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अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़कर ₹1,149 करोड़:पहली तिमाही में रेवेन्यू 42% चढ़ा; कंपनी का शेयर 1,737 रुपए पर पहुंचा

अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा यानी 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। कंपनी की कुल कमाई में तेज बढ़ोतरी और रेगुलेटरी डेफरल इनकम में आए पॉजिटिव बदलाव से नतीजों को मजबूती मिली है। नतीजों की घोषणा के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर दोपहर के कारोबार में 3% चढ़कर 1,781.2 रुपए पर पहुंच गया। हालांकि, यह 1,737 रुपए पर बंद हुआ। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 42% बढ़ा कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 42.4% बढ़कर 9,711 करोड़ रुपए हो गया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 6,819 करोड़ रुपए था। कंपनी का ऑपरेशनल मुनाफा (EBITDA) 30% बढ़कर 3,008 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन में मामूली गिरावट देखी गई और यह पिछले साल के 33.9% से घटकर 31% पर आ गया। कंपनी को रेगुलेटरी इनकम का मिला फायदा कंपनी ने पहली तिमाही में 29 करोड़ रुपए की रेगुलेटरी डेफरल इनकम दर्ज की है। इसकी तुलना में पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 504 करोड़ रुपए का रेगुलेटरी डेफरल खर्च उठाना पड़ा था। इस पॉजिटिव बदलाव ने कंपनी के नेट मुनाफे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कंपनी के बिजनेस सेगमेंट का परफॉर्मेंस कंपनी के अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट्स में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है… 30 जून को समाप्त हुई तिमाही के आंकड़ों से साफ है कि अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट मीटरिंग और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर तेजी से ध्यान दे रही है। भारत में लगातार बढ़ती बिजली की मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते कंपनी के प्रदर्शन में मजबूती बनी हुई है। क्या होती है ‘रेगुलेटरी डेफरल इनकम’? पावर और यूटिलिटी सेक्टर में नियामक यानी रेगुलेटर्स बिजली की दरें तय करते हैं। कई बार जब किसी तिमाही में कंपनी की लागत बढ़ती है या सरकार से मंजूर दरों के एडजस्टमेंट में समय लगता है, तो नियामक उस अंतर की रकम को भविष्य के टैरिफ में वसूलने की मंजूरी देता है। इसे अकाउंटिंग में ‘रेगुलेटरी डेफरल आय/खर्च’ के रूप में दर्ज किया जाता है। जब यह खर्च की जगह आय बनती है, तो कंपनी के प्रॉफिट पर सीधा और पॉजिटिव असर दिखता है। ये खबर भी पढ़ें… रिजल्ट के बाद पेटीएम का शेयर 4% फिसला: बोनस शेयर का प्लान टला; पहली तिमाही में मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे आने के बाद पेटीएम के शेयरों में आज मंगलवार 21 जुलाई को गिरावट रही। बाजार खुलते ही शेयर में 2.5% से ज्यादा की तेजी आई, लेकिन थोड़ी ही देर में यह गिर गया। ये 3.86% नीचे ₹1295 पर बंद हुआ। ये खबर भी पढ़ें…

मारुति की कारें अगस्त से ₹30,000 तक महंगी हो जाएंगी:2 महीने में दूसरी बार कीमतें बढ़ाईं, कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से फैसला लिया

देश की सबसे बड़ी पैसेंजर वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोत्तरी का ऐलान किया है। कंपनी अपनी कारों के दाम 30,000 रुपए तक बढ़ाएगी। नई कीमतें अगस्त 2026 से लागू होंगी। कंपनी ने 21 जुलाई, मंगलवार को शेयर बाजारों को भेजी जानकारी यानी रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है। अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग दाम बढ़ाए जाएंगे। कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से लेना पड़ा फैसला कंपनी ने बताया कि लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा है। पिछले कुछ महीनों में कंपनी ने अपने स्तर पर लागत घटाने की कोशिश की, ताकि ग्राहकों पर सीधा असर न पड़े। हालांकि, महंगाई दर ऊंची रहने और कारोबारी माहौल अनुकूल न होने की वजह से बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना मजबूरी हो गया है। 2 महीने में दूसरी बार बढ़ेंगे दाम इस साल मारुति सुजुकी की तरफ से यह पहली बढ़ोत्तरी नहीं है। इससे पहले कंपनी ने जून 2026 में भी अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में 30,000 रुपए तक का इजाफा किया था। उस बढ़ोत्तरी का ऐलान 21 मई 2026 को किया गया था। उस समय भी कंपनी ने इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव को ही मुख्य वजह बताया था। अगस्त से लागू होने वाला नया संशोधन जून में हुई बढ़ोतरी के ऊपर अतिरिक्त इजाफा होगा। ₹3.50 लाख से ₹25 लाख तक के वाहन बेचती है कंपनी मारुति सुजुकी भारतीय बाजार में एंट्री-लेवल हैचबैक से लेकर प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियां बेचती है। इनमें एंट्री-लेवल मॉडल S-Presso से लेकर प्रीमियम MPV इनविक्टो शामिल हैं। फिलहाल कंपनी के पोर्टफोलियो की एक्स-शोरूम कीमतें ₹3.50 लाख से शुरू होकर ₹25 लाख तक जाती हैं। अगस्त से होने वाली बढ़ोतरी के बाद एंट्री-लेवल और प्रीमियम दोनों सेगमेंट की कारें महंगी हो जाएंगी। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? रेगुलेटरी फाइलिंग: शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी बड़े बिजनेस फैसले, मुनाफे, नुकसान या कीमतों में बदलाव की जानकारी ‘सेबी’ या स्टॉक एक्सचेंज को दें। इसी आधिकारिक दस्तावेज को रेगुलेटरी फाइलिंग कहते हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी कार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, प्लास्टिक, एल्युमिनियम, रबर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की कुल लागत को इनपुट कॉस्ट कहा जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है।

रिजल्ट के बाद पेटीएम का शेयर 4% फिसला:बोनस शेयर का प्लान टला; पहली तिमाही में मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे आने के बाद पेटीएम के शेयरों में आज मंगलवार 21 जुलाई को गिरावट रही। बाजार खुलते ही शेयर में 2.5% से ज्यादा की तेजी आई, लेकिन थोड़ी ही देर में यह गिर गया। ये 3.86% नीचे ₹1295 पर बंद हुआ। विजय शेखर शर्मा की अगुआई वाली इस फिनटेक कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है। पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 79% बढ़कर 220 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। लेकिन बोनस शेयर टलने की खबर से बिकवाली का दबाव बढ़ा है। पेटीएम ने 2 सालों में निवेशकों का पैसा लगभग तीन गुना किया कंपनी के शेयर ने बीते 2 सालों में निवेशकों का पैसा लगभग तीन गुना किया है। हालांकि, मार्केट डेब्यू के करीब 5 साल बाद भी यह शेयर अपने आईपीओ प्राइस ₹2,150 से नीचे है। Q1 नतीजे: जून तिमाही में रेवेन्यू ₹2,448 करोड़ रहा 30 जून 2026 को समाप्त हुई इस तिमाही में ऑपरेशन्स से पेटीएम का रेवेन्यू 28% बढ़कर ₹2,448 करोड़ पर पहुंच गया है, जो एक साल पहले इसी अवधि में ₹1,918 करोड़ था। वहीं कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा है। कंपनी को अपने पेमेंट बिजनेस, मर्चेंट सब्सक्रिप्शन और फाइनेंशियल सर्विसेज डिस्ट्रीब्यूशन में लगातार ग्रोथ से यह मुनाफा हासिल हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में पेटीएम को ₹123 करोड़ का मुनाफा हुआ था। वहीं, मार्च तिमाही में ₹183 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पेटीएम मनी में ₹100 करोड़ के निवेश को मंजूरी पेटीएम के बोर्ड ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी ‘पेटीएम मनी’ में राइट्स इश्यू के जरिए ₹100 करोड़ तक के निवेश को मंजूरी दी है। इस फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी में निवेश, रेगुलेटरी कैपिटल जरूरतों को पूरा करने और कंपनी के इन्वेस्टमेंट व वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस के विस्तार के लिए किया जाएगा। आईपीओ के बचे ₹1,686 करोड़ के इस्तेमाल का प्लान बदला कंपनी के बोर्ड ने आईपीओ से मिली अनयूज्ड ₹1,686 करोड़ की बची हुई रकम के इस्तेमाल और उसकी समय-सीमा में बदलाव का प्रस्ताव भी पास किया है। बोर्ड ने इस रकम के उपयोग का समय बढ़ाकर 31 मार्च 2029 तक करने के लिए शेयरहोल्डर्स से मंजूरी लेने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि इस फ्लेक्सिबिलिटी से उसे पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज इकोसिस्टम को मजबूत करने और ग्रोथ के नए मौकों को हासिल करने में मदद मिलेगी। बोनस शेयर का प्लान क्यों टला? कंपनी के बोर्ड ने बोनस शेयर जारी करने का प्रस्ताव टाल दिया है। बोर्ड ने कहा कि लॉन्ग-टर्म शेयरहोल्डर वैल्यू के नजरिए से प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। बोर्ड का मानना है कि कंपनी को अभी अपनी ग्रोथ बढ़ाने और प्रॉफिटेबिलिटी को और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि शेयरधारकों के लिए बेहतर वैल्यू क्रिएट हो सके।” एक्सपर्ट व्यू: कंपनी अब प्रॉफिटेबिलिटी के दौर में पहुंची INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी के मुताबिक, पेटीएम का Q1 FY27 रिजल्ट इस बात का साफ सबूत है कि कंपनी अब टर्नअराउंड फेज से निकलकर प्रॉफिटेबिलिटी फेज में आ चुकी है। 28% की रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹203 करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही EBITDA और ₹220 करोड़ का मुनाफा दिखाता है कि कंपनी का कॉस्ट स्ट्रक्चर अब मजबूत हो चुका है। अब बढ़ता रेवेन्यू सीधे मुनाफे में बदल रहा है। उनका मानना है कि आने वाली दो तिमाहियों में यह तय होगा कि कंपनी का 8% मार्जिन अब एक स्टेबल बेस बन चुका है। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है ‘राइट्स इश्यू’ और बोनस शेयर?

चांदी ₹3629 महंगी होकर ₹2.23 लाख पर पहुंची:10 ग्राम सोना ₹883 बढ़कर ₹1.43 लाख का हुआ, इस साल ₹1.60 लाख तक जा सकता है

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 21 जुलाई को बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 3629 रुपए बढ़कर 2.23 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 883 रुपए चढ़कर 1.43 लाख रुपए आ गया है। सोना इस साल ₹10 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 10 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 7 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.23 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोने-चांदी में एकमुश्त निवेश से बचें कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

सेंसेक्स 238 अंक गिरकर 77470 पर बंद:निफ्टी 50 अंक नीचे 24188 पर आया, सरकारी बैंक और IT शेयर्स में बिकवाली

सेंसेक्स आज यानी 21 जुलाई को 238 अंक नीचे 77,470 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 51 अंक की गिरावट रही, ये 24,188 के स्तर पर आ गया। सरकारी बैंक और IT शेयर्स में आज ज्यादा बिकवाली दिखी। SBI फंड्स मैनेजमेंट का शेयर 7% ऊपर लिस्ट SBI फंड्स मैनेजमेंट का शेयर 574 रुपए के IPO प्राइस से 6.85% तेजी के साथ लिस्ट हुआ। NSE पर SBI फंड्स मैनेजमेंट का शेयर 613.30 रुपए पर खुला। वहीं BSE पर यह 610 रुपए यानी 6.27% ऊपर लिस्ट हुआ। एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला कारोबार 20 जुलाई को अमेरिकी बाजार में गिरावट रही थी 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹6,439 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले शेयर बाजार में कल यानी 20 जुलाई को गिरावट रही थी। सेंसेक्स 443 अंक की गिरावट के साथ 77,709 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 96 अंक की गिरावट रही, ये 24,239 पर आ गया था।

सरकार ने कहा- E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं:23 करोड़ गाड़ियां बिना परेशानी चल रहीं; शेयर बाजार के निवेशकों को LTCG टैक्स पर राहत नहीं

कल की बड़ी खबर एथेनॉल से जुड़ी रही। सरकार ने कहा कि देश में 20% एथेनॉल मिला पेट्रोल यानी E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब होने या उनके अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। वहीं सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. संसद में सरकार बोली- E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं: 23 करोड़ गाड़ियां बिना परेशानी चल रहीं, पुरानी गाड़ियों का माइलेज मामूली गिरा देश में 20% एथेनॉल मिला पेट्रोल यानी E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब होने या उनके अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को राज्यसभा यानी संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देशभर में चल रहे 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चलाने के अनुभवों और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. अमेरिका-ईरान तनाव से ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर पार: एक हफ्ते में 16% बढ़ा; भारत में महंगाई का खतरा, रुपया-विदेशी निवेश पर दबाव ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल आज 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत में महंगाई और एनर्जी शॉक के जोखिम को बढ़ा दिया है। इससे भारतीय रुपए और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के फ्लो पर असर पड़ने की संभावना है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. शेयर बाजार के निवेशकों को LTCG टैक्स पर राहत नहीं: सरकार बोली- इसे हटाने का प्रस्ताव नहीं, जानें ये टैक्स क्या है और कब लगता है केंद्र सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को साफ कर दिया है कि घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इस स्पष्टीकरण के साथ ही पिछले कुछ महीनों से बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच चल रही उस अटकलबाज़ी पर विराम लग गया है, जिसमें टैक्स हटाने की मांग की जा रही थी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोक सभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह स्पष्टीकरण दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. हाइब्रिड कारों के लिए MG नई ADAPT टेक्नोलॉजी लाई: एक ही कार में 4 ड्राइव ऑप्शन मिलेंगे, दुनिया का पहला ई-क्लच भी पेश किया SW MG मोटर इंडिया ने अपना नया एडवांस्ड प्लेटफॉर्म ‘ADAPT’ यानी एडवांस्ड ड्राइव आर्किटेक्चर प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी रिवील कर दिया है। यह एक ऐसा न्यू एनर्जी व्हीकल प्लेटफॉर्म है, जिस पर कंपनी भविष्य में चार अलग-अलग तरह की गाड़ियां तैयार करेगी- इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड, रेंज-एक्सटेंडर और स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए…

सरकार ने कहा- E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं:23 करोड़ गाड़ियां बिना परेशानी चल रहीं; शेयर बाजार के निवेशकों को LTCG टैक्स पर राहत नहीं

कल की बड़ी खबर एथेनॉल से जुड़ी रही। सरकार ने कहा कि देश में 20% एथेनॉल मिला पेट्रोल यानी E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब होने या उनके अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। वहीं सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. संसद में सरकार बोली- E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं: 23 करोड़ गाड़ियां बिना परेशानी चल रहीं, पुरानी गाड़ियों का माइलेज मामूली गिरा देश में 20% एथेनॉल मिला पेट्रोल यानी E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब होने या उनके अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को राज्यसभा यानी संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देशभर में चल रहे 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चलाने के अनुभवों और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. अमेरिका-ईरान तनाव से ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर पार: एक हफ्ते में 16% बढ़ा; भारत में महंगाई का खतरा, रुपया-विदेशी निवेश पर दबाव ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल आज 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत में महंगाई और एनर्जी शॉक के जोखिम को बढ़ा दिया है। इससे भारतीय रुपए और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के फ्लो पर असर पड़ने की संभावना है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. शेयर बाजार के निवेशकों को LTCG टैक्स पर राहत नहीं: सरकार बोली- इसे हटाने का प्रस्ताव नहीं, जानें ये टैक्स क्या है और कब लगता है केंद्र सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को साफ कर दिया है कि घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इस स्पष्टीकरण के साथ ही पिछले कुछ महीनों से बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच चल रही उस अटकलबाज़ी पर विराम लग गया है, जिसमें टैक्स हटाने की मांग की जा रही थी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोक सभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह स्पष्टीकरण दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. हाइब्रिड कारों के लिए MG नई ADAPT टेक्नोलॉजी लाई: एक ही कार में 4 ड्राइव ऑप्शन मिलेंगे, दुनिया का पहला ई-क्लच भी पेश किया SW MG मोटर इंडिया ने अपना नया एडवांस्ड प्लेटफॉर्म ‘ADAPT’ यानी एडवांस्ड ड्राइव आर्किटेक्चर प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी रिवील कर दिया है। यह एक ऐसा न्यू एनर्जी व्हीकल प्लेटफॉर्म है, जिस पर कंपनी भविष्य में चार अलग-अलग तरह की गाड़ियां तैयार करेगी- इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड, रेंज-एक्सटेंडर और स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए…

संसद में सरकार बोली- E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं:23 करोड़ गाड़ियां बिना परेशानी चल रहीं, पुरानी गाड़ियों का माइलेज मामूली गिरा

देश में 20% एथेनॉल मिला पेट्रोल यानी E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब होने या उनके अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को राज्यसभा यानी संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देशभर में चल रहे 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चलाने के अनुभवों और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। 20 करोड़ टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ कारें बिना किसी शिकायत के चल रहीं राज्यसभा में मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें वर्तमान में एथेनॉल मिश्रित ईंधन यानी पर चल रही हैं। इनमें एक बड़ी संख्या उन पुराने वाहनों की भी है, जिन्हें E20 सर्टिफिकेशन मिलने से पहले मैन्युफैक्चर किया गया था। इन सभी गाड़ियों के डेटा और सर्विस रिकॉर्ड देखने के बाद भी इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन फेल होने या किसी बड़े व्हीकल ब्रेकडाउन की कोई पुख्ता पुष्टि नहीं हुई है। बिना सोचे-समझे नहीं किया बदलाव सरकार ने सदन में बताया कि देश को E20 फ्यूल की तरफ ले जाने का फैसला अचानक नहीं हुआ है। यह पूरी तरह से चरणबद्ध और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित रहा है। साल 2013-14 में जहां पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग सिर्फ 1.53% थी, उसे साइंटिफिकली और सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ हर स्तर पर विचार-विमर्श के बाद ही साल 2025-26 तक बढ़ाकर 20% (E20) किया गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस डेटा से भी पुष्टि मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश की एक प्रमुख फोर-व्हीलर निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। चौंकाने वाली बात यह है कि इन गाड़ियों में 1.5 करोड़ ऐसे पुराने वाहन शामिल थे जो नॉन-E20 सर्टिफाइड थे यानी जिन्हें E20 फ्यूल के हिसाब से नहीं बनाया गया था। इसके बावजूद कंपनी के सर्विस रिकॉर्ड में E20 फ्यूल की वजह से गाड़ी को किसी भी तरह का नुकसान होने की एक भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसी तरह, देश की एक प्रमुख टू-व्हीलर निर्माता कंपनी के बड़े सर्विस डेटा में भी पहले के फ्यूल ब्लेंड की तुलना में E20 पर चलने वाले वाहनों में खराबी की कोई अलग घटना सामने नहीं आई है। माइलेज पर असर: पुरानी गाड़ियों में 3 से 5% की कमी संभव, पर मिलेंगे ये 4 बड़े फायदे फ्यूल एफिशिएंसी (माइलेज) के सवाल पर सरकार ने साफ किया कि किसी भी गाड़ी का माइलेज ड्राइविंग कंडीशन, ड्राइवर की आदतों और गाड़ी के मेंटेनेंस पर निर्भर करता है। हालांकि, सरकार ने स्वीकार किया कि E10 (10% इथेनॉल) के लिए डिजाइन की गई कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज में करीब 3% से 5% तक की मामूली कमी आ सकती है। लेकिन इसके बदले E20 फ्यूल वाहन और पर्यावरण को कई फायदे देता है: फिलहाल 20% से ज्यादा ब्लेंडिंग का कोई फैसला नहीं राज्यसभा में जब मंत्री से पूछा गया कि क्या भविष्य में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% से आगे बढ़ाया जाएगा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आगे का कोई भी फैसला ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिसर्च संस्थानों के साथ गहन तकनीकी स्टडी के बाद ही लिया जाएगा। —————————————————————————– E-20 पेट्रोल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रायपुर में E-20 पेट्रोल डालने से इंजन खराब:कंज्यूमर कोर्ट बोला- मारुति सुजुकी नई कार दे या 20 लाख लौटाए; देश का पहला मामला देशभर में पेट्रोल में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी बीच रायपुर में E20 पेट्रोल से कार के इंजन के खराब होने का मामला सामने आया है। इससे जुड़े मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि नई कार दी जाए या 20 लाख लौटाए जाएं। पूरी खबर पढ़ें…

शेयर बाजार के निवेशकों को LTCG टैक्स पर राहत नहीं:सरकार बोली- इसे हटाने का प्रस्ताव नहीं, जानें ये टैक्स क्या है और कब लगता है

केंद्र सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को साफ कर दिया है कि घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इस स्पष्टीकरण के साथ ही पिछले कुछ महीनों से बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच चल रही उस अटकलबाज़ी पर विराम लग गया है, जिसमें टैक्स हटाने की मांग की जा रही थी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोक सभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह स्पष्टीकरण दिया। लोक सभा में वित्त राज्य मंत्री ने लिखित जवाब में दी जानकारी सदन में उनसे पूछा गया था कि सरकार रिटेल और डोमेस्टिक निवेशकों के लिए LTCG टैक्स को कब तक खत्म करेगी, ताकि मार्केट सेंटीमेंट को सुधारा जा सके, घरेलू निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके और विदेशी व भारतीय निवेशकों के बीच एक समान अवसर सुनिश्चित किया जा सके। इस पर वित्त राज्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई भी प्रस्ताव नहीं है। बजट प्रक्रिया के दौरान समय-समय पर होती है टैक्स नीतियों की समीक्षा वित्त राज्य मंत्री ने अपने जवाब में यह भी बताया कि कैपिटल गेन्स टैक्स रेट सहित सभी टैक्स नीतियों की बजट प्रक्रिया के दौरान समय-समय पर समीक्षा की जाती है। सरकार अर्थव्यवस्था की पूरी स्थिति को देखकर ही टैक्स दरों में बदलाव का फैसला करती है। 1 साल में 79% बढ़ा सरकार का LTCG टैक्स कलेक्शन इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG टैक्स से सरकार की कमाई में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, टैक्स कलेक्शन सालाना आधार पर करीब 79% बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में जहां यह कलेक्शन ₹72,249 करोड़ था, वहीं असेसमेंट ईयर वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर ₹1,29,158 करोड़ पर पहुंच गया। इन दो सालों में सरकार ने शेयर बाजार के लॉन्ग-टर्म मुनाफे से कुल ₹2.01 लाख करोड़ का टैक्स वसूला है। क्या होता है LTCG टैक्स और यह कब लगता है? लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स उस मुनाफे पर लगाया जाता है जो किसी कैपिटल एसेट जैसे प्रॉपर्टी, शेयर या म्यूचुअल फंड को बेचने से होता है।

कमीशन के लिए निवेश प्रोडक्ट प्रमोट करते हैं इन्फ्लुएंसर्स:आपकी कमाई बढ़े या न बढ़े; ये 5 आदतें बचत जरूर बढ़ा सकती हैं

पैसा बचाने और खर्च करने को लेकर सही आदतें आखिर कैसी होनी चाहिए? यूके यानी ब्रिटेन के सबसे बड़े बैंक लॉयड्स बैंकिंग ग्रुप के सीईओ चार्ली नन पांच सीधे-सरल टिप्स से सुलझा रहे हैं पैसों को लेकर आपकी उलझन… यूके के हर चार में से एक करंट अकाउंट लॉयड्स बैंकिंग ग्रुप में है। इसकी वजह से नन के पास ग्राहकों के खर्च, बचत और कर्ज लेने की आदतों की गहरी समझ है। नन ने बचत को ऑटोमैटिक बनाने, रिश्तों में पैसों पर खुलकर बातें करने, बच्चों को पॉकेट मनी देने, खरीदारी से पहले ठहरकर सोचने और सोशल मीडिया पर निवेश की सलाह देने वाले इन्फ्लुएंसर से सावधान रहने की सलाह दी है। ये पांचों टिप्स आम आदमी की रोजमर्रा की पैसों से जुड़ी उलझनें हल करने में मदद कर सकते हैं। ये जरूर करें – सैलरी अकाउंट से एक तय रकम अलग खाते में ऐसी जगह रखें जहां तक आसानी से आपके हाथ न पहुंचे, यह तरीका साल-दर-साल आपकी बचत बढ़ाता जाएगा 1. पति/पत्नी, बच्चों से पैसों की बात करें मैं और मेरी पत्नी एक साझा खाता चलाते हैं। पैसों के मामले में एक-दूसरे से पूरी पारदर्शिता रखते हैं। मेरा मानना है कि किसी रिश्ते में सबसे बड़ा खतरे का संकेत सामने वाले का पैसों को लेकर लापरवाह होना है। मैं हमेशा से पैसों को लेकर सतर्क रहा हूं। यह सोच बचपन से है। माता-पिता के तलाक के बाद मां ने अकेले चार बच्चों को पाला। इस वजह से घर में खर्च को लेकर सोच-समझकर फैसले लिए जाते थे, चाहे वो राशन के इंतजाम को लेकर हो या छुट्टियों की योजना बनाने के बारे में। 2. बच्चों को पॉकेट मनी देते रहिए हमारे बच्चे ‘पिता होने की वजह से’ मेरी सलाह ज्यादा नहीं सुनते। फिर भी मैंने बच्चों को पैसों की अहमियत समझाने की कोशिश की है। पॉकेट मनी देने से बच्चे बजट बनाना और अपनी सीमा में रहना सीखते हैं। मैं यह नहीं मानता कि युवा पीढ़ी पैसों को लेकर गैरजिम्मेदार है। असल में आजकल की पीढ़ी को ऑनलाइन दुनिया में सही, गलत जानकारियों और दबाव की भरमार का सामना करना पड़ता है। इससे बचने का तरीका यह है कि किसी भी लेन-देन को लेकर शक हो तो सवाल जरूर करें। 3. सेविंग को ऑटोमैटिक बनाएं, ताकि टाल न सकें बचत का सरल तरीका है इसे ऑटोमैटिक बना देना, ताकि हर महीने बचत एक फैसला या टालने वाला काम न बने। सैलरी से एक तय रकम अलग खाते में ऐसी जगह रखें जहां, तक आसानी से हाथ न पहुंचे। यही बचत की आदत डालने का सबसे आसान रास्ता है। 4. हर खरीदारी से पहले थोड़ा ठहरकर सोचें मेरी सबसे बड़ी चिंता धोखाधड़ी है। बहुत से लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए निशाना बन रहे हैं। टेक्नोलॉजी में माहिर होने के बावजूद युवा स्कैम के प्रति बुजुर्गों के मुकाबले कहीं ज्यादा संवेदनशील हैं। हर खरीदारी से पहले थोड़ा ठहरकर सोचें। कहीं भी पैसे भेजने से पहले खुद से पूछें कि क्या सामने वाले पर भरोसा किया जा सकता है। जरा भी शक हो, तो जानकारी लेने के लिए उपलब्ध टूल्स इस्तेमाल करें या सीधे बैंक को कॉल करके पुष्टि करें। 5. फिनफ्लुएंसर्स से हमेशा सावधान रहें सोशल मीडिया पैसों की समझ बढ़ाने में मददगार हो सकता है, लेकिन फिनफ्लुएंसर्स को लेकर मुझे गहरी चिंता है, जो जोखिम भरे प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देते हैं। इन्फ्लुएंसर्स को किसी खास क्रिप्टो कॉइन, मीम कॉइन या निवेश प्रोडक्ट को प्रमोट करने के पैसे मिलते हैं, न कि लोगों को सही निवेश विकल्प चुनने में मदद करने के लिए। जिनके पास ज्यादा पैसा नहीं है, उन्हें ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहिए, जिसमें पैसा डूब सकता है। उन्हें सरल विकल्प अपनाने चाहिए। ये तरीके आजमा सकते हैं – स्टैंडिंग ऑर्डर (बैंक द्वारा तय तारीख पर अपने-आप पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा) सेट कर सकते हैं। – पैसों को अलग-अलग लिफाफों में बांटा जा सकता है, या राउंड-अप टूल्स (खर्च के बाद बचे हुए छुट्टे पैसे अपने-आप बचत खाते में भेजने वाला टूल) इस्तेमाल किए जा सकते हैं। – थोड़ा बचाएं, जल्द बचाएं, नियमित बचाएं। मैं खुद बजट बनाना पसंद नहीं करता; वेतन आते ही अकाउंट देखकर तय कर लेता हूं कि कितनी रकम बचत में डालना है, और यह काम जल्द से जल्द निपटाता हूं। – इमरजेंसी फंड बनाएं- अचानक आने वाले खर्चों, मसलन गाड़ी या घर की मरम्मत के लिए हो सके तो एक से तीन महीने की सैलरी के बराबर एक फंड हमेशा अलग रखें। (साभार – बीबीसी वर्ल्ड)