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परिवार का दावा, बिहारीजी मंदिर में चढ़ाया हीरा गायब:1 साल से जांच की मांग कर रही व्यापारी की मां; अधिकारी बोले- कांच है या डायमंड हमें नहीं पता

भरतपुर के बिहारी जी मंदिर में ऑयल मिल व्यापारी की मां का दान किया हीरा गायब है। दावा है कि उन्होंने मंदिर में हीरा दिसंबर 2024 में चढ़ाया था। इसके बाद उन्हें 6 महीने बाद पता चला कि मूर्ति पर हीरा नहीं कांच का टुकड़ा लगा है।
महिला का दावा है कि उन्होंने कई बार देवस्थान विभाग से अपने भेंट किए हीरे की स्लिप मांगी लेकिन, उन्हें नहीं दी गई। महिला का आरोप है कि उन्हें यह कहा गया कि क्या पता आपने कांच का टुकड़ा चढ़ाया हो। इसके बाद से लगातार वो अपनी बहू के साथ हीरे की जांच की मांग कर रही हैं।
मामले को लेकर देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा ने कहा- मैं उस वक्त यहां तैनात नहीं था। ऐसे में, मैं बता नहीं सकता कि वह हीरा है या कांच का टुकड़ा। समझिए पूरा मामला … दिल्ली से खरीदा था हीरा मीरा बंसल की बहू कृपाली ने बताया- सास मीरा बंसल ने बिहारीजी की भक्त हैं। उनकी इच्छा थी कि एक हीरा बिहारीजी की मूर्ति पर भी हो। ऐसे में, 2024 दिसंबर में दिल्ली के करोल बाग स्थित कुंदन लाल एंड संस के यहां से हीरा खरीदा था। ये हीरा 3 लाख 64 हजार रुपए में खरीदा था।
जून 2025 से यहां आने वाले भक्तों और हमारे मिलने वाले लोगों ने कहा कि ये हीरा तुम्हारा दिया हुआ नहीं लग रहा। इसकी चमक वैसी नहीं है। पहले जैसी चमक नहीं रही कृपाली ने बताया- इसके बाद वहां जाकर हमारे परिवार ने हीरे को देखा तो, वहां पर पहले जैसे हीरे की चमक नहीं थी। इसके बाद देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा से बात की गई लेकिन, उन्होंने संतुष्टि पूर्वक कोई जवाब नहीं दिया। हीरा चढ़ाने के बाद कई बार हीरा दान के लिए देवस्थान विभाग से स्लिप मांगी लेकिन, नहीं दी। मामला रफा-दफा करने की कोशिश कृपाली ने दावा किया कि इसी दौरान देवस्थान विभाग से दो कर्मचारी सूरजभान और पुष्पेंद्र घर आए। मामले को रफा-दफा करने की बात कही। लेकिन, हमने कहा कि हीरे की जांच करवा दीजिए। इसके बाद हमने देवस्थान विभाग उदयपुर, भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग, सीएम भजन लाल शर्मा से लिखित में इसकी शिकायत की है। अधिकारी बोले- कांच का टुकड़ा कृपाली ने आरोप लगाया कि अब देवस्थान विभाग के अधिकारी कहते हैं कि क्या पता तुमने बिहारीजी पर कांच का टुकड़ा चढ़ाया हो। जब हमने हीरा दान किया था उस समय देवस्थान विभाग ने हीरे की जांच नहीं की थी। उन्हें उस समय जांच करनी चाहिए थी। देवस्थान विभाग ने हीरा गायब किया और अब उसे वह कांच का टुकड़ा बता रहे हैं। हमारे पास हीरे का बिल, उसका नंबर और सर्टिफिकेट भी है। हमने पुलिस में शिकायत नहीं की है, हम केवल हीरे की जांच करवाना चाहते हैं। आयुक्त बोले- हीरे दान की डेट अलग मामले को लेकर देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा ने कहा- जब हीरा दान किया गया था। उस समय में कहीं और तैनात था। अब वह हीरा है या कांच का टुकड़ा उसके बारे में मैं नहीं बता सकता। मुझे नहीं पता कि उस समय कौन अधिकारी था या कौन कर्मचारी था। रसीद किसने नहीं दी इसके बारे में मैं कैसे बता सकता हूं। हमारे रिकॉर्ड में हीरा दान 15 नवंबर को किया गया था। मीरा बंसल का कहना है कि उन्होंने 10 दिसंबर को हीरा दान किया था। हीरा वेरीफाई नहीं हुआ है। हीरे की जांच के लिए कमेटी बनाई हुई है। जो कर्मचारी बंसल के घर गए थे उनके बारे में मुझे पता नहीं है।

प्रिंसिपल को धक्का दिया, कॉलर पकड़कर नीचे गिराया, VIDEO:धरने पर बैठे पेरेंट्स से कहासुनी हुई; दीवार फांदकर स्कूल में जाना पड़ा

बाड़मेर में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल के पेरेंट्स ने धक्का दिया और कॉलर पकड़कर नीचे गिरा दिया। स्कूल में एंट्री करने के लिए प्रिंसिपल दीवार फांदकर गए। प्रिंसिपल का 7 महीने पहले ट्रांसफर हो गया था। हालांकि वे रिलीव नहीं हुए थे। लोग स्कूल के तालाबंदी कर प्रिंसिपल को रिलीव करने की मांग कर रहे थे। मामला नोखड़ा के आडेल गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल का मंगलवार सुबह 11 बजे का है। बच्चे और पेरेंट्स स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर मेन गेट पर ताला लगाकर धरने पर बैठे थे। प्रिंसिपल भैराराम थोरी आए और चाबी के बारे में पूछा। जवाब नहीं मिलने पर पत्थर से स्कूल के मेन गेट का ताला तोड़ने लगे। इस दौरान एक युवक खड़ा हुआ। उसने प्रिंसिपल की कॉलर पकड़कर धक्का दे दिया और नीचे गिरा दिया। स्कूल के बाहर मौजूद लोगों ने भी प्रिंसिपल से धक्का-मुक्की की। जब बात नहीं बनी तो प्रिंसिपल दीवार फांदकर स्कूल में घुस गए। पहले 4 फोटोज में देखिए पूरा घटनाक्रम… रिलीव नहीं हो रहे प्रिंसिपल सदर थानाधिकारी देवीचंद ढाका ने बताया- प्रिंसिपल भैराराम का ट्रांसफर उदयपुर हो गया था। गांव के सारे लोग, स्टूडेंट प्रिंसिपल के खिलाफ है। ऑनलाइन टीसी दे नहीं रहे हैं। इससे बच्चों को परेशानी हो रही है। यहां से रिलीव होकर जा नहीं रहे हैं। नोखड़ा तहसीलदार दिनेश विश्नोई ने कहा- भैराराम के ट्रांसफर को 7-8 महीने हो गए। कोर्ट से स्टे ऑर्डर भी खारिज हो गया। इसके बावजूद भी यह यहां से रिलीव नहीं हो रहे हैं। बच्चे कह रहे हैं कि जब प्रिंसिपल भैराराम का ट्रांसफर हो गया है तो उसको यहां से हटाया जाए। प्रिंसिपल भैराराम थोरी ने बताया- शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मेरी शाला दर्पण आईडी को 7 महीने से हाईजैक करके बंद कर रखी है। विभाग के अधिकारी गांव वालों और बच्चों को भड़काकर मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं। मेरे पास आईडी ही नहीं है। विभाग ने जिसको जिम्मेदारी दे रखी है, वो ही कर सकता है। इस वजह से बच्चों को ऑनलाइन नहीं कर पा रहे हैं। स्कूल में 13 टीचरों का स्टाफ है। जब सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है तो मेरे को रिलीव भी ऑनलाइन किया जाए। …… ये खबर भी पढ़ें… टीचर का ट्रांसफर हुआ बच्चे बोले- भूख हड़ताल करेंगे:4 दिन लगे या 5, सर को वापस बुलाओ; सरकारी स्कूल के गेट पर ताला जड़ा भीलवाड़ा में हिंदी और संस्कृत पढ़ाने वाले टीचर का ट्रांसफर हुआ तो स्कूल के बच्चे नाराज हो गए। स्कूल के बाहर बैठ गए और प्रदर्शन करने लगे। बोले- जब तक टीचर को वापस नहीं लाया जाएगा वे धरने से नहीं उठेंगे। चाहे 4 दिन लगें या 5 दिन, हम भूखे-प्यासे बैठे रहेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट का 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से इनकार:कहा- कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता; CBSE ने इसी सेशन से पॉलिसी लागू की

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता है। साथ ही इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों को लेकर सरकार और सीबीएसई से 10 दिन में जवाब मांगा है। अब 14 दिन बाद 29 जुलाई को इस मामले में सुनवाई होगी। दरअसल, थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी मौजूदा 2026-27 सेशन से लागू कर दी गई है। नई पॉलिसी के मुताबिक स्टूडेंट्स को 2 भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। ऐसे में उन्हें वे भाषाएं छोड़नी पड़ेंगी, जिन्हें वे क्लास 5 से लगातार पढ़ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने तैयारी के बिना तीन-भाषा नीति लागू कर दी है। स्कूलों में पर्याप्त टीचर, किताबें और जरूरी एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है, जिससे स्टूडेंट-टीचर को परेशानी हो रही है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है 1. मामला क्या है?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।
हालांकि, CBSE ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर 6 जून को यूटर्न लिया और नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी। 7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। पूरी खबर पढ़ें 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है?
जवाब: पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) पढ़ते थे। अब नियम कहता है कि तीन में से कम-से-कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही ली जा सकेगी। 3. याचिकाएं किसकी तरफ से लगाई गई थीं?
जवाब: याचिकाएं छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई की। 4. याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है?
जवाब: नियम अचानक लागू कर दिया गया। कई भाषाओं की किताबें अभी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक नहीं हैं। इससे छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. कोर्ट में किताबों को लेकर क्या दलील दी गई?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने पर रोक लगनी चाहिए। सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से अभी केवल 3 भाषाओं की किताबें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं में पढ़ाई कैसे शुरू होगी? 6. शिक्षकों को लेकर क्या समस्या बताई गई?
जवाब: वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अगर किसी स्कूल में नई भारतीय भाषा पढ़ानी होगी, तो उसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतने कम समय में शिक्षक और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषा पूरी तरह बंद हो जाएगी?
जवाब: नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन पहले उन्हें दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम होगा?
जवाब: नहीं। CBSE ने कहा है कि कक्षा 10 के बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। 10. अभी आगे क्या होगा?
जवाब: केंद्र, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि इस नीति पर आगे क्या आदेश देना है। 34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है। ——————- ये खबर भी पढ़ें: CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पेरेंट्स:9वीं क्लास में लागू किए जाने का विरोध, जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच करेगी सुनवाई CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं। ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…

PM की मौजूदगी में किशाऊ परियोजना का MOU जल्द:हिमाचल CM ने हाई पावर कमेटी की मीटिंग ली; कहा-बिना निवेश 600 करोड़ की होगी कमाई

422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना का समझौता ज्ञापन (MOU) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भारत सरकार और साझेदार राज्यों के बीच जल्द हस्ताक्षरित होगा। MOU पर हस्ताक्षर से पहले केंद्र ने इसका प्रारूप परियोजना से जुड़े सभी राज्यों को भेजकर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसी सिलसिले में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी मंगलवार को एमओयू के प्रारूप की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के क्रियान्वयन में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में हुई बैठक में 422 मेगावाट किशाऊ परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति बनी है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना में कोई वित्तीय निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को हर वर्ष लगभग 600 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पूर्व में तैयार एमओयू के प्रारूप को अस्वीकार कर प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखने वाली नई शर्तों और प्रावधानों को सभी हितधारकों से मंजूरी दिलाई। इससे राज्य के दीर्घकालिक हित सुरक्षित हुए और परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता भी साफ हुआ। हरियाणा-दिल्ली-राजस्थान उठाएंगे बिजली कंपोनेंट खर्च मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी साझेदार राज्यों (हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान) को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा। वहीं हिमाचल को अपनी जरूरत के अनुसार जलाशय से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर पानी पर अपना अधिकार भी सुरक्षित किया है। बीबीएमबी के बकाया वसूली के प्रयास तेज: CM सुक्खू ने कहा कि किशाऊ परियोजना पर हुआ यह समझौता हिमाचल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे राज्य का वैध हिस्सा और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होंगे। राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं से हिमाचल को मिलने वाली 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये की वसूली के प्रयास भी तेज कर रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद यह मामला करीब 15 वर्षों से लंबित है। आठ साल से चला आ रहा गतिरोध समाप्त मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से किशाऊ परियोजना में हिमाचल के वित्तीय योगदान को लेकर पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हुआ है। इससे राज्य पर पड़ने वाला भारी वित्तीय बोझ टल गया। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसका विरोध करते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की, जिसके तहत हिमाचल को परियोजना में कोई पूंजीगत निवेश नहीं करना होगा और राज्य को उसके सभी वैध लाभ मिलते रहेंगे। सीएम के अलावा ये अधिकारी रहे मौजूद मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम, प्रधान सचिव देवेश कुमार और हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक उपस्थित रहे। मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

नासिक में महिला पर्यटक पर हमला, 20km तक पीछा किया:चलती कार पर पत्थर-रॉड मारे, पीड़ित परिवार ने छेड़छाड़ का विरोध किया था

महाराष्ट्र के नासिक जिले में भावली डैम के पास महिला पर्यटक से कथित छेड़छाड़ और उसके परिवार पर हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना के दो दिन बाद मंगलवार को गिरफ्तारी की गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़, हत्या के प्रयास और डकैती सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, 44 वर्षीय महिला अपने पति, बेटे, बेटी, देवर और दो भतीजों के साथ रविवार को भावली डैम के पास स्थित झरने पर घूमने गई थीं। शिकायत के मुताबिक, वहां मौजूद दो युवकों ने महिला पर फब्तियां कसीं और उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। जब परिवार के सदस्यों ने विरोध किया तो आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की। शिकायत में कहा गया है कि हमलावरों ने महिला के कपड़े फाड़ दिए और उसका मोबाइल फोन छीन लिया। जब महिला के पति ने मोबाइल वापस लेने की कोशिश की तो उनकी 20 ग्राम सोने की चेन भी छीन ली गई और उनके साथ भी मारपीट की गई। करीब 15 किमी तक पीछा किया नासिक पुलिस के मुताबिक, नासिक में ही रहने वाली पूनम भागवत 12 जुलाई की शाम अपने परिवार के साथ भावली वाटरफॉल घूमने गई थीं। इसी दौरान परिवार की लड़की के साथ कुछ स्थानीय युवकों ने छेड़छाड़ की। इस पर उन्होंने और उनके पति ने विरोध जताते हुए कहा कि आपको पता है यह पब्लिक प्लेस है। इतना सुनते ही दोनों युवकों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसका विरोध करने के बाद वे मौके से फरार हो गए। शिकायत के अनुसार, परिवार जब वहां से SUV में निकलने लगा तो आरोपियों ने कार और मोटरसाइकिल से उनका करीब 15 किमी तक पीछा किया। उन्होंने वाहन को ओवरटेक कर रास्ता रोक लिया। इसके बाद 8-9 लोग लाठी, लोहे की रॉड और बेसबॉल बैट लेकर आए, SUV का विंडशील्ड तोड़ दिया और महिला को जबरन बाहर खींच लिया। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की और एक आरोपी ने बेसबॉल बैट से उसके सिर पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह बच गई। किसी तरह परिवार वहां से निकलकर पुलिस थाने पहुंचा और घटना का वीडियो पुलिस को सौंपा। आरोपियों के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज : डॉ. स्वामी नासिक ग्रामीण SP डॉ. स्वामी ने बताया कि इगतपुरी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने मंगलवार को 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी गिरनारे, नांदगांव साडो, माणिकखांब और आसपास के गांवों के रहने वाले हैं। आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़, हत्या के प्रयास और डकैती सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें से एक आरोपी भोइर के खिलाफ वर्ष 2020-21 में हत्या का मामला भी दर्ज हो चुका है। मामले की आगे की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम ——————- ये खबर भी पढ़ें… ऋषिकेश में पर्यटकों पर हमला करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार:काले की ढाल क्षेत्र में मारपीट और तोड़फोड़ ऋषिकेश के काले की ढाल क्षेत्र में हरियाणा से आए पर्यटकों के साथ मारपीट, जानलेवा हमला और वाहन में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पीड़ितों की तहरीर पर 5 नामजद समेत अन्य अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

अलवर में बारिश,कोर्ट परिसर की सीढ़ियों पर बहने लगा पानी:सड़क पर 3 से 4 फीट तक भरा पानी, गाड़ियां खराब; अगले 5 दिन तेज बरसात की संभावना

अलवर में कई दिनों के बाद आज दोपहर 2 बजे बाद करीब एक घंटे तक अच्छी बारिश हुई है। अलवर कोर्ट परिसर सहित शहर की सड़क पानी से लबालब हो गई। महल चौक की सीढ़ियों से पानी झरने की तरह बहने लगा। कोर्ट की कैंटीन में भी पानी भर गया। यहां लोग डिब्बों में पानी भरकर बाहर निकालते नजर आए। अच्छी बारिश से आमजन को उमस से काफी राहत मिली है। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी रही। लेकिन बारिश नहीं होने से आमजन की चिंता भी बढ़ गई थी। अलवर शहर के बस स्टैंड से अशोका टॉकीज तक सड़क पर करीब 3 से 4 फीट तक पानी भर गया है कई स्कूटी खराब हो गई है जिनको पैदल भी पानी से निकालते लोग नजर आए कई दुकानों में पानी अंदर तक भर गया है। सुबह धूप दोपहर में बरसात आज सुबह से आसमान पूरी तरह साफ रहा और तेज धूप निकलने से गर्मी का असर बना रहा। हवा नहीं चलने के कारण लोगों को दिनभर उमस का सामना करना पड़ा और आमजन पसीने से तरबतर नजर आए। दोपहर बाद अचानक बादलों की आवाजाही से गर्मी से लोगों को राहत मिली। फिर अच्छी बारिश हुई। कहीं तेज बारिश हुई तो कहीं हल्की है। कुछ जगहों पर खेत भी पानी से भरे दिखे हैं। मौसम विभाग ने पहले 15 जुलाई तक मौसम सामान्य रहने का अनुमान जताया था, लेकिन मौसम में आए बदलाव को देखते हुए अब अगले 5 दिनों तक बादल छाए रहने, हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार, 14 से 19 जुलाई तक जिले में हल्की बारिश या बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। 15 जुलाई को अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री रहने का अनुमान है, जबकि आगामी दिनों में यह 37 से 38 डिग्री तक पहुंच सकता है। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

धार भोजशाला परिसर के पास हर शुक्रवार नमाज होगी:सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- मुस्लिम पक्ष को अलग जगह दें, ASI परिसर से छेड़छाड़ न करे

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को धार भोजशाला मंदिर के पास नमाज के लिए कोई खुला स्थान देने को कहा है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए यह जगह दी जाए। अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) बिना कोर्ट की मंजूरी परिसर में किसी भी तरह का बदलाव न करे। सुप्रीम कोर्ट MP हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें परिसर को मंदिर करार दिया गया है। सुनवाई के बाद भोजशाला संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार भोजशाला में नियमित पूजा-अर्चना जारी रहेगी। वहीं, तय जगह पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा कर सकेंगे। कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार किया सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर मुस्लिम पक्षों की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना गया था और परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगा दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यानी पहले जैसी व्यवस्था बहाल नहीं होगी, जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज और निर्धारित दिनों में हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस विवाद पर आगे की सुनवाई बाद में होगी। भोजशाला परिसर में कोई भी संरचनात्मक बदलाव नहीं होगा मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी की मांग स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में कोई भी संरचनात्मक बदलाव नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मामले की अंतिम सुनवाई करीब तीन सप्ताह बाद की जाएगी। मामले की सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर नोटिस जारी करने का फैसला किया। साथ ही, मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले पर जताई आपत्ति मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले से परिसर में वर्षों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने अदालत को बताया कि लंबे समय से शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता था, जबकि मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुस्लिम समुदाय को परिसर में प्रवेश और नमाज से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट और उसके आधार पर दिए गए निष्कर्षों पर भी सवाल उठाए। पूजा स्थल अधिनियम का दिया गया हवाला वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मुस्लिम पक्ष की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 की भावना और प्रावधानों के विपरीत है। उनका कहना था कि परिसर में लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है और इसके समर्थन में कई सरकारी अभिलेख भी उपलब्ध हैं। ऐसे में लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को बदलना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता। केंद्र सरकार ने अदालत को दी स्थिति की जानकारी केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से संभाला है। उन्होंने कहा कि आदेश लागू होने के बाद क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या सामने नहीं आई और प्रशासन ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखा है। हाईकोर्ट ने माना था मां सरस्वती का मंदिर गौरतलब है कि 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना था। अदालत ने परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया था। हाईकोर्ट का यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अब सर्वोच्च अदालत सभी पक्षों की दलीलें, एएसआई रिपोर्ट, ऐतिहासिक अभिलेख और कानूनी पहलुओं का परीक्षण करेगी। अदालत ने संकेत दिए हैं कि मामले की विस्तृत सुनवाई अगले दो से तीन सप्ताह के भीतर की जा सकती है। इस फैसले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव केवल भोजशाला विवाद तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों से जुड़े अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है। ये खबर भी पढ़ें… ट्विशा केस: गिरिबाला-समर्थ का फिर वॉयस सैंपल देने से इनकार:CBI बोली- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने से भोपाल AIIMS ने भी मना किया भोपाल में एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। CBI ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपियों ने वॉयस सैंपल नहीं दिया है। भोपाल AIIMS ने भी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने से मना किया है। पूरी खबर पढ़ें…

वांगचुक 17 दिन से अनशन पर, 8.5kg वजन घटा:कॉकरोच जनता पार्टी बोली- सरकार बेपरवाह; उद्धव-महुआ और अखिलेश की भूख हड़ताल खत्म करने की अपील

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मंगलवार को 17वां दिन है। उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। वजन 8.5kg कम हो गया है। अनशन शुरू होने पर वजन 67 किग्रा था। वांगचुक नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 28 जून से अनशन कर रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एक्टर नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, राइटर अरुंधति रॉय समेत कई प्रमुख हस्तियों ने सोनम से अनशन खत्म करने की अपील की है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कहा कि सरकार को वांगचुक की कोई चिंता नहीं है। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि वांगचुक की जान को खतरा है। सरकार को मांगों पर ध्यान देना चाहिए। सोनम के अनशन पर नेताओं-फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रिया सोनम वांगचुक 170 दिन जोधपुर जेल में रहे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए। सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया। CJI की टिप्पणी के बाद बनी CJP, युवाओं को कॉकरोच कहा था 15 मई को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। इसी टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत हुई। अगले दिन 16 मई को अमेरिका में रहने वाले अभिजीत दीपके ने CJP बनाई। 22 मई को उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसे 8 लाख से ज्यादा समर्थन मिलने का दावा किया गया। CJP का 8 शहरों में प्रदर्शन ———————————— ये खबरें भी पढ़ें… 3 इडियट्स के ‘चतुर’ बोले- नहीं चाहता फुंसुख मर जाएं, जीनत बोलीं- अपने अच्छे दिमाग को चुपचाप मरते हुए मत देखिए सोनम वांगचुक की हड़ताल को लेकर बॉलीवुड के लोग उनके समर्थन में आए हैं। ‘3 इडियट्स’ में चतुर रामलिंगम का किरदार निभा चुके ओमी वैद्य और एक्ट्रेस जीनत अमान ने सोशल मीडिया पर वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें… कॉकरोच पार्टी फाउंडर दीपके ने पुलिस के पैर पकड़े, जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की इजाजत मांगी नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 20 दिन से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने पुलिसवालों के पैर पकड़े और हाथ जोड़े। वे टेंट लगाने की इजाजत मांग रहे थे ताकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बारिश से बचाया जा सके। पूरी खबर पढ़ें…

सामूहिक विवाह में बचाए 23 लाख मंदिर निर्माण में लगेंगे:कहार समाज के प्रदेशाध्यक्ष बोले- सेवा-सत्संग से बड़ा धर्म कोई नहीं

टोंक जिले के मांडकला नगरफोर्ट में हाल ही में आयोजित कीर समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में हुई 23 लाख रुपए से अधिक की बचत राशि अब मंदिर निर्माण कार्य में खर्च की जाएगी। यह निर्णय कहार कीर-केवट-कश्यप-मेहरा विकास मंच और सामूहिक विवाह सम्मेलन समिति की संयुक्त बैठक में लिया गया। कहार कीर-केवट-कश्यप-मेहरा विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निजी सचिव हरिनंद कहार ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में सामूहिक विवाह सम्मेलन समय की जरूरत बन चुके हैं। इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है और लोग कर्ज के दबाव में आने से बच जाते हैं। समाज के सहयोग से हुई 23 लाख की बचत प्रदेशाध्यक्ष हरिनंद कहार ने कहा कि समाज के चौथे सामूहिक विवाह सम्मेलन में सभी लोगों के सहयोग और योगदान से कम खर्च में बेहतर आयोजन संभव हो पाया। सम्मेलन और मंदिर समिति की आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत करने के बाद 22 लाख 90 हजार 514 रुपए की बचत सामने आई है। उन्होंने बताया कि समाज की सहमति से इस पूरी राशि को श्रीहरि सद्गुरु कालू बाबा मांडकला नगरफोर्ट के निर्माणाधीन मंदिर में लगाया जाएगा। सेवा और सत्संग को बताया सबसे बड़ा धर्म हरिनंद कहार ने कहा कि सेवा और सत्संग से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। समाज को आगे बढ़ाने के लिए आपसी ईर्ष्या छोड़कर एकजुटता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने सकारात्मक सोच अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इसी से समाज और व्यक्ति दोनों अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। सम्मेलन की आय 49 लाख रुपए से अधिक रही समिति के महामंत्री और प्रवक्ता डॉ. नरेन्द्र मेहरा एडवोकेट ने बताया कि गणेश विदाई के अवसर पर सामूहिक विवाह सम्मेलन और मंदिर निर्माण समिति की संयुक्त बैठक जिलाध्यक्ष सायरलाल कीर की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सम्मेलन संयोजक किशनलाल कहार ने आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया। इसके अनुसार सामूहिक विवाह सम्मेलन से 46 लाख 84 हजार 947 रुपए और मंदिर समिति से 2 लाख 55 हजार 100 रुपए की आय हुई। इस प्रकार कुल आय 49 लाख 40 हजार 47 रुपए रही। वहीं कुल खर्च 26 लाख 49 हजार 533 रुपए हुआ, जिसके बाद 22 लाख 90 हजार 514 रुपए की बचत दर्ज की गई। 2027 में होगा पांचवां सामूहिक विवाह सम्मेलन बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 13 जून 2027 को गंगा दशमी के अवसर पर मांडकला नगरफोर्ट में समाज का पांचवां सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। समाज के सहयोगियों का किया सम्मान बैठक के दौरान सामूहिक विवाह सम्मेलन में सराहनीय योगदान देने वाले विद्वान पंडित तेज प्रकाश भंडारी, ऑनलाइन पोस्टर तैयार करने वाले प्रवीण मेहरा, हलवाई रामस्वरूप धाकड़, टेंट व्यवसायी देवकरण गुर्जर तथा अन्य भामाशाहों का सम्मान किया गया। शिक्षा पर जोर देने की अपील कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक बजरंग लाल मेहरा ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समाज को बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं प्रदेश संरक्षक मोतीलाल मेहरा चेयरमैन ने सभी सहयोगियों और समाजजनों का आभार व्यक्त किया। बैठक का संचालन महर्षि कश्यप स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूनी के निदेशक डॉ. नरेन्द्र मेहरा ने किया। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष हरिनंद कहार, मुख्य संरक्षक बजरंग लाल मेहरा, प्रदेश संरक्षक मोतीलाल मेहरा, जिलाध्यक्ष सायरलाल कीर, संयोजक किशनलाल कहार, पूर्व मंडी अध्यक्ष प्रभा मेहरा, सुमित्रा कहार, भगवान मेहरा, गोरधन कीर, फूलचंद कहार, डॉ. आदित्य कश्यप, हरिमोहन कहार, राजेश सिकरवाल, राजेन्द्र कहार, जितेन्द्र धीवर, जीतमल मलिया, राजूलाल कोटड़ा, श्रीलाल कीर, सत्यनारायण सेठी, मोहनलाल, गणपत, शिवराज फौजी और हरिराम महाराज सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।

जजों के रिटायरमेंट पर सुप्रीम-कोर्ट का सभी अदालतों को नोटिस:कहा- सभी पक्षों को सुनना जरूरी; अभी 61 की उम्र तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाए

सुप्रीम कोर्ट ने जजों की सेवा अवधि और रिटायरमेंट की उम्र से जुड़े मामले में देशव्यापी रुख अपनाते हुए फैसला सुनाया है। ऑल इंडिया जजों एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और देश के सभी हाईकोर्ट्स को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले में सभी जिला, स्टेट और निचली अदालतों को आज नोटिस भेजे गए हैं। 22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया है कि जब तक यह मामला अदालत में लंबित है, याचिकाकर्ताओं को 61 वर्ष की आयु पूरी होने तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाए। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। चीफ जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सोमवार 13 जुलाई को इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मुद्दा देश के सभी राज्यों और न्यायिक सेवाओं को प्रभावित करने वाला है, इसलिए सभी पक्षों का पक्ष सुनना जरूरी है। कोर्ट ने इस मामले को इसी तरह के एक अन्य लंबित मामले के साथ संलग्न करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई, 2026 को होगी। क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट पीठ मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को 61 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते उन्हें पहले ही सेवामुक्त न किया गया हो। बतादें, राजस्थान और देश के अन्य राज्यों के जिला एवं सत्र न्यायालयों और अन्य अधीनस्थ अदालतों के जजों की रिटायरमेंट की उम्र वर्तमान में 60 वर्ष है। अब इस आदेश के तहत जो जज सेवा में हैं वो 61 वर्ष की उम्र तक जज बने रह सकेंगे। — ये खबर भी पढ़ें… हाईकोर्ट ने कहा- भारत-पाक बॉर्डर पर हर-प्रॉपर्टी की होगी जांच:सीमा से सटे धार्मिक स्थल-निर्माणों पर सुनाया फैसला; जिला स्तर पर बनेगी कमेटी राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाक सीमा से सटे 0 से 50 किलोमीटर क्षेत्र स्थित धार्मिक स्थल और अन्य निर्माणों से जुड़े मामलों में फैसला सुनाते हुए कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च है। हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज करते हुए निर्दे​श ​दिए कि प्रत्येक संपत्ति की अलग-अलग जांच की जाएगी। नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा मामला होने के कारण इस मामले की सुनवाई सोमवार को बंद कमरे में हुई। (पूरी खबर पढ़ें)