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गुरुग्राम में डॉक्टर के बेटे पर गिरा बास्केटबॉल पोल,VIDEO:प्रैक्टिस मैच में हादसा, रीढ़ की हड्डी में 3 फ्रैक्चर; 2 खिलाड़ियों ने भागकर बचाई अपनी जान

हरियाणा के गुरुग्राम में सेक्टर-84 स्थित हाईक्लास सोसायटी अंतरिक्ष हाइट्स में बड़ा हादसा हो गया। सोसायटी के बास्केटबॉल कोर्ट में प्रैक्टिस मैच खेल रहे खिलाड़ियों के ऊपर अचानक लोहे का भारी-भरकम बास्केटबॉल पोल गिर गया। दो खिलाड़ियों ने तो कूद कर अपनी जान बचा ली, जबकि डॉक्टर का 22 वर्षीय बेटा इसकी चपेट में आ गया। अचानक हुए हादसे से कोर्ट में अफरा तफरी मच गई। वहां मौजूद लोग और अन्य खिलाड़ियों ने किसी तरह पोल के नीचे दबे बच्चे को निकाला और अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे की पीठ पर गंभीर चोट आई है। उनकी रीढ़ की हड्डी में तीन अलग-अलग स्थानों पर फ्रैक्चर हुए हैं। इससे पहले रोहतक में 750 किलोग्राम का बास्केटबॉल पोल गिरने से नेशनल प्लेयर हार्दिक की मौत हो चुकी है। झज्जर के बहादुरगढ़ में भी एक खिलाड़ी की इसी तरह मौत हुई थी। उधर, गुरुग्राम की घटना को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा ओलिंपिक एसोसिएशन ने उपायुक्त और हरियाणा के रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज को पत्र भेजकर सभी सार्वजनिक खेल परिसरों और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में स्थापित खेल ढांचे की तत्काल सुरक्षा जांच कराने की मांग की है। बास्केटबॉल पोल गिरने से हुए हादसे के PHOTOS… गुरुग्राम में कैसे हुआ बास्केटबॉल पोल हादसा, सिलसिलेवार पढ़ें… रोहतक और झज्जर में भी हो चुके हादसे इससे पहले रोहतक के लाखनमाजरा में बास्केटबॉल खेलते समय नेशनल प्लयेर हार्दिक (16) की पोल गिरने से मौत हो गई थी। इसका एक वीडियो भी सामने आया था, इसमें खिलाड़ी बास्केटबॉल कोर्ट में प्रैक्टिस करता दिखाई दे रहा था। जैसे ही वह दौड़कर बास्केटबॉल पोल पर लटकता है, वैसे ही पूरा पोल टूटकर उसकी छाती पर गिर जाता है। इस पोल का वजन करीब 750 किलोग्राम था। हार्दिक 10वीं कक्षा का छात्र था। पिता संदीप एफसीआई में नौकरी करते हैं। वहीं, ऐसा ही एक हादसा बहादुरगढ़ में भी हुआ था। शहीद ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेडियम में जर्जर बास्केटबॉल पोल गिरने से घायल 15 वर्षीय खिलाड़ी अमन की मौत हो गई थी। अमन दो बहनों का इकलौता भाई था। उसके पिता सुरेश कुमार डीआरडीओ कार्यालय में ग्रुप-डी कर्मचारी हैं और परिवार लाइन पार वत्स कॉलोनी में रहता है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… रोहतक में बास्केटबॉल पोल गिरने से नेशनल प्लेयर की मौत,VIDEO:प्रैक्टिस करते वक्त छाती पर गिरा 750 किलो का पोल; बहादुरगढ़ में भी ऐसा ही हादसा रोहतक के लाखनमाजरा में बास्केटबॉल खेलते समय एक खिलाड़ी की पोल गिरने से मौत हो गई। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें खिलाड़ी बास्केटबॉल कोर्ट में प्रैक्टिस करता दिखाई दे रहा है। जैसे ही वह दौड़कर बास्केटबॉल पोल पर लटकता है, वैसे ही पूरा पोल टूटकर उसकी छाती पर गिर जाता है। (पूरी खबर पढ़ें) बहादुरगढ़ में बास्केटबॉल पोल गिरने से खिलाड़ी की मौत:दो बहनों का इकलौता भाई था, परिजनों ने लगाया डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप बहादुरगढ़ के शहीद ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेडियम में जर्जर बास्केटबॉल पोल गिरने से घायल 15 वर्षीय बास्केटबॉल खिलाड़ी अमन की मौत हो गई। सोमवार रात पीजीआई रोहतक में उपचार के दौरान अमन ने दम तोड़ दिया। मंगलवार शाम गमगीन माहौल में दिवंगत का अंतिम संस्कार किया गया। (पूरी खबर पढ़ें)

एलडीसी पेपर लीक मामला, आरोपी टीचर समेत तीन सस्पेंड:3 आरोपी अब भी फरार, प्रिंसिपल पर अब तक कार्रवाई नहीं

जैसलमेर के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल परीक्षा केंद्र पर हुई एलडीसी भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस रिपोर्ट और मुख्य आरोपी शिक्षक के न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेजे जाने के बाद जोधपुर के संयुक्त शिक्षा निदेशक ने आरोपी शिक्षक पदमसिंह को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही परीक्षा कक्ष में ड्यूटी पर तैनात दो वीक्षक भीम सिंह और जालम सिंह को भी सस्पेंड किया गया है। हालांकि मामले में नामजद प्रिंसिपल पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, प्रिंसिपल समेत तीन आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। कमरा नंबर 10 में ड्यूटी देने वाले दोनों वीक्षक भी सस्पेंड शिक्षा विभाग ने परीक्षा कक्ष नंबर 10 में तैनात वीक्षक भीम सिंह और जालम सिंह को भी सस्पेंड कर दिया है। वहीं, सस्पेंड किए गए टीचर पदमसिंह का मुख्यालय सीबीईओ कार्यालय पोकरण तय किया गया है। विभागीय कार्रवाई पुलिस रिपोर्ट और आरोपी के जेल भेजे जाने के बाद की गई। 5 जुलाई को परीक्षा के दौरान सामने आया था नकल का मामला एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान स्वामी विवेकानंद मॉडल उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र पर नकल का मामला सामने आया था। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने परीक्षार्थी मनु कंवर और मुख्य आरोपी शिक्षक पदमसिंह को गिरफ्तार किया था। पदमसिंह के न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की आधिकारिक सूचना मिलने के बाद जोधपुर के संयुक्त शिक्षा निदेशक ने उनके निलंबन के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि के दौरान उनकी उपस्थिति सीबीईओ कार्यालय पोकरण में रहेगी। प्रिंसिपल समेत तीन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर पुलिस ने मुख्य आरोपी शिक्षक पदमसिंह और महिला परीक्षार्थी मनु कंवर को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मामले में नामजद केंद्राधीक्षक एवं प्रिंसिपल उम्मेदसिंह तथा दोनों वीक्षक जालम सिंह और भीम सिंह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) महेश बिस्सा ने बताया कि संयुक्त निदेशक ने दो वीक्षकों और शिक्षक को निलंबित कर दिया है तथा पदमसिंह का मुख्यालय सीबीईओ कार्यालय पोकरण बनाया गया है। प्रिंसिपल का निलंबन क्यों नहीं हुआ? मामले में नामजद केंद्राधीक्षक उम्मेदसिंह का निलंबन अभी तक नहीं हुआ है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) को निलंबित करने का अधिकार केवल माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर के पास है। इसलिए उनके संबंध में आदेश वहीं से जारी होगा। — पेपर लीक से जुडी ये खबर भी पढ़ें … LDC परीक्षा विवाद,SP बोले-गिरफ्तारी के तीन दिन बाद आरोप बेतुके:कोर्ट ने दोबारा मेडिकल के लिए मना किया; पुलिस पर राजनीतिक दबाव नहीं जैसलमेर के चर्चित एलडीसी भर्ती परीक्षा नकल मामले में पुलिस हिरासत के दौरान प्रताड़ना के आरोप लगाने वाले आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। पूरी खबर पढ़िए

ऊर्जा मंत्री की बैठक में ही बत्ती गुल:हनुमान बेनीवाल का 'जंतर-मंतर', बच्चे से बोले- हमारे साथ आंदोलन करेगा; SHO की 'लंगड़ी टांग'

नमस्कार, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बच्चे पर ऐसा क्या ‘जंतर-मंतर’ किया कि गोद से उतरने को तैयार नहीं। बिजली वाले मंत्रीजी की मीटिंग में ‘बत्ती गुल’ हो गई। कर्मचारियों को रिलीव करने के मामले में एक मंत्री महोदय भड़क उठे और CI साहब का ‘लंगड़ी टांग’ खेल वायरल हो गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. हनुमान बेनीवाल का ‘जंतर-मंतर’ दिल्ली के जंतर-मंतर पर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को पूर्व जन्म का रिश्तेदार मिल गया। हुआ यूं कि कॉकरोच वालों के आंदोलन में नेताजी समर्थन देकर कार से निकल रहे थे। इस दौरान किसी समर्थक ने अपना बच्चा सांसद महोदय की गोद में दे दिया। लाड़-दुलार मिला तो बच्चा रमण गया। अब गोद से उतरने को तैयार नहीं। सांसद जी ने बच्चे के पापा को बुलाया। पापा का प्रयास फेल हुआ तो मां आई। बच्चा मां की गोद में भी जाने को तैयार नहीं। भीड़ से आवाज आई- बच्चे ने दबंग नेता को पकड़ लिया। नेताजी ने बच्चे को दुलारते हुए पूछा- हमारे साथ आंदोलन करेगा क्या? लोग हंसने लगे। बच्चे की मां से नेताजी कहा- इससे पूर्व जन्म का कोई रिश्ता है शायद। नेताजी की यही खासियत। यूथ पर उनका ‘जंतर-मंतर’ खूब चलता है। एक इशारे पर हनुमान सेना तैयार। हालांकि गोद में बैठाकर राजनीति सिखाने वाले कुछ नेताओं के साथ बेनीवाल जी का अनुभव अच्छा नहीं रहा। बड़े होकर वे कहीं और खेलने लगे। 2. ऊर्जा मंत्रीजी की ‘बत्ती फिर गुल’ बिजली वाले मंत्रीजी की बत्ती फिर से गुल हो गई। पहले जयपुर और अब कोटा। जयपुर में तो बत्ती तब गुल हुई थी जब रेलमंत्री आए हुए थे। पार्टी दफ्तर में ही भद्द पिट गई थी। रेलमंत्रीजी सौगातें गिना रहे थे। अचानक अंधकार छा गया। मोबाइलों की लाइट जलने लगी। घुस-मुस होने लगी। लोग दबी हंसी हंसने लगे। हालांकि उस मामले में बिजली कर्मचारी सस्पेंड किए गए, लेकिन दूसरा मौका जल्द आया। इस बार मंत्रीजी अपने गृह जिले कोटा में थे। जिला परिषद के हॉल में विधानसभा क्षेत्र सांगोद में किए गए काम गिनवा रहे थे। इस दौरान बत्ती गुल। हॉल में अंधेरा। किसी ने भागकर खिड़कियों के पर्दे हटाए। किसी ने दौड़कर जनरेटर शुरू किया। हीरे में अपनी चमक होती है। लेकिन यहां जनरेटर यूज करना पड़ा। 3. तालमेल का घालमेल सरकार विभागों के तालमेल से चलती है। लेकिन लगता है कि फिलहाल विभागों के बीच घालमेल चल रहा है। एक विभाग के अंडर आने वाली बॉडी में दूसरे विभाग के 22 पद स्वीकृत हैं। विभाग ने 4 कर्मचारियों को यह कहकर रिलीव कर दिया कि जगह नहीं है। तबादलों के दौर का असर हो सकता है। लेकिन अपने विभाग के कर्मचारियों को रिलीव होता देख दूसरे विभाग के मुखियाजी भड़क उठे। पारा हाई हो गया। जब पद स्वीकृत हैं तो रिलीव करने का क्या मतलब? उन्होंने अपने विभाग के सभी कर्मचारियों-अधिकारियों को APO कराया और वापस बुला लिया। हालांकि, इस पर सफाइयों का दौर चल रहा है। लेकिन खरी बात ये कि एक मुखियाजी ने बात दिल पर ले ली। 4. चलते-चलते.. CI साहब स्टार बन गए। चहुंओर उनकी तारीफ हो रही है। तारीफ का कारण अतिक्रमण हटाने के दौरान पत्थरबाजी का डंटकर सामना करने, या किसी वारंटी को पकड़ने, या तस्कर को डोडा-चूरा के साथ दबोचने, या चोर को थाना इलाके की सीमा के भीतर धर लेने, या बजरी माफिया का पर्दाफाश करने या पुल के नीचे लूट की साजिश रचते बदमाशों को डिटेन करने के लिए नहीं है। ये काम तो पुलिस करती रहती है। कानून के हाथ लंबे होते हैं। ऐसे में पुलिस कुर्सी पर बैठे-बैठे हाथ बढ़ाकर आरोपी को दबोचने में सक्षम है। मुश्किल तो पैरों के साथ है। पैरों को मौका-ए-वारदात तक जाना ही पड़ता है। निगरानी करनी पड़ती है। गश्त पर निकलना पड़ता है। भीलवाड़ा के जहाजपुर में भी SHO दयाराम गश्त पर निकले। नजरें पैनी थी। कान खुले थे। हर हलचल की नब्ज टटोलते हुए शहर में तफरी कर रहे थे। अचानक एक गली में हलचल दिखी। गाड़ी गली की तरफ मोड़ दी। पता चला कि कुछ बच्चे सड़क पर पाला बनाकर खेल रहे हैं। गार्जियन भी वहीं खुले में हवा खा रहे थे। बच्चे पाले की तरफ कांटी फेंकते और लंगड़ी टांग से ठुमकते हुए खेल में बिजी थे। एसएचओ साहब को अपना बचपन याद आ गया। गाड़ी से उतरे और बच्चों के साथ पाला खेलने लगे। कांटी फेंककर लंगड़ी टांग से पालों में पहुंचने का नियम उन्होंने बखूबी निभाया। किसी ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। लोगों ने इसे काफी पसंद किया। कभी-कभी जो काम दोनों टांगों से अपराधियों के पीछे भागकर नहीं होते, वे बच्चों के साथ एक टांग पर खेलकर हो जाते हैं। इनपुट सहयोग- प्रकाश तंवर (नागौर), नितिन शर्मा (कोटा), मनीष जैन (भीलवाड़ा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

अमेरिका ने माना- ईरानी हमलों में 100 सैनिक घायल:कहा- सुरक्षा को देखते हुए देर से जानकारी दी; ईरान के 9 शहरों पर अमेरिकी हमले

अमेरिका ने मान लिया है कि ईरान के जवाबी हमलों में उसके करीब 100 सैनिक घायल हुए हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये सैनिक 7 जुलाई के बाद हुए हमलों में घायल हुए। इनमें से 96% सैनिक ठीक होकर ड्यूटी पर लौट चुके हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर को सिर पर हल्की चोट लगी थी। पार्नेल ने यह बयान न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट के जवाब में दिया, जिसमें दावा किया गया था कि रक्षा मंत्रालय ईरान के साथ युद्ध में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है। पार्नेल ने कहा कि इसमें जानबूझकर देरी हुई। ऐसा सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया। उधर अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हमले जारी हैं। ईरान ने सोमवार को उन देशों को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसके जवाब में अमेरिका ने मंगलवार सुबह ईरान के 9 शहरों पर हवाई हमले किए। ईरान की लेबर न्यूज एजेंसी के मुताबिक अबदानान, बंदर अब्बास, बंदर लेंगेह, बुशेहर, चाबहार, केश्म द्वीप, सीरिक, शीराज और कोनारक को निशाना बनाया गया। ईरान जंग से जुड़े सभी अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

शेर की दहाड़ और पहेलियों से प्रेम की परीक्षा:हजारों राजकुमार हुए नाकाम, जानिए, राणा महेंद्र पर कैसे आकर्षित हुईं मूमल, एपिसोड-2

कल आपने पढ़ा कि राजकुमारी मूमल का हाथ थामने की चाह रखने वाले कई राजकुमार आए। लेकिन सभी मूमल के जादुई महल की पहेलियों में उलझ कर वापस लौट चुके थे। पढ़िए आगे की कहानी- मूमल इंतजार में थी उस राजकुमार के जो उसकी खूबसूरती से ज्यादा उसकी पहेलियों की गहराई को समझ सके। अपने मन में वह संकल्प लिए बैठी थी कि लौद्रवा का महल उसी का स्वागत करेगा जो बिना डरे काक महल की पहेलियों को सुलझा पाएगा। हजारों राजकुमारों के असफल होने के बाद, कहानी में प्रवेश हुआ अमरकोट के राणा महेंद्र का। महेंद्र निडर और साहसी योद्धा थे। एक दिन शिकार खेलते हुए वे भटककर काक नदी के तट पर पहुंच गए। वहां उन्होंने मूमल के जादुई महल की चर्चा सुनी। उनके साथियों ने उन्हें चेतावनी दी- राणा वहां जाना अपनी जान और इज्जत को दांव पर लगाना है। वह राजकुमारी सौंदर्य से ज्यादा अपनी पहेलियों के लिए जानी जाती है। राणा महेंद्र ने इस चेतावनी को चुनौती की तरह लिया। उन्होंने अपने ऊंट को एड़ लगाई और महल की ओर बढ़ गए। गहरा और डरावना था काक नदी का पानी चांदनी रात थी और रेगिस्तान की रेत चांदी की तरह चमक रही थी। राणा महेंद्र अपने ऊंट पर सवार काक नदी के किनारे पहुंच गए-ठहरो चीतल ! सामने देखो..वह रहा काक महल। जिसकी चर्चा पूरे राजपूताने में है, महेंद्र के चेहरे पर डर नहीं, एक जिज्ञासु मुस्कान थी। महेंद्र जैसे ही महल की ओर बढ़े, सामने एक विशाल जलाशय दिखाई दिया जिसमें चांद की परछाईं हिल रही थी। पानी गहरा और डरावना लग रहा था। इतना शांत पानी… और लहरें भी नहीं? महेंद्र सोच में पड़ गए। …और टूट गया जादुई महल का तिलस्म महेंद्र ने अपनी तलवार निकाली और पानी की सतह पर मारी। ‘खनक’ की आवाज आई। वे समझ गए कि यह पानी नहीं, बल्कि चमकाया हुआ पत्थर और कांच है। वे निडर होकर उस पर चल पड़े। मूमल ऊपर से यह सब देख रही थी। वह हैरान थी कि कोई इतनी जल्दी रहस्य समझ गया। महेंद्र महल के गलियारे में पहुंचे। अचानक रास्ते में उन्हें कांटों और झाड़ियों का ढेर दिखाई दिया, जिससे गुजरना असंभव लग रहा था। हवा का झोंका इन कांटों के बीच से होकर आ रहा है, अगर ये असली होते तो हवा रुक जाती, महेंद्र ने मन ही मन समझ बनाई, आंखें बंद कीं और सीधा उन कांटों की तरफ कदम बढ़ा दिए। जैसे ही वे उनसे टकराए, कांटे धुएं की तरह गायब हो गए। वह सिर्फ एक रेशमी परदे का भ्रम था। अपने आप खुल गए दरवाजे अगले कक्ष में उन्हें शेर की दहाड़ सुनाई दी और सैकड़ों परछाइयां उनकी ओर झपटीं। महेंद्र ने तलवार नहीं निकाली, बल्कि अपनी आंखें बंद कर लीं और अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी। उन्होंने महसूस किया कि यह सब हवा और शीशों का खेल है। उनकी इसी बुद्धिमानी और धैर्य को देखकर मूमल बेहद प्रभावित हुई। महेंद्र अंततः मूमल के कक्ष पर पहुंचे। दरवाजे अपने आप खुल गए। सामने मूमल खड़ी थी, जिसके चेहरे पर गर्व और खुशी साफ दिखाई दे रही थी। काक महल के भ्रम को केवल वही पार कर सकता था जिसकी आंखों पर अहंकार की पट्टी न हो। यहां रास्ता वही बना पाता है जो आंखों से नहीं, दिल से देखता है। आपका स्वागत है राणा महेंद्र, मूमल का चेहरा खुशी से चमक उठा। राजकुमारी, आपकी पहेलियां कठिन थीं, लेकिन सत्य हमेशा सीधा होता है। मैं यहां आपकी बुद्धिमानी को नमन करने आया हूं, राणा महेंद्र की नज़र मूमल के चेहरे पर जैसे ठहर गईं। महेंद्र और मूमल एक दूसरे की बुद्धिमत्ता पर मोहित थे। उस रात लौद्रवा की ठंडी रेत ने एक ऐसा मिलन देखा, जो देखते ही देखते अटूट प्रेम में तब्दील हो गया। कहते हैं प्रेम की परीक्षा अक्सर कठिन होती है। इस प्रेम कहानी को भी नियति का सामना करना पड़ा। मूमल -महेंद्र का प्रेम परवान पर था, लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ जिसने इस गहरे प्रेम को विरह में बदल दिया? जानिए अगले एपिसोड में….. (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। सोर्स : राजस्थानी साहित्य, लोक कथाएं व स्थानीय लोगों से बातचीत ) ….. राजस्थानी प्रेम कहानी…मूमल-महेंद्र की कहानी का पार्ट-1 रेगिस्तान में काक नदी के किनारे था मूमल का महल:अमरकोट के राजा और जैसलमेर की राजकुमारी का प्रेम; 4 एपिसोड में मूमल-महेंद्र की कहानी जैसलमेर के लौद्रवा की राजकुमारी मूमल और अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान) के राणा महेंद्र की प्रेम कहानी सदियों पुरानी है। इस कहानी को जानने के लिए दैनिक भास्कर जैसलमेर से 14 किलोमीटर दूर लौद्रवा गांव पहुंचा। पूरी स्टोरी पढ़िए…

झालावाड़ में नदी के उफान में पुल डूबा, रास्ता बंद:सीकर-बारां में दुकान-ऑफिसों में पानी घुसा; जयपुर-भरतपुर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट

राजस्थान में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है। 9 जिलों में बारिश हुई। झालावाड़ जिले में तेज बारिश के कारण परवन नदी उफान पर है। यहां एक छोटा पुल और मंदिर डूब गया। बारां में मूसलाधार बारिश के कारण दुकानों में पानी घुस गया। सीकर में ट्रैक पर पानी भरने से ट्रेनों का शेड्यूल प्रभावित हुआ है। चूरू में 5 घंटे तक रुक-रुककर बरसात हुई। वहीं, जयपुर में सोमवार देर शाम से शुरू हुआ बारिश का दौर मंगलवार सुबह 7 बजे तक जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले 3 दिन पूरे प्रदेश में तेज बारिश की संभावना है। बुधवार को जयपुर-भरतपुर संभाग में भारी बारिश की भी आशंका है। प्रदेश में फिर एक्टिव हुए मानसून के कारण दिन का तापमान 7 डिग्री तक गिर गया है। गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स घर-ऑफिस डूबे, ट्रेनें प्रभावित: सीकर शहर व आसपास के इलाकों मंगलवार रात करीब डेढ़ बजे शुरू हुआ तेज बारिश का दौर सुबह 7.30 बजे तक जारी रहा। तेज बरसात के कारण पुलिस लाइन के क्वार्टर, कलेक्ट्रेट में पानी घुस गया। यार्ड में पानी भरने से सीकर-रेवाड़ी (54803) ट्रेन को लोहारू-रेवाड़ी के बीच कैंसिल किया है। रेवाड़ी-जोधपुर (14824) ट्रेन को रेवाड़ी-लोहारू के बीच कैंसिल किया गया है। शेखावाटी के झुंझुनूं और चूरू में सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर बरसात हुई। झालावाड़ में नदी उफनी, मंदिर-पुल डूबे: हाड़ौती क्षेत्र के बारां और झालावाड़ जिले में मंगलवार सुबह से बारिश का दौर जारी रहा। झालावाड़ जिले के मनोहरथाना में परवन नदी में उफान से करीब एक छोटा पुल डूब गया। नदी का जलस्तर तीन फीट बढ़ने से एक मंदिर का भी काफी हिस्सा डूब गया। बारां में भी सुबह हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर के अधिकतर इलाकों में जलभराव हो गया। 9 शहरों में बरसात: मंगलवार को सीकर, झुंझुनूं, चूरू, झालावाड़, बारां, कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, कोटा, उदयपुर में बरसात हुई। सबसे ज्यादा बारिश सीकर में 90 मिमी रिकॉर्ड हुई है। वहीं, सोमवार को करौली के टोडाभीम में एक इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट हुई है। जयपुर का अधिकतम तापमान 3 डिग्री तक लुढ़ककर 34.4 डिग्री दर्ज हुआ। भारी बारिश की भी आशंका: मंगलवार को प्रदेश के 33 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी है। वहीं, बुधवार से कोटा, अजमेर, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर, जोधपुर व बीकानेर संभाग में मानसून सक्रिय रहेगा। भरतपुर और जयपुर संभाग में भारी बारिश होने की आशंका है। वहीं, राज्य में फिर से सक्रिय हुए मानसून के बाद से तापमान में भी गिरावट आई है। राजस्थान में बारिश की PHOTOS…
…. बारिश की ये खबर भी पढ़िए… सीकर में 3.5 इंच से ज्यादा बारिश,सीकर-रेवाड़ी ट्रेन आंशिक रद्द:पुलिस क्वार्टरों में भरा गंदा पानी, सीवरेज ओवरफ्लो; अगले 2 दिन बारिश का अलर्ट मानसून की पल-पल की अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी स्पीकर से मिले:कहा- लोकसभा में चर्चा हो; खड़गे बोले- सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा, चिट्ठी लिखी

संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार तक स्थगित कर दी गई। इसके पहले मंगलवार सुबह 11 बजे जैसे ही दोनों सदनों में कार्यवाही शुरू हुई विपक्ष ने NEET पेपर लीक पर चर्चा की मांग की, प्लेकार्ड दिखाए और नारेबाजी की। भारी हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और इसके बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई थी। सदन के बाहर आकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है, लोकतंत्र में ऐसा करना गलत है। वहीं, नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और सैयद नासिर हुसैन ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत काम रोकने का नोटिस दिया है। उन्होंने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की है। वहीं, इससे पहले संसद भवन में NDA संसदीय दल की बैठक हुई। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बैठक में पीएम मोदी ने बताया कि पेपर लीक मामले में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। मानसून सत्र के दूसरे दिन की तस्वीरें…
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मानसरोवर में डुबकी नहीं, बाल्टी से हो रहा स्नान:2018 से चीनी रोक बरकरार; कैलाश परिक्रमा में टॉयलेट की कमी से बढ़ी मुश्किलें

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को पवित्र मानसरोवर झील में डुबकी लगाने की अनुमति नहीं है। चीनी प्रशासन ने मानसरोवर झील को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए झील में उतरकर स्नान करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसे में श्रद्धालु झील से बाल्टी में पानी निकालकर स्नान कर धार्मिक परंपरा निभाते हैं। वहीं कैलाश परिक्रमा के दौरान डेरापुक और झुंझुपुई में शौचालयों की कमी से यात्रियों, खासकर महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हर यात्री को मिलती है एक बाल्टी कैलाश पर्वत के दर्शन के बाद मानसरोवर झील में डुबकी लगाना सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2018 के बाद चीनी प्रशासन ने झील में उतरकर स्नान करने पर रोक लगा दी। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला मानसरोवर झील को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए लिया गया है। इस वर्ष भी यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को शुरुआत में ही एक-एक बाल्टी दी गई। श्रद्धालुओं ने उसी बाल्टी से मानसरोवर का जल निकालकर स्नान किया और धार्मिक परंपरा पूरी की। परिक्रमा के दो पड़ावों पर टॉयलेट की दिक्कत यात्रा पूरी कर लौटे श्रद्धालुओं ने बताया कि भारत की ओर से कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) की व्यवस्थाएं अच्छी रहीं, लेकिन कैलाश परिक्रमा के दौरान डेरापुक और झुंझुपुई में शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यात्री भूपेश पंत ने बताया कि परिक्रमा के दौरान टॉयलेट नहीं होने से काफी दिक्कत हुई। ‘जीवन में एक बार कैलाश जरूर जाना चाहिए’ कर्नाटक के बेंगलुरु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर पहुंचे शैलेश सुमन और उनकी पत्नी रीना सुमन ने यात्रा को जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। मूल रूप से झारखंड निवासी दंपती ने कहा कि पूरी यात्रा भक्तिमय माहौल में सकुशल संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि KMVN, ITBP, SSB, भारतीय सेना और चीन की ओर की व्यवस्थाएं संतोषजनक रहीं। मानसरोवर में स्नान और पूजा-अर्चना के बाद वे पवित्र जल भी अपने साथ भारत लेकर लौटे। हालांकि उन्होंने बताया कि कैलाश परिक्रमा के दौरान डेरापुक और झुंझुपुई में शौचालयों की संख्या कम है और उनकी स्वच्छता भी बेहतर नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर महिला यात्रियों पर पड़ता है। दंपती ने कहा कि खराब मौसम के कारण भूस्खलन से सड़कें बाधित हुईं, जिससे उन्हें दो दिन अतिरिक्त रुकना पड़ा। लेकिन BRO, भारतीय सेना और अन्य एजेंसियों ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए 24 घंटे के भीतर कई स्थानों पर सड़कें बहाल कर दीं, जिसके लिए वे उनके आभारी हैं। शैलेश सुमन ने कहा कि जीवन में हर सनातनी को कम से कम एक बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा जरूर करनी चाहिए। यह भगवान शिव का पवित्र धाम है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि कैलाश यात्रा पर विभिन्न राज्यों की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी को पूरे देश में एक समान किया जाए, ताकि सभी श्रद्धालुओं को बराबर लाभ मिल सके। चीन से बात कर सुविधाएं बढ़ाए भारत सरकार यात्रियों ने मांग की है कि भारत सरकार इस मुद्दे को चीनी प्रशासन के सामने उठाए, ताकि परिक्रमा मार्ग पर पर्याप्त और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था हो सके। उनका कहना है कि कैलाश मानसरोवर जैसी विश्वप्रसिद्ध धार्मिक यात्रा में श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि यात्रा और अधिक सुगम व सुरक्षित बन सके। कुल दूरी और ट्रेक- अब कितना आसान हुआ सफर इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा की कुल दूरी 1738 किलोमीटर हो गई है। इसमें लगभग 1690 किलोमीटर यात्रा वाहन से और सिर्फ 38 किलोमीटर पैदल ट्रेक है। साल 2019 से पहले यात्रियों को धारचूला से लिपुलेख दर्रे तक 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था। रास्ते में ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण होती थी। अब भारत और चीन दोनों तरफ सड़क बनने के बाद यह यात्रा काफी आसान हो गई है। सीमावर्ती क्षेत्र तक वाहन पहुंचने लगे हैं, जिससे बुजुर्ग और पहली बार यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह यात्रा पहले की तुलना में ज्यादा सुलभ हो गई है। 5 साल बाद फिर शुरू हुई कैलाश यात्रा कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा तनाव के कारण पांच साल तक बंद रहने के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू हुई है। पहला दल दिल्ली से 4 जुलाई की शाम टनकपुर पहुंचा था और 5 जुलाई को धारचूला के लिए रवाना हुआ। इसके बाद गुंजी में मेडिकल जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 10 जुलाई को तिब्बत (चीन) में प्रवेश किया। अब तक चार दल रवाना हो चुके हैं, जिनमें पहला दल यात्रा पूरी कर भारत लौट आया है। ————— ये खबर भी पढ़ें : भारत से कैलाश पर्वत दर्शन के लिए करना होगा इंतजार: 2 माह बाद जारी होंगे परमिट; व्यू पॉइंट पर हर दिन बदलता रहता है मौसम तिब्बत स्थित पवित्र कैलाश पर्वत के भारत से दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को अभी करीब दो महीने और इंतजार करना होगा। फिलहाल इनर लाइन परमिट (ILP) जारी नहीं किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि सितंबर के आसपास परमिट शुरू होने पर आदि कैलाश और ओम पर्वत आने वाले श्रद्धालु 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ओल्ड लिपुलेख (ओल्ड लिपुपास) जाकर भारत की सीमा से कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

पंजाब- शादी के ढाई महीने बाद NRI दूल्हे की मौत:दुल्हन ने दवाइयां खाते पकड़ा था, पूछने पर कहा- जिम में चोट लगी, इसलिए खाता हूं

‘अगर हमें पता होता कि दूल्हा कैंसर का मरीज है, तो हम कभी अपनी बेटी की शादी नहीं करते। इतनी बड़ी बात लड़के के परिजनों ने हमसे छिपाई।’ ये कहना है होशियारपुर की रहने वाली युवती की मां का, जिसके पति की कैंसर से शादी के ढाई महीने बाद ही मौत हो गई। मां ने कहा कि बेटी को पढ़ाई के लिए कनाडा भेजा था, जहां पढ़ाई के बाद उसे नौकरी भी मिल गई। इसी बीच अमेरिका में रहने वाले एक NRI परिवार की ओर से रिश्ता आया। हमें लगा कि बेटी के लिए अच्छा रिश्ता मिल गया है, क्योंकि हमारे पति और लड़के के पिता भी पंजाब पुलिस में हैं। लेकिन यहीं से उनकी खुशियों पर ग्रहण लगना शुरू हो गया। बेटी ने शादी के 20 दिन बाद जब पति को रोज दवाइयां खाते देखा, उसने पूछा, लेकिन दामाद ने कहा कि उसे जिम में चोट लग गई थी। लेकिन जब इवाइयों के नाम ऑनलाइन चेक किए, तो पता चला कि वे कैंसर की दवाइयां थीं। इसके बाद परिवार ने ससुराल पक्ष से सवाल किया, लेकिन उन्होंने बीमारी से इनकार कर दिया। कुछ दिनों बाद युवक की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में मिले दस्तावेजों से परिवार का दावा है कि युवक की दो बार ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी भी हो चुकी थी…पढ़ें पूरी रिपोर्ट…. लड़की की मां ने ये बड़ी बातें बताईं… महिला आयोग के समन के बाद पेश नहीं हुआ परिवार परिवार के अनुसार, पंजाब राज्य महिला आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए लड़के वालों को समन जारी कर तलब किया था। लड़के वाले किसी हादसे का हवाला देकर आयोग के सामने पेश नहीं हुए। आयोग ने जांच प्रभावित होने की आशंका जताते हुए पासपोर्ट से संबंधित कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। हालांकि पुलिस ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। CM भगवंत मान से स्वतंत्र जांच की मांग पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मामले की स्वतंत्र एजेंसी से तय समय में जांच कराने की मांग की है। परिवार की मांग है कि महिला आयोग के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए और मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। परिवार ने यह भी आशंका जताई है कि लड़के का पिता विदेश जा सकता है। इसलिए उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत पासपोर्ट से जुड़े जरूरी कदम उठाने की मांग की है। ************** ये खबर भी पढ़ें: ₹30 लाख लगाकर पत्नी को कनाडा भेजा,पहुंचते ही तलाक दिया: लुधियाना में कॉन्ट्रैक्ट मैरिज की, पति को PR दिलाने का वादा; एयरपोर्ट तक लेने नहीं आई लुधियाना की जशनवीर कौर और परमिंदर सिंह की शादी साढ़े चार साल पहले सिख रीति रिवाज के हिसाब से हुई। शादी के वक्त दोनों परिवारों में 30 लाख रुपए में समझौता हुआ कि लड़की कनाडा जाएगी और उसका पूरा खर्च ससुराल पक्ष उठाएगा। (पढ़ें पूरी खबर)

ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी ड्राइवर पर थूका:रेडियो पर बच्चों की हत्या, पत्नियों को गुलाम बनाने की धमकी; गृहमंत्री बोले- ये कड़वा सच

ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी बोलने पर ट्रक ड्राइवर पर थूक दिया गया। रेडियो पर पत्नियों को गुलाम बनाकर बेचने और बच्चों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया संस्थान ABC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ड्राइवरों को पगड़ी पहनने और आपस में पंजाबी में बात करने पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऑस्ट्रेलियन ट्रकिंग एसोसिएशन (ATA) और नेशनल हेवी व्हीकल रेगुलेटर (NHVR) ने इस तरह के व्यवहार की निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का मानसिक तनाव ड्राइवरों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। इससे उनका ध्यान बंटता है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के ठीक बाद ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बर्क ने माना कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों और ट्रकों के अंदर इस्तेमाल होने वाले सीबी रेडियो पर भारतीय ड्राइवरों को निशाना बनाना एक कड़वी सच्चाई है। बता दें, ऑस्ट्रेलिया में 5 हजार के करीब पंजाबी मूल के ट्रक ड्राइवर हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने सरकारी कागजों में अपनी मातृ भाषा पंजाबी लिखवाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि असल संख्या 7 से 8 हजार के करीब हो सकती है। धमकी भरे ऑडियो में क्या कहा गया इंस्टाग्राम पर यह ऑडियो क्रिएटर एगी (@babysoftarms) ने शेयर किया है। यह ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) की जांच का हिस्सा है। ट्रक ड्राइवरों के बीच रेडियो पर आमतौर पर सड़क सुरक्षा या रूट की बात होती है, लेकिन इस क्लिप में नफरत भरी आवाजें आ रही हैं। एक व्यक्ति कहता है- भारतीयों को मार डालो। श्वेत आदमी के लिए खड़े हो। गृह युद्ध आने वाला है। हम सभी भारतीय पुरुषों को मार डालेंगे, उनके बच्चों को पानी में डुबो देंगे और उनकी औरतों को गुलामी के लिए बेच देंगे। लहजे के आधार पर गालियां ABC की रिपोर्ट में कई भारतीय ड्राइवरों ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों पर नस्लवाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। एक ड्राइवर ने कहा कि अगर आपका लहजा ऑस्ट्रेलियाई है तो कोई समस्या नहीं, लेकिन अगर पंजाबी या भारतीय अंदाज में बोलते हो तो रेडियो पर भारी गालियां मिलती हैं। इन लगातार धमकियों से परेशान होकर कई भारतीय ड्राइवरों ने रेडियो का इस्तेमाल करना ही छोड़ दिया है। वे अब इस तरह की बातचीत से दूर रहते हैं। पंजाबी ड्राइवरों ने ये दिक्कतें बताईं… भारतीय ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार क्या कर रही… ऑस्ट्रेलिया एक ऑर्केस्ट्रा की तरह है, जहां हर संस्कृति की अपनी जगह गृहमंत्री टोनी बर्क ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कभी किसी एक समाज का देश नहीं रहा है। हम एक ऑर्केस्ट्रा (संगीत मंडली) की तरह हैं। इसमें कई अलग-अलग तरह के यंत्र होते हैं, लेकिन जब सब मिलकर बजते हैं तो एक खूबसूरत धुन बनती है। भारतीय समुदाय के खिलाफ ऐसी नफरत की हमारे देश में कोई जगह नहीं है। क्यों अहम हैं भारतीय ड्राइवर? ऑस्ट्रेलिया की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारतीय ऑस्ट्रेलिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रवासी समुदाय बनकर उभरा है। इनमें से बड़ी संख्या में भारतीयों ने ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में श्रमिकों की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंटरनेशनल रोड ट्रांसपोर्ट यूनियन (IRTU) के वर्ष 2024 के अनुमान के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में लगभग 28,000 भारी वाहन ड्राइवरों की कमी थी। रिपोर्ट के अनुसार, सिख और पंजाबी प्रवासियों के लिए ट्रक चलाना कोई नया पेशा नहीं है। उनके परिवारों का लंबे समय से खेती-बाड़ी और परिवहन व्यवसाय से जुड़ाव रहा है, इसलिए बड़ी संख्या में सिख और पंजाबी समुदाय के लोग ऑस्ट्रेलिया में भी ट्रक ड्राइविंग को रोजगार के रूप में अपनाते हैं। हालांकि, नस्लीय घटनाए बढ़ने के बाद पुराने ड्राइवर रिटायर हो रहे हैं और नए स्थानीय युवा इस काम में नहीं आ रहे हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में समस्या पैदा हो सकती है। ———- यह खबर भी पढ़ें… कनाडा सरकार का पंजाबियों को झटका, PR होने पर भी पेरेंट्स, दादा-दादी को साथ नहीं बसा पाएंगे कनाडा में रह रहे लाखों भारतीयों, खासकर पंजाबी समुदाय को बड़ा झटका लगा है। कनाडा सरकार ने 15 जुलाई 2026 से पेरेंट्स एंड ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम (PGP) के तहत नई स्पॉन्सरशिप अर्जियाें पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इससे अब कनाडा में PR हासिल कर चुके नए आवेदक अपने माता-पिता और दादा-दादी को स्थायी निवास (PR) दिलाने के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। पढ़ें पूरी खबर…