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एसपी ने पूंछरी में सुरक्षा का लिया जायजा:गुरु पूर्णिमा मेले से पहले व्यवस्थाएं परखीं, तैयारियां जांची

डीग जिले में 22 से 29 जुलाई तक आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा मेले की तैयारियों को लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. ने बुधवार को पूंछरी क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एसपी ने पूंछरी परिक्रमा मार्ग, प्रमुख मंदिरों और अन्य दर्शनीय स्थलों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम दर्शन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए इंतजामों की समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। एसपी ने बताया कि मेले के दौरान 24 घंटे निर्बाध सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीग जिले की सीमा में आने वाले पूरे परिक्रमा मार्ग और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। यह तैनाती दिन और रात, दो पारियों में की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।

फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह फैसला उन्होंने विवादित कृषि बिल के विरोध में लिया है, जिसमें दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए नुकसानदायक हैं। पर्यावरण मंत्री बनीं बारबू आज राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। फ्रांस की संसद ने मंगलवार को यह बिल पारित किया था। सरकार ने दावा किया कि वह ये कानून किसानों की मदद के लिए लाया जा रहा है। उसका कहना है कि किसानों को घटती कमाई और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिल के दो प्रावधानों से सबसे ज्यादा विवाद 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन के इस्तेमाल की अस्थायी मंजूरी देना। इसका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी की खेती में किया जा सकेगा। 2. अगले 10 वर्षों में किसानों के लिए पानी के भंडारण (वॉटर स्टोरेज) की अनुमति की सीमा दोगुनी करना। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पर्यावरणविदों और सरकार के भीतर भी विरोध बढ़ गया। इसके विरोध में पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे किए गए वादे के विपरीत इस प्रावधान को हटाने पर कोई चर्चा ही नहीं होने दी। बारबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले नौ महीनों में मैंने जंगलों, साफ पानी, स्वच्छ हवा, उपजाऊ मिट्टी और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया। लेकिन विरोधी ताकतें इतनी मजबूत हो गई हैं कि मैं अपने मकसद पूरे नहीं कर पा रही। राजनीति मेरी दुनिया नहीं है और अगर राजनीति ऐसी ही होती है, तो यह कभी मेरी दुनिया नहीं बन सकती। वहीं, सरकार का कहना है कि नए प्रावधान लाने का फैसला उन किसानों की मदद के लिए लिया गया है, जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। पहले भी विवाद में रहा है यह कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन रसायन नियोनिकोटिनॉइड नाम के कीटनाशकों के समूह में आते हैं। यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के तहत इनका इस्तेमाल कुछ शर्तों के साथ किया जा सकता है, लेकिन फ्रांस में इन पर फिलहाल प्रतिबंध है। एसेटामिप्रिड पर फ्रांस ने 2018 में प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसे मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए हानिकारक माना गया था। एक साल पहले भी इस रसायन पर बैन हटाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के अनुरूप नहीं है।

सलूंबर के 6 स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर:852 बच्चों को नशे के बुरे प्रभावों के बारे में बताया, 'कोर्ट वाली दीदी पेटी' लगाई

सलूंबर में युवाओं को नशे की लत से बचाने और उज्जवल भविष्य को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जागरूकता अभियान चलाया। ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे’ के तहत ‘से नो टू ड्रग्स, से यस टू योर ड्रीम्स’ विषय पर केंद्रित इस अभियान में न्यायिक अधिकारियों ने स्वयं विद्यालयों में पहुंचकर स्टूडेट्स को नशे के बुरे प्रभावों के बारे में बताया। 852 स्टूडेंट्स को नशे के बुरे प्रभावों के बारे में बताया इन शिविरों के दौरान स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बस्सी सिंघावत, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डाल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेरिया, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय सराडा समेत निजी स्कूल के 852 स्टूडेंट्स को नशे के बुरे प्रभाव, मानसिक एवं शारीरिक नुकसान तथा सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। नशे जैसी बुराईयों से दूर रहने का संदेश कार्यक्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय सिंह महावर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रप्रकाश पाटीदार, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योतिपुरी, न्यायिक मजिस्ट्रेट तन्मय जोशी तथा सराडा के न्यायिक मजिस्ट्रेट सौम्य कुमार सिंह ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, लक्ष्य निर्धारित करने और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया। सुझाव पेटिका लगाई गई सचिव विनीत कुमार ने बताया-राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अभिनव पहल ‘कोर्ट वाली दीदी’ के तहत सभी विद्यालयों में शिकायत एवं सुझाव पेटियां स्थापित की गई हैं। इन पेटियों के माध्यम से विद्यार्थी अपनी किसी भी समस्या या शिकायत को पूरी गोपनीयता के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचा सकेंगे, जिस पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। हेल्पलाइन नंबर के बारे में बताया इस अवसर पर स्टूडेंट्स को रालसा द्वारा प्रकाशित जागरूकता पुस्तिकाएं एवं पैम्फलेट वितरित किए गए। इन पुस्तिकाओं को विद्यालयों के व्हाट्सएप समूहों में भी साझा किया गया। विद्यार्थियों को नालसा टोल फ्री हेल्पलाइन 15100 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी भी दी गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे कानूनी एवं अन्य सहायता प्राप्त कर सकें। नशा मुक्त जीवन अपनाने का संकल्प कार्यक्रम में चीफ एलएडीसी महेश कुमार जोशी, असिस्टेंट एलएडीसी संचित सुहालका,फाल्गुनी शर्मा,कनिष्ठ सहायक ऋषिकेश मीणा,विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक एवं स्टाफ मौजूद रहे।जिलेभर में आयोजित इन छह शिविरों से करीब 852 छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए,जिन्होंने नशामुक्त जीवन अपनाने का संकल्प लिया।

छोटी सादड़ी में पेपर लीक पर कांग्रेस का प्रदर्शन:प्रधानमंत्री का पुतला जलाया, पूर्व मंत्री आंजना ने मांगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

छोटीसादड़ी में बुधवार को कांग्रेस ने पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन गांधी चौराहे पर किया गया। पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी और मामले पर संसद में चर्चा कराने की मांग की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उदयलाल आंजना ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता आवश्यक है और युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इस दौरान आंजना ने छोटीसादड़ी पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पुलिस पर फर्जी केस दर्ज करने, अवैध वसूली करने और लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया।

'एक स्वस्थ व्यक्ति बचा सकता है 8 लोगों की जान':अंगदान की शपथ मामले में झुंझुनूं सबसे आगे, नर्सिंग स्टूडेंट्स ने निकाली जागरूकता रैली

एक स्वस्थ व्यक्ति मारने के बाद भी अपने अंगों का दान करके 8 जरूरतमंद लोगों की जिंदगी बचा सकता है। झुंझुनूं जिला अंगदान की शपथ लेने के मामले में राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान पर है। इसी प्रेरणा और उद्देश्य के साथ अंगदान ही महादान है के संकल्प को जन-जन तक पहुंचने के लिए झुंझुनूं में राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने एक जागरूकता रैली निकाली। राजकीय बीडीके अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक निकाली गई इस रैली का मुख्य उद्देश्य आमजन को अंगदान के प्रति जागरूक करना और समाज को जीवन बचाने का संदेश देना रहा, जिसमें युवाओं और चिकित्सा कर्मियों ने हिस्सा लिया। नारे लिखी पट्टियां लेकर चले ​रैली की शुरुआत राजकीय बीडीके अस्पताल परिसर से हुई। इसे बीडीके अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) एवं अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान पीएमओ डॉ. भाम्बू ने कहा कि अंगदान-महादान कि मुहिम में युवाओं और आमजन द्वारा सक्रिय भागीदारी निभाना अत्यंत अनुकरणीय और सराहनीय कदम है। यह झुंझुनूं जिलेभर के आमजन की उच्च जागरूकता का परिचायक है, जिससे अनेकों लोगों को नया जीवनदान मिला है। रैली बीडीके अस्पताल परिसर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुँची। इसके बाद कलेक्ट्रेट से रोड नंबर 1 के रास्ते होते हुए पुनः बीडीके अस्पताल पहुंचकर संपन्न हुई। नर्सिंग विद्यार्थियों ने हाथों में तख्तियां और नारे लिखी पट्टियां लेकर शहरवासियों को अंगदान के महत्व के बारे में बताया। अस्पताल की ओपीडी में आए रोगियों और उनके परिजनों को भी इस महाअभियान से जुड़ने के लिए विशेष रूप से प्रेरित किया गया। ​एक स्वस्थ व्यक्ति बचा सकता है 8 लोगों की जान ​रैली के दौरान शहरवासियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि एक स्वस्थ व्यक्ति मरणोपरांत अपने अंगों का दान करके 8 जरूरतमंद लोगों की जिंदगी बचा सकता है। कार्यक्रम के दौरान यह भी सामने आया कि झुंझुनूं जिला अंगदान की शपथ लेने के मामले में राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जो यहाँ के नागरिकों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। ये रहे मौजूद ​इस जन-जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में चिकित्सा विभाग और नर्सिंग कॉलेज के कई अधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. सिद्धार्थ शर्मा (RMO), डॉ. अभय सिंह (अंगदान नोडल अधिकारी एवं सहायक आचार्य सर्जरी), ​अंजना चौधरी (जीकॉन नोडल अधिकारी), ​प्यारेलाल (नर्सिंग अधीक्षक), मंजू कटारिया, सरिता सैनी, पूनम भास्कर और पूनम डांगी उपस्थित रहे।

पहली तिमाही में BPCL को ₹3,962 करोड़ का घाटा:कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर; लेकिन रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंचा

भारत पेट्रोलियम ने आज 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी किए। इस तिमाही में कंपनी को ₹3,962 करोड़ का घाटा हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में ₹6,124 करोड़ का मुनाफा हुआ था। वहीं मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का मुनाफा हुआ था। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ हुआ बीपीसीएल का रेवेन्यू ₹1.59 लाख करोड़ रहा। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 23% ज्यादा है। तब कंपनी का ₹1.29 लाख करोड़ का रेवेन्यू रहा था। तिमाही दर तिमाही आधार पर देखें तो मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ के मुकाबले रेवेन्यू में 18% बढ़ा है। अमेरिका-ईरान जंग से कच्चे तेल का बढ़ना रही घाटे की मुख्य वजह 28 फरवरी को शुरू हुई अमेरिकी ईरान जंग की वजह से कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। इसके साथ ही भाड़ा और इंश्योरेंस की लागत में भी बढ़ोतरी हुई। बढ़ी हुई लागतों का पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर LPG और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर नहीं डाला जा सका, जिसकी वजह से कंपनी को यह नुकसान उठाना पड़ा। एक साल में फ्लैट रहा भारत पेट्रोलियम का शेयर भारत पेट्रोलियम के शेयर आज 3% गिरकर 309 रुपए पर बंद हुए। इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक 19% गिरा है। बीते 6 महीने में यह 12% और एक साल में 9% गिरा है। 24 जनवरी 1976 को बनी थी भारत पेट्रोलियम भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) भारत की एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी है। 24 जनवरी 1976 को इसकी स्थापना हुई थी। ये पेट्रोलियम उत्पादों को रिफाइन और मार्केट करती है। यह मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है। इनकी संयुक्त रिफाइनिंग क्षमता प्रति वर्ष 40 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक है। BPCL फ्यूल, लुब्रिकेंट और लिक्वीफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सहित विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों के डिस्ट्रीब्यूशन भी करती है। इसके चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर जी कृष्णकुमार हैं।

राहुल गांधी थोड़ी देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे:पेपर लीक मुद्दे पर करेंगे बात, कल PM आवास के बाहर धरने पर बैठे थे

कांग्रेस नेता राहुल गांधी शाम 4 बजे मीडिया से बात करेंगे। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी दी। लेकिन राहुल गांधी किन मुद्दों पर बोलेंगे, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है। संभावना है कि राहुल नीट पेपर लीक पर बोल सकते हैं। इससे पहले राहुल ने मंगलवार को पीएम मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के पास धरना दिया था। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव समेत कई नेता पीएम आवास के बाहर बैठ गए थे। पीएम ऑफिस में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल से बातचीत की। इसके बाद भी राहुल और अन्य कांग्रेस नेता पीएम आवास के बाहर से नहीं उठे। करीब 3 घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल, प्रियंका और अखिलेश को हिरासत में ले लिया। फिर देर रात उन्हें छोड़ दिया।

आनासागर झील में गंदगी को लेकर कल अजमेर रहेगा बंद:सुबह 6 से शाम 5 बजे तक बंद का आह्वान, कांग्रेस ने शहर में निकाली जनजागरण रैली

अजमेर की ऐतिहासिक आनासागर झील की दुर्दशा, झील में फैल रही गंदगी को लेकर शहर जिला कांग्रेस की ओर से गुरुवार 23 जुलाई को अजमेर बंद का आह्वान किया गया है। बंद सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा। इस दौरान अस्पताल, मेडिकल स्टोर और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है। बंद को सफल बनाने के लिए निकाली वाहन रैली बंद को सफल बनाने के लिए बुधवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में शहर में वाहन रैली निकाली गई। रैली शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आमजन से संपर्क कर बंद को समर्थन देने की अपील की। इस दौरान आनासागर झील को बचाने और शहर की समस्याओं के समाधान को लेकर लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया गया। झील में मछलियों की हो रही मौत कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ऐतिहासिक आनासागर झील लगातार प्रदूषण और बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार हो रही है। झील में गंदगी, दुर्गंध और मछलियों की मौत जैसे मामलों को लेकर कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी के विरोध में अजमेर बंद का निर्णय लिया गया है। आनासागर संरक्षण की मुहिम में सहयोग की अपील वाहन रैली में कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौर, महेंद्र सिंह रलावता, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष द्रौपदी कोली सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने शहरवासियों से गुरुवार के बंद को सफल बनाने और आनासागर संरक्षण की मुहिम में सहयोग देने की अपील की।

शुभमन गिल वनडे में नंबर-1 बनने से एक अंक दूर:न्यूजीलैंड के मिचेल टॉप पर कायम, रूट 6 साल बाद टॉप-10 में शामिल

टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल वनडे के नंबर-1 बल्लेबाज बनने से एक अंक दूर है। वे ICC के वनडे बैटर्स की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर हैं। गिल के 801 रेटिंग पॉइंट्स हैं, जबकि मौजूदा वर्ल्ड नंबर-1 डेरिल मिचेल के 802 अंक हैं। 19 जुलाई को लॉर्ड्स में 138 रनों की पारी खेलने वाले रोहित शर्मा ने विराट कोहली से रेटिंग पॉइंट्स का फासला कम कर लिया है। दोनों में 9 रेटिंग पॉइंट्स का अंतर है। रोहित चौथे और विराट तीसरे स्थान पर हैं। ICC ने बुधवार को ताजा रैंकिंग जारी की। जो रूट टॉप-10 में लौटे, डकेट 19वें नंबर पर आए वनडे की बैटिंग रैंकिंग में इंग्लैंड के जो रूट को चार स्थान का फायदा हुआ है। वे 8वें नंबर पर पहुंच गए हैं। रूट साल 2020 के बाद पहली बार उन्होंने वनडे रैंकिंग के टॉप-10 में जगह बनाई है। रूट ने भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में नाबाद रहे थे। उन्होंने 76, 99 और 74 रन की पारियां खेली थीं। लॉर्ड्स वनडे में 141 रन बनाने वाले बेन डकेट 11 स्थान की बढ़त के साथ संयुक्त 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं। अक्षर, अल्जारी और करन को 10-10 स्थान का फायदा वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में भारत के अक्षर पटेल, वेस्टइंडीज के अल्जारी जोसेफ और इंग्लैंड के सैम करन को 10-10 स्थान का फायदा हुआ है। अक्षर 32वें, जोसेफ 26वें और करन 70वें स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड के मिचेल सेंटनर चौथे और वेस्टइंडीज के गुडाकेश मोती संयुक्त नौवें स्थान पर पहुंच गए हैं। T20I में तांजिद, बेनेट और नगरवा ने लगाई छलांग ICC की ताजा T20I रैंकिंग में बांग्लादेश के तांजिद हसन करियर की सर्वश्रेष्ठ 20वीं रैंकिंग पर पहुंच गए हैं। जिम्बाब्वे के ऑलराउंडर ब्रायन बेनेट नौवें स्थान पर पहुंचकर अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल की, जबकि तेज गेंदबाज रिचर्ड नगरवा 37 स्थान की छलांग लगाकर करियर के सर्वश्रेष्ठ 32वें स्थान पर पहुंच गए हैं। ——————————————- इंटरनेशनल क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… वेस्टइंडीज ने आखिरी वनडे 2 विकेट से जीता, न्यूजीलैंड के खिलाफ 2-3 से सीरीज गंवाई वेस्टइंडीज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के आखिरी मैच में 2 विकेट की जीत हासिल की। हालांकि, बुधवार को मिली इस जीत के बावजूद टीम ने 5 मैचों की सीरीज 2-3 से गंवा दी। ब्रिजटाउन में कैरेबियाई टीम ने 269 रन का टारगेट 47.3 ओवर में 8 विकेट खोकर हासिल कर लिया। शिमरोन हेटमायर ने नाबाद 69 रनों की पारी खेली। वे प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। जॉयडन लेनिक्स को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। पढ़ें पूरी खबर

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता है, लेकिन कीमत काफी कम होती है। रीडर्स व निवेशकों के लिए टिप्स फार्मा निवेशकों के लिए: अगले 2 साल तक भारतीय कंपनियों पर सीधा वित्तीय असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 0% टैरिफ लागू रहेगा। हालांकि, लॉन्ग टर्म में कंपनियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सेटअप करने की रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। स्टॉक मार्केट वॉच: सिप्ला, डॉ. रेड्डीज और सन फार्मा जैसी US एक्सपोजर वाली कंपनियों की अगली तिमाही की कमेंट्री पर नजर रखें।