कुत्ते के काटने पर अब त्वचा पर ही लगेगा टीका, घाव पर टांके भी नहीं लगेंगे; विभाग को पोर्टल पर एंट्री करनी होगी
डॉग बाइट और रैबीज के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने इलाज और प्रोटोकॉल को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें डॉग बाइट सहित रैबीज से जुड़े विभिन्न मामलों के उपचार को लेकर निर्देश दिए गए हैं। इसमें कुत्ते के काटने पर त्वचा पर ही टीका लगाए जाना, घाव पर टांके नहीं लगाना आदि निर्देश शामिल है। वहीं अब विभाग को इन मामलों को ऑनलाइन रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसके लिए ऐसे हर मामले को पीसीपीएफ पोर्टल पर इंद्राज किया जाएगा। नई गाइडलाइन में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब अस्पतालों में रैबीज के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक एंटी रैबीज वैक्सीन और एंटी रैबीज सीरम की कोल्ड चेन (तय तापमान पर सुरक्षित रखना) बनाए रखना अनिवार्य होगा। विभाग ने साफ किया है कि पशु के काटने पर घाव पर प्राथमिक टांके नहीं लगाए जाएंगे। अगर टांके लगाना बहुत जरूरी हुआ, तो पहले घाव में रैबीज से लड़ने वाली दवा (इम्यूनोग्लोबुलिन) भरी जाएगी। साथ ही अब वैक्सीन को मांस में लगाने के बजाय त्वचा के अंदर लगाना ज्यादा प्रभावी माना गया है। अगर मरीज के पूरा वैक्सीनेशन होने के तीन महीने के भीतर दोबारा बाइट होने पर घाव धोने के अलावा वैक्सीन की जरूरत नहीं होगी। वहीं 3 महीने बाद काटने पर सिर्फ शून्य व तीसरे दिन दो डोज लगाएंगे।

