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राजीव गांधी उद्यान में गुपचुप तरीके से शुरू किया काम:यूडीए ही तोड़ रहा नियम, फतहसागर के नो कंस्ट्रक्शन जोन में कर रहा निर्माण

शहर की लाइफलाइन फतहसागर झील को कंक्रीट से बचाने के लिए बने सख्त नियमों की धज्जियां खुद उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) उड़ा रहा है। ऐतिहासिक गुलाबबाग में मसाला चौक और पार्किंग निर्माण पर हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद सबक नहीं लिया जा रहा है। अब फतहसागर से सटे संवेदनशील व पूरी तरह निर्माण निषेध घोषित जी-1 (ग्रीन जोन-1) क्षेत्र के राजीव गांधी उद्यान में गुपचुप तरीके से पक्का निर्माण शुरू कर दिया गया है। मौके पर जेसीबी मशीनों से गहरी खुदाई कर ईंट, सीमेंट, रेत, सरिए और पत्थरों की पक्की दीवारें व कंक्रीट के व्यावसायिक स्ट्रक्चर (दुकानों के फाउंडेशन) खड़े किए जा रहे हैं। दरअसल, यूडीए यहां जयपुर की तर्ज पर एक स्थायी व्यावसायिक मसाला चौक और नाइट बाजार (फूड कोर्ट) विकसित करने की तैयारी में है। इस कदम को लेकर पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों में भारी आक्रोश है। गुलाबबाग मामले में हाईकोर्ट के पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन और हेरिटेज संरक्षण के ऐतिहासिक फैसले को ताक पर रखकर किया जा रहा यह कृत्य सीधे तौर पर अदालती अवमानना को न्योता दे रहा है। यदि समय रहते रोक नहीं लगी, तो एक बार फिर टैक्स पेयर्स के लाखों रुपयों का पानी होना तय है और नाइट बाजार की अवधारणा पर भी ग्रहण लग जाएगा। हालांकि, टूरिस्ट सिटी के लिए नाइट बाजार आवश्यक है, लेकिन इसके लिए उद्यान में स्थायी कंक्रीट ढांचा खड़ा करने के बजाय अस्थायी निर्माण से भी मसाला चौक बनाया जा सकता है। फिलहाल, इस मामले पर यूडीए अधिकारियों और इंजीनियर्स ने चुप्पी साध रखी है। मास्टर प्लान : फतहसागर से सटा पूरा क्षेत्र ग्रीन जोन घोषित यूडीए के अपने ही मास्टर प्लान 2031 के अनुसार फतहसागर से सटा यह पूरा क्षेत्र जी-1 (ग्रीन जोन-1) यानी नो-कंस्ट्रक्शन जोन घोषित है। इस श्रेणी की जमीन पर केवल सघन पौधरोपण, पर्यावरण-अनुकूल नर्सरी और प्राकृतिक बागवानी की ही कानूनी अनुमति है। यहां ईंट, सीमेंट या कंक्रीट का कोई भी नया ढांचा खड़ा करना संगीन गैर-कानूनी कृत्य माना जाता है। यूडीए अक्सर आम जनता को जी-1 भूमि पर फार्महाउस या कोई भी पक्का निर्माण करने पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की सख्त कार्रवाई की चेतावनी देता है। लेकिन जब अपनी ही योजनाओं की बात आई, तो प्राधिकरण ने खुद के नियमों को ताक पर रख दिया। गुलाबबाग : करोड़ों का नुकसान और कोर्ट की फटकार भी भूले नगर निगम ने जयपुर के मसाला चौक की तर्ज पर ऐतिहासिक गुलाबबाग (सज्जन निवास बाग) में भी फूड कोर्ट और गवर्नमेंट प्रेस के सामने कंक्रीट पार्किंग का निर्माण शुरू कराया था। तब पर्यावरण प्रेमियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्माण पर तुरंत रोक लगा दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक उद्यान और ऐतिहासिक स्थल नागरिकों को खुली हवा देने के लिए हैं, न कि व्यावसायिक गतिविधियों और कंक्रीट चौपाटी संस्कृति के लिए। गुलाबबाग में हुए करोड़ों के नुकसान के बाद भी यूडीए बिल्कुल वैसी ही गलती दोहरा रहा है, जिससे यह नया निर्माण भी अदालती रोक की कगार पर खड़ा है। विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी है, लेकिन विकास की आड़ में पर्यावरण को निगल जाना समझदारी नहीं है। नगर निगम ने गुलाबबाग में कंक्रीट का जाल बिछाने की जिद की थी, जिसका हश्र कोर्ट के स्टे के रूप में सामने आया। अब वही जिद यूडीए फतहसागर के किनारे दोहरा रहा है। प्रशासन को समझना होगा कि उदयपुर अपनी प्राकृतिक झीलों और हरियाली की वजह से ही दुनिया भर के पर्यटकों को खींचता है, न कि कंक्रीट के बाजारों की वजह से। यदि मसाला चौक बनाना ही है, तो राजीव गांधी उद्यान में अस्थायी निर्माण किया जा सकता है या फिर इसे शहर के अन्य व्यावसायिक स्थलों पर ले जाया जा सकता है, लेकिन ग्रीन लंग्स को कुर्बान करना कतई उचित नहीं है।

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