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बीकानेर में कमजोर पड़ा मानसून, बारिश के इंतजार में किसान:अगले कुछ दिन मौसम शुष्क रहने के आसार, तापमान फिर 40 डिग्री तक पहुंच सकता है

मानसून की दस्तक के बाद भी बीकानेर जिले का बड़ा हिस्सा इस बार अच्छी बारिश से वंचित रह गया है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश जरूर हुई, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में लोग अब भी झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बीकानेर समेत पश्चिमी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहेंगी और शुक्रवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 15 जुलाई तक बारिश की संभावना कम
मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 10 जुलाई को पूरे पश्चिमी राजस्थान में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। 11 से 15 जुलाई के बीच बीकानेर और जोधपुर संभाग में केवल कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है, जो खेतों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। विभाग का अनुमान है कि 15 जुलाई के बाद नया सिस्टम बनने पर ही बीकानेर संभाग में अच्छी बारिश के आसार बनेंगे। शुक्रवार को हनुमानगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि भरतपुर समेत कुछ अन्य जिलों में भी बारिश की संभावना है। कम बारिश से किसान चिंतित
बारिश की कमी से किसानों के चेहरे उतरे हुए हैं। जिले में खरीफ की बड़ी खेती गैर-सिंचित क्षेत्रों में होती है, इसलिए बुवाई पर असर पड़ रहा है। बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार, तिल, कपास समेत अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। महाजन, लूणकरनसर और अरजनसर के कुछ गांवों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन कोलायत और बज्जू क्षेत्र में पानी कम गिरा है। नोखा और श्रीडूंगरगढ़ में खेती मुख्य रूप से कृषि कुओं पर निर्भर है, इसलिए वहां फसल की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। फिर बढ़ेगी गर्मी
पिछले कुछ दिनों में तापमान में हल्की गिरावट आई थी, लेकिन अब गर्मी फिर बढ़ने के आसार हैं। 7 जुलाई को अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 8 और 9 जुलाई को बादलों और हल्की बारिश के कारण इसमें कमी आई, लेकिन 10 जुलाई को पारा फिर 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान है।

बस की टक्कर से बाइक सवार 2 युवकों की मौत:टायर चढ़ने से फट गए सिर, चाचा के दाह संस्कार में शामिल होने जा रहे थे

डूंगरपुर में शहर के शास्त्री कॉलोनी रोड पर शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे एक सड़क हादसे में 2 युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। बस की टक्कर के बाद बाइक सवार दोनों युवक सड़क पर गिर ​गए। इसके बाद बस का टायर उनके ऊपर से निकल गया। इससे दोनों के सिर फट गए और मौके पर दोनों की मौत हो गई।
दोनों युवक एक के चाचा के दाह संस्कार में शामिल होने जा रहे थे। हादसे के बाद मौके पर जाम की स्थिति हो गई। पुलिस ने दोनों शवों डूंगरपुर अस्पताल की मॉर्च्युरी में पहुंचाया। मौके पर खून की खून फैला
कोतवाली थाना एसआई भरत मीणा ने बताया कि एक बाइक पर 2 युवक सवार होकर जा रहे थे। बस स्टैंड से तहसील चौराहा रोड पर मेवाड़ फर्नीचर के सामने यह हादसा हुआ। हादसा स्थल पर खून की खून हो गया। चाचा के दाह संस्कार में शामिल होने आए थे
मृतकों में नरेश (29) पुत्र मणिलाल खटीक निवासी खेरवाड़ा और उसके मामा का लड़का गोपाल खटीक (30) पुत्र रामचंद्र खटीक निवासी सलूंबर शामिल है।
ये दोनों ही इन्द्रखेत में नरेश के चाचा लक्ष्मण पुत्र लालजी खटीक की मौत पर दाह संस्कार में शामिल होने आए थे। वे शव को पहनाने कुर्ते पर प्रेस करवाने के लिए दोनों ही बाइक लेकर डूंगरपुर आए थे। दोनों वापस बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान हादसा हुआ। ड्राइवर बस लेकर हुआ फरार
एसआई मीणा ने बताया कि हादसे के बाद ड्राइवर बस लेकर फरार हो गया। जबकि मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। हादसे की वजह से बस स्टैंड से तहसील चौराहा लेन पर जाम लग गया। दूसरी लेन में ट्रैफिक को डायवर्ट किया। घटना की सूचना पर कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एम्बुलेस से दोनों शवों को डूंगरपुर अस्पताल पहुंचाया गया। दोनों शव डूंगरपुर अस्पताल के मॉर्च्युरी में रखवाए गए। नरेश बीएससी करने के बाद पिता के साथ फल-फ्रूट के ठेले पर ही काम करता था। नरेश का 1 बड़ा भाई और 4 बहनें है।

80 साल के व्यापारी का घर में घुसकर मर्डर:बेटे को बेड पर मिली बॉडी, मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था, हाथ-पैर बंधे थे

अलवर शहर में बदमाशों ने घर में घुसकर व्यापारी की हत्या कर दी। उनके हाथ-पैर बांधकर मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। उसके बाद घर से करीब डेढ़-दो लाख रुपए लूटकर फरार हो गए। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम करीब 7 बजे खदाना मोहल्ले की है। खदाना मोहल्ला निवासी व्यापारी दिनेश चंद अग्रवाल (80) घर में अकेले रहते थे। उनका बेटा विकास अग्रवाल मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (MR) है। वह परिवार के साथ स्कीम-4 में रहता है। दिनेश अलवर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल के मामा और पूर्व CMHO डॉ. सुबोध अग्रवाल के चचेरे भाई थे। अजय अग्रवाल साल 2023 में कांग्रेस के टिकट पर अलवर शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। अब वे कांग्रेस में नहीं हैं। एएसपी दीपक कुमार ने बताया- सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। बुजुर्ग का शव बेड (चारपाई) पर पड़ा था। FSL की टीम ने सबूत जुटाए हैं। घर के आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगालकर मामले की हर एंगल से जांच की जाएगी। बेटे के घर नहीं पहुंचे तो किया फोन बेटे विकास की पत्नी रीमा अग्रवाल ने बताया- मेरे ससुर दिनेश चंद अग्रवाल खदाना मोहल्ले वाले मकान में अकेले रहते थे। वे स्वाभिमानी थे और बुढ़ापे में भी अपना सारा काम खुद ही करते थे। वे रोजाना रात का खाना खाने के लिए खदाना मोहल्ले से एक किलोमीटर दूर स्कीम नंबर 4 में हमारे घर आते थे। जब गुरुवार शाम वे खाना खाने नहीं पहुंचे तो करीब 7:30 बजे मेरे पति विकास ने उन्हें फोन किया। उनका लैंडलाइन नंबर बंद आया। इसके बाद मेरे पति खदाना मोहल्ले वाले घर पहुंचे तो पिता कमरे में चारपाई पर मृत पड़े मिले। बदमाशों ने उनके हाथ, पैर और मुंह को कपड़ों से कसकर बांध रखा था, ताकि वे चिल्ला नहीं सकें। घर की अलमारियां टूटी हुई थीं और सारा सामान बिखरा पड़ा था। हमेशा अपने पास एक से दो लाख कैश रखते थे घटना की सूचना मिलते ही नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन और दिनेश के भांजे अजय अग्रवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत अलवर एसपी को मामले की जानकारी दी। अजय अग्रवाल ने बताया- मेरे मामा बेहद स्वाभिमानी व्यक्ति थे। बुढ़ापे में भी वे बैंक से नए नोट लाकर जरूरतमंदों को देने का छोटा-मोटा काम करते थे। उनके पास हमेशा लाख-दो लाख रुपए कैश रहता था। ऐसा लगता है कि किसी नजदीकी या बदमाश को इस कैश की भनक लग गई थी। इसी वजह से बदमाश रेकी कर घर में घुसे और उनकी हत्या कर दी। घर से डेढ़ लाख रुपए गायब बेटे विकास अग्रवाल ने बताया कि बुधवार रात 10 बजे मैं पिता को राजी-खुशी घर छोड़कर गया था। पिता दोपहर का खाना खदाना मोहल्ले के मकान में खुद ही बनाकर खा लेते थे। रात का खाना स्कीम-4 में मेरे घर आकर ही खाते थे। गुरुवार को नहीं आए तब उनको फोन किया। उनके फोन नंबर पर रिंग नहीं गई। इसके बाद खदाना मोहल्ले में आकर देखा तो मकान में अंदर से लॉक लगा हुआ था। जो मेन गेट है, उसमें एक छेद भी है। मैंने दूसरी चाबी से छेद में हाथ डालकर गेट खोला था। घर से करीब डेढ़-दो लाख रुपए गायब हैं। विकास ने बताया- पिता अपना खर्च निकालने के लिए नए नोटों की फ्रेश गड्डियां और खुले रुपए देने का काम करते थे।

गंडासी से भतीजे ने ताऊ की हत्या की:गाडरवाड़ा गांव में पारिवारिक विवाद में मर्डर, पुलिस जांच में जुटी

झालावाड़ जिले के सारोला थाना क्षेत्र के गाडरवाड़ा गांव में एक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है। यहां 65 वर्षीय जगन्नाथ पुत्र कन्हैयालाल पर उनके छोटे भाई के बेटे ने गंडासी से हमला कर दिया।
हमले में गंभीर रूप से घायल जगन्नाथ को परिजन तुरंत अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना अस्पताल चौकी से कंट्रोल रूम को दी गई, जिसके बाद सारोला थाना पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस ने शव को अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया और आगे की कार्रवाई शुरू की।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हमला पारिवारिक विवाद के चलते हुआ बताया जा रहा है। हालांकि, झगड़े की वास्तविक वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

मां की हत्या-कराने वाली बोली-नहीं चाहती थी भाई चोटिल हो:राइट साइड में चलती कार ने लेफ्ट में जाकर टक्कर मारी, इसी से हुआ शक

जयपुर के प्रताप नगर में प्रॉपर्टी और सरकारी नौकरी के लिए बेटी ने मां की हत्या करवा दी। आरोपी बेटी आयुषी शर्मा (23) ने पुलिस पूछताछ में बताया कि मां नीरज शर्मा (45) और उसका विवाद एक साल पहले पिता विजय कुमार शर्मा की मौत होने के बाद से शुरू हो गया था। वह चाहती थी कि उसे पिता की जगह कोर्ट में अनुकंपा नौकरी मिल जाए। लेकिन मां मानसिक बीमार बेटे के लिए खुद सरकारी नौकरी लग गई। इसे लेकर दोनों के बीच कई दिनों तक बहुत झगड़ा हुआ था। इसके बाद आयुषी टोंक रोड स्थित दूसरे घर में ताऊ के बेटे बलराम के साथ रहने लगी। वहीं दोनों ने मिलकर नीरज शर्मा की हत्या का प्लान बनाया। ऐसे हुआ शक : राइट साइड में चलती कार ने लेफ्ट साइड में जाकर टक्कर मारी एसीपी हरिशंकर शर्मा ने बताया कि पुलिस ने जब मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का एनालिसिस किया तो कार 120 किमी प्रति घंटा की स्पीड से चलती हुई दिखी। स्थानीय लोगों के बयान लिए तो उन्होंने भी बताया कि कार बहुत तेज चल रही थी। इसके बाद क्राइम सीन का मौका नक्शा बनाया गया तो यह दुर्घटना नहीं लग रही थी। राइट साइड में कार चलाने के लिए पूरी जगह थी। सामने से कोई व्हीकल भी नहीं आ रहा था। ऐसे में कार लेफ्ट साइड में जाकर महिला को कुचल कर फिर राइट साइड में आकर निकल जाती है, ये बात खटकी। जब आसपास के सीसीटीवी फुटेज चेक किए तो कार में बैठे हुए युवक और सड़क पर खड़े कुछ युवक लगातार फोन पर बात कर रहे थे। नीरज के बेटे को ट्यूशन छोड़ कर आने के बाद आरोपियों को सूचना दी गई। इसके बाद आरोपी आए और नीरज की हत्या कर फरार हो गए। हमारी टीम ने घटना के बाद एक-एक पहलू पर काम किया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी बलराम अभी फरार है। उसकी तलाश की जा रही है। आयुषी बोली- नहीं चाहती थी भाई को कुछ हो पुलिस पूछताछ में आयुषी ने बताया कि मां और उसके बीच कई बार हाथापाई भी हुई। वह अपनी मां से नफरत करने लगी थी। घर छोड़कर टोंक रोड पर कल्याण नगर में अपने दूसरे घर में जाकर रहने लगी। इसी दौरान उसके ताऊ मोहन शर्मा का बेटा बलराम भी उसके साथ रहने लगा। वहां दोनों रोज इसी टॉपिक पर बात करते। दोनों ने मिलकर मां (नीरज शर्मा) की हत्या का प्लान बनाया। आयुषी अपनी मां को दर्दनाक मौत देना चाहती थी। बलराम ने कहा था कि हत्या के लिए बदमाशों का इंतजाम करना होगा। आयुषी राजी हो गई, लेकिन उसने बलराम से कहा था कि मां छोटे भाई के बिना घर से नहीं निकलती है। हत्या के दौरान भी भाई अगर साथ में होगा तो उसे चोट नहीं लगनी चाहिए। बदमाशों ने रेकी कर वह समय चुना, जब नीरज शर्मा बेटे को ट्यूशन छोड़ कर घर लौटती थी। LLB फाइनल ईयर की स्टूडेंट होने के कारण आयुषी ने बनाया प्लान बलराम ने आयुषी को बताया कि वह हत्या करवा देगा, लेकिन उसे इसके बदले में भरतपुर में हाईवे वाली जमीन चाहिए। नौकरी और जयपुर की जमीन उसी के पास रहेगी। बलराम ने अपने पिता मोहन को भी इस बारे में बताया। मोहन भी हाईवे की जमीन हथियाने के लिए बेटे बलराम के साथ हो गया। बलराम ने गांव में रहने वाले खुद के दोस्त हेमंत से 7 लाख रुपए में मर्डर की डील कर ली। हेमंत ने खुद के रिश्तेदार आकाश के साथ मिलकर हत्या करने की सुपारी ली। पुलिस पूछताछ में आयुषी ने बताया कि वह निजी कॉलेज से एलएलबी कर रही है। उसका यह फाइनल ईयर है। हत्याकांड से पहले उसने बलराम के साथ मिलकर पूरी प्लानिंग की। मां की हत्या करने वाली कार भरतपुर से रेंट पर ली जाएगी। कार को जयपुर के लड़के की आईडी से उठाया जाए। हत्या के बाद कार को कहां पार्क करेंगे… ये सब पहले से तय था। पुलिस एक्सीडेंट के एंगल पर काम करेगी। इस दौरान जयपुर का युवक पकड़ा जाएगा तो उसकी जमानत कैसे होगी…इसकी भी प्लानिंग की थी। नीरज शर्मा को हो गई थी हत्या की आशंका पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने करीब तीन माह पहले भी नीरज की हत्या करने का प्रयास किया था। उस दौरान आकाश और अरविंद ने भरतपुर से थार किराए पर भी ली थी, लेकिन वह विफल हो गए थे। इसके बाद नीरज शर्मा ने परिवार के सामने खुद की हत्या की आशंका भी जताई थी। हालांकि परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और उसे सतर्क रहने के लिए कहा। 3 जुलाई को प्रताप नगर में हुई इस सुपारी किलिंग में पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। … इस मर्डर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… सरकारी नौकरी-प्रॉपर्टी के लिए बेटी ने करवाई मां की हत्या,VIDEO:ताऊ और चचेरे भाई के साथ प्लानिंग की, तेज रफ्तार गाड़ी से कुचलवा दिया; 7 गिरफ्तार जयपुर- बेटी ने पहले टोना-टोटका करवाया, फिर मां का मर्डर,VIDEO:घर में काली गुड़िया में आग लगाई, तंत्र-मंत्र कर नारियल रखा, फिर जलाया

चेपॉक स्टेडियम में होगा बिग बैश का ओपनिंग मैच:12 दिसंबर को खेला जाएगा मैच, PM मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में ऐलान किया

चेन्नई का एम.ए. चिदंबरम (चेपॉक) स्टेडियम ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग (BBL-16) के ओपनिंग मैच की मेजबानी करेगा। यह पहला मौका है, जब भारत किसी विदेशी क्रिकेट लीग का मैच होस्ट करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे दिन यह ऐलान किया है। PM मोदी शुक्रवार 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पहुंचे। इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ, पूर्व महिला क्रिकेटर लीसा स्टाल्कर भी मौजूद रहे। मोदी के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 2026-27 सीजन का शेड्यूल जारी किया। इसके अनुसार BBL-16 का ओपनिंग मैच 12 दिसंबर को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में मेलबर्न रेनेगेड्स और मौजूदा चैंपियन पर्थ स्कॉर्चर्स के बीच होगा। रेनेगेड्स इस मैच में होस्ट टीम होगी। यह मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 2:40 बजे शुरू होगा। भारत पहली बार विदेशी क्रिकेट लीग का मैच कराएगा इसके अलावा, बिग बैश लीग के इतिहास में पहली बार कोई मैच ऑस्ट्रेलिया के बाहर होगा। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इसे दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बाजार भारत में अपनी पहुंच बढ़ाने और लीग को वैश्विक पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। ऑस्ट्रेलिया में इसका सीधा प्रसारण चैनल सेवन, 7प्लस, कायो स्पोर्ट्स और फॉक्स क्रिकेट पर होगा, जबकि भारत में जियोस्टार इसका प्रसारण करेगा। 5 अधिकारियों ने चेपॉक का दौरा किया था BBL के भारत में आयोजन की तैयारी कई महीने पहले ही शुरू हो गई थी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने IPL 2026 के दौरान चेपॉक स्टेडियम का दौरा किया था। टीम ने स्टेडियम की सुविधाओं, पिच, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास और तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (TNCA) के अधिकारियों के साथ बैठक कर आयोजन पर चर्चा की गई। इसी दौरे के बाद दिसंबर में BBL का उद्घाटन मुकाबला चेन्नई में कराने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। भारत में पहले भी हो चुके हैं विदेशी स्पोर्ट्स लीग के प्रमोशनल मैच यह पहला मौका नहीं है, जब किसी विदेशी स्पोर्ट्स लीग के मैच भारत में हो रहे हैं। भारतीय मैदान NBA, इंग्लिश प्रीमियर लीग और ला लिगा के मैच होस्ट कर चुके हैं। ——————————————– लीग क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… मेजर लीग बेसबॉल ने सूर्यकुमार को एंबेसडर बनाया मेजर लीग बेसबॉल (MLB) ने भारत में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव को अपना एंबेसडर नियुक्त किया है। टी-20 वर्ल्ड 2026 के विश्व विजेता कप्तान सूर्या भारतीय फैंस को बेसबॉल से जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम और कंटेंट्स का हिस्सा बनेंगे। पढ़ें पूरी खबर

200 साल पुराने जोधपुरी मोजरी को जीआई टैग:अभी सालाना 100 करोड़ का कारोबार; दो साल में दोगुना होने की उम्मीद

जोधपुर की पारंपरिक मोजरी (जूती) को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। इससे मोजरी को दुनियाभर में पहचान मिलेगी। केंद्र सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री ने जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान को जीआई प्रमाण पत्र सौंपा है। दोनों संस्थान ने साल 2021 में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय और विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। जोधपुर के हैंडीक्राफ्ट उद्योग के लिए इसे बड़ी उपलिब्ध माना जा रहा है। करीब 200 साल पुराने जोधपुरी मोजरी उद्योग का घेरलू बाजार वर्तामान में लगभग 100 करोड़ का है। जबकि 10 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हो रहा है। इस इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट का अनुमान है कि जीआई टैग मिलने के बाद निर्यात बढ़ेगा और दो सालों में कारोबार दोगुना सकता है। जोधपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों परिवार मोजरी निर्माण से जुड़े है। 6 और जीआई टैग लाइन में इससे पहले जोधपुर बंधेज क्राफ्ट को जीआई टैग मिल चुका है। इससे उसके कारोबार में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गइ। अब जोधपुरी साफा, मथानिया की लाल मिर्च, वुडन एंड आयरन क्राफ्ट, मारवाड़ का जीरा, जोधपुरी पत्थर की छतरियां और लहरिया के जीआई टैग की प्रक्रिया जारी है। ब्रांडिंग, ई-कॉर्मस और निर्याल के लिए चलेगा अभियान जेएचईए के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश ने बताया कि अब मोजरी उद्योग के विकास के लिए अभियान चलाएंगे। कारीगरों के कौशाल विकास, आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शिनियों में भागीदारी, निर्यात संवर्धन व विपणन सहायता जैसे कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। क्या है जीआई टैग किसी विशेष क्षेत्र की पहचान बन चुके ऐसे प्रोडक्ट, जिनकी क्वालिटी और स्पेशलिटी उस जगह से जुड़ी हो उन्हें जीआई टैग दिया जाता है। इससे नेशनल और इंटरनेशल स्तर पर पहचान मिलने के साथ ही नकली-फर्जी प्रोडक्ट पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को बेहतर कीमत मिलेगी। पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलेगा और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

कैरी के अचार से किसान को सालाना 8-लाख की कमाई:विदेशों तक है डिमांड, अरावली की पहाड़ियों में 4 बीघा में लगाया आम का बाग

बेहतर उत्पादन की उम्मीद में किसान नए-नए बीज और पौधों की वैरायटी की तलाश में रहते हैं। खराब बीज और पौधों से न केवल किसानों की उम्मीदें टूटती हैं, बल्कि नुकसान भी होता है। ऐसे समय में सवाल उठता है कि जब नर्सरियां और रिसर्च सेंटर नहीं थे, तब किसान अच्छी पैदावार कैसे लेते थे? दरअसल, किसान अपनी अगली फसल के लिए खुद ही बीज तैयार करते थे। यही परंपरा आज भी बताती है कि अपनी फसल से तैयार बीज भरोसेमंद और टिकाऊ होता है। अरावली की पहाड़ियों में वर्षों पहले बागवानी का ऐसा ही कल्चर डेवलप हुआ। गुठली (बीज) से तैयार आम के बगीचे ही लोगों के जीवन का आधार हैं। किसान पीढ़ियों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। पुराने बगीचों से मिलने वाली गुठलियों से नए पौधे बना रहे हैं और बगीचों का विस्तार कर रहे हैं। इसलिए सदियों पुराना कैरी का स्वाद आज भी बरकरार है। चार बीघा के एक बगीचे से तैयार कैरी के अचार से किसान को सालाना करीब आठ लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हो रही है। इस अचार की डिमांड विदेशों में भी है। म्हारे देश की खेती में आज बात झुंझुनूं के किसान की… झुंझुनूं जिले में नवलगढ़ के लोहार्गल निवासी किसान दशरथ सिंह शेखावत (55) के पास चार बीघा में आम का बगीचा है। बगीचे में करीब 130 पेड़ हैं। इनमें करीब 30 पेड़ 100 साल पुराने हैं, वहीं करीब 70 पेड़ 50 साल पुराने हैं। पहले वे कैरी (कच्चा आम) मंडी में बेचते थे, लेकिन अच्छा दाम नहीं मिलने पर उन्होंने कैरी का अचार बनाना शुरू कर दिया। पिछले सात साल से उनके बड़े बेटे शिवराज सिंह शेखावत (22) इस कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, छोटा बेटा हंसराज (18) ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। जनवरी में आते हैं फूल, मई-जून में होती है तुड़ाई दशरथ सिंह बताते हैं- आम के पेड़ों पर जनवरी में फूल आना शुरू हो जाते हैं। इसके बाद मार्च में कैरी तैयार होने लगती है। मई, जून और जुलाई, तीन महीने कैरी का सीजन रहता है। मई में कैरी पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाती है। जून की शुरुआत में बगीचों में आम के पेड़ों पर लगी कैरी को पकने से पहले अचार डालने के लिए तोड़ना शुरू कर दिया जाता है। पेड़ से कैरी को तोड़ने के बाद उनकी कटिंग की जाती है। कैरी तोड़ने, उसकी कटिंग, मिक्सिंग से लेकर पैकिंग करने का परिवार के लोग मिलकर करते हैं। एक पेड़ से दो क्विंटल कैरी एक पेड़ से औसतन करीब दो क्विंटल कैरी मिल जाती है। मंडी में कैरी का भाव करीब 100 रुपए प्रति किलो मिलता है, जबकि उसी कैरी का अचार बनाकर करीब 200 रुपए प्रति किलो में बेचा जाता है। इससे आमदनी भी दोगुनी हो जाती है। अब तीन बीघा में तैयार कर रहे नया बगीचा किसान ने बताया- पहले आम के बगीचे के बीच में गेहूं जैसी दूसरी फसल भी उगा लेते थे, लेकिन जैसे-जैसे पेड़ बड़े हुए, उनके नीचे दूसरी फसल होना बंद हो गई। अब उन्होंने तीन बीघा जमीन पर आम का नया बगीचा तैयार करना शुरू किया है। इसमें गुठली से तैयार करीब 60 पौधे लगाए गए हैं। सभी पौधों के बीच 20×20 फीट की दूरी रखी गई है, ताकि पेड़ों को पर्याप्त जगह मिल सके। लोहार्गल की कैरी का स्वाद ही इसकी पहचान शिवराज सिंह शेखावत बताते हैं कि गुठली से तैयार होने वाले लोहार्गल के आम के पौधे इस क्षेत्र के बाहर आसानी से नहीं पनपते। यहां की कैरी में मिलने वाले रेशे, उसका खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद इसे अलग पहचान देते हैं। लोहार्गल में जो अचार की क्वालिटी मिलती है, वो पूरे राजस्थान में कहीं भी नहीं है। यही वजह है कि एक बार यहां का अचार खाने वाले लोग दोबारा खरीदने के लिए लोहार्गल जरूर आते हैं। स्वाद ने अचार को बनाया ब्रांड शिवराज सिंह शेखावत बताते हैं- बेहतरीन स्वाद ने कुछ ही सालों में लोहार्गल के अचार को ब्रांड बना दिया। धीरे-धीरे कई परिवारों ने इसे घर से ही बनाकर बेचना शुरू कर दिया। साल 1990 आते-आते जब बाजार पर मार्केटिंग कंपनियों की नजर पड़ी तो पैकिंग में बिकने लगा। आज कम से कम 10 से 12 कंपनियां रजिस्टर्ड ब्रांड से लोहार्गल का अचार बेच रही हैं। वहीं 300 से ज्यादा लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। नेचुरल तरीके से तैयार होती है कैरी कैरी के छिलके थोड़े मोटे होते हैं, जो स्वाद को और भी बेहतर बनाते हैं। इस कैरी में कोई केमिकल नहीं होता, ऑर्गेनिक तरीके से पकती है। नेचुरल खट्टापन होने के कारण इसमें सिरका नहीं मिलाना पड़ता है। सबसे खास बात ये है कि मसालों और सरसों के तेल का स्वाद कैरी के अंदर तक जालों में समा जाता है। जालेदार होने के कारण हर पीस में एक जैसा स्वाद बनता है। जैसे ही डिब्बे का ढक्कन खुलता है, अचार की खुशबू फैल जाती है। तीर्थयात्री लेकर जाते हैं अचार लोहार्गल तीर्थ स्थल पर राजस्थान ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु आते हैं। शिवराज बताते हैं कि यहां आने वाले कई लोग कम से कम पांच किलो अचार अपने साथ लेकर जाते हैं। कई ग्राहक तो सिर्फ अचार खरीदने के लिए ही आते हैं। फोन पर भी ऑर्डर मिलते हैं और जहां तक संभव होता है, वहां तक अचार की डिलीवरी भी की जाती है। शेखावाटी क्षेत्र सहित जयपुर, हनुमानगढ़, बीकानेर, सीकर, गुरुग्राम, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हरियाणा, मध्य प्रदेश, सूरत सहित कई जगह अचार की डिमांड रहती है। वहीं शेखावाटी से खाड़ी देशों में रहने वाले लोग भी अपने साथ यह अचार जरूर लेकर जाते हैं। इनपुट सहयोग : राजकुमार शर्मा, नवलगढ़ (झुंझुनूं) … खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बागवानी के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ी:अब फलों से हर साल 10 लाख की कमाई, नवाचार के लिए सरकार करेगी सम्मानित खेती के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ दी। दिल्ली से गांव लौटकर 10 बीघा में बागवानी करने की शुरुआत की। खेत में अलग-अलग वैरायटी के पौधों से ट्रायल किया। पूरी खबर पढ़िए

पहचान छिपाकर रह रहे पॉक्सो के आरोपी को किया गिरफ्तार:पुलिस ने 15 हजार का रखा था इनाम, अलग-अलग जगह काटी फरारी

पुलिस ने पॉक्सो के मामले में करीब छह महीने से फरार चल रहे 15 हजार के इनामी और स्थायी वारंटी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था और लगातार पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने बताया कि परिवादी की शिकायत पर बजाज नगर थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपी अपने दर्ज पते से फरार हो गया था। स्थायी वारंट जारी, 15 हजार का इनाम घोषित आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन उसके फरार रहने पर न्यायालय से उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कराया गया। बाद में उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। आरोपी एक स्कूल में स्वीमिंग कोच था और छात्रा से छेड़छाड़ करने का आरोप था। जांच में सामने आया कि आरोपी पिछले करीब छह महीने से अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था। लगातार निगरानी के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले में अग्रिम अनुसंधान कर रही है।

एक ही कमरे में चल रही आठ क्लासेज, टीचर्स-स्टूडेंट मजबूर:ना शौचालय, ना पानी की टंकी, बारिश में टपकती है छत; हेडमास्टर बोले- ठेकेदार की लापरवाही

टपकती छत, दीवारों पर पड़ी दरारें, ऑफिस रूम में ही चलती 8 कक्षाएं 99 नौनिहालों का भविष्य संवार रही है। कारण सिर्फ निर्माण कार्य में देरी। मामला है नागौर जिले डेगाना की राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल का। कक्षा 8 तक के स्कूल में 99 छात्रों का नामांकन, पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरा, इस कमरे में क्लास ही नहीं ऑफिस वर्क भी किया जाता है। पहले देखें स्कूल के PHOTOS डेडलाइन जून तक, अब तक महज 40 फीसदी काम
दरअसल, स्कूल बिल्डिंग जर्जर हो चुकी थी। तीन कमरों का रिनोवेशन करना था। फरवरी में निर्माण एजेंसी को काम सौंपा गया, डेडलाइन जून तक थी। लेकिन, जुलाई तक महज 40 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है। ऐसे में बच्चों को एक ही रूम में क्लास लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बारिश के मौसम में यहां भी छत से पानी टपकता है, ना छात्रों के लिए पानी की टंकी, ना ठीक से बने शौचालय है। ऐसे में छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल हेडमास्टर मुकेश ने बताया- स्कूल में 99 छात्र-छात्राओं का नामांकन है और तीन कमरों की मरम्मत का कार्य ठेकेदार की लापरवाही के कारण धीमी गति से चल रहा है, जिसके चलते आठों कक्षाओं का अध्ययन एक ही ऑफिस रूम में करवाया जा रहा है। इससे शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। डेगाना के उच्च माध्यमिक स्कूल के पीईईओ सुरेश लोमरोड ने बताया- स्कूल के तीन कमरों की मरम्मत का कार्य फरवरी में एक निर्माण एजेंसी को सौंपा गया था। निर्धारित समय सीमा के अनुसार, ये काम जून के अंत तक पूरा होना था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते अब तक केवल लगभग 40 प्रतिशत ही कार्य हो पाया है। पीईईओ जानकी देवी ने बताया- फरवरी में जर्जर अवस्था के चलते स्कूल भवन को मरम्मत के लिए दिया गया था। पिछले चार महीने से इस स्कूल के छात्रों को एक किमी दूर राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल डेगाना में अध्ययन कराया गया था। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से स्कूल का शीघ्र निरीक्षण कर निर्माण कार्य समय पर पूरा कराने, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और छात्रों के लिए सुरक्षित और बेहतर शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि, पीईईओ जानकी देवी ने आश्वासन दिया कि स्कूल का निरीक्षण कर पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।