ब्रेकिंग न्यूज़
खतरे में फुटबॉलर्स का दिमाग; हेडर मारने से सिकुड़ा ब्रेन:स्टडी में खुलासा, आम लोगों की तुलना में डिप्रेशन-एंग्जायटी की आशंका 25% ज्यादा

फुटबॉल खेलना न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतरीन माना जाता है। लेकिन, एक नई स्टडी ने इस खूबसूरत खेल से जुड़े एक डराने वाले सच को उजागर किया है। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि पूर्व पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ियों में अपनी मिड-लाइफ (30 से 60 वर्ष की आयु) में डिप्रेशन, एंग्जायटी (चिंता) और सोचने-समझने की क्षमता में कमी जैसी गंभीर समस्याएं आम लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा पाई जाती हैं। इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन द्वारा की गई इस अहम स्टडी के नतीजे हाल ही में अल्जाइमर एसोसिएशन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए। इस रिसर्च में 30 से 60 साल की उम्र के 124 पूर्व पेशेवर खिलाड़ियों के दिमाग का परीक्षण किया गया। इनमें मशहूर इंग्लिश प्रीमियर लीग, चैम्पियनशिप और विमंस सुपर लीग के पूर्व खिलाड़ी शामिल थे। परीक्षण के नतीजों ने सबको चौंका दिया। 31 प्रतिशत पूर्व फुटबॉलरों में गंभीर डिप्रेशन के लक्षण पाए गए। यह आंकड़ा उन सामान्य वयस्कों की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है, जिन्होंने कभी भी ‘कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स’ नहीं खेला। वहीं, एंग्जायटी के मामले में भी 42 फीसदी पूर्व खिलाड़ियों में इसके गंभीर लक्षण दिखे, जबकि आम लोगों में यह आंकड़ा महज 25 फीसदी था। वैज्ञानिकों ने जब इन खिलाड़ियों के दिमाग की स्कैनिंग की, तो पाया कि उनके मस्तिष्क के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में ‘ग्रे-मैटर’ का वॉल्यूम काफी कम हो गया था। मस्तिष्क का यह हिस्सा हमारी याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने, सटीक निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए बेहद अहम होता है। खुद खिलाड़ियों ने भी स्वीकार किया कि उनकी सोचने-समझने और फैसले लेने की क्षमता गैर-फुटबॉलरों के मुकाबले कमजोर हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेडर के कारण होने वाली सिर की चोटें आगे चलकर ‘क्रॉनिक ट्रॉमैटिक एन्सेफैलोपैथी’ जैसी कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का कारण बन सकती हैं। यह बीमारी याददाश्त जाने व मानसिक संतुलन बिगड़ने को जन्म देती है। ग्लासगो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विली स्टीवर्ट के अनुसार, पूर्व फुटबॉलरों में मस्तिष्क की गंभीर बीमारियों और डिमेंशिया का खतरा आम लोगों की तुलना में साढ़े तीन गुना अधिक होता है। गॉर्डन मैक्वीन और जेफ एस्टल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की मौत को भी सिर की इन्हीं चोटों और दिमागी बीमारी से जोड़कर देखा जा चुका है। कई देशों में बच्चों के हेडर करने पर लग रही पाबंदी इस खतरे को देखते हुए अब इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड में बच्चों के फुटबॉल में हेडर करने को सीमित कर दिया गया है। पेशेवर खिलाड़ियों के लिए भी ट्रेनिंग के दौरान हेडर कम करने के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही, साल 2023 में प्रभावित खिलाड़ियों और उनके परिवारों की मदद के लिए एक ‘ब्रेन हेल्थ फंड’ भी स्थापित किया गया है।

पुलिस पर फायर करने वाले बदमाश बाजार में लंगड़ाते रहे:2 व्यापारियों को गोली मारी थी, सीन रिक्रिएट करवाया; उसी दुकान पर ले गए जहां से रैकी की थी

भरतपुर में बर्तन व्यापारी पर फायरिंग करने वालों की पुलिस ने भरे बाजार परेड निकाली। इसके साथ ही, आरोपियों से सीन रिक्रिएट भी करवाया। दोनों लगभग 50 मीटर तक लंगड़ाते हुए चले। आरोपियों को बाजार से गुजरते हुए राहगीर देखते रहे। यही वो आरोपी हैं जिन्होंने पुलिस की पिस्टल छीनकर थानाधिकारी पर फायर किया था। पुलिस दोनों को व्यापारी की दुकान के पास भी ले गई, जहां उन्होंने रैकी की थी। मामले की जांच कर रहे IO पवन यादव ने बताया- 4 जुलाई को हुए व्यापारी हत्याकांड में बलराम और प्रवीण आरोपी हैं। दोनों को 12 बजे घटनास्थल पर ले जाकर सीन रिक्रिएट कराया गया है। यही दोनों आरोपी पुलिस की पिस्टल छीनकर चिकसाना थाना अधिकारी ब्रजेश मीणा पर फायरिंग करने की घटना में भी शामिल थे। उस मामले की जांच जारी है। अब देखें बदमाशों की तस्वीरें… दो व्यापारियों को मारी थी गोली बुलंदशहर में छिपे थे दो आरोपी 8 जुलाई को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान आरोपी महेश को गिरफ्तार कर लिया था। महेश के पैर में गोली लगी थी। 9 जुलाई को पुलिस को मिली थी कि आरोपी प्रवीण और बलराम उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में छुपे हुए हैं। पुलिस ने बुलंदशहर में दबिश दी और, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। SHO पर भी किया था फायर जब पुलिस की टीमें दोनों आरोपियों को भरतपुर लेकर आ रही थी तो, उस समय आरोपी प्रवीण ने चिकसाना थाना इलाके में टॉयलेट जाने का बहाना बनाया। जैसे ही पुलिस ने गाड़ियों को रोका तो, प्रवीण ने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर चिकसाना थाना अधिकारी ब्रजेश मीणा के ऊपर दो फायर किए। एक गोली थाना अधिकरी के बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी। एक आरोपी को भेजा गया जेल फायरिंग करने के बाद दोनों आरोपियों ने भागने की कोशिश कि जवाबी कार्रवाई में प्रवीण के पैर में गोली लगी। वहीं बलराम के गिरने के कारण पैर में चोट आई। पुलिस ने महेश को जेल भेज दिया है। आज प्रवीण और बलराम को कोर्ट में पेश किया गया है। व्यापारियों पर फायरिंग की ये खबर भी पढ़े बदमाश ने पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनी, SHO को गोली मारी:बुलेटप्रूफ जैकेट से बची जान; व्यापारी की हत्या कर हुए थे फरार भरतपुर पुलिस पर उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में बदमाश ने पिस्टल छीनकर फायरिंग कर दी। एक गोली SHO के मारी, हालांकि बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने के कारण जान बच गई। पूरी खबर पढ़ें…

'किडनी ट्रांसप्लांट कराओ या जहर दे दो':5 प्रसूताओं के परिवारों ने सरकार से लगाई गुहार, 70 दिन से डायलिसिस पर जिंदगी; 48 घंटे का अल्टीमेटम

कोटा मेडिकल कॉलेज में लगभग 70 दिन से भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच महिलाओं के परिवारों ने सरकार से न्याय की गुहार लगाई है। परिवारों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण महिलाओं की दोनों किडनियां खराब हो गईं। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि सरकार सभी मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट कराए, अन्यथा “जहर दे दे”। इस पर प्रसुताओं के भी साइन हैं। अस्पताल की लापरवाही का दर्द हम क्यों झेलें प्रसुताओं का कहना है कि हर दूसरे दिन डायलिसिस से तंग आ चुके हैं, इससे शारीरिक और मानसिक कष्ट हो रहा है। वर्तमान में रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन अस्पताल में भर्ती हैं। सभी पांचों पेशेंटस की किडनी फेल हो चुकी है। जीवन भर अब डायलिसिस पर रहना पडे़गा। ऐसे में उनका तो जीना ही मुश्किल हो गया है। लापरवाही हमारी नहीं थी, लापरवाही अस्पताल के स्तर पर हुई है लेकिन सजा हमारी पेशेंट और पूरे परिवार भुगत रहे हैं। जहर का इंजेक्शन दे दो अस्पताल में भर्ती धन्नी के पति मोहनलाल ने बताया कि चार मई को उनकी पत्नी को अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती किया था। सीजेरियन के बाद किडनी फेल हो गई। आज सत्तर दिन हो गए हैं अस्पताल में भर्ती रहते हुए। हर दो तीन दिन में डायलिसिस हो रही है। मोहन ने बताया- अब तो धन्नी बाई डायलिसिस के नाम से भी डरती है, तकलीफ होती है बार बार डायलिसिस करवाने में, इसलिए खुद उसने ही कह दिया कि मुझे तो जहर का इंजेक्शन दे दो। हम तो सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि सरकारी अस्पताल में ये सब हुआ तो सरकार की हमारे लिए जिम्मेदारी बनती है। 70 दिन से डायलिसिस पर जिंदगी पेशेंट के किडनी ट्रांसप्लांट करवाओ। अस्पताल में भर्ती रागिनी के भाई विकास ने बताया कि सत्तर दिन हमारे पेशेंट को भी हो गए हैं। दोनों किडनी फेल है और डायलिसिस पर ही जीवन भर रहना पडेगा। ये सजा हम क्यों भुगते। सरकार को हमने अल्टीमेटम दे दिया है हमारे पेशेंट भी अब नहीं चाहते कि बार बार डायलिसिस के भरोसे रहे। जीवनभर का बोझ बन गया है डायलिसिस, इसलिए किडनी ट्रांसप्लांट करवाई जाए नहीं तो अब सभी पेशेंट डायलिसिस ही नहीं करवाएगी और अस्पताल में बिना डायलिसिस के ही रहेंगी। पांचों महिलाओं के किडनी ट्रांसप्लांट की मांग, 48 घंटे का अल्टीमेटम प्रसुताओं के परिजनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर साफ कहा कि यदि 48 घंटे में ट्रांसप्लांट पर फैसला नहीं हुआ तो मरीज डायलिसिस करवाना बंद कर देंगे और अस्पताल के अंदर ही दम तोडे़गे। उनका कहना है कि लगातार डायलिसिस से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा हो रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अस्पताल में वर्तमान में रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन भर्ती हैं। ज्ञापन में बताया कि 4 मई से 8 मई के बीच सभी प्रसुताएं भर्ती हुई थी। अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां फेल हो गईं। पिछले 70 दिनों से वे अस्पताल में भर्ती हैं और केवल डायलिसिस के सहारे जीवन जी रही हैं। — कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में अब एक नवजात की मौत:डिलीवरी के बाद एक और महिला की किडनी में इंफेक्शन, डॉक्टरों ने निजी अस्पताल ले जाने को कहा … इस मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद एक और मौत:2 की किडनी फेल, रातभर रोती रही मरीज; प्रिंसिपल के पोस्टर पर काला रंग पोता कोटा में जेके लोन हॉस्पिटल में भी सीजेरियन डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत हो गई थी। जबकि 5 महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी। इससे पहले, कोटा मेडिकल कॉलेज के न्यू हॉस्पिटल में 2 महिलाओं की मौत और 6 की किडनी फेल हो गई थी। (पूरी खबर पढ़ें)

'किडनी ट्रांसप्लांट कराओ या जहर दे दो':5 प्रसूताओं के परिवारों ने सरकार से लगाई गुहार, 70 दिन से डायलिसिस पर जिंदगी; 48 घंटे का अल्टीमेटम

कोटा मेडिकल कॉलेज में लगभग 70 दिन से भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच महिलाओं के परिवारों ने सरकार से न्याय की गुहार लगाई है। परिवारों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण महिलाओं की दोनों किडनियां खराब हो गईं। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि सरकार सभी मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट कराए, अन्यथा “जहर दे दे”। इस पर प्रसुताओं के भी साइन हैं। अस्पताल की लापरवाही का दर्द हम क्यों झेलें प्रसुताओं का कहना है कि हर दूसरे दिन डायलिसिस से तंग आ चुके हैं, इससे शारीरिक और मानसिक कष्ट हो रहा है। वर्तमान में रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन अस्पताल में भर्ती हैं। सभी पांचों पेशेंटस की किडनी फेल हो चुकी है। जीवन भर अब डायलिसिस पर रहना पडे़गा। ऐसे में उनका तो जीना ही मुश्किल हो गया है। लापरवाही हमारी नहीं थी, लापरवाही अस्पताल के स्तर पर हुई है लेकिन सजा हमारी पेशेंट और पूरे परिवार भुगत रहे हैं। जहर का इंजेक्शन दे दो अस्पताल में भर्ती धन्नी के पति मोहनलाल ने बताया कि चार मई को उनकी पत्नी को अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती किया था। सीजेरियन के बाद किडनी फेल हो गई। आज सत्तर दिन हो गए हैं अस्पताल में भर्ती रहते हुए। हर दो तीन दिन में डायलिसिस हो रही है। मोहन ने बताया- अब तो धन्नी बाई डायलिसिस के नाम से भी डरती है, तकलीफ होती है बार बार डायलिसिस करवाने में, इसलिए खुद उसने ही कह दिया कि मुझे तो जहर का इंजेक्शन दे दो। हम तो सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि सरकारी अस्पताल में ये सब हुआ तो सरकार की हमारे लिए जिम्मेदारी बनती है। 70 दिन से डायलिसिस पर जिंदगी पेशेंट के किडनी ट्रांसप्लांट करवाओ। अस्पताल में भर्ती रागिनी के भाई विकास ने बताया कि सत्तर दिन हमारे पेशेंट को भी हो गए हैं। दोनों किडनी फेल है और डायलिसिस पर ही जीवन भर रहना पडेगा। ये सजा हम क्यों भुगते। सरकार को हमने अल्टीमेटम दे दिया है हमारे पेशेंट भी अब नहीं चाहते कि बार बार डायलिसिस के भरोसे रहे। जीवनभर का बोझ बन गया है डायलिसिस, इसलिए किडनी ट्रांसप्लांट करवाई जाए नहीं तो अब सभी पेशेंट डायलिसिस ही नहीं करवाएगी और अस्पताल में बिना डायलिसिस के ही रहेंगी। पांचों महिलाओं के किडनी ट्रांसप्लांट की मांग, 48 घंटे का अल्टीमेटम प्रसुताओं के परिजनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर साफ कहा कि यदि 48 घंटे में ट्रांसप्लांट पर फैसला नहीं हुआ तो मरीज डायलिसिस करवाना बंद कर देंगे और अस्पताल के अंदर ही दम तोडे़गे। उनका कहना है कि लगातार डायलिसिस से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा हो रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अस्पताल में वर्तमान में रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन भर्ती हैं। ज्ञापन में बताया कि 4 मई से 8 मई के बीच सभी प्रसुताएं भर्ती हुई थी। अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां फेल हो गईं। पिछले 70 दिनों से वे अस्पताल में भर्ती हैं और केवल डायलिसिस के सहारे जीवन जी रही हैं। — इस मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में अब एक नवजात की मौत:डिलीवरी के बाद एक और महिला की किडनी में इंफेक्शन, डॉक्टरों ने निजी अस्पताल ले जाने को कहा सीलन-फंगस वाले वार्ड में भर्ती थीं गर्भवती महिलाएं:कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में 2 मौत, कई की हालत गंभीर, दवाओं के सैंपल लिए मरीजों से मिलने पहुंचे विधायक लिफ्ट में फंसे:कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, एक की मौत सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद 48-घंटे में दूसरी मौत:परिजन ने शव लेने से किया था मना, धरने पर बैठे लोग; बोले-दोषियों पर कार्रवाई हो

गाय को राष्ट्रमाता दर्जा देने की मांग:सलूंबर में हुई बैठक, 27 जुलाई को राष्ट्रपति के नाम देंगे ज्ञापन

सलूम्बर में गो सम्मान आह्वान अभियान के तहत एक बैठक हुई। संघ कार्यालय में हुई बैठक में 27 जुलाई को जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने और गोसंरक्षण के संबंध में ज्ञापन सौंपने के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों पर चर्चा की गई। कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा की बैठक में अभियान की रूपरेखा, जनसंपर्क कार्यक्रम, संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्धारण और विभिन्न तहसीलों व नगरों में कार्यकर्ताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। इसका उद्देश्य अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। अभियान से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि 27 जुलाई का कार्यक्रम केवल ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं रहेगा। इसे गोसंरक्षण और भारतीय संस्कृति के प्रति जनजागरण के एक बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है। इस अवसर पर अभियान के पोस्टर का विमोचन भी किया गया। कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे पोस्टर के माध्यम से गांव-गांव और शहर-शहर अभियान का संदेश पहुंचाएंगे और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ेंगे। अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया बैठक में तहसील, खंड, नगर और जिला स्तर के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभी ने अपने विचार साझा किए और अभियान को जन-जन तक पहुंचाने, गोभक्तों तथा सनातन समाज के लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। इसका लक्ष्य 27 जुलाई के ज्ञापन कार्यक्रम को सफल बनाना है। वक्ताओं ने बताया कि प्रत्येक कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में घर-घर संपर्क करेगा। इसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को अभियान से जोड़ना है, ताकि गोसंरक्षण और गोसम्मान की मांग को व्यापक जनसमर्थन मिल सके। बैठक का समापन “गोमाता का सम्मान – राष्ट्र का सम्मान” के उद्घोष के साथ हुआ। उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने अभियान को सफल बनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

सीनियर टीचर भर्ती एग्जाम दूसरे दिन भी जारी:पहली पारी में 66.85 प्रतिशत रही उपस्थिति; 18 जुलाई तक होंगे

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से आयोजित सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा दूसरे दिन भी 27 जिलों में हो रही है। इसके लिए प्रदेश में 1221 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षाएं 18 जुलाई तक चलेगी। पहली पारी में 3 लाख 35 हजार 268 में से 2 लाख 24 हजार 119 कैंडिडेट्स शामिल हुए, उपस्थिति प्रतिशत 66.85 प्रतिशत रहा। दूसरी पारी की परीक्षा तीन बजे से शुरू होगी। इस साल की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक इस एग्जाम के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही एंट्री दी गई। अजमेर में 15 हजार 920 कैंडिडेट्स रजिस्टर्ड है। पहले 6,500, फिर 10,537 और अब 9,651 पदों पर भर्ती RPSC की अपील- दलालों और ठगों से रहें सावधान 1. किसी के बहकावे में न आएं RPSC ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा पास कराने का दावा करने वाले किसी भी दलाल, बिचौलिए (मीडिएटर) या ठग के झांसे में न आएं। 2. पैसे मांगने पर तुरंत यहां शिकायत करें अगर कोई भी व्यक्ति आपसे परीक्षा पास कराने के नाम पर पैसे (रिश्वत) मांगता है या कोई लालच देता है, तो सबूत के साथ तुरंत पुलिस, जांच एजेंसी या आयोग के कंट्रोल रूम नंबरों पर शिकायत करें, कंट्रोल रूम नंबर: 0145-2635200, 2635212 और 2635255 3. नकल या गड़बड़ी की तो भुगतनी होगी कड़ी सजा अगर कोई भी अभ्यर्थी परीक्षा में नकल करते हुए या किसी भी तरह की गड़बड़ी में शामिल पाया गया तो नए कानून (राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2022) के तहत बहुत सख्त कार्रवाई होगी। आरोपी को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा हो सकती है। 10 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। आरोपी की घर-जमीन (चल-अचल संपत्ति) जब्त की जा सकती है। जानिए- किस जिले में कितने सेंटर बनाए अलग-अलग सब्जेक्ट की परीक्षाओं को चार ग्रुप में बांटा 12 जुलाई को ये एग्जाम हुआ 13 जुलाई को ये एग्जाम हो रहा आने वाले दिनों में ये होंगे पढें ये खबर भी…. प्रश्नपत्र की गाड़ी के पीछे-पीछे एग्जाम सेंटर में घुसे अभ्यर्थी:हाथों में बंधे धागे काटे, दुपट्टे उतरवाए; 27 जिलों में हुई सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा

कूलर में स्प्रे कर परिवार को किया बेहोश:कायमनगर में 2 घरों से लाखों के गहने और नकदी की पार

चूरू के सदर थाना क्षेत्र के कायमनगर में रविवार रात चोरों के एक संगठित गिरोह ने 2 मकानों में चोरी की वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने परिवार के सदस्यों को बेहोश कर लाखों रुपए के नगदी और जेवरात चुरा लिए। चोर पहले मकानों की चारदीवारी फांदकर अंदर दाखिल हुए। इसके बाद उन्होंने लोहे की जाली का गेट तोड़कर घर में प्रवेश किया। आरोप है कि घर के भीतर सो रहे परिवार के लोगों को गहरी नींद में रखने के लिए कूलर में बेहोश करने वाला स्प्रे किया गया था। महिलाओं के पहने हुए गहने भी उतार ले गए
परिवार के सदस्य बेखबर होकर सोते रहे और चोरों ने आराम से पूरे घर की तलाशी ली। बदमाशों ने सबसे पहले महिलाओं के कानों में पहनी बालियां और गले में पहने सोने के आभूषण उतारे। इसके बाद जिन कमरों में परिवार के अन्य सदस्य सो रहे थे, उनके दरवाजों को बाहर से कुंदा लगाकर बंद कर दिया, ताकि कोई जागने पर बाहर नहीं निकल सके। तीसरे मकान में भी की चोरी की कोशिश
चोरों ने अलमारियों के ताले और गेट तोड़कर नकदी व जेवरात समेट लिए। जानकारी के अनुसार, नूरजहां के मकान से करीब 40 हजार रुपए नकद और सोने-चांदी के गहने चोरी हुए। वहीं, मोहम्मद आतिफ के घर से करीब 50 हजार रुपए नकद और जेवर चुरा लिए गए। गिरोह ने एक अन्य मकान में भी घुसने का प्रयास किया, लेकिन वहां चोरी की वारदात नहीं हो सकी। सुबह सामान बिखरा और अलमारियों ताले टूटे मिले
सुबह जब परिवार के लोगों की आंख खुली तो कमरों के दरवाजे बाहर से बंद मिले। किसी तरह बाहर निकलने पर घरों का सामान बिखरा पड़ा था और अलमारियां टूटी हुई मिलीं।
सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ ही बदमाशों की तलाश में जुट गई है।

गो हत्या बैन के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक:कहा- इसमें सुधार की जरूरत, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था- ये इस्लाम में जरूरी प्रथा नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु सरकार को बकरीद या किसी भी दिन राज्य में गाय-बछड़ों के वध पर रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस आदेश में सुधार की जरूरत है। राज्य सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के 27 मई के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि जब कानून तय श्रेणी की गायों के वध की अनुमति देता है, और उसके लिए निर्धारित स्थान भी तय हैं, तब अदालत का ऐसा निर्देश कानून के प्रावधानों के विपरीत है। इसे कायम नहीं रखा जा सकता। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने आज इस मामले में नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। मद्रास हाईकोर्ट ने कुर्बानी रोकने को कहा था मद्रास हाईकोर्ट ने 27 मई को ( बकरीद से एक दिन पहले) तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य में बकरीद या किसी अन्य दिन गाय और बछड़ों की कुर्बानी न हो। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की बेंच ने कहा- संविधान सभा की बहस में कहा गया था कि गाय भारत में पूजनीय मानी जाती है। भगवान कृष्ण के समय से हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है। कई मुस्लिम शासकों ने भी गोहत्या पर रोक लगाई थी। महात्मा गांधी भी गो संरक्षण को बहुत महत्वपूर्ण मानते थे। हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 48 का हवाला दिया था हाईकोर्ट ने कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य सरकार को गाय, बछड़ों और दुधारू-पशुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का निर्देश देता है। कोर्ट ने तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 1958 की धारा-4 का उल्लेख किया। इसमें कहा गया है कि 10 साल से ज्यादा उम्र और प्रजनन के अयोग्य पशु को ही प्रमाणपत्र मिलने के बाद काटा जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस प्रावधान की सख्ती से व्याख्या होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी पशु की कुर्बानी दी जाती है तो वह केवल निर्धारित जगहों पर ही होनी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर ऐसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि संविधान सभा की बहस के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया था कि गाय भारतीय सभ्यता में पूजनीय रही है और भगवान कृष्ण के समय से उसका विशेष महत्व रहा है। यह जानकारी अदालत में दाखिल याचिका और न्यायिक आदेश के आधार पर सामने आई है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था-बकरीद पर गाय की कुर्बानी जरूरी नहीं 20 मई को कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की पशु वध संबंधी गाइडलाइन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि बिना जरूरी फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय, भैंस, बैल या बछड़े का वध नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी की बेंच ने कहा, खुले सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पशु का वध पूरी तरह बैन है। ईद-उल-जुहा में गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। पूर्व तृणमूल नेता व विधायक हुमायूं कबीर ने गाइडलाइन का विरोध करते हुए ईद पर हर हाल में कुर्बानी की धमकी दी है। इस पर भाजपा ने कहा कि किसी भी हाल में अवैध स्लॉटरहाउस नहीं चलने दिए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें… ——————- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- नागरिकता का फैसला निष्पक्ष प्रक्रिया से हो:असम में विदेशी घोषित 27 लोगों को राहत; हाईकोर्ट का फैसला रद्द, दोबारा सुनवाई होगी नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने से जुड़े मामलों में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने का फैसला निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…

मांगें अनसुनी तो टंकी पर चढ़े 3 ग्रामीण:PM आवास में अनियमितता का आरोप, 2022 से अटके वाटर वर्क्स का विरोध

हनुमानगढ़ के टिब्बी उपखंड स्थित डबली कलां गांव में सोमवार को प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितताओं और साल 2022 से स्वीकृत डीबीएल वाटर वर्क्स का निर्माण शुरू नहीं होने के विरोध में तीन ग्रामीण पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए। घटना से गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत और ज्ञापन देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। टंकी पर चढ़कर किया विरोध प्रदर्शन प्रदर्शन करने वालों में राजू बारूपाल, नानकराम और पालाराम शामिल हैं। तीनों ग्रामीण पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके के लिए रवाना हो गए। PM आवास योजना में पात्रों की अनदेखी का आरोप प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में वास्तविक पात्र परिवारों को नजरअंदाज कर अपात्र लोगों को लाभार्थी सूची में शामिल किया गया है। उनका कहना है कि कई जरूरतमंद परिवार आज भी पक्के मकान से वंचित हैं, जबकि नियमों के विपरीत अन्य लोगों को योजना का लाभ दिया गया। 2022 से स्वीकृत वाटर वर्क्स शुरू कराने की मांग ग्रामीणों ने वर्ष 2022 में स्वीकृत 13 डीबीएल वाटर वर्क्स निर्माण कार्य को जल्द शुरू कराने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि स्वीकृति मिलने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से दोनों मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष गुहार लगा रहे हैं। करीब एक सप्ताह पहले विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी भी दी गई थी कि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। मांगों पर सुनवाई नहीं होने के बाद सोमवार को तीनों ग्रामीण टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन करने लगे। अब प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है।

अलवर में भी थमे हजारों ट्रकों के पहिए:VLTD और परमिट को लेकर प्रदर्शन; बाजार की दुकानें भी कराईं बंद

अलवर जिले में सोमवार को हजारों ट्रकों का चक्का जाम रहा। राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर ‘अलवर जिला ट्रांसपोर्ट ओनर्स एसोसिएशन’ ने भी इस हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया। व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) और नेशनल परमिट संबंधी समस्याओं के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। अ ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रांसपोर्टरों ने राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रैली निकाली और बाजार की दुकानों को भी बंद कराया। हड़ताल के मद्देनजर रविवार रात से ही ट्रकों को खड़ा कर दिया गया था। प्रदर्शन से जुड़ी PHOTOS… 14 जून से बंद हैं नेशनल परमिट यूनियन के अध्यक्ष सुरेश मेहता ने बताया -केंद्र सरकार ने करीब तीन वर्ष पहले कमर्शियल वाहनों में वीएलटीडी और पैनिक बटन अनिवार्य किए थे। इसके लिए अधिकृत वेंडर द्वारा फिटमेंट प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, जिसके बिना नेशनल परमिट नहीं बनता। उनका आरोप है कि राजस्थान में अब तक वेंडर्स को यह प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। इसके चलते 14 जून से नेशनल परमिट जारी होने पूरी तरह बंद हो गए हैं। अब बिना परमिट मजबूरी में चलने वाले वाहनों से टोल प्लाजा पर 10 हजार रुपए तक का भारी-भरकम जुर्माना वसूला जा रहा है, जिससे ट्रांसपोर्टर बर्बाद हो रहे हैं। आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से छूट यूनियन अध्यक्ष सुरेश मेहता ने कहा कि सरकार से कई बार मांग रखने के बावजूद इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया है। इसी वजह से वे परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा सहित सरकार का विरोध कर रहे हैं। वहीं, गगन अनेजा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। राहत की बात यह है कि हड़ताल के दौरान आमजन की सुविधा का ध्यान रखा गया है। सुरेश मेहता ने बताया कि दूध, सब्जी, दवाइयों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को इस चक्का जाम से पूरी तरह छूट दी गई है। इस प्रदर्शन में इमरत दीन, परमजीत सिंह गोगिया, पंकज अनेजा, संदीप मित्तल, गगनदीप अनेजा, समसू खान, प्रेम गांधी, सतीश शर्मा, संदीप गुप्ता और अशोक अरोड़ा सहित बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर और चालक शामिल हुए।