पुलिस अधि. 2008 में संशोधन, 18 साल पुरानी रोक हटी:पुलिस CLG में ‘राजनीतिक भर्ती’…75 हजार पार्टी कार्यकर्ताओं की राह खुली
राजस्थान सरकार ने समुदाय संपर्क समूह (सीएलजी) के गठन से जुड़ा 18 साल पुराना नियम बदलते हुए राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी सदस्य बनाए जाने का रास्ता खोल दिया है। गृह विभाग की अधिसूचना के बाद अब प्रदेश के 37 पुलिस जिलों, जयपुर-जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट और एक हजार से अधिक थानों में बनने वाले 75 हजार से ज्यादा सीएलजी पदों पर राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी नियुक्त हो सकेंगे। अब तक राजस्थान पुलिस अधिनियम-2008 के तहत राजनीतिक दलों अथवा उनसे संबद्ध संगठनों के पदाधिकारियों और सदस्यों को सीएलजी में शामिल करने पर रोक थी। संयुक्त सचिव मनीष गोयल की ओर से जारी अधिसूचना में इसी शर्त को हटाया गया है। सदस्य चयन की बाकी प्रक्रिया यथावत रहेगी। थाना प्रभारी और वृताधिकारी की अनुशंसा पर पुलिस अधीक्षक नियुक्ति करेंगे। यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सीएलजी सदस्य पुलिस और जनता के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। वे अपराधों की सूचना देने, सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति में पुलिस की मदद करने, त्योहारों और जुलूसों के दौरान समन्वय बनाने तथा स्थानीय समस्याओं को पुलिस तक पहुंचाने जैसे संवेदनशील दायित्व निभाते हैं। महिला, एससी और एसटी के दो-दो प्रतिनिधि शामिल होंगे ग्रुप में संपत्ति विवाद में फंसे लोगों को एंट्री नहीं मिलेगी बदलाव अहम क्यों है?
बदलाव ऐसे समय हुआ है जब प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनावों होने हैं। विपक्ष राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने और सरकार इसे अधिक जनभागीदारी का प्रयास बता सकती है।

