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राजस्थान में दिव्यांग प्रमाण-पत्रों के सत्यापन अब नए सिस्टम से:7 संभागों में बनेंगे मेडिकल बोर्ड; सरकारी भर्तियों में UDID कार्ड अनिवार्य, अपील की भी सुविधा

राजस्थान सरकार ने दिव्यांग प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के सभी सात संभागीय मुख्यालयों पर विशेष दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड और अपीलीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। साथ ही सरकारी भर्तियों में दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए UDID (यूनीक डिसेबिलिटी आइडेंटिफिकेशन) कार्ड अनिवार्य होगा। शासन सचिव अर्चना सिंह की ओर से जारी आदेश राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ द्वारा 30 अप्रैल 2026 को एसबी सिविल रिट पिटीशन अमन बनाम राज्य और अन्य में दिए गए अंतरिम आदेश की पालना में जारी किए गए हैं। सरकार दिव्यांग प्रमाण-पत्रों में सामने आ रही विसंगतियों को दूर कर भर्ती और सेवा संबंधी मामलों में पारदर्शिता बनाना चाहती है। सात संभागीय मुख्यालयों पर होंगे सत्यापन बोर्ड नए आदेश के बाद अब जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर के मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड गठित किए जाएंगे। बोर्ड का गठन संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य या मेडिकल अधीक्षक करेंगे। इन बोर्डों में सहायक प्रोफेसर या उससे वरिष्ठ स्तर के विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा। साथ ही मेडिकल कॉलेजों को केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक प्रकार की दिव्यांगता का वैज्ञानिक और सटीक मूल्यांकन किया जा सके। हर तरह की दिव्यांगता के विशेषज्ञ रहेंगे उपलब्ध सरकार ने निर्देश दिए कि संबंधित मेडिकल कॉलेजों में सभी प्रकार की दिव्यांगताओं की जांच के लिए आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इससे अभ्यर्थियों को अलग-अलग संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एक ही स्थान पर परीक्षण संभव होगा। सरकारी भर्तियों में UDID कार्ड होगा जरूरी राज्य सरकार ने सभी भर्ती एजेंसियों और नियुक्तिकर्ता विभागों को निर्देश दिए हैं कि आवेदन के समय दिव्यांग श्रेणी के सभी अभ्यर्थियों के पास वैध UDID कार्ड होना अनिवार्य होगा। इसके साथ अब प्रत्येक भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना होगा कि दस्तावेज सत्यापन के लिए चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों की दिव्यांगता का अंतिम सत्यापन संभागीय मुख्यालय पर गठित बोर्ड द्वारा किया जाएगा। पुराने प्रमाण-पत्र होने पर भी होगी दोबारा जांच सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी अभ्यर्थी के पास पहले से दिव्यांगता प्रमाण-पत्र मौजूद है, तब भी सरकारी भर्ती में उसकी पात्रता का निर्धारण वर्तमान में लागू मेडिकल मानकों के अनुसार गठित सत्यापन बोर्ड की जांच के बाद जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर ही किया जाएगा। इस फैसले के बाद अब अलग-अलग समय पर जारी प्रमाण-पत्रों में आने वाली विसंगतियों को समाप्त करना और सभी अभ्यर्थियों के लिए समान मानक लागू करना है। कार्यरत कर्मचारियों को राहत आदेश में पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। अगर पुनः सत्यापन के दौरान पुराने और नए दिव्यांगता प्रतिशत में अंतर पाया जाता है, तो उनकी पात्रता का निर्धारण उस समय लागू मेडिकल मानकों के आधार पर किया जाएगा, जब उनका सरकारी सेवा में चयन हुआ था। अगर कोई कर्मचारी पुनः सत्यापन से संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे भी अपीलीय मेडिकल बोर्ड के समक्ष अपील करने का अधिकार दिया गया है।

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