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नामांतरण के बदले रिश्वत लेते पटवारी का VIDEO:दावा-12 बीघा जमीन के लिए 15 हजार रुपए लिए, 36 हजार मांगे थे

सवाईमाधोपुर में खंडार उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुरेड़ी में पटवारी पप्पू कोली का नामांतरण के बदले पैसे लेते हुए वीडियो सामने आया है। किसान से जमीन के नामांतरण के बदले नकदी लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पहले तय हुई रकम को लेकर बातचीत भी सुनाई दे रही है। घटन 25 जून की की है, जिसका वीडियो आज सामने आया ह। मामले में पटवारी ने कहा कि वीडियो के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में परिवादी से कई बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसिव नहीं किया। पहले 36 हजार मांगे, बाद में 15 हजार में हुआ सौदा जानकारी के अनुसार, 12 बीघा कृषि भूमि का नामांतरण कराने के लिए पहले 3 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से 36 हजार रुपए मांगे गए थे। बाद में 15 हजार रुपए में बात तय हुई। ग्रामीण बोले- बिना पैसे नहीं होते राजस्व के काम ग्रामीणों का आरोप है कि नामांतरण जैसे सामान्य राजस्व कार्य भी बिना पैसे दिए नहीं हो रहे हैं। किसानों को अपनी ही जमीन के वैध दस्तावेज बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और अवैध मांगों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण गौरी शंकर ने इसी पटवारी के खिलाफ पहले भी रिश्वत मांगने की शिकायत अधिकारियों से की थी। — रिश्वत से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए … 12 साल पहले घूस में मांगा था कैश और मुर्गा:थाने में रिश्वत लेते पकड़ा गया था एएसआई, 4 साल की कैद और जुर्माना लगाया एसीबी कोर्ट ने 12 साल पुराने रिश्वत के मामले में फैसला सुनाते हुए तत्कालीन एएसआई को 4 साल के कठोर कारावास और 15 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। पूरी खबर पढ़िए

जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री के बाद अब रक्षामंत्री को भी हटाया:ड्रोन हमलों से रूस को पछाड़ा था, फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव को नियुक्ति के सिर्फ छह महीने बाद पद से हटा दिया। इस फैसले के बाद गुरुवार को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी कीव में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसके अलावा ओडेसा, ल्वीव और रूस के हमलों का लगातार सामना कर रहे खारकीव शहर में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। खारकीव में 300 से ज्यादा लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाए। 35 साल के फेडोरोव यूक्रेन के ड्रोन युद्ध कार्यक्रम का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते थे। उन्हें यूक्रेन में ड्रोन और रोबोट की मदद से युद्ध लड़ने की रणनीति का प्रमुख समर्थक माना जाता था। उनके हटने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि रूस जैसी बड़ी सेना का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की नई तकनीक और ड्रोन पर आधारित रणनीति आगे भी पहले की तरह जारी रहेगी या नहीं। फेडोरोव को हटाया जाना जेलेंस्की सरकार में बड़े बदलाव का हिस्सा है। इसी फेरबदल में प्रधानमंत्री को भी हटाया गया है। पहले डिजिटल मंत्री थे, फिर बने रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री बनने से पहले फेडोरोव यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (ई-गवर्नेंस) मंत्री थे। वे कई वर्षों तक जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद तकनीकी सलाहकार भी रहे। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने सेना में नई तकनीक, ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया। उसी दौरान यूक्रेन के कई पुराने ड्रोन प्रोजेक्ट सफल होने लगे। यूक्रेन ने रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लगातार ड्रोन हमले किए और कब्जे वाले क्रीमिया को निशाना बनाकर वहां रूसी सेना की आपूर्ति और ठिकानों पर हमले किए। इन सफलताओं से यूक्रेन में लोगों का भरोसा बढ़ा कि नई तकनीक के जरिए रूस का मुकाबला किया जा सकता है। शुरुआत से ही सेना के जनरलों से मतभेद रहे कई रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री फेदोरोव को हटाने के पीछे भ्रष्टाचार या नाकामी नहीं, बल्कि सेना के शीर्ष जनरलों और कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के साथ उनका गहरा मतभेद था। जनवरी में रक्षा मंत्री बनने के तुरंत बाद से ही फेडोरोव की उनसे बहस होने लगी थी। फेडोरोव का मानना था कि भविष्य का युद्ध ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक से लड़ा जाएगा। लेकिन सिरस्की का कहना था कि यह सोच पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना था कि युद्ध जीतने के लिए अब भी सैनिकों को मोर्चे पर जाकर लड़ना पड़ेगा। केवल ड्रोन से युद्ध नहीं जीता जा सकता। दोनों के बीच आपसी बातचीत भी बंद हो गई थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कमान के इस टकराव को सुलझाने के लिए सेना के जनरलों का पक्ष लिया और फेदोरोव को हटाने का फैसला किया। रक्षा उद्योग की बड़ी कंपनियां भी नाराज हो गईं फेडोरोव ने हथियार खरीदने की व्यवस्था बदलने की कोशिश की। इससे अरबों डॉलर के रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठेकेदार उनके विरोधी बन गए। उन्होंने ब्रेव-1 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसे लोग ‘हथियारों का अमेजन’ कहते थे। इसके जरिए सैनिक अपनी जरूरत के कुछ हथियार और उपकरण खुद ऑनलाइन चुन सकते थे और मंगा सकते थे। इसके अलावा उन्होंने डॉटचेन नाम का एक और प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। इन दोनों सिस्टम की वजह से हथियार खरीदने की पारंपरिक सरकारी प्रक्रिया कमजोर होने लगी। इससे हथियार कंपनियों की लॉबिंग और बंद कमरों में होने वाले रक्षा सौदों पर असर पड़ा। यही वजह थी कि कई बड़े रक्षा ठेकेदार उनके खिलाफ हो गए। सेना के भीतर भी विरोध था सेना के कुछ अधिकारियों का कहना था कि फेडोरोव के पास सैन्य अनुभव नहीं था। उनके आलोचकों का कहना था कि वे युद्ध का अनुभव रखने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि अच्छी प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) देने वाले व्यक्ति हैं। उनके कई वरिष्ठ सहयोगी भी पहले डिजिटल मंत्रालय में काम करते थे। वे सेना से नहीं आए थे। इस वजह से भी सेना के भीतर उनके नेतृत्व पर सवाल उठते रहे। फेडोरोव के एक वरिष्ठ सहयोगी ने स्केल्या (Skelya) नाम की हमलावर सैन्य यूनिट की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि उस यूनिट को लड़ाई में भारी नुकसान हुआ। इसके जवाब में स्केल्या यूनिट ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें युद्ध की इतनी समझ है तो वे खुद मोर्चे पर जाकर हमला करके दिखाएं। यह विवाद भी काफी चर्चा में रहा। रक्षामंत्री की लोकप्रियता भी परेशानी बन गई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फेडोरोव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। वे ड्रोन कार्यक्रम का चेहरा बन चुके थे और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। कीव स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक पेंटा सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रमुख वोलोदिमिर फेसेन्को ने कहा, “जेलेंस्की चाहते हैं कि सरकार में सबसे बड़ा चेहरा वही बने रहें।” फेसेन्को ने यह भी कहा कि फेडोरोव को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा था। संभव है कि जेलेंस्की ने इसे भी अपने लिए राजनीतिक खतरे के रूप में देखा हो। यूक्रेन की समाचार वेबसाइट उक्राइन्स्का प्रावदा के मुताबिक, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने राजनीतिक सहयोगियों से कहा कि फेडोरोव, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग के बीच बढ़ते विवाद अब उनके लिए संभालना मुश्किल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह बनी कि आखिरकार जेलेंस्की ने उन्हें रक्षा मंत्री के पद से हटाने का फैसला किया।

जयकारों के बीच भगवान जगन्नाथ नगर में स्वागत:21 बंदूकों की सलामी दी, छतों पर उमड़ा जनसैलाब, 2 महिलाओं से चेन स्नेचिंग

आषाढ़ी बीज (द्वितीया) के मौके पर आज भगवान जगन्नाथ उदयपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देश की तीसरी सबसे बड़ी और राजस्थान की सबसे बड़ी निकलेगी। मंदिर स्थापना के बाद इतिहास में पहली बार 375 साल पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ को भी इस यात्रा में शामिल होगा। र थयात्रा को लेकर शहर के जगदीश चौक में पूरा उदयपुर जुटा हुआ है। हजारों की संख्या में यहां भक्त पहुंचे है। भगवान के जयकारा लगाते हुए भक्त यहां पर झुम रहे है। रजत और लकड़ी के दोनों रथों की पूजा के बाद अब भगवान नगर भ्रमण पर निकलेंगे। देखिए, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से जुड़ीं PHOTOS…
जगन्नाथ रथयात्रा के पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग पढ़िए…

मौलाना का विवादित बयान- श्रीकृष्ण 5 बार नमाज पढ़ते थे:लखनऊ में FIR; संत बोले- जीभ काटने वाले को 10 लाख इनाम देंगे

यूपी में इटावा के रहने वाले मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित बयान दिया है। मौलाना ने कहा, भगवान श्रीकृष्ण धर्म से मुस्लिम थे और दिन में 5 बार नमाज पढ़ा करते थे। अगर योगी राम के बड़े भक्त बनते हैं, अगर वे हमारी किताब पढ़ लें तो इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। मौलाना के बयान वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर आने के बाद हिंदू संगठनों ने गहरी नाराजगी जताई। लखनऊ में हिंदू महासभा ने मौलाना की तस्वीरों को पैरों से रौंदकर प्रदर्शन किया। हजरतगंज कोतवाली में FIR के लिए शिकायत दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। अयोध्या के संत विष्णु दास ने मौलाना के बयान की निंदा करते हुए कहा- जो कोई मौलाना जर्जिस अंसारी की जीभ काटकर लाएगा, उसे वह 10 लाख रुपये का नकद इनाम देंगे। मौलाना का यह बयान 23 जून का बताया जा रहा है, जो उन्होंने झारखंड में देवघर जिले के लकरबंधा मैदान में आयोजित जलसे में दिया था। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… पहले मौलाना का बयान, हूबहू पढ़िए… मौलाना जर्जिस अंसारी ने कहा- ‘हमारे भाई अगर बुरा ना मानें, तो कृष्ण जी भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे। यकीन ना आए तो श्रीमद्भागवत गीता का छठा अध्याय का दसवां मंत्र देख लीजिए।’ योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः ।
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ॥ मौलाना ने दावा किया- ‘श्लोक में कृष्ण जी अर्जुन से कह रहे हैं कि हे अर्जुन! ईश्वर की जब पूजा करो तो पूरे शरीर का योग करो। योगी, यूपी वाला नहीं। योगी युञ्जीत सततमात्मानं, पूरे शरीर का योग करो। यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर नहीं, पूरे शरीर के साथ होनी चाहिए और पूरे शरीर का योग होना चाहिए। आज हिंदू धर्म में चले जाइए, सिर्फ ऐसे हाथ उठाएंगे, ‘ओम नमः शिवाय’, बस हो गई पूजा। ये हिंदू-मुस्लिम अगर ये अपनी किताबें पढ़ लें, योगी जी बड़े भक्त बनते हैं राम के… अगर अपनी किताबें पढ़ लें, अपनी किताबें, तो यकीन मानिए इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। क्योंकि इस्लाम ये मुसलमानों का धर्म है ही नहीं सिर्फ, ये उनका भी धर्म है। इसी दीन और इसी धर्म को रामचंद्र जी ने भी पेश किया है, कृष्ण जी ने भी पेश किया है। ये सिर्फ मुसलमानों का नहीं है।’ आगे बढ़ने से पहले भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- मौलाना ने श्लोक की गलत व्याख्या की मौलाना जर्जिस अंसारी ने अपने बयान में श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक की गलत व्याख्या की है और अपने हिसाब से उसे लोगों को समझाया। श्लोक में कहीं भी नमाज या इस्लाम का जिक्र नहीं है। दरअसल, यह भगवद्गीता के अध्याय 6 का 10वां श्लोक है। इस श्लोक का वास्तविक अर्थ है- एक योगी का धर्म है कि वह निरंतर अपने मन, शरीर और आत्मा को परमात्मा में लगाए। एकांत जगह पर और खुद को अकेला करे और अपने मन और इंद्रियों को वश में रखते हुए, सभी प्रकार की इच्छाओं और मोह से मुक्त हो जाए।’ लखनऊ में मौलाना के खिलाफ प्रदर्शन हिंदू महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी के साथ लोगों ने लखनऊ में मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ प्रदर्शन किया। सभी हजरतगंज कोतवाली पहुंचे और मौलाना के खिलाफ शिकायत दी। शिशिर ने कहा- मौलाना जर्जिस ने भगवान कृष्ण को कट्टर मुसलमान, पांच वक्त का नमाजी बताया। इससे सनातन का घोर अपमान हुआ है। हम मुकदमा दर्ज कराने हजरतगंज कोतवाली आए हैं। अगर ये कार्रवाई नहीं होती है, तो हम कल सीएम आवास कूच करेंगे। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो हम अखिलेश यादव के आवास कूच करेंगे। सनातन का अपमान पर अगर दोनों चुप रहेंगे, तो सनातन के लिए, भगवान कृष्ण के लिए, भगवान राम के लिए कौन लड़ेगा? शिशिर ने कहा- अखिलेश से मेरा निवेदन है, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर आप बहुत बोले। कम से कम अपने पूर्वज, जिनके आप वंशज हो, उन प्रभु कृष्ण जी के ऊपर दो शब्द बोल दीजिए, एक FIR करा दीजिए, कुछ मुंह खोल दीजिए, क्योंकि जाना वहीं है और आप इटावा के हो, मौलाना जर्जिस भी इटावा का है। अब बात सियासत की… कांग्रेस ने कहा- चुनाव आ रहा है, भाजपा माहौल खराब करवाएगी मौलाना के गाल कई बार लाल हुए, शर्म नहीं आती: विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा- ये कोई नया नहीं है। इसके पहले भी अरशद मदनी ने शायद दिल्ली की एक सभा में भगवान शंकर के बारे में बातें कहीं थी और ये मौलाना जर्जिस जैसे लोग के गाल कई बार लाल हो चुके हैं, लेकिन शर्म नहीं आती। लगता है इनका कुछ और इंतजाम करना पड़ेगा। अगर इनके किसी के बारे में कोई कुछ कह दे, तो सिर तन से जुदा की गैंग खड़ी हो जाती है और हमारे आराध्य देवों के बारे में इस तरह की बेहुधा टिप्पणियां करोगे, ये अस्वीकार्य है, इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। अगर प्रमाण नहीं, तो बिना शर्त माफी मांगें मौलाना: सहारनपुर के प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि मौलाना जरजिस अपने दावे के समर्थन में प्रमाण पेश करें। या फिर देश के मुसलमानों से माफी मांगें। किसी भी धार्मिक, ऐतिहासिक या आस्था से जुड़े विषय पर बिना ठोस दलील और प्रमाण के बयान देना उचित नहीं है। मौलाना जरजिस ने यह बात किस आधार पर कही, इसकी उन्हें भी जानकारी नहीं है। मौलाना कारी ने कहा कि अगर जरजिस के पास अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं है, तो उन्हें अपना बयान वापस लेना चाहिए। साथ ही पूरे देश के मुसलमानों से माफी मांगनी चाहिए। इस्लाम इल्म, तहकीक और दलील के साथ बात करने की तालीम देता है। बिना प्रमाण किसी बात को दीन का हिस्सा या ऐतिहासिक तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है। इससे समाज में भ्रम और गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। मूर्खों की बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए: कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, मूर्खों की बात पर कोई भी टीका-टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। अब जैसे-जैसे चुनाव आते जाएंगे, भारतीय जनता पार्टी के समर्थक चाहे वो पोंगा पंडित हों और वो चाहे इस तरीके के कट्टरपंथी मौलाना हों, इस तरीके की बात करके माहौल को विषाक्त करने की कोशिश करेंगे। ऐसे लोगों के ऊपर तो कठोरता से कार्रवाई होनी चाहिए। मौलाना अपनी वाहवाही के लिए ज्यादा बोल गए: अयोध्या में धर्मदास महाराज ने कहा, मौलाना को ज्ञान नहीं है। मौलाना केवल अपनी वाहवाही करने में ज्यादा बात बोल गए। पांच हजार वर्ष पहले की बात है। ये लोग 13-14 सौ वर्ष के इतिहास के मुसलमान हैं। इनका इतिहास बहुत कम है। वो लोग पहले के थे उस समय न मुस्लिम धर्म, न बौद्ध धर्म, न ईसाई धर्म, न कोई धर्म था, खाली एक सनातन धर्म था। अब इन लोगों की बात छोड़िए। यही जो कह रहे हैं मौलाना साहब, इनके बात का कोई महत्व नहीं है। अयोध्या के संत विष्णु दास ने कहा, एक मौलाना ने दावा किया है कि भगवान कृष्ण मुसलमान थे और नमाज पढ़ते थे। जो कोई भी उनकी जीभ काटेगा, उसे 10 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। मौलाना ने भगवान कृष्ण के भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उसे संस्कृत का एक शब्द भी नहीं आता और वह भगवद गीता के श्लोकों का गलत अर्थ निकाल रहा है। उन्होंने कहा, इस मौलाना के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। अखिलेश यादव यदुवंशी बनते हैं, लेकिन उस मौलाना के बयान के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोल सकते। ऐसे मौलानाओं के खिलाफ अखिलेश यादव क्यों नहीं बोलते? मौलाना के इस बयान से करोड़ों कृष्ण भक्त और हम साधु-संत दुखी हैं। मौलाना की पिटाई होनी चाहिए: महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) की नेता किशोरी पेडनेकर ने कहा, सबसे पहले तो मौलाना की पिटाई होनी चाहिए, बुरी तरह पिटाई होनी चाहिए। वह लगातार गैर-जिम्मेदाराना बयान देते रहते हैं। जब ​​भी कोई मुद्दा शांत होता है, वे दूसरा मुद्दा उठा देते हैं। वे बिना किसी आधार के ऐसी बातें कहते रहते हैं। *********************** यह खबर भी पढ़िए:- बेटे ने पिता की 6 गोलियां मारकर हत्या की:150 करोड़ की प्रॉपर्टी चाहता था, मां लाश देख चीखी, कहा- तूने घर उजाड़ दिया गाजियाबाद में 150 करोड़ की प्रॉपर्टी के विवाद में बेटे ने पिता की हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, बुधवार रात 12 बजे बेटे ने पिस्टल से पिता के चेहरे, सीने और पेट में 6 गोलियां मारीं। बेटा शराब पीकर घर आया था। पिता ने उसे डांट दिया। इसके बाद उसने वारदात को अंजाम दिया। पति का शव देखकर मां चीख पड़ी। बेटे से कहा- तूने पूरा घर उजाड़ दिया। वहीं, गोलियों की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बेटा भाग चुका था। आरोपी बेटा निखिल (32) प्रॉपर्टी अपने नाम कराने के लिए पिता हरिओम चौधरी (52) पर दबाव बना रहा था। पढ़ें पूरी खबर…

सिजेरियन के बाद फिर एक महिला की तबीयत बिगड़ी:ऑपरेशन के बाद बार-बार टांके खुलने से बच्चेदानी निकालनी पड़ी; अब यूरिन बंद

कोटा के जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक बार फिर महिला की तबीयत बिगड़ी गई। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद महिला के टांके बार-बार खुलते रहे, जिसके चलते उसकी बच्चेदानी निकालनी पड़ी। अब महिला को यूरिन बंद होने जैसी गंभीर समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल महिला को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज के एसएसबी ब्लॉक में भर्ती कराया गया है। महिला पार्वती(30) नांता इलाके की रहने वाली है। बच्चेदानी में बार-बार टांके टूटने से तबीयत बिगड़ी पार्वती के पति नीनू कुमार ने बताया कि रविवार को सुबह 6 बजे पत्नी को जेके लोन अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। सुबह 10 बजे करीब उसकी ऑपरेशन से डिलीवरी हुई। एक बच्चे को उसने जन्म दिया, लेकिन सिजेरियन के बाद उसकी हालत खराब होने लगी। उसके बच्चेदानी में टांके नहीं लग पा रहे थे और बार-बार टूट रहे थे। गंभीर हालत होने पर महिला की बच्चेदानी निकाली डॉक्टरों ने इस बारे में पार्वती के पति को बताया। उन्होंने कहा कि इसकी हालत खराब है, ऐसे में यहां इसे रिस्क है। पति ने कहा कि जो भी इलाज हो वह करें तो डॉक्टरों ने बच्चेदानी निकालने की बात कही। उसके बाद उससे कागजों पर साइन करवाए और बच्चेदानी निकाल दी। यूरिन आउटपुट बंद होने से पूरे शरीर पर आई सूजन नीनू कुमार ने बताया कि इसके बाद सोमवार से पार्वती की हालत और ज्यादा बिगड़ने लग गई। उसके यूरिन आउटपुट बंद हो गया और पूरे शरीर में सूजन आ गई। ज्यादा हालत बिगड़ने लगी तो उसे जेके लोन से एसएसबी ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया। तीन दिन से उसे यूरिन आउटपुट नहीं आ रहा है। वहीं नवजात को पार्वती का पति नीनू संभाल रहा है। नीनू पत्थर तोड़ने का काम करता है। ————- ये खबरें भी पढ़िए… कोटा में दो महिलाओं की मौत, डॉक्टर बर्खास्त, 3 सस्पेंड:सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 की तबीयत बिगड़ी थी; 2 और मरीजों की किडनी फेल कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती 2 और महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। किडनी फेल होने पर उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है। इससे पहले सिजेरियन डिलीवरी के बाद 2 महिलाओं की मौत हो चुकी है। कई की किडनी फेल है। वहीं अब जेके लोन अस्पताल से भी एक मामला सामने आया है। यहां सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई। (पूरी खबर पढ़ें…) मां आईसीयू में, रिश्तेदारों की गोद में रोते रहे नवजात:सीजेरियन डिलीवरी के चार घंटे बाद बिगड़ी तबीयत; एक महिला की मौत हो गई कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में अब एक नवजात की मौत:डिलीवरी के बाद एक और महिला की किडनी में इंफेक्शन, डॉक्टरों ने निजी अस्पताल ले जाने को कहा

बिजनेसमैन डाटा की बहू ने पति-परिजनों पर कराया मुकदमा दर्ज:रात 12 बजे महिला थाने पहुंचीं; मानसिक रूप से प्रताड़ित करने-घर में नहीं घुसने देने का आरोप

अलवर में तेल और घी के बड़े बिजनेसमैन विजय डाटा के बेटे सौरभ डाटा के बाद बहू शिखा डाटा ने भी पति और उनके परिवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। शिखा डाटा ने महिला थाने में बुधवार रात करीब 12 बजे यह मामला दर्ज कराया। वहीं अगले दिन गुरुवार सुबह शिखा डाटा दोबारा महिला थाने पहुंची। वहां पुलिस से बातचीत के बाद परिवार के लोगों के साथ गुरुग्राम के लिए निकल गई। रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद शिखा डाटा ने कहा- पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। वहीं महिला थाना प्रभारी कांता ने बताया- शिखा डाटा ने अपने पति और परिवार के खिलाफ मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और घर में नहीं घुसने देने की रिपोर्ट दी है। इस मामले के जांच की जाएगी। सौरभ डाटा ने तीन दिन पहले कराई थी रिपोर्ट दर्ज असल में 3 दिन पहले सौरभ डाटा ने कोतवाली थाने में पत्नी शिखा डाटा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें सौरभ ने पत्नी शिखा पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। अब पत्नी ने भी पति पर उसी तरह के आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। दोनों रिपोर्ट की पुलिस जांच करेगी। शिखा ने वीडियो जारी कर टॉर्चर करने के लगाए थे आरोप शिखा डाटा ने कुछ दिन पहले वीडियो जारी करते हुए कहा था कि मुझे अपने घर में घुसने नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया- मेरे साथ लगे स्टाफ को भी टॉर्चर किया जा रहा है। वीडियो में यह भी कहा कि मेरे कमरे की लाइट काट दी और रसोई गेैस का कनेक्शन भी काट दिया। डाटा ग्रुप के ऑफिस के कई कर्मचारियों पर पति को बहकाने के आरोप भी लगाए गए थे। अब इन सब मामलों की पुलिस जांच करेगी। बता दें कि यह अलवर का हाई प्रोफाइल मामला है। डाटा ग्रुप बड़ा बिजनेस ग्रुप है। इस मामले में डाटा ग्रुप कंपनी के सीनियर कर्मचारी एसके पारीक ने कहा- यह परिवार का मामला है। पति-पत्नी दोनों ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है। अब पुलिस जांच करेगी।
बिजनेसमैन के बेटे-बहू में विवाद, मानसिक प्रताड़ना का आरोप:महिला बोली- मेरे कमरे की लाइट बंद की, रसोई गैस का कनेक्शन भी काट दिया

बिजनेसमैन ने बेटे को किया किडनैप, VIDEO:मुंबई से फ्लाइट से आए किडनैपर, 12 दिन लॉज में रुके; आरोपी पिता राजस्थान से गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के मुरैना में गुटखा कारोबारी ने अपने 4 साल के बेटे का स्कूल से किडनैप कर लिया। किडनैपर मुंबई से फ्लाइट से ग्वालियर पहुंचे, फिर मुरैना आए। यहां साईं पैलेस लॉज में 12 दिन रुककर रेकी की। रेनबो पब्लिक स्कूल से किडनैप कर लिया। प्रबंधन ने बिना आईडी कार्ड मांगे बच्चे को सौंप दिया। रेनबो पब्लिक स्कूल के बाहर लगे CCTV कैमरे में अपहरण की वारदात कैद हुई। आरोपी कारोबारी नीरज उर्फ नीलेश राजपूत का ड्राइवर कार्तिकेय को कंधे पर उठाकर ले जाता नजर आया। आगे पिता स्कूटी लेकर खड़ा था। 3 साथियों के साथ वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी पिता को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार किया है। साथ में बच्चा भी है। साथी अभी फरार हैं। दैनिक भास्कर की टीम साईं पैलेस लॉज पहुंची, जहां आरोपी पिता साथियों के साथ ठहरा था। टीम ने कमरे का जायजा लिया। लॉज संचालक से अपहरण से जुड़ी जानकारी जुटाई। इस दौरान लॉज संचालक ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। पढ़िए अपहरण कांड की पूरी कहानी… वारदात से जुड़ी तस्वीरें देखिए… टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे बच्चे को सौंपा मुरैना पुलिस के मुताबिक, 14 जुलाई को आरोपी लॉज संचालक की स्कूटी से स्कूल पहुंचा। छुट्टी के बाद एक आरोपी बच्चे का नाम बताकर उसे अपने साथ ले गया। टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे या पूछताछ किए मासूम को उसके हवाले कर दिया। इसके बाद आरोपी बच्चे को लेकर फरार हो गए। जांच में सामने आया कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और दोनों अलग-अलग रह रहे थे। पुलिस की कई टीमें राजस्थान में दबिश दे रही हैं। फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती, प्यार और फिर शादी कार्तिकेय अपहरण कांड की जांच के बीच परिवार की जानकारी सामने आई। नीलेश राजपूत और इशू यादव की पहचान 2018 में फेसबुक के जरिए हुई थी। दोनों की दोस्ती प्यार में बदली और 2019 में उन्होंने शादी कर ली। नीलेश मूल रूप से राजस्थान के पाली का रहने वाला है। शादी के समय वह मुंबई में रहकर गुटखा का कारोबार करता था। शादी के बाद दोनों करीब तीन-चार साल मुंबई में साथ रहे। इसी दौरान बेटे कार्तिकेय का जन्म भी मुंबई में हुआ। विवाद के बाद बेटे को लेकर मुरैना आ गई पत्नी पत्नी इशू यादव का आरोप है कि बेटे के जन्म के बाद नीलेश शराब और नशे का आदी हो गया। वह उसके साथ मारपीट करने लगा। विवाद बढ़ने पर जनवरी 2025 में इशू बेटे कार्तिकेय को लेकर मायके मुरैना आ गई। अगस्त 2025 में नीलेश मुरैना पहुंचा और बेटे को अपने साथ मुंबई ले गया। समझौते का भरोसा मिलने पर इशू भी उसके साथ मुंबई चली गई, लेकिन कुछ समय बाद फिर विवाद और मारपीट शुरू हो गई। जनवरी 2026 में इशू दोबारा बेटे कार्तिकेय को लेकर मुरैना लौट आई। तब से दोनों पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे थे। करीब 2 महीने पहले इशू और उसकी मां ममता यादव ने कार्तिकेय का रेनबो पब्लिक स्कूल में दाखिला कराया था। स्कूल में दाखिले की जानकारी मिलते ही मुरैना पहुंचा पिता पुलिस जांच के अनुसार, इसी शैक्षणिक सत्र में कार्तिकेय का रेनबो पब्लिक स्कूल में दाखिला कराया गया। जानकारी मिलने पर पिता नीलेश मुंबई से मुरैना पहुंचा। पुलिस का मानना है कि इसी दौरान उसने बेटे के अपहरण की योजना बनानी शुरू कर दी। 26 जून को नीलेश राजपूत मुरैना पहुंचा और साईं पैलेस लॉज में एक साथी के साथ कमरा लेकर रुका। इसके बाद वह लौट गया। फिर 28 जून से 14 जुलाई तक 3 साथियों के साथ दोबारा उसी लॉज में ठहरा। इसी दौरान उसने बच्चे की गतिविधियों, स्कूल आने-जाने के रास्तों, छुट्टी के समय और सुरक्षा व्यवस्था की रेकी कर पूरी साजिश तैयार की। 28 जून से 14 जुलाई तक साथियों के साथ लॉज में रुका लॉज संचालक अमित गुप्ता ने बताया कि नीलेश पहली बार 26 जून को एक साथी के साथ आया था। इसके बाद 28 जून से 14 जुलाई तक वह दो साथियों के साथ लगातार लॉज में रुका। इस दौरान एक अन्य व्यक्ति भी कई बार वहां आया-जाया और कई बार ठहरा। कमरा बदला, किराए में भी किया मोलभाव शुरुआत में आरोपियों को कमरा नंबर-6 दिया गया था। बाद में 3 लोगों के रहने पर उन्हें कमरा नंबर-4 दे दिया गया। पहले कमरे का किराया 800 रुपए प्रतिदिन था, जबकि बड़े कमरे का किराया 1200 रुपए तय हुआ। बातचीत के बाद आरोपी 1000 रुपए प्रतिदिन देने पर सहमत हो गए। खाना खाने के बहाने कई बार ले गए स्कूटी लॉज संचालक के मुताबिक, आरोपी कई बार खाना खाने का बहाना बनाकर उनकी स्कूटी ले जाते थे और कुछ देर बाद लौटा देते थे। इससे किसी को उन पर शक नहीं हुआ। 14 जुलाई को भी उन्होंने कुछ देर के लिए स्कूटी मांगी। संदेह से बचने के लिए उसी स्कूटी से रेनबो पब्लिक स्कूल पहुंचे। स्कूल के बाहर इंतजार, फिर बच्चे को लेकर हुए फरार 14 जुलाई को एक आरोपी स्कूल के बाहर छुट्टी का इंतजार करता रहा। दोपहर करीब 2 बजे छुट्टी होते ही वह स्कूल के गेट के अंदर पहुंचा, बच्चे का नाम बताया और उसे लेने की बात कही। गेट पर मौजूद टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे और बिना पूछताछ के कार्तिकेय को उसके साथ भेज दिया। आरोपी बच्चे को करीब 100 मीटर तक गोद में लेकर पैदल चला। इसके बाद वह पहले से स्कूटी लेकर खड़े साथी के पास पहुंचा और दोनों फरार हो गए। कुछ देर बाद कार्तिकेय की नानी उसे लेने स्कूल पहुंचीं तो बच्चा नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और अपहरण का मामला दर्ज कराया। सीसीटीवी फुटेज से खुली साजिश की परतें पुलिस ने स्कूल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। शुरुआत में मां और नानी आरोपी की पहचान नहीं कर सकीं। पुलिस की सख्ती और सीसीटीवी फुटेज दिखाने के बाद मां ने बताया कि बच्चे को ले जाने वाला व्यक्ति उसके पति का ड्राइवर नीरज है। वहीं, लॉज संचालक ने भी सीसीटीवी देखकर उस स्कूटी चालक की पहचान कर ली, जो आरोपी पिता के साथ लॉज में ठहरा था। अपहरण के बाद आरोपी चंबल नदी की ओर पहुंचे। नाकेबंदी और पीछा किए जाने की आशंका में उन्होंने स्कूटी सड़क किनारे लावारिस छोड़ दी। चंबल के पास छोड़ी स्कूटी, दूसरे वाहन से भागे स्कूटी छोड़ने के बाद आरोपी ने लॉज संचालक को फोन कर कहा, “स्कूटी चंबल नदी के पास खड़ी है, जाकर ले जाना। अब हम वापस नहीं आएंगे।” बाद में उसका मोबाइल बंद हो गया। कुछ समय बाद उसने वॉयस मैसेज भेजकर स्कूटी चंबल पुल के पास खड़ी होने की जानकारी दी। बुधवार देर रात उसने फिर मैसेज कर पूछा कि स्कूटी ले आए क्या। किराए और पैसों की बात होने पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिस ने साईं पैलेस लॉज के कमरे की तलाशी लेकर ट्रॉली बैग, कपड़े और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं बरामद कीं। राजस्थान से पिता गिरफ्तार, बच्चा भी साथ में 15 जुलाई को पुलिस को मोबाइल लोकेशन धौलपुर होते हुए राजस्थान के पाली क्षेत्र में मिली। इसके बाद पुलिस की कई टीमें राजस्थान रवाना की गईं। 16 जुलाई को जांच में पिता नीलेश राजपूत की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे अपहरण की साजिश का मुख्य आरोपी माना। पुलिस ने पिता को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव का बेटा गिरफ्तार:खुद को IPS बताकर लेडी साइंटिस्ट से ठगी, MBBS छात्र से ₹15 लाख हड़पे

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के 35 वर्षीय बेटे आर. यशोवर्धन को देहरादून पुलिस ने फर्जी IPSअधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को कभी IPS, कभी RAW, CBI, CRPF, NIA और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेता था। पुलिस ने उसे गुरुवार को मसूरी रोड स्थित CSI तिराहे से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके पिता वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। बचपन से अधिकारियों का रुतबा देखकर वह भी IPS बनना चाहता था। उसने कई साल UPSC की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बनवाकर खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताना शुरू कर दिया। दो मामलों में 19.60 लाख की ठगी का आरोप राजपुर थाने में दर्ज दो मुकदमों में आरोपी पर एक MBBS छात्र से कंपनी रजिस्ट्रेशन और स्टार्टअप फंडिंग के नाम पर 15 लाख रुपए, जबकि एक महिला वैज्ञानिक से रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने के नाम पर 4.60 लाख रुपए ठगने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 5 फर्जी आईडी कार्ड, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस और सेना के 25 लोगो, सेना/पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दियां, 3 फर्जी रिबन, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप बरामद किया है। लोगों का भरोसा जीतकर करता था ठगी एसपी सिटी के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वर्दी, फर्जी पहचान पत्र और प्रभावशाली बातचीत के जरिए वह लोगों का भरोसा जीतता था। इसी का फायदा उठाकर वह कई सालों से धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस अब उसके अन्य पीड़ितों और संभावित आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। दो शिकायतें मिलने के बाद एसएसपी देहरादून के निर्देश पर राजपुर थाना पुलिस ने विशेष टीम बनाई। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और क्या इस गिरोह में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है। सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी खबर… 1. बड़े अधिकारियों के सामने खुद को बताया RAW एजेंट- देहरादून की राजपुर थाना पुलिस ने खुद को फर्जी IPS, रॉ (RAW) एजेंट और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक हाई-प्रोफाइल शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्त का नाम आर० यशोवर्धन (35) है, जो उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस० रामास्वामी का बेटा है। एसएसपी देहरादून की सटीक रणनीति पर राजपुर थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान अभियुक्त को CSI तिराहा, ओल्ड मसूरी रोड से दबोच लिया। 2. ठगी के दो बड़े मामले (19.60 लाख की धोखाधड़ी)- राजपुर थाने में आरोपी यशोवर्धन के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमों के आधार पर BNS की धाराओं 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत केस दर्ज है 3. UPSC में फेल हुआ, तो चुना जालसाजी का रास्ता- एसपी सिटी प्रमोद कुमार के मुताबिक, यशोवर्धन के पिता उत्तराखंड के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह बचपन से ही अधिकारियों का रुतबा देखकर IPS बनने का सपना देखता था। उसने कई साल तक UPSC की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। असफलता हाथ लगने पर उसने लोगों पर रौब झाड़ने के लिए फर्जी आईडी, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बनवाकर खुद को IPS, RAW, CBI, CRPF, NIA और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताना शुरू कर दिया। वह प्रभावशाली बातचीत से लोगों का भरोसा जीतकर टेंडर, नौकरी और सरकारी काम का झांसा देता था। 4. पुराना हाई-प्रोफाइल मारपीट का मामला- विधायक के बेटे पर आरोप- इस पूरे ठगी के घटनाक्रम के पीछे एक पुराना और गंभीर मारपीट का मामला जुड़ा हुआ है, जिसमें यही महाठग (यशोवर्धन) पीड़ित था- अभी देहरादून पुलिस ने फर्जी IPS यशोवर्धन को गिरफ्तार कर उसे कोर्ट में पेश करने की कानूनी कार्रवाई पूरी कर ली है। पुलिस अब उसके जाल में फंसे अन्य पीड़ितों का पता लगाने और उसके संभावित पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की गहराई से जांच कर रही है। —————————————————- ये खबर भी पढ़ें… देहरादून में गलत ऑपरेशन से 15 वर्षीय बच्चे की मौत:डॉक्टर के पास नहीं थी डिग्री, 4 साल बाद कोर्ट के आदेश पर FIR देहरादून में पांच डॉक्टरों पर गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगा है, जिससे 15 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में डॉक्टर आलम (संचलाक) के पास डिग्री नहीं होने की बात सामने आई है। गौरव सड़क हादसे में घायल हो गया था। (पढ़ें पूरी खबर)

कांग्रेस का पीएम को लेटर, कहा- सर्वदलीय बैठक बुलाएं:मानसून सत्र में चढ़ावा चोरी का मामला उठाएगी, संशोधन बिल का विरोध करेगी

कांग्रेस मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का मुद्दा उठाएगी। इसके अलावा, सरकार के संशोधन बिलों का विरोध करेगी। यह फैसला गुरुवार को कांग्रेस की संसदीय दल की बैठक में लिया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक यानी परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा। इसमें सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
बैठक सोनिया गांधी के आवास पर हुई। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, शशि थरूर और जयराम रमेश समेत कई नेता शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। रमेश ने कहा- महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू करें, तो पूरा समर्थन देंगे न्यायाधीशों को हटाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर भी बैठक में चर्चा हुई। इस विधेयक की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाई गई है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसका बहिष्कार किया है। कांग्रेस इस विधेयक का भी मजबूती से विरोध करेगी। कांग्रेस एफसीआरए का भी विरोध करेगी- रमेश यदि सरकार ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ मानसून सत्र में लाती है तो कांग्रेस इसका पूरी तरह विरोध करेगी। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक दोबारा लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी इस विधेयक का विरोध किया था, जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था। अगर इसे फिर पेश किया गया तो पार्टी दोबारा इसका विरोध करेगी। ———————- ये खबरे भी पढ़ें… राहुल गांधी के वॉइस सैंपल का मिलान नहीं होगा:MP-MLA कोर्ट के फैसले को स्पेशल रिविजनल कोर्ट ने रखा बरकरार सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट से कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में चल रहे मानहानि केस में राहुल गांधी के वॉइस सैंपल की जांच कराने की मांग वाली निगरानी याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

गगनयान मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने ISRO छोड़ा:10 महीने में 100 इस्तीफे; केंद्रीय मंत्री बोले- लोग आते-जाते रहते हैं

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) से पिछले 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों में गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इसके बाद अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया निर्देश जारी किए हैं। नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया अब सख्त की जाएगी। इस मामले में केंद्रीय विज्ञान और तकनीकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO में लोग आते-जाते रहते हैं। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे LVM3 प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यही लॉन्च व्हीकल गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा। इस्तीफे पर अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा सरकारी निर्देश में कहा गया है कि इस्तीफों और VRS के मामलों में तेजी आने से गगनयान और दूसरे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ रहा है। नौकरी छोड़ने के आवेदनों पर अब अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा। पहले ISRO केंद्रों के निदेशकों और प्रमुखों को इस्तीफे और VRS स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। स्टार्टअप्स में जा रहे वैज्ञानिक एक साल में लगातार दो मिशन असफल इस्तीफों से ISRO को हाल के मिशनों में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ISRO का “वर्कहॉर्स” माना जाने वाला PSLV एक साल के भीतर लगातार दो मिशनों में असफल रहा। पहला- जनवरी में EOS-N1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और व्यावसायिक पेलोड लेकर उड़ान भरने वाला PSLV-C62 तीसरे चरण के अंत में आई गड़बड़ी के कारण तय रास्ते से भटक गया था। दूसरा- मई 2024 में PSLV-C61/EOS-09 (RISAT-1B) मिशन भी असफल रहा था। उड़ान के करीब 203 सेकेंड बाद तीसरे चरण में चेंबर प्रेशर अचानक गिर गया, जिससे रॉकेट 529 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस कक्षा तक नहीं पहुंच सका और मिशन समाप्त करना पड़ा। इस दौरान रडार सैटेलाइट भी नष्ट हो गया। इसरो अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने के मिशन पर काम कर रहा इन चुनौतियों के बावजूद ISRO अब गगनयान मिशन, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मंगलयान-2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रखे हुए है। गगनयान का लक्ष्य भारत को अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बनाना है।
———————— ये खबर भी पढ़ें: इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, मिशन फेल:तीसरी स्टेज में गड़बड़ी आई; अन्वेषा सहित 16 सैटेलाइट लेकर गया था श्रीहरिकोटा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल 2026 का पहला मिशन ‘PSLV-C62’ फेल हो गया है। रॉकेट 12 जनवरी को सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से 16 सैटेलाइट लेकर उड़ा था। ISRO चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण वह रास्ता भटक गया। पढ़ें पूरी खबर…