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बिहार के पैसे से मालामाल हो रहे दक्षिण के राज्य?:बैंकों ने भेजे ₹2.44 लाख करोड़, ज्यादा से ज्यादा पैसा बिहारियों को क्यों देना चाह रही सरकार

23 जून को बिहार के बैंकों ने नया सीडी रेशियो (कर्ज-जमा अनुपात) जारी कर दिया। बिहार का सीडी रेशियो 60.21% हो गया है। मतलब साफ है कि बिहार में जमा राशि का 60% लोन ही बिहार के लोगों को दिया जा रहा है। बाकी के 40% रुपए को दक्षिण भारत के राज्यों में भेज दिया जा रहा है। बैंकों की इस रिपोर्ट पर सरकार भड़क गई और तुरंत ज्यादा से ज्यादा बिहारियों को कर्ज देने का आदेश दिया। सम्राट सरकार ज्यादा से ज्यादा बिहारियों को कर्ज क्यों देना चाह रही है, क्या बिहार के पैसे से साउथ के राज्य हो रहे मालामाल, समझेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… सवाल-1ः बिहार सरकार बैंकों को बिहारियों को ज्यादा कर्ज देने की हिदायत क्यों दे रही? जवाबः 23 जून को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में डिप्टी CM और वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा- ‘बैंकों ने लोन देने के मामले में अपना परफॉर्मेंस 6 महीने के अंदर नहीं सुधारा तो उनकी शाखाओं से सरकार की जमा राशि वापस निकाल ली जाएगी। साथ ही उन्हें दी सुरक्षा भी विड्रॉ कर लिया जाएगा।’ उन्होंने बैंकों को चेतावनी दी कि जिनका सीडी रेशियो यानी कर्ज देने का अनुपात 50 प्रतिशत से कम होगा, उसमें सरकार अपना पैसा नहीं जमा करेगी। डिप्टी CM ने यह हिदायत तब दी जब बैठक में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार का सीडी रेशियो यानी कर्ज-जमा अनुपात 2025-26 में 60.21% है। इसका मतलब है कि बिहार के बैंकों में अगर 100 जमा हुए तो उसमें से केवल 60.21 रुपए ही लोन के रूप में स्थानीय लोगों या उद्योगों को दिए गए। मतलब 40 रुपए बैंकों ने बिहार के बाहर भेज दिए। अब इसे आंकड़ों से समझिए… 31 मार्च 2026 के अंत तक बिहार की बैंक शाखाओं में 6 लाख 15 हजार 428 करोड़ रुपये जमा थे। इसमें से लोन के तौर पर 3 लाख 70 हजार 563 करोड़ रुपए दिए गए। इनमें लगभग 17 हजार करोड़ रुपए वे भी शामिल हैं, जो या तो नाबार्ड की ओर से रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत बिहार सरकार को दिए गए या दूसरे राज्यों के बैंकों ने बिहार में निवेश के लिए दिए। मतलब कि बैंकों ने बिहारियों के जमा किए पैसों में से 2 लाख 44 हजार 865 करोड़ रुपए दूसरे राज्यों में भेज दिए हैं। अगर बिहार का पैसा, बिहार में रहता तब 3 फायदे होते सवाल-2: …तो क्या UP-बिहार के पैसे से दक्षिण और गुजरात-महाराष्ट्र का विकास हो रहा है? जवाबः तकनीकी और वित्तीय रूप से, हां। बैंकिंग प्रणाली के काम करने के तरीके के आधार पर इसे समझा जा सकता है। फंड का ट्रांसफर: बैंकों के पास जो पैसा जमा होता है, वह एक केंद्रीय पूल में जाता है। चूंकि तमिलनाडु (126%), तेलंगाना (128%), और आंध्र प्रदेश (155%) का सीडी रेशियो 100% से कहीं अधिक है, इसका सीधा मतलब है कि इन राज्यों के बैंकों ने वहां जमा राशि से ज्यादा लोन बांट रखा है। और यह पैसा कम सीडी रेशियो वाले राज्यों UP-बिहार और झारखंड के हो सकते हैं। जिन राज्यों (जैसे बिहार) में जमा राशि ज्यादा है और लोन कम उठ रहा है, बैंक उस ‘अतिरिक्त पैसे’ को उन राज्यों में ट्रांसफर कर देते हैं जहां लोन की मांग बहुत ज्यादा है (जैसे दक्षिण भारत के औद्योगिक राज्य)। औद्योगिक राज्यों को फायदा: तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य अत्यधिक औद्योगिक हैं। वहां बड़े-बड़े कॉर्पोरेट, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और विनिर्माण इकाइयां हैं, जो हजारों करोड़ रुपये का लोन लेती हैं। परिणाम यह होता है कि बिहार के छोटे जमाकर्ताओं के पैसे से दक्षिण और पश्चिम भारत के बड़े उद्योगों को लोन मिलता है। इससे उन राज्यों का विकास तेजी से होता है और बिहार सिर्फ एक “डिपॉजिट सेंटर” बनकर रह जाता है। आर्थिक प्रभाव: इस व्यवस्था के कारण बिहार के जमाकर्ताओं के पैसे का इस्तेमाल दक्षिण भारत के राज्यों में उद्योगों, इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार को लोन देने के लिए किया जाता है, जिससे वहां रोजगार और विकास को गति मिलती है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया था। उन्होंने यही आरोप लगाया था कि राज्य के लोगों का पैसा राज्य के लोगों को रोजगार या दूसरे काम के लिए नहीं मिल पाता है, लेकिन उसी पैसे से दूसरे राज्य में लोन बांटा जाता है। इससे बिहार पिछड़ रहा है। बिहार में सीडी रेशियो बढ़ाया जाए रिटायर्ड बैंक अधिकारी राजीव कुमार दास कहते हैं, ‘बिहार में सीडी रेशियो बढ़ाया जाना चाहिए। परंतु इसके लिए यहां निवेश योग्य परियोजनाओं की संख्या और आकार भी बढ़नी चाहिए। बड़ी परियोजनाओं के लिए कॉरपोरेट स्तर पर फाइनेंसिंग की रणनीति तय होती है। दक्षिण भारत के राज्य इसी में बाजी मार ले जाते हैं। बैंकों को 3% कैश रिजर्व रेशियो और 18% एसएलआर के तौर पर रखना होता है। इन सबके बाद बची हुई राशि ट्रेजरी ऑक्शन के तौर पर एक बैंक दूसरे बैंक को देते हैं। इसके जरिए राशि पाने वाले बैंक अपनी मर्जी से फाइनेंस करते हैं।’ सवाल-3: बिहार के लोगों को बैंक लोन क्यों नहीं देते? जवाबः बैंकों के लोन नहीं देने के 3 बड़े कारण हैं… लोन डूबने का खतराः बैंकों का मानना है कि बिहार में लोन रिकवरी (ऋण वापसी) की दर खराब है। RBI और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार में कृषि और MSME सेक्टर में NPA (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) की दर 7.57% से 7.72% के बीच है। जो राष्ट्रीय औसत 2.15% से 2.8% से करीब 3 गुना अधिक है। इस कारण बैंक लोन देने से कतराते हैं। औद्योगिक पिछड़ेपन और बड़े उद्योगों की कमी: लोन की सबसे ज्यादा मांग बड़े उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से आती है। बिहार में बड़े उद्योगों की कमी के कारण ‘क्रेडिट अवशोषण क्षमता’ कम है। दस्तावेज और कोलेटरल (जमानत) की कमी: बिहार में एक बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है। बैंकों की ओर से मांगे जाने वाले दस्तावेज (जैसे आईटीआर, पक्का लैंड टाइटल) न होने के कारण लोन रिजेक्ट हो जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोगों का कोई क्रेडिट इतिहास नहीं होता, जिससे बैंक उन्हें लोन देने में कतराते हैं। जमीन के दस्तावेजों का विवाद: बिहार में लोन के बदले बंधक रखने के लिए जमीन के कागजात अक्सर स्पष्ट नहीं होते हैं। दाखिल-खारिज और म्यूटेशन की समस्याओं के कारण बैंक लोन रिजेक्ट कर देते हैं। जागरूकता का अभाव: आम लोगों में बैंकों की लोन प्रक्रियाओं और सरकारी योजनाओं (जैसे मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया) की सही जानकारी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने की समझ की कमी होती है। सवाल-4: सरकार कितना सीडी रेशियो बेहतर मानती है? जवाबः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के मुताबिक, किसी भी राज्य या क्षेत्र के लिए 60% या उससे अधिक का सीडी रेशियो एक स्वस्थ या न्यूनतम स्वीकार्य स्तर माना जाता है। आदर्श स्थिति: आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, आदर्श सीडी रेशियो 70% से 80% के बीच होना चाहिए। 60% से कम: यह दर्शाता है कि बैंक स्थानीय स्तर पर ऋण देने में रुचि नहीं ले रहे हैं या वहां आर्थिक गतिविधियां सुस्त हैं। डॉ. डी. सुभाष राव समिति ने सिफारिश की थी कि जिन राज्यों का सीडी रेशियो 60% से कम है, वहां बैंकों को विशेष जिला स्तरीय योजनाएं बनाकर लोन बढ़ाना चाहिए। 100% से अधिक: यह अत्यधिक आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है, लेकिन बैंकों के लिए यह जोखिम भरा भी हो सकता है क्योंकि वे अपनी जमा पूंजी से अधिक लोन दे रहे होते हैं (इसके लिए वे बाहरी फंड या आरबीआई से रीफाइनेंस पर निर्भर होते हैं)। सवाल-5: क्या विकास का पैमाना ज्यादा लोन लेना ही है? लोन राज्य के विकास को कैसे प्रभावित करते हैं? जवाबः केवल लोन लेना ही विकास का एकमात्र पैमाना नहीं है, लेकिन आधुनिक अर्थव्यवस्था में बिना लोन के तीव्र विकास असंभव है। लोन (क्रेडिट) को किसी भी अर्थव्यवस्था की “लाइफलाइन” कहा जाता है। यह राज्य के विकास को इस तरह प्रभावित करता है… पूंजी निर्माण: जब उद्योगों, स्टार्टअप्स और किसानों को लोन मिलता है, तो वे नई फैक्ट्रियां लगाते हैं, तकनीक खरीदते हैं और उत्पादन बढ़ाते हैं। इससे राज्य की GSDP बढ़ती है। रोजगार के अवसर: लोन के जरिए जब नए व्यवसाय शुरू होते हैं या पुराने व्यवसायों का विस्तार होता है, तो स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होता है। क्रय शक्ति में वृद्धि: रिटेल लोन (जैसे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन) से लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे बाजार में मांग पैदा होती है और अर्थव्यवस्था चक्र गतिशील रहता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास: निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों को मिलने वाले लोन से सड़कें, बिजली घर, और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे तैयार होते हैं, जो दीर्घकालिक विकास की नींव रखते हैं।

रिपोर्टर ने एनकाउंटर का क्राइम सीन रिक्रिएट किया:भरत तिवारी ने पिस्टल फेंकी, थानेदार ने धक्का मारा, STF ने 30 सेकेंड में मारीं 3 गोलियां

“दाहिना हाथ कंधे पर रखा। बाएं हाथ से सीना ठोकने लगा। बोला- बहुत अच्छा..तुम पढ़े लिखे हो, इसलिए मुझे विश्वास था ऐसा ही करोगे। चलो हमारे साथ..। 10 कदम ऐसे ही आगे बढ़ा, अचानक अपनी कमर से तेज धक्का मारकर गिरा दिया। जमीन पर गिरते ही 30 सेकेंड में 3 गोलियां मार दीं। पहली गोली लगते ही भरत बोला- धोखा देकर गोली मार दी..। इसके बाद पुलिस की गाड़ियां भरत को लेकर चली गईं। फिर हमारा भरत लौटकर नहीं आया..। पुलिस वालों ने उसका मर्डर कर दिया..।” यह खुलासा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में हुआ है। हमारी पड़ताल के दौरान भरत के करीबी दोस्त राजू ने एनकाउंटर की पूरी कहानी बताई। हमारी टीम भरत के दोस्त राजू और भाई पप्पू को मुठभेड़ वाली जगह पर लेकर पहुंची। हमने दोनों के साथ उस दिन हुए एनकाउंटर का पूरा सीन रिएक्रिएट किया। 17 जून को सुबह 9.32 बजे जब पुलिस ने भरत को गोली मारी थी तो ये दोनों वहां से 20 मीटर दूर खड़े थे। एनकाउंटर वाले दिन क्या-क्या हुआ? भरत ने पिस्टल किसके कहने पर फेंकी? उस पर किसने गोलियां चलाईं? भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए सभी सवालों के जवाब… भरत के भाई के साथ रिपोर्टर ने सीन रिक्रिएट किया भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पटना से 120 किलोमीटर दूर भोजपुर (आरा) के बेलौटी गांव पहुंची। सुबह के करीब 10 बजे थे। हमें जानकारी मिली थी की एनकाउंटर वाले दिन भरत के दोस्त राजू और भाई पप्पू ने सबसे नजदीक से पूरी घटना को देखा था। हम उन दोनों से मिले। उस दिन क्या हुआ था इसे लेकर हमारी उनसे बात हुई। इसके बाद हम दोनों को लेकर एनकाउंटर वाली जगह पर पहुंचे। हमने दोनों के साथ 17 जून को हुई मुठभेड़ का पूरा सीन रिएक्रिएट किया। हम भरत तिवारी के घर से लगभग 2 किलोमीटर दूर एनकाउंटर वाले स्पॉट पर खड़े थे। आसपास खेत थे। पास ही ईंटें पड़ी थीं। जिस कच्ची सड़क पर हम खड़े थे वो उबड़-खाबड़ थी। भरत के भाई पप्पू के साथ हम एनकाउंटर वाली जगह पर खड़े थे। पप्पू ठीक उस जगह खड़ा था, जहां 17 जून को भरत खड़ा था। हम उसके ठीक सामने थे। पप्पू ने बताया कि 17 जून को वो यहां से करीब 20 मीटर दूर खेत में बनी झोपड़ी के पास खड़ा था। यहां से थोड़ी दूर पर चंदन और उसका भाई था। पुलिस ने आसपास का इलाका पहले ही खाली करवा दिया था, ताकी कोई घटना का वीडियो ना बना पाए। पुलिस पूरी प्लानिंग के साथ तैयार थी। उसने स्पॉट दिखाते हुए कहा कि भरत ने इसी जगह पिस्टल फेंकी थी। जिसे एक पुलिस वाले ने उठाया लिया। इसके बाद पुलिस की गाड़ी के पास खड़ी STF ने उसपर गोलियां चला दीं। पुलिस ने 3 गोली मारी तो लगा सब खत्म हो गया पप्पू ने बताया कि सुबह जब भरत घर से निकला तो मैं भी खेत की तरफ गया था। कुछ देर बाद मैं ईंट के पास आकर खड़े हो गया। घटना के समय उस दिन मैं यहीं खड़ा था, जो लाल रंग का घर आपको दिख रहा है, उसके पास ही नीले वाले घर के सामने और लोग खड़े थे। मेरे साथ चंदन और उनके भाई भी थे। चंदन मुझसे आगे चला गया। उसने इशारा करते हुए बताया कि उसी दौरान भरत की मां और बहन इस रास्ते से दौड़ते हुए इधर आ रही थीं। पहले से यहां महिला पुलिस भी खड़ी थीं। वो भरत की मां और बहन को यहां से मारकर भगाने लगीं। दोनों को मारपीट कर वहां से भगा दिया गया। जिनके लिए भरत लड़ाई लड़ रहे थे, उन्हें जबरन घर से भगा दिया गया। पुलिस ने ऐसा धमकाया कि लोग घर छोड़कर भाग गए। हम लोगों को भी यहां से भगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन थोड़ा पीछे जाकर हम वापस आ गए। हम लोग उधर नहीं जा पाए और यहीं रुक गए। इसके बाद पुलिस उन्हें पकड़कर आगे ले गई। तभी हमने लगातार तीन गोलियों की आवाज सुनीं। पप्पू ने आगे बताया कि गोली की आवाज सुनते ही लगा अब सब खत्म हो गया। हमको लग गया कि भरत को मार डाला गया। उस समय सभी अलग-अलग बातें कह रहे थे। कोई कह रहा था कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है, तो कोई कह रहा था कि मार दिया गया। गोली की आवाज आई तो सभी पुलिस वाले भरत को घेरकर खड़े हुए थे। फिर एक गाड़ी आगे आई, उसमें उठाकर लादा जाने लगा। और देखते ही देखते भरत को लेकर पुलिस वाले लेकर चले गए। सबसे नजदीकी रास्ते से अस्पताल जल्दी पहुंचा जा सकता था, लेकिन उन्होंने लंबे रूट को चुना। उन लोगों ने इसलिए ऐसा किए ताकि उनका इलाज समय से नहीं हो पाए। 10 मिनट के रास्ते में 20 से 25 मिनट का समय लगाया गया। घटना के बाद पूरा माहौल शांत हो गया, किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि भरत अब लौटकर नहीं आएगा। हम लोगों की आंखों के सामने ही पुलिस वालों ने धोखे से भरत की जान ले ली। पप्पू से बातचीत के बाद हम भरत के करीबी दोस्त राजू से मिले। वो एनकाउंटर वाली जगह से थोड़ी दूर पर हमारे साथ खड़ा था। आसपास के घरों की ओर इशारा करते हुए बताया कि यहां सब जगह STF के जवान घुसे हुए थे। भरत जब पुलिस के कहने पर वहां गया तो उसके बहकावे में लेकर पिस्टल फिंकवाई गई। झूठा वादा किया गया कि हम तुम्हारी मांग मान लेंगे। मैं वहां से करीब 20 मीटर दूर खड़ा था। उसने इशारों से बताया कि भरत ने जैसे ही पिस्टल फेंकी। थानेदार आया उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, बहुत अच्छा। तुम अच्छे लड़के हो। करीब 10 मीटर आगे जाने के बाद थानेदार ने कमर से धक्का देकर उसे गिरा दिया। इसके बाद 30 सेकेंड में भरत के 3 गोलियां मारी गईं। रिपोर्टर – आप भरत के काफी करीबी रहे हैं, हर समय साथ रहते थे?
राजू – जी शुरू से लेकर गोली लगने तक मैंने साथ नहीं छोड़ा, बागेश्वर धाम तक साथ गया था। रिपोर्टर – एनकाउंटर की स्थिति बनी कैसे?
राजू – एनकाउंटर नहीं, उन लोगों का प्लान ही था मार देने का। रिपोर्टर – क्या हुआ था बताइए?
राजू – एक दिन पहले STF के जवानों ने इलाकों को घेर लिया था। रिपोर्टर – एक दिन पहले क्यों घेर लिया?
राजू – प्लान था, इसलिए यहां हर एक घर में वह छिपे हुए थे। रिपोर्टर – इसके पीछे भरत को मार देने की पूरी प्लानिंग थी?
राजू – घटना के दिन सबने घेर रखा था, माइक से ऐलान किया जाने लगा। रिपोर्टर – माइक पर क्या बोल रहे थे, आप लोगों ने सुना?
राजू – भगा रहे थे, लेकिन मैं 20 मीटर की दूरी से सब देख सुन रहा था। रिपोर्टर – क्या बोल रहे थे, भरत के लिए संदेश था क्या?
राजू – हां, बोल रहे थे, आत्मसमर्पण कर दो, कुछ नहीं होगा। रिपोर्टर – अचानक फायरिंग कैसे होने लगी?
राजू – पुलिस वाले फायरिंग करने लगे तो भरत ने भी एक हवाई फायरिंग की। भरत को मारने में SDPO ने की थी बड़ी साजिश राजू ने बताया पूरी प्लानिंग SDPO की थी। वह मौके पर पहुंचा और भरत को अपने जाल में फंसा लिया। उसने पहले से प्लानिंग कर रखी थी। उसने पहले कॉल किया फिर भरत को अपनी बातों में फंसाया। रिपोर्टर – उसने भरत को कैसे फंसा लिया?
राजू – SDPO पहुंचा और आश्वासन दिया कि मांगें पूरी की जाएंगी। ऐसे और कई दावे करने लगा। रिपोर्टर – किस आधार पर दावा कर रहा था?
राजू – झूठे दावाें पर भरत बोला – मांग पूरा करने का आश्वासन है, इसलिए मैं सरेंडर कर रहा हूं। रिपोर्टर – फिर क्या हुआ?
राजू – पहले बोले, हथियार ले लीजिए, पुलिस बोली – नहीं, फेंक दो। उसने हथियार फेंक दिया। तुरंत एक पुलिस वाले ने पिस्टल उठा ली। थानेदार ने बड़ी चालाकी से भरत को गोली मरवाई राजू बोला- हम लोगों को लगा कि भरत ने पिस्टल फेंक दी है, अब पुलिस गिरफ्तार कर लेगी, लेकिन अचानक पूरी कहानी बदल गई। थानेदार राजेश मालाकर भरत के पास पहुंचा। दाहिना हाथ भरत के कंधे पर रखा और बाएं हाथ से सीने को ठोकते हुए बोला – बहुत अच्छा किए, तुम पढ़े-लिखे हो। मुझे पहले से पता था तुम ऐसा ही करोगे। चलो हमारे साथ, तुमको अपने साथ ले चलूंगा। वह कंधे पर हाथ रखकर महज 10 कदम आगे बढ़ा ही था, अचानक अपनी कमर से भरत की कमर में तेज धक्का मारकर पीछे हट गया। जैसे ही भरत गिरा, STF के जवान ने गोली चला दी। भरत ने कहा, धोखे से गोली मार दी। फिर ताबड़तोड़ 2 गोली और मारी गई। थोड़ी देर पुलिस वाले घेर कर खड़े हो गए, फिर गाड़ी में लाद दिया। गाड़ी में लेकर इधर-उधर घूमते रहे, गांव से बाहर निकलने का लंबा रूट पकड़ा। जब रिपोर्टर ने सवाल किया आपने ऐसा होते अपनी आंखों से देखा? राजू ने बताया हां, सबसे करीब से मैंने ही देखा था मैं, मेरा एक दोस्त और भरत का भाई चंदन सब साथ में खड़े पर थे। हम लोगों ने तीनों गोलियां चलते हुए देखीं इसकी आवाज भी सुनी। राजू ने बताया कि सबसे करीब घटना को देखने वालाें में उसके साथ भरत का छोटा भाई चंदन भी था। चंदन को ढूंढते हुए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम भरत के घर पहुंची। चंदन ने दावा किया कि भरत को मारने की कहानी पहले से ही लिखी गई थी। पुलिस वालों ने धोखा देकर भइया को मार डाला, मैं 20 मीटर की दूरी से सब देख रहा था। रिपोर्टर – कितने दिनों से भारत तिवारी ने हथियार रखा था?
चंदन – हम लोगों को पता नहीं था, लेकिन जब वीडियो सामने आया तब पता चला। रिपोर्टर – आप लोगों को पता नहीं था इसके बारे में क्या?
चंदन – वह घर में कुछ नहीं बताते थे, बहुत पूछते थे वो कुछ नहीं बताते थे। रिपोर्टर – ऐसा क्यो होता था?
चंदन – वह गांव वालों के लिए लड़ते थे, उनके फोन में कुछ न कुछ बड़ा राज है। रिपोर्टर – फोन कहां है?
चंदन – फोन तो प्रशासन के पास है। रिपोर्टर – कभी बताया नहीं, वीडियो के बारे में?
चंदन – एक लाइव में यह बोला था कि अगर मेरे साथ कुछ होता है तो मेरा फोन मेरे परिवार वालों को सौंपा जाए। रिपोर्टर – वह ऐसा क्यों बोल रहे थे?
चंदन – उन्हें पहले ही जानकारी हो गई थी कि ये लोग उन्हें मार देंगे। रिपोर्टर – उनको कैसे पता था कि उनका एनकाउंटर किया जाएगा? वीडियो में पहले से बोल रहे थे?
चंदन – अब यह उन्हें ही पता था। मोबाइल में था बड़ा राज, इसलिए जान ले ली भरत के भाई चंदन का कहना है कि मोबाइल में कोई बहुत बड़ा राज था जिससे पुलिस काफी बेचैन हो गई थी। इसी राज के लिए प्लानिंग के तहत उनही हत्या कर दी गई होगी। रिपोर्टर – प्रशासन से क्या दुश्मनी थी?
चंदन – कुछ न कुछ तो थी, तभी हथियार उठाया। वह बार-बार वीडियो में बोलते थे, मार दिया जाएगा। रिपोर्टर – उनका वीडियो किसने बनाया था?
चंदन – वह खुद अपना वीडियो बनाते थे। किसी को साथ नहीं रखते थे। रिपोर्टर – ऐसा क्यों, कोई खतरा था क्या?
चंदन – हां, वह जानते थे कि आज नहीं तो कल कुछ गड़बड़ होने वाली है। रिपोर्टर – वह गांव की लड़ाई लड़ रहे थे, तो क्या सिर्फ लड़ाई लड़ने की वजह से उनके साथ ऐसा हुआ, या इससे पहले भी कुछ हुआ था?
चंदन – नहीं, सिर्फ यह लड़ाई नहीं है, उनके हाथ कुछ ऐसे सबूत लगे थे, जिसके लिए प्रशासन बेचैन था। रिपोर्टर – कौन सा ऐसा सबूत था जो प्रशासन के खिलाफ था?
चंदन – कुछ न कुछ सिस्टम के खिलाफ रहा होगा। सारा राज उनके मोबाइल से खुलेगा। हथियार फेंक दिया, फिर क्यों गोली मारी गई। रिपोर्टर – उस दिन क्या हुआ था?
चंदन – मैं बिल्कुल पास था, प्रशासन के लोग चारों तरफ से घेर चुके थे। रिपोर्टर – पुलिस ने कितनी देर तक घेरा था?
चंदन – एक से डेढ़ घंटे तक ड्रामा कर रही थी। पुलिस चाहती तो आसानी से उन्हें पकड़ लेती। कहानी पहले से तैयार थी, घर से धोखे से ले गए भास्कर की इन्वेंस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि पुलिस के कुछ अधिकारी बिना वर्दी के भरत के घर प्लानिंग के साथ पहुंचे थे। चंदन ने बताया कि प्रशासन चाहता तो आराम से उन्हें पकड़ सकता था, लेकिन प्लान तो कुछ और ही थी। चंदन ने बताया- उस दिन सुबह करीब 8 बजे पुलिस के कुछ लोग आए और बोले, चलिए उस जगह को दिखाइए, क्या मामला है, क्या मांग है? भाई ने घर से बाइक निकाली। लगभग 10 मिनट में बाइक से वह घटनास्थल पर पहुंच गए। तब तक पुलिस उन्हें चारों तरफ से घेर चुकी थी। हम लोग भी पहुंच गए। पुलिस सबको भगा रही थी, लेकिन हम लोग 20 मीटर की दूरी पर खड़े हो गए। रिपोर्टर – जो लोग बुलाने गए थे, वह कौन थे?
चंदन – एक पुलिस वाला आया था, उसके कंधे पर सिंगल स्टार था, लेकिन बैच नहीं लगा था। रिपोर्टर – क्या वह पुलिस वालों के साथ गए थे?
चंदन – नहीं, पुलिस वाले एक साइड से गए, वह दूसरी साइड से गए। तब तक पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया। रिपोर्टर – हथियार फेंकने के बाद एनकाउंटर किया गया या कुछ देर रोककर?
चंदन – नहीं, हथियार फेंकने के बाद SHO राजेश मालाकार ने उनके कंधे पर हाथ रखा। थोड़ी दूर आगे ले जाते हुए बोले, भरत, तुमसे यही उम्मीद थी। हथ रखे हुए करीब 10 मीटर आगे ले गए, अचानक धक्का दिया और फिर पीछे हो गए। फिर उन्हें भून दिया गया। गोली लगने के 10 मिनट बाद तक पुलिस उन्हें घेरकर खड़ी रही। रिपोर्टर – सबसे पहले किस अस्पताल में ले गए?
चंदन – पहले शाहपुर ले गए? रिपोर्टर – आखिर ऐसा क्यों?
चंदन – उन्हें मारना था, वे चाहते थे कि ब्लड लॉस हो। उस समय तीन फायर की आवाज आई थी। रिपोर्टर – आप लोग पास नहीं गए?
चंदन – पुलिस वाले पास नहीं जाने दे रहे थे। रिपोर्टर – इलाज में देरी तो नहीं हुई?
चंदन – समय पर इलाज मिलता, तो शायद वह बच जाते। रिपोर्टर – मोबाइल मिला कि नहीं?
चंदन – मोबाइल में बहुत राज है, लेकिन पुलिस कह रही कि गायब हो गया है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम उस परिवार को ढूंढने का प्रयास की जिसका घर गोली कांड से महज 20 मीटर की दूरी पर है। काफी तलाश के बाद मंटूचंद्र से हमारी मुलाकात हुई। मंटूचंद्र ने बताया कि पुलिस का पूरा प्लान भरत को गोली मारने का था, इसलिए घटना का अंजाम देने से पहले हम लोगों को परिवार सहित बंदूक दिखाकर भगा दिया। मंटूचंद्र की बीमार बूढ़ी मां चल नहीं सकती है उसे गोद में उठाकर परिवार वाले भागे। रिपोर्टर – उस दिन क्या हुआ था? आपका घर तो जहां गोली लगी वहां से एकदम सटा हुआ है?
मंटूचंद्र – पास में ही थे, लेकिन हम लोगों को यहां से बंदूक दिखाकर खेत में भगा दिया गया। रिपोर्टर – गांव को खाली कराने में कितना समय लगा?
मंटूचंद्र – बातचीत चल रही थी, उसके बाद पुलिस वालों ने सबको यहां से दूर भगा दिया। ज्यादा समय नहीं लगा, घरों को खाली कराने में। पूरा गांव कुछ ही समय में खाली हो गया। गांव में यहां बहुत लोग नहीं थे। रिपोर्टर – अच्छा, कितने पुलिस वाले आए थे?
मंटूचंद्र – बहुत पुलिस वाले थे, लगभग 100 के आसपास। रिपोर्टर – बातचीत में कितना समय लगा?
मंटूचंद्र – लगभग आधा घंटा लगा होगा, किसी को जानकारी नहीं थी कि यह सब होगा। रिपोर्टर – फिर बंदूक फेंक दी थी या अपने हाथ में पकड़े हुए थे?
मंटूचंद्र – जब एनकाउंटर हुआ तो बंदूक फेंक दी थी, बंदूक फेंकने के बाद ही एनकाउंटर हुआ है। रिपोर्टर – आप देखे थे बंदूक फेकते हुए?
मंटूचंद्र – हां, अगर बंदूक हाथ में लिए रहते और मार दिया होता, तो कोई कुछ नहीं बोलता। रिपोर्टर – हवाई फायर तो किया था ना?
मंटूचंद्र – हां, हवाई फायर किया उसी समय मार देते तो कोई बात नहीं थी। पिस्टल फेकने के बाद क्यों मारा। रिपोर्टर – आप लोगों को तो दिखाई दे रहा होगा कि क्या-क्या हो रहा है?
मंटूचंद्र – हम लोग इधर थे, वहां पर वो पकड़ा गया था। यहां प्रशासन लगी थी, सबने घेरा बना लिया था। उधर से इधर आने नहीं दे रहे थे। रिपोर्टर – भरत ने जब बंदूक फेंक दी, तो कितनी देर बाद एनकाउंटर की आवाज सुनाई दी?
मंटूचंद्र – 30 सेकंड के अंदर 3 फायर हुए और उसके बाद पूरा माहौल शांत हो गया, भरत को लेकर चले गए। रिपोर्टर – गोली लगने के कितनी देर बाद पुलिस उन्हें ले गई? मंटूचंद्र – पुलिस चारों ओर से घेर रखी थी। फायर के बाद एक गाड़ी तेजी से आई और फिर उठाकर लेकर चली गई। हम लोगों को लग गया कि जान से मार दिया। सब लोगों ने देखा है, पहले उन्हें धक्का मारकर गिराया गया, फिर मारा गया है।

शिमला में भारी बारिश, ढली में तीन गाड़ियां दबी:घरों में घुसा पानी, सड़कें-रास्ते पानी के तालाब में तब्दील, चंबा में ऑरेंज अलर्ट

हिमाचल प्रदेश की राजधानी में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और भारी बारिश हुई। तेज बारिश के बाद शहर की सड़कें और रास्ते पानी से भर गए। ढली में तेज बारिश के बाद नाले में मलबा आने से तीन गाड़ियां दब गई। ढली में बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया। इस दौरान स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को घर लौटते वक्त परेशानी झेलनी पड़ी। शिमला में शाम 4 बजे ही अंधेरा सा छा गया। मानसून की दस्तक से पहले भारी बारिश ने शहर में पानी निकासी के नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है। जल निकासी नहीं होने की वजह से शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। मौसम विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन जारी कर रात 10 बजे तक चंबा, शिमला, कुल्लू, मंडी और सिरमौर बारिश के साथ आंधी-तूफान का यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। हालांकि, सुबह से आसमान में हल्के बादल छाए रहे। मगर अब ज्यादातर भागों में मौसम खराब बना हुआ है।
राज्य में अगले 7 दिन बारिश के आसार IMD के अनुसार- राज्य में अगले सात दिन तक बारिश के आसार है। 26 से 30 जून तक कुछेक भागों में ही हल्की बारिश हो सकती है। मगर 30 जून की रात को वेस्टर्न डिस्टरबेंस ज्यादा स्ट्रांग होगा। इससे अगले 48 घंटे यानी एक व दो जुलाई को पहाड़ों पर भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान कुछेक क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती है। इसे देखते हुए टूरिस्ट समेत लोकल लोगों को भी सावधानी बरतने, नदी-नालों और लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। चंबा का पारा 8.8 डिग्री गिरा राज्य के कई भागों में बारिश और आसमान में हल्के बादल छाने के बाद पहाड़ों पर मौसम सुहावना हो गया है। अधिकांश शहरों का पारा सामान्य से नीचे गिर गया है। चंबा का अधिकतम तापमान सामान्य से 8.8 डिग्री की गिरावट के बाद 28.3 डिग्री सेल्सियस रह गया है। कांगड़ा का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.5 डिग्री लुढ़कने के बाद 32.9 डिग्री, मनाली का 1.7 डिग्री कम होने के बाद 25.2 डिग्री और सोलन का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री नीचे लुढ़कने के बाद 29.0 डिग्री सेल्सियस रह गया है। अगले एक सप्ताह के दौरान भी ज्यादातर जगह तापमान सामान्य से कम रहेगा। मानसून की एंट्री के संकेत नहीं प्रदेश में मानसून की एंट्री पहले ही 5 दिन लेट हो गई है। अगले 4-5 दिनों के दौरान भी मानसून की दस्तक के कम आसार हैं। हालांकि, यह पहला अवसर नहीं है। इससे पहले भी कई बार जुलाई के पहले व दूसरे सप्ताह में मानसून दस्तक देता रहा है। राज्य में सबसे देरी से 10 जुलाई 2010 को मानसून आया था। जून में सामान्य से 31% कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार- राज्य में जून महीने में अब तक सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में 1 से 26 जून के बीच सामान्य तौर पर 79.8 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार अभी तक केवल 55.3 मिलीमीटर बादल बरसे हैं।

बड़नगर में पटाखों से किया था वैन में ब्लास्ट:'फिर आ गए' क्यों लिखा, विस्फोट का मकसद क्या; ATS और फोरेंसिक टीम ढूंढ रही सुराग

उज्जैन में मुहर्रम के जुलूस के दौरान वैन को क्रेन से लटकाकर विस्फोट करने का वीडियो देखने के बाद सुरक्षा एजेंसियां एक्शन में आ गई हैं। जिले की बड़नगर पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार कर वैन और क्रेन को जब्त कर लिया है। आरोपियों का कहना है कि 8 हजार के पटाखे खरीदकर वैन में ब्लास्ट किया गया था। उज्जैन, उन्हेल, नागदा और महिदपुर पहले से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए जांच में स्थानीय पुलिस के साथ एटीएस, यानी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड भी शामिल हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां अब तीन बड़े सवालों के जवाब ढूंढ रही हैं- 40 फीट ऊंचाई पर हवा में लटकाकर उड़ाई थी वैन दरअसल, 23 जून की रात बड़नगर के अडान मोहल्ले से मोहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। इसमें टाटा मैजिक गाड़ी को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर हवा में लटकाया गया था। इसकी छत पर दो युवक खड़े होकर लाल झंडे लहरा रहे थे। वैन पर ‘ले, फिर आ गए’ लिखा था। जुलूस में शामिल कुछ लोगों के हाथों में मौजूद तख्तियों पर भी यही मैसेज लिखा था। कुछ देर बाद वैन में विस्फोट कर दिया गया। इसका वीडियो भी सामने आया है। मामले में शोएब पिता गब्बू, जाहिद पिता भूरा खां और तपसील उर्फ तस्लीम को अरेस्ट किया गया है। वहीं, क्रेन के मालिक पर भी केस किया गया है। पहले देखिए, 5 तस्वीरें… जाहिद-तपसील ने लहराए थे झंडे पुलिस के मुताबिक, शोएब ने अडान अखाड़े के बैनर तले मुहर्रम का जुलूस निकाला था। उसी ने कबाड़ में रखी गाड़ी को क्रेन पर लटकवाया था। विस्फोट के समय जाहिद और तपसील गाड़ी की छत पर मौजूद थे। वे ही झंडे लहराते दिखाई दिए थे। ब्लास्ट के पहले दोनों नीचे उतर आए थे। पुलिस को आरोपियों ने करीब 8 हजार रुपए के पटाखे खरीदने का बिल भी दिया है, जिसकी तस्दीक की जा रही है। 2500 रुपए किराए पर ली गई थी क्रेन क्रेन मालिक गोपाल राठौर ने पुलिस को बताया कि अडान अखाड़े के सदस्यों ने पुष्प वर्षा के लिए क्रेन किराए पर लेने की बात कही थी। 2500 रुपए किराया तय होने के बाद ड्राइवर समेत क्रेन भेज दी थी। राठौर का कहना है कि उन्हें वाहन में विस्फोट करने की कोई जानकारी नहीं थी। शुक्रवार को उज्जैन की फोरेंसिक टीम और बम निरोधक दस्ता (BDS) बड़नगर पहुंचकर वैन से सेंपल इकट्‌ठा करेंगे। भीड़भाड़ वाले इलाके में किया गया ब्लास्ट एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बड़नगर के जय स्तंभ चौक पर भीड़भाड़ वाले इलाके में ये विस्फोट किया गया था। ब्लास्ट के बाद गाड़ी के पार्ट्स, कांच और दूसरी चीजें नीचे गिरीं। इससे लोगों की जान को गंभीर खतरा पैदा हुआ। कांच बंद होने के कारण गैस बनने से विस्फोट मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करनदीप सिंह क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) के साथ बड़नगर पहुंचे और संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला। उन्होंने कहा- प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गाड़ी में रॉकेट और सुतली बम लगाए गए थे। इसके कांच बंद होने के कारण गैस बनने से विस्फोट जैसी स्थिति बनी। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मोहर्रम के जुलूस में हमले का प्रदर्शन, VIDEO उज्जैन के पास बड़नगर में मोहर्रम के जुलूस के दौरान एक वैन में किए गए विस्फोट का वीडियो सामने आया है। घटना 23 जून की रात की बताई जा रही है। बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकले जुलूस में वैन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर लटकाया गया। वैन पर दो युवक खड़े होकर लाल झंडे लहराते रहे। पढ़ें पूरी खबर…

भोपाल में हाई-प्रोफाइल लाउंज में रातभर पार्टी, बिना लाइसेंस शराब:बिल में बीयर की जगह लिख रहे कोड; किराना दुकान के नाम पर यूपीआई पेमेंट

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रात साढ़े 11 बजे के बाद बाजार बंद कराने को लेकर पुलिस सख्ती बरत रही है। छोटे दुकानदारों, ठेला संचालकों और सामान्य व्यापारियों पर कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन बड़े और रसूखदार कारोबारियों पर मेहरबानी की जा रही है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में पुलिस की सख्ती और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फर्क सामने आया है। 11 से 21 जून के बीच किए गए स्टिंग में शहर के बाहरी इलाकों में संचालित कई हाई-प्रोफाइल लाउंज और रेस्टोरेंट आधी रात के बाद तक खुले मिले, जहां खुलेआम शराब और हुक्का परोसा जा रहा था। कुछ जगहों पर बिना लाइसेंस नशा सर्व करने, फर्जी नामों से बिल बनाने और यूपीआई के जरिए अलग से भुगतान लेने के मामले भी सामने आए। इतना ही नहीं, कटारा हिल्स थाने से महज 50 मीटर दूर अवैध शराब बिक्री का कारोबार भी कैमरे में कैद हुआ। 1. द आर्क: वेट्रेस बोली- बार लाइसेंस नहीं, लेकिन शराब मिल जाएगी भोपाल के खजूरी सड़क थाना क्षेत्र स्थित द आर्क लाउंज में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर रात 10:20 बजे पहुंचे। यहां रात 12:30 बजे तक पार्टी का माहौल बना रहा और रिपोर्टर की टेबल पर ड्रिंक सर्व की गई। बातचीत के दौरान रिपोर्टर के साथी ने वेट्रेस से पूछा कि यहां बीयर के दाम बाकी जगहों से कम क्यों हैं? इस पर वेट्रेस ने कहा, “बिल में वेट नहीं लगता क्योंकि हमारे पास बार का लाइसेंस नहीं है। गेस्ट की डिमांड पर बीयर और शराब सर्व कर देते हैं, लेकिन उसे बिल में नहीं दिखा सकते।” शराब के एवज में भुगतान यूपीआई बारकोड के जरिए लिया गया, लेकिन उसका कोई बिल नहीं दिया गया। वहीं, खाने का अलग बिल बनाकर भुगतान नकद में लिया गया। 2. द कर्व: पूल साइड शराब पार्टी, किराना स्टोर के नाम पर लिया भुगतान सीहोर रोड स्थित द कर्व लाउंज में रिपोर्टर रात 12:30 बजे पहुंचे। यहां स्वीमिंग पूल के किनारे कई लोग शराब पीते दिखाई दिए। पहली विजिट में वेटर ने कहा कि बीयर उपलब्ध नहीं है, लेकिन हुक्का और फूड मिल जाएगा। एक सप्ताह बाद टीम दोबारा पहुंची तो बीयर का ऑर्डर भी लिया गया। हुक्का और खाना टेबल पर सर्व किया गया। रिपोर्टर रात 10:30 बजे से 12:30 बजे तक यहां रुके। इस दौरान आधा दर्जन से अधिक टेबलों पर शराब पार्टी चल रही थी। लाइट म्यूजिक बज रहा था और नशे में धुत लोग डांस कर रहे थे। भुगतान के लिए वेटर ने “राधा कृष्णा किराना स्टोर” नाम के यूपीआई अकाउंट पर रकम ट्रांसफर कराई। बिल में बीयर को “BM” और हुक्का को “प्रीमियम बकेट” के रूप में दर्ज किया गया। 3. स्कायवा: रात 1:45 बजे तक चलती रही सर्विस स्टिंग ऑपरेशन के अगले चरण में भास्कर रिपोर्टर सीहोर रोड स्थित स्कायवा रेस्टोरेंट में रात करीब एक बजे पहुंचे। यहां बीयर, फूड और अन्य ऑर्डर लिए गए। कुछ देर बाद वेटर ने कहा, “कुछ और ऑर्डर हो तो बताइएगा। आप आराम से बैठिए, समय का कोई इश्यू नहीं है हमारे यहां।” रिपोर्टर रात 1:45 बजे तक रेस्टोरेंट में मौजूद रहे और इस दौरान लगातार सर्विस जारी रही। 4. फूड एंड फ्लेवर: दावा- हमारे यहां पुलिस नहीं आती भोपाल में एयरपोर्ट रोड स्थित फूड एंड फ्लेवर लाउंज में रिपोर्टर रात करीब 12:30 बजे पहुंचे। यहां मौजूद वेटर ने शराब परोसने से इनकार करते हुए कहा कि उनके यहां शराब अलाउड नहीं है, लेकिन हार्ड हुक्का मिल जाएगा। जब रिपोर्टर ने पूछा कि इतनी रात को पुलिस तो नहीं आएगी, तो वेटर ने जवाब दिया, “हमारे यहां पुलिस नहीं आती, आप सुबह तक बैठ सकते हैं।” 5. सीक्रेट प्लेस: रात 1:30 बजे तक हुक्का और स्नूकर राजधानी के लालघाटी स्थित सिटी वॉक मॉल की तीसरी मंजिल पर संचालित सीक्रेट प्लेस लाउंज में रिपोर्टर रात 1 बजे पहुंचे। यहां स्नूकर टेबल पर गेम चल रहा था। ज्यादातर टेबल भरी हुई थीं। ऐसा लग रहा था कि मानो पुलिस की सख्ती और समय सीमा का यहां कोई असर नहीं है। सोफे पर बैठते ही वेटर ऑर्डर लेने पहुंचा। उसने हुक्का लेने की पेशकश करते हुए अलग-अलग फ्लेवर बताए। रिपोर्टर के वहां मौजूद रहने के दौरान लोग हुक्का गुड़गुड़ाते और स्नूकर खेलते नजर आए। खबर पर आप अपनी राय यहां दे सकते हैं… ये खबर भी पढ़ें… भोपाल में ढाबे बने अवैध बार, खुलेआम परोस रहे शराब मध्य प्रदेश में अहातों में बैठकर शराब पिलाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर साल 2023 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने इन्हें बंद करा दिया था। लेकिन यह फैसला भोपाल में अवैध शराब कारोबार के लिए रास्ता खोल गया। आपदा में अवसर तलाशने वाले शराब माफिया ने इसका फायदा उठाते हुए भोपाल में एक पूरा नाइट लाइफ नेटवर्क खड़ा कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…

कोलकाता-जयपुर में तेज बारिश, सड़कें डूबीं:अस्पताल-दुकानों में पानी घुसा; MP के इंदौर के 15 पर्यटन स्थल बंद, यूपी और बिहार में हीटवेव

राजस्थान में मानसून के इंतजार के बीच गुरुवार को जयपुर में तेज बारिश हुई। करीब आधे घंटे में 2 इंच बरसात से सड़कें पानी से डूब गईं। जगह-जगह गाड़ियां पानी में बंद हो गईं। दुकानों में पानी घुस गया। कोलकाता में भी कुछ ऐसा ही हाल रहा। दोपहर में करीब एक घंटे की बारिश से शहर की मुख्य सड़कों पर एक फीट तक पानी भर गया। कोलकाता के SSKM अस्पताल के अंदर तक पानी घुस गया। इससे मरीज और उनकी देखभाल करने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई। बारिश से हादसों की आशंका को देखते हुए मध्य प्रदेश के इंदौर में 15 पर्यटन स्थलों में 22 अगस्त तक एंट्री बंद कर दी गई है। राज्य के शाजापुर में गुरुवार को बिजली गिरने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 2 से 4 दिनों में मानसून पूरे राज्य को कवर कर सकता है। इधर, यूपी में मानसून 8 दिन लेट है। यह आमतौर पर 20 जून तक आ जाता है लेकिन इस बार 15 दिनों से बिहार बॉर्डर पर रुका है। राज्य के 8 जिलों में गुरुवार को हीटवेव के हालात रहे। बिहार के 13 जिलों में तेज धूप के साथ गर्म हवा चली। पहले मैप में देखिए, कहां तक पहुंचा मानसून… देशभर से बारिश की 5 तस्वीरें… अगले 2 दिन के मौसम का हाल 27 जून: 28 जून:

खबर हटके-11 हजार वोल्ट के तारों पर युवक लेटा:AI वकील से हारा इंसान; क्रिकेटर को 100 बैटों से अंतिम विदाई, दोस्तों ने क्रिकेट छोड़ा

उत्तर प्रदेश में एक युवक बिजली के खंभे पर चढ़कर 11 हजार वोल्ट के तारों पर लेट गया। वहीं, ब्रिटेन में AI वकील ने इंसानी वकील को हराकर करीब ₹9 लाख का केस जीत लिया। उधर, गुजरात में एक क्रिकेटर की मौत के बाद उसके दोस्तों ने उसे 100 बैंटों से अंतिम विदाई दी साथ सभी ने क्रिकेट छोड़ने का संकल्प लिया। जापान के एक फेमस फ्राइड चिकन रेस्टोरेंट लगातार 60 साल से इस्तेमाल हुए तेल से डिश बना रहा है। वहीं, अमेरिका में एक शख्स को उसकी पालतू बिल्ली घूर रही थी इसलिए उसने पुलिस बुला ली। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

भास्कर अपडेट्स:कोर्ट बोला- देर रात पुरुष से बात महिला के चरित्र पर संदेह का आधार नहीं

दिल्ली की सेशन कोर्ट ने कहा है कि महज इसलिए कि कोई महिला देर रात फोन पर किसी पुरुष से बात करती है, उसके चरित्र पर सवाल उठाने या उसकी निजता में दखल देने को उचित ठहराने का कारण नहीं हो सकता। इसके लिए उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को सुरक्षित रखने की भी जरूरत नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुनाली गुप्ता ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के सीडीआर को संरक्षित करने के लिए दायर अपील को खारिज करते हुए की। न्यायाधीश ने कहा, ‘किसी व्यक्ति से बात करने मात्र से महिला के चरित्र पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि यह आरोप न लगाया गया हो कि महिला का उक्त पुरुष के साथ कोई अवैध, संबंध है।’ आज की अन्य बड़ी खबरें… महाराष्ट्र में विपक्ष की बैठक, 23 विधायक गायब, पवार भी बैठक में नहीं पहुंचे
महाराष्ट्र के मानसून सत्र के बीच महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में बड़ी दरार सामने आई है। मुंबई में विपक्ष की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक से 23 विधायक गायब रहे। हैरानी की बात है कि एनसीपी (शरद) के सुप्रीमो शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल भी इस बैठक में नहीं पहुंचे। सांसदों की बगावत झेल रहे शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे का इस पर दर्द छलक पड़ा। उन्होंने सहयोगियों पर तंज कसते हुए पूछा, ‘क्या हम वाकई सच में एक साथ हैं?’ हालांकि, पवार गुट ने अनुपस्थिति की वजह निजी कारण बताई है, लेकिन इससे राज्य की सियासत गरमा गई है। इससे पहले उद्धव गुट के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की सेना में शामिल हो चु​के हैं। डिजिटल अरेस्ट: 16 राज्यों के 80 ठिकानों पर सीबीआई छापे
सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम करने वाले नेटवर्क को तोड़ने के लिए 16 राज्यों में 80 जगहों पर तलाशी ली। अफसरों के मुताबिक ठगों ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट जैसी दिखने वाली यूआरएल वाली फर्जी साइट बनाकर सैकड़ों लोगों को फंसाया। ऑपरेशन चक्र के चौथे चरण के तहत 60 स्पेशल टीमें उतरीं। सीबीआई के अनुसार, साइबर ठगी का ये नेटवर्क साइबर फ्रॉड के 200 से ज्यादा मामलों से जुड़ा है। तलाशी के बाद सीबीआई ने चेन्नई से बी. नरेश और कोलकाता से संजीब साहा को गिरफ्तार किया है। इन पर 2 करोड़ रुपए के संदिग्ध अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने का शक है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में ठग खुद को पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों के अफसर या न्यायिक अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। किसी अपराध में फंसाने की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।

महेश दीक्षित नए IB चीफ, तपन डेका की जगह लेंगे:1993 बैच के IPS अधिकारी हैं, एंटी टेररिज्म और खुफिया ऑपरेशन का अनुभव

केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के स्पेशल डायरेक्टर महेश दीक्षित को देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी का नया चीफ नियुक्त किया है। वे 30 जून को कार्यकाल पूरा कर रहे तपन कुमार डेका की जगह लेंगे। केंद्र सरकार ने महेश को दो साल के लिए IB डायरेक्टर नियुक्त किया है। महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। फिलहाल IB में स्पेशल डायरेक्टर और एजेंसी के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे।
इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के प्रमुख रह चुके हैं। एंटी टेररिज्म और खुफिया ऑपरेशन का लंबा अनुभव है। मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। वे जुलाई 2022 से IB प्रमुख थे। सरकार ने उन्हें दो बार सेवा विस्तार दिया था। अनुच्छेद 370 हटाने से लेकर G20 तक: नए IB प्रमुख महेश दीक्षित की अहम भूमिका नए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) बनने जा रहे महेश दीक्षित ने अपने करियर के दौरान कई संवेदनशील सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, G20 बैठक की सुरक्षा व्यवस्था और दुष्प्रचार से निपटने में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने में अहम भूमिका अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से पहले महेश दीक्षित सुरक्षा तैयारियों से जुड़े अहम अधिकारियों में शामिल थे। उन्होंने फैसले के सुरक्षा प्रभावों का आकलन किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति तैयार करने में भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर में संभाली अहम जिम्मेदारी राज्य के पुनर्गठन के बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में महत्वपूर्ण खुफिया जिम्मेदारियां सौंपी गईं। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ लोगों का भरोसा बहाल करने में भी योगदान दिया। G20 बैठक की सुरक्षा में योगदान
2023 में श्रीनगर में हुई G20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक के दौरान सुरक्षा प्रबंधन में उनकी अहम भूमिका रही। इसी दौरान कई विदेशी राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों ने भी कश्मीर का दौरा किया।
उन्होंने जमीनी हालात का सटीक आकलन देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बढ़ाने में मदद की। ————————- ये खबर भी पढ़ें… जनरल सुब्रमणि ने देश के नए CDS का पदभार संभाला: पाकिस्तान-चीन मामलों के एक्सपर्ट हैं देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने रविवार को पदभार संभाल लिया। दिल्ली में उन्हें साउथ ब्लॅाक लॅान्स में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वे देश के तीसरे CDS है। उन्होंने जनरल अनिल चौहान की जगह ली है। जनरल चौहान शनिवार को रिटायर हुए थे। पूरी खबर पढ़ें…

दावा-केतन को धक्का देने के बाद सिया मदद को चिल्लाई:मां बोलीं- बेटी अगर दोषी, उसे भी किले से नीचे फेंक दो

पुणे में मंगतेर केतन अग्रवाल मर्डर केस में नया खुलासा हुआ है। केतन को जिस लोहगढ़ किले से धक्का दिया गया था। वहां के गार्ड ने बताया कि उसने सिया के चिल्लाने की आवाज सुनी थी। गार्ड धीरज जाधव के मुताबिक, चीख-पुकार सुनकर वह मौके पर पहुंचे तो मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल मदद के लिए चिल्ला रहे थे। मैंने सिया गोयल से पूछा क्या हुआ, तो उसने कहा कि यहां से कोई गिर गया है। इसके बाद मैंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। उधर सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने कहा है कि इस मामले में कोई भी दोषी है तो उसे सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। अगर मेरी बेटी दोषी है, तो उसे भी उसी जगह से नीचे फेंक देना चाहिए, जहां से केतन को धक्का दिया गया था। सिया और केतन 18 जून को पुणे के लोहगढ़ किले पर घूमने गए थे। इसी दौरान केतन की खाई में गिरने से मौत हो गई। सिया पर अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर की हत्या करने का आरोप है। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। मां बोलीं- सिया शादी को लेकर खुश थी पिता प्रवीण गोयल ने कहा- केतन ही सिया को लोहगढ़ ले गया था केतन की हत्या के पहले कैफे में मिले थे सिया-चेतन केतन की हत्या के एक दिन पहले 17 जून को आरोपी सिया और प्रेमी चेतन चौधरी एक कैफे में मिले थे। न्यूज एजेंसी IANS ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि यहीं लोहगढ़ किले पर केतन को खाई में धक्का देने का प्लान बनाया था। दोनों ने वह पॉइंट भी ढूंढ लिया, जहां से केतन को धक्का देना था। यदि केतन इससे भी बच जाता तो 20 जून के बाद सड़क हादसे में मारने का बैकअप प्लान तैयार था। दरअसल, 31 मई को सिया और मंगेतर केतन लोहगढ़ किले गए थे। वहां केतन एक खतरनाक जगह बैठा था। तभी सिया को उसे मारने का आइडिया आया। 14 जून को भी केतन को धक्का देने की कोशिश की गई थी। उस समय सिया ने सांप दिखने का बहाना बनाकर घटना को हादसा बताने की कोशिश की थी, लेकिन केतन बच गया था। सिया और चेतन को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ, एक-दूसरे को मास्टरमाइंड बता रहे केतन मर्डर केस में उसकी मंगेतर सिया और सिया के लवर चेतन को 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है। पुलिस के मुताबिक बुधवार देर रात दोनों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस दौरान दोनों का रवैया पूरी तरह बदल गया। चेतन ने पुलिस से कहा कि वह सिया के साथ भागना चाहता था, लेकिन सिया तैयार नहीं थी। केतन को रास्ते से हटाने और मर्डर का पूरा प्लान सिया ने ही जिद करके बनाया था। इतना कहते ही सिया ने चेतन पर पलटवार किया। उसने कहा कि हत्या का आइडिया चेतन का था। जब 14 जून को पहली बार केतन को मारने की कोशिश नाकाम रही थी, तब चेतन उसके सामने रोया था कि उसका प्लान फेल हो गया। हालांकि जांच अधिकारियों का कहना है कि ये आरोपियों की डिफेंस स्ट्रेटेजी हो सकती है। पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं। 31 मई को मारने का आइडिया आया, 18 जून को मर्डर 31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा: 11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घूमने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक जब दोनों किले की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचे, तो यहीं सिया को पहली बार केतन से पीछा छुड़ाने के लिए उसे पहाड़ी से धक्का देकर मार डालने का प्लान सूझा। 5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया: सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ किला जाने की जिद की। तब केतन के घर वालों ने मना कर दिया। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। सभी लोग फ्लाइट पकड़ने के लिए निकले। पुणे ग्रामीण के SP संदीप सिंह गिल के मुताबिक केतन के साथ बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने उसका पासपोर्ट अपने पास अलग रख लिया था। 14 जून: दूसरी कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया: सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। बोली कि मुझे वह जगह पसंद है। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों किले पर पहुंचे। सिया ने केतन को एक जगह पीछे से धक्का दिया। पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- ‘धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई। 18 जून: तीसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया: 19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी था। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया। तीन सुराग; सिया का झूठ, CCTV फुटेज, 2004 बार कॉल पहला सुरागः सिया के हावभाव से केतन की बहन को शक हुआ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 जून को सिया केतन के घर पहुंची। केतन की बहन ने पूछा- केतन कैसे गिरा? इस सवाल पर सिया के हावभाव अचानक बदल गए। वो ठीक से जवाब नहीं दे पा रही थी। केतन की बहन को शक हुआ और उसने पिता विशाल अग्रवाल से कहा- भाई अच्छा ट्रैकर है, उसकी मौत एक्सीडेंट नहीं हो सकती। सिया ठीक से जवाब नहीं दे रही। विशाल को भी पहले से शक था कि कुछ तो ठीक नहीं है। इसके बाद विशाल दोबारा पुणे पुलिस से मिले और सिया पर शक जताया। उन्होंने ये भी कहा कि सिया किसी लड़के से बात करती है, उसकी भी जांच की जानी चाहिए। दूसरा सुरागः किले के CCTV फुटेज में गर्मी में हुडी पहने लड़का दिखा पुलिस ने लोहगढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज निकाले। इनमें 18 जून को एक शख्स वहां पहुंचे केतन और सिया के आसपास कई बार दिखा। गर्मी का मौसम, ऊपर से किले की चढ़ाई, उसके बावजूद किले की सीढ़ियों के फुटेज में दिखा कि वो हुडी पहने था। पुलिस के मुताबिक, लड़का अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहा था। तीसरा सुरागः सिया की एक नंबर पर 2000 से ज्यादा कॉल्स पुलिस ने सिया के कॉल-रिकॉर्ड खंगाले। इनमें एक मोबाइल नंबर पर जनवरी से केतन की हत्या वाले दिन सुबह 7 बजे तक सिया ने 2004 कॉल में करीब 338 घंटे की बातचीत की थी यानी दोनों रोज करीब 11 कॉल्स में 2 घंटे बात करते थे। ये नंबर पुणे के ही एक और व्यापारी परिवार के लड़के चेतन चौधरी का था। चेतन का घर पुणे के उसी इलाके में था, जहां सिया के पिता का ऑफिस है। मर्डर की 2 वजह; दावा- सिया शादी के लिए तैयार नहीं थी सिया शादी के लिए तैयार नहीं थी: पुलिस को शक है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी और परिवार के दबाव में केतन से शादी करने जा रही थी। इसी पहलू को पुलिस हत्या की संभावित वजहों में से एक मानकर जांच कर रही है। बदनामी के कारण प्रेमी के साथ भागी नहीं: प्रेमी चेतन ने बताया कि सिया सगाई तोड़कर भागने के पक्ष में नहीं थी। उसे लगता था कि इससे उसके परिवार की बदनामी होगी। मर्डर से पहले सिया का मंगेतर के साथ डांस, रोमांस; 3 तस्वीरें केतन के मर्डर करने से पहले सिया ने सोशल मीडिया अकाउंट पर केतन अग्रवाल (26) के साथ कई रोमांटिक पोस्ट किए थे। कभी प्रपोजल की तस्वीरें, कभी फूल देकर प्यार जताने वाले पल, तो कभी डांस और गले मिलने के वीडियो। दोनों की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा थीं। इस साल फरवरी में सगाई के बाद सिया ने इंस्टाग्राम पर एक केक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- मेरे दिल को उसका घर मिले एक महीना पूरा हुआ। पुणे मर्डर- मंगेतर के साथ सिया की रोमांटिक पोस्ट: दोनों लोहगढ़ किला गए तो प्रेमी भी पहुंचा; गर्मी में हुडी पहना था, इसी से सुराग मिला पुणे में सोनम रघुवंशी जैसा केस:बिजनेसमैन की बेटी ने प्रेमी के साथ मिलकर मंगेतर को 400 फीट गहरी खाई में फेंका; नवंबर में शादी थी ———————————– ये खबर भी पढ़ें… शादी से बचने के लिए सीधे मंगेतर की हत्या, मना क्यों नहीं कर सकी; रोमांटिक पोस्ट डाले, चार सुराग से सुलझी गुत्थी पुणे शहर से 64 किमी दूर लोहगढ़ किला। 18 जून 2026 की सुबह करीब 10 बजे किले की चोटी से एक चीख गूंजी। गार्ड्स पहुंचे, तो वहां मौजूद 20 साल की सिया ने बताया- मेरा मंगेतर केतन फिसलकर खाई में गिर गया है। सिया ने ही घरवालों को भी फोन किया। अगले दिन इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ पूरी खबर पढ़ें…