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ममता बोलीं- भाजपा चाहती थी मुझे हार्ट अटैक आ जाए:मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक उनका अंत न हो जाए

ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा चाहती थी मुझे हार्ट अटैक आ जाए, लेकिन मैं तब तक जिंदा रहूंगी जब तक उनका अंत न हो जाए। पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता ने बुधवार को एक वीडियो मैसेज जारी किया। उन्होंने इस मैसेज में तृणमूल में जारी फूट पर भी अपना पक्ष रखा। ममता ने कहा- जो लोग जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। मैंने 2006 में तृणमूल को फिर से खड़ा किया था, तो मैं 2026 में भी ऐसा कर सकती हूं। दरअसल तृणमूल के सीनियर लीडर मदन मित्रा बुधवार को ममता बनर्जी का गुट छोड़ ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट में शामिल हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने विधायक पद नहीं छोड़ा है। मदन मित्रा ने यह कदम तब उठाया, जब उनके ऊपर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कस रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को ईडी ने मदन मित्रा की पत्नी और उनके दो बेटों को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। ममता बोलीं- लोगों को धमकाया जा रहा मदन मित्रा बोले- टीएमसी अभिषेक को बचाने में लगी मदन मित्रा ने कहा- पार्टी डूब रही है, लोगों की जान जा रही है, लेकिन टीएमसी सिर्फ अभिषेक को बचाने में लगी है। मैंने अभिषेक को सुझाव दिया था कि वह एक साल के लिए पद से हट जाएं। पहले पार्टी मजबूत कर लेते हैं फिर वापस आ जाइएगा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। मित्रा ने कहा कि तृणमूल दो हिस्सों में बंट गई है। मैं ममता बनर्जी का सम्मान करता हूं और उनका शुक्रिया अदा करता हूं। वह लंबे समय से हमारे साथ रही हैं। हमने भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। 3 जून को शुरु हुई थी बगावत, ऋतब्रत बने बागी गुट के नेता 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। TMC के 80 में से 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया था। इसमें मांग की गई थी कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी थी। 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। ममता के पास अब 21 विधायक और 17 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। इसमें से 59 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 21 विधायक बचे हैं। दो तिहाई सदस्य होने पर मिलती है अलग दल की मान्यता बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर खुद को असली TMC के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग को पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) की जानकारी दी थी। ——————- टीएमसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ममता गुट बोला- TMC पर बागी खेमे का दावा फर्जी:चुनाव आयोग से कहा पार्टी संविधान के अनुसार सभी समितियां 2027 तक वैध
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट ने सोमवार को चुनाव आयोग (EC) के समक्ष अपना विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए बागी गुट के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सभी संगठनात्मक समितियां पार्टी संविधान के अनुसार 2027 तक वैध हैं। पूरी खबर पढ़ें…

'या तो किडनी ट्रांसप्लांट कराओ, नहीं तो इच्छा मृत्यु दो':डिलीवरी के बाद किडनी फेल, महिलाओं ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन (प्रसव) के बाद महिलाओं की किडनी फेल होने के बेहद गंभीर मामले में नया मोड़ आ गया है। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती 5 पीड़ित महिलाओं में से 4 बुधवार को मीडिया के सामने आईं। महिलाओं ने रोते हुए कहा- हमें अस्पताल में भर्ती हुए 2 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। अब सरकार या तो हमारे किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करवाए, नहीं तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे। दो दिन पहले इन महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की थी और प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बाद, विरोध स्वरूप इन महिलाओं ने बुधवार से डायलिसिस कराने से साफ मना कर दिया है। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद फेल हुई थीं किडनियां
गौरतलब है कि 4 से 8 मई के बीच कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में डिलीवरी के लिए ये महिलाएं भर्ती हुई थीं। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद इन सभी महिलाओं की किडनियां फेल हो गई थीं। इस मामले में पांचों महिलाएं अब भी अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) में भर्ती हैं। इन महिलाओं की किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं और इन्हें हर दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पीड़ित महिला रागिनी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा- हम यहां डिलीवरी के लिए आए थे। 4 मई को भर्ती किया गया था, आज 70 दिन से ज्यादा का समय हो गया है और हम अस्पताल में ही पड़े हैं। हर दो-तीन दिन में डायलिसिस होता है, जिसमें असहनीय दर्द और तकलीफ होती है। पीड़ित महिलाओं का दर्द और इच्छा मृत्यु की मांग
पीड़ित महिला रागिनी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई डायलिसिस के दौरान हालत बहुत खराब हो जाती है, बार-बार बुखार आता है और तबीयत बिगड़ जाती है। हमारी बस यही मांग है कि हमारा किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। हम अस्पताल में जैसे (भले-चंगे) आए थे, हमें वैसे ही ठीक करके घर भेजा जाए। बीमारी के कारण घर पर सब परेशान हैं और पति की नौकरी तक छूट गई है। हम डायलिसिस के भरोसे कब तक जिंदा रहेंगे? या तो हमारा ट्रांसप्लांट कराओ या फिर हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो, अब यह दर्द सहन नहीं होता।” वहीं, दूसरी पीड़ित धन्नी बाई ने भी साफ कह दिया कि अब वे डायलिसिस नहीं करवाएंगी, चाहे अस्पताल में उनके साथ कुछ भी हो जाए। डायलिसिस का बहिष्कार और आईसीयू में भर्ती मरीज अपनी मांगों को लेकर महिलाओं ने अब इलाज का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। बुधवार को पिंकी और आरती का डायलिसिस होना था, लेकिन दोनों ने इसके लिए साफ मना कर दिया। इस बीच, डायलिसिस न होने के कारण बुधवार को आरती की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में आईसीयू (ICU) में शिफ्ट करना पड़ा। इसके बावजूद पीड़ित महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं कि जब तक सरकार किडनी ट्रांसप्लांट की लिखित गारंटी नहीं देती, वे डायलिसिस नहीं कराएंगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने इस मामले पर कहा- पांचों महिलाओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है और जरूरत के अनुसार उनका डायलिसिस किया जा रहा है। यह कहना संभव नहीं है कि डायलिसिस कब तक करना पड़ेगा। जब तक उनकी किडनियां खुद रिकवर नहीं हो जातीं, तब तक डायलिसिस करना बेहद जरूरी है। वैसे इन महिलाओं को अब अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है, सिर्फ डायलिसिस के लिए आना ही काफी है, लेकिन यहां रहने से भी हमें कोई आपत्ति नहीं है। जहां तक किडनी ट्रांसप्लांट का सवाल है, तो मरीज की स्थिति देखने के बाद 3 से 6 महीने बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।

इंस्टामार्ट से अब 30-45 मिनट में LPG सिलेंडर मिलेगा:HPCL के साथ पार्टनरशिप; बेंगलुरु से शुरुआत, 10kg और 5kg के सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे

स्विगी के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट ने LPG सिलेंडर की डिलीवरी शुरू करने के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप का ऐलान किया है। इसके तहत अब ग्राहक सीधे इंस्टामार्ट ऐप के जरिए ऑन-डिमांड LPG गैस सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे। बुधवार, 15 जुलाई को दोनों कंपनियों ने इस सर्विस को लॉन्च करने की जानकारी दी। गैस सिलेंडर की क्विक डिलीवरी के लिए क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ हुई यह देश की पहली पार्टनरशिप है। शुरुआती फेज में इस सर्विस को कर्नाटक के बेंगलुरु में रोलआउट किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिलेंडर की डिलीवरी 30 से 45 मिनट में की जा सकती है। 10 kg का नया ‘HP नव्या’ और 5 kg का सिलेंडर मिलेगा इस पार्टनरशिप के जरिए ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप पर HPCL के दो तरह के सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे। इसमें हाल ही में लॉन्च किया गया कंपनी का ‘HP नव्या’ 10 किलोग्राम का कंपोजिट LPG सिलेंडर शामिल है। इसके अलावा ग्राहक ऐप के जरिए HPCL का ट्रेडिशनल 5 किलोग्राम वाला लोहे का LPG सिलेंडर भी बुक कर सकेंगे। बिना किसी पुराने कनेक्शन के भी बुकिंग कर सकेंगे कंपनियों ने जानकारी दी है कि ग्राहकों को इंस्टामार्ट के जरिए इन गैस सिलेंडरों को खरीदने के लिए पहले से किसी भी प्रकार के घरेलू LPG गैस कनेक्शन की जरूरत नहीं होगी। यह उन लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक होगा जो नए शहर में शिफ्ट हुए हैं या जिन्हें तुरंत गैस सिलेंडर की जरूरत है। जानिए क्या है ऑर्डर और रिफिल की प्रोसेस अब सवाल-जवाब में जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें… सिलेंडर इंस्टामार्ट का होगा या HP का? सिलेंडर पूरी तरह से HP का ही होगा। स्विगी इंस्टामार्ट यहां सिर्फ एक टेक-इनेबल्ड डिलीवरी प्लेटफॉर्म की तरह काम कर रहा है। ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए ऑर्डर बुक करेंगे, लेकिन गैस और सिलेंडर HPCL के ही होंगे। सिलेंडर की कीमत क्या होगी और रिफिलिंग चार्ज क्या होंगे? कंपनियों के ऐलान में अभी सटीक कीमतों और डिलीवरी/रिफिलिंग चार्ज का खुलासा नहीं किया गया है। चूंकि यह कॉमर्शियल और घरेलू गैस नियमों के तहत आता है, इसलिए नए 10 kg ‘HP नव्या’ कंपोजिट सिलेंडर और 5 kg मेटल सिलेंडर की मूल कीमत सरकारी दरों और HPCL के मानक नियमों के अनुसार ही तय होगी। इसके अलावा, इंस्टामार्ट ऐप पर क्विक डिलीवरी के लिए कुछ अतिरिक्त कॉन्विनिएंस या डिलीवरी चार्ज जोड़े जा सकते हैं, जिसकी स्पष्ट जानकारी ऐप पर बुकिंग के समय ही लाइव होगी। HP ने टाई-अप के लिए इंस्टामार्ट को ही क्यों चुना? स्विगी इंस्टामार्ट भारत के 131 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है और इसके पास एक बेहद मजबूत डिजिटल और डिलीवरी नेटवर्क है। HPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर अमित गर्ग के अनुसार, बदलते दौर में ग्राहकों की जरूरतें बदल रही हैं और वे हर चीज तुरंत चाहते हैं। इंस्टामार्ट के जरिए HPCL को एक नया टेक-इनेबल्ड चैनल मिला है, जिससे वे युवाओं, नए शहर में शिफ्ट होने वाले लोगों और डिजिटल फ्रेंडली ग्राहकों तक तेजी से पहुंच बना सकते हैं। डिलीवरी के दौरान सेफ्टी की जिम्मेदारी किसकी होगी? सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी HPCL के ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क और उनके प्रोफेशनल डिलीवरी स्टाफ की होगी। इंस्टामार्ट के CEO अमितेश झा ने कहा कि क्विक कॉमर्स ऐप से बुकिंग होने के बावजूद सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। ग्राहकों के ऑर्डर सीधे HPCL के ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क से पूरे किए जाएंगे। सिलेंडरों की डिलीवरी सामान्य स्विगी राइडर्स नहीं, बल्कि HPCL के ट्रेंड और प्रोफेशनल डिस्ट्रीब्यूटर स्टाफ ही करेंगे, जो सभी लागू सेफ्टी और रेगुलेटरी नियमों का पालन करने के लिए जिम्मेदार होंगे। क्या अन्य गैस कंपनियां भी इसे फॉलो कर सकती हैं? जी हां, बिल्कुल कर सकती हैं। भारत में क्विक कॉमर्स का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। HPCL और इंस्टामार्ट की यह पार्टनरशिप देश में अपनी तरह का पहला और पायलट यानी शुरूआती प्रोजेक्ट है। अ गर बेंगलुरु में यह मॉडल सफल रहता है, तो कॉम्पिटिशन को देखते हुए इंडेन और भारत गैस जैसी अन्य बड़ी सरकारी व निजी कंपनियां भी ब्लिंकिट या जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ इस तरह की पार्टनरशिप कर सकती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म से ग्राहकों की पहुंच बढ़ेगी HPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर अमित गर्ग ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से ग्राहकों की पहुंच बढ़ेगी। इंस्टामार्ट ने ग्रॉसरी से आगे बढ़कर अब ग्राहकों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनने के लिए अपनी सर्विसेज का काफी विस्तार किया है। साथ मिलकर हम उसी सुविधा को एक और जरूरी घरेलू सर्विस तक पहुंचा रहे हैं। हम ग्राहकों की सुरक्षा और भरोसे से समझौता किए बिना LPG डिलीवरी को इंस्टामार्ट पर लेकर आए हैं। ग्राहकों की जरूरतें बदल रही हैं और हम उनके लिए लगातार नए समाधान ला रहे हैं। हमारा उद्देश्य डिजिटल रूप से सक्षम प्लेटफॉर्म के जरिए देश के लोगों के लिए LPG गैस की पहुंच को आसान बनाना है। साथ ही सुरक्षा, विश्वास और विश्वसनीयता के उसी मानक को बनाए रखना है जो हमेशा से HP गैस के साथ जुड़ा रहा है। बेंगलुरु के बाहर सर्विस कब मिलेगी, अभी तय नहीं वर्तमान में स्विगी इंस्टामार्ट भारत के 131 से ज्यादा शहरों में 50,000 से ज्यादा एसकेयू (SKUs) यानी प्रोडक्ट्स की डिलीवरी करता है। एलपीजी डिलीवरी सेगमेंट में उतरना कंपनी के लिए हाई-ट्रस्ट कैटेगरीज में एंट्री का हिस्सा है। वहीं HPCL के लिए यह साझेदारी अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को एक नए टेक-इनेबल्ड चैनल में विस्तार देने जैसी है। दोनों कंपनियों ने फिलहाल बेंगलुरु से बाहर इस सर्विस को बढ़ाने की टाइमलाइन शेयर नहीं की है। क्या होता है ‘कंपोजिट’ सिलेंडर? ट्रेडिशनल गैस सिलेंडर भारी लोहे या स्टील के बने होते हैं, जिनका वजन खाली होने पर भी काफी ज्यादा होता है। इसके विपरीत, कंपोजिट सिलेंडर तीन परतों वाले फाइबरग्लास मटीरियल से बने होते हैं। ये जंगरोधी होते हैं और इनमें जंग लगने की वजह से गैस लीक होने का खतरा नहीं रहता। हल्के होने के साथ-साथ इनका लुक भी मॉडर्न होता है, जिससे यह शहरी घरों और आधुनिक किचन के लिए बेहतर होते हैं। ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे: भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर पढ़ें…

पंजाब- RAF जवान ने मरने कूदी महिला को बचाया,VIDEO:श्री अमरनाथ यात्रा की ड्यूटी पर तैनात था, डूबती महिला देख नहर में छलांग लगाई

पठानकोट में बुधवार को श्री अमरनाथ यात्रा की स्पेशल ड्यूटी पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) जवान ने एक महिला के लिए अपनी जान को दांव पर लगा दिया। महिला आत्महत्या करने की नीयत से रंजीत सागर डैम से नहर में छोड़े गए पानी में कूद गई थी। पानी का बहाव तेज होने के चलते महिला उसमें डूबी जा रही थी, तभी RAF जवान की नजर उस पर पड़ी। जवान ने अदम्य साहस दिखाते हुए फौरन नहर में छलांग लगा दी और महिला को सुरक्षित नहर से निकाल लिया। यह पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में भी कैद हुई। इसमें महिला नहर में कूदने से पहले किनारे पर खड़ी दिखाई भी देती है। फिर एकदम से नहर में कूद जाती है। जवान के इस क्विक रिस्पॉन्स की काफी सराहना हो रही है। महिला के नहर में कूदने के 2 PHOTOS… पुलिस ने मामले की यह जानकारी दी… लेडी कांस्टेबल बोली- 50 लोग खड़े थे, किसी ने नहीं दिखाई हिम्मत लेडी कांस्टेबल दीक्षा ने बताया कि जब महिला ने नहर में छलांग लगाई, उस समय पानी का बहाव बेहद तेज था। उन्होंने महिला को पानी में ऊपर-नीचे जाते देखा तो तुरंत नाके पर तैनात RAF के हवलदार संतोष यादव को इसकी जानकारी दी। इसके बाद हवलदार संतोष तुरंत मंदिर की ओर गए और रस्सी लेकर पहुंचे। इस बीच महिला तेज बहाव में बहते हुए एक पुल को पार कर चुकी थी। घटना के दौरान मौके पर 50 से अधिक लोग जमा हो गए थे। लोग शोर मचाकर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन तेज बहाव के कारण कोई भी पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। इसी बीच हवलदार संतोष कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना नहर में छलांग लगा दी और काफी मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। महिला को प्राथमिक इलाज दिया जा रहा थाना-2 के प्रभारी इंस्पेक्टर अमित सिंह ने कहा कि अगर हवलदार संतोष यादव समय पर आगे नहीं आते, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल, महिला को प्राथमिक इलाज दिया जा रहा है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। महिला अधिकारियों की ओर से उसकी काउंसलिंग भी की जाएगी। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… अमृतसर में भतीजे को किडनैप करने दौड़ी बुआ, बैग-चप्पल छोड़ भागा बच्चा अमृतसर में 10 वर्षीय बच्चे के अपहरण की कोशिश की गई। मां का आरोप है कि स्कूल से लौट रहे बच्चे को उसकी सगी बुआ ने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर अगवा करने की कोशिश की। बच्चा किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर रेलवे क्वार्टर के परिसर में उगी झाड़ियों में छिप गया। पढ़ें पूरी खबर…

वेंटिलेटर का ऑक्सीजन पाइप नहीं लगाया, मरीज की मौत:परिजनों ने किया हंगामा, अस्पताल ने गलती मानी; सिर के ऑपरेशन के बाद ICU में थे भर्ती

भीलवाड़ा में रामस्नेही हॉस्पिटल में स्टाफ की लापरवाही के कारण एक मरीज के मौत हो गई। हॉस्पिटल स्टाफ वेंटिलेटर का ऑक्सीजन पाइप लगाना भूल गया था। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। अस्पताल प्रबंधन के गलती मानने पर परिजन शांत हुए। उन्होंने लिखित में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। एक्सीडेंट के बाद हॉस्पिटल में कराया था एडमिट मृतक के भांजे गौतम मेघवंशी ने बताया- रायला में रहने वाले घीसू लाल मेघवंशी (52) प्राइवेट कंपनी में गार्ड सुपरवाइजर थे। 8 जुलाई की शाम को उनका मांडल-रायल नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट हो गया था। हादसे के बाद मौके पर मौजूद भीड़ ने एंबुलेंस की सहायता से उनको हॉस्पिटल भिजवाया गया। तब से ही वो रामस्नेही हॉस्पिटल के ICU में एडमिट थे। यहां उनके सिर का ऑपरेशन किया गया था और इलाज चल रहा था। मरीज की तबीयत बिगड़ी, ICU में नहीं था हॉस्पिटल स्टाफ गौतम ने बताया- मंगलवार देर रात को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना से जुड़ी कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए मरीज को ICU वार्ड से नीचे काउंटर पर लाया गया था। फॉर्मेलिटी पूरी होने के बाद मरीज को वापस आईसीयू में ले जाया गया था। आईसीयू में मौजूद स्टाफ वेंटिलेटर का ऑक्सीजन पाइप लगाना भूल गया। पाइप नहीं जुड़ने के कारण कुछ देर बाद ही मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। इस दौरान ICU में हॉस्पिटल का कोई स्टाफ नहीं था। काउंटर पर जानकारी देने के काफी देर बाद स्टाफ मरीज के पास पहुंचा, लेकिन तब तक मरीज की मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दी भीमगंज थाना प्रभारी सुनील चौधरी ने बताया- मंगलवार रात 11:30 बजे प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया था। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। अस्पताल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही मानी तो परिजन शांत हुए। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी और कार्रवाई की मांग की। फिलहाल परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

युवक ने ड्राइवर सीट छोड़कर जीप चलाई, VIDEO:पुलिस ने गिरफ्तार किया तो बोला- इसे फॉलो करने की गलती नहीं करें

उदयपुर में एक युवक को जीप से स्टंटबाजी करना भारी पड़ गया। युवक ड्राइविंग सीट छोड़कर साथ वाली सीट पर बैठकर ओपन जीप चला रहा था। वीडियो उदयपुर के अंबामाता थाना क्षेत्र में शिल्पग्राम-फतेहसागर रोड का है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने युवक ऋत्विक सुखवाल पुत्र पंकज सुखवाल को गिरफ्तार कर लिया है। कार जब्त कर ली गई है। गिरफ्तारी के बाद युवक ने माफी मांगी। आगे से ऐसा नहीं करने की बात कही। लोगों से भी ऐसा नहीं करने की अपील की। बाद में युवक को पाबंद करके छोड़ दिया गया। लोगों ने ट्रेफिक रूल्स का उल्लंघन बताया था दरअसल, वीडियो 11 जुलाई को सोशल मीडिया पर सामने आया था। ​वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इसे ट्रेफिक रूल्स का उल्लंघन बताते हुए सवाल खड़े किए थे। ऐसे स्टंट को अन्य वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था। इसके बाद पुलिस ने 14 जुलाई शाम को युवक को गिरफ्तार किया। पुलिस ने थाने में युवक का एक माफीनाम वीडियो जारी किया। इसमें युवक बोल रहा है कि यह जानलेवा स्टंट है। कोई भी इसे फॉलो करने की गलती नहीं करें। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। भविष्य में ऐसा नही करूंगा। थाने के एसआई अजयराज सिंह ने बताया- स्टंट करने वाले ऋत्विक सुखवाल को आगे से ऐसी स्टंट वाली वीडियो नहीं बनाने के लिए पाबंद किया है। युवक कॉलेज में पढ़ाई करता है। पुलिस द्वारा आमजन से भी अपील है कि वे लाइक और व्यूज के चक्कर में ऐसी वीडियो नहीं बनाएं।

सुप्रीम कोर्ट बोला-CBSE के डिजिटल मार्किंग सिस्टम से छात्र निराश:बोर्ड से पूछा सुधार के लिए अब तक क्या किया; केंद्र से मदद मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर छात्रों की नाराजगी पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, “देखिए, छोटे-छोटे बच्चों में कितनी निराशा है।” कोर्ट ने कहा कि सरकार से किसी टकराव की मंशा नहीं है, लेकिन व्यवस्था में कुछ समस्याएं हैं। कोर्ट ने CBSE की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है। साथ ही केंद्र से सहयोग करने की बात कही है। CBSE का OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम ऐसी व्यवस्था है, जिसमें ऑन्सर शीट की स्कैन कॉपी कंप्यूटर पर जांची जाती है। शिक्षक कागज की कॉपी देखने के बजाय डिजिटल स्क्रीन पर मूल्यांकन करते हैं। कोर्ट में सरकार के 3 तर्क… याचिका में स्पष्ट नियमावली की मांग यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला ने वकील लक्ष्मीकांत मटादन शुक्ला के माध्यम से दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार और CBSE को निर्देश देने की मांग की गई है कि बोर्ड परीक्षाओं के लिए OSM मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी स्पष्ट नियमावली बनाई जाए। इस व्यवस्था की निगरानी और सुधार लागू करने के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित की जाए। जिन स्टूडेंट्स को पहले ही प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उन्हें मिनिमम क्वॉलिफाइंग मार्क्स में राहत दी जाए। विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए निर्धारित 75 प्रतिशत या अन्य न्यूनतम कक्षा 12 अंक की शर्त से भी छूट देने का निर्देश दिया जाए। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें: सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव को हटाया: विवादित ऑन स्क्रीन मार्किंग के टेंडर की जांच के आदेश केंद्र सरकार ने मंगलवार को ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद के बीच CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया। इसके अलावा OSM सर्विस के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। पढ़ें पूरी खबर…

नोएडा में 4 मंजिला बिल्डिंग में आग, 2 जिंदा जले:नोएडा में सीढ़ियों के सहारे 50 परिवारों को बचाया, स्कूटी चार्जिंग के दौरान धमाके से आग लगी

नोएडा में बुधवार सुबह 11 बजे 4 मंजिला बिल्डिंग में आग लग गई। हादसे में 2 लोग जिंदा जल गए। एक बच्चा और एक युवती गंभीर रूप से झुलस गए। फायर ब्रिगेड ने सीढ़ियों के सहारे 50 परिवारों का रेस्क्यू किया। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि बिल्डिंग के बेसमेंट में इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्ज हो रही थी। इसी दौरान उसमें धमाका हुआ और आग लग गई। देखते ही देखते आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। 30 से 40 बाइकें जलकर राख हो गईं। धुआं उठता देखकर बिल्डिंग के आसपास रहने वाले सैकड़ों लोग सड़क पर आ गए। बिल्डिंग के निचले हिस्से में फंसे लोग बाहर निकल गए, लेकिन ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोग फंस गए। सूचना पर फायर ब्रिगेड की 7 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन भीड़ और संकरी गलियों के चलते वे बिल्डिंग तक नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में गाड़ियों को सड़क पर ही खड़ा करना पड़ा। इसके बाद पाइप जोड़कर आग पर काबू पाया गया। इसमें करीब 3 घंटे लगे। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने जिस बिल्डिंग में आग लगी थी, उसकी छत से सामने वाली बिल्डिंग तक सीढ़ियां लगाकर पुल बनाया। फिर उसके सहारे लोगों को दूसरी बिल्डिंग में सुरक्षित पहुंचाया। पुलिस ने बिल्डिंग मालिक को हिरासत में ले लिया है। हादसे में जान गंवाने वाली लड़की स्नेहा श्रीवास्तव (22) बिहार की रहने वाली थी। वहीं युवक ऋषभ कुमार मध्यप्रदेश के सिवनी का रहने वाला था। दोनों नोएडा में निजी कंपनी में काम करते थे। बिल्डिंग में करीब 50 कमरे थे। आग सेक्टर-66 के ममूरा इलाके में लगी। यह भीड़भाड़ वाला इलाका है। यहां बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग परिवार के साथ रहते हैं। आग की 4 तस्वीरें देखिए- आग से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

बफेट-गेट्स की 20 साल पुरानी दोस्ती में दरार:3.5 लाख करोड़ देने वाले बफेट ने एपस्टीन जांच पूरी होने तक रोका दान

दुनिया के सबसे बड़े और सफल निवेशकों में शुमार वॉरेन बफे और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स की दोस्ती दशकों पुरानी है। दोनों ने मिलकर ‘द गिविंग प्लेज’ शुरू किया था। यह अरबपतियों को संपत्ति दान करने के लिए प्रेरित करने वाला अभियान है। बफे खुद गेट्स फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी रह चुके हैं और 2022 तक उसे 3.46 लाख करोड़ दान में दे चुके थे। लेकिन इस साल कहानी बदल गई। बफे ने गेट्स फाउंडेशन को कुछ नहीं दिया। इसकी बजाय, 95 साल के बफे ने बर्कशायर हैथवे के करीब 6 अरब डॉलर (57,600 करोड़) के शेयर अपने परिवार से जुड़े चार फाउंडेशन को सौंप दिए। इसकी एक खास वजह है। गेट्स फाउंडेशन ने बाहरी वकीलों को बुलाकर एक जांच शुरू करवाई है। पता लगाया जा रहा है कि दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ फाउंडेशन के क्या संबंध थे। बफे इसी जांच का नतीजा आने का इंतजार कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने फाउंडेशन को दान रोक दिया। असल कहानी यहीं से दिलचस्प मोड़ लेती है। बफे ने इस साल मार्च में सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में साफ कह दिया था कि वे अब गेट्स से बात नहीं करते। उन्होंने कहा, ‘हमने साथ बहुत अच्छा वक्त बिताया, लेकिन जब तक यह मामला साफ नहीं होता, मुझे नहीं लगता कि ज्यादा बातचीत करना ठीक है।’ गेट्स ने पिछले महीने अमेरिकी संसद की एक समिति के सामने गवाही दी कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की जानकारी नहीं थी। बफे ने भी साफ किया कि उनकी एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने गेट्स से इस विवाद पर कभी बात नहीं की क्योंकि वे नहीं चाहते कि उन्हें गेट्स-एपस्टीन संबंधों पर गवाही देने के लिए बुलाया जाए। हालांकि उम्र और इस विवाद के बावजूद बफे की दानशीलता कम नहीं हुई है। बफे ने कहा है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनके तीनों बच्चे 31 2034 तक बर्कशायर हैथवे में उनकी पूरी हिस्सेदारी बांट देंगे। फाउंडेशन के बोर्ड से हट चुके हैं 31 लाख करोड़ की संपत्ति के मालिक बफे बर्कशायर हैथवे की कुल वैल्यू करीब 1.1 ट्रिलियन डॉलर (105.7 लाख करोड़ रुपए) आंकी गई है। इसमें बफे की हिस्सेदारी लगभग 30% है। यानी अकेले उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू 31.7 लाख करोड़ बैठती है। बफे 2021 में गेट्स फाउंडेशन के बोर्ड से इस्तीफा दे चुके हैं। लेकिन तब से हर साल हजारों करोड़ रुपए का दान जारी रखे हुए थे। लेकिन इस साल उन्होंने यह सिलसिला तोड़ दिया।

सोनम वांगचुक के अनशन पर दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई:कोर्ट ने केंद्र-दिल्ली सरकार से जवाब मांगा; वांगचुक 18 दिन से भूख हड़ताल पर, सेहत बिगड़ी

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को बहुत जरूरी माना। केंद्र और दिल्ली सरकार से गुरुवार सुबह तक जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने यह सुनवाई एक जनहित याचिका पर की। इसमें वांगचुक को तुरंत मेडिकल सुविधा और इलाज देने की मांग की गई है। वांगचुक NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी हालत लगातार गिरती जा रही है। 8:50 किग्रा तक वजन गिर गया है। वांगचुक की भूख हड़ताल की 3 तस्वीरें… याचिका में इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने की मांग CJP का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नीट पेपर लीक के विरोध में 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सोनम वांगचुक भी उनके आंदोलन में शामिल हैं। CJP चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने के बाद बनी थी। थरूर ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा- सोनम वांगचुक जी से मेरी भावनात्मक अपील है कि वे अपना अनशन समाप्त करें। आपने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और किसी भी अनशन का यही उद्देश्य होता है। देश को आगे की लंबी लड़ाई के लिए आपकी आवाज की जरूरत है। सोमवार से संसद का सत्र शुरू हो रहा है। हमें लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर छात्रों के मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इन समस्याओं का समाधान संसद में होना चाहिए, न कि किसी की जान जोखिम में डालने वाले अनशन से। कृपया मेरी अपील स्वीकार करें। लद्दाख को राज्य की मांग को लेकर वांगचुक 170 दिन जेल में रहे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए। सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया। इरोम शर्मिला करीब 16 साल भूख हड़ताल पर रहीं वांगचुक को भूख हड़ताल करते हुए 18 दिन हो गए हैं। महात्मा गांधी से लेकर जीडी अग्रवाल तक कई नेता-सामाजिक कार्यकर्ता अलग-अलग मांगों को लेकर भूख हड़ताल करते रहे हैं। इरोम शर्मिला मणिपुर से AFSPA हटाने की मांग को लेकर 16 साल भूख हड़ताल पर रहीं। 3 हफ्ते से ज्यादा भूखा रहने पर दूसरे बॉडी पार्ट्स पर असर ———————————— ये खबरें भी पढ़ें… वांगचुक 17 दिन से अनशन पर, 8.5kg वजन घटा, उद्धव-महुआ और अखिलेश की भूख हड़ताल खत्म करने की अपील सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 17 दिन हो चुके हैं। उनका वजन 8.5kg कम हो गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एक्टर नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, राइटर अरुंधति रॉय समेत कई प्रमुख हस्तियों ने सोनम से अनशन खत्म करने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें… कॉकरोच पार्टी फाउंडर दीपके ने पुलिस के पैर पकड़े, जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की इजाजत मांगी नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 20 दिन से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने पुलिसवालों के पैर पकड़े और हाथ जोड़े। वे टेंट लगाने की इजाजत मांग रहे थे ताकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बारिश से बचाया जा सके। पूरी खबर पढ़ें…