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भास्कर अपडेट्स:तमिलनाडु की फैक्ट्री में बॉयलर विस्फोट; एक की मौत, 8 घायल

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के गुम्मिडीपुंडी SIPCOT औद्योगिक क्षेत्र में एक निजी मेटल स्मेल्टिंग फैक्ट्री में बॉयलर फटने के बाद आग लग गई। हादसे में बिहार के 24 साल के रवि रंजन की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं आठ कर्मचारी घायल हुए हैं। घायलों को गुम्मिडीपुंडी सरकारी अस्पताल और चेन्नई के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस और फायर ब्रिगेड की दो टीमें आग बुझाने और रेस्क्यू कर रही हैं। घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर एक कटा हुआ हाथ भी मिला है, जिससे विस्फोट की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। आज की अन्य खबरें… दिल्ली में आज कांग्रेस की बैठक; कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार और 2027 के पंजाब चुनाव पर चर्चा संभव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और AICC महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल मंगलवार को अहम बैठक करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सुबह 11 बजे के बाद होने वाली इस बैठक में संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी। ठक में संगठनात्मक बदलावों के साथ-साथ पार्टी की राजनीतिक रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। इसके अलावा कर्नाटक मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार पर भी चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार उचित समय पर करेंगे। बैठक में पंजाब कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के संगठनात्मक फैसलों को लेकर राज्य इकाई में असंतोष की खबरें सामने आई हैं। BRS के अध्यक्ष बोले- कांग्रेस सरकार BJP के साथ मिलकर गोदावरी का पानी नहीं ले रही भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (KTR) ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह BJP के साथ मिलकर जानबूझकर कलेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना से गोदावरी का पानी नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की फसलें सूख रही हैं, जबकि गोदावरी का बड़ी मात्रा में पानी बेकार समुद्र में जा रहा है। KTR ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने से पहले मिड मानेर जलाशय हमेशा भरा रहता था, लेकिन अब सरकार की निष्क्रियता के कारण यह सूखने की स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि कन्नेपल्ली पंप हाउस से पानी उठाकर सिंचाई और पेयजल दोनों की समस्या दूर की जा सकती है, जबकि तेलंगाना सूखे के खतरे का सामना कर रहा है। बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और PM-SHRI योजना को अपनाने का फैसला किया पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और PM-SHRI योजना को अपनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इसके बाद राज्य को चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र सरकार से शिक्षा क्षेत्र का पूरा आवंटन मिल सकेगा। उन्होंने यह घोषणा कोलकाता में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इनमें स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार, मिड-डे मील के लिए गैस आधारित रसोई और PM POSHAN योजना के तहत प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति छात्र प्रतिदिन खाना बनाने की लागत 6.78 रुपए से बढ़ाकर 10 रुपए करना शामिल है। नई दर एक अगस्त से लागू होगी।

भारत की 'मोनालिसा' क्यों कहलाई राजस्थान की ‘बणी-ठणी’:राजा और दासी का वो दिव्य प्रेम, जिसने किशनगढ़ को वृंदावन बना दिया; पार्ट–2

राजस्थानी प्रेम कहानी के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि किस तरह राजा सावंत सिंह, बणी-ठणी के कायल हुए। दोनों का कृष्ण भक्त होना उन्हें एक अनकही डोर से जोड़ने लगा था। पार्ट-2 में पढ़िए आगे की कहानी… राजा सावंत सिंह के जीवन को भक्ति और कविता पूर्णता प्रदान करते थे, लेकिन उस दिन बणी-ठणी को सुनने के बाद उनकी साधना में अध्यात्म का एक नया और गहरा आयाम जुड़ गया था। धीरे- धीरे राजा और बणी- ठणी का रिश्ता जैसे राधा और कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम का रूपक बन गया था। दोनों कृष्ण और राधा की तरह एक-दूसरे के पूरक थे। दोनों एक-दूसरे को कविताएं लिखते और अपनी भक्ति को शब्दों में पिरोते और संवाद करते थे।
अब नागरीदास (सावंत सिंह) और रसिक बिहारी (बणी- ठणी) अक्सर कृष्ण भक्ति की रचनाओं की इस जुगलबंदी का आनंद लेते, दोनों के बीच लिखी रचनाओं को लेकर गहरा संवाद होता जो राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम को दर्शाता – सावंत सिंह: ‘राधा-माधव के मिलन की आस… मन भावन, पावन यह एहसास…’ बणी- ठणी, क्या तुम मेरी कविता में ‘राधा’ का अक्स देखती हो? बणी- ठणी: महाराज,आपकी कविता दिव्य प्रेम की गूंज है। मैं तो बस उस धुन को समझती हूं। कविता और भक्ति के इस रस ने किशनगढ़ के वातावरण को सराबोर कर दिया था। इधर राजा का प्रिय दरबारी चित्रकार निहाल चंद इस आध्यात्मिक और निश्छल जुड़ाव का साक्षी बन रहा था। एक ऐसा भाव जिसकी गहराई को शब्दों में बांध पाना मुश्किल था। निहाल चंद ने अपनी कूंची से भाव और भक्ति के इस पूरे वातावरण को खास चित्र श्रृंखला में उतार दिया। इन चित्रों में राधा-कृष्ण प्रेम था, भक्ति थी और एक अनूठा सौंदर्य। इसी श्रृंखला को बनाते हुए निहाल चंद ने राधा की वो अद्भुत पेंटिंग बनाई जो समय बीतने के साथ बणी- ठणी के नाम से प्रचलित हुई। किशनगढ़ शैली के वरिष्ठ चित्रकार शंकर सिंह राठौड़ बताते हैं कि विद्वानों के अनुसार सावंत सिंह उन्हें राधा स्वरूप मानते थे और खुद को कृष्ण स्वरूप समझ कर पोएट्री करते थे। राधा की इसी पेंटिंग की तुलना लेखक एरिक डिकिन्सन ने लिओनार्डो दा विंची की ‘मोनालिसा’ से की और उसे भारत की मोनालिसा कहा। इतना ही नहीं 1973 में भारत सरकार ने ‘राधा’ का डाक टिकट निकाल कर इस पेंटिंग को सम्मानित भी किया। किशनगढ़ आर्टिस्ट पवन कुमावत बताते हैं – कला समीक्षक, कार्ल खंडेलवाला और एरिक डिकिंसन यहां आए और उन्होंने राधा के चित्र को देखा। इससे पहले उन्होंने मोनालिसा का चित्र भी देखा था, तो उन्होंने पाया कि दोनों ही चित्र अपने आप में श्रेष्ठता स्थापित करते हैं। दोनों की मुस्कान विशेष स्थान रखती है, जिसके चलते उन्होंने कहा कि राधा का ये चित्र भारत की मोनालिसा है। (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। फोटो व पेंटिंग आभार : किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार, चित्रकार,शहज़ाद अली शेरानी ) इनपुट सहयोग- रोहित पारीक राधा कृष्ण की चित्र श्रंखला बनाते हुए निहाल चंद को ‘बणी- ठणी’ पेंटिंग बनाने की प्रेरणा कैसे मिली? ऐसा क्या था इस पेंटिंग में जिसके कारण इसे दुनियाभर के कला जगत में ख़ास पहचान मिली। जानेंगे कल के एपिसोड में… —– यह भी पढ़िए… प्रेम कहानी जिसे शब्दों ने लिखा, रंगों ने जिंदा रखा:’बणी-ठणी’ क्या सिर्फ एक कल्पना है या वाकई कोई महिला थी? एपिसोड 1 बणी- ठणी कौन थी? ऐसा क्या था उस तस्वीर में जो राजस्थान की धरोहर बनी, जिसने किशनगढ़ शैली को दुनिया भर के कला जगत में पहचान दिलाई। जानते हैं राजा सावंत सिंह और बणी- ठणी की कहानी, जिनके प्रेम और भक्ति को कलाकार निहाल चंद ने अमर कर दिया… पूरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

राजस्थान में बदलेगा मौसम, होगी बारिश:बादलों की आवाजाही के बीच गर्मी-उमस बढ़ी, पारा 41 के पार पहुंचा

राजस्थान में मानसून पूरी तरह थम गया है। बादल आते हैं, लेकिन बरस नहीं रहे। सोमवार को बादलों की आवाजाही रही, लेकिन कहीं भी बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग ने 16 जुलाई को बारिश की एंट्री होने की उम्मीद जताई है। उदयपुर संभाग से बादलों का एंट्री करना ठीक रहा तो जाते हुए मानसून की बारिश अरावली के पहाड़ों को पार करके रेगिस्तानी इलाकों तक पहुंच जाएगी। इससे 16 जुलाई को उदयपुर, सलूंबर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में बारिश हो सकती है। सबसे पहले राजस्थान में बारिश की स्थिति जानिए… राजस्थान में मौसम की तस्वीर… राजस्थान के सबसे गर्म जिले राजस्थान में गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स पिछले 24 घंटे में राजस्थान में कहीं भी बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई। बारिश का दौर थमते ही राजस्थान में एक बार फिर सूरज के तेवर तीखे हो गए हैं और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। श्रीगंगानगर में अधिकतम 41.5 डिग्री सेल्सियस रहा। फलोदी में 39.4, बीकानेर में 39.2, अलवर में 38.1, पिलानी (झुंझुनूं) में 38.2, जैसलमेर में 38.4, चूरू में 38.6 और हनुमानगढ़ के संगरिया में 37.6 डिग्री सेल्सियस अधिकतम पारा रहा। राजस्थान के बड़े शहरों के मौसम का हाल जयपुर : तापमान में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं है। सोमवार को यहां पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस बना रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस रहा। पिछले दिनों की तुलना में महज 0.3 डिग्री पारा बढ़ा है। हालांकि न्यूनतम तापमान में 2.1 डिग्री सेल्सियस की कमी आई। अलवर : सोमवार सुबह से मौसम सामान्य रहा, लेकिन तेज धूप और हवा नहीं चलने से उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया। दिनभर लोग पसीने से तरबतर नजर आए। अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार और बुधवार को भी मौसम लगभग इसी तरह बना रहेगा। 16 से 18 जुलाई के बीच जिले में तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया गया है। जोधपुर : सोमवार सुबह से ही हल्के बादल छाए रहे। उमस ने लोगों को काफी परेशान किया। यहां अधि​कतम तापमान 36.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम तापमान 1.2 डिग्री गिरकर 28.5 डिग्री तक पहुंच गया। इधर, मौसम विभाग ने 19 जुलाई तक किसी भी तरह का आंधी-बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। हालांकि इस दौरान बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। उदयपुर : सोमवार दिनभर मौसम का मिजाज बदलता रहा। सुबह तेज धूप निकलने से गर्मी का एहसास हुआ, लेकिन कुछ ही देर बाद बादल छा गए। शाम होते-होते मौसम पूरी तरह बदल गया और ठंडी हवाओं के साथ बादलों ने पूरे आसमान को ढक लिया। मौसम केंद्र डबोक के अनुसार, सोमवार को शहर का अधिकतम तापमान 33.9 और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले रविवार को अधिकतम तापमान 33.1 और न्यूनतम तापमान 27.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। कोटा : सोमवार को मौसम सामान्य बना रहा। अधिकतम तापमान 35.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर बादलों की आवाजाही के बावजूद बारिश नहीं हुई। तापमान में हल्की गिरावट से लोगों को उमस के बीच कुछ राहत जरूर महसूस हुई, हालांकि बारिश का इंतजार अभी भी बना हुआ है। सीकर : सुबह से बादल छाए रहे। दिनभर सीकर जिले में कहीं बारिश नहीं हुई। एक कमजोर वेदर सिस्टम एक्टिव हुआ था, जिस वजह से मौसम में बदलाव आया है। फिलहाल अगले 48 घंटे तक सीकर जिला मुख्यालय समेत आसपास के इलाके में बादलों की गतिविधियां बनी रहेंगी। कुछ जगहों पर हल्की बारिश की भी संभावना है। अजमेर : सोमवार को अधिकतम तापमान 34.5 और न्यूनतम तापमान 24.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह के समय हवा में नमी 80 प्रतिशत रहने से उमस का असर रहा, जबकि दोपहर बाद नमी घटकर 50 प्रतिशत पहुंच गई। दिनभर बादलों की आवाजाही के बीच गर्मी और उमस का मिला-जुला असर बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल तापमान सामान्य रहेगा। आगामी दिनों में बादल छाने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है।

प्रदेश में केंद्र के प्रारूप को लागू ही नहीं किया:डिजिटल आय प्रमाण-पत्र नहीं, सैनिकों के बच्चों की छात्रवृत्ति व परिजनों के इलाज रुके

देश को सबसे ज्यादा फौजी देने वाले राजस्थान के वीर परिवारों पर इन दिनों एक अजीब संकट मंडरा रहा है। यह संकट प्रदेश की लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण उपजा है। प्रदेश में डिजिटल आय प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण हजारों सैनिक परिवारों के हक और सुविधाएं तो छिन ही रही हैं, साथ ही, सरहद पर मुस्तैद जवानों पर सेना द्वारा फर्जी दस्तावेज देने के तहत कार्रवाई का खतरा पैदा हो गया है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पिछले चार सालों से प्रदेश के राजस्व विभाग के अधिकारियों, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर के डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त आय प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे। डिजिटल प्रमाण पत्र और वेरिफिकेशन नहीं होने से सेना व केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय स्व-घोषणा आय प्रमाण पत्र को स्वीकार नहीं करते। ऐसे में केंद्र सरकार व सेना की विभिन्न सुविधाओं से सैनिक व उनके परिवार वंचित हो रहे हैं। केंद्र ने सीएस को पत्र लिखा: केंद्र सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के संयुक्त निदेशक ने 17 जून 2022 को ही राजस्थान के मुख्य सचिव को बकायदा पत्र लिखकर इस व्यवस्था को बंद करने और डिजिटल प्रणाली लागू करने का आदेश दिया था। पत्र के साथ बाकायदा एक डिजिटल सर्टिफिकेट का प्रारूप भी भेजा गया था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते 4 साल बाद भी इस पर कोई अमल नहीं हुआ। केस 1: आर्मी अस्पताल में पिता को इलाज नहीं मिला झुंझुनूं के एक सैन्य अधिकारी के पिता रोहिताश सिंह खेती करते हैं। उन्हें आर्मी अस्पताल में नियमित इलाज की जरूरत होती है। लेकिन पिछले दो साल से वे दर-दर भटक रहे हैं। वे कहते हैं कि सेना के अस्पताल में बिना डिजिटल वेरिफिकेशन के इलाज नहीं होता है। केस 2: नागौर : विभाग ने सत्यापन से मना किया नागौर के एक जवान ने स्व-घोषणा आय प्रमाण पत्र जमा कराया। सेना ने राजस्थान के राजस्व विभाग से सत्यापन कराया, तो विभाग ने लिख दिया कि वे ऐसा कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं करते। नतीजा- सैनिक पर फर्जी दस्तावेज देने के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो गई है। छात्रवृत्ति और इलाज दोनों अटके

सीकर का मास्टर प्लान तीसरी बार बदलने की तैयारी:42 विधायकों का मास्टर प्लान मंजूर पर खुद मंत्री का अटका

राजस्थान के जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर सहित 42 शहर और कस्बों के संबंधित विधायकों ने अपने इलाके के मास्टर प्लान बदलवा लिए। मंत्री की हरी झंडी भी मिल गई लेकिन, हैरानी की बात है कि यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा के गृह जिले के शहर सीकर का मास्टर प्लान अटक गया। मास्टर प्लान पर कांग्रेस-बीजेपी में खूब तनातनी हुई, लेकिन कांग्रेस सरकार के समय बदले मास्टर प्लान का नया खाका अटक गया। खर्रा विधानसभा से लेकर कई कार्यक्रमों में सीकर मास्टर प्लान को लेकर घोषणा कर चुके हैं। इसके बाद भी मास्टर प्लान को हरी झंडी नहीं दी जा रही। इसी तरह पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के कोटा शहर का मास्टर प्लान 2 बार इस सरकार में बदल दिया और नया अप्रूव कर लिया। सीएम के भरतपुर में 3 दर्जन से ज्यादा गांव मिलाकर नया मास्टर प्लान अप्रूव हो गया। लेकिन महकमे के मंत्री ही रह गया। अब सीकर का मास्टर प्लान तीसरी बार बदलने की तैयारी है। यहां के मास्टर प्लान मंजूर खाटूश्यामजी, नीम का थाना, सूरतगढ़, सीकर, पिलानी, बीकानेर, इटावा, भीनमाल, प्रतापगढ़, कपासन, महवा, देवली, रूपवास, धौलपुर, कोटा, नसीराबाद, डेगाना, खंडेला, सरदारशहर, पाली, लालसोट डूंगरपुर, गंगापुरसिटी, सुजानगढ़, श्रीगंगानगर, तिजारा, सवाईमाधोपुर, हनुमानगढ़, जोधपुर, अजमेर, मांडलगढ़, हिंडौन, भीलवाड़ा, करौली, नौखा, सिरोही, उदयपुर, सुमेरपुर, पुष्कर के विधायकों ने अपने इलाकों के मास्टर प्लान अप्रूव करा लिए। 49 जगह माइक्रो प्लान का संकट इस सरकार में ढाई साल में नए बनाए 49 शहरों के लिए तैयार किए जाने वाले मास्टर प्लान में सेक्टर और जोन स्तर की माइक्रो प्लानिंग शामिल नहीं होगी। इन शहरों के वार्डों का विकास, स्थानीय जरूरतों और बुनियादी सुविधाएं और उनकी योजना अधूरी पड़ी है। सार्वजनिक सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की योजना भी अटक गई।

जेडीए की दोहरी कार्यशैली:3 किमी लंबी, 24 मीटर चौड़ी सेक्टर रोड 10 साल से अधूरी; 900 मीटर हिस्से में सड़क नहीं बनाने से कब्जे

जेडीए शहर में एक तरफ सेक्टर रोड बनाने के लिए दुकान-मकान ध्वस्त कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सेक्टर रोड के लिए खाली पड़ी जमीनों पर धड़ल्ले से अतिक्रमण हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। दस साल पहले जेडीए ने पीआरएन नॉर्थ में जयपुर-दिल्ली एक्सप्रेस-वे को गोकुलपुरा, करणी विहार, कनकपुरा और रामनाथपुरी को जोड़ने वाली 100 फीट चौड़ी और 3 किमी लंबी सड़क बनाई थी, लेकिन बीच में करीब 900 मीटर लंबी जमीन खाली होने के बाद भी रोड अधूरी छोड़ दी। बाद में इसे विलोपित करने का निर्णय लिया तो स्थानीय कॉलोनी वालों ने विरोध कर दिया। खाली जमीन के बावजूद जेडीए सड़क नहीं बना रहा, 30 कॉलोनीवासियों को 3 किमी घूमकर आना पड़ रहा लोगों ने मकान, दुकान और गोदाम बना दिए

उच्च शिक्षा पर दिखाने लगा असर:गिग इकोनॉमी के फेर में खाली हो रहे क्लासरूम, प्रदेश के कॉलेजों में नामांकन 4.23 प्रतिशत तक गिरा

राजस्थान में गिग इकोनॉमी और त्वरित कमाई का बढ़ता आकर्षण अब उच्च शिक्षा पर असर दिखाने लगा है। उच्च शिक्षा विभाग के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (2025-26) के विश्लेषण में सामने आया है कि यूजी-पीजी में नामांकन इस सत्र में 4.23% घटकर 12.55 लाख रह गया। यह लगातार दूसरा साल है, जब उच्च शिक्षा में निगेटिव ग्रोथ दर्ज हुई है। महामारी के दौरान बढ़ा नामांकन भी अब सिकुड़ चुका है। सबसे ज्यादा असर लड़कों पर दिखा है, जिनके नामांकन में 5.60% की गिरावट आई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि गिग सेक्टर में तेजी से बढ़ते अवसर युवाओं को सीधे वर्कफोर्स की ओर खींच रहे हैं। इस गिरावट के बीच उदयपुर संभाग मजबूत अपवाद बनकर उभरा है। प्रदेश में प्रति कॉलेज औसतन 513 विद्यार्थी हैं, जबकि उदयपुर के सुविवि से संबद्ध कॉलेजों में यह आंकड़ा लगभग दोगुना 1,030 विद्यार्थी प्रति कॉलेज है। डिग्री का दबदबा, 71% विद्यार्थी सिर्फ आर्ट्स में प्रदेश के 71.10% विद्यार्थी अकेले कला संकाय में नामांकित हैं। भीड़ की प्रमुख वजह कम फीस और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पात्रता है। रोजगार की गारंटी नहीं होने के बावजूद यह संकाय सबसे अधिक विद्यार्थियों को आकर्षित कर रहा है। लड़कों के नामांकन में 5.60 प्रतिशत की बड़ी गिरावट : विभागाध्यक्ष सुविवि के लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष डॉ. गिरिराज सिंह चौहान के अनुसार उच्च शिक्षा में सबसे चिंताजनक संकेत लड़कों के नामांकन में 5.60% और लड़कियों में 3.12% की गिरावट है। वर्तमान में कुल नामांकन में 55.91% हिस्सेदारी छात्राओं की है। डॉ. चौहान के अनुसार आर्थिक दबाव और त्वरित कमाई की चाहत के चलते बड़ी संख्या में युवा लॉजिस्टिक्स, रिटेल, सिक्योरिटी सर्विसेज, डिलीवरी और राइड-शेयरिंग जैसे गिग सेक्टर में जा रहे हैं। संविदा व अस्थायी नौकरियों के बढ़ते अवसरों से वे बीए-बीकॉम जैसी तीन वर्षीय डिग्री के बजाय सीधे रोजगार चुन रहे हैं। उम्मीद बाकी…उदयपुर संभाग बना हाई इनरोलमेंट मॉडल उच्च शिक्षा में उदयपुर संभाग हाई इनरोलमेंट-लो इंस्टीट्यूशनल शेयर मॉडल का उदाहरण बनकर उभरा है। राज्य के कुल महाविद्यालयों में इसकी हिस्सेदारी महज 5.3% (207 कॉलेज) है, लेकिन कुल छात्र नामांकन में संभाग अकेले करीब 8% (2.25 लाख) का भार संभाल रहा है। आदिवासी बहुल यह क्षेत्र अपने जिलों के साथ-साथ सिरोही तथा गुजरात और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आकर्षित कर रहा है। कम कॉलेजों में अधिक छात्र होने से यहां संसाधनों का उपयोग राज्य में सबसे अधिक है। प्रदेश में हर 100 लड़कों पर 129 लड़कियां उच्च शिक्षा में…
आंकड़ों का दूसरा बड़ा संकेत जेंडर गैप का उलटना है। अब राज्य में हर 100 लड़कों पर 129 लड़कियां उच्च शिक्षा में नामांकित हैं।

सरकारी तिजोरी में कैद 64 करोड़ का सोना-चांदी:कैग ने कहा- नीलाम करो; अपराधियों से किया गया था जब्त

अपराधियों से जब्त ‌‌64.44 करोड़ रुपए का 29.011 किलो सोना और 972.75 किलो चांदी सरकारी खजाने में ‘कबाड़’ हो रही है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की लेटेस्ट समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि ये सोना-चांदी बरसों से सरकारी खजाने में रखे हैं, लेकिन अभी तक इसका नियमानुसार निस्तारण नहीं हो पाया है। कैग ने पहली बार इस तरह की जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों ने ये जब्ती की है। इसे कोर्ट ने राजकीय संपत्ति घोषित किया है। हालांकि, वित्त विभाग ने इनकी वैल्यूएशन करवा ली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 तक निस्तारण नहीं हुआ है। कैग ने इसे गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से जरूरी कार्रवाई की सिफारिश की है। यानी इसकी नीलामी करने को कहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान कोषागार नियमावली-2012 के नियम 122 के तहत कोषालय जयपुर (शहर) को राज्य का रिजर्व कोषागार घोषित किया गया है। सामान्य और आपराधिक मामलों में कोर्ट की ओर से राजकीय (सरकारी) संपत्ति घोषित किए गए सोना, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य सामान यहीं जमा किए जाते हैं। वित्त विभाग ने बहुमूल्य सामग्री को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। पहली कैटेगरी पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं की है। इन्हें पुरातत्व विभाग को हस्तांतरित किया जाना है। दूसरी कैटेगरी के तहत रखे सोना-चांदी को मुंबई स्थित सरकारी की टकसाल में भेज शुद्ध धातु में परिवर्तित करा बेचना है। कर चुके हैं वैल्यूएशन उधर, कैग ने पाया कि पुरातात्विक महत्व की सामग्री को छोड़कर बाकी सोना-चांदी का वैल्यूएशन तो हो चुका था, लेकिन नियमानुसार निस्तारण नहीं किया गया। इसे देखते हुए निदेशक एवं पदेन संयुक्त शासन सचिव, निदेशालय कोष एवं लेखा को सिफारिश की गई है कि राज्य सरकार के सक्षम स्तर से आवश्यक निर्देश जारी कर कोषाधिकारी जयपुर (शहर) के सुरक्षित कक्ष में रखे सोने-चांदी के आइटमों का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए। नियम- गलाकर बेचे सरकार कोर्ट की ओर से राजकीय संपत्ति घोषित सोना, चांदी, हीरे आदि को रिजर्व कोषागार जयपुर (शहर) को समय-समय पर पुरातात्विक महत्व की सामग्री पुरातत्व विभाग को सौंपनी होती है। वहीं, अन्य बहुमूल्य सामग्री को मुंबई स्थित भारत सरकार की टकसाल भेजकर शुद्ध धातु में बदलना और मॉनेटाइज करना पड़ता है। कैग ने यह उठाई आपत्ति सोना-चांदी का वैल्यूएशन होने के बावजूद मई 2025 तक नियमानुसार निस्तारण नहीं हुआ। लंबित प्रक्रिया शीघ्र पूरी करे। समय से निस्तारण नहीं होने से सरकार पर इसकी सुरक्षा और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है। इससे सरकार को नुकसान हो रहा है। …और इधर हिसाब-किताब भी ठीक नहीं 35 साल बाद भी 17 मामलों में सरकार नहीं दे सकी 29.79 करोड़ रुपए के खर्च का हिसाब कैग की रिपोर्ट में समाने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों में सरकारी धन के उपयोग का हिसाब 35 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। कैग के मुताबिक, 17 एडवांस कंटींजेंसी (एसी) बिलों के बदले निर्धारित समय में डिटेल्ड कंटींजेंसी (डीसी) बिल जमा नहीं किए गए। इन लंबित मामलों में करीब 29.79 करोड़ का समायोजन अभी तक बाकी है। इनमें कुछ मामले 1990-91 से यानी करीब 35 वर्ष से लंबित हैं। इनके खर्च का पूरा लेखा-जोखा सरकार उपलब्ध नहीं करा सकी। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार एसी बिलों के माध्यम से विभाग को तत्काल जरूरत के लिए राशि जारी की जाती है। नियमों के तहत निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित विभागों को डीसी बिल प्रस्तुत कर यह बताना होता है कि पैसा किस मद में और किस उद्देश्य से खर्च किया गया। लेकिन 17 मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कैग ने इसे वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना और सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की सिफारिश की है।

खान विभाग का कड़ा आदेश:सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बिना अरावली में नहीं चलेंगी माइनिंग मशीनें, लंबित खनन प्रस्तावों को अब सिर्फ सशर्त पर्यावरण मंजूरी

अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच खान एवं भूविज्ञान निदेशालय ने एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के मद्देनजर अरावली क्षेत्र के लंबित पड़े माइनिंग प्रस्तावों को अब केवल सशर्त पर्यावरण स्वीकृति (कंडीशनल ईसी) मिलेगी। हालांकि, इस मंजूरी के बाद भी पट्टाधारक सीधे तौर पर जमीन की सफाई या खनन कार्य शुरू नहीं कर पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े फैसलों का हवाला: खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक (पर्यावरण एवं विकास) महेश माथुर द्वारा जारी सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े आदेशों (9 मई 2024, 29 दिसंबर 2025 और 26 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की 25 अगस्त, 2010 की रिपोर्ट में तय अरावली पॉलीगॉन के दायरे में आने वाले सभी प्रस्तावों पर यह नियम सख्ती से लागू होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व लीज डीड पर भी ब्रेक मंजूरी के बाद भी ये 2 शर्तें लागू होंगी

महिलाओं ने खेल, गीत, नृत्य किए

ब्यावर| अखिल भारतीय अग्रवाल महिला संगठन ने सावन के आगमन पर सावन स्वागत उत्सव आयोजित किया। कार्यक्रम में राजस्थानी थीम पर चंगा-पो, चरमींग, सतोलिया, चेयर रेस सहित कई खेल हुए। सावन के गीतों पर महिलाओं ने नृत्य किया। कार्यक्रम संगठन अध्यक्ष ललिता जालान, महामंत्री ट्विंकल अग्रवाल के नेतृत्व में हुआ। कार्यक्रम में उर्मिला गुप्ता, शशि मोदी, मनीषा जैन, अनु जिंदल, अर्चना मित्तल, नंदनी गोयल सहित अन्य मौजूद रही।