निकाय चुनाव सितंबर में प्रस्तावित:भाजपा के 30 साल के गढ़ को ढहाने की तैयारी में कांग्रेस, अस्थायी कार्यालय शुरू किया
नगर निगम सहित प्रदेशभर में निकाय चुनाव सितंबर में प्रस्तावित हैं। परिसीमन के बाद इस बार उदयपुर में 70 की जगह 80 वार्डों पर मतदान होगा। वार्ड बढ़ने से नए सियासी समीकरण बने हैं और भाजपा-कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 1994 से लगातार छह चुनावों से निगम बोर्ड पर काबिज भाजपा इस बार अंदरूनी असंतोष और विवादों से दबाव में है। शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह की कार्यकारिणी से पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया समर्थित वरिष्ठ नेताओं को दूर रखने से असंतोष है। ‘उदयपुर फाइल्स’ विवाद के बाद संगठन की एकजुटता पर भी सवाल हैं। यह चुनाव गजपाल की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। वहीं दोबारा शहर कांग्रेस अध्यक्ष बने फतह सिंह राठौड़ ने मोर्चा संभाल लिया है। कांग्रेस ने शास्त्री सर्कल के पास अस्थायी चुनाव कार्यालय शुरू कर दिया। पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया व महामंत्री दिनेश कुमार दवे भी मौजूद रहे। भाजपा: 6 चुनावों से अजेय, इस बार अपनों की चुनौती 6 चुनावों से जीत रही भाजपा के लिए इस बार राह आसान नहीं है। शहर भाजपा संगठन में डेढ़ साल से जारी अंतर्कलह सामने आ रही है। जिला कार्यकारिणी में गुलाबचंद कटारिया समर्थित वरिष्ठ व पूर्व पदाधिकारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हालांकि, जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह का कहना है कि भाजपा में गुटबाजी नहीं है और संगठन सर्वोपरि है। 10 वार्ड बढ़ने के कारण टिकट दावेदारों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में टिकट वितरण के दौरान बगावत भी बढ़ सकती है। कांग्रेस: नए चेहरों पर दांव और वार्ड स्तर पर घेराबंदी कांग्रेस ने भी इस बार अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी स्थानीय जन समस्याओं जैसे सड़क, सफाई, जल निकासी, पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था को भी प्रमुखता से उठाएगी। चुनाव कार्यालय की शुरुआत के साथ ही कांग्रेस ने वार्ड और बूथ स्तर पर घर-घर जनसंपर्क के निर्देश दिए हैं। संगठन विस्तार के तहत नई कार्यकारिणी की भी जल्द घोषित होंगे। 80 वार्ड होने से इस बार नए और युवा चेहरों को मौका मिल सकता है।

