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इंग्लैंड से टी-20 सीरीज हारने का परफॉर्मेंस रिव्यू करेगा BCCI:गंभीर की कोचिंग, श्रेयस की कप्तानी पर सवाल; भारत एक भी मैच नहीं जीता

इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज हारने के बाद BCCI भारतीय टीम के परफॉर्मेंस का रिव्यू करने जा रहा है। हेड कोच गौतम गंभीर का रोल और टीम की रणनीति भी रिव्यू का हिस्सा होगी। श्रेयस अय्यर की कप्तानी भी समीक्षा के दायरे में आएगी। यह दावा न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से किया है। रिपोर्ट के अनुसार आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार खराब प्रदर्शन के बाद बोर्ड यह समझना चाहता है कि रणनीति और टीम चयन के स्तर पर कहां कमी रही। फिलहाल गंभीर और अय्यर पर कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन उनके कामकाज की समीक्षा तय मानी जा रही है। गंभीर का एग्रीमेंट 2027 तक है। अय्यर हाल ही में कप्तान बनाए गए हैं। भारतीय टीम को आयरलैंड दौरे में 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा था। जबकि, टीम इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की टी-20 सीरीज में 0-3 से पिछड़ रही है। एक मैच नो रिजल्ट रहा था। एक दिन पहले टीम सीरीज के चौथे मैच में 9 विकेट से हार गई थी। 12 साल बाद इंग्लैंड ने भारत को हराया
2014 के बाद पहली बार इंग्लैंड ने भारत को टी-20 सीरीज में हरा दिया। दोनों टीमों के बीच अब तक 10 सीरीज खेली गईं, जिनमें भारत ने 5 और इंग्लैंड ने 4 जीतीं। एक सीरीज ड्रॉ रही थी। अय्यर की कप्तानी में लगातार दूसरी सीरीज गंवाई BCCI ने हाल ही में टी-20 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंपी थी। हालांकि, यह फैसला अब तक टीम के पक्ष में नहीं गया है। भारत लगातार दूसरी टी-20 सीरीज हार चुका है। इंग्लैंड दौरे से पहले टीम को आयरलैंड के खिलाफ 2-0 से सीरीज गंवानी पड़ी थी, जो भारत की आयरलैंड के खिलाफ पहली टी-20 सीरीज हार थी। ब्रिस्टल में 13.5 ओवर में हारे इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टी-20 में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन बनाए। कप्तान अय्यर ने 49 गेंदों पर नाबाद 80 रन बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ा योगदान नहीं दे सके। जवाब में इंग्लैंड ने 159 रन का लक्ष्य 13.5 ओवर में सिर्फ एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। इंग्लैंड ने पहली बार भारत के खिलाफ दो या उससे अधिक मैचों की बाइलेटरल टी-20 सीरीज जीती। पहली बार आयरलैंड से भी हारे इंग्लैंड से पहले आयरलैंड के खिलाफ भी 2 टी-20 मैचों की सीरीज में भारत को हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही भारतीय टीम को 2023 के बाद किसी टी-20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था। 2023 में वेस्टइंडीज ने 3-2 से हराया था। ——————————– भारतीय क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… लॉर्ड्स पर 142 साल में पहला महिला टेस्ट, भारत-इंग्लैंड के बीच आज से मैच क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स पर पहली बार महिला टेस्ट खेला जाएगा। 21-23 जुलाई 1884 को यहां पहला मेंस टेस्ट मैच इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था। इसके 142 साल बाद अब इस मैदान पर महिला टेस्ट मैच होगा, जिसमें भारत और इंग्लैंड की टीमें आमने-सामने होंगी। यह महिला क्रिकेट इतिहास का 153वां टेस्ट मैच होगा। पढ़ें पूरी खबर

घर के बाहर गाड़ी खड़ी करने पर 2 पक्ष भिड़े:लाठी-सरियों और पत्थरों से किया हमला, 4 घायल

श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर में घर के बाहर सब्जियों से भरी गाड़ी खड़ी करने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। देर रात हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में बदल गई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठियों, डंडों, लोहे की सरियों और पत्थरों से हमला कर दिया। घटना में दो महिलाओं सहित चार लोग घायल हो गए। घायलों का सादुलशहर के सरकारी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है, जबकि एक व्यक्ति की हालत गंभीर होने पर उसे श्रीगंगानगर रेफर किया गया है। वार्ड नंबर-17 में देर रात हुआ विवाद घटना सादुलशहर के वार्ड नंबर-17 की है। जानकारी के अनुसार एक पक्ष के लोग घर के बाहर सब्जियों से भरी गाड़ी खड़ी कर रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया। इस बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठियों, डंडों, लोहे की सरियों और पत्थरों से हमला कर दिया। मारपीट में दोनों पक्षों के चार लोग घायल हो गए, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। एक की हालत गंभीर, श्रीगंगानगर रेफर घटना के बाद आसपास के लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने का प्रयास किया और घायलों को 108 एंबुलेंस की मदद से सादुलशहर के सरकारी हॉस्पिटल पहुंचाया। घायलों में से एक व्यक्ति की हालत गंभीर होने पर उसे श्रीगंगानगर रेफर कर दिया गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से समझाइश कर मामला शांत कराया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। हालांकि, दोनों पक्षों में से किसी की ओर से अभी तक मामला दर्ज नहीं कराया गया है।

मौत के 8 दिन बाद ASI का ट्रांसफर:बाड़मेर से किया होम डिस्ट्रिक्ट बालोतरा तबादला; लीवर में हो गया था इंफेक्शन

जोधपुर रेंज आईजी की ओर से जारी 39 ASI की ट्रांसफर लिस्ट में एक ऐसा नाम भी शामिल है, जिनकी 1 जुलाई को इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। बाड़मेर के बाटाडू चौकी इंचार्ज रहे ASI अनोपाराम का निधन जोधपुर के हॉस्पिटल में हुआ था, लेकिन 9 जुलाई को जारी ट्रांसफर आदेश में उनका नाम बालोतरा ट्रांसफर के लिए शामिल किया गया। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 9 जुलाई को जारी हुई ट्रांसफर लिस्ट में शामिल था नाम जोधपुर रेंज आईजी शरत कविराज ने 9 जुलाई को आदेश जारी कर रेंज के अलग-अलग जिलों में 39 ASI के तबादले किए। यह स्थानांतरण संबंधित पुलिसकर्मियों के खुद के प्रार्थना-पत्र के आधार पर किए गए थे। जारी सूची में अनोपाराम पुत्र मोहबतराम का नाम भी शामिल था। उनका ट्रांसफर बाड़मेर से उनके होम डिस्ट्रिक्ट बालोतरा किया गया था। 1 जुलाई को हो चुकी थी मौत ASI अनोपाराम की 1 जुलाई को जोधपुर में इलाज के दौरान मौत हो चुकी थी। ऐसे में मौत के आठ दिन बाद जारी हुई ट्रांसफर सूची में उनका नाम आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसको लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बाटाडू चौकी इंचार्ज पद पर थे तैनात अनोपाराम बालोतरा जिले के सिवाना क्षेत्र के हिंगलाज थाना इलाके के रहने वाले थे। उन्होंने पुलिस सेवा की शुरुआत कांस्टेबल के रूप में की थी। बाद में प्रमोशन के बाद वे हेड कांस्टेबल और फिर ASI बने। उन्होंने बाड़मेर कोतवाली सहित जिले के कई थानों में ड्यूटी की थी। फिलहाल वे बाटाडू चौकी इंचार्ज पद पर तैनात थे। बीपी, शुगर और लीवर की समस्या से थे परेशान पुलिस के अनुसार अनोपाराम बीपी और शुगर की बीमारी से पीड़ित थे। करीब चार-पांच दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बाड़मेर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें जोधपुर रेफर किया गया, जहां मेडिपल्स हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान लीवर से जुड़ी समस्या सामने आई और 1 जुलाई की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव सिवाना लाया गया था। जहां पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। …………………… इससे जुड़ी खबर पढ़े… हॉस्पिटल में चार दिन से भर्ती ASI का निधन:लीवर में हो गया था इंफेक्शन; बाटाडू चौकी इंचार्ज पद पर कार्यरत थे

सरकारी अस्पतालों में 'डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल' लागू करने के निर्देश:प्रिस्क्रिप्शन-जांच डिजीटल होंगे, CMHO बोले- पूरी प्रक्रिया पेपलेस और स्मार्ट होगी

झुंझुनूं में सरकारी अस्पतालों में अब व्यवस्था में बदलाव होने जा रहे है। जिससे अब स्टॉफ और डॉक्टरों को परेशानी नहीं होगी। दरअसल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 31 जुलाई तक सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ‘इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम’ (IHMS) के ‘डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल’ को लागू करने के निर्देश दिए है। इस नई व्यवस्था के बाद मरीजों को न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, बल्कि उनका पूरा उपचार इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध होगा। ​सुरक्षित रहेगा इलाज का रिकॉर्ड अक्सर ऐसा होता है कि मरीज अस्पताल की पुरानी पर्ची और जांच रिपोर्ट खो देते है या फिर साथ लेकर नहीं आते है। जिससे दोबारा इलाज शुरू करते समय पुरानी जानकारियां नहीं मिल पाती। अब डॉक्टरों के साथ-साथ मरीजों का भी इस समस्या का समाधान हो गया है। नई व्यवस्था में प्रत्येक मरीज का आभा (ABHA) लिंक्ड इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) तैयार किया जाएगा। इससे ये फायदा होगा कि मरीज प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में जाता है, तो डॉक्टर कंप्यूटर के जरिए उसका पिछला उपचार और जांच आसानी से देख सकेंगे। ​डॉक्टरों का काम होगा आसान ​चिकित्सा विभाग ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल व्यवस्था के दौरान डॉक्टरों को अतिरिक्त बोझ महसूस न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। डेटा एंट्री के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर, जीएनएम, नर्सिंग स्टाफ और इंटर्न की सेवाएं ली जाएंगी। हालांकि, उपचार का निर्णय, दवाओं का चयन और अंतिम ई-प्रिस्क्रिप्शन की जिम्मेदारी पूरी तरह से संबंधित चिकित्सक की ही होगी। ​प्रत्येक चिकित्सक को लॉगिन आईडी, कंप्यूटर, इंटरनेट और अन्य तकनीकी सुविधाएं विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी। ​अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी ​चिकित्सा विभाग ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों (PMO) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 31 जुलाई तक अपने अधीन आने वाले सभी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में इस मॉड्यूल का 100 प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करें। ​जिले के अधिकारियों ने बताया- स्वास्थ्य संस्थानों में कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट या आईटी उपकरणों की कमी होने पर उनकी तुरंत खरीद की जाएगी। साथ ही, स्टाफ को तकनीकी प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और स्मार्ट होगी डॉ. छोटेलाल गुर्जर, सीएमएचओ ने बताया-​ मरीजों की सुविधा के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल के लागू होने से सरकारी अस्पतालों में इलाज की पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और स्मार्ट हो जाएगी। जिला और ब्लॉक स्तर पर तकनीकी टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं ताकि 31 जुलाई के बाद किसी भी मरीज को डिजिटल रिकॉर्ड में कोई असुविधा न हो।

अब गांवों में श्मशानों तक पहुंचने के रास्ते देगी सरकार:जमीन आरक्षित होगी, अतिक्रमण हटेंगे; राजस्व विभाग ने कलेक्टर्स को दिए आदेश

प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में श्मशानों की जमीनों और उन तक पहुंचने के लिए अब रास्ते बनाए जाएंगे, वहीं श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगी। कई जगह श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने से विवाद होते हैं। सरकार ने इन विवादों को खत्म करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे ग्रामीण सेवा शिविरों में श्मशान की जमीनों को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। साथ ही श्मशानों तक पहुंचने के लिए रास्ते खुलवाए जाएंगे। इसको लेकर राजस्व विभाग ने सभी कलेक्टर्स को चिट्ठी लिखकर श्मशानों की जमीनों का रिकॉर्ड सुधारकर उन तक पहुंचने केच लिए रास्ते बनाने के आदेश दिए हैं। राजस्व विभाग की चिट्ठी के अनुसार प्रदेश के कई गांवों में श्मशान चालू हैं, लेकिन श्मशान की जमीन राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में दर्ज नहीं है। कई जगहों पर श्मशान की जमीन का कानूनी रूप से आरक्षण नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कामों में सामाजिक असुविधा, अतिक्रमण और जमीन विवाद जैसे मामले सामने आते हैं। कलेक्टरों को आदेश, श्मशान तक पहुंचने के रास्ते खुलवाएं श्मशान की जमीनों से जुड़े विवादों को ग्रामीण सेवा शिविरों में सुलझाया जाएगा। जिन श्मशानों की जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में जिक्र नहीं है, उन श्मशानों की जमीन को सरकारी जमाबंदी में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। गांवों में श्मशान की जमीनों का भौतिक सत्यापन करते हुए सीमांकन करना होगा। श्मशानों से अतिक्रमण हटाने होंगे। श्मशान की जमीन का नाप जोख कर सरकारी जमाबंदी में रिकॉर्ड दर्ज करना होगा। राजस्व विभाग ने श्मशानों तक रास्ते खुलवाकर उन्हें पंचायतों के सुपुर्द करने के आदेश दिए हैं। नए श्मशानों के लिए जमीन आवंटित होगी राजस्व विभाग ने कलेक्टरों को गांवों में श्मशानों के लिए जमीन आरक्षित करने को कहा है। जहां श्मशान के लिए जमीन की आवश्यकता है वहां जमीन आरक्षित कर श्मशान के लिए आवंटित की जाएगी। यह काम आगे भी जारी रखने को कहा है। दाह संस्कार को लेकर होते हैं विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशानों तक पहुंचने के रास्ते नहीं होने के कारण कई बार विवाद होते हैं, इन विवादों को टालने के लिए ही श्मशान तक पहुंचने के रास्ते सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने और श्मशानों से अतिक्रमण हटवाने का फैसला किया है। कई जगह श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, इस वजह से विवाद होते हैं।

राममंदिर चढ़ावा चोरी- सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को सुनवाई:दान गिनने वाले 23 कर्मचारियों का इस्तीफा, चढ़ावे में ₹10-20 के नोट बढ़े, 500 के घटे

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच 3 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। याचिकाओं में जांच CBI को सौंपने और SIT के गठन के मांग की गई है। साथ ही, मंदिर में दान के प्रबंधन से जुड़े अलग-अलग विषयों की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की भी मांग की गई है। इधर, मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने गुरुवार को एक साथ इस्तीफा दे दिया। उनका कहना है कि चोरी की घटना के बाद 10-20 रुपए के नोट बढ़ गए हैं, जिससे गिनती में ज्यादा समय लग रहा है। पहले 500 रुपए के नोटों की 70-80 गड्डियां बन जाती थीं, अब बमुश्किल 15 गड्डियां बन रही हैं। पहले काम दो शिफ्ट में होता था, लेकिन अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट कर दी गई है। वेतन वही है और काम के घंटे बढ़ गए हैं। अब बैंक के पास सिर्फ 13 गणना कर्मी बचे हैं। चढ़ावा चोरी से माता सीता का मायका ‘जानकी मंदिर’ भी आहत है। श्रीराम का ससुराल पड़ोसी देश नेपाल के जनकपुर में है। मंदिर के महंत रोशन दास ने दैनिक भास्कर से कहा कि भगवान श्रीराम के किसी मंदिर में ऐसी घटना न कभी देखी, न सुनी। मन व्यथित है, इसलिए सावन में जनकपुर से 5-7 लोग प्रभु श्रीराम के घर अयोध्या जाएंगे, सांत्वना देंगे और दर्शन कर लौट आएंगे। राम मंदिर से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

12% से ज्यादा अल्कोहल वाली दवा बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिलेगी:कफ सिरप और टॉनिक पर असर, मेडिकल स्टोर्स को 3 साल का रिकॉर्ड रखना होगा

केंद्र सरकार ने 12% से ज्यादा अल्कोहल मिक्स दवाओं की खुली बिक्री पर रोक लगा दी है। अब ये दवाएं डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना खरीदी या बेची नहीं जा सकेंगी। दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में यह बदलाव किया है। नए नियम के तहत उन सभी पीने वाली दवाओं को ‘शेड्यूल H1’ कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है। इनमें एथिल अल्कोहल की मात्रा 12% से ज्यादा होती है और जो 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतल में बेची जाती हैं। मेडिकल स्टोर्स के लिए भी खास निर्देश हैं। अब मेडिकल स्टोर्स को इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड एक अलग रजिस्टर में रखना होगा। इस फैसले का आम मरीजों, मेडिकल स्टोर्स और पब्लिक हेल्थ पर क्या असर पड़ेगा? आसान सवाल-जवाब में समझिए… फैसले की वजह और बैकग्राउंड सवाल-1: सरकार को अचानक यह कदम क्यों उठाना पड़ा? जवाब: मार्केट में मिलने वाले कई कफ सिरप और टॉनिक में अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा होती है। बिना रोक-टोक या डॉक्टर की पर्ची के मिलने से कई लोग इनका इस्तेमाल नशे के लिए करने लगे थे। इसी दुरुपयोग को रोकने और दवाओं की बिक्री की सख्ती से निगरानी के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सवाल-2: यह फैसला किस कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है? जवाब: दवाओं के गलत इस्तेमाल की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए सरकार की रेगुलेटरी कमेटियों- ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने इस पर समीक्षा की थी। इन कमेटियों की सिफारिशों के बाद ही सरकार ने कानून में यह संशोधन लागू किया है।
मेडिकल स्टोर्स और मरीजों पर असर सवाल-1: मेडिकल स्टोर चलाने वालों को अब किन नियमों का पालन करना होगा? जवाब: शेड्यूल H1 के तहत आने के बाद अब फार्मेसी या मेडिकल स्टोर्स को ये 3 मुख्य काम करने होंगे… सवाल-2: एक मरीज के तौर पर क्या मेरे लिए यह दवाएं बैन या असुरक्षित हो गई हैं? जवाब: बिल्कुल नहीं। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि ये दवाएं असुरक्षित हैं या इन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह सिर्फ सुरक्षा मानक है। अगर डॉक्टर ने यह दवा लिखी है, तो आपको यह पहले की तरह मेडिकल स्टोर से मिल जाएगी, बस आपको डॉक्टर की पर्ची दिखानी होगी। मेडिकल फैक्ट्स और हेल्थ इंपैक्ट सवाल-1: दवाओं में अल्कोहल का इस्तेमाल क्यों किया जाता है, क्या यह खतरनाक है? जवाब: दवाओं में सीमित मात्रा में एथिल अल्कोहल का इस्तेमाल एक सॉल्वेंट या प्रिजर्वेटिव (दवा को सुरक्षित रखने और घोलने) के रूप में किया जाता है, जो क्लीनिकल तौर पर जरूरी है। यह आमतौर पर हानिकारक नहीं होता। हालांकि, जर्नल ऑफ मेडिकल टॉक्सिकोलॉजी की 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ऐसी दवाओं का बिना डॉक्टरी सलाह के या जरूरत से ज्यादा सेवन किया जाए, तो यह बच्चों, बुजुर्गों और लिवर के मरीजों के लिए गंभीर साइड इफेक्ट्स पैदा कर सकता है। सवाल-2: इस मामले में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की क्या गाइडलाइन है? जवाब: वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) भी हमेशा दवाओं के तर्कसंगत और सीमित इस्तेमाल पर जोर देता है। इसके तहत दवाओं को केवल तभी लिखा और बेचा जाना चाहिए, जब उनकी वाकई में क्लीनिकल जरूरत हो। शेड्यूल H1 और फ्यूचर इंपैक्ट सवाल-1: यह ‘शेड्यूल H1’ क्या है और इसमें कौन सी दवाएं आती हैं? जवाब: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के तहत ‘शेड्यूल H1’ को साल 2013 में पेश किया गया था। इसका मकसद उन दवाओं की सख्त निगरानी करना था, जिनके दुरुपयोग की संभावना ज्यादा होती है। शुरुआत में इसमें थर्ड और फोर्थ जनरेशन की एंटीबायोटिक्स, टीबी की दवाएं और आदत लगाने वाली दवाएं शामिल थीं। अब इस लिस्ट का दायरा बढ़ाया जा रहा है। सवाल-2: इस फैसले से पब्लिक हेल्थ सेक्टर को लंबे समय में क्या फायदा होगा? जवाब: इस कदम से भारत में ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम और मजबूत होगा। दवाओं की ट्रेसेबिलिटी बढ़ेगी यानी यह पता लगाना आसान होगा कि कौन सी दवा कहां और किसे बेची गई। इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। —————– ये खबर भी पढ़ें… 2 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप न दें: केंद्र की एडवाइजरी; MP-राजस्थान में कफ सिरप के सैंपल में जहरीला रसायन नहीं मिला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि दोनों राज्यों से बच्चों की मौत से जुड़े कफ सिरप के सैंपल में किडनी को नुकसान पहुंचाने वाला कोई जहरीला रसायन नहीं मिला है। पूरी खबर पढ़ें…

चित्तौड़गढ़ में गजेंद्र सिंह जोधा बने नए एडिशनल एसपी:दो महीने पहले आए मुकुल शर्मा का हुआ ट्रांसफर; 6 पुलिस इंस्पेक्टर भी जिले में लगाए

चित्तौड़गढ़ जिले की पुलिस व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। राजस्थान सरकार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) स्तर के 49 अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिसका असर चित्तौड़गढ़ जिले पर भी पड़ा है। जिले में मई महीने में ही पदभार संभालने वाले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा का महज दो महीने के अंदर ही तबादला ग्रामीण उदयपुर कर दिया गया है। उनकी जगह प्रतापगढ़ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत गजेंद्र सिंह जोधा को चित्तौड़गढ़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी के साथ उदयपुर रेंज में पुलिस निरीक्षकों के स्तर पर भी बदलाव किया गया है और चित्तौड़गढ़ जिले को छह नए थाना अधिकारी मिल सकते हैं। लगातार हुए इन तबादलों को जिले की पुलिस व्यवस्था में नए सिरे से जिम्मेदारियां तय करने के तौर पर देखा जा रहा है। मुकुल शर्मा उदयपुर रवाना, गजेंद्र सिंह जोधा संभालेंगे जिम्मेदारी संयुक्त शासन सचिव (पुलिस) मनीष गोयल की ओर से जारी तबादला सूची में मुकुल शर्मा को चित्तौड़गढ़ से ग्रामीण उदयपुर भेजा गया है। मुकुल शर्मा मई महीने में ही चित्तौड़गढ़ आए थे और उनका कार्यकाल करीब दो महीने का ही रहा। अब उनकी जगह गजेंद्र सिंह जोधा को लगाया गया है। वर्तमान में जोधा प्रतापगढ़ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वे नागौर जिले के रहने वाले हैं और वर्ष 2011 बैच के अधिकारी हैं। चित्तौड़गढ़ से उनका पुराना जुड़ाव भी रहा है, क्योंकि इससे पहले वे यहां पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में जिले की भौगोलिक स्थिति और पुलिस व्यवस्था से उनकी पहले से अच्छी पहचान मानी जा रही है, जिसका फायदा उनके नए कार्यकाल में देखने को मिल सकता है। छह नए पुलिस निरीक्षक भी पहुंचे, कई थानों में बदलेगी जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तबादले के साथ ही उदयपुर रेंज में पुलिस निरीक्षकों के स्तर पर भी फेरबदल किया गया है। इस संबंध में उदयपुर रेंज के आईजी गौरव श्रीवास्तव ने आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत रूप सिंह जाटव को उदयपुर से चित्तौड़गढ़ भेजा गया है। प्रवीण टांक का तबादला प्रतापगढ़ से चित्तौड़गढ़ किया गया है, जबकि रंजीत सिंह को सलूंबर से चित्तौड़गढ़ लगाया गया है। इसके अलावा पदस्थापन की प्रतीक्षा में चल रहे सुमन कुमार को भी चित्तौड़गढ़ में नियुक्ति मिली है। जयपुर पुलिस आयुक्तालय से रजनीश कुमार को चित्तौड़गढ़ भेजा गया है, वहीं गेहरी लाल का तबादला खेरवाड़ा से चित्तौड़गढ़ किया गया है। इन अधिकारियों की तैनाती के बाद जिले के कई थानों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारियों का नया बंटवारा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन अधिकारियों को अलग-अलग थानों और शाखाओं में पदस्थापित किया जाएगा, जिससे जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली को और मजबूत करने की कोशिश होगी।

ट्रांसफर के लास्ट दिन 1653 प्रिंसिपल बदले:सालों से शहर में जमे कर्मचारियों को गांव भेजा, कई को गृह जिले में मिली पोस्टिंग

ट्रांसफर के आखिरी दिन शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए एक ही आदेश में 1653 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल बदल दिए। कई साल से शहरों में जमे प्रिंसिपलों को गांवों में भेजा गया है, जबकि दूर-दराज के जिलों में काम कर रहे कई प्रिंसिपलों को उनके गृह जिले में पोस्टिंग मिली है। सभी को अगले 10 दिन के भीतर नए स्कूल में जॉइन करना होगा। शुरुआत में विभाग ने करीब 500 प्रिंसिपलों की लिस्ट तैयार की थी, लेकिन अंतिम दो दिन में यह संख्या बढ़ा दी गई। शुक्रवार सुबह 5:49 बजे माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस लिस्ट पर ई-हस्ताक्षर किए। प्रदेश के सभी जिलों में हुए बदलाव
आदेश के तहत प्रदेश के सभी जिलों में प्रिंसिपलों के ट्रांसफर किए गए हैं। खास बात यह रही कि कांग्रेस सरकार के समय शहर से गांव और गांव से शहर गए प्रिंसिपलों को भी बदला गया है। किसी को गृह जिला, किसी को दूर पोस्टिंग
नई लिस्ट में कई प्रिंसिपलों को दूर जिलों से उनके गृह जिले में लाया गया है, जबकि कुछ को गृह जिले से दूर इलाकों में भेजा गया है। पिछले दो साल से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे कई प्रिंसिपलों को राहत मिली है, जबकि कुछ को इस बार भी मनचाही पोस्टिंग नहीं मिल सकी। सर्वे में लगे कर्मचारी अभी नहीं होंगे रिलीव
जिन ग्रेड सेकंड टीचर्स, लेक्चरर्स और प्रिंसिपलों की ड्यूटी ओबीसी सर्वे में लगी है, उन्हें फिलहाल रिलीव नहीं किया जाएगा। जनगणना कार्य में लगे प्रिंसिपलों को संबंधित अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद ही रिलीव किया जाएगा। निदेशालय से स्कूलों में भेजे गए टीचर
लंबे समय से शिक्षा निदेशालयों में अधिकारी के रूप में काम कर रहे 20 से ज्यादा टीचर्स को वापस स्कूलों में भेजा गया है। कांग्रेस सरकार के समय निदेशालय में लगाए गए पीटीआई को भी अब स्कूलों में पोस्टिंग दी गई है।

एएसपी रैंक के 49 आरपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर:नीरज पाठक होंगे जयपुर ग्रामीण के नए ASP ; समीर दुबे को मुख्यमंत्री सतर्कता में लगाया

राजस्थान सरकार के गृह (ग्रुप-1) विभाग ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) एवं समकक्ष स्तर के अधिकारियों के बड़े स्तर पर ट्रांसफर और पदस्थापन आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार- 49 अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर एवं पदस्थापन किया गया है। आदेश संयुक्त शासन सचिव मनीष गोयल द्वारा जारी किए गए हैं। इस फेरबदल में जयपुर पुलिस कमिश्नरेट, जोधपुर कमिश्नरेट, पुलिस मुख्यालय, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), सीआईडी-सीबी, साइबर क्राइम, राजस्थान पुलिस अकादमी, महिला अपराध अनुसंधान सेल, अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण शाखाओं में नई नियुक्तियां की गई हैं। ASP समीर को नई जिम्मेदारी एडिशनल SP समीर दुबे को मुख्यमंत्री सतर्कता में लगाया गया है। वह पहले जयपुर में ट्रैफ‍िक में थे। जयपुर ग्रामीण से रजनीश पूनिया को एडिशनल DCP वेस्ट लगाया गया है। पूनिया काफी अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। वेस्ट में अपराध नियंत्रण के लिए उन्हें लगाया गया है। जयपुर ग्रामीण के नए ASP नीरज पाठक नीरज पाठक एडिशनल DCP नॉर्थ को एडिशनल SP जयपुर ग्रामीण लगाया गया है। उन्होंने एडिशनल डीसीपी नार्थ रहते हुए कई मुख्य वारदातों का खुलासा किया है। आलोक सिंगल को एडिशनल DCP नॉर्थ लगाया गया है, उन्होंने जयपुर के साउथ और ईस्ट में सेवाएं दी है, उन्हें जयपुर का अच्छा खासा अनुभव है। लॉ एंड ऑर्डर और अपराध में विशेष पकड़ मानी जाती है, इसलिए उन्हें संवेदनशील इलाके में नॉर्थ में लगाया गया है। मनराज मीणा को एडिशनल एसपी डीसीपी महिला अपराध अनुसंधान सेल पश्चिम, जयपुर कमिश्नरेट की जिम्मेदारी मिली है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के रोकथाम और त्वरित कानूनी कार्रवाई करेंगे। अलोक कुमार सिंघल को अतिरिक्त उपायुक्त जयपुर कमिश्नरेट के पद पर लगाया नीलकमल मीना को एएसपी, लीव रिजर्व, सिविल राइट्स, पुलिस मुख्यालय, जयपुर, हिम्मत सिंह को एएसपी, बौंली (सवाई माधोपुर), रोशनलाल पटेल को डिप्टी कमांडेंट, महाराणा प्रताप बटालियन, आरएसी, प्रतापगढ़, डॉ. प्रेरणा शेखावत को एएसपी, वैर (भरतपुर), सुरेश कुमार को एएसपी, उच्चैन (भरतपुर), ओमप्रकाश मीना को एएसपी, एटीएस, मुख्यालय जयपुर, माधुरी वर्मा को कमांडेंट, पीटीएस, खैरवाड़ा (उदयपुर), समीर कुमार दुबे को एएसपी, सीएम विजिलेंस, रजनीश पुनिया को अतिरिक्त उपायुक्त (यातायात पश्चिम) जयपुर कमिश्नरेट, नीरज पाठक को एएसपी (मुख्यालय), जयपुर ग्रामीण और अलोक कुमार सिंघल को अतिरिक्त उपायुक्त (उत्तर-प्रथम) जयपुर कमिश्नरेट के पद पर लगाया गया है। जयपुर में हुए प्रमुख बदलाव जोधपुर कमिश्नरेट में बदलाव अन्य प्रमुख तबादले इनका भी हुआ ट्रांसफर इनको मिली नई जिम्मेदारी दो पुराने तबादला आदेश किए निरस्त गृह विभाग ने 7 मई 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश में दो अधिकारियों के तबादले भी निरस्त कर दिए हैं। इनमें चांदमल का विभागीय जांच प्रकोष्ठ, पुलिस मुख्यालय, जयपुर में किया गया स्थानांतरण निरस्त किया गया। राजेश कुमार गुप्ता का जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में पूर्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद पर किया गया स्थानांतरण भी निरस्त कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी स्थानांतरण एवं पदस्थापन तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। देखिए ट्रांसफर लिस्ट