ एजेंट थीं। उनके प्रयासों से उनके परिवार ने भी भाजपा को वोट देना शुरू किया। उमा भारती ने दिया था ‘बिल्ली’ नाम पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती उन्हें प्यार से ‘बिल्ली’ कहकर बुलाती हैं। वहीं, 1979 में जनता पार्टी की नेता रजिया सुल्तान और आरएसएस के शशिभाई सेठ के संपर्क में आने पर शशिभाई ने उन्हें ‘बिल्लू चांद’ नाम दिया था। आज भी वे उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं। 2002 के चुनाव में दिग्विजय ने की थी सभा 2002 के पार्षद चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उनके खिलाफ अलीगंज में सभा की थी। वहीं, प्रशासन ने उमा भारती को वहां सभा की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद उन्होंने इतवारा में जनसभा की। उस चुनाव में सुंदरलाल पटवा, बाबूलाल गौर, कैलाश सारंग और उमाशंकर गुप्ता ने उनके लिए सक्रिय प्रचार किया था। इन पदों की है उम्मीद बिलकिस जहां को उम्मीद है कि भविष्य में संगठन उन्हें राज्य मदरसा बोर्ड का अध्यक्ष, राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष या राज्य महिला आयोग का सदस्य बनने का अवसर देगा।

यूपी में कार-पुल डूबे, 3 दिन में 15 मौतें:उत्तराखंड-हिमाचल में 438 सड़कें बंद; मिजोरम में 4 दिन से टूरिस्ट फंसे

मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित देश के 10 राज्यों में अगले 5 दिन कम बारिश होने की संभावना है। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश के पश्चिमी हिस्से से बादल गायब हो गए हैं। नई सैटेलाइट तस्वीरों में बादल पूर्व और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे- उत्तराखंड, यूपी, बिहार, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा की तरफ चले गए हैं। यही वजह है कि इन राज्यों में भारी बारिश हो रही है। यूपी के हापुड़ में तेज बारिश से अंडरपास में पानी भर गया। थार कार डूब गई। बिजनौर में गंगा और उसकी सहायक मालन नदी उफान पर है। कई छोटे पुल डूब गए हैं, प्रदेश में 3 दिन में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में देर रात भारी बारिश के कारण चलती पिकअप पर पहाड़ का एक हिस्सा गिर गया। मलबे और बोल्डरों की चपेट में आने से गाड़ी पूरी तरह पिचक गई। मिजोरम के लुंगलेई जिले में बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया। 80 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राज्य में 29 जगह लैंडस्लाइड हुई। लुंगलेई जिले के बुआल्ते गांव के पास नेशनल हाईवे 54 बंद हो गया है, जहां पिछले चार दिनों से कई पर्यटक फंसे हुए हैं। 11 जुलाई की सैटेलाइट तस्वीर, बादल पूर्वी हिस्से की तरफ खिसके देशभर से मौसम की 4 तस्वीरें… देशभर के मौसम से जुड़े अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

मोदी बोले- मैं 25 साल पुराना मफलर पहनकर न्यूजीलैंड आया:यहीं मुझे गिफ्ट मिला था; हमारे लिए देश की जनसंख्या नहीं, उनकी भावना मायने रखती है

पीएम मोदी ने शनिवार को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। इस दौरान पीएम ने करीब तीन दशक पुराना किस्सा सुनाया। पीएम ने कहा- 25-30 साल पहले जब मैं किसी सरकार का हिस्सा नहीं था, तब मुझे यहां आने का मौका मिला था। उस समय मुझे किसी ने गिफ्ट में 3 चीजें दीं, जो मैं भारत लेकर गया। एक- मफलर, दूसरी- कैप और तीसरा- एक सेट दस्ताना। उसमें भी एक चीज मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। इस मफलर को मैंने कई बार इस्तेमाल किया और आज भी संभाल कर रखा है। पीएम ने आगे कहा कि हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं, जनकल्याण की भावना मायने रखती है। और इसलिए हमने न्यूजीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं। इससे पहले मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इसमें 18 बड़े फैसले और 10 समझौतों (MoU) पर साइन किए गए। दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना बढ़ाकर करीब ₹35 हजार करोड़ करने का लक्ष्य रखा। मोदी के न्यूजीलैंड दौरे की 5 तस्वीरें… पीएम की स्पीच, 4 बड़ी बातें; कहा- भारत और न्यूजीलैंड का भविष्य जुड़ा है पीएम के न्यूजीलैंड दौरे से जुडी अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

खबर हटके- महिला ने नींद में बच्चे को जन्म दिया:मिट्टी से निकले कीड़ों से बन रही वाइन; रूस में हुई दो रोबोट्स की शादी

कनाडा में एक महिला ने नींद में ही बच्चे को जन्म दे दिया। वहीं, चीन में मिट्टी से निकले कीड़ों से वाइन बनाई जा रही है। उधर, रूस में दो रोबोट्स की आपस में शादी करा दी गई। बिहार में एक शादी में मटन की जगह चिकन परोसने पर मारपीट हो गई। वहीं, झारखंड में एक लड़की ने सबसे तेज हिंदी लिखने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

2029 से लागू हो सकता है वन नेशन वन इलेक्शन:संसदीय समिति के अध्यक्ष बोले- 99% लोग पक्ष में; राज्यों के विशेषज्ञों से सलाह ले रहे

संसद की संयुक्त समिति (JPC) कोशिश कर रही है कि 2029 के लोकसभा चुनावों तक ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ लागू हो सके। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी के मुताबिक, अब तक चर्चा में शामिल लगभग 99% नागरिक और संगठनों ने इसका समर्थन किया है। समिति ने गोवा के मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों सहित कई राज्यों के विशेषज्ञों से इस पर सलाह ली है। गोवा दौरे पर गए समिति के सदस्य और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि बार-बार चुनाव से छोटे राज्य गोवा पर इतना प्रभाव पड़ता है, तो बड़े राज्यों और पूरे देश पर इसका असर और भी ज्यादा होता होगा। उन्होंने बताया कि समिति का अगला दौरा लखनऊ का होगा, जहां मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, राजनीतिक दलों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। JPC 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर संसद में पेश करेगी। वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े 5 सवाल 1. आखिर इसका क्या मतलब है? लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग कराने के बजाय एक साथ कराना। 2. जिन राज्यों का कार्यकाल 2029 के बाद भी बचा होगा, उनका क्या होगा? संविधान संशोधन के जरिए उन राज्यों के कार्यकाल को समय से पहले ही समाप्त करके 2029 के चुनावी चक्र के साथ जोड़ा जाएगा। 3. जिनका कार्यकाल 2029 से पहले खत्म हो रहा होगा, उनका क्या होगा? वहां कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लग सकता है या फिर केवल 2029 तक के लिए चुनाव संभव। 4. इसमें क्या कानूनी चुनौतियां आएंगी? कई अनुच्छेदों (जैसे 83, 172, 356) में संशोधन करना होगा। संसद में दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की मंजूरी चाहिए। 5.अगर बीच में ही कोई सरकार गिर जाए, तो क्या नियम प्रस्तावित हैं? इस नए प्रस्ताव के तहत मध्यावधि चुनाव पूरे 5 साल के लिए नहीं कराए जाएंगे, बल्कि केवल बचे हुए कार्यकाल के लिए ही कराए जाएंगे, ताकि अगला मुख्य चक्र न बिगड़े। वन नेशन, वन इलेक्शन पर सुरक्षित रास्ता भी तलाश रही सरकार केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्शन के लिए सुरक्षित रास्ता तलाश रही है। इसके लिए बनी जेपीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक समिति ‘टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल’ पर विचार कर रही है, जिससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने या विधानसभाओं के कार्यकाल में बहुत बड़ी कटौती करने की जरूरत न पड़े। पूरे देश को एक साथ चुनावी चक्र में लाने के बजाय दो चरणों- 2029 और 2034 में बढ़ने का विकल्प सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है। पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ करीब 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अवधि 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ाई जा चुकी है। ऐसे में 2029 से चुनावी चक्र एक करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं, 2034 तक पूरे देश को साझा चुनावी चक्र में लाने का लक्ष्य है। संविधान में गुंजाइश है, लेकिन सहमति पर जोर लॉ कमीशन के पूर्व सदस्य और मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के डीन आनंद पालीवाल ने कहा कि एक देश-एक चुनाव’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं। कुछ राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में कार्यकाल बढ़ाने के विकल्प भी हैं। भारत में पहले भी विशेष परिस्थितियों में लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव किए गए हैं। हालांकि किसी भी व्यापक बदलाव के लिए संसद द्वारा आवश्यक कानूनी प्रावधान और राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में पैनल का गठन ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। 1967 तक साथ हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव 1952 से 1967 तक यानी चार बार लोकसभा व अधिकांश विधानसभा चुनाव साथ हुए। 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें गिरने लगीं। 1968-69 में कई विधानसभाएं भंग हुईं और 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई। इससे देश का साझा चुनावी चक्र बिखर गया। 1971 में लोकसभा के मध्यावधि चुनाव हुए और राज्यों में चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। बाद में गठबंधन सरकारों, राष्ट्रपति शासन और समय से पहले चुनाव ने अंतर और बढ़ा दिया। विधि आयोग और नीति आयोग समय-समय पर चुनावी चक्र एक करने की सिफारिश करते रहे हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… वन नेशन, वन इलेक्शन- JPC की टीम गुजरात पहुंची:प्रियंका गांधी समेत 39 सदस्य सभी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात करेंगे वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर ठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की तारीफ की:NDA में जाने की अटकलें; चार दिन पहले पवार-शिंदे की मुलाकात हुई थी

NCP(SCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की किसान कर्जमाफी योजना में हुए बदलाव की तारिफ की। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से लाखों किसान फायदा मिलेगा। पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का धन्यवाद भी किया। शरद पवार की पार्टी NCP के NDA में शामिल होने या कांग्रेस में विलय की अटकलें भी हैं। हालांकि, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने इन सभी चर्चाओं को अफवाह बताया है। सूत्रों के मुताबिक, पवार की पार्टी के नेता NDA में शामिल के फेवर में नहीं हैं। कुछ नेताओं ने इस पर असहमति जताई है। पोता रोहित पवार इस फैसले के खिलाफ हैं। दरअसल, इन अटकलों को उस समय और बल मिला, जब शरद पवार ने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर 8 जुलाई को मुंबई में विधानभवन में मीटिंग हुई थी। इसके बाद पवार ने डिप्टी CM शिंदे के कमरे में अपनी पार्टी के विधायकों से मुलाकात की। शरद पवार बोले- सरकार फैसला नहीं लेती तो लाखों किसानों को नुकसान होता शुक्रवार को जारी बयान में शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उपज के दामों में गिरावट को देखते हुए कर्जमाफी योजना की घोषणा की थी। हालांकि, योजना में शुरू में कुछ ऐसी शर्तें रखी गई थीं, जिनसे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि पहले 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्जमाफी योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये तक की ही राहत का प्रावधान था। इसके अलावा, नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए वर्ष 2025-26 और 2026-27 के फसल ऋण का भुगतान करना अनिवार्य रखा गया था। पवार ने कहा कि इन दोनों शर्तों के कारण लाखों किसान योजना के दायरे से बाहर हो जाते। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार का इन शर्तों को वापस लेने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह फैसला राज्य के किसानों की भावनाओं के अनुरूप है। 2 वजह से अटकलों को हवा मिली शरद गुट के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि पवार की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें लंबी दूरी तक पैदल चलाना उचित नहीं था। डिप्टी CM शिंदे का कमरा विधान भवन से निकलने वाले दरवाजे के बिल्कुल नजदीक है, इसलिए सुविधा के लिहाज से वहीं बैठक करने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस से अलग होकर बनाई थी NCP राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना 10 जून 1999 को शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने की थी। तीनों नेताओं ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद तीनों ने NCP का गठन किया। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… शरद पवार बोले-अजित चाहते थे कि दोनों NCP एक हों:सब कुछ तय था, 12 फरवरी को ऐलान होना था; बारामती में घर पर बैठक हुई महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों के विलय पर शरद पवार ने शनिवार को कहा, ‘यह अजित पवार की भी इच्छा थी। इसे जरूर पूरा होना चाहिए।’ शरद ने कहा कि अजित, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय के बारे में बातचीत शुरू की थी। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को विलय का ऐलान होना था लेकिन दुर्भाग्य से, अजित उससे पहले हमें छोड़कर चले गए। पढ़ें पूरी खबर…