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सराड़ा में 1600 सीताफल के पौधे लगाए गए:केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके बोले- परियोजना से मिलेगा रोजगार, किसानों को मक्का बीज भी बांटे

सलूम्बर जिले के सराड़ा उपखंड की नाल हल्कार ग्राम पंचायत में शनिवार को संसदीय संकुल विकास परियोजना के तहत महावृक्षारोपण कार्यक्रम हुआ। इसमें केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए और करीब 1600 सीताफल के पौधे रोपे गए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, जनजाति क्षेत्रीय विकास (टीएडी) मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, सलूम्बर विधायक शांता देवी मीणा, भाजपा जिला अध्यक्ष (देहात) पुष्कर तेली और ग्राम पंचायत प्रशासक (सरपंच) वर्षा देवी मौजूद रहे। मंत्री बोले- अंधाधुंध कटाई से बढ़ रहा तापमान केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा – दुनिया में बढ़ते तापमान और जल संकट का मुख्य कारण अंधाधुंध वृक्षों की कटाई है। पहाड़ों पर लगाए गए वृक्ष वर्षा जल को धरती में संचित रखते हैं, जिससे जलस्रोत जीवित रहते हैं। इसके माध्यम से देशभर के जनजातीय क्षेत्रों में खाली पहाड़ियों को हराभरा बनाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 1600 सीताफल पौधे रोपे, किसानों को मक्का बीज भी बांटे कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता से करीब 1600 सीताफल के पौधे लगाए गए। विशेषज्ञों ने किसानों को पौधों के संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी। इसके अलावा किसानों को मक्का बीज भी वितरित किए गए। सरपंच वर्षा देवी ने रखीं कई मांगें कार्यक्रम की शुरुआत में ग्राम पंचायत प्रशासक वर्षा देवी ने क्षेत्र के विकास के लिए कई मांगें रखीं। इनमें खेरकी, घाटीवाला और भुराघाटी तालाबों का पुनर्जीवन, नहरों का सुदृढ़ीकरण, नई डामरीकरण सड़कों का निर्माण, जर्जर एनीकटों की मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, बागवानी-पशुपालन को बढ़ावा और मोबाइल नेटवर्क समस्या का समाधान शामिल था।

भीलवाड़ा में आज तीन से साढ़े चार घंटे बिजली बंद:इलेक्ट्रिसिटी मेंटेनेंस वर्क के चलते होगी बिजली कटौती, जानें कौनसे क्षेत्र होंगे प्रभावित

भीलवाड़ा के कई इलाकों में रविवार को इलेक्ट्रिसिटी मेंटेनेंस वर्क के चलते बिजली सप्लाई प्रभावित रहेगी। कुछ क्षेत्रों में साढ़े चार घंटे और कुछ क्षेत्रों में तीन घंटे तक बिजली बंद रहेगी। विद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे जरूरी काम निर्धारित समय से पहले निपटा लें ताकि परेशानी से बचा जा सके। टेलीफोन एक्सचेंज फीडर से जुड़े क्षेत्रों में साढ़े चार घंटे पावर कट एवीएनएल के सहायक अभियंता नीरज शर्मा ने बताया कि 11 केवी टेलीफोन एक्सचेंज फीडर से जुड़े महेश नगर, गुप्ता जी की फैक्ट्री पांसल रोड, करणी मार्केट, वसंता, जम्बेश्वर नगर, मुखीजा हाउस, रामनगर, हनुमान मंदिर, कांच गोदाम के पास, कल्याण एलुमिनियम, सामुदायिक भवन पुलिस लाइन के पास, वायरलेस, मेस, पुलिस लाइन एरिया, होमगार्ड, हजीमंजिल, संतोषी माता मंदिर, भवानी नर्सरी, संतोष कॉलोनी, खडेश्वर मंदिर, गोकुल धाम सोसायटी, अनुकंपा अपार्टमेंट और आसपास के क्षेत्रों में सुबह 8 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक बिजली सप्लाई बंद रहेगी। पावरहाउस फीडर क्षेत्र में तीन घंटे बिजली बंद रहेगी 11 केवी पावरहाउस फीडर से जुड़े मराठा कॉलोनी, जवाहर नगर नहर के पास, बालाजी की बगीची, हरिजन बस्ती, हनुमान नगर, संस्कृति विहार पांसल रोड, बालाजी अपार्टमेंट, ग्रीनवेली स्कूल के पीछे, रौनक विहार, कंचन देवी कॉलेज, धर्मकांटा 80 फीट रोड, रोटोमेक और आसपास के क्षेत्रों में दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक तीन घंटे बिजली सप्लाई बंद रहेगी। विद्युत विभाग ने सभी उपभोक्ताओं से कहा है कि वे पावर कट से पहले अपने जरूरी कार्य पूरे कर लें, ताकि बिजली बंद रहने के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।

पूर्व MLA ने घूंघट में लगाई EO की क्लास:बिन गाय गोशाला वाले 'माननीय विधायक'; पूर्व सरपंच रंगे हाथ पकड़े गए

नमस्कार, पूर्व विधायक ने घूंघट निकालकर नगर पालिका के EO को ढंग से झाड़ दिया। पूर्व सरपंच चोरी करते रंगे हाथों धरा गया और विधायक की बिना गाय वाली गोशाला पर बुलडोजर चल गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. घूंघट में पूर्व MLA ने लगा दी ‘क्लास’ कान्स फिल्म फेस्टिवल में एक मॉडल घूंघट में रेड कार्पेट पर उतरी थी। उसने घूंघट निकालकर घूंघट का विरोध किया था। कुप्रथा बताया था। गीतकार इंदीवर साहब ने एक खूबसूरत गाना लिखा था- दिल को देखो, चेहरा न देखो, चेहरे ने लाखों को लूटा, दिल सच्चा और चेहरा झूठा। कुछ लोगों का चेहरा बिना घूंघट भी ढका होता है। कुछ चेहरे पर चेहरा लगाकर घूमते हैं। एक चोर ने तो प्रधानमंत्रीजी का चेहरा लगाकर वारदात कर दी। घूंघट, नकाब या हिजाब मान्यताओं के नाम हैं, परंपराओं के नाम हैं, रिवाज के नाम हैं। संविधान ने अपनी परंपराओं को निभाने की आजादी दी है। घूंघट का विरोध करने कान्स पहुंचीं मोहतरमा को पश्चिमी देशों की ‘ब्राइडल वेल’ परंपरा का विरोध भी करना चाहिए था। इसमें दुल्हन सफेद जालीदार घूंघट पहनती है। ताकि उसे किसी की बुरी नजर न लगे। खैर, बात है उदयपुर के वल्लभनगर से विधायक रहीं प्रीति गजेंद्र शक्तावत की। बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने और खुद विधायक रह लेने के बावजूद उन्होंने परंपरा का साथ नहीं छोड़ा है। घूंघट उनकी नजर में अदब का हिस्सा है। उन्हें पता चला कि भिंडर नगर पालिका का EO जनता के काम अटका रहा है। तो वे उसके दफ्तर पहुंचीं और फर्राटेदार अंग्रेजी में लताड़ पिला दी। अधिकारी सकपका गया। अधिकारी को फटकारते वक्त भी पूर्व विधायक घूंघट में थीं। स्वागत हो या फिर विरोध प्रदर्शन, उनका घूंघट कायम रहता है। EO साहब अब बता सकते हैं- क्या घूंघट कमजोरी की निशानी है? 2. कब होंगे पंचायत चुनाव.. कानून मंत्रीजी ने कहा है कि सरकार तो पंचायत चुनाव कराने की मंशा रखती है। सारा काम भी मुकम्मल कर दिया है। अब चुनाव आयोग को फैसला करना है। चुनाव की गेंद इस पाले से उस पाले में उछल रही है। इधर निवर्तमान और पूर्व हो चुके नेताओं के धैर्य की परीक्षा हो रही है। कुछ का जवाब दे गया है। बूंदी के नैनवां में बामनगांव के पूर्व सरपंच साहब टोंक जिले के रायपुरिया गांव में बाइक चुराते रंगे हाथों धरे गए। गांव के लोगों ने पहले तो उन्हें पिलर से बांधकर पीटा। फिर कपड़े उतार कर कैंची से बाल काट डाले। पंचायती के चुनाव वक्त पर हुए होते तो हो सकता है कि वे चुनाव लड़ते। संभव है जीत भी जाते। फिर उन्हें दूर गांव जाकर बाइक चुराने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे पहले कि राजनीति में दम-खम दिखाने की ललक रखने वाले दूसरे क्षेत्रों में जोर-आजमाइश करें, चुनाव हो ही जाने चाहिए। 3. चलते-चलते.. राजनीति में रहते हुए अगर आपने जमीन-जायदाद नहीं बनाई तो खाक राजनीति में रहे। लेकिन हब्बड़-तब्बड़ नहीं होनी चाहिए। भीलवाड़ा के शाहपुरा से विधायक लालारामजी ने कई पीढ़ियों का जुगाड़ सोचा था। इसके लिए उन्हें सबसे मुफीद लगी गाय। गाय की पूंछ पकड़कर वे भव सागर से पार उतरना चाहते थे। इसलिए गो रक्षा आंदोलन चलाया। गाय की रक्षा को देश की रक्षा से जोड़ा। इसके बाद हाईवे किनारे बढ़िया 20 बीघा सरकारी जमीन देखी। गोचर जमीन को वे गोशाला के रूप में देखने लगे। गोशाला के लिए एक संस्था बना ली। संस्था में खुद सचिव बन गए। बड़े बेटे को अध्यक्ष बना दिया। छोटा बेटा कोषाध्यक्ष बन गया। और तमाम रिश्तेदार कुछ न कुछ बन गए। संस्था के जरिए सहकारिता विभाग से उसी जगह गोशाला की जमीन का आवंटन करा लिया। इसके बाद रातों रात तारबंदी कराई, बिजली कनेक्शन ले लिया, टिनशेड का ढांचा खड़ा कर दिया। फाइल कलेक्टर की टेबल पर पहुंची तो आवंटन में कई खामियां मिली। गोशाला में गाय तो एक भी नहीं थी। तीन साल का गोशाला का अनुभव नहीं था। मामला रद्द हो गया। इस बीच पत्रकारों ने पोल खोल दी। जो जमीन आवंटित ही नहीं हुई उस पर बिजली कनेक्शन कैसे मिल गया? आनन-फानन में प्रशासन ने बिजली काटी और फिर ढांचे पर बुलडोजर चला दिया। माननीय ने फेसबुक पर एक पर्चा पोस्ट किया जिसमें लिखा था कि संस्था के सचिव पद से त्यागपत्र देता हूं। सफाई में विधायकजी बोले-संस्था से मेरा लेना-देना नहीं। मैंने तो इस्तीफा दे दिया था। तो माननीय किससे पूछें? बेटा अध्यक्ष है। उसने इस्तीफा मंजूर किया या नहीं? इनपुट सहयोग- मनीष जैन (भीलवाड़ा), मुकेश हिंगड़ (उदयपुर), मुकेश नागर (बूंदी)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

कार को टक्कर मारकर भागा ट्रेलर-ड्राइवर, स्कॉर्पियो सवार ने पकड़ा:15 किमी तक पीछे SUV दौड़ाई, वापस मौके पर लेकर आया; ड्राइवर फरार, 5 घायल

नागौर में नेशनल हाईवे-62 पर खरनाल के पास शनिवार रात करीब 8 बजे तेज रफ्तार ट्रेलर ने एक कार को टक्कर मार दी। हादसे में कार सवार एक ही परिवार के पांच लोग घायल हो गए। टक्कर के बाद ट्रेलर चालक वाहन लेकर जोधपुर की ओर फरार हो गया। पीछे चल रहे नागौर के स्कॉर्पियो सवार युवक ने करीब 15 किलोमीटर तक पीछा कर टांकला टोल प्लाजा पर ट्रेलर को रुकवा लिया और उसे वापस घटनास्थल तक लेकर आए। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले चालक मौका देखकर फिर फरार हो गया। साइड बदलते हुए मारी टक्कर जानकारी के अनुसार, रिंकू खान अपने परिवार के साथ ओसियां स्थित ससुराल में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होकर नागौर लौट रहे थे। खरनाल के पास सामने से आए ट्रेलर ने अचानक साइड बदलते हुए उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में रिंकू खान, उनकी दादी, पत्नी, छोटे भाई की पत्नी और बेटा घायल हो गए। दुर्घटना में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। जोधपुर की ओर भागा ट्रेलर चालक टक्कर मारने के बाद वाहन लेकर जोधपुर की ओर भाग निकला। इसी दौरान पीछे चल रहे नागौर निवासी मनोहर गोदारा ने पहले घायलों को क्षतिग्रस्त कार से बाहर निकालकर एंबुलेंस को सूचना दी, फिर ट्रेलर का पीछा शुरू किया। करीब 15 किलोमीटर दूर टांकला टोल प्लाजा पर ट्रेलर को रुकवाकर चालक सहित वाहन को वापस घटनास्थल तक लाया गया। स्कॉर्पियो सवार ने पकड़ा स्कॉर्पियो सवार युवक का आरोप है कि ट्रेलर चलाने वाला नशे की हालत में था। इसकी सूचना तत्काल नागौर सदर पुलिस को भी दी गई। इस बीच सभी घायलों को एंबुलेंस से नागौर के जवाहरलाल नेहरू जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। उधर, पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ट्रेलर चालक पास के एक होटल पर ट्रेलर खड़ा कर मौका देखकर फरार हो गया। सूचना पर नागौर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रेलर को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। चालक की तलाश की जा रही है।

राजस्थान में आज 15 जिलों में बारिश की संभावना:मानसून वाले बादल गायब, आने वाले दिनों में बरसात का अलर्ट नहीं

राजस्थान में मानसून कमजोर पड़ने के बाद भी शनिवार को कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा। वहीं, आज 15 जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग की तरफ से कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। सैटेलाइट इमेज में राजस्थान के ऊपर से मानसून वाले बादल गायब नजर आ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश सादुलपुर (चूरू) में हुई। यहां 2 इंच से ज्यादा पानी बरसा। मानसून के कमजोर और बादलों के गायब होने से गर्मी-उमस बढ़ गई। शनिवार को श्रीगंगानगर सबसे गर्म जिला रहा। यहां दिन का तापमान 42 डिग्री के करीब रहा। सबसे कम तापमान माउंट आबू में करीब 18 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। सबसे पहले- प्रदेश में बारिश की स्थिति और सैटेलाइट इमेज राजस्थान के मौसम से जुड़ी PHOTO… ये शहर सबसे गर्म गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स कहां कितनी बारिश हुई: पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश चूरू के सादुलपुर में 55 MM हुई। वहीं, झुंझुनूं में 18 MM, अलवर और खैरथल तिजारा में महज 1-1 MM बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा श्रीगंगानगर में 28 MM, हनुमानगढ़ में तीन से 38 MM तक बारिश हुई है। श्रीगंगानगर फिर सबसे गर्म: शनिवार को श्रीगंगानगर सहित 3 जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री और उससे ऊपर रिकॉर्ड हुआ। श्रीगंगानगर में पारा 41.7 डिग्री रहा। फलोदी 40.6 डिग्री और जैसलमेर 40 डिग्री सेल्सियस रहा। साथ ही बीकानेर, बाड़मेर जोधपुर में तेज गर्मी रही। आगे क्या: राजस्थान में 15 जुलाई तक किसी तरह का अलर्ट जारी नहीं किया गया। वहीं, रविवार (12 जुलाई) मौसम विभाग ने झुंझुनूं, सीकर, कोटपूतली-बहरोड़, अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग, दौसा, भरतपुर, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, जालोर, सिरोही, उदयपुर और डूंगरपुर में बारिश की संभावना जताई है।
राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम जयपुर: राजधानी में शनिवार को मौसम साफ रहा। दिन में धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। वहीं, हल्के बादल भी छाए। इस दौरान तापमान में कुछ कमी आई है। यहां रात के तापमान में 4.4 डिग्री की गिरावट हुई है। जयपुर में अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान 24.1 डिग्री रहा। अजमेर: शनिवार को मौसम सुहावना बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर बादलों की आवाजाही और बीच-बीच में धूप निकलने से उमस का असर महसूस हुआ, हालांकि हल्की हवा के कारण लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। अलवर: शनिवार सुबह से ही मौसम साफ रहा। दिनभर तेज धूप खिली रही। धूप निकलने के साथ उमस भी बढ़ गई, जिससे लोगों को गर्मी का एहसास हुआ और आमजन पसीने से तरबतर नजर आए। अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उदयपुर: शनिवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शनिवार दिनभर शहर के मौसम में कभी धूप निकली तो कभी बादल छाए रहे। शाम को हल्की हवा चली और बादल छाए। लेकसिटी में आने वाले कुछ दिनों में बारिश की संभावना कम है। कोटा: मानसून की रफ्तार कमजोर होने से गर्मी व उमस बढ़ गई है। रविवार दिनभर हल्की हवा चलती रही। अधिकतर समय बादल छाए रहे। शनिवार को अधिकतम तापमान 35.9 डिग्री व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में 10 जुलाई तक 11% कम बारिश हुई है। जोधपुर: शनिवार को मौसम सामान्य बना रहा। अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.4 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक है। सीकर: बारिश नहीं होने से गर्मी-उमस बढ़ गई है। जिल के कई इलाकों में हल्के बादलों छाए रहे। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान 26.9 डिग्री दर्ज किया गया है।

हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात गैंगस्टरों में दुश्मनी:लॉरेंस, गोदारा, ठेहट और आनंदपाल गैंग के 90 से ज्यादा बदमाश, हर घड़ी गैंगवार का खतरा

अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगवार का खतरा मंडरा रहा है। इसकी वजह है जेल में बंद एक-दूसरे की दुश्मन गैंग के कुख्यात बदमाश। लॉरेंस, रोहित गोदारा, आनंदपाल सिंह (AP गैंग), राजू ठेहट, राजू फौजी, बलभाराम जाट और शिवराज सिंह जैसे गैंग के करीब 90 गैंगस्टरों को यहां रखा गया है। लॉरेंस वर्सेज रोहित गोदारा, शिवराज वर्सेज भानु प्रताप जैसी कई गैंग हैं, जिनकी आपस में दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है। कई बदमाश छोटी-छोटी बात पर भड़क जाते हैं और मर्डर करने पर उतारू हो जाते हैं। हाल ही में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या भी जेल के भीतर पनप रही दुश्मनी का ही नतीजा थी। इस मर्डर के बाद भास्कर ने जेल में बंद हार्डकोर अपराधियों का गैंग के साथ कनेक्शन और उनके बीच दुश्मनी की कड़ियां खंगाली। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- जेल में कौन-कौन से टॉप हार्डकोर गैंगस्टर हैं, उनकी दोस्ती-दुश्मनी का गणित क्या है? अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद 90 टॉप हार्डकोर गैंगस्टर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में इस समय कुल 90 हार्डकोर कैदी बंद हैं। इनमें गैंगस्टर लॉरेंस गैंग से उसका भांजा सचिन थापन, बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के मर्डर की साजिश रचने वाला गैंगस्टर कपिल पंडित, जयपुर में कई वारदातें कर चुका रितिक बॉक्सर, जगतपाल, सुमित विश्नोई, सुभाष बानूड़ा, दिनेश डाबर, और अजयपाल सिंह शामिल हैं। रोहित गोदारा गैंग के इशारे पर राजू ठेहट और सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपी भी इसी जेल में हैं। इनमें सतीश पहलवान, जतिन, विक्रम गुर्जर, मनीष बच्चियां, रोहित सिंह, रामवीर, उधम सिंह और नितिन फौजी जैसे कुख्यात बदमाश हैं। कोटा का कुख्यात गैंगस्टर शिवराज सिंह हाड़ा और उसकी गैंग का गौरव, लोकेश और शराफत इसी जेल में है। शिवराज गैंग की जानी दुश्मन माने जाने वाली भानुप्रताप गैंग का नंदू शूटर भी इसी जेल में बंद हैं। किशनगढ़ के पूर्व विधायक नाथूराम सिनोदिया के मर्डर सहित दूसरी कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाला बलभाराम जाट, कुलदीप जघीना हत्याकांड में शामिल रहे विष्णु जाट, पंकज, रविंद्र और आदित्य, कुख्यात धन सिंह, श्रवण सिंह सोढा, इमरान मोगली, शादाब टोंक, राजू फौजी, बांसवाड़ा के गैंगस्टर भाई इम्तियाज और सिराज भी इसी हाई सिक्योरिटी जेल में कैद हैं। कन्हैयालाल हत्याकांड के दोनों आरोपी रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद, प्रकाश विश्नोई सांचौर, टेरर फंडिंग मामले में पकड़ा गया अल्तमश फरीदी, अमन अली और राजस्थान का सबसे बड़ा सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ जीवाणु भी इसी जेल में बंद है। हाल ही में जेल में मारा गया डकैत जगन गुर्जर का छोटा भाई डकैत पप्पू गुर्जर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में ही बंद है, जो हर पल अपने भाई की मौत का बदला लेने की आग में झुलस रहा है। लॉरेंस वर्सेज रोहित गोदारा गैंग : दोस्ती-दुश्मनी में बदली, विदेशों में भी ले रहे एक-दूसरे की जान बीकानेर के कपूरीसर का रहने वाला गैंगस्टर रोहित गोदारा पहले लॉरेंस विश्नोई के लिए ही काम करता था। लॉरेंस विश्नोई जेल में बंद था, तब रोहित गोदारा फर्जी पासपोर्ट पर विदेश भाग गया। वहां उसने लॉरेंस के सबसे करीबी रहे गोल्डी बराड़ के साथ मिलकर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित कई स्टेट में मर्डर-फिरौती की वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया था। पंजाबी सिंगर सिद्धू मुसेवाला मर्डर में भी ये जुगलबंदी शामिल रही थी। साल 2024-2025 के आस-पास लॉरेंस गैंग में फूट पड़ गई। लॉरेंस के भाई अनमोल विश्नोई को अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया था। लॉरेंस को तब शक हुआ कि गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा ने अनमोल की मदद नहीं की, बल्कि उसके लीगल केस में लापरवाही बरती और कई अहम जानकारी भी लीक की। इसके बाद लॉरेंस ने गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा से अपनी राहें अलग कर लीं। इसके बाद लॉरेंस गैंग और गोल्डी-रोहित गैंग ने वारदातों की जिम्मेदारी भी अलग-अलग लेनी शुरू कर दी। इसी के बाद दोनों गैंग एक-दूसरे के खून की प्यासी हो गई। अजमेर जेल में गैंगस्टर लॉरेंस की गैंग में शामिल और उसका सगा भांजा सचिन थापन, कपिल पंडित, ऋतिक बॉक्सर, जगतपाल, सुमित विश्नोई, सुभाष बानूड़ा, दिनेश डाबर और अजयपाल सिंह के अलावा लॉरेंस का साथ देने वाले कई बदमाश हैं। राजू ठेहट और सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड को अंजाम देने वाले सतीश पहलवान, जतिन, विक्रम गुर्जर, मनीष बच्चियां, रोहित सिंह, रामवीर, उधम सिंह और नितिन फौजी जैसे कुख्यात रोहित गोदारा गैंग के माने जाते हैं। आशंका है कि कभी भी वर्चस्व की जंग हो सकती है। शिवराज सिंह वर्सेज भानू प्रताप गैंग : 17 साल पुरानी गैंगवार, जेल में भी रहता है डर 12 मई 2009 को चित्तौड़गढ़ के मेनाल एरिया में भानु प्रताप गैंग ने शिवराज सिंह हाड़ा के भाई बृजराज सिंह हाड़ा की हत्या कर दी थी। जेल में बंद शिवराज ने इसका बदला लिया। अप्रैल 2011 में पेशी पर ले जाते समय भानु प्रताप पर फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में गैंगस्टर भानु प्रताप सिंह, कमांडो प्रकाश और सोहनलाल की हत्या कर दी थी। दोनों गैंग में दुश्मनी का खेल यहीं नहीं थमा। इसके बाद भानु प्रताप गैंग को लीड कर रहे हिस्ट्रीशीटर रणवीर चौधरी ने 25 अप्रैल 2011 को शिवराज गैंग के रमेश जोशी को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद शिवराज गैंग के गुर्गों ने कोटा के श्रीनाथपुरम स्टेडियम में 22 दिसंबर 2019 को भानु प्रताप गैंग को लीड कर रहे रणवीर चौधरी की हत्या कर दी। वर्तमान में कुख्यात गैंगस्टर शिवराज सिंह हाड़ा गैंग के गौरव, लोकेश और शराफत के साथ ही दुश्मन भानु प्रताप गैंग का नंदू शूटर भी इसी जेल में बंद है। जेल सूत्रों की मानें तो इन दोनों गैंग के बीच रंजिश कभी भी गैंगवार में बदल सकती है। कैदियों को रखने की व्यवस्था चाक-चौबंद, लेकिन कई दिक्कतें जेल सूत्रों के मुताबिक, इन हार्डकोर कैदियों को हाई सिक्योरिटी जेल में रखने के लिए कई चीजों का ध्यान रखा जाता है। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर कई कमजोरियां भी रहती हैं। जेल में जब कोई कैदी आता है तो उसका और उसकी गैंग का पूरा रिकॉर्ड पुलिस के पास होता है। इंटेलिजेंस इनपुट भी लिया जाता है। इसके बाद उसे विरोधी गैंग से अलग ब्लॉक में ही बैरक या सेल अलॉट की जाती है। अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में टोटल 4 वार्ड हैं और इनमें करीब 16 ब्लॉक हैं। हर ब्लॉक में कम से कम 5 सेल (कोठरी) और अधिकतम 6 सेल (कोठरी) मिलाकर टोटल 88 सेल (कोठरी) हैं। एक सेल में अधिकतम 3 कैदियों को रखा जा सकता है और इस लिहाज से यहां की कुल क्षमता 264 कैदियों को रखने की है। वर्तमान में यहां 90 हार्डकोर कैदी बंद है। जेल की सुरक्षा पर क्या बोले डीजी जेल अशोक राठौड़? राजस्थान के डीजी जेल अशोक राठौड़ कहते हैं- साइको कैदियों और बंदियों को लेकर जेल में कोई अलग से साइक्लॉजिकल मॉनिटरिंग जैसी स्पेशल ट्रीटमेंट की सुविधा तो नहीं है। लेकिन जेल में बंद सभी कैदियों के आपराधिक बैकग्राउंड, इनके स्वभाव, दुश्मनी के अलावा हर डिटेल को चेक करने के बाद ही सेल दी जाती है। हार्डकोर क्रिमिनल्स की गैंग्स राइवलरी का भी ध्यान रखते हुए ही उन्हें जेल में अलग-अलग बंद रखा जाता है। ऐसे कैदियों और बंदियों की मॉनिटरिंग भी जेल प्रशासन करता रहता है। अब इसी बीच इनके बीच अगर अचानक कोई नई दुश्मनी पनपती है, या किसी बात को लेकर उनमें कोई विवाद होता है तो उसको तत्काल समझना मुश्किल हो जाता है।

बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव:सीएम शुभेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट

पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब दो दशक पहले टाटा की नैनो परियोजना को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टाटा समूह की सिंगूर में वापसी को लेकर चर्चा तेज हो रही है। राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि टाटा के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। अगर टाटा ग्रुप लौटने को तैयार होता है तो सरकार वहां किसी दूसरी कंपनी को नहीं लाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, जिन किसानों ने 2006 में नैनो के लिए अपनी जमीन दी थी, उनके लिए यह अधूरा सपना है। टाटा के सिंगूर छोड़ने के बाद हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजरते रहे। करीब 3,600 ऐसे परिवारों को आज भी सरकार हर महीने दो हजार रुपये और 16 किलो चावल देती है, लेकिन कई परिवार अब भी उस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। टाटा को जमीन देने के लिए तैयार हैं लोग 75 साल की अंगूर दास बताती हैं कि उनके पति ने छह बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। टाटा के जाने के बाद वे गहरे सदमे में चले गए और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया। अंगूर दास कहती हैं कि यदि टाटा दोबारा लौटती है तो वे अपनी बची हुई जमीन भी देने को तैयार हैं। जब सिंगूर आंदोलन चल रहा था तब अनिद्य दास महज 12 साल के थे। आज 32 साल के अनिद्य को रोजगार के लिए कोलकाता जाना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्री लग गई होती तो उन्हें रोज शहर जाकर नौकरी नहीं करनी पड़ती। उनके पिता ने भी जमीन दी थी, लेकिन आज वह जमीन भी खेती के योग्य नहीं बची है। खासेरभेड़ी गांव के स्वरूप दास ने भी दो बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। वे बताते हैं कि मुआवजा मिलने के बाद वे दुबई चले गए थे, जबकि उनके दोनों भाइयों का चयन टाटा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रशिक्षण के लिए किया था। उत्तराखंड में ट्रेनिंग शुरू हो चुकी थी और नौकरी की उम्मीद भी थी, लेकिन परियोजना बंद होने के साथ सारे सपने टूट गए। उनका कहना है कि यदि आज टाटा या कोई दूसरी बड़ी कंपनी आती है तो वे फिर जमीन देने के लिए तैयार हैं। 20 साल में 15 गुना बढ़ी जमीन की कीमत भूमि अधिग्रहण के समर्थन में बनी सिंगूर शिल्प विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. उदयन दास का कहना है कि वर्ष 2006 के बाद से जमीन की कीमतों में लगभग 15 गुना वृद्धि हो चुकी है। उनके मुताबिक सड़क किनारे की जमीन, जिसकी कीमत उस समय करीब तीन लाख रुपये प्रति बीघा थी, अब एक करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई है। ऐसे में यदि टाटा दोबारा लौटती है तो केवल मुआवजे पर ही 1,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ सकता है। यही वजह है कि उनकी नजर में टाटा की वापसी आसान नहीं होगी। 997 एकड़ जमीन बेकार हो रही वर्तमान में सिंगूर की वह 997 एकड़ जमीन, जहां कभी नैनो परियोजना शुरू हुई थी, बड़े हिस्से में झाड़ियों से ढकी पड़ी है। कभी यह इलाका पश्चिम बंगाल की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि माना जाता था, जहां धान, आलू और अन्य फसलें होती थीं। लेकिन परियोजना रुकने के बाद खेती भी प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में किसान रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में चले गए। हालांकि, सिंगूर में सभी लोग टाटा की वापसी के पक्ष में नहीं हैं। सिंगूर कृषि रक्षा समिति के प्रमुख सदस्य प्रबीर पात्रा का कहना है कि उनका विरोध उद्योगों से नहीं था और न ही आज है। उनका कहना है कि उनका संघर्ष केवल तीन फसली उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए था और यदि फिर से ऐसी स्थिति बनती है तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ममता TMC के बैंक खातों से सीमित लेनदेन कर सकेंगी:हाईकोर्ट ने निगरानी के लिए विशेष अधिकारी तैनात किया, बड़े खर्च पर रोक कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट को पार्टी के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन की इजाजत दे दी। हालांकि खातों से सिर्फ रोजमर्रा और कानूनी मामलों से जुड़े खर्च ही किए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

प्रदेश में केवल 100 सीटों पर ही प्रवेश की व्यवस्था:ग्रेड थर्ड पीटीआई बनने की राह आसान; राजस्थान में डीपीएड की 3200 नई सीटों को सरकार की मंजूरी

राजस्थान में ग्रेड थर्ड पीटीआई बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने शारीरिक शिक्षा में दो वर्षीय डिप्लोमा (डीपीएड) की सीटों में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। सरकार ने प्रदेश में करीब 3200 नई सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यदि प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो अगले शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कई नए संस्थानों में डीपीएड पाठ्यक्रम शुरू हो सकेगा। वर्तमान में राजस्थान में डीपीएड पाठ्यक्रम केवल दो संस्थानों में संचालित हो रहा है। इनमें राजकीय शारीरिक शिक्षा कॉलेज, जोधपुर और प्रतापगढ़ का एक निजी संस्थान शामिल है। दोनों संस्थानों में 50-50 सीटें हैं। यानी पूरे प्रदेश में अभी केवल 100 सीटों पर ही प्रवेश की व्यवस्था है। पोर्टल खुला; 52 संस्थानों ने आवेदन भी किया राज्य सरकार का कहना है कि सालों बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने नए संस्थानों के लिए आवेदन का पोर्टल खोला है। इसके बाद राजस्थान से 52 संस्थानों ने डीपीएड शुरू करने के लिए आवेदन किया है। इनमें कुछ संस्थानों ने 50 तो कुछ ने 100 सीटों की मांग की है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने करीब 3200 नई सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। आवेदन करने वाले सभी संस्थानों का अब राज्य सरकार की ओर से भौतिक सत्यापन (फिजिकल वैरिफिकेशन) कराया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर को इसके लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। तीन अधिकारियों की टीम प्रत्येक संस्थान का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण में एनसीटीई के निर्धारित मानकों के अनुसार सुविधाएं मिलने पर ही राज्य सरकार एनओसी जारी करेगी। इसके बाद संबंधित संस्थान को डीपीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी। प्रदेश में खाली हैं 2500 पीटीआई पद शिक्षा विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में थर्ड ग्रेड पीटीआई के करीब 2500 पद रिक्त हैं। सरकार का मानना है कि डीपीएड संस्थानों और सीटों की संख्या बढ़ने से आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होंगे, जिससे स्कूलों में रिक्त पदों को भरने में भी आसानी होगी। नए संस्थानों में अगले साल से शुरू होगा डिप्लोमा शिक्षा विभाग के अनुसार जोधपुर के सरकारी कॉलेज में इस वर्ष प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। वहीं नए संस्थानों में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले शैक्षणिक सत्र से डीपीएड पाठ्यक्रम शुरू किया जा सकेगा। डीपीएड पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए किसी भी संस्थान का राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य है। साथ ही राज्य सरकार की ओर से एनओसी जारी होने के बाद ही इस डिप्लोमा को सरकारी नौकरियों के लिए वैध माना जाएगा।

युवाओं को दी सीख; नशे से दूर रहकर अपना भविष्य संवारें,स्वस्थ जीवन शैली ही अपनाएं

भास्कर न्यूज| बारां राजकीय महाविद्यालय बारां में विद्यार्थियों के लिए नई किरण नशा मुक्ति विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. रोहित गोठवाल ने युवाओं को नशे की लत से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी नशे के चंगुल से बचकर ही एक स्वस्थ जीवन शैली अपना सकती है और अपने जीवन को उज्जवल बना सकती है। विशिष्ट अतिथि असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शमशाद अली ने कहा कि नशा न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक और सामाजिक तौर पर भी व्यक्ति को पूरी तरह कमजोर बना देता है। इससे हंसता-खेलता परिवार और कॅरियर दोनों तबाह हो जाते हैं। प्राचार्य प्रोफेसर रामकेश मीणा ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे कॉलेज जीवन में किसी भी प्रकार के नशे या गलत संगत से खुद को दूर रखें। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। असिस्टेंट प्रोफेसर विवेक नागर ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान नशा मुक्ति केंद्र के सदस्यों सहित असिस्टेंट प्रोफेसर चंदनमल मेघवाल, संदीप बुगालिया, केदार प्रसाद मीणा और कॉलेज के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

दैनिक भास्कर-कुमावत कंस्ट्रक्शन की पहल, 74 हेक्टेयर में पौधरोपण का संकल्प

पर्यावरण को जीवन का आधार मानने और धरती को नया जीवन देने के संकल्प के साथ दैनिक भास्कर के देशव्यापी सामाजिक अभियान एक पेड़, एक जिंदगी के तहत एक पीपली आचार्यन में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम हुआ। कुमावत कंस्ट्रक्शन के सहयोग से बजरी लीज एरिया (कुल क्षेत्रफल 74.9720 हेक्टेयर) में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए पौधरोपण वर्ष 2026-27 का विधिवत आगाज हुआ। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों, संस्था के पदाधिकारियों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने अपने हाथों में विभिन्न प्रजातियों के पौधे थामकर न केवल प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, बल्कि इस अभियान को एक जन-आंदोलन बनाने का संकल्प भी दोहराया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने दैनिक भास्कर के एक पेड़, एक जिंदगी अभियान की सराहना करते हुए कहा कि पेड़ हमारे जीवनदाता हैं। जिस तरह हम अपने जीवन को सहेजते हैं, उसी तरह हमें इस धरती पर कम से कम एक पौधा लगाकर उसे जिंदगी देने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने रोपे गए पौधों को ट्री-गार्ड के जरिए सुरक्षित करने और उनकी नियमित सिंचाई व देखभाल करने की भी शपथ ली। इस दौरान नीम, शीशम, और पीपल जैसे औषधीय व छायादार पौधों का रोपण व वितरण किया गया। इस दौरान छगनलाल कुमावत, हितेश कुमावत, पीपली उपसरपंच मुकेश कुमावत, राजसिंह जाट, देवेंद्र गुर्जर, भगवतसिंह, मंगनीराम कुमावत, कन्हैयालाल माली, किशनलाल धोबी, पवन कुमावत, गणपत नायक, देवसिंह, दीपककुमार पारीक, कालीचरण गुर्जर, जावेद पठान, नरेश तेली सहित कई लोग मौजूद थे। एक पेड़, एक जिंदगी अभियान के तहत बजरी लीज एरिया में महकी हरियाली की उम्मीद।