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100 करोड़ का अस्पताल; न डॉक्टर, न सुपरस्पेशलिटी:ईएसआईसी : 2.5 लाख मरीजों से 180 करोड़ की वसूली, इलाज के बजाय कर रहे रेफर

यदि आप उदयपुर संभाग के उन ढाई लाख ईएसआईसी कार्डधारक बीमित कर्मचारियों में से हैं, जो हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई से 15 करोड़ रुपए (सालाना 180 करोड़ रुपए) सरकारी खजाने में जमा कराते हैं। आपकी ही बदौलत उदयपुर में 100 करोड़ रुपए की लागत से एक आलीशान इमारत बनकर खड़ी हो चुकी है। कागजों में इसे मॉडल हॉस्पिटल और सुपरस्पेशलिटी सेंटर कहा जाता है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ एक भव्य रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। इलाज को छोड़कर बाकी सब कुछ प्रथम श्रेणी का है। यहां 64 की जगह 75 नर्सेज (जरूरत से ज्यादा) मुस्तैद हैं, लेकिन गंभीर बीमारी का इलाज करने वाले डॉक्टर नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत 34 पदों में से केवल 4 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें भी सिर्फ आंख (ओप्थाल्मोलॉजी), स्किन (डर्मेटोलॉजी), शिशु रोग (पिडियाट्रिक) और रेडियोलॉजी के डॉक्टर ही ड्यूटी बजा रहे हैं। गंभीर रोगों के इलाज के लिए आवश्यक सुपरस्पेशलिटी विभागों नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, आंकोलॉजी (कैंसर), न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी का तो खाता तक नहीं खुला है। यहां एक भी डॉक्टर नहीं हैं। पैरामेडिकल स्टाफ में 77 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 25 हैं। रेजिडेंट डॉक्टर्स 38 में से केवल 1 रेजिडेंट कार्यरत हैं। गत वर्ष आए तीन सीनियर रेजिडेंट्स तो दो-दो महीने काम करके ही यहां से निकल गए। मुख्यालय या तो अस्पताल की क्षमता 100 बेड से बढ़ाकर 150 या 200 बेड करे, ताकि यहां आने वाले डॉक्टरों का अनुभव काउंट हो सके और वे टिक पाएं। या फिर मुख्यालय स्तर से ही स्थायी विशेषज्ञों की सीधी पदस्थापना की जाए, ताकि ढाई लाख बीमित श्रमिकों को उनके हक का इलाज उदयपुर में ही मिल सके। अनोखा आदेश… इलाज मत करो, मरीज को बाहर भेजो जब स्थानीय बीमित श्रमिकों ने डॉक्टर भेजने की गुहार लगाई तो दिल्ली-जयपुर बैठे आकाओं ने डॉक्टर भेजने के बजाय एक और अनोखा आदेश जारी कर दिया। इसमें कहा गया है कि स्थानीय आरएनटी (आरएनटी) मेडिकल कॉलेज से टाइअप कर काम चलाओ, या फिर मरीज को उठाकर जयपुर, कोटा, अहमदाबाद, अलवर या बीकानेर के ईएसआईसी अस्पतालों में रेफर कर दो। यह स्थिति तब है जब उदयपुर का श्रमिक अपनी जेब से सालाना 180 करोड़ रुपए प्रीमियम भर रहा है और जब इलाज की नौबत आए तो 300 से 500 किलोमीटर दूर दूसरे शहरों की दौड़ लगाएं। आंकड़ों में हकीकत : इस साल 1200 मरीजों को कर चुके रेफर अस्पताल के निर्माण पर 100 करोड़ रु. खर्च हुए हैं। ईएसआईसी का मासिक प्रीमियम कलेक्शन 15 करोड़ रु. है, जो सालाना 180 करोड़ तक पहुंचता है। उदयपुर जिले में 92 हजार और संभाग में 2.50 लाख कार्मिक ईएसआईसी के दायरे में हैं। गत वर्ष 90 हजार ओपीडी व 21 हजार आईपीडी मरीज आए थे। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 44,100 ओपीडी और 17 हजार आईपीडी मरीज दर्ज हुए हैं। गत वर्ष 3,800 मरीजों को बाहर रेफर किया था। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 1,200 रेफर किए जा चुके हैं। इनमें अधिकांश एमआरआई, सीटी स्कैन, हृदय रोग और न्यूरो से जुड़ी समस्याओं के मरीज हैं। 100 बेड की सीमा: डॉक्टर लंबे समय तक टिकना नहीं चाहते 100 बेड का अस्पताल होने से यहां कार्यरत डॉक्टरों का अनुभव आगे की पढ़ाई या उच्च पदों के लिए मान्य नहीं माना जाता। यही डॉक्टरों के यहां नहीं टिकने का मुख्य कारण है। कॅरिअर प्रभावित होने की आशंका के चलते डॉक्टर यहां लंबे समय तक काम नहीं करना चाहते। 18 मई को इंटरव्यू के जरिए गायनिक और सर्जरी के दो डॉक्टर नियुक्त किए गए थे, लेकिन इनमें से सर्जरी के डॉक्टर ही टिके। बता दें कि अशोक नगर, बेदला रोड, फतेहपुरा और मादड़ी रोड नंबर-3 के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े 1 लाख बीमितों को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से अस्पताल शुरू किया गया था, लेकिन अब मेडिकल क्लेम महीनों अटक रहे हैं। हम मुख्यालय से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए समय-समय पर वॉक-इन इंटरव्यू लिए जाते हैं। जो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे मरीजों को सही समय पर उपचार दिलाने के लिए रेफर करना नियम अनुसार अनिवार्य है।
-डॉ. अनुराधा गहलोत, अधीक्षक, ईएसआईसी हॉस्पिटल उदयपुर

मसूदा में 19 साल का रिकॉर्ड टूटा, 5 घंटे में 6.4 इंच, ब्यावर में 6.2 इंच बारिश

मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने बुधवार को जिंदगी की रफ्तार रोक दी। तड़के 3:30 बजे शुरू हुई बारिश दोपहर 12:30 बजे तक लगातार 9 घंटे तक कभी तेज तो कभी धीमी होती रही। इस दौरान 6.2 इंच बारिश दर्ज हुई। वहीं मसूदा में 5 घंटे में 6.4 इंच बारिश दर्ज हुई। 19 साल पहले जुलाई में ही 24 घंटे में 6 इंच बारिश हुई थी। कस्बे के व्यस्तम मार्ग मसूदा अजमेर रोड स्थित छीपा पुलिया पर पानी का बहाव तेज हो गया। प्रशासन ने पुलिस बल तैनात कर वाहन चालकों की आवाजाही रोक दी है। मसूदा. छीपा पुलिया पर बहाव तेज, पुलिस ने आवाजाही रोकी। सबसे बदहाल स्थिति रेलवे स्टेशन पर रही। गंदे नाले का पानी स्टेशन परिसर में घुस गया। टिकट खिड़की, स्लीपर वेटिंग रूम और रेलवे डिस्पेंसरी जलमग्न हो गए। प्लेटफॉर्म और ट्रैक नंबर-1 पर पानी भरने से कर्मचारियों को निकासी के लिए मशक्कत करनी पड़ी। पार्किंग में घुटनों तक पानी भर गया, ऑटो बंद हो गए और दुकानों के बाहर खड़े दोपहिया वाहन बहाव में गिर गए। छावनी अंडरपास में सुबह 11 बजे पंप लगाकर पानी निकाला गया। रेलवे डिसपेंसरी में भरा पानी। जर्जर मकान की छत गिरी: ब्यावर खास में तेजाजी मंदिर के सामने वर्षों से बंद पड़े हरचंद चौधरी और कानाराम चौधरी के दो मंजिला जर्जर मकान की छत बारिश से ढह गई। पड़ोसियों ने बताया कि दीवारों में बड़ी दरारें हैं और पूरा मकान गिरने से जन-धन हानि का खतरा बना हुआ है। वहीं हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-3 में बिजली के तारों सहित पोल झूल गया। बिजली आपूर्ति बंद कर निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर रास्ता सुचारू कराया। जवाजा में 10 घंटे बारिश से जर्जर मकान की छत गिर गई। पीसांगन में 2 इंच से जयादा बारिश हुई।

सीकर रोड पर इंटरलॉकिंग, NHAI बोला- प्रयोग कर रहे:जलभराव-मिट्‌टी का कटाव रुकेगा, विशेषज्ञ- ट्रोले-डंपर का वजन नहीं झेल पाएंगी

राजधानी के सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल सीकर रोड पर रोड नंबर-14 के आगे सड़क के दोनों किनारों पर इंटरलॉकिंग टाइल (पेवर ब्लॉक) बिछाने का काम शुरू किया है। एनएचएआई का कहना है कि बरसात के दौरान सड़क किनारे होने वाले जलभराव और मिट्टी कटाव को रोकने के लिए 500 मीटर के हिस्से में यह कार्य प्रयोग के तौर पर कराया जा रहा है। हालांकि सड़क निर्माण और हाईवे इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञ इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यहां एम-20 या एम-30 ग्रेड की टाइल्स लगाई जा रही हैं तो वे लगातार भारी वाहनों का दबाव लंबे समय तक नहीं झेल पाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन-रात हजारों ट्रक, ट्रोले और कंटेनर गुजरते हैं। ऐसे में यदि भारी वाहन सड़क के किनारे चढ़ते-उतरते हैं तो इंटरलॉकिंग ब्लॉक बैठने, उखड़ने और असमतल होने का खतरा रहेगा। राष्ट्रीय राजमार्गों पर टिकाऊ व्यवस्था के लिए प्रबलित कंक्रीट शोल्डर, बेहतर स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज और नियमित रखरखाव अधिक प्रभावी विकल्प माने जाते हैं, जबकि इंटरलॉकिंग ब्लॉक का उपयोग फुटपाथ, मीडियन, बस-बे, पैदल मार्ग या सीमित भार वाले क्षेत्रों में अधिक उपयुक्त माना जाता है। असल चुनौती जलभराव नहीं, ड्रेनेज व्यवस्था कई वर्षों से सीकर रोड़ के वीकेआई नंबर-14 और ढ़ेहर का बालाजी क्षेत्र में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी हुई है जो जाम का प्रमुख कारण है। इसके समाधान के लिए NHAI पहले भी सीमेंट कंक्रीट रोड, ड्रेनेज नेटवर्क और फ्लाईओवर निर्माण की योजना शुरू कर चुका है। अब फिर इंटरलॉकिंग टाइल (पेवर ब्लॉक) बिछाने का काम शुरू किया गया है। मजबूत सब-बेस और ड्रेनेज ही स्थायी समाधान
रिटायर्ड एक्सईएन हरिमोहन शर्मा के अनुसार इंटरलॉकिंग ब्लॉक जल निकासी सुधारने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए मजबूत सब-बेस, उचित कम्पेक्शन और वैज्ञानिक ड्रेनेज जरूरी है। सड़क किनारे भारी वाहन चढ़ते-उतरते हैं, ब्लॉक जल्द बैठ सकते हैं। सीकर रोड पर फिलहाल प्रयोग के तौर पर 500 मीटर की दूरी में टाइल्स लगाई जा रही है। यहां कच्ची सड़क थी, जिस पर बारिश में जलभराव होता था। उसी के किनारे यह टाइल्स लगाई गई हैं। -अजय आर्य, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई जयपुर

बिजली कटौती से परेशान कलेक्टर से लगाई गुहार

टोंक | सोलंगपुरा रोड इलाके में लगातार हो रही बिजली कटौती से परेशान होकर मोहल्लेवासियों ने कलेक्टर से बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि सालों से उनके इलाके में अनियमित बिजली आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। जिससे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

डारडातुर्की में स्वास्थ्य सेवा शिविर में हाई-रिस्क गर्भवतियों सहित विभिन्न रोगों की हुई जांच

भास्कर न्यूज | टोंक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डारडातुर्की में बुधवार को समग्र स्वास्थ्य सेवा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की टीबी, एचआईवी, डेंगू, मलेरिया, हेपेटाइटिस-बी व सी, सिफिलिस तथा ब्लड शुगर सहित कई रोगों की जांच की गई। बीसीएमओ पीपलू डॉ. संगीत चौधरी ने शिविर का निरीक्षण करते हुए हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं से टीबी, एचआईवी एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांच समय पर कराने की अपील करते हुए कहा कि समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। इस दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत पात्र टीबी मरीजों को पोषण सहायता भी वितरित की गई। जिला डीआरटीबी कोऑर्डिनेटर मोनिका कुमावत ने बताया कि जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हिमांशु मित्तल के निर्देशानुसार आयोजित शिविर का उद्देश्य, विशेषकर हाई-रिस्क समूह के लोगों को एक ही स्थान पर समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर निसार खान की देखरेख में टीबी जांच के लिए बलगम के नमूने भी एकत्रित किए गए। शिविर में पीएचसी प्रभारी डॉ. दीपक बरूणा, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ, काउंसलर हेमंत वर्मा, सेक्टर हेल्थ सुपरवाइजर, आशा सहयोगिनियां तथा राष्ट्रीय मानव विकास संस्थान के प्रतिनिधि रमेशचंद वर्मा, पूजा प्रजापत और विक्रम धाप सहित स्वास्थ्यकर्मियों ने सेवाएं दीं। ग्रामीणों को टीबी, एचआईवी, हेपेटाइटिस, डेंगू, मलेरिया एवं अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव, समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने के साथ निशुल्क जांच एवं दवाइयों का भी वितरण किया गया।

हरिपुरा नायगांव में घासभैरूजी की सवारी को गांव में घुमाया

क्षेत्र के हरिपुरा नायगांव में बुधवार को बरसात की कामना को लेकर घासभेरू की सवारी ढोल धमाके के साथ निकाली गई। ग्रामीणों ने बताया की किसानों ने खरीफ की अच्छी फसल की कामना को लेकर गांव के परिक्रमा लगाई है। गांव कि महिलाओं ने सबसे पहले घास भेरुजी की पूजा कर सभी महिला ने एकत्रित होकर जयकारे और ढोल धमाके साथ सवारी निकाली।

टोंक के इंदिरा सर्कल पर पीएम का पुतला फूंक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में टोंक में कांग्रेस का विरोध लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। देहात व शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में इंदिरा सर्किल (छावनी) पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया गया। पूर्व जिलाध्यक्ष हरिप्रसाद बैरवा ने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग व कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान उन्हें और अन्य सांसदों को हिरासत में लिया जाना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। वक्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने अथवा उन्हें पद से हटाने की मांग की। इस दौरान शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इरशाद बेग, देहात ब्लॉक अध्यक्ष कैलाशी देवी मीणा, दिनेश चौरसिया, शब्बीर अहमद, देवकरण गुर्जर, धर्मेंद्र सालोदिया, अलका बेरवा, मनिंदर बेरवा, आकाश बेरवा, आबिद मेवाती, सुरेंद्र रेगर, राजेंद्र बोकण, मनीष मीणा, महेंद्र बेरवा, शंकर दादिया, सरपंच शहादत नकवी, शकील मियां, फिरोज नागौरी, अब्दुल हक पहलवान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सद्गुरु आश्रम में महंत प्रताप पुरी का स्वागत, सनातन संस्कृति पर मंथन

टोंक | सद्गुरु आश्रम में बुधवार को महंत प्रताप पुरी के आगमन पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। आश्रम परिवार ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस दौरान महंत प्रताप पुरी और गुरुदेव पंडित राजकुमार शर्मा के बीच सनातन धर्म के संरक्षण, भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण और सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा हुई। बातचीत में सामाजिक समरसता, संस्कारयुक्त शिक्षा, परिवार व्यवस्था के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में संत समाज की भूमिका जैसे मुद्दे शामिल रहे। महंत प्रताप पुरी ने कहा कि सनातन धर्म जीवन-दर्शन है, जो सत्य, करुणा, सेवा, त्याग, सहिष्णुता और राष्ट्रभक्ति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपरा को शांति और मानव कल्याण का संदेश देने वाली बताया। पंडित राजकुमार शर्मा ने कहा कि सनातन संस्कृति राष्ट्र जीवन का आधार है। उन्होंने नैतिकता, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम को मजबूत करने के लिए आध्यात्मिक चेतना और संस्कारयुक्त जीवनशैली को समाज तक पहुंचाने की जरूरत बताई। दोनों ने कहा कि वैचारिक भ्रम, सांस्कृतिक दबाव और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याओं का समाधान भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों में है। उन्होंने गौसंवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, नारी सम्मान, सामाजिक समरसता और जनसेवा को प्राथमिकता देने की बात कही। कार्यक्रम में मनीष बंसल और आनंद बम सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

गांजा , 1.58 लाख नकद जब्त

दतवास| अवैध मादक पदार्थों, अवैध शराब के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान में दतवास पुलिस ने 22 ग्राम गांजा, 2.25 लीटर अवैध हथकड़ देशी शराब, मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त से जुड़े 1 लाख 58 हजार रुपए नकद, एक क्रेट कार जब्त की। एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस टीम ने 21 जुलाई 2026 की रात संदिग्ध हालत में क्रेट कार को रोका। तलाशी ली। वाहन से 22 ग्राम अवैध गांजा मिला। 2.25 लीटर अवैध हथकड़ देशी शराब मिली। 1 लाख 58 हजार रुपए बरामद हुए। पुलिस ने सामग्री, वाहन जब्त किए। आरोपी राकेश पुत्र रामेश्वर सांसी, उम्र 42 साल, निवासी ललवाड़ी, हाल निवासी दतवास को गिरफ्तार किया। दतवास थाने में मामला दर्ज हुआ। पुलिस के अनुसार आरोपी से मादक पदार्थों के स्रोत को लेकर पूछताछ चल रही है। जब्त नकदी के संबंध में भी पूछताछ जारी है।

निकाय चुनाव सितंबर में प्रस्तावित:भाजपा के 30 साल के गढ़ को ढहाने की तैयारी में कांग्रेस, अस्थायी कार्यालय शुरू किया

नगर निगम सहित प्रदेशभर में निकाय चुनाव सितंबर में प्रस्तावित हैं। परिसीमन के बाद इस बार उदयपुर में 70 की जगह 80 वार्डों पर मतदान होगा। वार्ड बढ़ने से नए सियासी समीकरण बने हैं और भाजपा-कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 1994 से लगातार छह चुनावों से निगम बोर्ड पर काबिज भाजपा इस बार अंदरूनी असंतोष और विवादों से दबाव में है। शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह की कार्यकारिणी से पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया समर्थित वरिष्ठ नेताओं को दूर रखने से असंतोष है। ‘उदयपुर फाइल्स’ विवाद के बाद संगठन की एकजुटता पर भी सवाल हैं। यह चुनाव गजपाल की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। वहीं दोबारा शहर कांग्रेस अध्यक्ष बने फतह सिंह राठौड़ ने मोर्चा संभाल लिया है। कांग्रेस ने शास्त्री सर्कल के पास अस्थायी चुनाव कार्यालय शुरू कर दिया। पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया व महामंत्री दिनेश कुमार दवे भी मौजूद रहे। भाजपा: 6 चुनावों से अजेय, इस बार अपनों की चुनौती 6 चुनावों से जीत रही भाजपा के लिए इस बार राह आसान नहीं है। शहर भाजपा संगठन में डेढ़ साल से जारी अंतर्कलह सामने आ रही है। जिला कार्यकारिणी में गुलाबचंद कटारिया समर्थित वरिष्ठ व पूर्व पदाधिकारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हालांकि, जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह का कहना है कि भाजपा में गुटबाजी नहीं है और संगठन सर्वोपरि है। 10 वार्ड बढ़ने के कारण टिकट दावेदारों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में टिकट वितरण के दौरान बगावत भी बढ़ सकती है। कांग्रेस: नए चेहरों पर दांव और वार्ड स्तर पर घेराबंदी कांग्रेस ने भी इस बार अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी स्थानीय जन समस्याओं जैसे सड़क, सफाई, जल निकासी, पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था को भी प्रमुखता से उठाएगी। चुनाव कार्यालय की शुरुआत के साथ ही कांग्रेस ने वार्ड और बूथ स्तर पर घर-घर जनसंपर्क के निर्देश दिए हैं। संगठन विस्तार के तहत नई कार्यकारिणी की भी जल्द घोषित होंगे। 80 वार्ड होने से इस बार नए और युवा चेहरों को मौका मिल सकता है।