ब्रेकिंग न्यूज़
बारां के जैन मंदिर में अभिषेक-शांतिधारा संपन्न:मुनिश्री गुरुदत्त सागर ने बच्चों को दिए संस्कार के संदेश

बारां में आचार्य 108 निर्भय सागर मुनिराज के शिष्य मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज और क्षुल्लक मेरुदत्त सागर महाराज ससंघ संत भवन में विराजमान हैं। रविवार को उनके सान्निध्य में जैन जोड़ला मंदिर में भगवान का अभिषेक और शांतिधारा श्रद्धापूर्वक संपन्न हुई। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और विद्यासागर पाठशाला के बच्चों ने धर्मोपदेश का लाभ लिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज ने कहा कि जिस प्रकार कुम्हार साधारण मिट्टी को संवारकर दीपक, घड़ा या मूर्ति का रूप देता है, उसी तरह गुरु भी अज्ञान रूपी जीवन को ज्ञान, संस्कार और सदाचार से श्रेष्ठ बनाते हैं। उन्होंने गुरु के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गुरु ही आत्मा को अज्ञान के अंधकार से निकालकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। मुनिश्री ने माता-पिता के दायित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका कर्तव्य केवल बच्चों का पालन-पोषण करना नहीं है। उन्हें धर्म, संस्कार, भगवान की भक्ति, देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धा और जिनवाणी के अध्ययन का संस्कार देना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में धर्म को सर्वोच्च स्थान देने का आह्वान किया। मुनिश्री ने कहा कि जब जीवन के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब धर्म का मार्ग हमेशा खुला रहता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका वास्तविक जीवन अभी प्रारंभ ही नहीं हुआ है। धर्मसभा के बाद मुनिश्री की आहारचर्या संपन्न हुई। संत भवन में इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन धार्मिक और ज्ञानवर्धक कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें धर्म, संस्कार, आचार-विचार और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *