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जज ने कहा- 'ना मंदिर, ना मस्जिद…राष्ट्र प्रधान रहे':हाईकोर्ट में फैसला सुनाते हुए बोले- राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि; बॉर्डर पर हर प्रॉपर्टी की होगी जांच

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है और आस्था के नाम पर बॉर्डर पर कानून और नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बने धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए जारी नोटिसों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सोमवार को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि सीमावर्ती इलाकों में बिना सक्षम अनुमति के बनाए गए धार्मिक ढांचे कानून के दायरे में अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं। हाईकोर्ट ने हर प्रॉपर्टी की जांच के निर्देश देते हुए इसके लिए कमेटी गठित करने के भी आदेश दिए। कमेटी में कलेक्टर, एसपी समेत सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। यह कमेटी हर मामले की अलग से जांच करेगी और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी होने पर निर्माणों को हटाने या ढहाने का फैसला ले सकेगी। जस्टिस समीर जैन ने फैसला सुनाते समय कविता भी पढ़ीं। उन्होंने कहा- ना मंदिर, ना मस्जिद, ना कोई दीवार बड़ी होती है, जब मातृभूमि की रक्षा की बारी खड़ी होती है। जो भूमि है राष्ट्र की, वह पहले राष्ट्र की ही रहेगी, जहां सुरक्षा का प्रश्न उठे, वहां राष्ट्र प्रधान रहे। सीमा क्षेत्र में बने ढांचों की होगी जांच
हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से 0 से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले ऐसे निर्माणों की जांच के लिए विशेष कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में संबंधित जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारी शामिल होंगे। कमेटी प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच करेगी और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं, सरकारी जमीन पर कब्जे तथा अन्य तथ्यों के आधार पर निर्णय लेगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित निर्माणों को हटाने या ध्वस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकेगी। सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं
जस्टिस समीर जैन की अदालत ने जैसलमेर के रामगढ़ स्थित पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह समिति समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में विशेष सतर्कता जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई को किसी धर्म या समुदाय से जोड़कर देखना उचित नहीं है। कानून सभी नागरिकों और संस्थाओं पर समान रूप से लागू होता है। हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसके तहत सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए BSF के अधिकार क्षेत्र को सीमा से 50 किलोमीटर तक बढ़ाया गया है। सर्वे के बाद जारी हुए थे नोटिस
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों का सर्वे किया था। इसमें सामने आया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में कुछ धार्मिक स्थलों और अन्य निर्माणों का निर्माण बिना जिला प्रशासन की अनुमति के किया गया है। इनमें से कई निर्माण गोचर, ओरण और सरकारी जमीनों पर पाए गए। प्रशासन ने इन्हें हटाने के लिए नोटिस जारी किए थे, जिन्हें संबंधित समितियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। क्या है पूरा मामला? केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती इलाकों का सर्वे किया था। इसमें सामने आया कि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 0 से 50 किलोमीटर के संवेदनशील सुरक्षा दायरे में पिछले कुछ वर्षों में जिला कलेक्टर की बिना अनुमति के कई मदरसे, मस्जिदें, दरगाह और अन्य निर्माण खड़े कर लिए गए। गोचर (चरागाह), ओरण और सरकारी जमीनों पर हुए इस अवैध कब्जे को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना गया। इसके बाद प्रशासन ने इन अवैध ढांचों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए, जिसे स्थानीय समितियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए इन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह था ‘ऑपरेशन क्लीन’ सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह साफ करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और राजस्थान स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन क्लीन’ (या ऑपरेशन क्लीन स्वीप) नाम दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास 50 किलोमीटर के दायरे (BSF के बढ़े हुए अधिकार क्षेत्र) में मौजूद सभी अवैध, संदिग्ध और बिना अनुमति वाले ढांचों को हटाकर देश की सीमा को सुरक्षित करना है। कहां-कहां और क्या-क्या हुई कार्रवाई? जून 2026 में प्रशासन ने भारी पुलिस बल और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर बड़ी कार्रवाई की। बाड़मेर जिला: बाड़मेर के सीमावर्ती इलाकों जैसे गडरारोड, मुनाबाओ, रामसर, बीजराड़, सेड़वा और बाखासर में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाए गए थे। यहां सेड़वा और गडरा रोड में 6 से अधिक अवैध धार्मिक ढांचों और मदरसों को ध्वस्त किया गया था। बाखासर के देम्बा में अवैध दुकानें और मलाणा गांव में भारत-पाक सीमा के पास बनी एक अवैध मस्जिद को ढहाया गया था। सेड़वा के भालगांव में दोनों समुदायों से जुड़े अवैध ढांचों पर बुलडोजर चला था। जैसलमेर जिला: जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में भी सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों को हटाया था। नोख थाना क्षेत्र के मालासर गांव के पास बने अवैध मदरसे ‘रहमानिया’ और एक मस्जिद को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था। प्रशासन ने दोनों जिलों में 300 से अधिक अवैध कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए थे।

नरेश मीणा को फिर जेल जाना होगा:हाईकोर्ट की शर्तों के उल्लंघन पर SC-ST कोर्ट ने रद्द की जमानत; SDM को मारा था थप्पड़

SDM को थप्पड़ मारने वाले नरेश मीणा को फिर जेल जाना होगा। टोंक के SC-ST कोर्ट ने SDM थप्पड़कांड केस में नरेश मीणा को हाईकोर्ट से मिली जमानत को सोमवार को रद्द कर दिया। जज आरती माहेश्वरी ने माना कि हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी थी, लेकिन उन्होंने जेल से बाहर आने के बाद उन शर्तों का पालन नहीं किया। अब नरेश मीणा की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी होगा। दरअसल, झालावाड़ स्कूल हादसे में 7 बच्चों की मौत के बाद नरेश मीणा धरने पर बैठे थे। इस पर पुलिस ने उनको गिरफ्तार किया था। नगरफोर्ट थाना पुलिस ने इसी को आधार बनाकर नरेश मीणा की जमानत रद्द करने के लिए कोर्ट में एप्लिकेशन लगाई थी। नरेश मीणा बोले- बीजेपी जॉइन कर लेता तो सब सही हो जाता
हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द होने पर नरेश मीणा ने कहा- मैं कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। फैसले की कॉपी आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। लेकिन यह तो सच है कि मैं बीजेपी जॉइन कर लेता तो सब सही हो जाता। उन्होंने कहा- बड़े-बड़े गुनाह करके बीजेपी में जाने वाले सभी नेता पाक साफ हो जाते हैं। मैं जनता के हक के लिए कानून के दायरे में संघर्ष कर रहा हूं, यह बीजेपी को सहन नहीं हो रहा है। कोर्ट को गुमराह कर रही है पुलिस
नरेश मीणा ने कहा- नगर फोर्ट थाना पुलिस ने झालावाड़ स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले 7 बच्चों के परिजनों से मिलने जाने के दौरान हुई मेरी गिरफ्तारी को हाईकोर्ट की जमानत का उल्लंघन मानकर टोंक SC-ST कोर्ट प्रार्थना पत्र पेश किया। उन्होंने कहा- अगर पुलिस पीड़ित परिवार से मिलने जाने पर ही हाईकोर्ट की जमानत का उल्लंघन मानकर कोर्ट को गुमराह करेगी तो फिर संविधान की परिभाषा ही बदल जाएगी। मुझे लगता है कि सिस्टम पर सत्ता का दबाव था। बीजेपी अहंकारी, गरीब, असहाय, मजदूर, किसान, युवा वर्ग के खिलाफ है। SDM को खरोंच तक नहीं आई, जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया
नरेश मीणा ने कहा- सरकार और पुलिस की तानाशाही इस बात को दर्शाती है कि देवली-उनियारा सीट पर उपचुनाव के दौरान समरावता गांव में मतदान के बहिष्कार होने के बाद भी SDM अमित चौधरी ने जबरन वोट दिलाया। मैंने गुस्से में आकर महज एक थप्पड़ मारा था और उसके एक खरोंच तक नहीं आई, लेकिन मेरे ऊपर जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया था। सरकार ने सिस्टम पर दबाव बनाकर 9 महीने तक जमानत नहीं होने दी। अब सिलसिलेवार समझिए क्या था पूरा मामला… पढ़ें थप्पड़कांड से जुड़ी ये खबर भी… थप्पड़कांड पर नरेश मीणा बोले-आवेश में आकर घटना हुई,अफसोस है:25 साल से राजनीति में हूं, बड़ा पद नहीं मिलने से निराश था DM को थप्पड़ मारने वाले नरेश मीणा ने कहा- वह घटना (थप्पड़कांड और समरावत हिंसा) जो हुई थी, वह तात्कालिक थी। पूरी खबर पढ़ें…

पाली कलेक्ट्रेट के बाहर 'पिंक' धरना जारी:आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका बोलीं-स्थायी करो, मानदेय बढ़ाओ

पाली कलेक्ट्रेट के बाहर सोमवार को पिंक साड़ी पहने सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं धरने पर डटी रहीं। जिलेभर से यहां बड़ी तादाद में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं पहुंचीं और धरने में शामिल हुई। इस दौरान स्थायी करने, मानदेय बढ़ाने और ग्रेच्युटी देने की मांगें दोहराई गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा- जब तक मांगों का समाधान नहीं होगा तब तक धरना जारी रहेगा। ये हैं प्रमुख मांगें इसके अलावा महिला पर्यवेक्षकों के आरक्षित पदों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से भरने, 1 हजार नए पद सृजित करने और 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश 30 जून तक करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

बूंदी में स्मार्ट मीटर के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन:कलेक्ट्रेट घेरने निकले कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछार, चांदना बोले- लोगों को ठगना चाहता है बिजली विभाग

बूंदी में स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में सोमवार को किसानों और कांग्रेस समर्थकों ने ‘हुंकार जन आंदोलन’ किया। इस दौरान प्रशासन ने पानी की बौछार कर लोगों को रोकने का प्रयास किया। इससे पहले आजाद पार्क में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और जिला कलेक्टर ऑफिस के घेराव के लिए लिए कूच कर दिया। रैली में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सदस्य और महिला कांग्रेस कमेटी की कार्यकर्ता शामिल थे। प्रदर्शनकारियों को अहिंसा सर्किल पर रोका प्रदर्शनकारियों को पुलिस प्रशासन ने अहिंसा सर्किल पर रोक दिया। इस दौरान अशोक चांदना ने बिजली विभाग के अधिकारियों से स्मार्ट मीटर को लेकर वार्ता की। वार्ता सफल नहीं होने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और प्रदर्शन तेज कर दिया। जब कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने का प्रयास किया, तो पुलिस प्रशासन ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। चांदना बोले- किसानों की मांगों को अनसुना नहीं कर सकते पूर्व मंत्री और हिंडोली विधायक अशोक चांदना ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को अनसुना नहीं किया जा सकता। स्मार्ट मीटर से किसानों को आर्थिक और तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के साथ लगातार भाजपा सरकार धोखा कर रही है। स्मार्ट मीटर की योजना लाकर किसानों के बिल के बोझ को बढ़ा दिया गया है। जिससे किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। केंद्र सरकार ने युवाओं का भविष्य बिगड़ने की कोशिश किया-आज कई युवा साइबर फ्रॉड के चंगुल में बसता जा रहा है, लेकिन उसे बचाने का कोई भी प्लान सरकार के पास नहीं है। चांदना ने घोषणा की कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे और स्मार्ट मीटर के खिलाफ राजस्थान में एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे। कांग्रेस पार्टी हमेशा किसानों के साथ खड़ी है। किसान और नेता प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को रोका जाए और किसानों की चिंताओं पर खुलकर चर्चा कर समाधान निकाला जाए, ताकि उन्हें आर्थिक बोझ न झेलना पड़े। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की बिजली नीतियों और भाजपा पर भी सवाल उठाए। रैली शांतिपूर्ण रही, हालांकि पुलिस ने हालात पर नजर बनाए रखी और मौके से कुछ लोगों को हिरासत में लिया।

कोटपूतली में दिशा बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा:सांसद बोले-हर व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, विकास योजनाओं पर चर्चा

कोटपूतली में जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सोमवार शाम को जिला कलेक्टर सभागार में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुंडावर विधायक ललित यादव, जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सांसद बोले-विकास कार्यों की निगरानी होगी सुनिश्चित सांसद राव राजेन्द्र सिंह ने बताया-दिशा बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना और विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे योजनाओं की वास्तविक और अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही सभी विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करें। पेयजल और बिजली व्यवस्था को लेकर दिए निर्देश बैठक में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए सांसद ने जलदाय विभाग को आमजन को किसी भी प्रकार की पेयजल समस्या का सामना न करने देने के निर्देश दिए। विद्युत विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। सार्वजनिक निर्माण विभाग की समीक्षा करते हुए सांसद ने क्षेत्र में स्वीकृत एवं प्रगतिरत सड़क निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, प्रगति और कार्यदायी एजेंसियों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने एनएचएआई को निर्देश दिए कि एनएच-48 पर आमजन की सुविधा के अनुसार ओवरब्रिज, फ्लाइओवर, अंडरपास, फुटब्रिज और कट्स का निर्माण किया जाए। विकास योजनाओं की प्रगति पर हुई चर्चा इसके अतिरिक्त, बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बैंकिंग, स्वच्छता, आवास, उद्योग, पशुपालन, राजीविका तथा महिला एवं बाल विकास विभागों की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। शिक्षा विभाग को विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं सुदृढ़ करने, कृषि विभाग को मृदा परीक्षण एवं फसल बीमा योजनाओं के प्रति किसानों को जागरूक करने तथा एलडीएम को बैंकिंग एवं जनधन योजनाओं का लाभ अधिकाधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। पीएम आवास योजना (ग्रामीण), स्वामित्व योजना, विश्वकर्मा योजना, स्वनिधि योजना, वीबी-ग्राम, श्रम कार्ड, एनएफएसए, उद्योग एवं राजीविका सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। विधायक समेत कई अधिकारी रहे मौजूद मुंडावर विधायक ललित यादव ने बैठक में अपने क्षेत्र की समस्याओं और विकास संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए। इस अवसर पर एसडीएम कोटपूतली योगेश देवल, अलवर सरस डेयरी के चेयरमैन नितिन सांगवान, एसीईओ जयपुर ब्रजमोहन गुप्ता एवं साधना शर्मा सहित कई अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रतापगढ़ में मिड डे मील रसोइयों का प्रदर्शन:9 मांग रखीं, कहा- 2400 की जगह 9000 किया जाए मानदेय

प्रतापगढ़ में मिड डे मील रसोइया संघ ने अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन किया। रसोइयों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के सहायक को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मानदेय वृद्धि और नियमितीकरण की प्रमुख मांगें शामिल थीं। कहा-हर महीने मिल रहा 2400 का मानदेय संघ के जिला अध्यक्ष कालूराम मईडा ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में मिड डे मील योजना के तहत रसोइये पिछले 22 वर्षों से बच्चों के लिए भोजन बना रहे हैं। इसके बदले में उन्हें प्रति माह मात्र 2400 रुपए का मानदेय मिलता है, जो वर्तमान दौर में बहुत कम है। प्रतिमाह 9000 रुपए देने की मांग रसोइयों की प्रमुख मांगों में प्रति माह 9000 रुपए मानदेय प्रदान करना, राशन सामग्री खरीदने का अधिकार देना और मानदेय का भुगतान व्यक्तिगत बैंक खातों में करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रत्येक 25 विद्यार्थियों पर एक रसोइये की नियुक्ति की भी मांग की है। आज बड़ी संख्या में रसोइये संघ के बैनर तले मिनी सचिवालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे।

प्राइवेट स्कूल संचालक बोले-सरकार दखल कम करे:RTE का बकाया भुगतान मांगा; कलेक्टर को दिया CM के नाम ज्ञापन

जालोर के प्राइवेट स्कूल संचालकों ने कहा है कि सरकार राज संबल और शिक्षा संबल कार्यक्रमों के जरिए प्रशासनिक हस्तक्षेप बढ़ा रही है। जिला निजी विद्यालय संघ के सदस्य संचालक सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और सीएम के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देकर मांगें रखीं। संघ के किशोर सिंह ने बताया- प्राइवेट स्कूलों पर राज संबल और शिक्षा संबल कार्यक्रम का बोझ डाला जा रहा है। इनके जरिए प्रशासन का हस्तक्षेप बढ़ गया है। बार-बार चेकिंग भी की जाती है। प्राइवेट स्कूल राज्य की शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हमें प्रशासनिक और प्रबंधकीय स्वायत्तता हासिल है। शिक्षा संबल कार्यक्रम के जरिए बार-बार चेकिंग, रिपोर्टिंग और दूसरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का गैरजरूरी दबाव बनाया जा रहा है। इससे स्कूलों में पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। RTE का बकाया भुगतान मांगा संघ ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत स्कूलों को सरकार की ओर से मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का समय पर भुगतान तय करने की मांग की है। साथ ही निजी स्कूलों की प्रशासनिक स्वायत्तता बनाए रखने और अनावश्यक निरीक्षण और हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थाएं अधिनियम, 1993 की भावना के अनुरूप कार्यवाही करने की अपील की है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्दी ही सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो प्रदेशभर के निजी स्कूल चरण बद्ध आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

अलवर के शकील ने चीन में लहराया तिरंगा:ब्रॉन्ज मेडल जीतकर लौटे भारत, कोच को दिया सफलता का श्रेय, बोले- गुरु की सीख बनी जीत की ताकत

चीन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर लौटे अलवर के खिलाड़ी शकील का जोरदार स्वागत किया गया। शकील ने अपनी सफलता का श्रेय कोच सबल प्रताप को देते हुए कहा कि उनके सिखाए हुए गुर ही प्रतियोगिता में काम आए। उन्होंने विश्वास जताया कि आगे भी कड़ी मेहनत कर देश और प्रदेश के लिए इससे बड़े पदक जीतने का प्रयास करेंगे। दरअसल, चीन के ओरदोस शहर में आयोजित अंडर-23 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शकील ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है। ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक) जीतने वाले अलवर के खिलाड़ी का इंदिरा गांधी स्टेडियम में अभिनंदन किया गया। शकील ने 800 मीटर दौड़ को 1 मिनट 48.78 सेकेंड में पूरा कर सफलता हासिल की। शकील ने अपने कोच को दिया सफलता का श्रेय अलवर पहुंचने पर शकील ने कहा कि उसने 2017 में खेल शुरू किया था। सबसे पहले कोच सबल प्रताप सिंह के मागर्दशन में दौड़ना सीखा। उनके सिखाए गुर की बदौलत चीन तक सफर सम्मान से पूरा किया। आगे भी देश के लिए बड़े मेडल लाने का भरसक प्रयास रहेगा। एथलेटिक्स में मेहनत और लगन से आगे बढ़े खिलाड़ी अपने शिष्य का अभिनंदन करते हुए कोच सबल प्रताप ने कहा कि शकील गरीब परिवार से निकला है। एथलेटिक्स में मेहनत और लगन से आने वाले खिलाड़ी सफल हुए हैं। अलवर के खिलाड़ियों जैसा अनुशासन कहीं नहीं है। उससे दूसरे खिलाड़यों का भी मनोबल बढ़ता है। यह बड़ी उपलब्धि है। दूसरे खिलाड़ी भी आगे रहेंगे। यह शकील का लगातार दूसरा एशियाई पदक है, जिससे उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी पुरानी कामयाबी कोई इत्तेफाक नहीं थी। इससे पहले भी वे चीन में ही आयोजित अंडर-18 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को खिलाई मिठाई जिला एथलेटिक्स संघ (अलवर) के सचिव धारा यादव ने बताया कि शकील की ऐतिहासिक उपलब्धि से जिले के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खुशी है। खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने मैदान पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया गया। अलवर पहुंचने पर निकलेगा विजय जुलूस सचिव धारा यादव ने बताया- मेडलवीर शकील के अलवर लौटने पर जिला एथलेटिक्स संघ और खेल प्रेमियों द्वारा उनका ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा। शकील के अभिनंदन में डीजे, फूल-मालाओं के साथ शहर में स्वागत जुलूस निकाला गया।

घुमंतू परिवारों को ग्रामीण सेवा शिविर में मिले पट्टे:योजनाओं का लाभ दिया, लोगों की समस्याओं का मौके पर किया समाधान

ग्राम पंचायत पचपदरा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। इस दौरान वर्षों से आवासीय पट्टों का इंतजार कर रहे घुमंतू परिवारों को पट्टे सौंपे गए। शिविर में राजस्व, पंचायत, सामाजिक सुरक्षा और अन्य विभागों से संबंधित मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। दो शिविरों में पंचायत समिति में सबसे ज्यादा पट्टे दिए ग्राम पंचायत पचपदरा ने पिछले छह माह में आयोजित दो ग्रामीण सेवा शिविरों में पंचायत समिति क्षेत्र में सर्वाधिक पट्टे जारी करने का रिकॉर्ड बनाया है। पंचायत प्रशासन पात्र और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राजस्व विभाग ने शिविर में 22 खातेदारों के विभाजन मामलों का एक ही हस्ताक्षर में निस्तारण किया। वर्षों से लंबित इन मामलों के समाधान से संबंधित परिवारों को सुविधा मिली। शिविर प्रभारी एवं उपखंड अधिकारी राजेश विश्नोई, एसीओ हीरालाल कलबी और तहसीलदार कुलदीप कछवाह ने शिविर में प्राप्त आवेदनों की सुनवाई की। शिविर में विधायक अरुण चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रकार के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। ये रहे मौजूद इस अवसर पर ग्राम पंचायत प्रशासक पूजा राठौड़, डालाराम प्रजापत, जिला अध्यक्ष भरत मोदी, मंडल अध्यक्ष राकेश चोपड़ा, अमित सिंह राठौड़, अतिरिक्त विकास अधिकारी कान सिंह, सहायक विकास अधिकारी रावताराम,सहायक अभियंता भगवानाराम पटेल, ग्राम विकास अधिकारी किशोर शर्मा, पटवारी श्याम पुनिया, नवरतन सोनी,कनिष्ट सहायक गुडी जाखड़, पवन पंवार तथा विनीत सिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने POCSO के दुरुपयोग पर चिंता जताई:कहा- लड़का-लड़की को भागने से सरकार कैसे रोकेगी, यह नई चीजें आजमाने की उम्र

सुप्रीम कोर्ट ने किशोर-किशोरियों के बीच सहमति से बने संबंधों में पॉक्सो (POCSO) कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। अदालत ने सोमवार को कहा कि जब किसी लड़के और लड़की के बीच संबंध हो और वे साथ चले जाएं, तो हर मामले को स्वतः पॉक्सो का केस नहीं माना जा सकता। जस्टिस बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा- सरकार किसी लड़के और लड़की को साथ भागने से कैसे रोक सकती है? 15 से 18 साल की उम्र बेहद संवेदनशील और नई चीजें आजमाने की उम्र होती है। यह प्रयोग और भावनात्मक समझ विकसित होने का भी दौर होता है। पीठ ने कहा कि कई मामलों में जब किशोरियां अपनी मर्जी से अपने साथी के साथ चली जाती हैं, तो परिवार अपनी इज्जत बचाने के लिए लड़के के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करा देता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आखिरकार आरोपियों को बरी करना पड़ता है। कई किशोर जेल पहुंच जाते हैं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट यह टिप्पणी किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई के दौरान कर रहा था। यह मामला 2023 में कलकत्ता हाईकोर्ट की उस विवादित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था, जिसमें किशोरियों को रिश्तों में पड़ने के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर दिया था। सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान ने अदालत को बताया कि मूल मामला एक नाबालिग लड़की और 25 वर्षीय युवक के साथ भाग जाने से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि युवती बाद में उसी व्यक्ति के साथ रहने लगी, दोनों का एक बच्चा भी है और वह अपने वैवाहिक जीवन में खुश है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे मामलों में पॉक्सो कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, क्योंकि सहमति वाले संबंधों में भी कई किशोर जेल पहुंच जाते हैं। केंद्र सरकार ने दिया राष्ट्रीय डैशबोर्ड बनाने का सुझाव केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस संबंध में कुछ सिफारिशें तैयार की गई हैं। यदि इन्हें स्वीकार किया जाता है तो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन्हें लागू किया जा सकता है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने पॉक्सो मामलों की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय डैशबोर्ड बनाने का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक हाईकोर्ट में बाल अधिकारों से जुड़ी समितियां पहले से मौजूद हैं और राज्य सरकारें भी ऐसे मामलों की प्रभावी निगरानी कर सकती हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी। —————–
ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट में मिली सजा रद्द की:पीड़िता को पति ने छोड़ा तो आरोपी ने ही शादी की सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट में मिली सजा रद्द कर दी। कोर्ट ने यह फैसला इसलिए लिया, क्योंकि आरोपी और पीड़िता ने बाद में शादी कर ली और आरोपी ने पीड़िता को 10 लाख रुपए का मुआवजा भी दिया। कोर्ट का कहना है कि बालिग होने के बाद पीड़िता ने आरोपी से शादी कर ली थी। पूरी खबर पढ़ें…