महालेखाकार ने उठाए सवाल:ऊर्जा सलाहकार की नियुक्ति पर ऑडिट का ‘करंट’: पद था नहीं, विज्ञापन भी नहीं निकाला… और नियुक्ति दे दी
ऊर्जा विभाग में ऊर्जा सलाहकार के पद पर हुई नियुक्ति अब ऑडिट की जांच के घेरे में आ गई है। महालेखाकार (ऑडिट) ने ऊर्जा विभाग को प्राइमरी ऑब्जेक्शन मेमो जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और नियमों के पालन पर जवाब मांगा है। ऑडिट में पूछा है कि जब विभाग में ऊर्जा सलाहकार का कोई स्वीकृत नियमित पद ही नहीं था तो नियुक्ति किस आधार पर की गई। महालेखाकार द्वारा सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी (एनर्जी) को भेजे गए मेमो में राजस्थान सिविल सर्विस रूल्स-2013 का हवाला देते हुए पद सृजन की सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी और वित्त विभाग की स्वीकृति संबंधी जानकारी मांगी गई है। हालांकि विभाग में इस बात की भी चर्चा है कि क्या डिस्कॉम्स के पास कोई योग्य अधिकारी नहीं हैं ? जो जयपुर डिस्कॉम के एक्स एमडी नवीन अरोड़ा को नियुक्ति दी गई है। आपत्ति… पद का दायित्व, कार्यक्षेत्र स्पष्ट किए बिना दी नियुक्ति ऊर्जा विभाग का तर्क: विभाग अपने जवाब में यह बताने की तैयारी कर रहा है कि ऊर्जा सलाहकार के रूप में नियुक्त नवीन अरोड़ा अनुभवी टेक्नोक्रेट हैं और उनकी विशेषज्ञता का लाभ बिजली कंपनियों, घाटा कम करने की योजनाओं तथा केंद्र और राज्य सरकार की ऊर्जा परियोजनाओं को मिल रहा है। विभाग यह भी तर्क दे सकता है कि पूर्व में भी विशेषज्ञ सलाहकारों की नियुक्तियां की जाती रही हैं। ऑडिट में दूसरी आपत्ति यह है कि पद के अधिकार, दायित्व और कार्यक्षेत्र स्पष्ट किए बिना नियुक्ति कर दी गई। ऑडिट में पूछा गया कि पद के लिए विज्ञापन जारी क्यों नहीं किया और आवेदन आमंत्रित किए बिना सीधे नामांकन के आधार पर चयन क्यों हुआ। अनुभव के आधार पर नियुक्ति की गई, उसका मूल्यांकन किस प्रक्रिया से किया गया। ये कोई स्वीकृत पद नहीं है। अनुभव के आधार पर ऊर्जा सलाहकार लगाया गया है। इससे पहले भी सरकारों में ऊर्जा सलाहकार लगाए जाते रहे हैं। इसकी वित्त विभाग से स्वीकृत ली हुई है। ये सलाहकार अनुभवी होते हैं, इसलिए समय समय पर ये सरकारों को सलाह देते हैं। -हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री, राजस्थान

