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ट्विशा केस: गिरिबाला-समर्थ का फिर वॉयस सैंपल देने से इनकार:CBI बोली- भोपाल AIIMS ने भी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने से मना किया, आरोपियों की रिमांड बढ़ी

भोपाल में एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। CBI ने कोर्ट को बताया कि पिछली पेशी में आरोपी गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने वॉयस सैंपल देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन जब टीम इसके लिए 6 जुलाई को जेल पहुंची तो दोनों आरोपियों ने सहयोग नहीं किया। CBI ने कहा कि वॉयस सैंपल के बिना जांच प्रभावित हो रही है। वहीं, गिरिबाला सिंह के वकील विनोद जॉर्ज करलो ने कहा कि उनके मुवक्किलों ने कभी भी वॉयस सैंपल देने से इनकार नहीं किया। CBI टीम के जेल पहुंचने पर गिरिबाला की तबीयत खराब थी, फिर भी उन्होंने दो बार सैंपल दिया। तीसरी बार स्वास्थ्य कारणों से अगले दिन सैंपल लेने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा- समर्थ सिंह भी जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। CBI जब चाहे, उनका वॉयस सैंपल ले सकती है। उनकी आपत्ति केवल प्रक्रिया को लेकर है। सैंपल के लिए दी जाने वाली ट्रांसक्रिप्ट पहले रिकॉर्ड की गई ट्रांसक्रिप्ट से अलग होनी चाहिए, ताकि सैंपलिंग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे। इस पर CBI ने वॉयस सैंपल लेने संबंधी अर्जी कोर्ट में पेश की, जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए गिरिबाला और समर्थ की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी। भोपाल AIIMS ने कहा- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट CBI को दे दी, अलग से नहीं देंगे कोर्ट में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई। ट्विशा पक्ष के वकील शुभांग दीक्षित के मुताबिक, भोपाल AIIMS ने अदालत को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और उससे जुड़े सभी दस्तावेज पहले ही CBI को सौंपे जा चुके हैं इसलिए अलग से रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। वहीं, दिल्ली AIIMS की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। कई गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाने बाकी हैं। वहीं, कोर्ट ने दर्ज किया कि नोटिस जारी होने के बावजूद दिल्ली एम्स की तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य सूत्रों के अनुसार, दिल्ली AIIMS के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी है। रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कुछ वैज्ञानिक निष्कर्ष दर्ज हैं, जिन्हें CBI अपनी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देख रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। CBI को 60 दिन में चालान पेश करना है CBI ने 25 मई 2026 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच की 60 दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले एजेंसी चालान पेश कर सकती है। यदि तय समय-सीमा के भीतर चालान दाखिल नहीं होता है, तो आरोपी पक्ष कानून के तहत डिफॉल्ट जमानत का दावा कर सकता है। 12 मई को हुई थी ट्विशा की मौत ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली AIIMS से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर CBI अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। ………………………………… मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्विशा ने फांसी लगाई या गला घोंटते वक्त स्ट्रगल हुआ:जिम बेल्ट में स्किन टिश्यू मिलने का मतलब क्या; क्या बच जाएंगे मां-बेटे ट्विशा शर्मा के स्किन टिश्यू जिम बेल्ट पर मिले:दिल्ली AIIMS ने 11 पेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी एक्ट्रेस ट्विशा केस- CBI ने पति-सास पर दर्ज की FIR:रिटायर्ड जज को हाईकोर्ट का नोटिस; MP सरकार बोली- वे जांच में मदद नहीं कर रहीं एक्ट्रेस ट्विशा का मौत के 12 दिन बाद अंतिम संस्कार:भाई ने भोपाल में मुखाग्नि दी, दिल्ली AIIMS की टीम ने दोबारा पोस्टमॉर्टम किया शादी में रिश्तेदारों ने कहा था-घर की जज ट्विशा होगी:सोशल मीडिया पर सामने आया वेडिंग ट्रेलर, समर्थ से मजाक करती दिखीं ट्विशा ने तेलुगु-शॉर्ट फिल्में की, मल्टीनेशनल एड भी शूट किए:मिस पुणे बनने से डेथ तक; जानिए कैसी थी ट्विशा शर्मा की ग्लैमरस लाइफ भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ने लगाई फांसी:आखिरी कॉल मेजर भाई को, बोली- अब बर्दाश्त नहीं होता, मुझे ले चलिए भैया

नीतीश कुमार को कौन कंट्रोल कर रहा, क्या ‘नजरबंद’ हैं:सांसद-नेता को मिलने नहीं दिया जा रहा, 7 सर्कुलर के अंदर क्या-क्या हो रहा

‘मुझे नीतीश कुमार से मिलने नहीं ‎दिया जा रहा है। दो महीने से ‎उनसे मिलने की कोशिश में हूं। मैंने ‎मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से समय ‎मांगा। उन्होंने 2 मिनट में समय दे‎ दिया। मैं उनसे मिला।’ JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने यह बातें अपने लोगों के बीच बैठकी में कही। इसका वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या नीतीश कुमार कुछ लोगों की गिरफ्त में हैं। क्या वह नजरबंद हैं, उन्हें कोई दूसरा कंट्रोल कर रहा है। JDU को नीतीश नहीं तो कौन चला रहा है, जानेंगे, बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः क्या नीतीश कुमार नजरबंद हैं? जवाबः बिल्कुल नहीं। नजरबंदी एक कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति को सरकार या सुरक्षा एजेंसियां उसके घर में कैद कर लेती है और बाहरी दुनिया से उसका संपर्क काट दिया जाता है। मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार लगातार पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। समय-समय पर पार्टी दफ्तर भी जा रहे हैं। कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। जैसे… सवाल-2ः …तो फिर इसकी चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः विपक्षी दलों विशेषकर RJD अक्सर राजनीतिक बयानबाजी करती है कि नीतीश कुमार को ‘बंधक’ बना लिया गया है या वे कुछ चुनिंदा लोगों के नियंत्रण में हैं। ताजा चर्चा JDU सांसद के बयान के बाद शुरू हुई है। हाल की 3 घटनाओं को जानिए… घटना-1ः JDU सांसद का सामने आया वीडियो 12 जुलाई को झंझारपुर से JDU सांसद रामप्रीत मंडल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। जिसमें वह अपने लोगों के बीच बैठकी में यह कहते सुने गए कि मैं पिछले 2 महीने से नीतीश कुमार से मिलने का प्रयास कर रहा हूं, लेकिन मुझे मिलने नहीं दिया जा रहा है।’ घटना-2ः नीतीश के आसपास घेराबंदी है पूर्व सांसद आनंद मोहन ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा- ‘नीतीश कुमार अचेता अवस्था में हैं। उनको मुखौटा बनाकर चंडाल चौकड़ी अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रही है। चंडाल चौकड़ी ने नीतीश कुमार को जेड प्लस सिक्योरिटी दिलाकर उनके आसपास घेराबंदी कर दी है। वह उसके जरिए जो चाहते हैं करते हैं। नीतीश कुमार के आसपास का घेरा तय करता है कि वह किससे मिलेंगे और किससे नहीं मिलेंगे। किस नेता की बात उनक तक पहुंचानी है, किसकी बात नहीं पहुंचानी है। यह सब कुछ लोग तय करते हैं।’ घटना-3ः RCP को हंगामे के बाद मिली एंट्री 27 जून की सुबह पूर्व केंद्रीय मंत्री और नीतीश कुमार के साथी रह चुके RCP सिंह उनसे मिलने पहुंचे। अंदर जाने से रोक दिया गया। कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार के आवास के बाहर JDU नेता संजय गांधी और ललन सराफ के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि संजय गांधी और ललन सराफ ही नीतीश कुमार से मिलने नहीं दे रहे हैं। 20 मिनट तक चले शोरगुल के बाद RCP सिंह को अंदर बुलाया गया। थोड़ी देर कार्यकर्ताओं के साथ ही मिले और फिर निकल गए। बता दें, RCP सिंह बीते 6 महीने से लगातार JDU में एंट्री करने के प्रयासरत हैं। उनकी बात नीतीश कुमार से नहीं हो पा रही है। अंत में बात नहीं बनते देख RCP सिंह अपने समर्थकों और मीडिया को बुलाकर सीधे नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे थे। सवाल-3ः तो क्या नीतीश कुमार तय नहीं करते किससे मिलना है, किससे नहीं? जवाबः सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार अब पहले की तरह नहीं रह गए हैं। बीमारी संबंधित दिक्कतें हैं। नीतीश कुमार के करीबी नेताओं का एक ग्रुप है, जो सब चीजें तय करता है। वह किससे मिलेंगे, किससे नहीं। हालांकि, नीतीश कुमार अपने मन से भी बहुत सारे कार्य करते हैं। सवाल-4ः फिर JDU को चला कौन रहा है? जवाबः सीधा जवाब है-पार्टी तो नीतीश कुमार ही चला रहे हैं। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हालांकि, हाल में हुई 2 बड़ी घटनाओं ने संकेत दिया है कि पार्टी अब कोई और चला रहा है। 1. थोड़ी सी बहस हुई, बाहर कर दिए गए छोटू सिंह 8 जुलाई को बिहार JDU की प्रदेश कार्यकारिणी की लिस्ट आई। जिसमें अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को प्रदेश महासचिव पद से हटा दिया गया। इससे नाराज छोटू सिंह 10 जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पहुंचे। उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। कहा- बोलिएगा तो हमलोग पार्टी छोड़कर चले जाएंगे। इस पर संजय झा ने कहा-माहौल मत बनाइए। जाइए। 2. संगठन में कई पुराने नेता किनारे किए गए 8 जुलाई को JDU ने बिहार प्रदेश कमेटी की घोषणा की। जिसमें 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव व 74 सचिव बनाए। पिछली कमेटी में पदाधिकारी रहे कई नेताओं को बिल्कुल किनारे कर दिया गया। कुछ का डिमोशन हुआ।

केरलम- डॉक्टर की सैलरी ₹20 हजार, इतनी ही सफाईकर्मी की:जरूरत से 10 गुना ज्यादा डॉक्टर; इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बोला- 66% डॉक्टर की हालत बंधुआ मजदूरों जैसी

केरलम का मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर देश में सबसे मजबूत माना जाता है, लेकिन वहां डॉक्टरों को दिक्कत हो रही है। निजी अस्पतालों में एक एमबीबीएस जूनियर डॉक्टर 12 से 24 घंटे की ड्यूटी के बदले महज ₹20 हजार कमा पा रहा है। यह वेतन सफाईकर्मी के बराबर है। दरअसल, केरलम हर साल 7 हजार से ज्यादा डॉक्टर तैयार कर रहा है, जबकि जरूरत 600 से 700 की है। हेल्थकेयर में इसे ‘ओवरफ्लडिंग’ कहते हैं। राज्य में इतने डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में एडजस्ट करने की व्यवस्था ढह चुकी है। इसलिए कई जूनियर डॉक्टर या तो बेरोजगार हैं या निजी अस्पतालों में सफाईकर्मियों के बराबर वेतन पर नौकरी कर रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सर्वे में बताया था कि केरलम के 82% डॉक्टरों को गलत वेतन मिल रहा है। 81% डॉक्टर बंधुआ मजदूरी जैसी स्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। उनकी पढ़ाई में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। मंत्री बोले- निजी अस्पतालों को कुछ नहीं कह सकते इस सर्वे पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन का कहना है कि निजी अस्पताल स्वायत्त संस्थाएं हैं, इसलिए इनके आंतरिक वेतन ढांचे पर दखल नहीं दे सकते। दो केस से पूरा मामला समझिए… केस-1ः 24 घंटे काम, पर वेतन बहुत कम भास्कर ने इस संबंध में तिरुवनंतपुरम की 26 वर्षीय डॉ. श्री लक्ष्मी से बात की। उन्होंने बताया कि सरकारी कॉलेज में सीट न मिलने पर प्राइवेट सेल्फ-फाइनेंस कॉलेज से 1 करोड़ से अधिक खर्च कर एमबीबीएस किया। डिग्री के बाद एक प्राइवेट अस्पताल में 2 साल जूनियर डॉक्टर के रूप में काम किया। उस समय हर दिन 12 से 24 घंटे काम करने के बदले सिर्फ 20,000 रु. महीना मिलता था। मानसिक और शारीरिक शोषण से तंग आकर नौकरी छोड़ दी। विडंबना देखिए कि मेरे इस्तीफे के तुरंत बाद उस कम वेतन वाली नौकरी के लिए भी सैकड़ों डॉक्टरों की कतार लग गई। केस-2ः सरकारी नौकरी है, पर वेतन नहीं कोच्चि की 28 साल की डॉ. देविका कहती हैं कि नीट में बेहतरीन स्कोर के दम पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिली। एमबीबीएस के बाद 4 साल पीजी की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हुई। स्पेशलाइजेशन के बिना करियर टिकना मुश्किल है, इसलिए मैंने सरकार के फैमिली हेल्थ सेंटर में 56 हजार रु. की ‘अस्थायी’ नौकरी जॉइन की। यहां मरीजों की भीड़ ज्यादा है, लेकिन निजी अस्पतालों जैसा शोषण नहीं है। पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिल पा रहा। इसलिए मैंने यूरोप या गल्फ देशों में नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… 500 आवेदन के बाद भी नहीं मिली नौकरी:कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन की डिग्री के साथ ग्रेजुएट, अब रैपिडो से कर रहा कमाई कंप्यूटर साइंस से पढ़ाई करने के बाद जब नौकरी न मिले तो हारकर बैठ जाने के बजाय नए जॉब के अवसर तलाशने में ही समझदारी है। ये बात इस रैपिडो राइडर की कहानी से समझी जा सकती है। इसकी कहानी एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर की। इस यूजर का नाम नीरज है। पूरी खबर पढ़ें…

चंडीगढ़ में कबाड़ी से कार-बाइक कटाई तो एक्शन होगा:₹5 लाख तक जुर्माना, FIR-जेल भी संभव; नए नियम लागू, ज्यादा गाड़ी वालों पर नजर

चंडीगढ़ में अब अपनी पुरानी कार या बाइक को किसी भी लोकल कबाड़ी के पास कटवाना गैरकानूनी होगा। शहर में प्रदूषण कम करने और पुराने वाहनों के वैज्ञानिक निपटारे के लिए चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (CPCC) ने केंद्र सरकार के ‘पर्यावरण (संरक्षण) (एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स) नियम, 2025’ को सख्ती से लागू कर दिया है। अब तय समय सीमा पूरी कर चुके वाहनों को केवल सरकार से मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) में ही स्क्रैप कराया जा सकेगा। अपनी मर्जी से किसी कबाड़ी, गैराज या अनधिकृत स्क्रैप कारोबारी के पास वाहन कटवाने पर 5 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा FIR व जेल भी हो सकती है। CPCC की ओर से यह आदेश सोमवार (12 जुलाई) से लागू हो गए हैं। नियम से क्या-क्या बदला? 6 पॉइंट में समझिए अवैध रूप से गाड़ी काटी तो क्या होगी सजा?
बिना लाइसेंस वाहन काटना या स्क्रैप करना गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में 1 लाख से 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन या चोरी के वाहनों की स्क्रैपिंग पर आपराधिक मामला दर्ज होने और जेल की सजा का भी प्रावधान है। यदि किसी को आदेश पर कोई आपत्ति है तो वह CPCC कार्यालय में अपना पक्ष रख सकता है। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर साल 51 हजार से अधिक नए वाहन रजिस्टर हो रहे हैं। यानी औसतन हर दिन 100 से ज्यादा नए वाहन शहर की सड़कों पर उतर रहे हैं। शहर में पंजीकृत वाहनों की संख्या 14.27 लाख से अधिक हो चुकी है, जो करीब 15 लाख आबादी के बराबर है। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक चंडीगढ़ में हर साल अनुमानित 10 हजार से 15 हजार वाहन ‘एंड-ऑफ-लाइफ’ (ELV) यानी कबाड़ होने की श्रेणी में आ जाते हैं। स्क्रैपिंग के आंकड़े भी जानिए
केंद्र सरकार की तरफ से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक मंजूरशुदा RVSF में हर महीने 170 से 220 सरकारी और निजी वाहन स्क्रैपिंग के लिए पहुंच रहे हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक पिछले करीब ढाई साल में 8,646 वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं। व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी लागू करने वाले छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ अग्रणी राज्यों/यूटी में शामिल रहा है। *********** ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ के 2 सरकारी अस्पतालों में इवनिंग OPD: ऑफिस से छुट्‌टी लेने की जरूरत नहीं, घर आकर डॉक्टर से मिल सकेंगे चंडीगढ़ के दो सरकारी अस्पतालों में जल्द ही इवनिंग ओपीडी शुरू करने की योजना है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह सुविधा सीएचसी-22 और सीएचसी-45 में शुरू की जाएगी। इसके लिए प्रशासन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती कर रहा है। इवनिंग ओपीडी में शाम के समय दो घंटे तक सभी तरह के मरीजों को देखा जाएगा। मरीजों को इसके लिए पर्ची बनवानी होगी, जिसके लिए फीस भी ली जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर)

11 साल में तीसरी बार मानसून पर ब्रेक:यूपी में अब तक 19%, एमपी में 3% कम बारिश; अरुणाचल में ITBP के 15 जवान फंसे

देश के बड़े हिस्से में जुलाई में मानसून ब्रेक जैसी स्थिति बनी है। साल 2015 और 2021 के बाद 11 साल में यह तीसरा मौका है। मौसम विभाग के मुताबिक 6-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश के आसार कम हैं। हालांकि, पूर्वोत्तर, बिहार और पश्चिम बंगाल में तेज बारिश जारी रहेगी। मध्य प्रदेश में पहली बार जुलाई में मानसूनी सीजन में कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश 250.1 मिमी से 3% कम है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 1 जून से 13 जुलाई के बीच 161.6 मिमी बारिश हुई, जो कि औसतन 199.7 मिमी से 19% कम है। राजस्थान में पिछले 24 घंटे में कहीं भी बारिश नहीं हुई। श्रीगंगानगर में अधिकतम पारा 41.5°C रहा। नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में बाढ़ जैसे हालात पूर्वोत्तर में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिहार, असम, मेघालय, सिक्किम, अरुणाचल में लैंडस्लाइड और बाढ़ की खबरें सामने आ रही हैं। सोमवार को अरुणाचल के कुरुंग कुमे जिले में कुमे नदी में बाढ़ के बाद भारत-चीन सीमा (LAC) के पास टापा बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात ITBP के 15 जवानों से संपर्क टूट गया। असम के टियोक में पुथी नदी ने एक तटबंध तोड़ दिया। कई गांव और कृषि भूमि पानी में डूब गए हैं। कई जगहों पर सड़कें टूट गईं। हीट इंडेक्स यानी फील लाइक टेम्परेचर बढ़ेगा दरअसल, हवा में नमी बढ़ने पर शरीर से निकलने वाला पसीना जल्दी नहीं सूखता। इससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता और मौसम वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा गर्म लगता है। इसे हीट इंडेक्स कहते हैं। भुवनेश्वर में 36° डिग्री तापमान और 63% आर्द्रता के साथ हीट इंडेक्स 49°C तक पहुंच गया। मुंबई में 32°C पारे के बावजूद 70% नमी के चलते 40° डिग्री जैसी गर्मी महसूस हो रही है। दिल्ली और श्रीगंगानगर में हीट इंडेक्स करीब 45-46° डिग्री सेल्सियस है। देशभर के मौसम से जुड़ी खबरें… देशभर के मौसम के हाल के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

खबर हटके- रील के लिए दादी का स्कॉर्पियो पर स्टंट:सुबह शादी, शाम तक हो गया तलाक; चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक, रेलवे बोला- ₹3 लाख दिए

गुजरात में एक दादी का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो स्कॉर्पियो पर स्टंट करतीं और रील बनातीं नजर आ रहीं हैं। वहीं, हिमाचल में प्रदेश में एक ऐसी शादी हुई जिसमें शाम तक तलाक भी हो गया। उधर, चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक पर रेलवे ने कहा है कि इसके लिए उन्होंने ₹3 लाख दिए थे। कर्नाटक में 10 महीने के बच्चे ने महज 36 सेकंड में 21 सीढ़ियां चढ़कर नोबल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा लिया। वहीं, तेलंगाना में 6 साल की पोती से कार चलवाने पर सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ₹10 लाख करोड़ की डिफेंस डील:14 महीने में हथियारों की खरीद का पैटर्न बदला; लंबी जंग की तैयारी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा खरीद का पैटर्न तेजी से बदला है। पिछले 14 महीनों में मंजूर रिकॉर्ड प्रस्तावों से संकेत मिलता है कि सेनाओं को अब सिर्फ सीमित जवाबी कार्रवाई के लिए नहीं, बल्कि लंबी और मल्टीलेवल वॉर के लिए तैयार किया जा रहा है। डिफेंस एक्वीजिशन काउंसिल ने संघर्ष के बाद से 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनकी कुल कीमत 9.80 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। यह रकम एक साथ खर्च नहीं होगी, बल्कि कई वर्षों में अलग-अलग सौदों, निर्माण कार्यक्रमों और आधुनिकीकरण योजनाओं पर लगेगी। तैयारी की वजह युद्ध छिड़ना अब सामान्य बात तैयारी की पहली वजह ये है कि युद्ध छिड़ना अब सामान्य बात होती जा रही है। दूसरे, जंग छिड़ने के बाद उसे रोकना आसान नहीं रह गया है और तीसरी बात दुश्मन की कोशिश यह होती है कि लंबी और आर्थिक रुप से चोट पहुंचाने वाले सैन्य संघर्ष को जारी रखा जाए। वहीं, नए प्रस्ताव में लक्ष्य महीनों तक हथियार, मरम्मत और रसद बनाए रखना है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया के लंबे संघर्षों ने भारत की सैन्य सोच बदली है। हालांकि, पनडुब्बियों, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में देरी अब भी बड़ी चुनौती है। ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया में भारतीय हथियारों की डिमांड बढ़ी ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र जैसे भारतीय हथियारों के इस्तेमाल के बाद दुनिया में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। कई देशों ने इन्हें खरीदने में रुचि दिखाई है, जबकि कुछ के साथ हजारों करोड़ रुपए के सौदे भी हो चुके हैं। इनकी कीमत 21,000 करोड़ रुपए से ज्यादा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो पिछले साल से 62% ज्यादा है। ब्रह्मोस के लिए फिलीपींस, वियतनाम और दो अन्य देशों से करीब 12,500 करोड़ रुपए के सौदे हो चुके हैं। इंडोनेशिया के साथ लगभग 3,600 करोड़ रुपए की डील अंतिम मंजूरी के चरण में है। आकाश मिसाइल सिस्टम के लिए आर्मेनिया से 6,100 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट पहले ही हो चुका है। 100 से ज्यादा देशों को 38,424 करोड़ रु. का निर्यात भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है, जिनमें अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया प्रमुख हैं। अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार है, जहां 2.8 अरब डॉलर के प्रणाली और पार्ट्स, बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी बड़ी कंपनियों को जाते हैं। आर्मेनिया जैसे देश पूरे तैयार हथियार खरीद रहे हैं। सरकार ने 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात लक्ष्य रखा है। 2016-17 में यह 1,522 करोड़ रुपए था। यानी एक दशक से कम समय में इसमें 25 गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… सेना 800km रेंज वाली ब्रह्मोस क्रूज-मिसाइल खरीदेगी:अभी 450km तक निशाना साधने वाली मिसाइल मौजूद, ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुआ था भारतीय सेना 800 किमी से ज्यादा रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। फिलहाल सेना के पास 450 किमी तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल मौजूद है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रक्षा अधिकारियों ने बताया कि सेना इस नए वर्जन का बड़ा ऑर्डर देने की योजना बना रही है। पूरी खबर पढ़ें…

ऑस्ट्रेलिया में मोदी के कार्यक्रम पर विवाद:आयोजकों ने कहा- पैसे देकर लोगों को नहीं बुलाया; कांग्रेस ने कहा था- PM के स्वागत में भाड़े के लोग आए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेलबर्न में हुए ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम पर आयोजकों ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने के लिए लोगों को पैसे नहीं दिए गए थे। इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए आरोप लगाया था कि 9 जुलाई को हुए इस कार्यक्रम में लोगों को पैसे देकर चार्टर्ड प्लेन से बुलाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेटर लिखकर माफी और बयान वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा बयान भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय का अपमान है। इसका खर्च BJP, भारत सरकार या ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नहीं उठाया। दरअसल, पीएम मोदी 9 और 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे, जहां हुए ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे। कांग्रेस ने कहा था कि मोदी के स्वागत के लिए भाडे़ के NRI लाए गए 11 जुलाई को कांग्रसे नेता पवन खेड़ा समेत कांग्रसे के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के कार्यक्रम एक एक वीडियो शेयर कर लिखा था कि मोदी के स्वागत के लिए भाड़े पर NRI लाए गए हैं। वहीं, 25-30 हजार लोगों को पैसे देकर यहां बुलाया गया था। आयोजकों बोले- महीनों की तैयारी के बाद हुई थी चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोजकों का कहना है कि चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था के लिए महीनों तक योजना बनाई गई। इसके लिए बातचीत, यात्रियों का समन्वय और प्रशासनिक काम किए गए। कई स्वयंसेवकों ने अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका छोड़ा, अपने कारोबार और पेशेवर जिम्मेदारियों से समय निकाला, व्यक्तिगत आर्थिक जोखिम उठाया और इस पहल को सफल बनाने के लिए लगातार काम किया। आयोजकों ने कहा कि कांग्रेस को प्रधानमंत्री मोदी और BJP की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन भारत के प्रवासी समुदाय की लोकतांत्रिक पसंद को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। पीएम ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी मेलबर्न मीट्स मोदी में पीएम मोदी ने कहा था कि हमारे फार्मा और डिफेंस की क्रेडिबिलिटी दुनिया देख रही है। आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके आतंकियों के अड्डों पर हो रहे थे और गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी। उन्होंने आगे कहा कि ये शो हाउसफुल है, ब्लॉकबस्टर है। इससे पहले मैं दो बार सिडनी में आप सभी से मिला हूं। मेलबर्न वालों से मिलने का मुझे भी इंतजार था। इसीलिए सोचा कि इस बार मेलबर्न ही चलो। जिस एनर्जी से आपने हम सभी को वेलकम किया है वह और भी अमेजिंग है। भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा ऑस्ट्रेलिया इसी दौरे के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम डील पर भी मुहर लग गई है। मेलबर्न में पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने मीटिंग के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, स्पेस और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) समेत कई क्षेत्र में समझौतों की घोषणा की। मोदी ने कहा- भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर भी विकसित करेंगे। कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल बनाया जाएगा, जिससे भारत के गगनयान मिशन को मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… ———————————– पूरी खबर पढ़ें… मोदी ऑस्ट्रेलिया से न्यूजीलैंड पहुंचे:दोनों देश FTA डील फाइनल करेंगे; PM ऑकलैंड में 40 हजार भारतीयों को संबोधित करेंगे पीएम मोदी अपने छह दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंच गए। यह 40 साल बाद किसी भारतीय पीएम की न्यूजीलैंड यात्रा है। इससे पहले 1986 में राजीव गांधी न्यूजीलैंड के दौरे पर गए थे। पूरी खबर पढ़ें…

बंगाल की खाड़ी में 9 मछुआरों के शव मिले:बॉडी सड़ जाने से पहचान मुश्किल; 8 दिन पहले बोट पलटी थी; 6 अब भी लापता

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के पास बंगाल की खाड़ी में डूबे एक ट्रॉलर से आठ दिन बाद नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए हैं। छह मछुआरे अब भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है। ‘जय मां काली’ नाम का ट्रॉलर 2 जुलाई को पूर्व मेदिनीपुर जिले के शंकरपुर मछली बंदरगाह से 15 मछुआरों को लेकर समुद्र में मछली पकड़ने निकला था। 6 जुलाई के बाद ट्रॉलर से संपर्क टूट गया था। अधिकारी ने बताया कि समुद्र में कई दिन रहने के कारण शव बुरी तरह सड़ चुके हैं और उनकी पहचान करना मुश्किल है। अब उनकी पहचान डीएनए (DNA) जांच के बाद ही हो सकेगी। पीएम मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को पीएमएनआरएफ (PMNRF) से दो-दो लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। आठ दिन की तलाश के बाद मिला डूबा ट्रॉलर जिला प्रशासन के मुताबिक, पुलिस और भारतीय तटरक्षक बल ने आठ दिन की तलाश के बाद शनिवार को बक्खाली तट से करीब 35 किलोमीटर दूर बाघेर चार के पास डूबे ट्रॉलर का पता लगाया। रविवार को कई मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों की मदद से इसे पाथरप्रतिमा के सीतारामपुर तट तक लाया गया। इसके बाद पूरी रात चले राहत अभियान में ट्रॉलर के अंदर से नौ मछुआरों के शव निकाले गए। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी में खराब मौसम के कारण ट्रॉलर पलट गया होगा। हालांकि, हादसे की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। ओडिशा के तीन सगे भाई भी लापता लापता मछुआरों में ओडिशा के बालासोर जिले के तीन सगे भाई- रवींद्र माझी (52), जयराम माझी (49) और जगन्नाथ माझी (45) शामिल हैं। उनके रिश्तेदार संन्यासी माझी ने बताया कि तीनों पहले भी कई बार मछली पकड़ने के लिए शंकरपुर जाते रहे थे। अधिकारी ने बताया कि ट्रॉलर पर शुरुआत में 16 लोगों के जाने की योजना थी, लेकिन एक व्यक्ति किसी कारणवश नहीं गया। बाकी मृतक और लापता मछुआरे पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा और नदिया जिलों के रहने वाले हैं। काकद्वीप उप-मंडलीय अस्पताल की मोर्चरी के बाहर उनके परिजन अब भी इंतजार कर रहे हैं। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… वृंदावन में यमुना में नाव डूबी, 10 पर्यटकों की मौत:इनमें 7 एक ही परिवार के; लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी; सभी पंजाब के रहने वाले
मथुरा के वृंदावन में 37 श्रद्धालुओं से भरी प्राइवेट नाव (स्टीमर) यमुना नदी में पलट गई। हादसे में 10 की डूबने से मौत हो गई। इनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा समेत एक ही परिवार के 7 सदस्य शामिल थे। युवती समेत 5 लोग अभी भी लापता हैं। नाव में सवार सभी श्रद्धालु पंजाब से घूमने आए थे। पूरी खबर पढ़ें…

उदयपुर में मोडिफाई तीन स्लीपर बसों को किया सीज:जजों और आरटीओं की संयुक्त कार्रवाई, 9 बसों के बनाए चालान

अवैध रूप से संचालित और अनधिकृत रूप से मोडिफाई करने वाली स्लीपर/लक्जरी बसों के खिलाफ आज उदयपुर के खेलगांव चौराहा पर कार्रवाई की गई। इसमें 3 लक्ज़री स्लीपर बसें सीज, 9 बसों पर 1 लाख 20 हज़ार का जुर्माना भी लगाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर एवं परिवहन विभाग की संयुक्त कार्रवाई की गई। जिला एवं सेशन न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता के निर्देश पर सुरक्षित परिवहन के नागरिकों के अधिकार की रक्षा करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। सुखेर थाना क्षेत्र में खेलगांव चौराहा पर संयुक्त निरीक्षण में कार्रवाई की गई। इसके तहत 20 बसों की जांच की गई। इनमें से 9 बसों के खिलाफ विभिन्न नियमों के उल्लंघन के तहत चालान बनाए गए और करीब एक लाख बीस हज़ार का जुर्माना ज़रिए चालान लगाया गया। बसों में अनियमितताएं और अनधिकृत बदलाव पाए जाने पर 3 बसों को मौके पर ही सीज कर दिया गया। इस दौरान अपर जिला न्यायाधीश राहुल चौधरी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार जोशी, जिला परिवहन अधिकारी मुकेश डाड और आरटीओ इंस्पेक्टर राजेंद्र दन्तसुलिया, तेजपाल, घनश्याम मीणा मौजूद रहे।
उदयपुर की ये खबरें भी पढ़े… उदयपुर में धंसी सड़क, गड्ढे में उतरी ईवी कार:लंबा जाम लगा, मेयर के घर के आगे छोड़े गए नाले का असर; इस रोड पर 3 साल में तीसरी घटना उदयपुर के उबेश्वर में दिखा दुर्लभ ‘लौडांकिया सांप:30 साल बाद फिर दिखा दुर्लभ वाइन स्नेक, जानिए क्या है खासियत रोपवे में फंसे यात्री, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ ने किया रेस्क्यू:रस्से और चेयर के जरिए सुरक्षित उतारा, नीमचमाता रोपवे पर किया मॉक ड्रिल UCC जनसुनवाई में हंगामा, कांग्रेस ने किया बहिष्कार:कहा- ये सिर्फ औपचारिकता, आदिवासी युवा नेता पर भड़के सांसद मन्नालाल रावत कुल्हाड़ी से लेपर्ड के नाखून काटकर भागा आरोपी गिरफ्तार:वन विभाग की टीम ने घर पर दबिश देकर दबोचा; रिमांड पर भेजा