ब्रेकिंग न्यूज़
जापान की मशहूर गेमिंग कंपनी:घाटा हुआ तो कोर बिजनेस बेचा; अब प्रतिद्वंद्वी को ही सॉफ्टवेयर बेचती है गेमिंग कंपनी सेगा

1993, हार्वर्ड के कुछ वैज्ञानिकों ने मानव भ्रूण के विकास के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण जीन की खोज की और नाम रखा ‘सोनिक हेजगॉग’। यह नाम सेगा कॉमिक बुक के कैरेक्टर ‘सोनिक’ पर रखा गया था। यह वही जापानी गेम है, जिसकी 2024 तक 177 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स बिक चुकी हैं। गेमिंग सॉफ्टवेयर के मामले में सेगा आज दुनिया की शीर्ष कंपनियों में शामिल है, लेकिन 1997 से 2001 के बीच एक ऐसा दौर भी आया जब सेगा का वजूद ही खत्म होने की कगार पर आ गया था। सेगा का कंसोल ‘सैटर्न’ सोनी के प्लेस्टेशन के सामने बुरी तरह पिट चुका था। फिर सेगा ने 1998 में पूरी ताकत झोंककर एक क्रांतिकारी कंसोल ‘सेगा ड्रीमकास्ट’ लॉन्च किया। यह दुनिया का पहला कंसोल था, जिसमें इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग के लिए इन-बिल्ट मोडेम था, लेकिन साल 2000 में सोनी ने इन-बिल्ट डीवीडी प्लेयर के साथ ‘प्लेस्टेशन-2’ की घोषणा कर दी। इसने ड्रीमकास्ट के बाजार को पूरी तरह खत्म कर दिया। कंपनी पांच वर्षों तक भारी घाटे में डूबी रही। स्थिति इतनी बदतर हो गई कि जनवरी 2001 में सेगा को घोषणा करनी पड़ी कि वह गेमिंग हार्डवेयर (कंसोल) बनाने का काम हमेशा के लिए बंद कर रही हैं। कंपनी ने गेमिंग सॉफ्टवेयर बनाने शुरू किए। वर्तमान स्थिति- करीब 30 हजार करोड़ रु. की कंपनी है सेगा सेगा वर्तमान में करीब 30 हजार करोड़ रुपए की कंपनी है। सेगा ने 2023 में फिनलैंड की एंग्री बर्ड्स बनाने वाली कंपनी रोवियो का करीब 7 हजार करोड़ रुपए में अधिग्रहण किया, जिससे मोबाइल गेमिंग सेगमेंट में उसकी पकड़ मजबूत हुई। कंपनी अमेरिका और यूरोप में क्षेत्रीय मुख्यालयों-सेगा ऑफ अमेरिका और सेगा-यूरोप के जरिए अपना व्यापार चलाती है। कंपनी ने एनएसई में सूचीबद्ध कंपनी प्रमारा प्रमोशंस के साथ भारत में रणनीतिक साझेदारी की है। इसके तहत क्रेयान शिनचैन सहित सेगा के लाइसेंस्ड कैरेक्टर अब भारत में भी बनाए जांएगे। यूं संकट में फंसी थी… अनावश्यक प्रयोग – सफल कंसोल ‘सेगा जेनेसिस’ के बाद सेगा सीडी और 32एक्स जैसे महंगे पर कम गुणवत्ता वाले पेरिफेरल्स लॉन्च किए। इससे गेम डेवलपर्स नाराज हो गए। आम ग्राहक भी भ्रमित हुए। सैटर्न कंसोल का विनाशकारी लॉन्च – 1995 में कंसोल ‘सेगा सैटर्न’ को अचानक लॉन्च किया। रिटेलर्स के पास स्टॉक नहीं था। तभी सोनी ने प्लेस्टेशन की कीमत सेगा से 100 डॉलर कम कर दी। सोनी प्लेस्टेशन-2 की सुनामी भांपने में नाकामी – सोनी ने प्लेस्टेशन 2 में डीवीडी प्लेयर की सुविधा भी दी थी। ग्राहकों ने सेगा का ड्रीमकास्ट खरीदने के बजाय प्लेस्टेशन 2 को वरीयता दी। भयंकर वित्तीय घाटा और नकदी संकट – कंपनी को हर महीने करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा था। कर्ज इतना हो गया कि दिवालिया होना तय माना जा रहा था। इस तरह की वापसी… प्योर सॉफ्टवेयर पब्लिशर मॉडल में बदलाव – सेगा ने खुद को एक थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर पब्लिशर के रूप में स्थापित किया। इसका फायदा यह हुआ कि अब वह गेम्स को पूर्व प्रतिद्वंद्वियों के प्लेटफॉर्म पर बेचने लगी। सेगा-सैमी का ऐतिहासिक विलय – 2004 में सेगा ने जापानी गेमिंग और पैचिनको जायंट ‘सैमी कॉर्पोरेशन’ के साथ मर्जर कर लिया। सैमी के पास नकदी का भारी भंडार था। इसने कर्ज के बोझ को खत्म कर दिया। चेयरमैन ओकावा का बलिदान – जब 2001 में सेगा डूब रही थी, तब तत्कालीन चेयरमैन इसाओ ओकावा ने कंपनी को दिया गया करीब 3200 करोड़ रु. का व्यक्तिगत कर्ज माफ कर दिया। शेयर दान कर दिए। ग्लोबल स्टूडियोज का अधिग्रहण – सेगा ने केवल ‘सोनिक’ पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया भर के बेहतरीन गेमिंग स्टूडियोज को खरीदा। पहुंच बढ़ाई। शुरुआत – अमेरिकी व्यवसायियों ने रखी थी इस गेमिंग कंपनी की नींव 1940 में होनोलूलू, अमेरिका में 3 अमेरिकी व्यवसायियों-मार्टिन ब्रोमली, इरविंग ब्रॉम्बर्ग और जेम्स हम्पर्ट ने ‘स्टैंडर्ड गेम्स’ के रूप में नींव रखी। उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों के मनोरंजन के लिए सिक्कों से चलने वाली स्लॉट मशीनें उपलब्ध कराना था। 1951 में, जब इन मशीनों पर पाबंदी लगी तो संस्थापकों ने बिजनेस टोक्यो शिफ्ट कर दिया। विरासत – पारंपरिक प्रीमियम कंसोल को ही बढ़ाने की तैयारी कंपनी का पूरा फोकस पारंपरिक प्रीमियम कंसोल को ही आगे बढ़ाने पर है। इसी के तहत मई 2026 में सेगा ने बहुप्रतीक्षित एक अरब डॉलर की ‘सुपर गेम’ परियोजना को रद्द कर दिया है। साथ ही प्रीमियम कंसोल-पीसी गेम्स पर फोकस लौटाने का ऐलान किया है। वित्त वर्ष 2026-27 में 30 हजार करोड़ रु. से अधिक की बिक्री का अनुमान है। ऐसे पड़ा नाम – जापान पहुंचने पर इसका नाम servic games of Japan पड़ा। फिर सर्विस और गेम्स के दो-दो शब्द मिलाकर नाम SEGA कर दिया गया। सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी – गेमिंग इतिहास में इसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी निनटेंडो रहा है। सोनी के प्ले स्टेशन ने भी सेगा सैटर्न और ड्रीमकास्ट को बाजार से बाहर किया।

देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर:₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू होगा ट्रायल, 2027 में फुल-स्केल लॉन्च की उम्मीद

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने की RBI के प्लान का अगला कदम है। ₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू होगा ट्रायल रिजर्व बैंक शुरुआती फेज में सबसे पहले छोटी वैल्यू के नोटों पर इसकी टेस्टिंग करेगा। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहला पायलट प्रोजेक्ट ₹10 और ₹20 वैल्यू के छोटे नोटों के साथ शुरू होने की उम्मीद है। इस ट्रायल के नतीजों और अनुभवों के आधार पर ही RBI आगे का फैसला लेगा। अगर यह टेस्टिंग पूरी तरह सफल रही, तो आरबीआई साल 2027 से देश में इन पॉलीमर नोटों का फुल-स्केल लॉन्च शुरू कर सकता है। नए नोट के साथ पुराने कागजी नोट भी चलेंगे भारतीय बाजार में पॉलीमर नोटों के आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत चलन से बाहर हो जाएंगे। RBI ने साफ किया है कि नई करेंसी पुराने पेपर नोटों की जगह नहीं लेगी। RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर इस पूरे प्रोजेक्ट की तैयारियां तब तेज हो गईं, जब आरबीआई की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने ग्लोबल लेवल पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जारी किया। यह टेंडर विशेष प्रकार की ‘पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट’ की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए मंगाया गया है, जिसका इस्तेमाल इन नोटों को छापने के लिए किया जाता है। डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर को एडवांस सेफ्टी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट की सप्लाई के लिए इनवाइट किया गया है। इस टेंडर के तहत बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त तय की गई है। नए नोट फटेंगे नहीं, पानी-धूल से भी सुरक्षित रहेंगे पॉलीमर से बने बैंकनोट ट्रेडिशनल कागजी नोटों की तुलना में बहुत ज्यादा टिकाऊ होते हैं। यह नोट पानी, गंदगी और धूल में भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा यह नोट आसानी से फटते भी नहीं हैं। इस वजह से ये बाजार में लंबे समय तक बिना फटे और साफ-सुथरे बने रहते हैं। पॉलीमर शीट का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें एडवांस सेफ्टी फीचर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे नकली नोट बनाने वाले जालसाजों के लिए इनकी नकल करना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे देश का सेफ्टी सिस्टम और मजबूत होगा। दुनिया के कई बड़े देशों में पहले से चल रहे पॉलीमर नोट पॉलीमर बैंकनोट का इस्तेमाल दुनिया के कई विकसित देशों में बहुत समय से किया जा रहा है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। RBI ने पहले भी देश में चलने वाले नोटों की लाइफ बढ़ाने और उनकी क्वालिटी सुधारने के लिए पॉलीमर नोट लाने की इच्छा जताई थी। अब जल्द शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट पहला वास्तविक टेस्ट होगा। हालांकि, RBI की ओर से इस पर अब तक कोई ऑफिशियल बयान सामने नहीं आया है। क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट? ये नोट कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। क्या होता है एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट? यह एक तरह का ग्लोबल टेंडर डॉक्यूमेंट होता है, जिसके जरिए रिजर्व बैंक दुनिया भर की अनुभवी और योग्य कंपनियों को प्रोजेक्ट के लिए अपनी क्षमता, तकनीक और कीमतों के साथ प्रस्ताव भेजने का न्योता देता है। ये खबर भी पढ़ें… एयर इंडिया का नया एप लॉन्च: फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर होम स्क्रीन पर फ्री होटल-कैब की डिटेल मिलेगी, पेमेंट भी आसान होगा एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें…

सोना आज ₹415 सस्ता हुआ, इस हफ्ते ₹2,104 गिरा:चांदी ₹797 गिरी, सात दिन में ₹3,753 की गिरावट; जानें अपने शहर के दाम

सोने-चांदी की कीमतों में 17 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 415 रुपए गिरकर 1,41,264 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले 16 जुलाई को यह 1,41,679 लाख पर था। वहीं, एक किलो चांदी 797 रुपए घटकर 2,16,637 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 2,17,434 लाख रुपए पर थी। सोना के दाम इस हफ्ते 2,104 रुपए और चांदी के दाम 3,753 रुपए गिरे हैं। 10 जुलाई को सोना ₹1,43,368 10 ग्राम और चांदी ₹2,20,390 किलो थी। ऑल टाइम हाई से 1.69 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 34,857 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 169 दिन में चांदी 1,69,296 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़कर 15% हुई केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। सरकार का मकसद विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना है। अमेरिकी-ईरान जंग के बीच सरकार ने ये फैसला लिया है। सरकार ने सोने पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया है। इस तरह कुल प्रभावी टैक्स 15% हो गया है। इससे पहले 2024 के बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटाकर 6% की थी। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका को टक्कर देने आया चीन का AI मॉडल:किमी K3 में इंसानों जैसी आंखें और दिमाग; कोडिंग और रिसर्च मिनटों में करेगा

चीनी कंपनी मूनशॉट AI ने अपना नया AI मॉडल किमी K3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स वाला दुनिया का पहला ओपन मॉडल है। इसमें 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है। पिछले मॉडल किमी K2 की तुलना में इसकी स्केलिंग दक्षता करीब 2.5 गुना बेहतर है। इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए एआई मॉडल एक इंसानी दिमाग की तरह है, जिसे एक बहुत बड़ी परीक्षा की तैयारी करनी है। 1. पैरामीटर्स क्या हैं? पैरामीटर्स को आप एआई का ‘अनुभव’ मान सकते हैं। एक बच्चा जब बड़ा होता है, तो वह जितनी ज्यादा बातें सीखता है, उसका दिमाग उतना ही तेज चलता है। एआई की दुनिया में जिस मॉडल के पास जितने ज्यादा पैरामीटर्स होते हैं, वह उतना ही समझदार माना जाता है। 28 लाख करोड़ पैरामीटर्स होने का मतलब है कि इस मॉडल का दिमाग बेहद विशाल है और यह बहुत ही पेचीदा और मुश्किल सवालों को इंसानों की तरह समझकर हल कर सकता है। 2. 3T क्लास क्या है? यहां ‘T’ का मतलब है ट्रिलियन। चूंकि इस मॉडल में 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स हैं, जो कि 3 ट्रिलियन (3.0T) के बेहद करीब है, इसलिए इसे ‘3T क्लास’ का मॉडल कहा गया है। एआई की दुनिया में 3T क्लास में पहुंचना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इतने बड़े मॉडल अब तक सिर्फ अमेरिका की ओपन एआई जैसी चुनिंदा कंपनियों के पास ही थे। 3. 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो क्या है? कॉन्टेक्स्ट विंडो का मतलब है एआई की ‘याददाश्त’ या एक बार में पढ़ने की क्षमता। जब आप एआई से चैट करते हैं, तो वह एक बार में कितना लंबा पैराग्राफ या दस्तावेज याद रख सकता है, यही उसकी कॉन्टेक्स्ट विंडो है। उदाहरण: एक आम एआई मॉडल को अगर आप 5-10 पन्ने देंगे, तो वह उसे पढ़ लेगा, लेकिन पूरी किताब देने पर उसके हाथ-पैर फूल जाएंगे। किमी K3 की 10 लाख टोकन की क्षमता का मतलब है कि आप इसे पूरी की पूरी मोटी किताब, हजारों लाइनों का कंप्यूटर कोड या साल भर की बैंक स्टेटमेंट एक साथ दे दीजिए; यह एक सेकंड में उस पूरी जानकारी को दिमाग में रखकर आपको उसका सटीक विश्लेषण करके दे देगा। 4. स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर होने का क्या मतलब है? ‘स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर’ होने का मतलब है कि मूनशॉट कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर को इतना कुशल बना दिया है कि यह अपने पिछले मॉडल के मुकाबले ढाई गुना कम कंप्यूटर पावर और खर्चे में, उससे कहीं ज्यादा तेजी से और बड़ा काम कर सकता है। 5. ‘ओपन मॉडल’ होने का क्या फायदा है? अब तक अमेरिका की कंपनियां अपने इतने बड़े मॉडल्स को छुपाकर रखती हैं। इसे क्लोज्ड मॉडल कहते हैं। वे सिर्फ आपको इस्तेमाल करने देती हैं, लेकिन यह नहीं बतातीं कि इसे अंदर से कैसे बनाया गया है। चीन की कंपनी ने इसे ‘ओपन मॉडल’ रखा है। इसका मतलब है कि वह इस शक्तिशाली दिमाग की ‘ब्लूप्रिंट’ दुनिया भर के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और वैज्ञानिकों के लिए मुफ्त या खुले तौर पर जारी कर देगी। इससे दुनिया का कोई भी आम इंजीनियर इस एआई को लेकर अपने हिसाब से बदल सकता है, नया ऐप बना सकता है या अपने काम में इस्तेमाल कर सकता है। मूनशॉट 27 जुलाई को ओपन करेगा अपना सीक्रेट फॉर्मूला मूनशॉट AI ने ब्लॉग में बताया कि Kimi K3 को ‘किमी डेल्टा अटेंशन’ और ‘अटेंशन रेजिड्यूल्स’ पर बनाया गया है। इसमें नेटिव विजन क्षमताएं भी हैं। यह मॉडल कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग जैसे जटिल कामों के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसके फुल मॉडल वेट्स 27 जुलाई तक जारी कर दिए जाएंगे। 1. ‘किमी डेल्टा अटेंशन’ और ‘अटेंशन रेजिड्यूल्स’ क्या है? उदाहरण से समझिए: जब आप कोई बहुत मोटी किताब पढ़ते हैं, तो क्या आप हर एक शब्द पर बराबर ध्यान देते हैं? नहीं। आपका दिमाग केवल मुख्य शब्दों और जरूरी लाइनों पर ‘अटेंशन’ देता है और फालतू शब्दों को छोड़ देता है। फायदा: मूनशॉट AI ने ‘किमी डेल्टा अटेंशन’ और ‘अटेंशन रेजिड्यूल्स’ नाम का जो नया फॉर्मूला बनाया है, वह इस एआई को यही सुपर पावर देता है। जब आप इसे बहुत बड़ा काम या लाखों शब्दों की फाइल देते हैं, तो यह तकनीक एआई के दिमाग को भटकने नहीं देती। यह केवल सबसे जरूरी पॉइंट पर फोकस करती है और पुरानी पढ़ी हुई बातों का ‘असर’ (रेजिड्यूल्स) दिमाग में बनाए रखती है। इससे एआई बिना थके और बिना गलती किए बहुत तेजी से काम कर लेता है। 2. ‘नेटिव विजन क्षमताएं’ क्या हैं? उदाहरण से समझिए: पहले के एआई सिर्फ टेक्स्ट समझ सकते थे। अगर आप उन्हें फोटो दिखाते, तो उन्हें पहले उस फोटो को शब्दों में बदलना पड़ता था, तब वो समझ पाते थे। लेकिन ‘नेटिव विजन’ का मतलब है कि Kimi K3 के पास देखने की क्षमता है। फायदा: आप इसे कोई फोटो, कोई पेचीदा ग्राफ, मेडिकल स्कैन (जैसे एक्स-रे या एमआरआई) या कोई वीडियो दिखाएंगे, तो यह उसे इंसानी आंखों की तरह देखकर तुरंत समझ जाएगा और उस पर आपके सवालों के जवाब दे देगा। 3. कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग का क्या मतलब है? कंपनी का कहना है कि यह मॉडल तीन बड़े काम करेगा: लॉन्ग-होराइजन कोडिंग : इसका मतलब सिर्फ छोटा-मोटा कोड लिखना नहीं है। यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की तरह एक साथ हजारों लाइनों का पूरा का पूरा बड़ा कंप्यूटर प्रोग्राम या ऐप खुद लिख सकता है और उसमें कमियां ढूंढकर ठीक कर सकता है। नॉलेज वर्क: यह रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और बड़े वकीलों की तरह काम कर सकता है। सालों पुरानी फाइलों को खंगालना, बड़े कानूनी मामलों का विश्लेषण करना या किसी विषय पर पूरी रिसर्च रिपोर्ट तैयार करना इसके लिए चुटकियों का काम है। रीजनिंग: इसका मतलब है ‘सोचने-समझने और तर्क करने की क्षमता’। यह सिर्फ रटी-रटाई बातें नहीं बताएगा, बल्कि इंसानों की तरह गणित के मुश्किल सवालों या बिजनेस की उलझनों में ‘अगर-मगर’ लगाकर सही फैसला लेने में मदद करेगा। अमेरिका के लेटेस्ट AI मॉडल्स से पीछे है Kimi K3 कंपनी ने माना कि Kimi K3 का प्रदर्शन अमेरिका के क्लॉड फेबल 5 और GPT 5.6 Sol जैसे मॉडल्स से पीछे है। हालांकि, कई बेंचमार्क टेस्ट में इसने अमेरिका के पुराने मॉडल्स को पीछे छोड़ दिया है। मूनशॉट AI को चीनी कंपनी अलीबाबा और टेनसेंट का समर्थन हासिल है। चीनी फर्मों ने 24 हजार फर्जी अकाउंट बनाकर चुराया डेटा इसी बीच, अमेरिकी कंपनियों ने चीनी फर्मों के सस्ते में मॉडल जारी करने पर चिंता जताई है। एंथ्रोपिक ने आरोप लगाया है कि डीपसीक, मूनशॉट और मिनीमैक्स ने उनके मॉडल की क्षमताओं को अवैध रूप से निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए। एंथ्रोपिक के मुताबिक, करीब 24,000 फर्जी खातों से 1.6 करोड़ बार क्लॉड का इस्तेमाल किया गया।

एयर इंडिया का नया एप लॉन्च:फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर होम स्क्रीन पर फ्री होटल-कैब की डिटेल मिलेगी, पेमेंट भी आसान होगा

एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। ऐसी किसी भी स्थिति में होटल में ठहरने और वहां तक जाने के लिए कैब की पूरी जानकारी सीधे एप की होम स्क्रीन पर ही मिलेगी। इसके साथ ही एप के पेमेंट सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है, जिससे टिकट बुक करना और पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इन-हाउस बुकिंग इंजन से तेजी से बुक होंगे टिकट हर दिन 1 लाख से ज्यादा लोग करते हैं एप का इस्तेमाल एअर इंडिया के मुताबिक, एप अब तक करीब 1.7 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके साथ ही, रोजाना 1 लाख से ज्यादा यात्री अपनी यात्रा से जुड़े कामों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी का मानना है कि नया अपग्रेड ग्राहकों की जरूरतों पर तुरंत रिस्पॉन्स देने में मदद करेगा। टाटा ने अब तक 140 से ज्यादा डिजिटल सिस्टम बदले घाटे में चल रही एअर इंडिया को जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप ने खरीदा था। इसके बाद से ही एयरलाइन के कायाकल्प के लिए एक बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन प्लान चलाया जा रहा है। टाटा ग्रुप के टेकओवर करने के बाद से अब तक कंपनी के 140 से अधिक डिजिटल सिस्टम्स को पूरी तरह से आधुनिक और अपग्रेड किया जा चुका है। एप का यह नया अपडेट भी इसी डिजिटल सुधार प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया दुनिया की चौथी ऑन-टाइम एयरलाइन बनी: जून में 86.85% फ्लाइट्स टाइम पर पहुंचीं; सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा टाटा ग्रुप की एअर इंडिया दुनिया की चौथी सबसे पंक्चुअल (समय की पाबंद) एयरलाइंस बन गई है। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया की लगभग 86.85% फ्लाइट्स यानी 100 में से 87 उड़ानें बिल्कुल तय समय पर पहुंची हैं। टाटा ग्रुप की स्वामित्व वाली एयरलाइन ने जून महीने में अपनी कुल 15,135 उड़ानें ऑपरेट कीं। एअर इंडिया ने सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा है। एविएशन के नियमों के मुताबिक, कोई फ्लाइट अपने तय समय से 15 मिनिट में उड़ान भर लेती है, तो उसे राइट टाइम माना जाता है। पूरी खबर पढ़ें…

सेंसेक्स 750 अंक चढ़कर 77,900 पर पहुंचा:निफ्टी भी 190 ऊपर 24,260 पर; आईटी, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी

आज यानी शुक्रवार, 17 जुलाई को सेंसेक्स 750 अंक (0.98%) की तेजी के साथ 77,900 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 190 अंकों (0.80%) की तेजी है, ये 24,250 पर पहुंच गया है। आज के कारोबार में आईटी, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी है। नतीजे आने से पहले 2.4% चढ़ा रिलायंस का शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज के जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे आज बाजार बंद होने के बाद जारी होने वाले हैं। इन नतीजों की घोषणा से पहले रिलायंस का शेयर 2.4% की तेजी के साथ ₹1,323.80 के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया। पिछले कुछ समय से मुकेश अंबानी की इस कंपनी का स्टॉक लगातार दबाव में देखा गया है। यह शेयर पिछले 1 महीने में 1%, 3 महीने में 3.5%, 6 महीने में 9.5% और पिछले 1 साल में करीब 11% तक नीचे आ चुका है। एशियन मार्केट गिरे: साउथ कोरिया का इंडेक्स 6% से ज्यादा गिरा कल अमेरिकी बाजार में भी गिरावट रही विदेशी निवेशकों ने कल 4206 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स फ्लैट बंद हुआ था शेयर बाजार कल यानी 16 जुलाई को फ्लैट बंद हुआ। सेंसेक्स 1 अंक की बढ़त के साथ 77,186 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 5 अंक गिरकर 24,072 के स्तर पर आ गया। रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली रही।

IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च:डीजल-ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, पेट्रोल पर घटी; इंस्टाग्राम पर एडिट फीचर से बैकडेट की जा रहीं पोस्ट

कल की बड़ी खबर रेलवे से जुड़ी रही। भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। वहीं, केंद्र सरकार ने डीजल और विमान ईंधन यानी ATF के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी में बढ़ोतरी की है। वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को कम कर दिया है। डीजल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ₹8.50 से बढ़ाकर ₹15.50 प्रति लीटर कर दी है। यानी इसमें प्रति लीटर 7 रुपए का इजाफा किया गया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च: सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट’ फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. डीजल-ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, पेट्रोल पर कम हुई: देश में फ्यूल की कमी रोकने के लिए लिया फैसला, नई दरें 16 जुलाई से लागू केंद्र सरकार ने डीजल और विमान ईंधन यानी ATF के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी में बढ़ोतरी की है। वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को कम कर दिया है। डीजल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ₹8.50 से बढ़ाकर ₹15.50 प्रति लीटर कर दी है। यानी इसमें प्रति लीटर 7 रुपए का इजाफा किया गया है। इसी तरह ATF यानी हवाई जहाज के ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹7.50 से बढ़ाकर ₹14.50 प्रति लीटर कर दी गई है। हालांकि, पेट्रोल एक्सपोर्टर्स को थोड़ी राहत देते हुए इस पर लगने वाली ड्यूटी को ₹4 से घटाकर ₹2.50 प्रति लीटर की है। ईंधन की ये नई दरें 16 जुलाई से देश भर में लागू हो गई हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. इंस्टाग्राम पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का खेल: एडिट फीचर से बैकडेट की जा रहीं पोस्ट; दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे दो डिजिटल क्रिएटर्स इंस्टाग्राम पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए मेटा के कॉपीराइट सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अज्ञात लोग फेसबुक के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पोस्ट की तारीख बैकडेट में कर देते हैं और फिर असली क्रिएटर्स के कंटेंट पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक भेज रहे हैं। इस खेल के खिलाफ दो बड़े डिजिटल क्रिएटर्स पुष्कर राज ठाकुर और नीरज जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट में कॉमर्शियल सूट फाइल किया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. सोना ₹189 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया: चांदी ₹680 बढ़कर ₹2.20 लाख किलो पर पहुंची, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत सोने के दाम में 16 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 189 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। वहीं एक किलो चांदी 680 रुपए बढ़कर 2.20 लाख रुपए पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा: रेवेन्यू 10% बढ़ा, कंपनी ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया; एट्रिशन रेट 13.9% रहा आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए…

इंपैक्ट फीचर:भारत का उभरता हुआ उच्च तकनीकी एवं मेडिकल शिक्षण संस्थान; शेखावटी ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स, सीकर (राजस्थान)

राजस्थान की धरती से शुरू हुई एक शैक्षणिक क्रांति, जो आज तकनीकी, मेडिकल और रोजगारोन्मुख शिक्षा का राष्ट्रीय मॉडल बनती जा रही है। भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। आज केवल डिग्री ही सफलता का पैमाना नहीं रही, बल्कि रोजगार, कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और वैश्विक अवसरों के लिए तैयार होना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ऐसे दौर में कुछ संस्थान केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि भविष्य का निर्माण करते हैं। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित शेखावटी ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। आज SGI केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक बहु-विषयक शैक्षणिक इकोसिस्टम बन चुका है, जहां आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा, अनुसंधान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्लेसमेंट और व्यक्तित्व विकास को एक ही परिसर में समाहित किया गया है। संस्थान के अनुसार, पिछले 26 वर्षों में इसने हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, सरकारी सेवाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक सपना जिसने बदल दी हजारों युवाओं की दिशा हर बड़ी संस्था की शुरुआत एक विचार से होती है। SGI की कहानी भी एक ऐसे ही संकल्प से शुरू हुई। संस्थान की स्थापना इंजीनियर रणजीत सिंह ने उस समय की, जब अधिकांश युवा इंजीनियरिंग के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों या विदेशों की ओर बढ़ना चाहते थे। कम्प्यूटर साइंस इंजीनियर होने के बावजूद उन्होंने अलग राह चुनी। उनका विश्वास था कि यदि गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो, तो प्रतिभाशाली युवाओं को अपने सपनों के लिए महानगरों या विदेशों की ओर पलायन नहीं करना पड़े। इसी सोच के साथ 6 मई 2001 को कम्प्यूटर एवं प्रोफेशनल एजुकेशन से शुरुआत हुई। प्रारंभ में BBA, BCA, MBA और MCA जैसे रोजगारोन्मुख कार्यक्रम संचालित किए गए। समय के साथ यह प्रयास राजस्थान के अग्रणी तकनीकी एवं मेडिकल शिक्षण समूहों में विकसित हो गया। लगभग 90 एकड़ में फैला हरित एवं आवासीय परिसर विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए तैयार किया गया है। एक ही परिसर में 50 से अधिक रोजगारोन्मुख कार्यक्रम बहु-विषयक शिक्षा की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए SGI एक ही परिसर में 50+ Professional एवं Career-Oriented Programmes संचालित करता है। इनमें— Engineering, Artificial Intelligence Machine Learning, Data Science, Agriculture, BCA, MCA, BBA, MBA, Commerce, Science, Arts, Pharmacy, Nursing,Paramedical,Veterinary Science, Ayurveda, BNYS, Homeopathy, Clinical Psychology, Hotel Management, Teacher Education, Law, Polytechnic, ITI सहित अनेक Degree एवं Diploma Programmes शामिल हैं। Degree भी… Government Job की तैयारी भी आज लाखों युवाओं का सपना IAS, RAS, SSC, Banking, Railway, Defence, Police, Patwari, REET, RPSC, CET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए SGI ने ऐसा शैक्षणिक मॉडल विकसित किया है, जिसमें विद्यार्थी नियमित Graduation के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्थित तैयारी भी कर सकते हैं। संस्थान के विद्यार्थियों ने REET, RPSC, RAS, SSC, CET, Police, Patwari तथा Teacher Recruitment सहित अनेक सरकारी सेवाओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। विशेष रूप से CET में लगभग 60% चयन तथा अनेक बैचों के विद्यार्थियों का विभिन्न सरकारी विभागों में चयन संस्थान की उपलब्धियों को दर्शाता है। यहां डिग्री के साथ Placements की जिम्मेदारी भी निभाई जाती है। इसी विज़न के साथ SGI ने शिक्षा, कौशल विकास और Industry Connect का ऐसा सशक्त मॉडल विकसित किया है, जिसने इसे Academic Excellence के साथ-साथ Placement Excellence की भी पहचान दिलाई है। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास, Communication Skills, Resume Building, Mock Interviews, Corporate Grooming, Internships और Career Development Programmes के माध्यम से विद्यार्थियों को पहले दिन से ही Industry Ready बनाया जाता है। इसी सुदृढ़ तैयारी का परिणाम है कि प्रत्येक वर्ष SGI परिसर में विभिन्न विभागों के लिए दो भव्य Mega Placement Drives आयोजित किए जाते हैं। देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ SGI पहुँचती हैं और Engineering, Information Technology, Agriculture, Management, Pharmacy, Healthcare, Education तथा अन्य Professional Domains के विद्यार्थियों को उत्कृष्ट करियर अवसर प्रदान करती हैं। यह केवल Placement Drive नहीं… यह वर्षों की Academic Excellence पर उद्योग जगत के विश्वास का प्रमाण है। पिछले 25 वर्षों में SGI का 40,000 से अधिक Alumni Network देश और विदेश के विभिन्न उद्योगों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, कॉर्पोरेट संगठनों, स्टार्टअप्स तथा सरकारी सेवाओं में अपनी सफलता की नई पहचान बना चुका है। आज SGI का कोई न कोई विद्यार्थी भारत के लगभग हर प्रमुख सेक्टर में अपनी प्रतिभा का योगदान दे रहा है। इस गौरवशाली यात्रा के पीछे है संस्थान के Chairman रणजीत सिंह की दूरदर्शी सोच—एक ऐसा विज़न जिसने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे रोजगार, कौशल, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा। यही कारण है कि आज Shekhawati Group of Institutions, Sikar केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं… बल्कि हजारों परिवारों के विश्वास, लाखों सपनों और सफल करियर की पहचान बन चुका है। SGI Sikar… जहाँ Academic Excellence से शुरू होती है यात्रा, और Placement Excellence पर बनती है सफलता की नई कहानी। Key Highlights देश-विदेश की प्रतिष्ठित Multinational Companies, Hospitals, Research Organisations, Educational Institutions तथा Government Departments में कार्यरत हजारों Alumni संस्थान की गुणवत्ता के सशक्त प्रमाण हैं। सम्मान जो गुणवत्ता की गवाही देते हैं SGI की शैक्षणिक उत्कृष्टता को समय-समय पर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है। संस्थान के संस्थापक एवं अध्यक्ष इंजीनियर रणजीत सिंह को उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा के लिए भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किया गया। संस्थान को Hindustan Times, Bikaner Technical University, Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र तथा भारत सरकार के केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा भी विभिन्न अवसरों पर सम्मान प्राप्त हुए हैं। ये सम्मान संस्थान की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्कृष्ट शिक्षा के प्रमाण हैं। Learn Today. Lead Tomorrow. Admissions Open | Session 2026–27

टेक महिंद्रा का मुनाफा 28% बढ़कर ₹1,465 करोड़:पहली तिमाही में रेवेन्यू 17.6% बढ़ा, कंपनी की टोटल इनकम ₹15,605 करोड़ रही

टेक महिंद्रा का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 28% बढ़कर ₹1,465 करोड़ हो गया। एक साल पहले की समान तिमाही (Q1FY26) में कंपनी को ₹1,140 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (16 जुलाई) को कंपनी ने पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी किए हैं। नतीजों के पहले टेक महिंद्रा का शेयर 1.13% बढ़कर 1,515 रुपए पर बंद हुआ। बीते एक साल में शेयर 6% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.48 लाख करोड़ रुपए है। रेवेन्यू 17.67% बढ़कर ₹15,711 करोड़ रहा टेक महिंद्रा के ऑपरेशन से रेवेन्यू में सालाना आधार पर 17.67% की बढ़ोतरी हुई है। FY27 की पहली तिमाही में ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹15,711 करोड़ रहा। एक साल पहले की समान तिमाही यानी FY26 की पहली तिमाही में रेवेन्यू ₹13,351 करोड़ रहा था। पहली तिमाही में कंपनी की टोटल इनकम सालाना आधार (YoY) पर 15% बढ़कर 15,605 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की समान तिमाही में 13,569 करोड़ रुपए थी। कॉन्सोलिडेटेड यानी पूरी कंपनी की रिपोर्ट कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। ये खबर भी पढ़ें… विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा: रेवेन्यू 10% बढ़ा, कंपनी ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया; एट्रिशन रेट 13.9% रहा आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पूरी खबर पढ़ें…

विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा:रेवेन्यू 10% बढ़ा, कंपनी ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया; एट्रिशन रेट 13.9% रहा

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 3,330 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। हालांकि विप्रो का रेवेन्यू एनालिस्ट के अनुमान से कम रहा। नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर 2 रुपए के डिविडेंड की भी ऐलान किया। रेवेन्यू 10.6% बढ़ा, लेकिन अनुमान से कम रहा पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.6% बढ़कर 24,479 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके बावजूद यह रॉयटर्स-LSEG के डेटा के अनुसार एनालिस्ट के औसत अनुमान (24,776 करोड़ रुपए) से कम रहा। अगर तिमाही आधार पर देखें, तो कंपनी के ग्रॉस रेवेन्यू में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आईटी सर्विसेज की परफॉर्मेंस और रेवेन्यू विप्रो के आईटी सर्विसेज बिजनेस का रेवेन्यू 2.61 बिलियन डॉलर रहा। यह सालाना आधार पर तो 1% ज्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 1.4% की गिरावट आई है। कॉन्सटेंट करेंसी के लिहाज से आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.2% की गिरावट और सालाना आधार पर 0.9% की बढ़त देखी गई है। लार्ज डील बुकिंग में 12.9% का उछाल तिमाही के दौरान विप्रो की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो कॉन्सटेंट करेंसी में पिछली तिमाही से 2.4% कम है। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि बड़ी डील्स की बुकिंग में तिमाही आधार पर 12.9% का शानदार उछाल आया और यह 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मार्जिन और एट्रिशन रेट का हाल कंपनी का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन 16% रहा है। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 130 बेसिस पॉइंट्स और पिछले साल के मुकाबले 120 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। इस तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपए रहा, जो कुल नेट इनकम का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर कंपनी का वॉलंटरी एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों का नौकरी छोड़ने का रेश्यो 13.9% दर्ज किया गया। अगली तिमाही के लिए क्या है गाइडेंस जुलाई-सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही के लिए विप्रो ने आईटी सर्विसेज रेवेन्यू का अनुमान 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि अगली तिमाही में कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से लेकर 0.5% के बीच रह सकती है। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। उनकी लीडरशिप में, विप्रो ने वनस्पति तेल के उत्पादन से लेकर आईटी सर्विसेज, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देने तक डायवर्सिफिकेशन किया। कॉन्सोलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होती है कॉन्सटेंट करेंसी? जब भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, तो उन्हें डॉलर, यूरो या पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। लेकिन डॉलर और रुपए की एक्सचेंज रेट में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर कंपनी की असली ग्रोथ को नापने के लिए ‘कॉन्सटेंट करेंसी’ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करेंसी रेट को एक निश्चित स्तर पर फिक्स मानकर रेवेन्यू की गणना की जाती है ताकि सही परफॉर्मेंस का पता चल सके। ये खबर भी पढ़ें… IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च: सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट’ फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…