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सांडेराव के वरिष्ठ पत्रकार नटवर मेवाड़ा का देहांत:अहमदाबाद में इलाज के दौरान लीं अंतिम सांस, नम आंखों से किया अंतिम संस्कार

पाली जिले के सांडेराव निवासी वरिष्ठ पत्रकार नटवर मेवाड़ा का शुक्रवार को अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान निधन हो गया। शनिवार दोपहर को सांडेराव में नम आंखों के साथ परिजनों और परिचितों ने उनकी पार्थिक देह का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान बड़ी संख्या में परिजन, समाज के लोग और ग्रामीण मौजूद रहे। दिवंगत मेवाड़ा के बेटे महावीर मेवाड़ा ने बताया कि उनके पिता पिछले कुछ समय से किडनी की समस्या से परेशान थे। किडनी के पास पानी भरने से सुमेरपुर और फिर अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में इलाज लिया। 6 जुलाई से वे सिविल हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर थे। शुक्रवार 10 जुलाई की रात करीब 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस लीं। शनिवार दोपहर को सांडेराव में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

जयपुर में युवक-युवती परिचय सम्मेलन कल:दो चरणों में होगा 248वें सम्मेलन का आयोजन, सभी समाजों के युवा एक ही मंच पर चुनेंगे जीवनसाथी

जयपुर में माली सैनी समाज विकास आदर्श संस्था की ओर से रविवार 12 जुलाई को सर्व जातीय युवक-युवती परिचय सम्मेलन कराया जाएगा। संस्था के अध्यक्ष रमेश सैनी फरमेवाला ने बताया कि सम्मेलन का आयोजन नारायण गढ़ पैलेस सुंदर विहार स्वेज फार्म सोडाला में होगा। इस 248वें सम्मेलन में विभिन्न समाजों के युवक-युवतियों का परिचय सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक एक ही मंच पर कराया जाएगा। पहले चरण सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक सैनी ने बताया कि सम्मेलन का आयोजन दो चरणों में होगा। पहले चरण में उच्च शिक्षा प्राप्त और नौकरी पेशा युवक-युवतियों का परिचय कराया जाएगा। पहला चरण सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक चलेगा। दूसरे चरण में सामान्य पढ़े लिखे युवक-युवतियों का परिचय होगा। दूसरे चरण में परिचय दोपहर 1 से 3 बजे तक कराया जाएगा। सम्मेलन में सभी समाजों के युवक-युवती आएंगे रमेश सैनी ने कहा कि सम्मेलन में सभी समाजों के युवक-युवती अपने परिजनों (माता-पिता) के साथ परिचय के लिए आएंगे और अपने जीवन साथी का चयन करेंगे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का आयोजन हर साल होता है। पूर्व में यह सैनी समाज के लिए था, लेकिन अब इसका आयोजन सर्व समाज के लिए किया जाता है। 247वें सम्मेलन में आए थे सैंकड़ों युवा रमेश सैनी ने बताया कि युवक-युवतियों के परिचय के लिए 4 जुलाई को 247वें सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें सैकड़ों की संख्या में युवक-युवतियों ने अपने जीवन साथी का चयन किया। 4 जुलाई के सम्मेलन में समयावधि के बाद भी युवाओं का आना लगा रहा, जिसके चलते संस्थान ने सम्मेलन के दोबारा आयोजन का निर्णय लिया।

तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने स्कूटी सवार बहनों को मारी टक्कर,VIDEO:उछलकर दोनों सड़क पर गिरी; गृह प्रवेश के लिए पूजा का सामान लेने निकली थी

नागौर शहर में शनिवार की दोपहर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो एक स्कूटी को टक्कर मारने के बाद सवारियों से भरी पिकअप से जा भिड़ी। हादसे में स्कूटी सवार दोनों बहनें घायल हो गईं। जबकि पिकअप से टकराने के बाद स्कॉर्पियो का टायर पंचर हो गया। हादसा बीकानेर रोड पर डीडवाना तिराहे पर दोपहर करीब 3 बजे हुआ, जिसका वीडियो भी सामने आया है। कोतवाली थाना एएसआई भगवाना राम के अनुसार, फिलहाल दोनों पक्षों की तरफ से मामला दर्ज नहीं करवाया गया है। हालांकि एहतियात के तौर पर गाड़ियों को थाने में खड़ा करवाया गया है। अब देखिए- एक्सीडेंट से जुड़ी 3 तस्वीरें गृह प्रवेश के कार्यक्रम के लिए पूजा का सामान लेने निकली थी दोनों बहनें
घायल बहनों के भाई सुरेश ने बताया- प्रेम नगर कॉलोनी स्थित उनके नवनिर्मित मकान में शनिवार को गृह प्रवेश और प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम था। दोनों युवतियां पूजा का सामान खरीदने के लिए स्कूटी से बाजार गई थीं। सामान लेकर लौटते समय डीडवाना तिराहे पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी, जिससे दोनों सड़क पर गिरकर घायल हो गईं। हादसे में स्कूटी सवार भगवती और उसके पीछे बैठी चचेरी बहन के हाथ और कमर में चोटें आई हैं। उन्हें इलाज के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू सरकारी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई हैं। हालांकि गनीमत रही कि पीछे से कोई तेज रफ्तार में गाड़ी नहीं आ रही थी, वर्ना बड़ा हादसा हो सकता था। कोतवाली थाना एएसआई भगवाना राम ने बताया कि स्कॉर्पियो, स्कूटी और पिकअप को जब्त कर थाने पहुंचाया और मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों युवतियां स्कूटी से रोड क्रॉस कर रही थी, इसी दौरान हादसा हुआ। हालांकि स्कूटी को टक्कर मारने के बाद स्कॉर्पियो का बैलेंस बिगड़ा और वह रॉन्ग साइड में खड़ी पिकअप से टकराकर रूक गई। मामले में दोनों घायलों को इलाज के बाद हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है।

उदयपुर में जैन मुनि आचार्य आदित्य सागर का प्रवेश:बोले-बिना संस्कारों के इंसानी जीवन घुन लगे गेहूं जैसा कचरा, जो भाग्य में लिखा है, वही होना है

उदयपुर के धोल की पाटी स्थित जैन मंदिर में मुनि आचार्य आदित्य सागर का मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए समाज की कुरीतियों, संस्कारों और साधु के सही अर्थ पर बेबाकी से अपनी बात रखी। मुनि आदित्य सागर ने घोषणा की कि वे अगले 4 महीने तक उदयपुर में ही रहेंगे और उनका चातुर्मास यहीं संपन्न होगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चातुर्मास में क्या आया और क्या गया, यानी क्या आय-व्यय रहा, इससे उनका कोई सरोकार नहीं है। यह सब देखना और संभालना समाज का काम है। वे केवल अपनी साधना करेंगे और जैसे ही चातुर्मास का समय पूरा होगा, वे यहां से विहार कर जाएंगे। बिना चरित्र के इंसान घुन लगे गेहूं जैसा मुनि आदित्य सागर ने आज के समाज में युवाओं और बच्चों की स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोगों को खुद का इंटरैक्शन पसंद नहीं आ रहा है। हर कोई अपने फोन में बिजी है, स्टेटस लगाने में मस्त है। इस अकेलेपन और भटकाव का एक बहुत बड़ा कारण पढ़ाई की व्यवस्था भी है। आठवीं और दसवीं क्लास से ही बच्चों को घर से दूर बाहर पढ़ने के लिए भेज दिया जाता है। वहां वे अकेले रहते हैं और जो उनका मन करता है, वही करते हैं। अकेले रहने की यह आदत बच्चों को बिगाड़ देती है क्योंकि वहां उन्हें कोई देखने-टोकने वाला नहीं होता। उन्होंने पढ़ाई कर रहे बच्चों को सीधा संदेश देते हुए कहा कि अगर आपके पास कैरेक्टर (चरित्र) नहीं है, तो यह समझ लीजिए कि आप एक घुन लगे गेहूं के समान हैं। ऐसे गेहूं को जब पीसा जाएगा तो उससे आटा नहीं मिलेगा, बल्कि सिर्फ कचरा ही हाथ आएगा। इसलिए जीवन में संस्कारों और चरित्र का होना सबसे ज्यादा जरूरी है। संस्कार शिविरों से बदल रहा बच्चों का जीवन मुनि ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वे बच्चों के संस्कार बचाने के लिए लगातार कार्यक्रम और शिविर करते हैं। हालांकि, हजारों बच्चों में से 5-10 बच्चे ऐसे भी होते हैं जो शिविर के बाद भी संस्कारहीन हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि प्रयास छोड़ दिया जाए। बाकी बच्चे तो बच जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भीषण गर्मी के मौसम में अगर किसी को एक कटोरी पानी भी मिल जाए, तो उसकी प्यास बुझ जाती है। ठीक उसी तरह बच्चों के संस्कार बचाने का यह प्रयास भी है। संस्कार मिलने के बाद केवल 1 से 2 परसेंट बच्चों में ही ऐसा रिजल्ट दिखता है, जिन्होंने नियम तोड़ दिए, लेकिन ज्यादातर सकारात्मक और अच्छे परिणाम ही सामने आए हैं। इसी वजह से वे इसे आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी साफ किया कि धर्म किसी जाति विशेष का नहीं होता। जैन धर्म हो या कोई अन्य दर्शन, जो इसे स्वीकार कर ले, धर्म उसी का हो जाता है। उनके द्वारा आयोजित होने वाले संस्कार शिविर और दंपत्ति संस्कार शिविर में दस लक्षण पर्व के दौरान अन्य लोग भी बैठ सकते हैं। पूजन-अभिषेक का नियम लोग अपने हिसाब से तय कर सकते हैं, लेकिन संस्कार का असली मतलब यही है कि हम एक-दूसरे के प्रति वफादार रहें। दिखावे की शादियों पर किया करारा प्रहार समाज में बढ़ रहे दिखावे के चलन पर मुनि श्री ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज चारों तरफ दिखावे का जो दौर चल रहा है, वह असल में असत्य का दौर है। शादी-ब्याह में 25 प्रकार के व्यंजन और 100 प्रकार की डिशेज बनाई जा रही हैं। लोग सिर्फ इसलिए अंधाधुंध पैसा बहा रहे हैं क्योंकि फलां व्यक्ति ने इतनी बड़ी शादी की थी, तो हमें भी वैसी ही करनी है। जो भाग्य में लिखा है, वही होना है उन्होंने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि ऐसा करने से आपका स्टेटस बढ़ नहीं रहा है, बल्कि गिर रहा है। एक बड़ी और खर्चीली शादी करने के बाद इंसान अगले दो साल तक भारी तनाव में रहता है क्योंकि उसे वह कर्जा चुकाना होता है। उन्होंने मुहूर्त निकालने की प्रथा पर भी तंज कसते हुए कहा कि लोग मुहूर्त के पीछे भागते हैं, जबकि असलियत यह है कि जो भाग्य में लिखा है, वही होना है। मुनि श्री ने समाज के उन फैसलों की सराहना की जहां भोजन में केवल 15 चीजें बनाने का नियम लागू किया गया है और खर्चों की लिमिट तय की गई है। इससे समाज का पैसा बर्बाद होने से बचता है और यही बचा हुआ धन विपरीत परिस्थितियों में काम आता है। उन्होंने हर समाज को यह सुझाव दिया कि वे अपना एक सामूहिक वैवाहिक स्थान बनाएं, जहां बेहद कम खर्च में और पूरी शुद्धता के साथ विवाह संपन्न हो सकें। 2008 में खुद संस्कार शिविर से साधु बनने की प्रेरणा मिली साधु के सच्चे स्वरूप को समझाते हुए मुनि आदित्य सागर ने कहा कि उनके चातुर्मास का सबसे बड़ा कार्यक्रम संस्कार शिविर ही रहने वाला है। इस शिविर में देश-दुनिया के लाखों श्रावक ऑनलाइन और ऑफलाइन जुड़कर 10 दिनों तक धर्म सीखते हैं। इसी शिविर के दौरान कई बार किसी का मन ऐसा बदलता है कि वह साधु बनने की राह पर चल पड़ता है। उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा राज खोलते हुए बताया कि साल 2008 में वे खुद एक संस्कार शिविर में बैठे थे। उसी शिविर में वे अपने गुरुजी से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने साधु बनने का फैसला कर लिया। उन्होंने कहा कि संस्कार शिविर की परिकल्पना बहुत गहरी है और जैन समाज इसमें बढ़-चढ़कर सहयोग करता है, ताकि आने वाली पीढ़ी संस्कारी बने। अगर लाखों में से एक भी साधु निकल जाता है, तो वह आगे चलकर करोड़ों लोगों को सही राह दिखाने और शिक्षा देने के काबिल बन जाता है। डिफेंडर गाड़ी में घूमने वाले गो-भक्षक हैं, रक्षक नहीं जैन दर्शन में साधु की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जो पांचों इंद्रियों के विषयों से और भविष्य के भवों में मिलने वाले सुखों की आशा छोड़ चुके हैं, जिन्होंने आरंभ और परिग्रह का त्याग कर दिया है और जो हर समय ज्ञान, ध्यान व तप में लीन रहते हैं, वही सच्चे साधु हैं। उन्होंने कहा कि वे कथा वाचन करने वालों को साधु नहीं मानते, वे केवल कथावाचक हैं। साधु वही है जो कठिन तपस्या करता है और तपस्या हमेशा त्याग से आती है, न कि राग से। जैन मुनि सर्वस्व त्याग करके ही इस मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने बिना किसी डर के कहा कि आज अगर कोई साधु यह कहता है कि गो-हत्या नहीं होनी चाहिए, गो-वंश की रक्षा होनी चाहिए और वह खुद करोड़ों की डिफेंडर गाड़ी में घूम रहा है, तो वह गो-वंश का रक्षक नहीं बल्कि भक्षक है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे इंटरनेट पर सर्च करके देखें कि एक डिफेंडर गाड़ी के इंटीरियर और उसके पार्ट्स को बनाने में गाय समेत 8 जानवरों को मारकर उनके चमड़े का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में जो लोग हवाई जहाजों और लग्जरी गाड़ियों में सफर कर रहे हैं, वे साधु नहीं बल्कि गृहस्थ या कथावाचक मात्र हैं। जैन मुनि का नाता केवल त्याग और राग-द्वेष को छोड़ने से होता है।

पार्क में लगी अंबेडकर की प्रतिमा को किया खंडित:मामला दर्ज, ग्रामीणों ने की असामाजिक तत्वों ने पकड़ने की मांग

भरतपुर में असामाजिक तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ दिया। जिससे लोगों को आक्रोश फैल गया। सूचना मिलने पर लोगों की भीड़ इक्कठा हो गई। ग्रामीणों ने असामाजिक तत्वों को पकड़ने को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर हलैना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना का जायजा लिया। मामला हलैना वैर रोड़ पर शनिवार सुबह का है। असामाजिक तत्वों ने तोड़ी प्रतिमा हलैना थाना अधिकारी विजेंद्र सिंह ने बताया- दीपेश निवासी हलैना ने FIR दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में बताया है कि हलैना-वैर रोड़ उप तहसील के सामने अंबेडकर पार्क बना हुआ है। जिसमें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगी हुई है। रात में किसी असामाजिक तत्व ने अंबेडकर पार्क में लगी प्रतिमा को खंडित कर दिया है। प्रतिमा को कपड़े से ढका असामाजिक तत्वों ने प्रतिमा से नाक, आंख और चश्मे को तोड़ा है। इस घटना का जब पता लगा तो, सर्व समाज के लोग अंबेडकर पार्क में इकट्ठे हो गए और, प्रतिमा को खंडित करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। फिलहाल प्रतिमा को कपड़े से ठक दिया गया है।

मुंह में कपड़ा ठूंसने से सांस नहीं ले सका व्यापारी:काफी देर कमरे में तड़पते रहे, फिर दम तोड़ा; 19 घंटे बाद वारदात का पता चला

अलवर शहर में घर में घुसकर व्यापारी की हत्या के मामले में नए तथ्य सामने आए हैं। व्यापारी के घर में घुसकर लूट करने की वारदात का करीब 19 घंटे बाद पता चला था। ऐसे में बुजुर्ग काफी देर तड़पते रहे। मामले में मृतक के भांजे और नगर निगम के पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल ने बताया कि मेरे मामा दिनेश चंद अग्रवाल (80) ने तड़पने के बाद दम तोड़ा था। आरोपी आसपास के थे और नशेड़ी थे। जो 9 जून की रात करीब 12 बजे छत के ऊपर से कमरे में घुसे थे। कमरे में रखे सिक्के और नकदी चोरी करते समय बुजुर्ग जाग गए। एक आरोपी को पहचान लिया। इसके बाद सबने मिलकर बुजुर्ग के हाथ-पैर बांधे और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। केवल नाक खुली छोड़ दी। फिर कमरे की लाइट बंद कर चले गए। बुजुर्ग पूरी तरह सांस नहीं ले सके। जो तड़पते रहे। फिर दम टूट गया। यह सब पुलिस की जांच में सामने आया है। इसकी जानकारी पुलिस ने दी है। बता दें कि घटना की जानकारी गुरुवार शाम करीब 7 बजे पुलिस को मिली थी। खदाना मोहल्ला निवासी व्यापारी दिनेश चंद अग्रवाल (80) घर में मृत मिले थे। नका बेटा विकास अग्रवाल मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (MR) है। वह परिवार के साथ स्कीम-4 में रहता है। घर में घुसे थे 5 बदमाश पुलिस पूछताछ में सामने आया कि वारदात वाली रात 5 बदमाश छत के रास्ते से नीचे बुजुर्ग दिनेश चंद अग्रवाल के कमरे में दाखिल हुए थे। उस समय बुजुर्ग गहरी नींद में थे। लेकिन कमरे में आहट होते ही उनकी नींद खुल गई और वे चारपाई से खड़े हो गए थे। नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन ने ली एसपी से जानकारी घटना की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन ने अलवर एसपी से मुलाकात कर मामले की पूरी जानकारी ली, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई का ब्योरा सामने आया। मामले में करण (20) पुत्र रामजीलाल निवासी दारूकुटा मोहल्ला और तेजू उर्फ तेजपाल (20) पुत्र अशोक निवासी सरकारी क्वार्टर, मालवीय नगर को डिटेन किया है। मुख्य आरोपी अभी पकड़ से बाहर है। दो नाबालिगों की भी संलिप्ता सामने आई है। एएसपी दीपक कुमार ने बताया- घटना रात करीब 12 बजे के आसपास की है। चोरी करने के इरादे से घुसे बदमाशों ने बुजुर्ग के हाथ-पैर बांध दिए थे। मुंह में कपड़े ठूस दिए थे। यह जानकारी कमरे पर सबसे पहले पहुंचे बुजुर्ग के बेटे ने दी। मृतक के हाथ पैरों पर निशान भी थे। ऐसा लगता है कि बदमाशों के जाने के बाद बुजुर्ग को पूरी तरह सांस नहीं मिली। पानी भी नहीं मिला। इसके कारण जान चली गई। ये भी पढ़ें… पड़ोसियों ने की 80 साल के व्यापारी की हत्या:रोज अंकल-अंकल कहते थे, चोरी करने घुसे; जागने पर मुंह में कपड़ा ठूंसा अलवर शहर में बदमाशों ने घर में घुसकर व्यापारी की हत्या कर दी। उनके हाथ-पैर बांधकर मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। इसके बाद घर से करीब डेढ़-दो लाख रुपए लूटकर फरार हो गए। 12 घंटे में ही पुलिस ने वारदात का खुलासा कर दिया। दो आरोपियों को डिटेन किया है। (पूरी खबर पढ़ें)

प्रिंसिपल के तबादले के विरोध में स्कूल पर ताला जड़ा:ग्रामीणों ने की ट्रांसफर आदेश वापस लेने की मांग, अधिकारियों से वार्ता के बाद खोला

हनुमानगढ़ के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल नाईवाला में प्रिंसिपल के तबादले के विरोध में शनिवार को ग्रामीणों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक तबादला आदेश निरस्त नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। धरने की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की। ग्रामीणों ने बताया कि प्रिंसिपल लखवीर सिंह के कार्यकाल में स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनके नेतृत्व में अनुशासन मजबूत हुआ, विद्यार्थियों का पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ा और समग्र शैक्षणिक वातावरण बेहतर बना। ग्रामीणों का मानना था कि ऐसे समय में प्रिंसिपल का तबादला स्कूल और विद्यार्थियों के हित में नहीं है। उन्होंने तबादला आदेश वापस लेने की मांग की। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि प्रिंसिपल का तबादला निरस्त करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। उन्होंने ग्रामीणों की मांग को उचित स्तर पर पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने स्कूल का ताला खोल दिया। सीबीईओ शैलेंद्र थोरी ने बताया कि ग्रामीणों की मांग उच्चाधिकारियों और राज्य सरकार तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने पुष्टि की कि अब स्कूल में शिक्षण कार्य सुचारू रूप से जारी है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और छात्र-छात्राएं शामिल थे, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी।

डॉक्टर बोले- प्रसूताएं सीरियस थीं,एक को हार्टअटैक आया:परिजनों का आरोप- पोस्टमॉर्टम किए बिना शव सौंपा, खून चढ़ाया ही नहीं

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के मातृ एवं शिशु अस्पताल (MCH) में 6 दिन में 5 और बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 4 दिन में 4 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इन सभी प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। एक प्रसूता के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मामले को दबाया और बिना पोस्टमॉर्टम करवाए शव सौंप दिया। उनसे इमरजेंसी हालातों में खून मंगवाया, लेकिन चढ़ाया ही नहीं। इसके बाद प्रसूता को मृत घोषित कर दिया। प्रसूताओं की मौतों पर भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट ने कहा- हॉस्पिटल में आई महिलाएं सीरियस थी। डॉक्टर्स ने उनको रेफर किए बिना जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन बचा नहीं पाए। एक प्रसूता को हार्टअटैक आया था। बांसवाड़ा कलेक्टर ने कहा- मौतों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका को देखते हुए सैंपल लिए गए हैं। दवाइयों के रिएक्शन के लक्षणों को लेकर भी एनेस्थेटिस्ट की रिपोर्ट और पूरी मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जा रही है। पढ़िए राजस्थान के 2 सरकारी अस्पतालों से रिपोर्ट… पहले बांसवाड़ा के MG हॉस्पिटल से रिपोर्ट गंभीर हालत में आई थी प्रसूताएं
बांसवाड़ा कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने बताया- अस्पताल में लक्ष्मी (21) पत्नी अरविन्द, लीला (32) पत्नी विजय और रेशमा (28) पत्नी प्रेम और एक अन्य प्रसूता की मौत हुई है। 4 में से 2 प्रसूताओं को बेहद गंभीर स्थिति में अन्य सेंटर्स से यहां रेफर किया गया था। जबकि अन्य 2 केस में सिजेरियन सेक्शन (ऑपरेशन) किया गया था। इसमें से एक की रात में और दूसरी की अगले दिन मौत हुई है। मौतों के सटीक कारणों और विस्तार से जांच के लिए 5 वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। साथ ही जयपुर मेडिकल विभाग के उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है, जहां से सीनियर डॉक्टर जांच में हिस्सा लेने आ रहे हैं। ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका को देखते हुए सैम्पल्स लिए गए हैं। ड्रग रिएक्शन (दवाइयों के रिएक्शन) के लक्षणों को लेकर भी एनेस्थेटिस्ट की रिपोर्ट और पूरी मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जा रही है। परिजनों के आरोप पर बोले- गुमराह किया तो आकर संपर्क करें
परिजनों के पोस्टमॉर्टम करवाए बिना शव सौंपने के आरोप पर कलेक्टर ने कहा- डॉक्टर हमेशा मौत का सही कारण जानने का प्रयास करते हैं, उन्हें आगे रिपोर्ट करना होता है। अगर परिजनों को अभी भी लगता है कि उन्हें गुमराह किया गया है या किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो अस्पताल प्रशासन या पुलिस से संपर्क कर अपनी बात रख सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। अब पढ़िए परिजनों ने क्या कहा… रात तक एकदम ठीक थी, सुबह ICU में शिफ्ट किया
मृतका लीला निवासी कानेला ग्राम, अरथूना के जेठ संजय खांट ने कहा- ​डॉक्टरों ने ऑपरेशन (सिजेरियन) के जरिए लीला की डिलीवरी करवाई। डिलीवरी के बाद लीला पूरी तरह स्वस्थ थी। उसने रात तक पति विजय, सास और अन्य परिजनों से बात की और काफी खुश थी। सुबह होते ही अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सूचित किया कि लीला का ब्लड प्रेशर (BP) अचानक बेहद लो हो गया है और वह बेहोश हो गई है। इसके तुरंत बाद उसे आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया गया और परिजनों के अंदर जाने पर पाबंदी लगा दी गई। संजय खांट ने कहा- लीला का हीमोग्लोबिन 12 पॉइंट था, जो कि डिलीवरी के लिहाज से पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित माना जाता है। इसके बाद भी डॉक्टरों ने अचानक शरीर में खून की कमी की बात कही और तुरंत खून की व्यवस्था करने को कहा। हमने भाग-दौड़ की और 4 बोतल खून का इंतजाम किया। डॉक्टरों ने वह खून लीला को चढ़ाया ही नहीं और कुछ ही देर बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बाद में पल्ला झाड़ते हुए कहा कि प्रसूता के बचने के केवल 10% चांस ही थे। आरोप- बिना पोस्टमॉर्टम करवाए शव सौंपा
संजय खांट ने आरोप लगाया कि ​लीला की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने कहा कि यदि पोस्टमॉर्टम करवाना है तो अरथूना पुलिस के आने तक इंतजार करना होगा। शव को यहीं रोके रखा जाएगा। अस्पताल प्रशासन ने लिखित में ले लिया कि वे पोस्टमॉर्टम नहीं करवाना चाहते। इसके बाद बिना पोस्टमॉर्टम कराए शव सौंप दिया। अब भीलवाड़ा के MGH से रिपोर्ट ‘हमने पांचों मौत के कारण पता लगाए’
भीलवाड़ा में महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने कहा- जो भी मौत होती है, बहुत दुखद होती है। हमने सबके कारण पता किए हैं। पहली प्रसूता जब यहां आई तो लेबर में नहीं थी, गेस्ट्रो शॉक में थी। दूसरी पेशेंट को हार्ट अटैक हुआ, हमारे पास उसका डॉक्युमेंटेशन है। तीसरी की मौत ऑपरेशन के बाद कॉमन कॉज (थ्रंबो एम्बोलिज्म) से हुई। बाकी 2 में पीपीएच हुआ है। इसके बावजूद इन मौतों की माइक्रो लेवल पर जांच करवाई जा रही है। कलेक्टर बोले- टीमें जांच कर रही
मामले को लेकर कलेक्टर संधू ने कहा- 26 जून को एक रिपोर्ट पेश हुई थी। इसमें ऑपरेशन थिएटर 2 में इंफेक्शन पाया गया था। इसके बाद से ये बंद है। वहीं ऑपरेशन थिएटर 1 अभी सुचारु चल रहा है। मौत की जांच के लिए स्टेट टीम बनाई गई है ,ये टीम जल्द ही जांच के लिए पहुंचेगी। पढ़ें ये खबर भी… ऑपरेशन थिएटर में फैला संक्रमण, 7 प्रसूताओं की मौत:भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में सिजेरियन में लापरवाही, गंदे उपकरणों के इस्तेमाल का आरोप भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। पढ़ें पूरी खबर…

ताऊ की गंडासी से हत्या करने का आरोपी भतीजा गिरफ्तार:शादी नहीं होने की रंजिश में की वारदात, 12 घंटे में पुलिस ने दबोचा

झालावाड़ के सारोला कलां थाना क्षेत्र में एक हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने गाडरवाड़ा नूरजी गांव में अपने ही ताऊ की धारदार हथियार (गंडासी) से हत्या करने वाले आरोपी कुलदीप बैरवा (35) को महज 12 घंटे में गिरफ्तार कर लिया है। एसपी अमित कुमार ने बताया कि 9 जुलाई की रात गांव गाडरवाड़ा नूरजी निवासी जगन्नाथ बैरवा पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल जगन्नाथ को परिजन एसआरजी अस्पताल, झालावाड़ ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शादी न होने से नाराज था आरोपी सारोला थानाप्रभारी बुद्धराम ने प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर बताया कि आरोपी अपनी शादी न होने से नाराज था। इसी बात को लेकर उसने अपने ताऊ जगन्नाथ की हत्या कर दी। इसपर मृतक के पुत्र सत्यवान बैरवा की रिपोर्ट पर सारोला कलां थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया। विशेष टीम का किया गठन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद्र मीणा और वृत्ताधिकारी गरिमा जिंदल के निर्देशन में थानाधिकारी बुद्धराम के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए और मुखबिर की सूचना पर आरोपी कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस पूछताछ में हुआ खुलासा पुलिस पूछताछ में आरोपी कुलदीप ने बताया कि वह शराब और नशे का आदी है। करीब एक महीने पहले उसकी शादी को लेकर ताऊ जगन्नाथ से विवाद हुआ था। आरोपी को शक था कि उसके ताऊ ने अपने दोनों बेटों की शादी करा दी, लेकिन उसे जानबूझकर कुंवारा रखा जा रहा है। इसी रंजिश के चलते उसने मौका देखकर गंडासी से ताऊ के हाथ पर लगातार कई वार किए। लोगों के मौके पर पहुंचते ही वह खेतों में छिपकर फरार हो गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या में प्रयुक्त धारदार हथियार की बरामदगी और मामले में आगे की जांच जारी है। आरोपी के खिलाफ सारोला थाने में पूर्व में भी दो मामले दर्ज हैं।

सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा कल से, 4 स्पेशल ट्रेन चलेंगी:अभ्यर्थियों को राहत, अकलेरा-कोटा और छबड़ा गुगोर-सोगरिया रूट पर होगा संचालन

पश्चिमी मध्य रेलवे ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2026 के अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। ये चार अनारक्षित परीक्षा स्पेशल ट्रेनें 12 से 18 जुलाई तक प्रतिदिन चलेंगी। इन ट्रेनों से बारां, अटरू, अंता, छबड़ा, झालावाड़ और आसपास के हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र कोटा तक समय पर पहुंचने में मदद मिलेगी। रेलवे के अनुसार गाड़ी संख्या 09803/09804 अकलेरा-कोटा-अकलेरा और गाड़ी संख्या 09802/09801 छबड़ा गुगोर-सोगरिया-छबड़ा गुगोर के बीच इन विशेष ट्रेनों का संचालन होगा। छबड़ा गुगोर से चलने वाली परीक्षा स्पेशल ट्रेन सुबह 4:30 बजे रवाना होकर बारां स्टेशन पर सुबह 5:30 बजे और अंता पर 6:03 बजे पहुंचेगी, जिसके बाद यह सुबह 7:30 बजे सोगरिया पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन सोगरिया से शाम 7:15 बजे चलकर रात 8:26 बजे बारां और रात 10 बजे छबड़ा गुगोर पहुंचेगी। इसी प्रकार अकलेरा-कोटा स्पेशल ट्रेन सुबह 3:05 बजे अकलेरा से रवाना होकर विभिन्न स्टेशनों से होते हुए सुबह 6:25 बजे कोटा पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन रात 8:30 बजे कोटा से चलकर रात 12:25 बजे अकलेरा पहुंचेगी। रेल प्रशासन ने परीक्षा अवधि के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए प्रमुख स्टेशनों पर टिकट जांच कर्मचारियों और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के अतिरिक्त जवान तैनात करने की जानकारी दी है। अभ्यर्थियों से वैध टिकट लेकर यात्रा करने और इन परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का अधिकतम उपयोग करने की अपील की गई है।