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सब्जी का ठेला लगाकर जयपुर में कलाकारों ने बेचा पेपर!:सोनम वांगचुक के समर्थन में बुलंद की आवाज, लाइव पेंटिंग से दिया संदेश

जयपुर में गुरुवार को कलाकारों ने सोनम वांगचुक के समर्थन में अनोखा प्रदर्शन किया। मालवीय नगर स्थित करी लीफ कैफे में आयोजित ‘रंगों से समर्थन’ लाइव पेंटिंग सेशन में 25 से अधिक कलाकारों ने कैनवास और पेपर पर चित्र बनाकर सोनम वांगचुक के आंदोलन के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान कलाकारों ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को अपनी कलाकृतियों के केंद्र में रखा। कार्यक्रम में हर कलाकार ने अपने अलग अंदाज में सोनम वांगचुक के व्यक्तित्व, उनके संघर्ष और शिक्षा सुधार की मांग को चित्रों में उकेरा। किसी ने उन्हें युवाओं की उम्मीद के रूप में दर्शाया तो किसी ने बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता की मांग को प्रतीकात्मक रूप से रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में युवा, कला प्रेमी और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग पहुंचे और कलाकारों के कार्यों को करीब से देखा। कलाकार में आलू, प्याज की तरह पेपर बिकते हुए दिखाया कार्यक्रम का सबसे चर्चित एक कलाकार की व्यंग्यात्मक प्रस्तुति रही। कलाकार ने सब्जी विक्रेता का रूप धारण कर आलू, टमाटर, मिर्च और प्याज के साथ सरकारी भर्ती परीक्षाओं के ‘पेपर बेचने’ का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। हाथ में माइक लेकर विभिन्न सरकारी भर्तियों के नाम पुकारते हुए पेपर की बोली लगाती नजर आई। इस अनोखी प्रस्तुति के माध्यम से कलाकार ने राज्य में सामने आए पेपर लीक प्रकरणों और भ्रष्टाचार पर तीखा कटाक्ष किया, जिसे देखने वालों ने खूब सराहा। कई कलाकारों ने अपनी पेंटिंग्स में भ्रष्टाचार, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और युवाओं के भविष्य को केंद्र में रखा। चित्रों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी नहीं होगी तो लाखों युवाओं के सपने प्रभावित होंगे। कलाकारों का मानना था कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद स्थापित करने का सशक्त जरिया भी है। आयोजक विनीता ने बताया- इस आयोजन का उद्देश्य सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन और शिक्षा सुधार की मांग के प्रति एकजुटता व्यक्त करना है। सोनम वांगचुक लगातार पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। उनके समर्थन में कलाकारों ने यह तय किया कि वे रंगों के माध्यम से उनकी आवाज को समाज तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और ऐसे समय में समाज के हर वर्ग को अपनी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। कलाकारों ने भी अपनी कला को आंदोलन का माध्यम बनाते हुए यह संदेश दिया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर पूरे समाज को साथ आना होगा।

टेक महिंद्रा का मुनाफा 28% बढ़कर ₹1,465 करोड़:पहली तिमाही में रेवेन्यू 17.6% बढ़ा, कंपनी की टोटल इनकम ₹15,605 करोड़ रही

टेक महिंद्रा का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 28% बढ़कर ₹1,465 करोड़ हो गया। एक साल पहले की समान तिमाही (Q1FY26) में कंपनी को ₹1,140 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (16 जुलाई) को कंपनी ने पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी किए हैं। नतीजों के पहले टेक महिंद्रा का शेयर 1.13% बढ़कर 1,515 रुपए पर बंद हुआ। बीते एक साल में शेयर 6% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.48 लाख करोड़ रुपए है। रेवेन्यू 17.67% बढ़कर ₹15,711 करोड़ रहा टेक महिंद्रा के ऑपरेशन से रेवेन्यू में सालाना आधार पर 17.67% की बढ़ोतरी हुई है। FY27 की पहली तिमाही में ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹15,711 करोड़ रहा। एक साल पहले की समान तिमाही यानी FY26 की पहली तिमाही में रेवेन्यू ₹13,351 करोड़ रहा था। पहली तिमाही में कंपनी की टोटल इनकम सालाना आधार (YoY) पर 15% बढ़कर 15,605 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की समान तिमाही में 13,569 करोड़ रुपए थी। कॉन्सोलिडेटेड यानी पूरी कंपनी की रिपोर्ट कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। ये खबर भी पढ़ें… विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा: रेवेन्यू 10% बढ़ा, कंपनी ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया; एट्रिशन रेट 13.9% रहा आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पूरी खबर पढ़ें…

बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका:ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा

म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।

कब्रिस्तान में हार्ट अटैक से व्यक्ति की मौत:पौधों में पानी देने गया था, घरवालों को जमीन पर पड़ा मिला

पाली शहर में कब्रिस्तान में इबादत करने और पौधों को पानी देने गए व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिजनों के पहुंचने पर बेहोशी की हालत में जमीन पर पड़े मिले। तुरंत टैक्सी से पाली के बांगड़ हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रोज की तरह इबादत करने गए थे भाई अख्तर हुसैन ने बताया, जंगीवाड़ा निवासी मोहम्मद रमजान (52) पुत्र हब्बास खान पेशे से ड्राइवर थे। गुरुवार सुबह वे अपनी वैन से बच्चों को स्कूल छोड़कर लौटे। इसके बाद रोज की तरह रामलीला मैदान के पास स्थित कुरैशी समाज के कब्रिस्तान में फातिया (इबादत) करने और वहां लगे पौधों में पानी देने पहुंचे। अचानक गिरे, लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया इबादत के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे कब्रिस्तान में ही गिर पड़े। वे पहुंचे तो रमजान बेहोशी की हालत में पड़े थे। लोगों की मदद से बेहोशी की बिना देर किए टैक्सी से पाली के बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचाया। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक जांच में हार्ट अटैक से मौत हो बताया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों को खुलासा हो होगा। — हार्ट से मौत की ये खबरें भी पढ़ें … 1. पाली में चलती बस में ड्राइवर की मौत का VIDEO:इंदौर से जोधपुर जा रही थी लग्जरी स्लीपर, हार्ट-अटैक की आशंका पाली में एक चलती बस में 36 साल के ड्राइवर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। यह घटना बस में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पूरी खबर पढ़िए 2. SMS ​हॉस्पिटल के डॉक्टर की हार्ट अटैक से मौत:महाराष्ट्र में सेमिनार के दौरान सीने में उठा दर्द; तीन दिन पहले महिला की सर्जरी की थी सीनियर जनरल सर्जन डॉ. बी.एल. यादव की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। वे महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में सर्जन की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए गए थे। पूरी खबर पढ़िए

50 लाख में स्कूल लेक्चरर का पेपर खरीदने वाला गिरफ्तार:7 लाख लेकर पेपर पढ़ाया; सीनियर टीचर का पेपर 29 अभ्यर्थियों तक पहुंचाया

स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक मामले में एसओजी ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने 50 लाख में लीक पेपर खरीदकर अभ्यर्थियों को पढ़ाया था। सरकारी नौकरी भी दिलवाई थी। एसओजी ने आरोपी विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ (45) निवासी पापड़िया की ढाणी, जयपुर को गुरुवार को चौमूं से गिरफ्तार किया है। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया- एसओजी थाने में दर्ज केस की जांच में सामने आया था कि पेपर लीक गिरोह के सरगना अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह ने तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा से करीब 60 लाख रुपए में प्रश्नपत्र हासिल किए थे। इसके बाद कृषि विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल और शारीरिक शिक्षा सब्जेक्ट के सॉल्व पेपर परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। 50 लाख में खरीदा पेपर, 7 लाख लेकर कराया चयन जांच में खुलासा हुआ कि विनोद रेवाड़ ने करीब 50 लाख रुपए में 4 सब्जेक्ट के सॉल्व प्रश्नपत्र खरीदे। इसके बाद कृषि विज्ञान विषय के अभ्यर्थी अशोक कुमार यादव को 7 लाख रुपए में प्रश्नपत्र पढ़ाया। परिणामस्वरूप अशोक कुमार यादव का चयन स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) के पद पर हुआ। वो वर्तमान में सीकर जिले के श्रीमाधोपुर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (देवराला) में कार्यरत था। 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था। इस मामले में उसने 8 अभ्यर्थियों से करीब 10-10 लाख रुपए लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था। आरोपी को साल 2025 में ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था। 29 अभ्यर्थियों से वसूले 57 लाख रुपए वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) भर्ती परीक्षा-2022 के मामले में भी जांच में सामने आया कि विनोद रेवाड़ ने 29 अभ्यर्थियों से करीब 57 लाख रुपए लेकर उन्हें परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र पढ़ाया। इस मामले में आरोपी अरुण शर्मा उर्फ राजेश शर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली 13 जुलाई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने विनोद रेवाड़ की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 16 जुलाई को SOG की विशेष टीम ने चौमूं के बराला हॉस्पिटल के पास से बुधवार को गिरफ्तार किया। । 20 जुलाई तक रिमांड पर आरोपी को न्यायालय में पेश कर 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। SOG उससे पेपर लीक नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और अवैध लेनदेन के संबंध में पूछताछ कर रही है।

8 साल के बच्चे को टीचर ने बुरी तरह पीटा:बेहोश हुआ तो घरवालों को बुलाया, गणित की कॉपी घर भूल गया था स्टूडेंट

बाड़मेर जिले के एक प्राइवेट स्कूल में टीचर ने मैथ की कॉपी नहीं लाने पर चौथी क्लास के स्टूडेंट को डंडे से बुरी तरह पीटा। जिससे बच्चा बेहाश हो गया। यह देख स्कूल स्टाफ घबरा गया। एक टीचर ने स्टूडेंट के परिजनों को सूचना दी। परिजन स्कूल पहुंचे और बच्चे को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। मामला चौहटन के टीपीएस पब्लिक स्कूल का गुरुवार सुबह 10 बजे का है। डॉ. रतनाराम चौधरी ने बताया – हॉस्पिटल में बच्चे को करीब 10.30 बजे लाया गया था। तुरंत इलाज के बाद हालत में सुधार आ गया था। करीब आधे घंटे तक ओपीडी में निगरानी में रखा गया। मारपीट से नीले निशान (नील) पाए गए। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई थी। वहीं स्कूल संचालक का कहना है कि मामले में टीचर की गलती होगी तो उसे स्कूल से निकाल देंगे।
कॉपी भूलने पर टीचर ने डंडे से पीटा बच्चे के पिता ने बताया – मेरा 8 साल का बेटा प्राइवेट टीपीएस पब्लिक स्कूल में चौथी क्लास में पढ़ता है। गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे बस से स्कूल गया था। करीब 10 बजे क्लास में गणित के टीचर गणपत ने कॉपी मांगी। बच्चे ने बताया कि वह गणित की कॉपी घर पर भूल गया है। कल लेकर आएगा। इस पर टीचर ने डंडे से उसकी पिटाई कर दी। जिससे उसे चक्कर आने लगे और बच्चा अचेत हो गया। इसके बाद स्कूल के अन्य टीचर जसवंत ने हमें फोन करके तबीयत बिगड़ने की सूचना दी। सूचना मिलने पर हम स्कूल पहुंचे तो बेटे की तबीयत खराब थी। पूछने पर उसने बताया कि गणित की कॉपी घर पर छूटने पर शिक्षक ने डंडे से पीटा। इसके बाद हम उसे चौहटन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज कराया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्चे का का बयान लिया। स्कूल संचालक जगदीश विश्नोई ने बताया- बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था, जिस पर टीचर ने उसे डंडे से मारा। मैं फिलहाल बाहर हूं। वापस लौटने पर पूरे मामले की जांच करेंगे और यदि टीचर की गलती पाई गई तो उसे स्कूल से हटा दिया जाएगा।

जांच समिति ने माना- मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति अनुसूचित:1950 से लेकर अब तक के सरकारी रिकॉर्ड से पुष्टि; वैध प्रमाण पत्र लगाया था

नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति ने जांच के बाद उनके अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र को वैध माना है। समिति ने कहा कि राज्यमंत्री बागरी के परिवार के राजपूत होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। समिति के मुताबिक, शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके उलट 1950 से लेकर अब तक के राजस्व अभिलेख, वंशावली, शैक्षणिक रिकॉर्ड, जाति प्रमाणपत्र, निर्वाचन रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज उनके परिवार के अनुसूचित जाति से संबंधित होने की पुष्टि करते हैं। समिति ने कहा- आजादी के बाद के शुरुआती राजस्व रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण सबूत हैं। इनमें राज्यमंत्री के परिवार की जाति बागरी दर्ज है। ऐसे रिकॉर्ड में बाद में बदलाव की संभावना कम मानी जाती है इसलिए इन्हें विशेष महत्व दिया गया। कांग्रेस नेता ने लगाई थी याचिका दरअसल, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 24 अप्रैल को याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने फैसला राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति पर छोड़ा था। कोर्ट ने समिति को 60 दिन में निर्णय लेने को कहा था लेकिन इसने 14 जुलाई को ही अंतिम फैसला दे दिया। समिति के अध्यक्ष गुलशन बामरा, सचिव सत्येंद्र सिंह जबकि सदस्य- विषय विशेषज्ञ मातादीन कनेरिया और सुधीर श्रीवास्तव थे। परिवार के दूसरे दस्तावेजों से भी बागरी होने की पुष्टि समिति ने राजस्व अभिलेख, खसरा-खतौनी, परिवार की वंशावली, स्कूल रिकॉर्ड, निर्वाचन संबंधी दस्तावेज, पूर्व में जारी जाति प्रमाणपत्र, परिवार के सदस्यों के अभिलेख और संबंधित विभागों से प्राप्त रिकॉर्ड जांचे। सभी में परिवार की जाति बागरी ही दर्ज मिली। किसी भी दस्तावेज में परिवार को राजपूत नहीं बताया गया। राजस्व अधिकारी, जाति प्रमाणपत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी और अन्य विभागों से रिपोर्ट भी ली गई। सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद फैसला किया गया। शिकायतकर्ता न्यायिक मंच पर चुनौती देने स्वतंत्र समिति ने अपने अंतिम निष्कर्ष में कहा- उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र वैध है। इसे निरस्त करने का कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं मिला इसलिए शिकायत को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि शिकायतकर्ता इस निष्कर्ष से असहमत हैं तो वे सक्षम न्यायिक मंच पर इसे चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं। शिकायतकर्ता बोले- 6 महीने में पूर्व मंत्री हो जाएंगी कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा- छानबीन समिति ने देखभाल समिति का काम किया है। इस समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी की देखभाल बहुत अच्छे से की है। संवैधानिक दस्तावेजों और तथ्यों को दरकिनार कर दिया गया। ये खबर भी पढ़ें… मंत्री प्रतिमा बोलीं- अपराधियों जैसे सलूक से दुखी हूं मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने सुनवाई की। मंत्री ने वंशावली से संबंधित दस्तावेज समिति को देते हुए कहा- मैं बागरी समाज से हूं, जो मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल है। मेरी जाति साबित करने के लिए गांव में मुनादी कराई गई, अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। मैं इससे दुखी हूं। पढे़ं पूरी खबर…

बेटी का मर्डर करने वाले को 10 साल की जेल:पढ़ाई नहीं करने पर मुक्कों से मार-मार कर ली थी जान, 13 गवाहों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

आबूरोड के गांधीनगर क्षेत्र स्थित प्रेम नगर में 11वीं कक्षा की छात्रा मोमिना की हत्या के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। छात्रा की मौत का मामला अप्रैल 2024 में सामने आया था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। 5 अप्रैल 2024 को छात्रा के चाचा अकरम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसके भाई फतेह मोहम्मद ने फोन कर उसे घर बुलाया। मौके पर पहुंचने पर उसकी भतीजी मोमिना घर के फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ी मिली। पूछताछ में सामने आया कि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता ने बेटी के साथ मारपीट की थी। आरोप था कि फतेह मोहम्मद ने लकड़ी, थप्पड़ों और मुक्कों से मोमिना की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आबूरोड अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 11वीं की परीक्षा शुरू होने वाली थी जांच में सामने आया था कि मोमिना की 11वीं कक्षा की परीक्षा शुरू होने वाली थी। परिवार के अनुसार पिता पढ़ाई को लेकर उस पर लगातार दबाव बना रहा था। घटना से पहले भी दो दिनों तक उसके साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई थी। मोमिना ने इससे पहले 10वीं बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वह आबूरोड के अर्बुद स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा थी। चाचा की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ था हत्या का मामला घटना के बाद मोमिना के चाचा अकरम की शिकायत पर आबूरोड सिटी थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को गिरफ्तार कर जांच शुरू की। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। 13 गवाहों और 30 दस्तावेजों के आधार पर हुई सुनवाई मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए, 30 दस्तावेज और दो आर्टिकल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फतेह मोहम्मद को दोषी माना। अदालत ने सुनाई 10 साल की सजा अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी फतेह मोहम्मद को 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत का यह फैसला करीब दो वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया। — इस घटना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- पढ़ाई नहीं करने पर पिता ने बेटी को मार डाला: परीक्षा के 2 दिन पहले से कर रहा था मारपीट; बेहोश हुई तो हॉस्पिटल लेकर पहुंचे घरवाले पिता ने 11वीं क्लास में पढ़ने वाली बेटी को पीट-पीटकर मार डाला। परीक्षा की तैयारी नहीं करने से पिता नाराज था। बेटी को लकड़ी और मुक्का से इतना मारा कि उसे अंदरूनी चोटें आईं। (पूरी खबर पढ़ें)

सरकार ने 20 लाख में खरीदे 10-लाख कीड़ों के सिर:2 रुपए में बिका एक 'साल बोरर'; सुबह पकड़ते हैं ग्रामीण, डेढ़ लाख पेड़ खा गए कीड़े

मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में वन विभाग जंगलों को बचाने कीड़ों का सिर कटवा रहा। साल बोरर कीड़े का सिर 2 रुपए में खरीद रहा है। मकसद कीड़ों को खत्म कर साल (सरई) के जंगलों को बचाना है। अब तक करीब 10 लाख कीड़ों के सिर काटे जा चुके हैं। बदले में ग्रामीणों को 20 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा। दरअसल, साल बोरर कीट ने जिले के जंगलों को प्रभावित कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद 1 लाख 46 हजार 784 प्रभावित पेड़ों की कटाई की जाएगी। फिलहाल वन विभाग कीड़ों की संख्या कम करने के लिए ग्रामीणों की मदद से विशेष अभियान चला रहा है। ये तस्वीरें देखिए कीड़ों को पकड़ने के लिए सुबह जंगल पहुंचते हैं ग्रामीण एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि बारिश के मौसम में हर दो हेक्टेयर क्षेत्र में साल का एक पेड़ काटकर उसकी छाल को पीटने के बाद छोड़ दिया जाता है। साल के रस की खुशबू से आकर्षित होकर कीट वहां रस पीने पहुंचते हैं। इसके बाद सुबह 5 से 7 बजे के बीच ग्रामीण जंगल पहुंचकर उन्हें पकड़ लेते हैं। पकड़े गए कीटों के सिरों की माला बनाकर उन्हें कीट संग्रहण केंद्रों पर जमा कराया जाता है। इसके लिए खारीडीह, चौरादादर, कबीर, जगतपुर और करंजिया में 5 संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। 30 जुलाई के बाद एकत्र किए गए इन कीटों को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 30 हजार हेक्टेयर जंगल में फैला साल बोरर का प्रकोप वन विभाग के एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, दक्षिण समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र के करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगे सरई (साल) के पेड़ साल बोरर कीट से प्रभावित हैं। कीटों को पकड़ने का अभियान 20 जून से ग्रामीणों की मदद से लगातार चलाया जा रहा है। वन विभाग ने साल बोरर कीट का एक सिर लाने पर 2 रुपए देने की व्यवस्था की है। अब तक ग्रामीण करीब 10 लाख कीड़ों के सिरों की माला बनाकर वन विभाग कार्यालय में जमा कर चुके हैं। प्रत्येक व्यक्ति के जमा किए गए सिरों की अलग-अलग एंट्री की जा रही है। ऐसे पकड़े जाते हैं साल बोरर कीड़े एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि सरई के पेड़ों की छाल काटकर उसे पीटा जाता है। इससे निकलने वाली सुगंध करीब 3 किलोमीटर दूर तक फैलती है। इसकी गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट रस पीने पहुंचते हैं। कुछ समय के लिए सुस्त हो जाते हैं। वन विभाग पेड़ों की छाल का रेजिन कूटकर उसका पाउडर भी घरों के आसपास रखवाता है। इसकी गंध से आकर्षित होकर कीट वहां पहुंचते हैं, जहां ग्रामीण उन्हें पकड़ लेते हैं। सूरज निकलने से पहले कीटों को पकड़ लिया जाता है, क्योंकि बाद में वे उड़ने लगते हैं। पकड़े गए कीटों के सिर काटकर उनकी माला बनाई जाती है। वन विभाग के कर्मचारियों के पास जमा कराई जाती है। इसके बाद प्रति सिर के हिसाब से भुगतान किया जाता है। आखिर पेड़ों के लिए इतना खतरनाक क्यों है यह कीड़ा साल बोरर केवल साल (सरई) के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है। संख्या बढ़ने पर यह पेड़ के तने में घुसकर उसे धीरे-धीरे खाता है। इसके कारण तने के नीचे बुरादे जैसा पाउडर जमा होने लगता है। वन विभाग के मुताबिक, समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए तो यह एक पेड़ से दूसरे और फिर पूरे जंगल में तेजी से फैल जाता है। इससे बड़ी संख्या में साल के पेड़ सूख जाते हैं। हर-भरे पेड़ नष्ट हो जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। 1.46 लाख पेड़ों की कटाई की तैयारी वन विभाग की प्रोडक्शन DFO भारती ठाकरे ने बताया कि सामान्य वन मंडल ने 1 लाख 46 हजार 784 साल के पेड़ों को चिह्नित किया है। कीड़ों ने इन पेड़ों को खोखला कर दिया है। इनकी कटाई के लिए भारत सरकार की अनुमति का इंतजार है। अनुमति मिलने के बाद कटाई में करीब 3 महीने लगेंगे। 2 DFO की मौजूदगी में कीड़ों का खात्मा वन विभाग के मुताबिक, अब तक इस अभियान के तहत करीब 20 लाख रुपए का भुगतान बन चुका है, जो ग्रामीणों में वितरित किया जाएगा। पकड़े गए कीटों को जुलाई के अंत में 2 डीएफओ अधिकारियों की मौजूदगी में खत्म किया जाएगा। अभियान भी जुलाई के अंत तक चलेगा। कटाई के बाद मिलेगी हजारों क्यूबिक मीटर लकड़ी अभियान के लिए सामान्य, उत्पादन, मंडला वेस्ट और मंडला ईस्ट के चार डीएफओ अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। पेड़ों की कटाई के बाद करीब 46,390 क्यूबिक मीटर इमारती लकड़ी और 43,390 क्यूबिक मीटर जलाऊ लकड़ी मिलने की उम्मीद है। इनकी ई-नीलामी होगी। लकड़ी को गाड़ा सरई और करंजिया काष्ठ गार में सुरक्षित रखा जाएगा। डिंडौरी के जंगलों में साल बोरर का यह पहला बड़ा हमला नहीं है। इससे पहले 1997-98 में भी इसके प्रकोप के कारण बड़ी संख्या में साल के पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी। क्या होता है साल बोरर? साल बोरर (Sal Borer) ऐसा कीट है, जो केवल साल (सरई) के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसका वैज्ञानिक नाम हॉपलोसेरामबिक्स स्पिनिकोर्निस (Hoplocerambyx spinicornis) है। यह साल के तने में सुरंग बनाकर लार्वा और कीड़े के रूप में रहता है। इसकी लंबाई करीब 2 इंच होती है और जीवन चक्र लगभग एक वर्ष का होता है। साल के जंगलों में इसका प्रकोप इतना गंभीर माना जाता है कि इसे कई बार महामारी की तरह भी देखा जाता है। साल बोरर से बचाव के उपाय वन विभाग के अनुसार, साल बोरर कीट के नियंत्रण के लिए संक्रमित पेड़ों की कटाई, कीड़ों को पकड़कर उनके सिर नष्ट करना और आवश्यकता पड़ने पर कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा:रेवेन्यू 10% बढ़ा, कंपनी ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया; एट्रिशन रेट 13.9% रहा

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो के आईटी सर्विसेज बिजनेस का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कॉन्सोलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके। ये खबर भी पढ़ें… IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च: सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट’ फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…