ब्रेकिंग न्यूज़
हाईकोर्ट बोला- 5 दिन में पंचायत-निकाय चुनाव की तारीख बताएं:राज्य चुनाव आयुक्त से कहा- आप क्यों चाहते हैं कि हम अवमानना की कार्रवाई शुरू करें

प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर आज भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने राज्य चुनाव आयोग से कहा कि 5 दिन में (सोमवार तक) चुनाव की तारीख बताएं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सोमवार तक ओबीसी आयोग रिपोर्ट देने की तारीख और राज्य सरकार लॉटरी निकालने की तारीख बताए। सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव मौजूद रहे। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त से कहा- आप क्यों चाहते हैं कि हम आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करें। इस पर चुनाव आयुक्त ने कहा- हमारी तैयारी पूरी है। हमें सरकार ने आरक्षण का वर्गीकरण करके नहीं दिया है। अगर सरकार हमें लॉटरी निकालकर दे देती है तो हम 2 दिन में चुनाव प्रक्रिया शुरू कर देंगे। वहीं ओबीसी आयोग को लेकर कोर्ट ने कहा- जब 9 मई 2025 को सरकार ने 3 महीने के लिए आयोग का गठन किया था तो आपने रिपोर्ट क्यों नहीं दी। अगर आपसे काम नहीं होता है तो मना कर दीजिए। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार क्यों?
हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह से कहा- जब हमने कह दिया था कि आप ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करेंगे तो आपने चुनाव की घोषणा क्यों नहीं की। ओबीसी आयोग से कहा- जब हमने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दे रखे थे तो आपने रिपोर्ट देने के लिए 14 अगस्त तक की डेट कैसे दे दी। इसका मतलब है कि आप कोर्ट के आदेश की पालना नहीं करना चाहते हैं। इस पर ओबीसी आयोग ने कहा- हमारे पास संसाधन नहीं थे, इसलिए रिपोर्ट नहीं दे सके। इस पर कोर्ट ने कहा- हर हाल में आदेश की पालना होनी चाहिए। दरअसल, हाईकोर्ट ने 22 मई के आदेश से सरकार और चुनाव आयोग को प्रदेश में 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक चुनाव आयोग ने इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं की है। — ये खबर भी पढ़िए- पंचायत-निकाय चुनाव नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी:कहा-इलेक्शन कमीशन सक्षम नहीं तो हम किसी को अपॉइंट कर देते हैं; CEC को तलब किया राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव तय समय सीमा में नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा- अगर राज्य चुनाव आयोग इलेक्शन कराने में सक्षम नहीं है तो हम हाईकोर्ट से किसी को चुनाव कराने के लिए अपॉइंट कर देते हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- हमें सख्त आदेश पास करने के लिए मजबूर मत कीजिए। (पढ़िए पूरी खबर)

इंस्टाग्राम पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का खेल:एडिट फीचर से बैकडेट की जा रहीं पोस्ट; दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे दो डिजिटल क्रिएटर्स

इंस्टाग्राम पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए मेटा के कॉपीराइट सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अज्ञात लोग फेसबुक के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पोस्ट की तारीख बैकडेट में कर देते हैं और फिर असली क्रिएटर्स के कंटेंट पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक भेज रहे हैं। इस खेल के खिलाफ दो बड़े डिजिटल क्रिएटर्स पुष्कर राज ठाकुर और नीरज जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट में कॉमर्शियल सूट फाइल किया है। क्रिएटर्स ने कोर्ट में क्या आरोप लगाए? फाइनेंशियल एजुकेटर पुष्कर राज ठाकुर और डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी ने अलग-अलग दायर याचिकाओं में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ अज्ञात लोग ओरिजिनल क्रिएटर्स को परेशान करने और उनके अकाउंट बंद कराने की धमकी देने के लिए फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक को हथियार बना रहे हैं। इस सिस्टम के चलते उनके ओरिजिनल कंटेंट को डिलीट करने या उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को सस्पेंड/डिलीट करने का खतरा पैदा हो गया है। मेटा के ऑटोमेटेड सिस्टम पर उठे सवाल क्रिएटर्स का तर्क है कि मेटा का ऑटोमेटेड कॉपीराइट सिस्टम बिना किसी गहन जांच के काम कर रहा है। यह सिस्टम वीडियो के असली क्रिएटर, मेटाडेटा, एडिट हिस्ट्री या वास्तविक पब्लिशिंग क्रोनोलॉजी (अपलोड करने का सही समय) की जांच किए बिना ही स्ट्राइक की शिकायतों पर एक्शन ले लेता है। पुष्कर राज ठाकुर ने बताया कि इस फर्जी खेल की वजह से उनके दर्जनों वीडियो को हटा दिया गया, डिसेबल किया गया या रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि मेटा ने ठाकुर को अपने ‘राइट्स मैनेजर’ टूल का एक्सेस देने से मना कर दिया, जबकि जालसाज इसी टूल का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ लगातार फर्जी स्ट्राइक भेजते रहे। नीरज जोशी के केस में कोर्ट का आदेश डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी के मामले में 9 जुलाई को जस्टिस ज्योति सिंह की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मेटा के उस बयान को रिकॉर्ड किया, जिसमें कंपनी ने कहा कि अगर जोशी का अकाउंट अभी तक स्थायी रूप से बंद नहीं हुआ है, तो वे इन आरोपों की जांच करेंगे और उनके वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट (@Neerajjoshi5014) को सुरक्षित रखेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्ते के भीतर नीरज जोशी को संबंधित बेसिक सब्सक्राइबर इंफॉर्मेशन (BSI) और आईपी (IP) लॉग उपलब्ध कराए। इन जानकारियों से उन अज्ञात लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जो उनके अकाउंट के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। मामले में समन जारी कर दिए गए हैं और जोशी की अंतरिम रोक वाली अर्जी पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। पुष्कर राज ठाकुर के केस में क्या हुआ? जस्टिस तुषार राव गेडेला ने 29 मई को पुष्कर राज ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मेटा से पूछा था कि उसने अपने प्लेटफॉर्म के इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं या वह क्या उपाय कर सकती है। इसके बाद 1 जुलाई को यह मामला जस्टिस अनूप जयराम भंभानी के सामने आया। सुनवाई के दौरान मेटा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक ठाकुर के वीडियो को कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर नहीं हटाया जाएगा। साथ ही बार-बार आ रही कॉपीराइट स्ट्राइक की वजह से उनका अकाउंट भी बंद नहीं किया जाएगा। मेटा ने यह भी सहमति दी कि जैसे ही ठाकुर उन्हें हटाए गए वीडियो के यूआरएल (URLs) सौंपेंगे, वे उन वीडियो को रिस्टोर कर देंगे। कोर्ट ने इन आश्वासनों को दर्ज करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई तय की है। क्रिएटर्स ने मेटा से मांगा ₹2 करोड़ का मुआवजा पुष्कर राज ठाकुर ने कोर्ट से मांग की है कि मेटा को उनके ओरिजिनल कंटेंट को ऐसे फर्जी और बैकडेटेड दावों के आधार पर हटाने से रोका जाए। उन्होंने कंपनी को राइट्स मैनेजर टूल के भीतर केवाईसी (KYC) सुरक्षा उपाय, टाइमस्टैम्प सुरक्षा, मेटाडेटा वेरिफिकेशन और एंटी-मैनिपुलेशन प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश देने की भी मांग की है। इसके अलावा, ठाकुर ने उनके फॉलोअर्स घटने, मोनेटाइजेशन के मौके गंवाने, स्पॉन्सरशिप के नुकसान और उनकी कॉमर्शियल साख को ठेस पहुंचने के एवज में मेटा और अज्ञात जालसाजों से लगभग ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। इस तरह के मामलों ने डिजिटल क्रिएटर्स के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ओरिजिनल कंटेंट की सुरक्षा के लिए बने कॉपीराइट टूल्स का इस्तेमाल अब खुद क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इस विषय को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी पेंडिंग है। क्या है मेटा का राइट्स मैनेजर और कॉपीराइट स्ट्राइक ये खबर भी पढ़ें… IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च: सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट’ फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

फीफा वर्ल्ड कप में फैंस की अनोखी परंपराएं:डच फैंस का ऑरेंज ड्रेस में फैनवॉक, जापानी की सफाई संस्कृति, नॉर्वे का वाइकिंग रो रहा चर्चित

कुछ दिन पहले बोस्टन के एक व्यस्त रेलवे स्टेशन पर ऐसा नजारा दिखा, जिसने लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी। नॉर्वे के फुटबॉल फैंस चलते एस्केलेटर पर एक के पीछे एक बैठ गए। फिर सभी एक साथ आगे-पीछे झुकते हुए ऐसे हाथ चलाने लगे, जैसे किसी नाव में बैठकर चप्पू चला रहे हों। कुछ ही मिनटों में राहगीर भी रुक गए। किसी ने वीडियो बनाया तो कई लोग भी इस काल्पनिक नाव का हिस्सा बन गए। आमतौर पर रेलवे स्टेशन पर लोग अपनी-अपनी जल्दी में रहते हैं। ऐसे माहौल में यह दृश्य लोगों को परेशान भी कर सकता था, लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। कुछ देर के लिए पूरा स्टेशन हंसी, उत्साह और साथ होने के एहसास से भर गया। मनोवैज्ञानिक और ‘हाऊ चेंज रियली वर्क्स’ की लेखिका जूलिया धर कहती हैं कि वर्ल्ड कप के दौरान मैदान के बाहर हुई यह छोटी-सी घटना इंसानी जुड़ाव की बड़ी मिसाल है। जब दुनिया अकेलेपन की चुनौती से जूझ रही है, तब ऐसे साझा अनुभव लोगों में अपनापन और जुड़ाव की भावना पैदा करते हैं। सिर्फ नॉर्वे के फैंस ही नहीं, इस वर्ल्ड कप में दूसरे देशों के समर्थक भी अपनी परंपराओं से चर्चा में रहे। भीषण गर्मी के बीच हजारों डच फैंस ने नारंगी कपड़े पहनकर ‘ऑरेंज फैनवॉक’ निकाली, जिसमें रास्ते में मिलने वाले अनजान लोग भी शामिल होते गए। जापानी फैंस ने मैच खत्म होने के बाद स्टेडियम की सफाई की अपनी परंपरा निभाई। इन परंपराओं की शुरुआत किसी खेल संस्था या ब्रांड ने नहीं की, बल्कि फैंस ने खुद मिलकर इन्हें बनाया। जूलिया कहती हैं कि फैंस को किसी ने ऐसा करने का निर्देश नहीं दिया था। उन्होंने खुद यह परंपरा अपनाई और दूसरों को भी इसमें शामिल किया। अपनापन किसी को दिया नहीं जा सकता। यह तभी पैदा होता है, जब लोग किसी काम में साथ मिलकर हिस्सा लेते हैं। इंसान उन्हीं चीजों से सबसे ज्यादा जुड़ाव महसूस करता है, जिनके बनने में उसका योगदान होता है। साझा भागीदारी से पैदा होता है असली लगाव जूलिया कहती हैं कि कई संस्थाएं लोगों को जोड़ने के लिए बड़े कार्यक्रम करती हैं, लेकिन उनका असर अक्सर सीमित रह जाता है। फैन परंपराएं बताती हैं कि असली जुड़ाव साझा भागीदारी से पैदा होता है। हार्वर्ड के आईकिया इफेक्ट भी यही कहता है कि जिन चीजों को बनाने में लोगों की भागीदारी होती है, उनसे उनका लगाव ज्यादा होता है। स्टेडियम में जब लोग साथ गाना गाते हैं या हाथ उठाते हैं, तो वे खुद को भीड़ नहीं, बल्कि बड़े समुदाय का हिस्सा महसूस करते हैं।

आग लगने से घायल स्मार्ट मीटर कंपनी कर्मचारी की मौत:परिजन बोले- अधिकारियों ने पेट्रोल डालकर जलाया है, 2 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

बीकानेर में स्मार्ट मीटर कंपनी में काम करने वाले युवक की झुलसने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। युवक की 14 जुलाई को मौत हुई थी, जिसके बाद 15 जुलाई को परिजनों ने कंपनी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ पेट्रोल डालकर आग लगाने का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी में कार्यरत लक्ष्मण सिंह से जुड़ा है, जो कंपनी में इंचार्ज के पद पर काम कर रहा था। अनूपगढ़ में थी पोस्टिंग अनूपगढ़ निवासी रेवंत सिंह राजपूत ने पुलिस में दर्ज एफआईआर में बताया कि उनका बेटा लक्ष्मण सिंह स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी में बतौर इंचार्ज काम करता था। उसकी पोस्टिंग श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ में थी। नौकरी से हटाने का लगाया आरोप एफआईआर के अनुसार कंपनी के बीकानेर डिवीजन के अधिकारियों ने लक्ष्मण सिंह को काम से हटा दिया था। परिजनों का आरोप है कि फर्जी आदेश जारी कर उसे नौकरी से हटाया गया। जानकारी लेने बीकानेर ऑफिस पहुंचा था रेवंत सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि लक्ष्मण सिंह एक जुलाई को खुद को हटाए जाने के संबंध में जानकारी लेने के लिए बीकानेर डिवीजन ऑफिस पहुंचा था। आरोप है कि वहां उसके साथ गाली-गलौच और मारपीट की गई। पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप परिजनों ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान लक्ष्मण सिंह पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। इसके बाद उसे तुरंत पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 14 जुलाई को उसकी मौत हो गई। दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 3(5) के तहत नीतिश माथुर और एकराज पंवार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी डिग्री से नौकरी दिलाने वाला आरोपी गिरफ्तार:लेक्चरर भर्ती- 2022 में नियुक्ति का आरोप,अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की प्राध्यापक (हिंदी) स्कूल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के जरिए नियुक्ति दिलाने के मामले में सहयोगी आरोपी को गिरफ्तार किया है। SOG ने आरोपी को 13 जुलाई को पकड़ा था, जिसके बाद कोर्ट में पेश कर 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि मामले में सहयोगी आरोपी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को गिरफ्तार किया है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार (चित्तौड़गढ़) से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री पेश की थी। RPSC की ओर से सत्यापन कराने पर यह डिग्री फर्जी पाई गई। फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने में निभाई अहम भूमिका जांच में सामने आया कि आरोपी अशोक विश्नोई ने महेंद्र सिंह राव के माध्यम से डॉ. सुरेश कुमार से संपर्क किया और उनकी बहन ब्रह्मा कुमारी के लिए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी मार्कशीट और डिग्री उपलब्ध करवाई। जांच में यह भी प्रमाणित हुआ कि आरोपी ने विश्वविद्यालय के तत्कालीन डीन कौशल किशोर चंद्रूल से संपर्क कर फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में फर्जी डिग्री हासिल करने वाली ब्रह्मा कुमारी सहित अब तक कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने के संबंध में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी आरोपी की भूमिका की जांच जारी है। पहले भी हो चुका है गिरफ्तार SOG के अनुसार अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को जोधपुर जिले के कुड़ी भगतासनी थाना क्षेत्र में दर्ज एक अन्य प्रकरण में भी पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक अजयपाल लाम्बा, उप महानिरीक्षक भुवन भूषण यादव, पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर विश्नोई के नेतृत्व में SOG अजमेर यूनिट द्वारा की गई। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश और जांच जारी है

लड़की की सगाई को लेकर विवाद,पिता-पुत्र समेत 3 की हत्या:दोनों पक्ष आपस में रिश्तेदार, चाकू से हमला किया

बीकानेर में लड़की के रिश्ते को लेकर हुई कहासुनी में पिता-पुत्र समेत तीन की हत्या कर दी। मामला गुरुवार दोपहर 1:20 बजे का छत्तरगढ़ के खारवाली में सुरजनवाली गांव का है। घटना की जानकारी मिलते ही एसपी मृदुल कच्छावा और FSL टीम मौके पर पहुंची। खाजूवाला डीएसपी आकांक्षा चौधरी ने बताया- खारवाली निवासी जिंदू खान (55) पुत्र याकूब खान और उसके बेटे करीम खान (25) और साले सुरजनवाली निवासी अलीशेर (60) पुत्र अब्दे खान की हत्या की गई है। हमले में नब्बू (35) घायल हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार दो पक्षों में विवाद हुआ था। झगड़ने वाले दोनों पक्ष आपस में मामा-भांजा लगते हैं। चाकू से एक-दूसरे पर हमला किया गया। पुलिस ने तीनों शवों को छत्तरगढ़ के सरकारी अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया। इसके बाद से अस्पताल में भारी भीड़ इकट्‌ठा हो गई। हॉस्पिटल में पुलिस फोर्स तैनात की गई। बहस खूनी संघर्ष में बदली जानकारी के अनुसार- गांव में पेस्टिसाइड छिड़काव के बाद परिवार का सदस्य बीमार हो गया था। ऐसे में जिंदू, करीम, अलीशेर और नब्बू समेत अन्य लोग हालचाल पूछने गए थे। इसी दौरान परिवार में एक लड़की की सगाई कराने को लेकर बहस हो गई थी। बहस खूनी संघर्ष में बदल गई और मौके पर मौजूद लोगों ने एक-दूसरे पर चाकू से वार कर दिए। 9 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया- मामले ने गुलाबनबी, याकूब अली, बरकत अली, अकरम, रहमत अली, मशूक, अल्ताफ, सिकंदर समेत 9 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि सभी आरोपी लाठी, कुल्हाड़ी और बड़ी छुरियां लेकर आए थे कंटेंट : इस्माइल खान, खाजूवाला

SOG ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री रैकेट का आरोपी पकड़ा:पहले पकड़े गए आरोपियों को बिचौलिया बनकर फर्जी डिग्रियां दिलाई थी

चित्तौड़गढ़ में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की साल 2022 की हिंदी लेक्चरर (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और गिरफ्तारी की है। SOG ने जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को 14 जुलाई को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि उसने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के नाम पर फर्जी एमए (हिंदी) की डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस मामले में अब तक फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाली अभ्यर्थी समेत 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने की कोशिश SOG के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया- RPSC में हिंदी लेक्चरर भर्ती के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री जमा कराई थी। आयोग ने जब डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन कराया तो पता चला कि यह डिग्री मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने जारी ही नहीं की थी। इसके बाद मार्च 2024 में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि अभ्यर्थी ने फर्जी डिग्री और झूठे शपथ पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश की थी। ऐसे जुड़ा अशोक चोटिया का नाम जांच आगे बढ़ी तो एसओजी को पता चला कि अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया ने इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलिए की भूमिका निभाई। उसने महेंद्र सिंह राव के जरिए डॉ. सुरेश कुमार से संपर्क किया और उनकी बहन ब्रह्मा कुमारी के लिए फर्जी डिग्री और मार्कशीट की व्यवस्था करवाई। जांच में यह भी सामने आया कि अशोक ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन डीन कौशल किशोर चंदुल से संपर्क कर यह फर्जी डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध कराए। SOG का कहना है कि जांच में अशोक की भूमिका के पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अदालत से 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड मिलने के बाद उससे पूछताछ की जा रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। 15 गिरफ्तार, दूसरे मामलों में भी आरोपी एसओजी के अनुसार इस मामले में अब तक फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाली अभ्यर्थी सहित कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अशोक विश्नोई के खिलाफ इसी तरह फर्जी डिग्री दिलाने से जुड़ा एक और मामला भी अजमेर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज है, जिसमें उसकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। इसके अलावा वह जोधपुर जिले के कुड़ी भगतासनी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी पहले गिरफ्तार हो चुका है। एसओजी का कहना है कि पूछताछ के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के जरिए और कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट बोला-9वीं में तीसरी भाषा का बोझ न डालें:बोर्ड परीक्षा के एक साल पहले बच्चों में तनाव बढ़ेगा, सरकार से कहिए ऐसा न करें

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि CBSE को 9वीं से थ्री लैंग्वेंज पॉलिसी लागू नहीं करनी चाहिए। 9वीं कक्षा की पढ़ाई पहले से मुश्किल है, ऐसे में तीसरी भाषा को शामिल करने की क्या जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि इससे स्टूडेंट्स का मानसिक तनाव बढ़ सकता है। भारत सरकार से कहिए कि ऐसा न करें। जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि तीसरी भाषा को क्लास 5 या 6 में ही शुरू कर दिया जाना चाहिए, ताकि छात्र इसके साथ अधिक प्रभावी ढंग से तालमेल बिठा सकें। दरअसल, बेंच तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) बनाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। तमिलनाडु सरकार JNV में लागू थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के पक्ष में नहीं है। कोर्ट बोला- तीसरी भाषा की पढ़ाई 9वीं में बंद हो जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि तीसरी भाषा को पढ़ाना 6वीं क्लास में शुरू करना चाहिए और 9वीं में इसे बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं का दबाव कक्षा 8 से ही शुरू हो जाता है। आगे उन्होंने अपने स्कूल के दिनों के बारे में बताते हुए कहा कि जब मैं स्कूल में थी तब 8वीं के बच्चों को 10वीं की चीजें पढ़ाई जाती थीं। उस वक्त ऐसी हालत थी तो आप समझ सकते हैं आज बच्चों पर कितना बोझ होगा। सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार से बोली- यह रवैया न रखें सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के नवोदय विद्यालय शुरू करने के आदेश पर तमिलनाडु सरकार से कहा कि आपके यहां नवोदय विद्यालय होने चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि केंद्र सरकार इसका पूरा खर्च उठाएगी, आपको सिर्फ जमीन उपलब्ध करानी है। यह रवैया न रखिए। लेकिन तमिलनाडु सरकार के अनुरोध के बाद अदालत ने मामले को स्थगित कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। सुप्रीम कोर्ट का 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से इनकार इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या अंग्रेजी को भारत की स्वदेशी (मूल) भाषा माना जा सकता है। साथ ही इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों को लेकर सरकार और सीबीएसई से 10 दिन में जवाब मांगा है। अब 14 दिन बाद 29 जुलाई को इस मामले में सुनवाई होगी। दरअसल, थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी मौजूदा 2026-27 सेशन से लागू कर दी गई है। नई पॉलिसी के मुताबिक स्टूडेंट्स को 2 भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। ऐसे में उन्हें वे भाषाएं छोड़नी पड़ेंगी, जिन्हें वे क्लास 5 से लगातार पढ़ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है था कि CBSE ने तैयारी के बिना तीन-भाषा नीति लागू कर दी है। स्कूलों में पर्याप्त टीचर, किताबें और जरूरी एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है, जिससे स्टूडेंट-टीचर को परेशानी हो रही है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है 1. मामला क्या है?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।
हालांकि, CBSE ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर 6 जून को यूटर्न लिया और नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी। 7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। पूरी खबर पढ़ें 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है?
जवाब: पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) पढ़ते थे। अब नियम कहता है कि तीन में से कम-से-कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही ली जा सकेगी। 3. याचिकाएं किसकी तरफ से लगाई गई थीं?
जवाब: याचिकाएं छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई की। 4. याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है?
जवाब: नियम अचानक लागू कर दिया गया। कई भाषाओं की किताबें अभी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक नहीं हैं। इससे छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. कोर्ट में किताबों को लेकर क्या दलील दी गई?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने पर रोक लगनी चाहिए। सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से अभी केवल 3 भाषाओं की किताबें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं में पढ़ाई कैसे शुरू होगी? 6. शिक्षकों को लेकर क्या समस्या बताई गई?
जवाब: वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अगर किसी स्कूल में नई भारतीय भाषा पढ़ानी होगी, तो उसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतने कम समय में शिक्षक और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषा पूरी तरह बंद हो जाएगी?
जवाब: नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन पहले उन्हें दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम होगा?
जवाब: नहीं। CBSE ने कहा है कि कक्षा 10 के बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। 10. अभी आगे क्या होगा?
जवाब: केंद्र, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि इस नीति पर आगे क्या आदेश देना है। 34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है। ——————- ये खबर भी पढ़ें: CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पेरेंट्स:9वीं क्लास में लागू किए जाने का विरोध, जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच करेगी सुनवाई CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं। ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…

जापान राजवंश में उत्तराधिकारी का संक​ट:किंग नारुहितो को बेटा नहीं, बेटी को हक नहीं; सरकार नए सम्राट की तलाश में जुटी

जापान में सानाए ताकाइची ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रचा है, लेकिन दुनिया के सबसे पुराने जापान के राजवंश में राजगद्दी महिला को सौंपने पर रोक है। करीब 2600 साल पुराना यह राजवंश अब उत्तराधिकारी के संकट से जूझ रहा है। मौजूदा कानून के अनुसार, केवल सम्राट का बेटा ही सम्राट बन सकता है। इस समय पूरे राजवंश में केवल चार पुरुष बचे हैं। इनमें सम्राट नारुहितो (66), उनके छोटे भाई आकिशिनो (60) और चाचा हिताची (90) हैं। आकिशिनो का एक बेटा 19 वर्षीय हिसाहितो हैं। 40 वर्षों में राजवंश में वयस्क होने वाले वे पहले पुरुष हैं। सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी 24 वर्षीय प्रिंसेस आइको हैं। हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश जापानी आइको को ‘साम्राज्ञी’ के रूप में देखना चाहते हैं, लेकिन इसमें 1889 का ‘इंपीरियल हाउस लॉ’ बाधक है। इस कानून में महिलाओं के राजगद्दी संभालने पर रोक है। साथ ही अगर कोई राजकुमारी किसी आम नागरिक से शादी करती है, तो उसे राजपरिवार छोड़ना होता है। रूढ़िवादी जापानी इस कानून के प्रबल समर्थक हैं। वहीं, राजवंश में उत्तराधिकार संकट से निपटने के लिए ताकाइची सरकार ने संसद में बिल पेश किया है। इसके तहत 1947 में राजवंश परिवार से अलग की गई शाखाओं के अविवाहित पुरुषों को गोद लेकर उत्तराधिकारियों का दायरा बढ़ाया जाएगा। लेकिन इस बिल में राजकुमारी आइको या उनके होने वाले बच्चों के लिए कोई जगह नहीं है। चुओ यूनिवर्सिटी में शाही वंशावली के विशेषज्ञ प्रो. माकोटो ओकावा के अनुसार, ‘इतिहास में जापान में आठ महिला सम्राट (1889 से पहले) रह चुकी हैं। इसलिए महिलाओं को बाहर रखना कोई ऐतिहासिक परंपरा नहीं, बल्कि एक सोच है। जब तक महिलाओं को उत्तराधिकार से बाहर रखा जाएगा, तब तक राजपरिवार में स्थिरता लाना संभव नहीं होगा।’ 1947 में राजपरिवार का दायरा घटाने से समस्या
जापान में 592 से 1771 तक 8 महिलाओं ने सम्राट के रूप में शासन किया था, पर 1889 के कानून ने इस सिलसिले को रोक दिया। अगर भविष्य में नारुहितो की कोई संतान नहीं होती या केवल बेटियां होती हैं, तो इस राजवंश का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। बता दें कि 1947 में जापान के संविधान में संशोधन किया गया, जिससे 11 राजकुमारों को अपने पद से हटना पड़ा और वे आम नागरिक बन गए।

बेंगलुरु में शादी से इनकार पर लॉ स्टूडेंट की हत्या:लड़का पहले से शादीशुदा था, लड़के के नाराज भाई ने सीने और पीठ पर चाकू मारा

बेंगलुरु में शादी का प्रस्ताव ठुकराने के बाद एक लॉ छात्रा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, बेंगलुरु के कोडीहल्ली में रहने वाली अमृता पर 13 जुलाई की शाम 4:30 बजे सूर्या नाम के शख्स ने चाकू से हमला कर दिया था, जिसके बाद मंगलवार शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। दरअसल, अमृता ने सूर्या के भाई धनुष की शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। पहले दोनों की शादी तय हुई थी, लेकिन जब अमृता को पता चला कि धनुष की पहले भी शादी हो चुकी है, तो वह नाराज हो गई। घटना के बाद जेबी नगर पुलिस ने धनुष और सूर्या दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। दोस्ती से शुरू हुआ रिश्ता अमृता, धनुष और सूर्या एक ही इलाके के रहने वाले थे। दोनों परिवार धार्मिक आयोजनों के दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। इसी दौरान अमृता और धनुष के बीच दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। पुलिस के मुताबिक, बाद में अमृता को पता चला कि धनुष पहले से शादीशुदा था, उसका तलाक हो चुका था और उसका एक बच्चा भी है। यह बात छिपाए जाने पर अमृता ने रिश्ता खत्म कर दिया और उससे दूरी बना ली। घर में घुसकर किया हमला पुलिस का कहना है कि सूर्या, अमृता के फैसले से नाराज था। उसने कथित तौर पर पहले ही धमकी दी थी कि वह अपने भाई का प्रेम प्रस्ताव ठुकराने पर अमृता को नहीं छोड़ेगा। 13 जुलाई को अमृता के घर पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। इसी दौरान सूर्या ने कथित तौर पर चाकू से अमृता के सीने और पीठ पर कई वार किए और मौके से भागने की कोशिश की। हालांकि, स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया। घायल अमृता को उनके परिजन तुरंत अस्पताल ले गए, जहां उनका 48 घंटे से अधिक समय तक इलाज चला। मंगलवार शाम उनकी मौत हो गई। —————————————— ये खबर भी पढ़ें… सिया ने केतन मर्डर से पहले राजा रघुवंशी केस पढ़ा:मोबाइल हिस्ट्री से पता चला; यह भी जाना- क्या कस्टडी में महिला से मारपीट होती है पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड की मुख्य आरोपी सिया गोयल ने वारदात से पहले इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की जानकारी जुटाई थी। पुलिस के मुताबिक सिया ने इंटरनेट पर यह भी सर्च किया था कि क्या पुलिस कस्टडी में महिलाओं के साथ मारपीट होती है। यह पूरी जानकारी सिया के दोनों मोबाइल की सर्च हिस्ट्री से मिली। पूरी खबर पढ़ें…