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कबाड़ के जरिए फर्जी कैशबैक; साइबर ठगी का नया खेल:पार्सल बॉक्स के लेबल से पर्सनल डेटा चुरा रहे ठग, ऐसे बना रहे आपको शिकार

आपने जो पार्सल अभी-अभी खोला उसका डिब्बा कूड़े में फेंक दिया। लेकिन क्या पता वो डिब्बा आपके बैंक अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता बन जाए। यह अजीब जरूर है, लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स की मानें तो अमेजन और फ्लिपकार्ट के पार्सल पर चिपका वो छोटी-सा स्टीकर, जिसे हम कभी गौर से देखते भी नहीं, जालसाजों के लिए सोने की खान बन गया है। जरा सोचिए, हर बार जब आप ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, डिलीवरी बॉक्स पर लगी चिट्ठी में क्या-क्या छपा होता है। इसमें आपका नाम, फोन नंबर, पूरा पता, ईमेल आईडी, और कई बार तो यह भी होता है कि आपने क्या खरीदा। पैकेट खुलते ही यह जानकारी बेकार लगती है, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे बॉक्स को कूड़ेदान में डाल देते हैं। यहीं से शुरू होती है असली कहानी। ठग कूड़े के ढेर या कबाड़ी के पास से पार्सल डिब्बे उठाते हैं और उन पर छपी जानकारियां नोट कर लेते हैं। इसके बाद वे खुद को अमेजन, फ्लिपकार्ट या किसी डिलीवरी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फोन करते हैं। चूंकि उनके पास आपका नाम, पता और हाल में की गई खरीदारी की जानकारी होती है, लिहाजा बातचीत सही लगती है और भरोसा बनते देर नहीं लगती। इसके बाद कैशबैक, लॉयल्टी रिवॉर्ड या अगली खरीदारी पर छूट का लालच देकर एक फीडबैक सर्वे भरने को कहा जाता है। एसएमएस, वाट्सएप या ई-मेल पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करते ही खेल शुरू हो जाता है। यह लिंक किसी फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है, जहां बैंक डिटेल्स, कार्ड नंबर या ओटीपी मांगा जाता है। कई बार तो फोन में एक ऐसा मैलिशियस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स चुराकर सीधे अकाउंट से पैसे उड़ा ले जाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा फ्रॉड शुरू होता है एक ऐसी जगह से, जिसे हम कचरा समझकर भूल जाते हैं। लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग जितनी बढ़ रही है, ठगों के तरीके भी उतने ही नए और शातिर होते जा रहे हैं। लेकिन एक छोटी-सी आदत- डिब्बा फेंकने से पहले लेबल मिटाना आपको इस नए तरह के फ्रॉड का अगला शिकार बनने से बचा सकती है। तो ऐसी धोखाधड़ी से बचाव का तरीका क्या है? जवाब उतना ही आसान है, जितनी यह समस्या मुश्किल लगती है। बॉक्स फेंकने से पहले शिपिंग लेबल फाड़ें, काटें या खुरच दें, ताकि उस पर लिखी जानकारियां कोई पढ़ न सके। आइडेंटिटी प्रोटेक्शन रोलर स्टैंप से भी संवेदनशील जानकारी छिपाई जा सकती है। साथ ही, अगर कोई कॉल पर खुद को ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताकर एप इंस्टॉल करने, अनजान लिंक पर क्लिक करने या ओटीपी-बैंक डिटेल्स शेयर करने के लिए कहे, तो सतर्क हो जाएं। अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां अमूमन ऐसी मांग नहीं करतीं। किसी भी ऑफर या कैशबैक मैसेज की सच्चाई जानने के लिए कंपनी की ऑफिशियल एप पर जांच करें।

टीचर्स स्टूडेंट की भावनाओं को समझेंगे:तनाव मैनेजमेंट और भावनात्मक संतुलन पर शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) में शुक्रवार को वेलनेस सेंटर का शुभारंभ किया गया। इसके जरिए टीचर ट्रेनिंग ले रहे हैं। वे नीचे जाकर स्कूलों के स्टूडेंट की मदद करेंगे। परिषद की निदेशक श्वेता फगेड़िया ने सेंटर का उद्घाटन करते हुए कहा- वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण हो गया है। बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिजिटल दुनिया के प्रभाव के कारण बच्चों में तनाव, चिंता और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याएं पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा- पहले बच्चे खुले माहौल में खेलते-कूदते थे। अपेक्षाकृत अधिक बेफिक्र रहते थे, लेकिन आज कई बच्चे तनाव, चिंता और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सही दिशा देना समय की आवश्यकता है। फगेड़िया ने बताया कि परिषद ने शिक्षकों के लिए एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया है। इसके माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे स्टूूडेंट्स की भावनाओं को पहचाने, उन्हें सकारात्मक रूप से व्यक्त करने तथा तनाव और क्रोध जैसी परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना करने में मदद कर सकें। प्रशिक्षण में यह भी बताया जाएगा कि तनाव और गुस्से के पीछे के कारणों को कैसे समझा जाए और उन्हें प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के उपाय क्या है। उनका कहना था कि यदि बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही भावनात्मक रूप से सशक्त बनाया जाए तो वे पढ़ाई के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों का भी आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकेंगे। परिषद से डॉ. आभा शर्मा और पिरामल फाउंडेशन से प्रवीण कुमार और मणि कुमार ने अतिथियों को ‘वेलनेस जोन’ की परिकल्पना, दीवारों पर बनाई गई अवधारणाओं, और भावनाओं के चक्र से परिचित कराया। कार्यक्रम में अतिथियों ने पांच मिनट के एक रेसोर्सिंग ध्यान सत्र का अनुभव लिया और अपने विचार साझा किए। जानिए वेलनेस सेंटर के बारे में सहेली रोड स्थित RSCERT कार्यालय के अंदर वेलनेस सेंटर बनाया है। इस केंद्र पर मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए परामर्श, प्रशिक्षण और विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएगी। केंद्र विद्यार्थियों और शिक्षकों को तनावमुक्त, सकारात्मक और संतुलित जीवनशैली अपनाने में मदद करेगा। यहां से प्रशिक्षित शि​क्षक स्टूडेंट की मदद करेंगे वेलनेस सेंटर से प्रशिक्षित होने वाले टीचर अपने स्कूल के स्टूडेंट की मदद करेंगे। उनकी बात और भावनाओं को समझ कर उनको गाइड करेंगे। इसमें विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव और चिंता को कम करने से लेकर परीक्षा, प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया के दबाव से निपटने में सहायता करेंगे। भावनात्मक संतुलन और मानसिक मजबूती विकसित करने, व्यवहार संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान और समाधान तथा सकारात्मक और सुरक्षित शिक्षण वातावरण तैयार करने पर खास फोकस होगा।

BSF जवान को पिता ने मुखग्नि दी, पत्नी बेसुध हुई:ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई थी बाइक, 9 दिन इलाज चला; 8 महीने पहले हुई थी शादी

सड़क हादसे में घायल BSF जवान मुकेश राठौड़ का 8 दिन चले इलाज के बाद निधन हो गया। उनकी बाइक ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई थी। हादसे में वे गंभीर घायल थे और उनका जोधपुर में इलाज चल रहा था। उनकी पार्थिव देह आज जैसलमेर के उनके पैतृक गांव नग्गा पहुंची थी। यहां 2 किमी लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। इसमें गांव के लोग उमड़ पड़े। भारत माता की जय और मुकेश अमर रहे के नारे भी लगाए। आगे उनकी पार्थिव देह और पीछे पूरा गांव पैदल चलता रहा। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई, उन्हें पिता ने मुखाग्नि दी। परिजनों के अनुसार, पिछले साल ही उनकी शादी हुई थी। उनकी पत्नी भी गर्भवती हैं। अब पढ़िए जवान के साथ हुए हादसे की पूरी कहानी 2022 में जॉइन की थी BSF जानकारी के अनुसार, मुकेश की 2025 नवम्बर में ही शादी हुई थी। उनकी शादी को 7 महीने ही हुए थे और उनकी पत्नी गर्भवती भी थीं। उनकी मां मूली देवी बहुत पहले ही निधन हो गया था। मुकेश के पिता भजनाराम ने ही खेती-किसानी करते हुए मुकेश को पाला और 2022 में उनका BSF में चयन हुआ था। मुकेश जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने के लिए विधायक छोटू सिंह भाटी, पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव, महंत बाल भारती और पूर्व प्रधान मूलाराम चौधरी मौजूद रहे।

अहमदाबाद में अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 9 की मौत:15 घायल; RAF का कैंप पास था; धमाका सुनते ही रेस्क्यू के लिए पहुंचे जवान

अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में शनिवार को अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद आग लग गई। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई इनमें तीन बच्चे हैं। करीब 15 लोग घायल हुए हैं। हादसा रामोल से गतराड जाने वाले रास्ते पर महमूदपुरा टैलेंट के पास दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। यहां से एक किलोमीटर दूर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) का कैंप है। धमाके की आवाज सुनते ही RAF जवान तुरंत घटनास्थल पहुंचे और लोगों का रेस्क्यू किया। धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज 5 किलोमीटर तक सुनाई दी। धमाके की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गईं। हादसे के समय फैक्ट्री में करीब 25 लोग काम कर रहे थे। इनमें से कुछ लोगों के बच्चे भी वहां थे। अवैध फैक्ट्री के मालिक मेहुल डोडिया को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस हादसे में मेहुल की मां रमीला डोडिया भी घायल हो गई हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। हादसे की तस्वीरें: फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द हो चुका था इलाके के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर जयपाल सिंह राठौड़ के अनुसार, रामोल-गटराड रोड पर खुले मैदान में मेहुल डोडिया नाम का व्यक्ति पटाखा फैक्ट्री चला रहा था। फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द हो चुका था, इसके बावजूद वहां पटाखे बनाए जा रहे थे। खुले मैदानों में पत्तों और तिरपाल की बाड़ लगाकर आतिशबाजी बनाई जा रही है। घायलों को एलजी अस्पताल और असरवा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। PM नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया और मृतकों के परिजन के लिए 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की मदद का ऐलान किया है। राज्य सरकार मृतकों के परिवार को 4 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की मदद देगी। हादसे से जुड़े 3 बड़े सवाल-जवाब… सवाल: लाइसेंस रद्द होने के बाद भी फैक्ट्री कैसे चल रही थी? जवाब: जॉइंट पुलिस कमिश्नर जयपाल सिंह ने बताया कि फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था। इसके बावजूद मेहुल डोडिया फैक्ट्री चला रहा था। नियम के मुताबिक, लाइसेंस रद्द होने पर प्रशासन फैक्ट्री सील करती है और वहां रखा बारूद जब्त करती है। इस मामले में सिर्फ लाइसेंस रद्द हुआ, फैक्ट्री सील नहीं की गई। सवाल: RAF कैंप के पास पटाखा फैक्ट्री, क्या ये गैरकानूनी? जवाब: गृह मंत्रालय के नियमों के मुताबिक, सैन्य या अर्धसैनिक बलों के कैंपों के आसपास बारूद या विस्फोटकों का काम होना पूरी तरह से बैन है। इसके बावजूद RAF शिविर के पास ही अवैध फैक्ट्री चल रही थी। ऐसे में देश की एक महत्वपूर्ण सुरक्षा यूनिट को नुकसान पहुंच सकता था। सवाल: पटाखा फैक्ट्रियों में तेज धमाका क्यों होता है? जवाब: पटाखों में पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर, चारकोल और एल्युमिनियम पाउडर जैसे ज्वलनशील रसायन होते हैं। ये गर्मी, चिंगारी या स्टैटिक बिजली से तुरंत आग पकड़ते हैं। आग लगने पर चेन रिएक्शन शुरू होता है तो कुछ ही सेकेंड में सैकड़ों पटाखे फटने लगते हैं। बारूद ज्यादा हो, तो विस्फोट घरेलू LPG सिलेंडर के धमाके से भी ज्यादा शक्तिशाली होता है। —————————————–
ये खबर भी पढ़े: जयपुर- पटाखा फैक्ट्री में आग,2 भाइयों समेत 8 की मौत:जलने के बाद सड़क पर तड़पते रहे; दिल्ली का युवक चला रहा था अवैध फैक्ट्री जयपुर।
जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में स्थित अवैध पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार सुबह 11 बजे भीषण आग लग गई। अग्निकांड में एक बच्चे, दो भाइयों समेत आठ लोगों की मौत हो गई। पटाखा फैक्ट्री मकान नंबर- 88 करीम नगर-बी में रिहायशी इलाके में चल रही थी। मकान याकूब पुत्र नजीर खान निवासी- राक्ष्या की ढाणी खोह नागोरियान का है। पढ़ें पूरी खबर…

दौसा में तेज रफ्तार ट्रेलर पलटने का VIDEO:ड्राइवर को झपकी आई, LPG टैंकर को बचाने के प्रयास में पलटा, बाइक सवार बाल-बाल बचे

दौसा जिले में जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रेलर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के दौरान हाईवे पर जा रहे बाइक सवार दो लोग भी बाल-बाल बच गए। दोनों भरतपुर की ओर जा रहे थे, लेकिन घबराकर वापस लौट गए। घटना शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे आगरा रोड पर गोविंददेवजी मंदिर के सामने हुई, जिसका सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। गनीमत रही कि बेकाबू ट्रेलर आगे चल रहे एलपीजी टैंकर से नहीं टकराया, वरना भयावह हादसा हो सकता था। देखिए घटनाक्रम से जुड़ी 3 तस्वीरें भरतपुर की तरफ जा रहा था ट्रेलर
सदर थाना प्रभारी युधिष्ठिर ने बताया कि जयपुर से भरतपुर की ओर जा रहे ट्रेलर के ड्राइवर को झपकी आने के कारण हादसा हुआ। ड्राइवर की झपकी खुली तो सामने एलपीजी टैंकर काफी करीब दिखाई दिया, जिससे वह घबरा गया। सामने चल रहे एलपीजी टैंकर को बचाने के प्रयास में ट्रेलर साइड लेन में बेकाबू हो गया। इसी दौरान पास से गुजर रहे बाइक सवार युवकों ने तेजी से ब्रेक लगाए, जिससे वे बाल-बाल बच गए। इसके बाद ट्रेलर एक होटल के सामने पलट गया। हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। थाना प्रभारी के अनुसार, हादसे के समय राज्यपाल हरिभाऊ बागडे का काफिला भी जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे से गुजर रहा था। हालांकि, इस हादसे का राज्यपाल के काफिले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और एक बड़ी अनहोनी टल गई। ट्रेलर में अनाज के कट्टे भरे हुए थे, उसके पलटते ही अनाज के कट्टे सड़क किनारे बिखर गए। ये खबर भी पढ़िए…. ट्रक-टैंकर की भिड़ंत के बाद आग लगी, ड्राइवर जिंदा जला,VIDEO:शव बुरी तरह झुलसा, नहीं हो सकी पहचान,ओवरटेक के दौरान हुआ हादसा नागौर-जोधपुर नेशनल हाईवे-62 पर केमिकल से भरा टैंकर आगे चल रहे ट्रक से टकरा गया। हादसे के बाद टैंकर में आग लग गई। टैंकर ड्राइवर जिंदा जल गया। पूरी खबर पढ़िए

HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़:नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे

HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम ₹33,535 करोड़ के पार बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में सालाना आधार पर 6.7% की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़कर 33,535.95 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। हालांकि, नेट इंटरेस्ट इनकम भी बाजार के 34,353 करोड़ रुपए के पोल अनुमान को पार करने में चूक गई। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.26% रहा पहली तिमाही में HDFC बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल एसेट्स पर 3.26% दर्ज किया गया है। वहीं, अगर ब्याज अर्जित करने वाली संपत्तियों यानी इंटरेस्ट अर्निंग एसेट्स के आधार पर देखें तो यह मार्जिन 3.40% रहा है। एसेट क्वालिटी में मामूली बदलाव, ग्रॉस NPA 1.17% एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) 30 जून, 2026 तक ग्रॉस एडवांस के 1.17% पर रहे। 31 मार्च 2026 को यह आंकड़ा 1.15% था, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 1.40% था। वहीं, 30 जून, 2026 तक बैंक का नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPAs) नेट एडवांस का 0.41% रहा। प्रोविजनिंग और क्रेडिट कॉस्ट का हाल पहली तिमाही में बैंक का कुल प्रोविजंस और कंटिंगेंसीज (प्रॉविजन्स एंड कंटिंगेंसीज) ₹3,060 करोड़ रहा। इसके साथ ही तिमाही के लिए बैंक का कुल क्रेडिट कॉस्ट रेशियो 0.40% दर्ज किया गया है। इस साल 17.2% टूट चुका है बैंक का शेयर शुक्रवार को HDFC बैंक का शेयर 1.4% चढ़कर 819.60 रुपए के स्तर पर बंद हुआ था। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में 17.2% की गिरावट आ चुकी है, जबकि इस दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में 6.9% की कमजोरी देखी गई है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है।

बंगाल में अभिषेक का पार्टी ऑफिस तोड़ा गया:TMC सांसद बोले- कार्यालय हमारे लिए मंदिर जैसा; 2031 तक जिंदा रहा तो इसका जवाब दूंगा

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के साउथ 24 परगना के अमतला में स्थित पार्टी ऑफिस को शनिवार को तोड़ दिया गया। यह कार्रवाई जिला प्रशासन की तरफ से की गई है। अधिकारियों के मुताबिक ऑफिस बिना किसी मंजूरी बिल्डिंग प्लान के बनाया गया था। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी कार्यालय हमारे लिए मंदिर जैसा है। जमीन खरीदी गई थी और बिल्डिंग स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनाई गई थी। हमारे पास सभी दस्तावेज हैं, जिन्हें हम हाईकोर्ट में पेश करेंगे। उन्होंने आगे कहा- हर कार्रवाई की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। अगर मैं जिंदा रहा, तो 2031 के विधानसभा चुनाव के बाद इसी कानून के जरिए ब्याज सहित इसका जवाब दूंगा। अमतला ऑफिस डायमंड हार्बर लोकसभा सीट का हिस्सा है। अभिषेक बनर्जी इसी सीट से सांसद हैं। जिले में टीएमसी की संगठनात्मक गतिविधियों का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है। ऑफिस में कार्रवाई की 3 तस्वीरें… अभिषेक बनर्जी का पलटवार, 6 बातें; कहा- ये भाजपा का बुलडोजर मॉडल प्रशासन बोला- दो नोटिस का जवाब नहीं मिला, फिर कार्रवाई प्रशासन के अनुसार, इस ऑफिस के खिलाफ अवैध निर्माण की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद 15 जुलाई को संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि दो नोटिसों का कोई जवाब नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई का फैसला लिया। नोटिस के मुताबिक, जिस जमीन पर यह ऑफिस बना है, वह कथित तौर पर ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ नाम की कंपनी के नाम पर खरीदी गई थी। प्रशासन ने जमीन के मालिकाना हक और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों पर स्पष्टीकरण मांगा था। फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहा है। ऑफिस टूटने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया अमतला डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां से अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। इस कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद BJP कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया और नारेबाजी की। स्थानीय BJP विधायक अग्निश्वर नस्कर ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह ढांचा अवैध रूप से बनाया गया था। अमतला ऑफिस- अभिषेक का पॉवर सेंटर, हार के बाद से बंद… —————————– ये खबर भी पढ़ें… ममता बोलीं- भाजपा चाहती थी मुझे हार्ट अटैक आ जाए: मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक उनका अंत न हो जाए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा चाहती थी मुझे हार्ट अटैक आ जाए, लेकिन मैं तब तक जिंदा रहूंगी जब तक उनका अंत न हो जाए। पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता ने बुधवार को एक वीडियो मैसेज जारी किया। उन्होंने इस मैसेज में तृणमूल में जारी फूट पर भी अपना पक्ष रखा। ममता ने कहा- जो लोग जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। फरवरी से शुरू हुआ था बढ़ने का सिलसिला हालिया बढ़ोतरी के बावजूद दोनों ईंधन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई (पीक लेवल) से नीचे बने हुए हैं। 3 अप्रैल को डीजल की कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में यह तेजी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देखने को मिली थी, जब डीजल 281 रुपया प्रति लीटर के स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल की कीमत भी 3 अप्रैल को 458.41 रुपया के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसकी शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते में 266 रुपया प्रति लीटर से हुई थी। अब हर रोज तय होंगे दाम पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बदल रही हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री ने फैसला किया है कि अब ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को रोजाना कीमतें तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। OGRA न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर रोज सुबह नए रेट जारी करेगी, बल्कि यह भी सार्वजनिक करेगी कि पेट्रोल पंप तक पहुंचते-पहुंचते टैक्स, मार्जिन और अन्य खर्चों की वजह से कीमतें किस तरह तय हुईं। इससे पहले मार्च की शुरुआत से सरकार हर हफ्ते कीमतों की समीक्षा कर रही थी। एक लीटर तेल पर 105 रुपया तो सिर्फ टैक्स, डीलर्स ने दी आंदोलन की चेतावनी आम जनता को मिलने वाले पेट्रोल-डीजल पर सरकार भारी-भरकम टैक्स वसूल रही है। इस समय दोनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर प्रति लीटर लगभग 105 रुपया का टैक्स लिया जा रहा है। इसमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन शामिल हैं। दूसरी ओर, ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार के ‘डेली प्राइसिंग’ यानी रोज दाम बदलने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोज दाम बदलने से उनके बिजनेस और स्टॉक मैनेजमेंट में दिक्कतें आएंगी। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि वे इसके खिलाफ अगले हफ्ते एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

लिफ्ट गिरने से हुई गेटमैन की मौत, सहमति बनी:धरना खत्म, कल होगा पोस्टमॉर्टम; आर्थिक मदद का मिला आश्वासन

पाली में फैक्ट्री की लिफ्ट गिरने से गेटमैन की मौत के मामले में शनिवार को दिनभर चले विरोध प्रदर्शन के बाद शाम को दोनों पक्षों के बीच मुआवजे को लेकर समझौता हो गया। इसके बाद मृतक के परिजन और समाज के लोग धरना समाप्त करने तथा पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हो गए। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। इससे पहले मृतक के परिजन और समाज के लोग बांगड़ हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठे रहे। उनकी मांग थी कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। आक्रोशित लोगों ने बांगड़ हॉस्पिटल से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन भी किया। धरने के दौरान कई बार दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई। समझौता होने के बाद पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली। धरनास्थल पर सीओ ग्रामीण अमरसिंह रत्नू, सदर थानाप्रभारी कपूराराम मय जाब्ता मौजूद रहे। वहीं विधायक भीमराज भाटी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपुरोहित, कांग्रेस नेता संगीता बेनीवाल, महावीर सिंह सुकरलाई, शिवराम जाट, अमराराम बेनीवाल सहित बड़ी संख्या में जाट समाज के लोग भी मौजूद रहे। फैक्ट्री में लिफ्ट गिरने से हुई थी मौत
रोहट क्षेत्र के काला पीपल की ढाणी निवासी और वर्तमान में महाराणा प्रताप सर्किल के पास रहने वाले भैराराम(52) पुत्र मगाराम जाट पूनायता औद्योगिक क्षेत्र स्थित प्रांजल फैक्ट्री में गेटमैन के रूप में कार्यरत थे। शुक्रवार दोपहर ड्यूटी के दौरान फैक्ट्री में लगी लिफ्ट उनके ऊपर गिर गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बांगड़ हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को मॉर्च्युरी में रखवाकर मामले की जांच शुरू कर दी। तीन बच्चों और बुजुर्ग मां का था सहारा
भैराराम की पत्नी का करीब 6 साल पहले निधन हो चुका है। उनके दो बेटे 12वीं क्लास में पढ़ते हैं, जबकि बेटी अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही है। परिवार में 90 वर्षीय मां झमकूदेवी बच्चों की देखभाल करती हैं। भैराराम की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब तीनों बच्चों की जिम्मेदारी उनकी बुजुर्ग दादी के कंधों पर आ गई है। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद से झमकूदेवी का रो-रोकर बुरा हाल है। यह भी पढ़ें… फैक्ट्री में लिफ्ट गिरने से गेटमैन की मौत: परिजन बोले- मालिकों ने सबूत मिटाने का प्रयास किया; मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे

गरीबों के नाम पर लिए शराब ठेके,मालिकों से होगी वसूली:भास्कर के खुलासे के बाद लाइसेंस की छंटनी शुरू, माफिया की संपत्ति कुर्क होगी

आबकारी विभाग उन शराब लाइसेंस की छंटनी कर रहा है, जिनमें आवेदक गरीब हैं। साथ ही किसी अन्य व्यक्ति और शराब माफिया का मोबाइल नंबर ठेके से लिंक है। भास्कर एप के खुलासे के बाद विभाग ने यह एक्शन लिया है। दरअसल, भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि अलवर में गरीबों के नाम पर शराब ठेके लिए जा रहे हैं। उनके नाम पर करोंड़ों रुपए का जुर्माने का नोटिस आ रहा है। ये पूरा खेल शराब ठेकों के मालिकों और आबकारी के अधिकारियों की मिलिभगत से चल रहा है। नियमों के मुताबिक, जो शराब की दुकान आबकारी विभाग से तय माल (कोटा) नहीं उठाती, उसे 7 दिन के भीतर बंद करना होता है। लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से इन दुकानों को पूरे साल चलने दिया गया। अब आबकारी विभाग ने तय किया है कि दुकानों के लाइसेंस और बैंक खातों में जिनके मोबाइल नंबर हैं, उनसे रिकवरी होगी। अधिकतर केस में मोबाइल नंबर शराब के ठेके चलाने वालों के हैं। अब इनसे रिकवरी हो सकती है। अकेले अलवर में 216 केस में करीब 160 करोड़ रुपए बाकी हैं। पूरे प्रदेश में कई हजार करोड़ की रिकवरी होनी है। आबकारी विभाग ने अब इस लूपहोल को भरने के लिए डिजिटल रास्ता निकाला है। अब मोबाइल नंबर और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़कर असली माफिया की पहचान की जाएगी। रिकवरी सीधे उसी की संपत्ति कुर्क करके की जाएगी। दरअसल, भास्कर एप ने अपनी खबर ‘महिला की इनकम 5 हजार, 2 करोड़ का नोटिस आया:गरीबों के नाम पर करोड़ों के शराब ठेके, माफिया ने धोखे से लिए आधार-अकाउंट नंबर’ में खुलासा किया था कि अलवर समेत पूरे राजस्थान में शराब ठेकेदार गरीबों को 10 से 15 हजार रुपए का लालच देकर लाइसेंस ले रहे हैं। राजस्थान के कई शहरों में शराब माफिया ने आबकारी विभाग को ऐसे ही ठगा है। पूरे राजस्थान में विभाग का ऐसे ठेकेदारों पर करीब 160 करोड़ रुपए बकाया हो गया है। अलवर में ऐसी दुकानों से अकेले वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही विभाग को करीब 50 से 60 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जिसकी रिकवरी आज भी विभाग नहीं कर पाया है। (पूरी खबर पढ़ें) शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए धांधली नियम के अनुसार- गरीबों की दुकान से तय समय में शराब नहीं बिकने पर 7 दिन में इनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाना चाहिए था। इसके बावजूद अलवर के इन पीड़ितों का लाइसेंस साल भर 2024-25 में चालू रखा। मार्च 2025 में इनका लाइसेंस निरस्त किया गया। ऐसे में सीधे तौर पर इन्हें फंसाने वाले शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया।
अलवर में शराब ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से 60 करोड़ का घाटा सूत्रों के अनुसार- शराब ठेकेदार गरीब लोगों के नाम पर ली दुकान पर अपना माल बेचकर कम समय में मोटा मुनाफा कमाते हैं। उनके इस काले कारनामे में आबकारी विभाग के कई अफसरों की मिलीभगत होना भी सामने आया है। सरकार के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए आबकारी अधिकारी ने सालभर (2024-2025) ‘मिलीभगत का खेल’ खेला और डिफॉल्टर शराब दुकानों को समय पर निरस्त करने के बजाय वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन का इंतजार किया। इस पूरे खेल में न केवल राजस्व को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि उन्हीं डिफॉल्टर ठेकेदारों को नए नामों से दोबारा दुकानें भी आवंटित कर दी गई हैं। इसका नतीजा रहा कि अलवर जिला शराब के ठेकों से प्राप्त रेवेन्यू में सबसे पीछे चला गया। 2024-2025 में करीब 50 से 60 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। ये वो दुकानें हैं जिनको गरीबों के नाम आवंटित कराया गया।