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पीवी सिंधु जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय बनीं:2 साल बाद कोई टाइटल जीता, यामागुची को 21-17, 21-17 से हराया

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने जापान ओपन सुपर-750 बैडमिंटन टूर्नामेंट जीत लिया है। वे यह टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय बनी हैं। 31 साल की सिंधु ने रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराया। यह मैच 50 मिनट तक चला। सिंधु 4 साल बाद यामागुची को किसी फुल मैच में हरा सकी हैं। उन्हें पिछली जीत थाईलैंड ओपन में 2022 में मिली थी। पिछले साल मलेशिया ओपन में यामागुची रिटायर हर्ट हो गई थीं। 2019 के बाद पहला बड़ा खिताब जीतीं आगे जानिए क्या है सुपर-750 बैडमिंटन टूर्नामेंट… सेमीफाइनल में चेन यू फेई चोटिल होकर बाहर हुईं सेमीफाइनल में चीन की चेन यू फेई हैम्स्ट्रिंग चोट के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गईं। उस समय सिंधु 21-19, 15-10 से आगे थीं। इससे पहले सिंधु ने जापान की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन नोजोमी ओकुहारा चोट के कारण नहीं उतरीं, जिससे सिंधु को वॉकओवर मिला। इससे पहले दूसरे दौर में सिंधु ने चीन की हान यू को 35 मिनट में 21-16, 21-14 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। ————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… कॉमनवेल्थ गेम्स में चानू और लवलीना होंगी भारत की ध्वजवाहक, IOA ने ऐलान किया ओलंपिक मेडलिस्ट मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक होंगी। भारतीय ओलंपिक संघ ने शनिवार को इसकी घोषणा की। इस मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर

फुटबॉल वर्ल्डकप फाइनल का क्रेज:कोलकाता में परीक्षा टली; बेंगलुरु में होटल-रेस्टोरेंट देर तक खुलेंगे, गुवाहाटी में स्पेशल डिश

दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मैच आज रात 12:30 बजे से खेला जाएगा। इसमें अर्जेंटीना और स्पेन की टीमें वर्ल्ड चैंपियन के ट्रैग के लिए आमने-सामने होंगी। लियोनेल मेसी की टीम लगातार दूसरा खिताब जीतना होगी, जबकि लामिल यमाल की टीम को दूसरे टाइटल की तलाश है। फाइनल का क्रेज भारत में भी देखने को मिल रहा है। सबसे ज्यादा दीवानगी कोलकाता में है। यहां स्पोर्ट्स बार, मल्टीप्लेक्स, क्लब और मोहल्लों के मैदानों पर बड़ी स्क्रीन लग चुकी है। जुनून इस हद तक है कि स्कूलों ने 20-21 जुलाई की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। बेंगलुरु पुलिस और असम सरकार ने होटल, रेस्तरां और क्लबों को सुबह 3:30 बजे तक खुला रखने की अनुमति दी है। प्रसेनजीत- अर्जेंटीना के सबसे ज्यादा फैंस कोलकाता में हैं
मोहन बागान क्लब के सदस्य प्रसेनजीत सरकार ने बताया, ‘बंगाल में कोई कहे कि उसे फुटबॉल पसंद नहीं है, तो उसके बंगाली होने पर ही सवाल उठ सकता है। कोलकाता में अर्जेंटीना के समर्थक सबसे ज्यादा हैं। अर्जेंटीना जीता तो जश्न वैसा ही होगा, जैसा भारत के क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने पर होता है।’ गुवाहाटी के फाइव स्टार होटल्स में वर्ल्डकप थीम पर डिश गुवाहाटी के एलीट क्लब्स और फाइव-स्टार होटल्स के ‘वर्ल्ड कप थीम’ में ‘मेसी किक बर्गर’ और ‘स्पेनिश ट्रॉफी मॉकटेल’ जैसे व्यंजन शामिल हैं। कई नामचीन पब्स और लाउंज ने ‘जर्सी ड्रेस कोड’ अनिवार्य किया है। रेस्तरां के फर्श पर आर्टिफिशियल टर्फ बिछाई है। स्टाफ भी हाथों में व्हिसल और जर्सी पहनकर सर्व कर रहे हैं। रात में फैंस के झगड़े नहीं हों, इसलिए पुलिस की तैनाती कोच्चि के ईगल एफसी फुटबॉल क्लब ने बड़ी स्क्रीन पर लाइव स्ट्रीमिंग के लिए टिकट की कीमत 90 से 500 रुपए रखी है। फाइनल मैच की बुकिंग पूरी हो चुकी है। जीत के बाद फैंस झगड़ न पड़ें, इसलिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहेगा। कई स्कूलों ने सोमवार को छुट्टी की घोषणा कर दी है। केरल के स्कूलों में छुट्‌टी घोषित की गई केरल के सामान्य शिक्षा विभाग ने सोमवार (20 जुलाई) को अपने अधीन आने वाले सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह फैसला उन छात्रों की मांग पर लिया गया, जो देर रात होने वाले फाइनल मुकाबले को देखना चाहते थे। सामान्य शिक्षा मंत्री एन. समसुद्दीन ने सोशल मीडिया पर छुट्टी की घोषणा करते हुए लिखा, ‘अब खुश हो बच्चे?’ उन्होंने कहा कि छात्रों के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। ————————————————– फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल आज, टूर्नामेंट में 60 साल बाद भिड़ेंगे स्पेन और अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला आज स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होगा। टूर्नामेंट में दोनों टीमें 60 साल बाद आमने-सामने हो रही हैं। न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में रात 12:30 बजे से मुकाबला खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर

जयपुर- 250 साल पुरानी हवेली से निकली खजाने वाली तिजोरियां:एक ठेकेदार लेकर भागा; परिवार का दावा- दादी ने कहा था यहां है सोने-चांदी का भंडार

जयपुर में करीब 250 साल पुरानी बंबई वालों की हवेली की दीवार से खजाने वाली दो तिजोरी निकलने का दावा किया गया है। परिवार का आरोप है कि इनमें से एक छोटी तिजोरी खुदाई करने वाला ठेकेदार चोरी-छिपे ले गया। इधर, हवेली के मालिक का कहना है कि उसने ये हवेली दो और पार्टनर के साथ इसी साल अप्रैल में खरीदी थी। शुक्रवार (17 जुलाई) को पुराने निर्माण को तोड़ने के दौरान तिजोरी निकली हैं, लेकिन उसमें केवल कचरा निकला है। वहीं, माणक चौक थाना पुलिस का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है। इसी थाने में ही 15 जुलाई को एक और हवेली में खजाना निकलने और चोरी का केस दर्ज हुआ था। दोनों ही हवेली में खुदाई एक ही ठेकेदार ने की है। उसी पर चोरी के आरोप भी हैं। वहीं, बंबई वालों की हवेली से जुड़े परिवार का आरोप है कि उनकी दादी ने कहा था कि यहां खजाना गढ़ा है। सबसे पहले देखिए- बंबई वालों की हवेली में खुदाई की PHOTOS… अब पढ़िए- खजाने और चोरी को लेकर क्या हैं दावे ठेकेदार को ले जाते हुए देखा: हवेली के पीछे रहने वाले युवक का दावा है कि शुक्रवार सुबह वह अपने चाचा के साथ छत पर था। जेसीबी से हवेली के अंतिम हिस्से की दीवार तोड़ने के दौरान मलबे के साथ एक बड़ी और एक छोटी तिजोरी निकली। छोटी तिजोरी को ठेकेदार और जेसीबी ड्राइवर तुरंत एक्टिवा पर रखकर ले गए, जबकि बड़ी तिजोरी वहीं छोड़ दी गई। खजाना होने की बात दादी बताती थी: हवेली से जुड़े राकेश अग्रवाल ने बताया कि यह पुश्तैनी हवेली लगभग 250 साल पुरानी है। हवेली को 1925 में उनके दादा सूरजमल ने खरीदा था। वे ज्वेलर थे। अग्रवाल का दावा है कि उनकी दादी अक्सर हवेली में गुप्त तहखाने और सोने-चांदी के भंडार की चर्चा करती थीं। यहां तहखाने होने की भी पूरी संभावना है। परिवार का दावा पुलिस ले गई तिजोरी: राकेश अग्रवाल का कहना है कि एक तिजोरी को पुलिस थाने गई, लेकिन बताया गया कि उसमें कुछ नहीं मिला। हमें विश्वास है कि हवेली में अब भी खजाना हो सकता है। वहीं, माणक चौक थाने के SHO का कहना है ऐसा कोई मामला नहीं है। पुलिस कोई तिजोरी थाने में नहीं लाई है। मालिक बोला- खजाना नहीं मिला, अफवाह है हवेली के खरीदार रमेश नारनोली ने खजाना मिलने के दावों को अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि हवेली को कौन तोड़ रहा है? इस हवेली को उन्होंने रामवतार अग्रवाल और कमल रूपानी के साथ मिलकर खरीदा है। इस हवेली में 13 हिस्सेदारों थे। इसे तोड़कर फिर से बनाया जाना है। उन्होंने बताया कि यहां से निकली तिजोरी को माणकचौक थाने ले गए थे। करीब 400 रुपये देकर उसे खुलवाया गया, लेकिन उसमें केवल कचरा मिला। दोनों केस में एक ही ठेकेदार पर आरोप हवेली से जुड़े परिवार का आरोप है कि इस हवेली को भी महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक ने ही तोड़ा है। उनका दावा है कि छह महीने पहले विद्याधर के रास्ते स्थित हवेली को भी इसी ठेकेदार ने तोड़ा था। वहां से 45 किलो चांदी, सोने से भरे 15 कलश निकले थे। उन्हें भी इसी ठेकेदार ने गायब कर दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जयपुर के परकोटा क्षेत्र की अधिकांश पुरानी हवेलियों को तोड़ने का ठेका छोटू खटीक ही लेता है। उसने पिछले कुछ वर्षों में कई हवेलियां तोड़ी हैं। इन सभी हवेलियां से निकले सामान की जांच होनी चाहिए। …. खजाने से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. जमीन खुदाई में मिला खजाना किसका, मालिक या सरकार का?:जयपुर में घर में मिले सोने से भरे 15 कलश; 8 सवालों से समझें नियम कानूनन गड़े मिले खजाने पर सरकार का ही हक माना जाएगा। पूरे देश में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ लागू है। राजस्थान में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ भी काम करता है। पूरी खबर पढ़िए… 2. जयपुर-हवेली की नींव से निकले सोने से भरे 15 कलश:45 किलो चांदी की सिल्लियां, 10 हजार सिक्के भी; मालिक का दावा- मजदूरों ने आपस में बांटे ठेकेदार और उसके साथियों ने करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के आपस में बांट लिए। पूरी खबर पढ़िए…

संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले:85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर

अमेरिकी इंफ्लूएंसर एलिक्स अर्ले को टाइम मैग्जीन ने 2026 के 100 सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर की सूची में शीर्ष पर रखा है। अर्ले ने एक प्रोडक्ट भी लॉन्च किया है। अब नेटफ्लिक्स उन पर रियलिटी सीरीज बनाएगा। आज सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर एलिक्स अर्ले ने इसी आदत को अपना सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल बना दिया। टिकटॉक पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स वाली 25 वर्षीय अर्ले का मानना है कि लोग अब भी उन्हें ठीक से नहीं समझते। उनके मुताबिक सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोगों को लगता है उन्हें सफलता आसानी से मिल गई। दूसरी धारणा यह है कि वह केवल किसी और के बिजनेस का चेहरा हैं, जबकि वह अपने फैसले खुद लेने वाली उद्यमी हैं। अर्ले कहती हैं, ‘लोग मुझे कम आंकते हैं या सोचते हैं कि मैं नासमझ हूं।’ इंटरनेट पर बेहद आत्मविश्वासी और प्रभावशाली दिखने वाली अर्ले वास्तविक जीवन में काफी शांत स्वभाव की हैं। उनका कहना है कि उनसे पहली बार मिलने वाले कई लोग कहते हैं कि वे तस्वीरों और वीडियो जैसी नहीं दिखतीं। एक समय उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक भी माना गया। इस पर अर्ले ने साफ किया कि कॉलेज के दिनों में उनके विचार अलग थे, लेकिन अब वे खुद को ट्रम्प समर्थक नहीं मानतीं। अर्ले की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई मानी जाती है। उन्होंने कभी अपनी जिंदगी को परफेक्ट दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पारिवारिक परेशानियों, प्रेम संबंधों, मानसिक उतार-चढ़ाव और मुंहासों जैसी निजी समस्याओं तक को सोशल मीडिया पर खुलकर साझा किया। यही ईमानदारी उनके फॉलोअर्स को उनसे जोड़ती है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स उन पर आधारित रियलिटी सीरीज ‘अर्ले मीट्स वर्ल्ड’ लेकर आ रहा है। मियामी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग की पढ़ाई करने वाली अर्ले दो बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी व्याख्यान दे चुकी हैं। उन्होंने अमेजन, कार्ल्स जूनियर और प्रीबायोटिक ड्रिंक पॉपी सहित कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। अर्ले का सोशल मीडिया सफर भी संघर्ष से भरा रहा। न्यू जर्सी में पली-बढ़ी अर्ले ने कॉलेज के दौरान टिकटॉक पर डांस, शॉपिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, लेकिन खास पहचान नहीं मिली। 2022 में उन्होंने अपने मुंहासों (एक्ने) से जुड़ी परेशानी और बिना मेकअप वाली तस्वीरें साझा कीं। यह वीडियो वायरल हो गई और लाखों लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।

भिड़ंत से कार में फंसी बाइक, जलकर कबाड़:20 फीट उछलकर गिरे युवक की मौत, गाड़ी के गेट ऑटोमैटिक लॉक हुए, ज्वेलर जीजा-साले बचे

जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ थाना क्षेत्र में कार से भिड़ंत में 20 फीट तक हवा में उछलकर गिरे बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर के तुरंत बाद कार के अगले हिस्से में बाइक फंसने से शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई। कार के दरवाजे ऑटोमैटिक लॉक हो गए, लेकिन पीछे का एक दरवाजा खुलने से ज्वेलर समेत तीन की जान बच गई। बाइक सवार युवक के पास पड़े मोबाइल से सूचना के बाद परिजन मौके पर पहुंचे। पुलिस की मदद से हॉस्पिटल पहुंचाया गया। हादसा 18 जुलाई की रात करीब 9 बजे जैसलमेर-नेहड़ाई रोड पर बोहा और नेहड़ाई गांव के बीच हुआ। हादसे से जुड़ी ये तस्वीरें भी देखें … पढ़िए… सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम गहने देकर लौट रहे थे कार सवार, एक गेट खुलने से बची जान जानकारी के अनुसार रामगढ़ निवासी पंकज सोनी (28) पुत्र पुखराज सोनी स्विफ्ट कार चला रहे थे। उनके साथ आगे की सीट पर उनके साले मोतीलाल सोनी (22) पुत्र कमल किशोर सोनी और पीछे की सीट पर महेंद्र सोनी (27) पुत्र देवीलाल सोनी, जो पंकज के काकी ससुर का बेटा है, बैठे थे। तीनों जैसलमेर से बोहा गांव में एक ग्राहक को सोने का गहना देकर रामगढ़ लौट रहे थे। शनिवार रात करीब 9 बजे बोहा और नेहड़ाई गांव के बीच सामने से आ रही एक बाइक से उनकी कार की टक्कर हो गई। पंकज सोनी के अनुसार बाइक सवार तेज रफ्तार में रॉन्ग साइड से आया और सीधे उनकी कार से टकरा गया। टक्कर के बाद बाइक कार के बोनट में फंस गई, जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और कार में आग लग गई। आग लगते ही कार के तीन गेट लॉक हो गए। काफी कोशिश के बाद एक गेट का लॉक मुश्किल से खुला, जिसके बाद तीनों युवक जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे। हादसे में एक कार सवार घायल हादसे में कार सवार मोतीलाल सोनी पुत्र कमल किशोर सोनी के सिर पर चोट आई। वहीं कार से बाहर निकलने के बाद युवकों ने घायल बाइक सवार की मदद करने की कोशिश की। इसी दौरान मृतक के पास गिरे मोबाइल पर उसके परिजनों का फोन आया तो उन्होंने कॉल उठाकर हादसे की जानकारी दी। सूचना मिलने पर नेहड़ाई गांव से परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान फकीरा राम भील (28) निवासी नेहड़ाई के रूप में हुई। परिजनों ने पुलिस की मदद से पहुंचाया हॉस्पिटल घटना की सूचना मिलते ही नेहड़ाई चौकी प्रभारी देवी सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और परिजनों की मदद से शव को जैसलमेर के राजकीय जवाहिर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद युवक को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया गया। कार पूरी तरह जलकर हुई कबाड़ मोहनगढ़ थाना पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की गहनता से जांच शुरू कर दी है। हादसे में स्विफ्ट कार पूरी तरह जलकर कबाड़ बन गई। पुलिस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।

फुटबॉल वर्ल्ड कप:96 साल बाद फाइनल दो स्पेनिश भाषी देशों के बीच, स्पेन-अर्जेंटीना की भाषाएं-कल्चर एक जैसे

फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल सिर्फ स्पेन और अर्जेंटीना की दो टीमों के बीच नहीं होगा, बल्कि दो ऐसे देशों के बीच भी होगा, जिनके रिश्ते सदियों पुराने हैं। दोनों की भाषा एक है, संस्कृति में कई समानताएं हैं और लाखों परिवार ऐसे हैं जिनकी जड़ें दोनों देशों से जुड़ी हैं। ऐसे में मैच कई लोगों के लिए भावनात्मक परीक्षा बन गया है। सवाल यही है कि दिल की सुनी जाए या जन्मभूमि की। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में रहने वाले 75 वर्षीय जुआन मैनुएल पोसादा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उनका जन्म स्पेन में हुआ था, लेकिन 1968 में वे अर्जेंटीना आकर बस गए। वे कहते हैं, ‘मेरा दिल स्पेन के साथ है, लेकिन अगर अर्जेंटीना जीत गया तो भी मुझे दुख नहीं होगा।’ उनके परिवार में भी यही दुविधा है। उनका पोता अर्जेंटीना का समर्थक है और उसने दादा से वादा लिया है कि अगर अर्जेंटीना जीता तो वे उसकी टीम की जर्सी पहनकर जश्न मनाएंगे। 81 वर्षीय मैनुएल फर्नांडीज असेवेडो भी बचपन में स्पेन छोड़कर अर्जेंटीना आ गए थे। उनकी बेटी और पोती यहीं पैदा हुईं। वे कहते हैं कि दोनों देशों से उनका समान लगाव है और वे सिर्फ यही चाहते हैं कि बेहतर टीम जीते। स्पेन और अर्जेंटीना का रिश्ता सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं है। 16वीं सदी में स्पेन के ही एक खोजकर्ता पेड्रो डी मेंडोसा ने ब्यूनस आयर्स की स्थापना की थी। बाद में बड़ी संख्या में स्पेनिश नागरिक अर्जेंटीना जाकर बस गए। इसी कारण दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध लगातार मजबूत होते गए। साहित्य, संगीत और खानपान के साथ-साथ फुटबॉल ने भी इस रिश्ते को नई पहचान दी। रियल मैड्रिड के लिए अल्फ्रेडो डी स्टेफानो और बार्सिलोना के लिए लियोनेल मेसी जैसे महान खिलाड़ियों ने दोनों देशों को भावनात्मक रूप से और करीब ला दिया। वर्ल्ड कप के इतिहास में स्पेन और अर्जेंटीना की टक्कर सिर्फ एक बार हुई है। 1966 वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण में अर्जेंटीना ने स्पेन को हराया था। अब पहली बार दोनों टीमें फाइनल में आमने-सामने हैं। यह वर्ल्ड कप इतिहास का दूसरा ऐसा फाइनल होगा, जिसमें दो स्पेनिश भाषी देश खिताब के लिए भिड़ेंगे। इससे पहले 1930 में उरुग्वे और अर्जेंटीना भिड़े थे। पिछले कुछ दशकों में आर्थिक संकट और सैन्य शासन के बाद हजारों अर्जेंटीनी बेहतर भविष्य के लिए स्पेन जाकर बस गए। स्पेन में अर्जेंटीना में जन्मे करीब 4.5 लाख लोग रह रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए यह मुकाबला किसी पारिवारिक उत्सव जैसा है। सोशल मीडिया पर अर्जेंटीना-स्पेन के परिवारों के मजेदार वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें बच्चे किस टीम का समर्थन करेंगे, इसे लेकर घरों में हल्की-फुल्की नोकझोंक दिखाई दे रही है। यही वजह है कि फाइनल सिर्फ चैम्पियन तय नहीं करेगा, बल्कि उन लाखों परिवारों की भावनाओं को भी मैदान पर ले आएगा, जिनके दिल में स्पेन व अर्जेंटीना दोनों के लिए बराबर जगह है।

जयपुर में पुलिस की गाड़ी डिवाइडर फांद कार से टकराई:भीड़ ने स्कॉर्पियो पर पत्थर फेंके, शीशे तोड़कर बीयर की कैन और बोतल निकाल बोनट पर रखी

जयपुर में शनिवार रात करीब साढ़े 10 बजे एक तेज रफ्तार राजस्थान लिखी स्कॉर्पियो डिवाइडर फांदकर रॉन्ग साइड में जाकर कार से टकरा गई। हादसे में कार क्षतिग्रस्त हो गई, वहीं स्कॉर्पियो का एक टायर भी फट गया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्कॉर्पियो को घेर लिया। लोगों ने स्कॉर्पियो पर पत्थर फेंके। जिससे स्कॉर्पियो के शीशे टूट गए। अंदर रखी बीयर की कैन और बोतल बाहर निकालकर बोनट पर रख दी। घटना एयरपोर्ट रोड स्थित 6 नंबर बस स्टैंड के पास की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कॉर्पियो ने सांगानेर की ओर जा रही वरना कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और देखते ही देखते हंगामा शुरू हो गया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने स्कॉर्पियों पर पत्थर फेंककर उसके शीशे तोड़ दिए। डिवाइडर फांदकर रॉन्ग साइड में पहुंची स्कॉर्पियो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कॉर्पियो RJ 14 CB TF 5022 सांगानेर से तेज गति से कोचिंग हब की ओर आ रही थी। वह अनियंत्रित डिवाइडर पार कर रॉन्ग साइड में पहुंच गई और एयरपोर्ट रोड से सांगानेर की ओर जा रही वरना कार से टकरा गई। वरना कार में तीन लोग सवार थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो का दाहिना अगला टायर फट गया और अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि दुर्घटना के तुरंत बाद वरना कार को मौके से हटा दिया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। भीड़ ने पुलिस वाहन पर पत्थर फेंके हादसे के बाद करीब 150 से ज्यादा लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और गुस्साई भीड़ ने राजस्थान पुलिस लिखी स्कॉर्पियो पर फेंककर उसके शीशे तोड़ दिए। मौके पर पीसीआर और डायल-112 की टीम पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस वाहन के शीशे तोड़ने के बाद भीड़ ने उसमें से बीयर के कैन और बोतलें निकालकर वाहन के बोनट पर रख दीं। इस घटनाक्रम को लेकर मौके पर काफी देर तक चर्चा होती रही। डेढ़ घंटे बाद क्रेन से हटाई गई स्कॉर्पियो हंगामे के दौरान एक बाइक सवार युवक ने भीड़ को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन गुस्साई भीड़ ने उसके साथ मारपीट कर दी। युवक किसी तरह वहां से जान बचाकर निकल सका। पुलिस ने लोगों को समझाइश कर स्थिति को नियंत्रित किया। करीब डेढ़ घंटे बाद क्रेन बुलाकर क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो को मौके से हटवाया गया और यातायात सुचारू कराया गया। दो थानों की सीमा, फिर भी नहीं पहुंचे थानाधिकारी हादसे का स्थान प्रतापनगर और सांगानेर थाना क्षेत्रों की सीमा पर बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक हंगामा चलता रहा, लेकिन दोनों थानों के थानाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लोगों का कहना था कि समय पर वरिष्ठ अधिकारी पहुंचते तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण नहीं होती। स्कॉर्पियो पर ‘राजस्थान पुलिस’ लिखा, पुलिस बत्ती भी लगी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे में शामिल स्कॉर्पियो पर टैक्सी नंबर होने के बावजूद सफेद प्लेट लगी हुई थी। वाहन पर “राजस्थान पुलिस” लिखा हुआ था और पुलिस की फ्लैश लाइट (बीकन) भी लगी हुई थी। बताया गया कि वाहन में कॉन्स्टेबल सुंदरम और ड्राइवर मौजूद थे। आरपीएस अधिकारी से वाहन जुड़े होने की चर्चा मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह भी चर्चा रही कि उक्त स्कॉर्पियो जेडीए में कार्यरत एक आरपीएस अधिकारी को आवंटित है। हालांकि इस संबंध में पुलिस या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस जांच जारी फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों, वाहन की स्थिति, उससे जुड़े तथ्यों और हंगामे और पुलिस वाहन में हुई तोड़फोड़ की घटना की जांच कर रही है। हादसे में घायल लोगों की स्थिति और हंगामे में शामिल लोगों की पहचान को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है।

UAN उमंग एप से एक्टिवेट होगा, फेस ऑथेंटिकेशन भी जरूरी:भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब, पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44, डीजल 31.05 रुपया महंगा

कल की बड़ी खबर रिलायंस से जुड़ी रही। EPFO ने अब अपनी आधिकारिक वेबसाइट से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा को बंद कर दिया है। अब इन दोनों सर्विसेज को ‘उमंग’ एप पर शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. अब उमंग एप से एक्टिवेट होगा UAN: फेस ऑथेंटिकेशन भी करना होगा, यहां जानें एक्टिवेट करने की पूरी प्रोसेस कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपने करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। EPFO ने अब अपनी आधिकारिक वेबसाइट से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा को बंद कर दिया है। अब इन दोनों सर्विसेज को ‘उमंग’ एप पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को जरूरी कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा: पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़: नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. ICICI बैंक का मुनाफा 16% बढ़कर ₹14,805 करोड़: पहली तिमाही में अनुमान से बेहतर रहे नतीजे, बैंक की एसेट क्वालिटी भी सुधरी ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब: स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी की स्थापना 2018 में दो दोस्तों पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। विक्रम-1 को आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा में इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 12:05 बजे लॉन्च किया गया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल मार्केट बंद था तो शुक्रवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए…

जमीन खुदाई में मिला खजाना किसका, मालिक या सरकार का?:जयपुर में घर में मिले सोने से भरे 15 कलश; 8 सवालों से समझें नियम

हाल ही जयपुर में एक हवेली की खुदाई में खजाना मिलने का दावा किया गया। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और 8 से 10 हजार चांदी के पुराने सिक्के आपस में बांट लिए। मामला पुलिस तक पहुंच गया है। इस घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं… इस रिपोर्ट में आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब मिल जाएंगे… सवाल : आपकी पुश्तैनी जमीन या घर में खजाना मिलता है तो क्या आपका हो जाता है? जवाब : आपके पूर्वजों ने घर में 100 साल पहले या सैकड़ों साल पहले भी जमीन के भीतर खजाना छिपाया हो और एक दिन अचानक आपको मिल जाए तो आपको ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के तहत सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। जमीन के ऊपर या खुदाई में आपको मिलने पर भी खजाना कानूनी रूप से आपका नहीं हो जाता है। सवाल : फिर इस खजाने पर किसका हक माना जाएगा? जवाब : कानूनन गड़े मिले खजाने पर सरकार का ही हक माना जाएगा। पूरे देश में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ लागू है। वहीं राजस्थान में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ भी काम करता है। गड़ा हुआ खजाना मिलने की स्थिति में ये नियम ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के प्रावधानों को राज्य में लागू करने के लिए बनाए गए हैं। कानूनी प्रवधानों के तहत ही गड़े खजाने पर सबसे पहला हक राज्य सरकार का है। सवाल : क्या गड़ा खजाना जिसका हक हो, उसका हो सकता है? जवाब : हां, कानून के तहत हो सकता है। शर्त यह है कि व्यक्ति साबित कर दे कि ये खजाना उसके पूर्वजों का है, भले ही 100 साल से कम पुराना हो। खजाना किसी और को मिला हो, लेकिन कोई और यदि खजाना अपने बुजुर्गों का होने के तथ्य ले आए और कानूनी जांच में साबित कर दे तो सरकार उसे सौंप सकती है। सवाल : खजाने के दावेदारों की जांच कैसे की जाती है, दावेदार नहीं मिले तो…? जवाब : जांच के दौरान खजाना सरकारी ट्रेजरी में सरकार की निगरानी में रहता है। जिसे खजाना मिला हो और वह खुद की संपत्ति होने का दावा करता है तो भी जांच प्रक्रिया पूरी करनी होती है। कलेक्टर को खजाने की अनुमानित कीमत बताते हुए एक सार्वजनिक नोटिस जारी करना होता है। इसमें वह कहता है कि इस खजाने का कोई दावेदार हो या उसके वंशज हों तो दस्तावेज सहित हाजिर हो जाएं। इस नोटिस के बाद कलेक्टर चाहे तो 4 से 6 महीने का समय दे सकते हैं। दावेदार के हाजिर होने पर कलेक्टर चाहें तो दावा साबित करने के लिए उसे सालभर का समय भी दे सकते हैं। पूरी जांच कलेक्टर की अंडर में चलती है। यदि कलेक्टर की जांच में कोई अपने दावे को साबित कर देता है कि खजाना उसके बुजुर्गों का है, तो कलेक्टर मूल मालिक को खजाना सौंप सकता है। यदि कोई दावेदार इस दौरान नहीं आता, तो ये खजाना लावारिस घोषित हो जाता है और पूरी तरह सरकार के अंडर आ जाता है। सवाल : यदि खजाना 100 साल पुराना हो तो… जवाब : जांच के दौरान यदि खजाना ऐतिहासिक महत्व का लगता है तो कलेक्टर पुरातत्व विभाग से रिपोर्ट मांग सकते हैं। यदि खजाने में शामिल चीजें 100 साल से ज्यादा पुरानी निकलती हैं, तो एंटीक्विटी एंड आर्ट वैल्यूएबल्स एक्ट 1972 के तहत उन्हें ‘पुरातत्व’ या ‘ऐतिहासिक धरोहर’ माना जाता है। ऐसे में संबंधित खजाना किसी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के प्रावधानों के तहत ऐसा खजाना सीधे राज्य की संपत्ति माना जाता है। सवाल : क्या गड़ा खजाना खोजने वालों या जमीन मालिक के बीच बांटा जा सकता है? जवाब : कानूनी धाराओं के तहत यदि खजाना सौ साल से ज्यादा पुराना है तो खोजने वाले का इस पर कोई अधिकार नहीं होता है। ये सरकार की संपत्ति माना जाएगा। वहीं यदि गड़ा खजाना 100 साल से कम पुराना हो तो कानूनी प्रावधानों के तहत खोजकर्ता और जमीन के मालिक के बीच साझा किया जा सकता है। प्रशासन की जांच में यदि कोई खजाने का दावेदार नहीं मिलता है तो उसे खोजने वाले को 75% और जमीन मालिक को 25% हिस्सा मिल सकता है। सवाल : सरकार को जानकारी देना क्यों जरूरी है? जवाब : कानून के अनुसार तो 10 रुपए से अधिक की कीमत का भी धन या वस्तु, सोना-चांदी आदि आपको मिलता है, तो तत्काल लिखित सूचना कलेक्टर या स्थानीय प्रशासन को देनी होती है। सवाल : यदि खजाना सार्वजनिक जगह या सरकारी कब्जे वाली जमीन पर मिले तो…? जवाब : तो ये खजाना सरकार के ही अधीन माना जाएगा। सरकार के कब्जा लेने से पहले यदि कोई इसमें से कुछ भी ले जाएगा तो उसे सरकार को ही जमा करवाना होगा। यदि खजाने में कुछ भी ले जाने वाला व्यक्ति खुद अपने स्तर पर प्रशासन को सौंपता है तो वह सजा से बच सकता है, लेकिन यदि प्रशासन अपने स्तर पर जांच कर तलाशी से कुछ वसूली करेगी तो सजा भी मिल सकती है। … ये खबर भी पढ़िए… 1. जयपुर-हवेली की नींव से निकले सोने से भरे 15 कलश:45 किलो चांदी की सिल्लियां, 10 हजार सिक्के भी; मालिक का दावा- मजदूरों ने आपस में बांटे जयपुर में एक हवेली की खुदाई में खजाना मिलने का दावा है। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने पूरा खजाना गायब कर दिया। पूरी खबर पढ़िए… 2. जयपुर की एक और हवेली से निकली खजाने वाली तिजोरियां:एक ठेकेदार लेकर भागा; परिवार का दावा- दादी ने कहा था यहां है सोने-चांदी का भंडार जयपुर में करीब 250 साल पुरानी बंबई वालों की हवेली की खुदाई में खजाने वाली दो तिजोरी निकलने का दावा किया गया है। परिवार का आरोप है कि इनमें से एक छोटी तिजोरी खुदाई करने वाला ठेकेदार चोरी-छिपे ले गया। पूरी खबर पढ़िए…

भास्कर ​रिसर्च: खरीदारी का तरीका बदल रहा:सोफा-टीवी से आरओ तक मासिक किराए पर लेने का दौर, घरेलू चीजों का रेंटल मार्केट 33500 करोड़ पहुंचा

आजकल सामान खरीदने के बजाय उसे किराये (सब्सक्रिप्शन) पर लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती महंगाई और बार-बार शहर बदलने की मजबूरी ने लोगों की सोच बदल दी है। अब लोग सोफा, बेड, टीवी, फ्रिज, एसी और कार जैसी महंगी चीजों का मालिक बनने के बजाय, हर महीने एक निश्चित किराया देकर उनका उपयोग करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रेंटोमोजो और फर्लेंको जैसी कंपनियां इस सुविधा को आसान बना रही हैं। फर्नीचर और घरेलू उपकरणों का रेंटल बाजार भी पीछे नहीं है। रेडसीर के अनुसार, यह बाजार अभी 33,500 करोड़ रु. का है। जानकारों का अनुमान है कि 2032 तक यह 46,000 करोड़ रु. के पार निकल जाएगा। यह नया ट्रेंड बताता है कि भारतीय परिवारों के लिए अब चीजों के मालिकाना हक से ज्यादा ‘सुविधा’ और ‘किफायत’ जरूरी हो गई है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि लाइफस्टाइल को अपग्रेड करना भी आसान हो गया है। एक स्टडी के मुताबिक, देश में औसत सब्सक्रिप्शन 13 महीने का होता है। देश में सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी की शुरुआत ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से हुई थी। इसी ने लोगों के बीच मासिक सब्सक्रिप्शन की आदत डाली। एक्सप्लेनर: चीन के बाद सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही हमारी सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी छोटे फर्नीचर 79 रु./माह से शुरू, कारें 600 रु./दिन पर हैं 1. किराए पर सामान लेने से क्या फायदा है? यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो बार-बार शहर बदलते हैं या भारी निवेश के बिना अच्छी लाइफस्टाइल चाहते हैं। 2. आखिर ये किराया कितना किफायती है? यह बहुत सस्ता है। छोटे फर्नीचर ₹79/माह और अप्लायंसेज ₹149/माह से शुरू होते हैं। 1BHK का पूरा सेटअप भी ₹514-₹570 रु./माह के आसपास मिल सकता है। 3. डिलीवरी और इंस्टॉलेशन का क्या होता है? डिलीवरी और इंस्टॉलेशन का शुल्क चेकआउट पर अलग से जुड़ता है। बेड, गद्दे, फ्रिज और वॉशिंग मशीन का इंस्टॉलेशन आमतौर पर मुफ्त होता है। 4. क्या मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ग्राहक की है? नहीं, सामान की मरम्मत और मेंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। 5. क्या कोई अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है? हर सब्सक्रिप्शन के साथ लगभग ₹1,000 का ‘डैमेज-वेवर’ चार्ज जुड़ता है। कंपनियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। 6. क्या इन कंपनियों में कोई ऑफर होता है? कुछ कंपनियां पहले महीने के किराए पर किड्स फर्नीचर पर 22% (₹1,100 तक) की छूट जैसे शुरुआती ऑफर्स देती हैं। 7. कार सब्सक्रिप्शन का शुरुआती किराया? शॉर्ट-टर्म सेल्फ-ड्राइव में किराया ₹499/दिन, जबकि प्रीमियम एसयूवी में ₹999/दिन से शुरू है। आमतौर पर बजट कारों का रोजाना रेंट 600-800 रु. के बीच है। 8. लंबी अवधि में कार लेने का रेंट क्या है? लॉन्ग-टर्म सब्सक्रिप्शन के लिए किराया ₹15,000 प्रति माह से शुरू होता है। 9. कंपनियां क्या-क्या खर्च वहन करती हैं? कार की कीमत, रोड टैक्स, इंश्योरेंस और सर्विसिंग यानी ओनरशिप का झंझट कंपनी संभालती है। हालांकि इंश्योरेंस क्लेम में जो रकम कंपनी सेटल नहीं करती, वो पैसे और क्लेम-फाइलिंग चार्ज ग्राहक देते हैं। 10. ग्राहक को जेब से क्या-क्या देना होता है? ईंधन (पेट्रोल/डीजल), टोल टैक्स, पार्किंग और राज्यों की एंट्री फीस का भुगतान ग्राहक को खुद करना पड़ता है। 11. ये कंपनियां कितने शहरों में उपलब्ध हैं? ये कंपनियां देशभर के 21-30 से अधिक शहरों में सेवाएं दे रही हैं, जिनमें इंदौर, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ शामिल हैं। 12. सब्सक्रिप्शन बीच में बंद कर सकते हैं? हां, सब्सक्रिप्शन ट्रांसफर कर सकते हैं या सामान लौटा सकते हैं, पर अर्ली चार्ज है। 13. आरओ का सब्सक्रिप्शन कितने का है? आरओ खरीदने में 10,000-30,000 रु. खर्च होते हैं। लिवप्योर जैसी कंपनियां आरओ 429 रु./महीने के सब्सक्रिप्शन पर दे रहीं। इसमें मशीन, इंस्टॉलेशन, फिल्टर बदलना और सर्विसिंग भी शामिल होती है। 14. रेंटल कंपनियों तक कैसे पहुंच सकते हैं? ऑर्डर एप/साइट से बुक होते हैं। टीम घर पर डिलीवरी-इंस्टॉलेशन करती है। शहर बदलने पर सामान फ्री में शिफ्ट करते हैं। भारत में सालाना ग्रोथ 16.6% है… फ्यूचर मार्केट इनसाइट्स के मुताबिक, भारत की सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी हर साल करीब 16.6% बढ़ रही है। यह चीन (18%) के बाद दुनिया की सबसे तेज वृद्धि दरों में से एक है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में और ज्यादा कंपनियां ‘प्रोडक्ट बेचने’ के बजाय ‘सर्विस मॉडल’ पर काम करने के लिए मजबूर होंगी। लेकिन ये मॉडल हर जगह सफल नहीं… अमेरिका में कैडिलैक, ऑडी, बीएमडब्ल्यू और वॉल्वो जैसी कंपनियों ने कार सब्सक्रिप्शन सर्विस शुरू कीं, लेकिन ऊंची लागत और जटिल ढांचे के कारण अधिकांश स्कीम्स बंद करनी पड़ीं। चीन में कपड़ों की सब्सक्रिप्शन कंपनी वाईक्लोजेट भी इसी वजह से नहीं टिक सकी। इस मामले में ओटीटी सबसे सफल मॉडल रहा। बेहतर मौके खोजने वाले युवाओं में ट्रेंड बढ़ रहा है भास्कर एक्सपर्ट: संजय छाबड़ा- एमडी, लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स हाल के वर्षों में सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी तेजी से बढ़ी है। लेकिन यह अब भी मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित है। दरअसल मौजूदा दौर में युवा लगातार बेहतर मौके की तलाश में रहते हैं। इसके चलते उन्हें कुछ ही साल के अंतर पर शहर बदलना पड़ता है। इसलिए वे घर के सामान खरीदने की बजाय किराए पर लेना पसंद करते हैं। खास तौर पर कोविड के बाद यह नया बिजनेस मॉडल ट्रेंड में आया है। हमारे आंकड़े कहते हैं कि 5 साल पहले तक 76% ग्राहक कैश में इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदते थे। अब 20% ही कैश पेमेंट करते हैं। बाकी ग्राहक ईएमआई पर सामान लेते हैं। जाहिर है, उन पर मासिक किस्तों का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यदि सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी बढ़ रही है तो ये स्वाभाविक ही है। लेकिन छोटे-मझोले शहरों में इस मॉडल ने अब भी जोर नहीं पकड़ा है।