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स्वायत्त शासन विभाग:10 कमरों के होटल व 50 सीटर रेस्त्रां के लाइसेंस अब रिन्यू होंगे

स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने प्रदेश के नगर निगम, नगर परिषद और पालिका क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की वार्षिक लाइसेंस फीस से जुड़ा आदेश एक माह में ही बदल दिया है। निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने 24 जून, बुधवार को संशोधित आदेश जारी किया है। इसके तहत अब होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और ब्यूटी पार्लर के लिए नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। दरअसल, इससे पहले 24 मई को जारी आदेश में होटलों (10 कमरों तक, 25 कमरों तक और 26 से 50 कमरों तक) के लाइसेंस रिन्युअल की श्रेणियां तय की गई थीं। इसके साथ ही रेस्टोरेंट के लिए सीधे 100 सीटर की श्रेणी बना दी गई थी, जबकि इसमें 50 सीटर और 51 से 100 सीटर वाले छोटे रेस्टोरेंट की श्रेणी हटा दी गई थी। इस विसंगति के कारण छोटे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने विरोध शुरू कर दिया था। अब नए संशोधित आदेश में कमरों की संख्या के आधार पर लाइसेंस जारी करने की राशि निर्धारित कर दी गई है। भास्कर ने उठाया था मुद्दा :भास्कर ने 26 मई के अंक में खबर प्रकाशित कर नई व्यवस्था से संभावित नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। बताया था कि पुराने आदेश की वजह से उदियापोल, सूरजपोल, रेलवे स्टेशन, गुलाब बाग और ओल्ड सिटी के 150 से 200 छोटे होटल सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे थे। होटल-रेस्टोरेंट की नई श्रेणियां

70 करोड़ का फर्जीवाड़ा:खाद की जगह मिट्टी बेच दी; SIT ने आरोपी माना, CID-CB से क्लीन चिट

कृषि विभाग ने 5 साल में सरकारी टेंडरों के जरिए 70 करोड़ की घटिया खाद खपा डाली। 29 सैंपल फेल हुए तो मामले का खुलासा हुआ। साल 2021 में करधनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच तीन एडिशनल एसपी और एसआईटी ने की। तीनों ने आरोप को सही माना। इसके बाद चौथी बार जांच सीआईडी-सीबी को दी गई। सीआईडी-सीबी ने मामले को सिविल नेचर का बताते हुए 3 जून को क्लीन चिट दे दी। वर्ष 2011 से 2016 के बीच इस फर्म ने कृषि विभाग के टेंडरों में 70 करोड़ की खाद सप्लाई की थी। वर्ष 2013 से 2016 के बीच जब कृषि विभाग ने इस खाद की सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच करवाई, तो 29 नमूने अमानक (फेल) पाए गए। विभाग ने जालसाजी पकड़े जाने पर निर्माता कंपनी, वितरक, विक्रेता और कागजी क्वालिटी कंट्रोलर आनंदी लाल के खिलाफ 14 जिलों की सेशन अदालतों में 29 मुकदमे दर्ज करवा दिए। एफआर में साफ लिखा कि किस आधार पर रिपोर्ट दी
सीआईडी-सीबी के एडिशनल एसपी नानगराम का कहना है कि एफआर देना आईओ की राय है। इसे अफसरों ने सही माना है। कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी गई है। एफआर में साफ है कि किस आधार पर यह रिपोर्ट दी गई है। भास्कर इनसाइट – नौकरी मांगने आए युवक के दस्तावेज पर फर्जी शपथ पत्र झोटवाड़ा निवासी आनंदी ने 2011 में विद्याधर नगर स्थित रॉयल केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया था। कंपनी के हरवेंद्र माथुर, कलीम अहमद और गिर्राज ने शैक्षणिक और निवास संबंधी दस्तावेज रख लिए। आनंदी को नौकरी तो नहीं दी गई, लेकिन उसके नाम से क्वालिटी कंट्रोलर का शपथ पत्र दे दिया। नमूने जांच में फेल होने पर 29 केस दर्ज हुए। तब मामला खुला। फैक्ट्री का कारोबार 20 से 22 करोड़ रुपए तक आरोपी कलीम अहमद ने 14 जून 2025 को पूछताछ में बताया था कि फैक्ट्री का कारोबार 20-22 करोड़ रहा। पूरा माल कोऑपरेटिव एजेंसियों के माध्यम से किसानों को बेचा जाता था। फिलहाल, सेशन कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका लंबित है। इसके बावजूद सीआईडी-सीबी द्वारा मामले में एफआर लगाना सवालों में है। 9 अफसरों ने 5 साल में मामले की जांच की, तीन ने केस ही छोड़ दिया था जांच सीआईडी-सीबी कर चुकी है; कृषि विभाग का इस मामले से कोई संबंध नहीं है : संयुक्त निदेशक इस पूरे मामले की जांच पहले ही सीआईडी-सीबी कर चुकी है। विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह दोनों पक्षों के बीच आपसी विवाद का मामला है, कृषि विभाग का इससे कोई संबंध नहीं है। -विनोद कुमार गेरा, संयुक्त निदेशक (खाद-बीज सप्लाई), कृषि आयुक्तालय, जयपुर

हे भगवान! इन्हें सद्‌बुद्धि दो:किडनी मरीजों का दर्द- हमारी जिंदगी की फाइल एक माह से कमरे में कैद,1-1 दिन कीमती, ट्रांसप्लांट अटका …SMS प्रबंधन ताला क्यों नहीं तोड़ता?

एसएमएस हॉस्पिटल में किडनी के 11 मरीजों की जिंदगी एक कमरे में कैद है। एक माह से इस पर ताला है, जिससे किडनी ट्रांसप्लांट अटका हुआ है। ये वे मरीज हैं, जो 6 माह से हर दूसरे दिन डायलिसिस करवा रहे हैं, इसलिए घर छोड़कर जयपुर में धर्मशालाओं में रह रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सभी को कमेटी से किडनी ट्रांसप्लांट की अप्रूवल मिल चुकी है। पुलिस वेरिफिकेशन हो चुका है, लेकिन सुपर स्पेशियलिटी में नेफ्रोलॉजी यूनिट-2 के हेड के रिटायर होने के बाद से ट्रांसप्लांट अटक गए हैं। जानकारी के अनुसार फाइल मरीज के पास ही रहती है, लेकिन ट्रांसप्लांट से पहले डॉक्टर अपने पास रख लेते हैं। 1 जून से ये फाइलें ताले में हैं।
31 मई को रिटायर्ड; नेम प्लेट लगी है, कमरा लॉक नेफ्रोलॉजी में यूनिट-2 के हैड डॉ. धनंजय अग्रवाल 31 मई 2026 को रिटायर्ड हुए, लेकिन सुपर स्पेशियलिटी में 5वीं मंजिल पर 518 नंबर कमरे पर उनकी नेम प्लेट लगी है और बाहर ताला है। सरकार ने 19 जून को पे-माइनस पेंशन के आधार पर मेडिकल कॉलेज अजमेर में उनकी पुनर्नियुक्ति की है। आरोप है कि फाइलें भी अंदर बंद हैं। कराह सुनो सरकार; किसी की हर दूसरे दिन डायलिसिस, 13 किलो वजन घट गया 40 डायलिसिस हुए, सूजन बढ़ रही है, अब भूख भी नहीं लगती बांसवाड़ा की 48 वर्षीय महिला का हर दूसरे दिन डायलिसिस हो रहा है। 40 हो चुके हैं। परिवार 10 मार्च से धर्मशाला में रह रहा है। पति किडनी देंगे। उनका कहना है कि एनओसी मिल गई, पुलिस वेरिफिकेशन हो चुका है। घर-दुकान सब छोड़कर यहां रह रहे हैं। दर्द; पेशाब कम आता है, भूख नहीं लगती। डायलिसिस ना कराएं तो सूजन आ जाती है। हर महीने ढाई किलो वजन घट रहा, सिरदर्द लगातार बढ़ रहा कोटपूतली के 35 साल के युवक को 8 दिसंबर 2025 को एसएमएस लाया गया। डायलिसिस के चलते यहीं धर्मशाला में रह रहे हैं। किडनी पिता देंगे। सभी प्रक्रिया हो चुकी थी। उनका कहना है कि एचओडी से भी मिल चुके हैं, लेकिन ट्रांसप्लांट पर कोई जवाब नहीं दे रहा। दर्द; बीपी हाई होने पर सिरदर्द-उल्टी होती है। 5 माह में 58 से 45 किलो वजन हो गया। एक्सपर्ट की मानें तो जितने ज्यादा डायलिसिस, किडनी रिजेक्शनके चांस उतने ज्यादा …और जिम्मेदार जवाब के लिए टहला रहे नेफ्रोलॉजी एक्सपर्ट की मानें तो किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस एक पेनफुल प्रॉसीजर हैं। जितना मरीज की डायलिसिस होती है, उतने ही किडनी के लिए रिजेक्शन के चांस बढ़ सकते हैं। हैपेटाइटिस बी और सी फैलता है। डायलिसिस के बाद कमजोरी आने के साथ ही प्रोटीन लॉस होता है। वहीं इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। सुपर स्पेशियलिटी में कमरे पर नेम प्लेट लगी है तो विभागी मामला है। नेफ्रोलॉजी एचओडी डिसाइड करेंगे। -डॉ. नचिकेत व्यास, अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी मरीजों को रेगुलर देख रहे हैं। डायलिसिस भी की जा रही है। इनकी फाइलों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। -डॉ. संजीव शर्मा, यूनिट-2 हैड, नेफ्रोलॉजी, एसएमएस सीधी बात; डॉ. धनंजय अग्रवाल Q. क्या आपने अजमेर जॉइन कर लिया है?
-अभी सोच रहा हूं। Q. मरीजों का कहना है कि SMS में आपके रूम में उनकी फाइलें लॉक है?
-सरकार से बात करें, मेरे लॉक में फाइलें नहीं हैं। (फोन काट दिया।)
एसएमएस प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के मोबाइल पर असिस्टेंट ने कहा- सर बाहर हैं। दूसरी बार बोले- कल शाम तक बात होगी।

तौल-माप नियम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव:रेहड़ी से ज्वैलर्स तक… कम तौला तो 5 लाख तक की पेनल्टी लगेगी

राजस्थान में कम या गलत तौल कर ग्राहकों को चूना लगाना अब महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में संशोधन का मसौदा जारी कर गलत तौल, बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट, कम माल देने, रिकॉर्ड नहीं रखने और बिना रजिस्ट्रेशन कारोबार करने जैसी गड़बड़ियों पर 2 से 5 लाख तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है। पेनल्टी का दायरा बढ़ा संशोधित ड्राफ्ट में रेहड़ी, ठेला और फेरी वालों की श्रेणी में सब्जी, फल, चाट, पकौड़ी, चाय और खिलौने बेचने वाले शामिल किए गए हैं। किराना, जनरल स्टोर, सुपरमार्केट, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, ज्वैलर्स तथा उद्योग, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म, पेट्रोल-डीजल पंप और पेट्रोलियम डिपो भी नियमों के दायरे में रहेंगे। अनियमितता मिलने पर 15 दिन में सुधार कर जवाब देना होगा। वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है- तीसरी गलती पर ठेला वालों पर 2 लाख जुर्माना
गैर-मानक कांटा-बांट या वजन-माप उपकरण इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर तीसरी बार में रेहड़ी-ठेला वालों पर 2 लाख, किराना स्टोर व होटल-रेस्टोरेंट पर 2.5 लाख, बड़ी रिटेल चेन पर 3 लाख और वेटब्रिज संचालकों पर 3.5 लाख तक जुर्माना प्रस्तावित है। ज्वैलर्स, उद्योगों, पेट्रोल पंपों और कंपनियों के लिए यह राशि 5 लाख तक पहुंच सकती है। कांटे-बांट से छेड़छाड़ पर 1 लाख तक जुर्माना
वजन बढ़ाने-घटाने या माप उपकरणों में जानबूझकर छेड़छाड़ करने पर दूसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 1 हजार, किराना स्टोर पर 5 हजार और होटल-ढाबों पर 10 हजार तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं वेटब्रिज संचालकों और ज्वैलर्स के लिए यह पेनल्टी बढ़ाकर 1-1 लाख तक प्रस्तावित की गई है। गलत यूनिट में बिक्री पर 1 लाख रु. तक जुर्माना
किलो, लीटर, मीटर या निर्धारित संख्या के बजाय गलत इकाई में सामान बेचने पर तीसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 50 हजार, किराना स्टोर पर 70 हजार, होटल-ढाबों पर 80 हजार, ज्वैलर्स पर 1 लाख तक जुर्माना। रजिस्ट्रेशन नहीं तो कारोबार पर 3.5 लाख तक जुर्माना, कम तौल पर भी सख्ती राज्य सरकार ने विधिक माप विज्ञान नियम-2011 में बड़े बदलाव का मसौदा जारी किया है। लाइसेंस व्यवस्था खत्म कर रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है। बिना पंजीकरण वजन-माप उपकरण बनाने, मरम्मत या बेचने तथा गलत जानकारी देने पर तीसरी बार में 3.5 लाख रुपए तक जुर्माना लग सकेगा। कम माल देने पर रेहड़ी-ठेला संचालकों से लेकर पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और ज्वैलर्स तक पर 150 रुपए से 20 हजार रुपए तक दंड का प्रावधान किया गया है। बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट मिलने पर 2 हजार से 8 हजार रुपए तक जुर्माना लगेगा। पेट्रोल पंपों पर माप जांच व्यवस्था सख्त होगी और नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपए तक पहुंच सकेगा।

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा:कांग्रेस ने आपातकाल में संविधान को कुचला, देश को जेलखाना बनाकर रख दिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया। लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास के उन घटनाक्रमों को याद रखना बेहद जरूरी है। जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न केवल नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि देश को जेलखाना बना दिया गया था। मुख्यमंत्री गुरुवार को दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान ऑडिटोरियम में संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान देशभर में एक लाख से अधिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और पत्रकारों को बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे, न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई थी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की दुहाई देती है और संविधान को बचाने का पाखंड करती है। लेकिन कांग्रेस ने लोकतंत्र के रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बनने का काम किया। कांग्रेस ने देश में चुनी हुई सरकारों को भंग करने का काम किया। समारोह में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। राठौड़ ने कहा- लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था आपातकाल
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने के साथ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया पर सेंसरशिप जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। घनश्याम तिवाड़ी ने साझा किए अनुभव समारोह में राज्यसभा सांसद व लोकतंत्र सेनानी घनश्याम तिवाड़ी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भूमिगत रहकर कार्य करना पड़ा।

चिकित्सा शिक्षा विभाग:एसओपी में ‘सफेद गाउन’, हकीकत, पीबीएम में जिस साड़ी में घर से आती हैं महिलाएं उसी में कर दिया जाता है ऑपरेशन

चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों के लिए जारी की गई एसओपी पर काम शुरू हो गया है। शुक्रवार तक सभी एचओडी को रिपोर्ट पेश करनी है। पीबीएम अस्पताल की 89 साल पुरानी बिल्डिंग में उसका कितना पालन हो सकेगा, कहना मुश्किल है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी ऑपरेशन थिएटर की एसओपी में स्पष्ट लिखा है कि मरीज को ऑपरेशन थिएटर में भेजने से पहले सफेद गाउन पहनाना जरूरी है, लेकिन भास्कर पड़ताल में सामने आया कि पीबीएम अस्पताल में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। खासकर जनाना विंग की बात करें तो प्रसूताएं जिस हालत में आती हैं, उसी हालत में उन्हें ऑपरेशन थिएटर में लिया जाता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उन्हीं वस्त्रों में बाहर भेजा जाता है, जो प्रसूता घर से पहनकर आई थी। आम तौर पर हरे रंग की एक चद्दर से प्रसूता को ढका जाता है, जिसे सफाईकर्मी वापस ले जाती है। वही चद्दर दूसरी प्रसूता के काम आती है। वार्ड में बेडशीट भी मैली मिलती है। उस पर खून के सूखे हुए दाग-धब्बे नजर आते हैं। ऐसा ही हाल लेबर रूम का है। वहां तो एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं को लेटना पड़ता है। गौरतलब है कि पीबीएम जनाना अस्पताल में डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। कोटा, जोधपुर और नागौर में भी इस प्रकार की घटनाएं होने पर सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लिए एसओपी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में ओटी का प्रोटोकॉल गाइडलाइन के तहत संचालित होता है, जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ के कारण इसकी अनदेखी कर दी जाती है। भास्कर इनसाइट- 90 हजार की ओपीडी, 27 हजार महिलाएं भर्ती हो रहीं पीबीएम अस्पताल की बिल्डिंग 89 साल पुरानी है। जाहिर है जनाना ओटी भी उतना ही पुराना है। इन सालों में मरीजों की संख्या बढ़कर साल में 90 हजार तक पहुंच गई है, लेकिन आधारभूत सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। जनाना में पांच ऑपरेशन थिएटर हैं। रोज औसत 50 महिलाओं के विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन होते हैं, जिनमें 20 मेजर और 30 माइनर सर्जरी होती है। इनमें 30 से 40 का आंकड़ा प्रसव का है। एक साल में करीब 27 हजार महिलाएं भर्ती होती हैं। दस हजार के नॉर्मल और लगभग सात हजार महिलाओं के सिजेरियन डिलीवरी होती हैं। वार्डों में वेंटिलेशन तक नहीं है। जनाना टॉयलेट की सफाई ही नहीं होती। वहां डिब्बा तक नहीं मिलता। महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सा मंत्री और प्रमुख शासन सचिव के दौरे के बाद यह कमियां सामने आईं तो प्रशासन हरकत में आया है। नोडल प्रभारी से लेकर वार्ड इंचार्ज तक को नोटिस जारी प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के दौरे के दौरान पीबीएम अस्पताल में सामने आई खामियों को लेकर अधीक्षक की जमकर खिंचाई की थी। वापस जयपुर लौटते वक्त भी उन्होंने अस्पताल में व्यवस्थाओं को सुधारने की हिदायत दी। राठौड़ के दौरे का असर अब नजर आने लगा है। अधीक्षक ने ताबड़तोड़ नोटिस देने शुरू कर दिए हैं। एमएनडीवाई के नोडल अधिकारी डॉ. संजय लोहड़ा, वार्ड इंचार्ज और सुपरवाइजर से लेकर सफाई ठेकेदार तक को नोटिस जारी किए हैं। व्यवस्थाओं में सुधार करना तो दूर की बात, मीडिया में आ रही खबरों के लिए भी नर्सिंग स्टाफ को दोषी ठहराया जा रहा है। आईसीयू में भर्ती कमला की हालत गंभीर सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से मेडिसिन आईसीयू में भर्ती की गई कमला की हालत गंभीर बनी हुई है। उसके खून की उल्टी हुई है। कमला के 15 दिन के अंतराल में दो बार ऑपरेशन हो चुके हैं। उसे एम्स जैसे उच्च संस्थान में रेफर करने पर विचार किया जा रहा है। उधर, तारा की हालत में काफी सुधार है। उसे एक-दो दिन में छुट्टी दी जा सकती है। चिकित्सा निदेशालय ने एसओपी जारी की है। उसका पालन कराया जाएगा। ऑपरेशन वाले मरीजों के लिए गाउन और अलग से कपड़ों के लिए सरकार से बजट मांगा जाएगा। -डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल

हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र:हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र, मेडिकल आईसीयू पर घटेगा दबाव, गंभीर हृदय रोगियों की होगी विशेष निगरानी

आरबीएम अस्पताल में कार्डियक आईसीयू अलग से खोला जाएगा, जहां हार्ट मरीजों को अलग से उपचार केन्द्र मिलेगा। इससे मेडिकल आईसीयू पर दबाव घटेगा और गंभीर हृदय रोगियों की विशेष निगरानी में इलाज हो सकेगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अस्पताल की सी ब्लाक की नई बिल्डिंग में हृदय रोगियों के लिए फस्ट फ्लोर पर हृदय रोग विभाग है। जहां रूम नंबर 117 में कार्डियोलॉजी ओपीडी है, उसके पास रूम नंबर 116 में 2डी ईको की और रूम नंबर 118 में टीएमटी की जांच तथा रूम 119 में ईसीजी की जांच की सुविधा है। इसके सामने होल्टर जांच शुरू की गई है। आईसीयू में मरीजों को मिलेंगी ये सुविधाएं गंभीर हृदय रोगियों की 24 घंटे विशेष निगरानी हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और अनियमित धड़कन वाले मरीजों का उपचार लगातार ईसीजी, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर की मॉनिटरिंग कार्डियोलॉजिस्ट व प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में इलाज आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सुविधा कैथ लैब शुरू होने के बाद हृदय संबंधी उन्नत उपचार की बेहतर व्यवस्था कार्डियक आईसीयू से मरीजों को होंगे ये फायदे – हार्ट मरीजों को मेडिकल आईसीयू पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
– गंभीर हृदय रोगियों को अलग और विशेषज्ञ उपचार मिलेगा।
– मेडिकल आईसीयू पर मरीजों का दबाव कम होगा।
– इलाज के दौरान संक्रमण और जटिलताओं के जोखिम में कमी आएगी।
– मरीजों की निगरानी और उपचार की गुणवत्ता बेहतर होगी।
– कैथ लैब शुरू होने पर एक ही स्थान पर समग्र हृदय उपचार उपलब्ध होगा। कार्डियक आईसीयू जल्दी ही शुरू किया जा रहा है, जिसके शुरू होने से गंभीर हृदय रोगियों को विशेषज्ञ निगरानी और बेहतर उपचार सुविधा मिलेगी। इससे मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध होगा और मेडिकल आईसीयू पर भी दबाव कम होगा। आगामी समय में कैथ लैब शुरू होने से हृदय रोग उपचार सेवाएं और मजबूत होंगी। – डॉ. विवेक भारद्वाज, प्रिंसिपल, एसजेपी मेडिकल कॉलेज, भरतपुर रूम नंबर 144 में का​र्डियक आईसीयू 7 बैड का शुरू करने जा रहे हैं, जिसे जल्दी ही शुरू किया जाएगा। इसके पास ही रूम 145 में 10 बैड का वार्ड होगा, जबकि 139 से 143 तक कैथ लैब का एरिया होगा और उसे मशीन आने के बाद शुरू किया जाएगा। -डॉ नगेंद्र भदौरिया, पीएमओ

अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस विशेष:कभी शराब ने तबाह की जिंदगी, अब 1500 से ज्यादा युवाओं को नशे की गिरफ्त से निकाला

कभी शराब की लत ने उन्हें परिवार, समाज और खुद की नजरों में गिरा दिया था। जॉन्डिस और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे नरपत सिंह चौहान के सामने जिंदगी और मौत का सवाल खड़ा था। लेकिन भतीजी के एक मासूम सवाल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज वही नरपत सिंह न केवल खुद नशे से मुक्त हैं, बल्कि अपने आरोग्य सेवा संस्थान उदयपुर के माध्यम से 1500 से अधिक लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाल चुके हैं। 26 जून अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस पर उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति को अंधेरे से उजाले की ओर ले जा सकता है। बदलाव की तीन कहानियां, जो उम्मीद जगाती हैं नरपत सिंह बताते हैं कि नशे से बाहर निकलने के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया। उनके संस्थान से जुड़ी कई कहानियां आज बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं और लोगों को नई दिशा दे रही हैं। भतीजी के एक सवाल ने बदल दी जिंदगी नरपत सिंह बताते हैं कि तीन माह की उम्र में पिता का साया उठ गया था। युवावस्था में तनाव दूर करने के लिए शुरू हुई शराब की आदत धीरे-धीरे गंभीर लत बन गई। जॉन्डिस और लिवर संबंधी बीमारियों के बीच नशामुक्ति केंद्र में उपचार के दौरान भतीजी के सवाल-“काकू, तुम शराब क्यों पीते हो?”-ने उन्हें झकझोर दिया। इसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए नशा छोड़ने का संकल्प लिया।

पंजाब में 3 ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी:मौके पर नहीं भरा जा सकेगा चालान, कोर्ट जाना होगा, जेल भी हो सकती है

पंजाब में सड़क पर रैश ड्राइविंग, ड्रिंक एंड ड्राइव और अंडरएज ड्राइविंग पर सरकार ने सख्ती करनी शुरू कर दी। पंजाब सरकार ने ट्रैफिक नियम तोड़ने के इन तीन मामलों को नॉन कंपाउंडेबल कैटेगरी में शामिल कर दिया है। इन कैटेगरी में अगर अब आपका चालान होता है तो उसका भुगतान न तो आप मौके पर कर सकेंगे और न ही RTO दफ्तर में जाकर चालान का भुगतान होगा। इन मामलों में फंसे लोगों को कोर्ट के चक्कर काटने होंगे और मजिस्ट्रेट के सामने ही चालान का फैसला होगा। खास बात यह है कि कोर्ट में चालान की सुनवाई के दौरान अगर मामला ज्यादा गंभीर हुआ तो कोर्ट ड्राइवर को एक्ट के अनुसार कानूनी सजा भी सुना सकता है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की हरी झंडी के बाद ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सचिव वरुण रूजम (IAS) ने इस आदेश को पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सचिव ने अपने आदेशों में कहा है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद के ऐसे चालानों का फैसला पुलिस और आरटीओ अपने स्तर पर न करवाएं। सरकार ने यह नोटिफिकेशन 17 जून को जारी किया और अब आरटीओ व पुलिस को भेजा है। इन 3 मामलों पर पहले क्या व्यवस्था थी और अब क्या हुआ है, पढ़िए… सरकार को क्यों लेना पड़ा यह बेहद सख्त फैसला, जानिए.. किन-किन धाराओं के तहत बदला नियम; कितनी होगी सजा, जानिए…

90 करोड़ का श्मशान घाट, ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया:अंतिम संस्कार में लगेंगे 5 हजार, पटना-मुंगेर में 1 रुपए में मिलेगी 17 एकड़ जमीन

पटना में अब अंतिम संस्कार के लिए VVIP व्यवस्था शुरू हो गई है। गंगा किनारे स्थित बांस घाट श्मशान को अत्याधुनिक बना दिया गया है। यहां एक साथ 18 शवों को जलाने की व्यवस्था है। अंतिम यात्रा में आए लोगों के बैठने के लिए 2 AC वेटिंग हॉल हैं। 90 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किए गए श्मशान को सरकार ने संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया है। हालांकि यहां अंतिम संस्कार फ्री में नहीं होगा। इसके लिए 3500 से 5000 रुपए तक खर्च करने होंगे। जबकि दीघा, गुलबी और खाजकला के सरकारी घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए 300 रुपए की रसीद कटती है। यही नहीं, इस संस्था को बिहार सरकार पटना के दीघा और मुंगेर के तारापुर में 1-1 रुपए की लीज पर 17 एकड़ जमीन देने जा रही है। बांस घाट श्मशान क्यों खास है? यहां क्या सुविधाएं दी जा रही हैं? पटना के दीघा श्मशान में क्या होगा? मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को क्यों 15 एकड़ जमीन मिलने वाली है? पढ़िए रिपोर्ट..। 4.5 एकड़ में फैले श्मशान में एक साथ जलेंगी 18 चिताएं पटना का बांसघाट श्मशान 4.5 एकड़ में फैला है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इसे 89.40 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया है। यहां पहले मौजूद श्मशान 1.24 एकड़ में फैला था। यहां एक साथ 18 चिताएं जलाने की व्यवस्था की गई है। शव जलाने के लिए हैं ये तीन तरह की व्यवस्थाएं… इलेक्ट्रिक शवदाह गृह: शव जलाने के लिए चार इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं। इसमें 15 से 20 मिनट में शव जलकर राख हो जाता है। ये लकड़ी के मुकाबले 90 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं। वुड क्रीमेसन ओवन: 6 वुड क्रीमेसन ओवन हैं। इसे बिहार की कंपनी ने तैयार किया हैं। इसमें शव जलाने में कम लकड़ी लगती है। शव 20-25 मिनट में राख हो जाता है। धुंए को बाहर निकालने के लिए चिमनी लगाई गई है। पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल: 8 पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल भी हैं। यहां शव को पारंपरिक तरीके से चिता पर रखकर जलाया जाता है। शव जलाने में खर्च होंगे 5 हजार रुपए श्मशान में शव जलाने की न्यूनतम फीस 3500 रुपए है। डोम, पंडित और दूसरे खर्च जोड़ दें तो यह कम से कम 5000 रुपए तक पहुंच जाता है। अगर शव को लकड़ी से जलाना है तो अलग से लकड़ी खरीदनी होगी। यह श्मशान परिसर में मिल जाएगी। शवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां मोर्चरी रूम है। इसमें मोर्चरी फ्रीजर की व्यवस्था की गई है। वहीं, बच्चों के शव के लिए भी एक अलग से 30/30 का एरिया डेवलप किया जा रहा है, ताकि लोग गंगा में जाकर शव को प्रवाहित न करें। अंतिम संस्कार की सामग्री के लिए हैं चार दुकान श्मशान घाट में द्वार से अंदर इंटर करते ही बाएं साइड में 4 दुकानें बनाई गई हैं। यहां कपड़ा, डीप गप्स क्लोथ, लेस गप्स क्लोथ, एकरंगा क्लोथ, राम नाम पट्टी, धोती, घी, चंदन की लकड़ी, देवदार, अगरबत्ती, कपूर, गुलाब जल, पंचमेवा, साड़ी, चूना, माचिस, जौ, हवन सामग्री सहित अन्य जरूरी सामान मिल जाएंगे। 42 फीट ऊंचे हैं मोक्ष और बैकुंठ द्वार आकर्षण का मुख्य केंद्र श्मशान घाट के दो द्वार हैं। इसमें से एक मोक्ष द्वार और दूसरा बैकुंठ द्वार है। दोनों की ऊंचाई 42 फीट है। एक एंट्री और दूसरा निकास पॉइंट है। दोनों द्वार में कांसे से बना ओम चिन्ह स्थापित किया गया है। इन्हें जालंधर के कारीगर ने तैयार किया है। अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए बनाए गए तालाब अस्थियों को विसर्जित करने और स्नान करने के लिए दो तालाब बनाए गए हैं। इनमें दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के माध्यम से सीधे गंगा नदी के पानी लाया जाता है। इससे गंगा भी प्रदूषित नहीं होती और लोग गंगा में अस्थी विसर्जन भी कर पाते हैं। एक तालाब 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर का है। पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं। दो तालाबों के बीच शिव की प्रतिमा स्थापित दो तालाबों के बीच 12 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा को तमिलनाडु के आदियोगी के तर्ज पर तैयार किया गया है। इसे बनाने के लिए जालंधर से कारीगर आए थे। इसे फाइबर मटेरियल से बनाया गया है। इस 15 फीट ऊंचे त्रिशूल के साथ स्थापित प्रतिमा में शिव की जटाओं से गंगा निकलती दिखाई देंगी और साथ ही आसपास लाइटिंग भी की गई है। वहीं, आगे की तरफ रास्तों पर ग्रीन एरिया को डेवलप गया है। श्मशान घाट की दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग इस श्मशान घाट के दीवारों पर पेंटिंग बनाई गई है, जहां इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक की जीवन यात्रा और कर्मों के आधार पर स्वर्ग-नरक के मार्ग को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। वहीं, शांति मिलने के लिए स्लोगन को भी लिखा गया है। इसके अलावा राजा हरिश्चंद्र की तस्वीर के साथ उनकी कहानी को उकेरी गई है। राजा हरिश्चंद्र की कहानी यहां आए शोकाकुल लोगों को किसी भी परिस्थिति में सच्चाई और कर्तव्यों के पालन के लिए प्रेरित करेगी। चहारदीवारी में ओम लिखे आकर्षक स्टील फ्रेम लगाये जा रहे इस पूरे परिसर के पीछे वाले एरिया में जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का इलाका है, जहां से रोज हजारों की संख्या में गाड़ियां गुजरती है। जलते शव खुले में दिखायी नहीं दे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। परिसर की दीवारों पर त्रिशूल बना आकर्षक फ्रेम लगाए गए हैं, जिसे मोक्ष धाम और वैकुंठ धाम नाम दिया गया है। यह एक HPL (हाई प्रेशर लैमिनेट) शीट है। इस व्यू कटर को गुजरात से मंगाया गया है। वेबसाइट पर ऑनलाइन स्लॉट कर सकते बुक शवदाह गृह में ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा होगी। इससे परिजनों को लंबी कतारों और अफरातफरी से मुक्ति मिलेगी। लोग इसके लिए स्लॉट भी बुक कर सकते हैं। इसके लिए पटना नगर निगम के वेबसाइट पर जाकर टिकट आईडी जेनरेट करना होगा। व्हाट्सएप चैटबोट 9264447449 के माध्यम से भी बुकिंग कर सकते हैं। वहीं, पिकअप सर्विस के लिए मुक्ति रथ भी बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। हेल्प डेस्क की टीम लोगों को रजिस्टर करने में मदद भी करेगी। हालांकि, अभी तक दाह संस्कार की तरह तय नहीं की गई है। बिहार में बनाए जा रहे 40 अत्याधुनिक शवदाह गृह बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं। इसमें से 20 शवदाह गृह का निर्माण पूरा हो चुका है। उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में आधुनिक शवदाह गृहों का निर्माण हो चुका है। इन तैयार किए गए 20 शवदाह गृहों के सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है, जिसके बाद इन्हें जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। ये शवदाह गृह में इलेक्ट्रिकल और पारंपरिक दोनों प्रकार की सुविधा उपलब्ध होगी। पटना के दीघा में बनेगा बिहार का पहला LPG बेस्ड शवदाह गृह पटना के दीघा में बिहार का पहला LPG गैस आधारित शवदाह गृह बनेगा। पटना नगर निगम और ईशा फाउंडेशन के ईशा आउटरीच के बीच इस परियोजना को लेकर कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट पर साइन किया गया है। बिहार सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 2.11 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपए में 33 साल के लिए लीज पर दी है। यहां 4 एलपीजी फर्नेस लगाए जाएंगे। मेयर सीता साहू ने कहा कि एलपीजी आधारित शवदाह गृह आज के समय की जरूरत है। इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रारंभिक विधियों के बाद एलपीजी आधारित दाह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके साथ ही, पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में लकड़ी का भी उपयोग किया जाएगा। मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को 1 रुपए में मिलेगी 15.01 एकड़ जमीन सम्राट सरकार मुंगेर के तारापुर में ईशा फाउंडेशन को 1 रुपए में 99 साल के लिए 15.01 एकड़ जमीन लीज पर देगी। तारापुर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का क्षेत्र है। वह तारापुर के विधायक हैं। ईशा फाउंडेशन को जमीन सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए मिलेगी।