ब्रेकिंग न्यूज़
2029 से लागू हो सकता है वन नेशन वन इलेक्शन:संसदीय समिति के अध्यक्ष बोले- 99% लोग पक्ष में; राज्यों के विशेषज्ञों से सलाह ले रहे

संसद की संयुक्त समिति (JPC) कोशिश कर रही है कि 2029 के लोकसभा चुनावों तक ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ लागू हो सके। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी के मुताबिक, अब तक चर्चा में शामिल लगभग 99% नागरिक और संगठनों ने इसका समर्थन किया है। समिति ने गोवा के मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों सहित कई राज्यों के विशेषज्ञों से इस पर सलाह ली है। गोवा दौरे पर गए समिति के सदस्य और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि बार-बार चुनाव से छोटे राज्य गोवा पर इतना प्रभाव पड़ता है, तो बड़े राज्यों और पूरे देश पर इसका असर और भी ज्यादा होता होगा। उन्होंने बताया कि समिति का अगला दौरा लखनऊ का होगा, जहां मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, राजनीतिक दलों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। JPC 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर संसद में पेश करेगी। वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े 5 सवाल 1. आखिर इसका क्या मतलब है? लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग कराने के बजाय एक साथ कराना। 2. जिन राज्यों का कार्यकाल 2029 के बाद भी बचा होगा, उनका क्या होगा? संविधान संशोधन के जरिए उन राज्यों के कार्यकाल को समय से पहले ही समाप्त करके 2029 के चुनावी चक्र के साथ जोड़ा जाएगा। 3. जिनका कार्यकाल 2029 से पहले खत्म हो रहा होगा, उनका क्या होगा? वहां कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लग सकता है या फिर केवल 2029 तक के लिए चुनाव संभव। 4. इसमें क्या कानूनी चुनौतियां आएंगी? कई अनुच्छेदों (जैसे 83, 172, 356) में संशोधन करना होगा। संसद में दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की मंजूरी चाहिए। 5.अगर बीच में ही कोई सरकार गिर जाए, तो क्या नियम प्रस्तावित हैं? इस नए प्रस्ताव के तहत मध्यावधि चुनाव पूरे 5 साल के लिए नहीं कराए जाएंगे, बल्कि केवल बचे हुए कार्यकाल के लिए ही कराए जाएंगे, ताकि अगला मुख्य चक्र न बिगड़े। वन नेशन, वन इलेक्शन पर सुरक्षित रास्ता भी तलाश रही सरकार केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्शन के लिए सुरक्षित रास्ता तलाश रही है। इसके लिए बनी जेपीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक समिति ‘टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल’ पर विचार कर रही है, जिससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने या विधानसभाओं के कार्यकाल में बहुत बड़ी कटौती करने की जरूरत न पड़े। पूरे देश को एक साथ चुनावी चक्र में लाने के बजाय दो चरणों- 2029 और 2034 में बढ़ने का विकल्प सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है। पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ करीब 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अवधि 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ाई जा चुकी है। ऐसे में 2029 से चुनावी चक्र एक करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं, 2034 तक पूरे देश को साझा चुनावी चक्र में लाने का लक्ष्य है। संविधान में गुंजाइश है, लेकिन सहमति पर जोर लॉ कमीशन के पूर्व सदस्य और मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के डीन आनंद पालीवाल ने कहा कि एक देश-एक चुनाव’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं। कुछ राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में कार्यकाल बढ़ाने के विकल्प भी हैं। भारत में पहले भी विशेष परिस्थितियों में लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव किए गए हैं। हालांकि किसी भी व्यापक बदलाव के लिए संसद द्वारा आवश्यक कानूनी प्रावधान और राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में पैनल का गठन ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। 1967 तक साथ हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव 1952 से 1967 तक यानी चार बार लोकसभा व अधिकांश विधानसभा चुनाव साथ हुए। 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें गिरने लगीं। 1968-69 में कई विधानसभाएं भंग हुईं और 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई। इससे देश का साझा चुनावी चक्र बिखर गया। 1971 में लोकसभा के मध्यावधि चुनाव हुए और राज्यों में चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। बाद में गठबंधन सरकारों, राष्ट्रपति शासन और समय से पहले चुनाव ने अंतर और बढ़ा दिया। विधि आयोग और नीति आयोग समय-समय पर चुनावी चक्र एक करने की सिफारिश करते रहे हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… वन नेशन, वन इलेक्शन- JPC की टीम गुजरात पहुंची:प्रियंका गांधी समेत 39 सदस्य सभी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात करेंगे वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर ठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की तारीफ की:NDA में जाने की अटकलें; चार दिन पहले पवार-शिंदे की मुलाकात हुई थी

NCP(SCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की किसान कर्जमाफी योजना में हुए बदलाव की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से लाखों किसानों को फायदा मिलेगा। पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का धन्यवाद भी किया। शरद पवार की पार्टी NCP के NDA में शामिल होने या कांग्रेस में विलय की अटकलें भी हैं। हालांकि, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने इन सभी चर्चाओं को अफवाह बताया है। सूत्रों के मुताबिक, पवार की पार्टी के नेता NDA में शामिल के फेवर में नहीं हैं। कुछ नेताओं ने इस पर असहमति जताई है। दरअसल, इन अटकलों को उस समय और बल मिला, जब शरद पवार ने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर 8 जुलाई को मुंबई में विधानभवन में मीटिंग हुई थी। इसके बाद पवार ने डिप्टी CM शिंदे के कमरे में अपनी पार्टी के विधायकों से मुलाकात की। शरद पवार बोले- सरकार फैसला नहीं लेती तो लाखों किसानों को नुकसान होता शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उपज के दामों में गिरावट को देखते हुए कर्जमाफी योजना की घोषणा की थी। हालांकि, योजना में शुरू में कुछ ऐसी शर्तें रखी गई थीं, जिनसे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि पहले 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्जमाफी योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये तक की ही राहत का प्रावधान था। इसके अलावा, नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए वर्ष 2025-26 और 2026-27 के फसल ऋण का भुगतान करना अनिवार्य रखा गया था। पवार ने कहा कि इन दोनों शर्तों के कारण लाखों किसान योजना के दायरे से बाहर हो जाते। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार का इन शर्तों को वापस लेने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह फैसला राज्य के किसानों की भावनाओं के अनुरूप है। कांग्रेस से अलग होकर बनाई थी NCP राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना 10 जून 1999 को शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने की थी। तीनों नेताओं ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद तीनों ने NCP का गठन किया। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… शरद पवार बोले-अजित चाहते थे कि दोनों NCP एक हों:सब कुछ तय था, 12 फरवरी को ऐलान होना था; बारामती में घर पर बैठक हुई महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों के विलय पर शरद पवार ने शनिवार को कहा, ‘यह अजित पवार की भी इच्छा थी। इसे जरूर पूरा होना चाहिए।’ शरद ने कहा कि अजित, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय के बारे में बातचीत शुरू की थी। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को विलय का ऐलान होना था लेकिन दुर्भाग्य से, अजित उससे पहले हमें छोड़कर चले गए। पढ़ें पूरी खबर…

शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की तारीफ की:NDA में जाने की अटकलें; चार दिन पहले पवार-शिंदे की मुलाकात हुई थी

NCP(SCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की किसान कर्जमाफी योजना में हुए बदलाव की तारिफ की। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से लाखों किसान फायदा मिलेगा। पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का धन्यवाद भी किया। शरद पवार की पार्टी NCP के NDA में शामिल होने या कांग्रेस में विलय की अटकलें भी हैं। हालांकि, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने इन सभी चर्चाओं को अफवाह बताया है। सूत्रों के मुताबिक, पवार की पार्टी के नेता NDA में शामिल के फेवर में नहीं हैं। कुछ नेताओं ने इस पर असहमति जताई है। पोता रोहित पवार इस फैसले के खिलाफ हैं। दरअसल, इन अटकलों को उस समय और बल मिला, जब शरद पवार ने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर 8 जुलाई को मुंबई में विधानभवन में मीटिंग हुई थी। इसके बाद पवार ने डिप्टी CM शिंदे के कमरे में अपनी पार्टी के विधायकों से मुलाकात की। शरद पवार बोले- सरकार फैसला नहीं लेती तो लाखों किसानों को नुकसान होता शुक्रवार को जारी बयान में शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उपज के दामों में गिरावट को देखते हुए कर्जमाफी योजना की घोषणा की थी। हालांकि, योजना में शुरू में कुछ ऐसी शर्तें रखी गई थीं, जिनसे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि पहले 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्जमाफी योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये तक की ही राहत का प्रावधान था। इसके अलावा, नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए वर्ष 2025-26 और 2026-27 के फसल ऋण का भुगतान करना अनिवार्य रखा गया था। पवार ने कहा कि इन दोनों शर्तों के कारण लाखों किसान योजना के दायरे से बाहर हो जाते। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार का इन शर्तों को वापस लेने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह फैसला राज्य के किसानों की भावनाओं के अनुरूप है। 2 वजह से अटकलों को हवा मिली शरद गुट के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि पवार की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें लंबी दूरी तक पैदल चलाना उचित नहीं था। डिप्टी CM शिंदे का कमरा विधान भवन से निकलने वाले दरवाजे के बिल्कुल नजदीक है, इसलिए सुविधा के लिहाज से वहीं बैठक करने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस से अलग होकर बनाई थी NCP राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना 10 जून 1999 को शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने की थी। तीनों नेताओं ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद तीनों ने NCP का गठन किया। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… शरद पवार बोले-अजित चाहते थे कि दोनों NCP एक हों:सब कुछ तय था, 12 फरवरी को ऐलान होना था; बारामती में घर पर बैठक हुई महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों के विलय पर शरद पवार ने शनिवार को कहा, ‘यह अजित पवार की भी इच्छा थी। इसे जरूर पूरा होना चाहिए।’ शरद ने कहा कि अजित, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय के बारे में बातचीत शुरू की थी। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को विलय का ऐलान होना था लेकिन दुर्भाग्य से, अजित उससे पहले हमें छोड़कर चले गए। पढ़ें पूरी खबर…

विधिक प्राधिकरण ने बसों का किया औचक निरीक्षण:चेसिस काटकर बनाया लगेज स्पेस; छत पर लगेज कैरियर बने पाए गए, बसों को किया जब्त

प्रदेश में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक माह तके विशेष अभियान चला है। सरकार की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने के लिए प्राधिकरण ने की तरफ से राज्यव्यापी विशेष निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जोधपुर में संचालित स्लीपर बसों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बसों की जांच करते हुए मोटर वाहन अधिनियम, 1988, AIS-119 (Rev.1): 2016 एवं राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाली बसों को जब्त किया गया एवं उनके चालान भी बनाए गए। इन बिंदुओं पर की गई विशेष जांच चेकिंग के दौरान यह भी जांच की गई कि स्लीपर बसों द्वारा AIS-119 के प्रावधानों की पालना की जा रही है अथवा नहीं। निरीक्षण में वाहनों में पर्याप्त इमरजेंसी गेट का अभाव, बैठक क्षमता में परिवर्तन, वाहन के पीछे चेसिस काटकर नियम विरुद्ध बनाए गए लगेज स्पेस, छत पर लगेज कैरियर का निर्माण, वाहनों का ओवरहैंग तथा बसों में लगे स्लीपर की लंबाई एवं फर्श से ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होना आदि बिंदुओं की जांच की गई। ये संयुक्त निरीक्षण दल रहा उपस्थित
इस कार्रवाई के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महानगर अध्यक्ष दिनेश त्यागी,सचिव राकेश रामावत और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष पूरण कुमार शर्मा और सचिव डॉ. मनीष हरजाई ने जोधपुर क्षेत्र में संचालित लग्जरी, स्लीपर बसों के लिए गठित संयुक्त निरीक्षण दल को साथ औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संयुक्त निरीक्षण के दल के सदस्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भोपाल सिंह लखावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण पुष्पेन्द्र सिंह, परिवहन निरीक्षक मोहम्मद फिरोज और उड़नदस्ता (फ्लाईंग) टीम शामिल रहे।

फायरमैन की 26-लाख की ज्वेलरी थाने से गायब,कॉन्स्टेबल पर FIR:दावा- CCTV फुटेज में बैग ले जाते हुए दिखा था; कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मामला

सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दिल्ली में तैनात फायरमैन राजेश कुमार के 26 लाख रुपए के सोने के जेवरात पुलिस थाने से गायब होने के मामले में कोर्ट के इस्तगासे पर कार्रवाई हुई है। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली थाने में सदर थाने के कॉन्स्टेबल संदीप कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। 30 मई को ज्वेलरी खरीदकर घर लौटते समय हादसे में गई थी जान
जानकारी के अनुसार, कुलौद खुर्द निवासी राजेश कुमार 30 मई 2026 को मातेश्वरी ज्वैलर्स से दो सोने की हमेल और 10 सोने के सिक्के खरीदकर घर लौट रहे थे। खाजपुर पुराना के पास तेज रफ्तार कार की टक्कर से उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद उनका बैग पुलिस की कस्टडी में पहुंचा, जिसमें सोने के जेवरात रखे हुए थे। एफआईआर के मुताबिक, क्रेन ड्राइवर शक्ति सिंह ने बैग और हेलमेट महिला कॉन्स्टेबल संतोष को सौंपा था। बैग को सदर थाने में स्टील की बेंच पर रखा गया, लेकिन बाद में उसमें रखे जेवर गायब मिले। परिजनों ने आरोप लगाया कि जेवर पुलिस कस्टडी से चोरी हुए हैं। दावा- सीसीटीवी फुटेज में दिखा था बैग ले जाते हुए
मामले में पीड़ित पक्ष ने दावा किया है कि सीसीटीवी फुटेज में सदर थाने का कॉन्स्टेबल संदीप कुमार बैग उठाकर थाने से बाहर ले जाता हुआ दिखाई दिया था। इसी आधार पर कोर्ट के आदेश पर अब उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एएसपी देवेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि कॉन्स्टेबल संदीप कुमार 30 जून 2026 से बिना सूचना ड्यूटी से गैरहाजिर था। इसके कारण उसे निलंबित किया जा चुका है। उसने 10 जुलाई को ही अपनी आमद दर्ज करवाई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। बता दें कि यह मामला पहले बगड़ थाने में दर्ज हुआ था, लेकिन क्षेत्राधिकार के कारण एफआर लगा दी गई। इसके बाद मृतक राजेश कुमार के मौसेरे भाई कैलाश डांगी ने कोर्ट की शरण ली। इसके बाद कोर्ट के इस्तगासे से कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, 2008 बैच का कॉन्स्टेबल संदीप जिले के कई थानों में तैनात रह चुका है, ऐसे में मामला दर्ज होते ही पुलिस ने उसके खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

जर्मनी के ज्वेरेव पहली बार विंबलडन फाइनल में:ब्रिटेन के फेरी को सेमीफाइनल में हराया; सचिन और शुभमन ने रॉयल बॉक्स से देखा मुकाबला

जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने ब्रिटेन के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी को 7-6, 6-2, 6-4 से हराकर पहली बार विंबलडन फाइनल में जगह बना ली। फ्रेंच ओपन चैंपियन ज्वेरेव अब रविवार को होने वाले फाइनल में मौजूदा चैंपियन जैनिक सिनर और नोवाक जोकोविच के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से भिड़ेंगे। 29 साल के ज्वेरेव 1995 के बाद विंबलडन फाइनल में पहुंचने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बने हैं। साथ ही वे फ्रेंच ओपन जीतने के बाद अगले ही ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंचने वाले ओपन एरा के तीसरे खिलाड़ी भी बन गए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अब तक सिर्फ दो सेट गंवाए हैं। दूसरी ओर, 114वीं रैंकिंग के ब्रिटिश वाइल्ड कार्ड आर्थर फेरी का ऐतिहासिक सफर सेमीफाइनल में थम गया। इसके बावजूद शानदार प्रदर्शन के दम पर उनकी रैंकिंग 114 से छलांग लगाकर 36वें स्थान पर पहुंच जाएगी, जिससे उन्हें बड़े टूर्नामेंटों में सीधे एंट्री मिलेगी। सचिन, गिल और लारा ने रॉयल बॉक्स से देखा मैच सेंटर कोर्ट के रॉयल बॉक्स में भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर, टेस्ट कप्तान शुभमन गिल, वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा और फुटबॉलर वर्जिल वान डाइक समेत कई खेल सितारे मौजूद रहे। विंबलडन ने सचिन का स्वागत करते हुए उन्हें क्रिकेट रॉयल्टी बताया। फेरी का शानदार सफर खत्म ब्रिटिश वाइल्ड कार्ड फेरी ने इस टूर्नामेंट में दमीर जुमहुर, ओट्टो विर्टानेन, जिजू बर्ग्स, ग्रिगोर दिमित्रोव और फ्लावियो कोबोली को हराकर पहली बार ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। पहले सेट में कड़ा मुकाबला फेरी ने शुरुआती सेट में ज्वेरेव को कड़ी टक्कर दी और मुकाबला टाई-ब्रेक तक पहुंचा। हालांकि टाई-ब्रेक में ज्वेरेव ने लगातार सात अंक जीतकर से सेट अपने नाम कर लिया। इसके बाद उन्होंने दूसरे और तीसरे सेट में दमदार सर्विस और बेसलाइन गेम के दम पर मुकाबला आसानी से खत्म कर दिया। फाइनल में सिनर या जोकोविच से मुकाबला मैच के बाद ज्वेरेव ने कहा, विंबलडन हमेशा मेरे लिए सबसे मुश्किल ग्रैंड स्लैम रहा है। अब मैं फाइनल में हूं और खुद पर भरोसा है। चाहे सामने मौजूदा चैंपियन सिनर हों या सात बार के विजेता जोकोविच, मुकाबला आसान नहीं होगा। ———————–
स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… पैराग्वे की मंत्री ने फ्रांसीसी फुटबॉल कप्तान को गाली दी:इंटरव्यू में ‘सन ऑफ बिच’ कहा; फुटबॉल वर्ल्डकप की 3 कंट्रोवर्सी फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे और पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला के बीच विवाद और गहरा गया है। अमारिला ने अब एम्बाप्पे को पिल्ला (सन ऑफ बिच) कहा है। उन्होंने अपने पहले दिए गए बयानों पर माफी मांगने से इनकार किया है। पूरी खबर पढ़ें…

चिकित्सा विभाग संयुक्त निदेशक का दलाल घूस लेते गिरफ्तार:डॉक्टर की पंजीयन स्वीकृति की एवज में मांगी 30 हजार रिश्वत; बांसवाड़ा एसीबी टीम की उदयपुर में कार्रवाई

उदयपुर चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक के लिए रिश्वत लेते एक दलाल को शुक्रवार को गिरफ्तार किया। बांसवाड़ा की एसीबी टीम ने दलाल अब्दुल कादिर को 30 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। वहीं कार्रवाई की भनक लगने पर संयुक्त निदेशक डॉ. रतन बिलवाल कार्यालय से फरार हो गए, जिनकी तलाश जारी है। एसीबी के अनुसार- परिवादी ने शिकायत दी थी कि उसकी लैब में सोनोग्राफी मशीन के संचालन के लिए रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर का नाम जोड़ना है। इसकी पंजीयन स्वीकृति जारी करने की एवज में 1.30 लाख रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोपों की पुष्टि होने पर ट्रैप की योजना बनाई गई। एसीबी उपमहानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरवीजन और पुलिस उपअधीक्षक रतनसिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में एसीबी टीम ने ये कार्रवाई की। जांच के दौरान डॉ. रतन बिलवाल की ओर से दलाल अब्दुल कादिर के माध्यम से 30 हजार रुपए रिश्वत लेने पर सहमति जताई गई। डॉक्टर ऑफिस छोड़कर हुए फरार ट्रैप कार्रवाई के दौरान अब्दुल कादिर ने 30 हजार रुपए गिनकर प्राप्त किए। हालांकि कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी अब्दुल ने रिश्वत की राशि कार्यालय में रख दी और मौके से भागने का प्रयास किया। एसीबी ने उसका पीछा कर उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं, डॉ. रतन बिलवाल कार्रवाई की सूचना मिलते ही कार्यालय छोड़कर फरार हो गए। एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरवीजन में आरोपी दलाल से पूछताछ की जा रही है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे जांच जारी है।

स्कूल लेक्चरर्स के प्रमोशन पर हाईकोर्ट का फैसला:रद्द की कॉमन सीनियरिटी लिस्ट, कहा- 4 महीने में पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाए

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूल लेक्चरर्स से वाइस प्रिंसिपल पद पर होने वाली पदोन्नति के मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से जारी कॉमन सीनियरिटी लिस्ट को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि साल 2015 की भर्ती प्रक्रिया से चयनित सभी व्याख्याताओं की नई कॉमन सीनियरिटी लिस्ट समान आधार पर तैयार की जाए और उसी के आधार पर चार महीने के भीतर वाइस प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाए। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने आदेश में कहा- साल 2015 की एक ही चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त सभी व्याख्याताओं को समान चयन वर्ष का लाभ मिलना चाहिए। राज्य सरकार को निर्देश दिया कि साल 2018 की भर्ती में अपनाए गए सिद्धांतों के अनुरूप नई कॉमन सीनियरिटी सूची तैयार कर राजस्थान शिक्षा सेवा नियम, 2021 के तहत पदोन्नति की कार्रवाई पूरी की जाए। प्रक्रिया में कोई प्रशासनिक या कानूनी बाधा आती है, तो सरकार आवश्यक आदेश या अधिसूचना जारी कर उसका समाधान करे। समानता के अधिकार का उल्लंघन: अधिवक्ताओं की दलील याचिकाकर्ताओं के सीनियर वकील मनोज भंडारी, डॉ. विकास बालिया, अध हनुमान सिंह चौधरी और विवेक श्रीमाली सहित अन्य वकीलों ने दलील दी कि साल 2015 की एक ही भर्ती प्रक्रिया से चयनित व्याख्याताओं के लिए अलग-अलग वरिष्ठता मानदंड अपनाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा- समान चयन प्रक्रिया से नियुक्त सभी अभ्यर्थियों की एक ही कॉमन वरिष्ठता सूची बनाई जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि त्रुटिपूर्ण वरिष्ठता सूची के आधार पर की गई पदोन्नतियां अनेक वरिष्ठ एवं पात्र व्याख्याताओं के वैधानिक अधिकारों को प्रभावित करेंगी। इसलिए पहले विधिसम्मत और समान सिद्धांतों पर आधारित नई वरिष्ठता सूची तैयार करना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने दिए नई सूची बनाने के निर्देश दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विवादित कॉमन वरिष्ठता सूची को रद्द करते हुए राज्य सरकार को चार महीने के भीतर नई सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि इसी नई सूची के आधार पर उपप्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाए।

गौशालाओं में पेयजल संकट पर हाईकोर्ट सख्त:कहा- बजट घोषणा के बावजूद हजारों गौशालाएं पानी से वंचित रहना प्रशासन की गंभीर विफलता

राजस्थान हाईकोर्ट ने गौशालाओं में पेयजल संकट पर गहरी चिंता जताते हुए इसे प्रशासन की गंभीर विफलता माना है। हाईकोर्ट ने कहा-साल 2023-24 के बजट में ट्यूबवेल स्थापना की घोषणा के बावजूद हजारों गौशालाएं आज भी बुनियादी पेयजल सुविधा से वंचित हैं। ‘गौ ग्राम सेवा संघ’ की अवमानना याचिका पर जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि 21 जुलाई तक एक विस्तृत टाइम-बाउंड शेड्यूल प्रस्तुत किया जाए, जिसके अनुसार 1 अक्टूबर तक हर हाल में कार्य शुरू किया जा सके। इसके साथ ही अदालत ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में भूजल उपलब्ध नहीं है, वहां वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था पर विचार किया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि मानसून तक सभी गौशालाओं में अस्थायी पेयजल व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रखी जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 जुलाई 2026 को होगी।
गौशालाओं का हाल वकील मोती सिंह राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए बताया- राजस्थान में कुल 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें से 1,641 गौशालाओं में ट्यूबवेल उपलब्ध हैं, जबकि 2,220 गौशालाओं में अब भी पेयजल के लिए ट्यूबवेल की जरूरत है। इनमें से भी 740 गौशालाओं में तत्काल स्थायी पेयजल व्यवस्था करने की आवश्यकता है। बेंच ने क्या कहा खंडपीठ ने कहा – साल 2022 से लगातार आदेश दिए जाने के बावजूद धरातल पर उम्मीद के अनुसार प्रगति (प्रोग्रेस) नहीं दिखी। सरकार की ओर से अस्थायी जलापूर्ति के दावे किए गए हैं, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल अस्थायी राहत देना नहीं, बल्कि सभी जरूरतमंद गौशालाओं के लिए स्थायी पेयजल ढांचा विकसित कराना है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को तीन चरणों में तैयार कार्ययोजना की जानकारी दी। इसके तहत सरकारी भूमि पर स्थित 387, निजी भूमि पर संचालित 234 तथा दान या किराए की भूमि पर स्थित 323 गौशालाओं में क्रमवार पेयजल अवसंरचना विकसित की जाएगी। अधिकारियों ने वित्त विभाग से बजट स्वीकृति लेकर शीघ्र कार्य शुरू करने का भरोसा दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि चार वर्षों से काम शुरू नहीं होना चिंताजनक है और प्रथम दृष्टया यह अवमानना का मामला बनता है। हालांकि, अधिकारियों के आश्वासन को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल अवमानना की कार्रवाई स्थगित रखी है। ये खामियां बनीं हाईकोर्ट की सख्ती की वजह साल 2022 के विस्तृत आदेश के बाद भी सरकार ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया। दूसरी तरफ, सरकार हर साल शराब (लिकर) और स्टांप ड्यूटी पर ‘गौ सेवा’ के नाम पर करीब 3 हजार करोड़ रुपए का सरचार्ज जमा कर रही है। लेकिन इस राशि का उपयोग सरकार के अन्य खर्चों में किया जाने लगा। यानी गायों के नाम पर आने वाला पैसा उनकी सुविधाओं पर खर्च नहीं हो रहा है। साल 2022 में ‘गौ ग्राम सेवा संघ’ ने इन सभी गौशालाओं में गायों के पीने के पानी और अन्य सुविधाओं के लिए प्रयास शुरू किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने गायों की इस गंभीर समस्या और संवेदना को समझा।

जजेज ने जांची लग्जरी बसें, 6बसें सीज, 16 के चालान:बस अग्निकांड की घटनाओं के बाद रालसा चला रहा अभियान

प्रदेश में बस अग्निकांड की बढ़ती घटनाओं के बाद राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) ने प्रदेश में लग्जरी बसों की चैकिंग का एक महीने का अभियान चला रखा है। इसमें जयपुर सहित 7 प्रमुख शहरों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव (जज) लंबी दूरी की लग्जरी बसों में सुरक्षा मानकों की जांच कर रहे हैं। जयपुर में शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महानगर प्रथम और द्वितीय के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्र में लग्जरी बसों की जांच की। डीएलएसए मेट्रो-1 के सचिव (जज) किशोर कुमार तालेपा ने आगरा रोड पर रिंग रोड के पास लग्जरी बसों की जांच की। इसमें उन्होंने सुरक्षा मानकों की पालना नहीं करने वाली 4 बसों को सीज किया। वहीं 9 बसों के चालान किए। उन्होंने करीब 5 लाख 26 हजार के चालान किए। बसों के निरीक्षण की देखें PHOTOS परमिट और फिटनेस सस्पेंड वहीं, जयपुर विधिक सेवा प्राधिकरण महानगर द्वितीय की सचिव (जज) पल्लवी शर्मा ने भांकरोटा बस स्टैंड पर बसों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में बसों के इमरजेंसी गेट और विंडो के सामने अतिरिक्त सीट-बर्थ लगाई गई थी। सचिव ने मौके पर ही ऐसी 2 बसों को सीज किया और 7 बसों के चालान किए। उन्होंने परिवहन और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर केवल जुर्माना ही नहीं लगाया जाए। ऐसी बसों के परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट तुरंत निलंबित किए जाए और मॉडिफाइड बसों को जब्त किया जाए।