ब्रेकिंग न्यूज़
तेज रफ्तार स्कॉर्पियो डंपर में घुसी, 5 की मौत, VIDEO:जोधपुर में मंदिर से दर्शन कर घर लौट रहे थे, गाड़ी के अंदर बुरी तरह फंसे शव

बालोतरा में भीषण सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई। 3 लोग गंभीर घायल हैं। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो आगे चल रहे डंपर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गाड़ी के अंदर घायल तड़प रहे थे। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और घायलों को निकाला। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। सभी घायलों को राजकीय नाहटा अस्पताल, बालोतरा पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने 3 लोगों को मृत घोषित कर दिया। 5 गंभीर घायलों को जोधपुर रेफर कर दिया। जोधपुर में इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई। हादसा बाड़मेर-जोधपुर नेशनल हाईवे पर रात करीब 11:30 बजे पचपदरा थाना क्षेत्र के भाडिंयावास गांव के पास हुआ। मृतकों की पहचान बालोतरा जिले के कानोड गांव निवासी रेवांताराम (26) पुत्र गेनाराम जाट, स्वरूपाराम (27) पुत्र मेहराराम जाट, भरत (25) पुत्र बन्नाराम जाट किशन (27) पुत्र शेराराम जाट और भावेश पुत्र कलाराम जाट के रूप में हुई है। सभी लोग जोधपुर में भोमियाजी के दर्शन कर लौट रहे थे। हादसे की 6 तस्वीरें… 5 घायल जोधपुर रेफर हादसे में रेवांताराम, स्वरूपाराम , भरत की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल किशन,भावेश,बाबू, मुकेश और हेमाराम को प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान किशन और भावेश ने दम तोड़ दिया।

दतिया उपचुनाव-बीजेपी की सभा में नरोत्तम के आंसू छलके:बोले- आशुतोष को जिताने एक-एक घर के सामने शीश नवाऊंगा, हम सब साथ खड़े

दतिया में बीजेपी की सभा में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की आंखें छलक गईं। उनका गला भर आया, आवाज भर्रा उठी। नरोत्तम ने कहा- कांग्रेस कहती है कि भाजपा में फूट है। देख लीजिए, हम सब यहां साथ खड़े हैं। मैं इस उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को जिताने दतिया के एक-एक घर के सामने शीश नवाऊंगा। नरोत्तम ने कहा- कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह यानी राजा साहब एक्सपायरी डेट की होम्योपैथी की गोली हैं। वो बहुत मीठी होती है, लेकिन असर कुछ नहीं होता। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- नरोत्तम, हम छोटे भाई आशुतोष तिवारी को आपके सुपुर्द कर रहे हैं। इनको पार लगाना अब आपका काम है। इससे पहले सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने नॉमिनेशन फाइल किया। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती, सपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव और दूसरे नेता मौजूद रहे। वहीं, बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने दोपहर करीब ढाई बजे नामांकन भरा। मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा समेत दूसरे पार्टी नेता उनके साथ रहे। कांग्रेस की सभा में नहीं पहुंचे अवधेश नायक, बोले- मेरे साथ गलत किया उधर, दतिया में कांग्रेस की सभा से अवधेश नायक की गैर-मौजूदगी ने बीजेपी में उनकी वापसी की अटकलें शुरू कर दी हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से फोन पर कहा- मुझे 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया था। फिर कांग्रेस के ही लोगों ने मेरे पुतले जलाकर अपमान किया। बाद में मेरा टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को दे दिया गया। तत्कालीन प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मुझसे कहा था कि आप पार्टी को जिताओ। अगली बार आपको टिकट मिलेगा। इस बार भी कांग्रेस ने मुझे टिकट नहीं दिया। मैं 20-25 दिन पहले दिग्विजय सिंह से मिलने गया था। उन्होंने मुझसे कहा था कि अवधेश जी, सर्वे में आपका फीडबैक अच्छा है। लेकिन आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं। बीजेपी सांसद वीडी शर्मा के करीबी रहे हैं। ऐसा न हो कि हम टिकट दें और आप जीतकर बीजेपी में चले जाओ। अवधेश नायक ने आगे कहा- मुझे कांग्रेस के प्रत्याशी घनश्याम सिंह से कोई दिक्कत नहीं हैं। लेकिन प्रदेश नेतृत्व ने मेरे साथ गलत किया है। बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष मेरे छोटे भाई हैं। क्या आप बीजेपी में वापस जाएंगे…इसके जवाब में नायक ने कहा- मेरे सामने सारे विकल्प खुले हैं। विचार मंथन चल रहा है। हालांकि, जब मीडिया ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से अवधेश नायक की वापसी पर सवाल किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। दिग्विजय बोले- आपके टिकट का विरोध किया, माफी चाहता हूं दूसरी तरफ, कांग्रेस की सभा के मंच से दिग्विजय सिंह ने अवधेश नायक से माफी मांगी। दिग्विजय बोले- मैंने आप के टिकट का विरोध किया था। कारण था कि आप तभी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। लेकिन आपने 2023 के विधानसभा चुनाव में दमदारी और ईमानदारी से काम किया। राजेंद्र भारती को जिताया। मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैंने कहीं आपका अपमान किया हो तो मैं आपसे माफी चाहता हूं। उपचुनाव में नामांकन की 4 तस्वीरें… दतिया में चुनावी हलचल के मिनट टु मिनट अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…

राजस्थान में ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल:VLTD, परमिट और ई-डिटेक्शन के विरोध में थम गए 10 हजार ट्रकों के पहिए

राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), परमिट और ई-डिटेक्शन चालान को लेकर ट्रांसपोर्टर रविवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रकों के पहिए थम गए हैं। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि सरकार ने नियम तो लागू कर दिए, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्था नहीं की, जिसका खामियाजा वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन को प्रदेश के कई बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों का समर्थन मिला है। लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA), जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन और ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन सहित कई संगठनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। इन मुद्दों पर शुरू हुआ आंदोलन राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति ने तीन प्रमुख मुद्दों को लेकर चक्का जाम शुरू किया है। इनमें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की उपलब्धता, परमिट व्यवस्था में आ रही दिक्कतें और ई-डिटेक्शन के जरिए हो रहे चालान शामिल हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि प्रदेश के हर जिले में वाहन फिटनेस सेंटर खोले जाएं, ताकि वाहन मालिकों को दूसरे शहरों के चक्कर न काटने पड़ें। VLTD का विरोध नहीं, व्यवस्था की कमी का विरोध विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने बताया कि ट्रांसपोर्टर व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) के विरोध में नहीं हैं। सरकार ने इसे अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन अधिकृत कंपनियों के पास डिवाइस ही उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण हजारों ट्रकों का फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी काम अटक गए हैं। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि पहले पर्याप्त संख्या में डिवाइस उपलब्ध कराई जाएं और पूरी व्यवस्था आसान बनाई जाए, उसके बाद ही नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। परमिट और टैक्स से बढ़ रही परेशानी ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने फिलहाल अस्थायी परमिट (TP) की व्यवस्था जारी रखी है, लेकिन इससे लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले ट्रकों की परेशानी कम नहीं होगी। यदि कोई ट्रक राजस्थान से केरल, चेन्नई, गुवाहाटी या अन्य राज्यों में जाता है, तो उसे अलग-अलग राज्यों का टैक्स देना पड़ता है। कई मामलों में टैक्स और परमिट का खर्च ही माल भाड़े के बराबर पहुंच जाता है। इसके साथ ही ई-डिटेक्शन चालानों का भी लगातार खतरा बना रहता है। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स ने जारी किया समर्थन पत्र लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA) ने आंदोलन के समर्थन में पत्र जारी किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल आनंद और महासचिव नवीन शर्मा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कारोबार बढ़ते खर्चों, अव्यावहारिक नियमों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण संकट में है। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और संगठन इस आंदोलन का पूरा समर्थन करता है। बस ऑपरेटर एसोसिएशन का भी मिला साथ ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। इसके अलावा जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन समेत कई संगठनों ने संयुक्त रूप से हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। माल ढुलाई पर पड़ सकता है बड़ा असर ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति का दावा है कि प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रक इस हड़ताल में शामिल हैं। यदि सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी, तो प्रदेश में सीमेंट, स्टील, किराना, कृषि उपज और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति (सप्लाई) प्रभावित हो सकती है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि सरकार जल्द वार्ता कर इसका स्थायी समाधान निकाले, ताकि परिवहन व्यवस्था सामान्य हो सके।

इंजीनियर्स का 2 लाख का खेल,चहेतों को 43.86-करोड़ का ठेका:पोल खुली तो 50 लाख के टेंडर देने वाला SE सस्पेंड, करोड़ों वालों पर एक्शन नहीं

अजमेर डिस्कॉम (14 जिलों) के अंदर एक बड़ा खेल सामने आया है। इंजीनियर्स ने पिछले दो सालों में 43.86 करोड़ के टेंडर अपने चहेते ठेकेदारों को दे दिए। इसके लिए उन्होंने एक नियम का फायदा उठाया, जिसमें 2 लाख से कम के काम के लिए ई टेंडर जारी करने की जरूरत नहीं होती। फर्मों से सिर्फ कोटेशन मंगवाकर काम दे दिया जाता था। सर्कल ऑडिट में इस बात का खुलासा हुआ है। इसकी पूरी जानकारी डिस्कॉम प्रबंधन को थी। इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब इंजीनियर्स को बचाने की तैयारी की जा रही है। ऐसा हम नहीं, डिस्कॉम सचिव का एक आदेश कह रहा है। आदेश में 2 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले जिम्मेदार SE के खिलाफ कार्रवाई की जाए और 1 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले अन्य सभी लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात लिखी गई है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। भास्कर ने सचिव से बात की तो, उन्होंने ऐसे किसी भी आदेश के जारी होने से इनकार कर दिया। अब पढ़िए… अजमेर डिस्कॉम में कैसे चला पूरा खेल उदयपुर SE की गड़बड़ी की जांच में सामने आया मामला सूत्रों के अनुसार- प्रबंधन को नवम्बर 2025 में शिकायत मिली थी कि उदयपुर के SE ने नियमों की अनदेखी कर टेंडर में स्पीलिटिंग ऑफ पावर का उपयोग कर गड़बड़ी की। इस गड़बड़ी की जांच में राजस्थान सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता अधिनियम, 2013 (RTPP Act, 2013) के प्रावधान और स्वीकृत बजट से ज्यादा खरीद के लिए उत्तरदायी माना। इसके साथ ही लेखाधिकारी (OM) को भी लाइन केबल नेटवर्क के अंतर्गत बजट नियंत्रण और उपयोग में अनियमितता का दोषी पाया गया। सर्कल ऑडिट में करोड़ों की खरीददारी सामने आई जांच रिपोर्ट को प्रबंध निदेशक व सचिव (प्रशासन) को भेजा गया। साथ ही सर्कल की ऑडिट कराई गई, इसमें न केवल चालू वर्ष बल्कि पिछले साल 2024-2025 का डेटा भी तैयार किया गया। ये जांच रिपोर्ट जनवरी महीने तक मिल गई। इसमें बडे़ स्तर पर करोड़ों की खरीदारी करने की बात सामने आई है। इसके लिए CAO (ER-WM), एवीवीएनएल, अजमेर द्वारा 13 मार्च 2026 को आदेश जारी कर स्थानीय खरीद पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए। गड़बड़ी सामने आई, लेकिन कार्रवाई लंबित उदयपुर एसई और अन्य सर्कल की रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रबंध निदेशक ने सभी सर्कल की जांच कराने के निर्देश दिए, ताकि अधीक्षण अभियंताओं की खरीद समितियों की ओर से की गई खरीद का आंकलन किया जा सके। इसके बाद सभी सर्कल की जांच हुई और ऑडिट ने रिपोर्ट सचिव प्रशासन को भेज दी लेकिन उच्च स्तर पर कार्रवाई अभी भी लम्बित चल रही है। जिम्मेदारों को बचाने के लिए नियम 1 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वालों को नोटिस का आदेश अजमेर डिस्कॉम की सचिव सीमा शर्मा ने 25 जून 2026 को एक आदेश जारी किया था। आदेश में बताया था कि डिस्कॉम प्रशासन ने निर्णय लिया है कि 2 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले जिम्मेदार अधीक्षण अभियंताओं के खिलाफ नियम 6 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। वहीं 1 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले अन्य सभी लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। सचिव सीमा ने ये आदेश तब जारी किया, जब डिस्कॉम के एमडी के.पी. वर्मा थे। आदेश जारी करने के 6 दिन बाद उनका कार्यकाल पूरा हो गया और उनकी जगह पर अतिरिक्त कार्यभार जोधपुर डिस्कॉम के एमडी आईएएस डॉ. भंवरलाल को सौंपा गया। अधिकारियों को बचाने के लिए आदेश तो नहीं? माना जा रहा है कि इस आदेश से चेहते इंजीनियर्स को बचाने की कोशिश की जा रही है। पिछले दिनों भीलवाड़ा एसई ओ.पी. महला ने एक ही दिन में 2-2 लाख के 25 वर्क ऑर्डर से 50 लाख की सामग्री खरीद कर ली थी। मामला सामने आने के बाद गड़बड़ी की गंभीरता को देखते हुए डिस्कॉम प्रबन्धन ने एसई महला को सस्पेंड कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच कराकर चार्जशीट दे दी है। फिलहाल मामले में कार्रवाई लम्बित है। अब सचिव की ओर से जारी आदेश के मुताबिक- एक करोड़ से कम की खरीद करने वालों पर कोई कार्रवाई का निर्देश नहीं दिया गया। इन्हें मिल सकता है नोटिस सचिव की ओर से जारी आदेश को माना जाए तो सीकर, राजसमंद, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर को चार्जशीट दी जानी है। वहीं झुंझुनूं, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, ब्यावर को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। इसी प्रकार भीलवाड़ा, नागौर, डूंगरपूर से कोई जवाब तलब नहीं होगा। भीलवाड़ा एसई को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है और विभागीय जांच चल रही है। पिछले दो साल में 43.86 करोड़ की खरीद, देखिए रिपोर्ट क्या है RTPP नियम 2 लाख से कम के वर्कऑर्डर का नियम 1- दो लाख रुपए तक की खरीद के लिए पूरा ई-टेंडर करने की जरूरत नहीं है। इसे “सीमित निविदा / कोटेशन” कहते हैं। विभाग कम से कम 3 रजिस्टर्ड सप्लायर्स और फर्मों से सील बंद कोटेशन मंगवाता है। सबसे कम L1 को काम दे दिया जाता है। 2- लिखित में या विभाग की वेबसाइट/नोटिस बोर्ड पर कुछ दिन का समय देकर कोटेशन मांगा जाता है। आए हुए कोटेशन की तुलना करके सबसे कम रेट वाले को आदेश देते है। 3- दो लाख तक की खरीद में EMD और टेंडर फीस नहीं लगती। खरीद पूरी होने के 7 दिन के अंदर sppp.rajasthan.gov.in पर “Contract Award Details” डालना अनिवार्य है। 2 लाख से ज्यादा के काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर कोटेशन से नहीं खरीद सकते।

सिनर ने लगातार दूसरी बार विंबलडन जीता:ज्वेरेव को चार सेट में हराया; युवराज सिंह, अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी मैच देखने पहुंचे

वर्ल्ड नंबर-1 टेनिस खिलाड़ी जैनिक सिनर ने विंबलडन 2026 का पुरुष एकल खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ 24 वर्षीय सिनर लगातार दूसरी बार विंबलडन चैंपियन बने। वे ओपन एरा में विंबलडन पुरुष एकल खिताब बचाने वाले इतिहास के सिर्फ 10वें खिलाड़ी बन गए। 24 साल के सिनर ने पहली बार फाइनल खेल रहे में जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव को 6-7(7), 7-6(2), 6-3, 6-4 से हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी जीती। यह मैच 3 घंटे 46 मिनट तक चला। इसी के साथ सिनर ने करियर का 100वां ग्रैंड स्लैम मैच जीतने की अचीवमेंट भी हासिल की। चैंपियन बनने पर सिनर को 36 लाख पाउंड (करीब ₹42 करोड़) की इनामी राशि भी मिली। वे एटीपी रैंकिंग में नंबर-1 बने रहेंगे। उनके और नए नंबर-2 बनने वाले ज्वेरेव के बीच 4,970 अंकों का अंतर रहेगा। यह 5वां ग्रैंड स्लैम टाइटल, इस साल पहला यह सिनर के करियर का 5वां ग्रैंड स्लैम और 2026 सीजन का पहला मेजर खिताब है। इससे पहले वे फ्रेंच ओपन के दूसरे दौर में जुआन मैनुअल सेरुंडोलो से हारकर बाहर हो गए थे। हालांकि, उन्होंने ग्रास कोर्ट पर शानदार वापसी की। सेमीफाइनल में नोवाक जोकोविच को सीधे सेटों में हराने के बाद फाइनल में भी उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया। पहला सेट गंवाया, फिर शानदार वापसी फाइनल का पहला सेट टाई-ब्रेक तक पहुंचा, जहां ज्वेरेव ने बढ़त बना ली। फिर सिनर ने दूसरे सेट का टाई-ब्रेक जीतकर मुकाबले में बराबरी की। तीसरे और चौथे सेट में उन्होंने एक-एक बार ज्वेरेव की सर्विस तोड़ी और पूरे मैच में अपने खिलाफ मिले इकलौते ब्रेक प्वाइंट को भी बचा लिया। सिनर ने मुकाबले में 58 विनर्स लगाए और पहला चैंपियनशिप प्वाइंट भुनाते ही कोर्ट पर लेटकर जीत का जश्न मनाया। ज्वेरेव पर लगातार 10वीं जीत सिनर ने ज्वेरेव के खिलाफ लगातार 10वीं जीत दर्ज की। वहीं जर्मन खिलाड़ी का लगातार दूसरे ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचने के बावजूद दूसरा मेजर खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया। यह सिनर का 2026 सीजन का छठा एटीपी खिताब है। इससे पहले वह रोम मास्टर्स जीतकर करियर गोल्डन मास्टर्स पूरा कर चुके हैं। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर युवराज, अभिषेक-वैभव मैच देखने पहुंचे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह, मौजूदा टीम के ओपनर अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी फाइनल मैच देखने पहुंचे। वैभव ने अपने इंस्टा में विंबलडन फाइनल की फोटो साझा की। ———————————————— विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप की यह खबर भी पढ़िए… 21 साल की लिंडा नोस्कोवा बनीं विंबलडन चैंपियन, कैरोलीना मुहोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराया चेक रिपब्लिक की 21 साल की टेनिस खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने विंबलडन 2026 का विमेंस सिंगल्स खिताब अपने नाम कर लिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट पर खेले गए फाइनल मुकाबले में अपने ही देश की कैरोलीना मुहोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से शिकस्त दी। पढ़ें पूरी खबर

हरियाणा-दरगाह पर चला बुलडोजर, रोतीं-चिल्लातीं रही महिलाएं, VIDEO:सेवादार के घर की दीवार भी तोड़ी; मंदिर के पुजारी को घसीट-घसीट कर मारा था

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के अढ़ोनी गांव में शिव मंदिर के पुजारी योगीराज गिरी (74) पर हुए हमले में शामिल आरोपियों पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को भारी फोर्स के साथ पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने इसकी शुरुआत पुजारी को मफलर डालकर घसीटने वाले दरगाह के सेवादार पंकज के घर से की। टीम ने उसके मकान की दीवार को तुड़वा दिया। इसके बाद टीम दरगाह पर भी बुलडोजर चलवाया। उधर, आरोपी पंकज की मां परमजीत ने इस कार्रवाई का विरोध किया। बोलीं कि पूरे गांव में अवैध कब्जे हैं। सभी कब्जे हटवाए जाएं। घर टूट गया है, वे कहां जाएंगे। हमारे छोटे-छोटे बच्चे भी है। जैसे हमारा तोड़ा जा रहा है, वैसे ही पूरे गांव में तोड़ों। बता दें कि 9 जुलाई की सुबह शिव मंदिर के पुजारी योगीराज पर हमला हुआ था। आरोप है कि दरगाह के सेवादार पंकज ने पहले पुजारी से मारपीट की। इसके बाद गले में परना डालकर उन्हें सड़क पर घसीटा। इस दौरान उनकी टांग टूट गई और शरीर पर कई चोटें आईं। गंभीर हालत में उन्हें एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के कुछ PHOTOS… आरोपी के घर, दरगाह पर कार्रवाई कर लौटी टीम सरपंच परमजीत सिंह ने बताया कि पंचायत ने वर्ष 2023 में गांव के रास्तों पर किए गए अवैध कब्जों की शिकायत प्रशासन को दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने रास्तों की निशानदेही कराई। जांच में कई जगह सरकारी रास्ते पर कब्जा मिला। दरगाह का आगे की तरफ करीब 3.4 फीट हिस्सा सरकारी रास्ते में बना हुआ है। इसी तरह मुख्य आरोपी पंकज के घर का एक कॉर्नर का करीब 7 फीट हिस्सा भी रास्ते में आ रहा था। प्रशासन इन दोनों जगहों के साथ अन्य अवैध कब्जों को हटवा दिया। आरोपी के मकान और दरगाह के अलावा 16 अन्य अवैध कब्जे भी शामिल है, जिन पर कार्रवाई होनी है। फिलहाल, टीम ने दोनों जगह पर ही कार्रवाई की है। आरोपी की मां बोलीं-बहू की कोई गलती नहीं उधर, इस कार्रवाई के दौरान आरोपी पंकज की मां परमजीत ने गांव के सरपंच परमजीत सिंह को भी खूब खरीखोटी सुनाई। पुजारी को घसीटने के सवाल पर बोलीं कि बेटे की पत्नी की कोई गलती नहीं है। उसको लगा कि दरगाह में सांप घुस रहा है। इसलिए पंकज ने उससे लाठी मंगवाई है। वह लाठी देने गई थी। बताया कि उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे है, जो अपनी मां के बिना नहीं रह सकते। मामले से जुड़ी खास बातें… प्रशासन की कार्रवाई से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…

अमेरिका ने ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की:UAE का दावा- होर्मुज में टैंकर पर हमले में एक भारतीय की मौत; US ईरान की नाकेबंदी शुरू करेगा

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा है कि उन्होंने ईरान पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास और कीश पर धमाके हुए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, ट्रम्प के आदेश के बाद मंगलवार शाम 8 बजे से ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी फिर से लागू की जाएगी। वहीं, यूएई (UAE) के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि होर्मुज में ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास उसके दो तेल टैंकरों पर ईरान की दो क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया है। मोंबासा नाम के टैंकर पर हुए इस हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई है, जबकि आठ लोग घायल हुए हैं। इससे पहले ट्रम्प ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका संभालेगा। उन्होंने खुद को ‘गार्डियन ऑफ द होर्मुज स्ट्रेट’ बताते हुए कहा कि इस काम का खर्च उठाने के लिए स्ट्रेट से गुजरने वाले हर कार्गो पर 20% टैक्स लिया जाएगा। ट्रम्प के इस ऐलान पर ईरान ने कड़ा विरोध जताया। ईरानी सेना के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी अमेरिकी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. ओमान के पास जहाज पर हमला,1 भारतीय लापता: ‘GFS गैलेक्सी’ जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय सवार थे। 10 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि एक भारतीय अब भी लापता है। भारत ने हमले की निंदा करते हुए नागरिक जहाजों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की। 2. अमेरिका बोला- ईरान के 300 ठिकानों पर हमला किया: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक अमेरिका ने इस सप्ताह 3 दिनों में ईरान के 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। 3. लेबनान पर इजराइल ने फिर हमले किए: इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह जिले के कफर तेबनित कस्बे पर गोलीबारी की। फिलहाल इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। 4. कुवैत के सीमा चौकियों को नुकसान: कुवैत की सेना ने रविवार को बताया कि हाल के हमलों में देश के उत्तरी हिस्से में स्थित तीन सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचा है। 5. खुजेस्तान में वाटर प्रोजेक्ट पर हमला: ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के महशहर शहर में एक वाटर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। मिडिल ईस्ट के हालात से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

RGHS में कैंसर इलाज की नई गाइडलाइन:30 हजार से महंगी दवा पर मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी, मरीज की जरूरत से तय होगा इलाज

RGHS में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन लागू कर दी गई है। अब डॉक्टर मरीजों को सीधे महंगी और ब्रांडेड दवाइयां नहीं दे पाएंगे। मरीज की जरूरत के हिसाब से किफायती इलाज चुना जाएगा। अगर मरीज को 30 हजार रुपए से ज्यादा कीमत की दवा, एक लाख रुपए से अधिक की सर्जरी के अलावा किसी खास थेरेपी की जरूरत है तो इसके लिए मेडिकल बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही RGHS पोर्टल पर जल्द कैंसर रेफरल मॉड्यूल भी शुरू किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी बनेगी। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- मरीजों के कैंसर के इलाज के लिए नए नियम क्या हैं? क्यों पड़ी नई गाइडलाइन की जरूरत? कैंसर का इलाज जटिल और महंगा होता है। इसमें इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, उन्नत रेडियोथेरेपी और जटिल सर्जरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है। अब तक एक समान प्रोटोकॉल नहीं होने से कई बार इलाज में देरी, अनावश्यक खर्च और संसाधनों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती थीं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने प्रदेश के कैंसर विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऑन्कोलॉजी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन तैयार की है। इनका उद्देश्य सभी अस्पतालों में एक समान व्यवस्था लागू करना और मरीजों को प्रभावी और किफायती इलाज उपलब्ध कराना है। इलाज कैसे तय होगा? सभी डॉक्टरों को इलाज के लिए NICE और ICMR की गाइडलाइंस का पालन करना होगा। यदि किसी बीमारी के लिए इन संस्थाओं की सिफारिश उपलब्ध नहीं है, तभी ESMO या NCCN जैसी अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस का सहारा लिया जा सकेगा। यदि कोई डॉक्टर निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग उपचार लिखता है तो उसे लिखित रूप से कारण और उस इलाज की जरूरत के वैज्ञानिक प्रमाण देने होंगे। अब जानते हैं मेडिकल बोर्ड की मंजूरी कहां-कहां जरूरी होगी सर्जरी और दवाएं : सामान्य सर्जरी के लिए अलग मंजूरी की जरूरत नहीं। लेकिन एक लाख रुपए से अधिक लागत वाली सर्जरी के लिए RGHS के गठित मेडिकल बोर्ड की अनुमति जरूरी होगी। इसके अलावा जेनेरिक दवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। महंगी दवाओं के लिए मेडिकल बोर्ड की स्वीकृति अनिवार्य होगी। कीमोथेरेपी : रेडियोथेरेपी में कैंसर को खत्म करने वाली या दर्द कम करने वाली रेडिएशन तकनीक का चुनाव डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर करेंगे। टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी : ये कैंसर का सबसे महंगा इलाज माना जाता है। यह इलाज मरीज को RGHS में तभी मिल पाएगा जब उसकी रिपोर्ट में संबंधित बायोमार्कर पॉजिटिव होगा। यदि एक साइकिल या एक माह में खर्च 30 हजार रुपए से अधिक है तो मेडिकल बोर्ड की मंजूरी अनिवार्य होगी। हार्मोनल थेरेपी : थेरेपी ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर में जेनेरिक दवाओं को प्राथमिकता। महंगी दवाओं के लिए मेडिकल बोर्ड की अनुमति लेनी होगी। कैंसर के इलाज में मेडिकल बोर्ड की क्या भूमिका होगी नई गाइडलाइन में मेडिकल बोर्ड की भूमिका अहम रहेगी। सामान्य इलाज के लिए किसी तरह की परमिशन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन 30 हजार रुपए से अधिक लागत वाली दवा, एक लाख रुपए से अधिक लागत वाली सर्जरी या फिर कोई ऐसी तकनीक जो लिस्ट में शामिल नहीं है, उस इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड की परमिशन लेनी होगी। गाइडलाइन में स्पष्ट निर्देश हैं कि मेडिकल बोर्ड को भी 10 से 15 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा, ताकि मरीज के इलाज में किसी प्रकार की देरी न हो। इलाज की परमिशन के लिए मरीज को खुद बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा। हालांकि, ICU और वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों को इससे छूट रहेगी। मरीज की शारीरिक क्षमता के अनुसार मिलेगा इलाज कैंसर का मरीज कौन-कौन सी महंगी थेरेपी के लिए पात्र है, इसका निर्धारण ECOG (Eastern Cooperative Oncology Group) स्केल से किया गया है। ECOG एक अंतरराष्ट्रीय स्केल है, जिससे डॉक्टर यह आकलन करते हैं कि कैंसर मरीज शारीरिक रूप से कितना सक्रिय है और वह इलाज (जैसे कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी) सहन कर पाएगा या नहीं। ECOG 1: सभी आधुनिक और उच्च-लागत वाली थेरेपी के पात्र हैं। ECOG 2: मेडिकल बोर्ड केस-दर-केस निर्णय लेगा। ECOG 3: आक्रामक उपचार की बजाय पैलिएटिव केयर को प्राथमिकता। ECOG 4: सक्रिय कैंसर थेरेपी नहीं, केवल सहायक देखभाल। मरीजों को क्या फायदा होगा? नई व्यवस्था से महंगी ब्रांडेड दवाओं के बजाय प्रभावी और किफायती विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा। महंगे इलाज का फैसला अब किसी एक डॉक्टर के बजाय विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड करेगा। इससे अनावश्यक खर्च कम होगा और ट्रीटमेंट अधिक पारदर्शी बनेगा। इसके साथ ही RGHS पोर्टल पर कैंसर रेफरल मॉड्यूल शुरू होने जा रहा है। इसके लागू होने के बाद कैंसर मरीजों को रेफर करना, मेडिकल बोर्ड की मंजूरी और उपचार की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। मरीज को पहले क्या इलाज दिया गया और अब आगे क्या होगा, इसकी जानकारी भी अपडेट रहेगी। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और मरीज अपने केस की स्थिति पोर्टल पर देख सकेंगे। कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की मदद से तैयार हुई गाइडलाइन राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) के CEO हरजीलाल अटल ने बताया कि स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की मदद से यह गाइडलाइन तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि RGHS पोर्टल में बदलाव किए जा रहे हैं। मेडिकल बोर्ड के गठन से लेकर उसकी रिपोर्ट तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। ऑफलाइन पत्राचार समाप्त होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समय बचेगा। मरीज भी पोर्टल पर अपने केस की स्थिति देख सकेंगे। मामलों की रोजाना मॉनिटरिंग और साप्ताहिक समीक्षा भी की जाएगी, ताकि समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित हो सके। —— यह खबर भी पढ़िए… RGHS में OPD जांच के लिए अब नए नियम:2 हजार रुपए तक की जांच के लिए मंजूरी जरूरी नहीं; जानें- और क्या बदलाव हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला किया है। RGHS के तहत OPD में रूटीन जांच को लेकर राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) ने नई गाइडलाइन जारी की है, जो 13 जुलाई यानी सोमवार से लागू हो जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…

बैंकॉक के बार में आग, 27 मौतें:पार्टी कर रहे 60 से ज्यादा लोग घायल; जान बचाने के लिए लोग टॉयलेट में छिपे

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में रविवार देर रात एक बार में आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 63 लोग घायल हो गए। थाई अधिकारियों के मुताबिक आग लगने की वजह बिजली के सिस्टम में खराबी हो सकती है। सभी घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। आग लगने की वजह की जांच अभी जारी है। फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट ने कहा कि उन्हें रात 12 बजे आग लगने की सूचना मिली। करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया, लेकिन तब तक इमारत का बड़ा हिस्सा जल चुका था। घटनास्थल पर मौजूद एक म्यूजीशियन ने बताया कि बिजली जाने से कुछ देर पहले मंच के पास लगे सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलता दिखाई दिया था। इसके बाद एक धमाके की आवाज आई और देखते ही देखते पूरे पब में धुआं भर गया। उन्होंने बताया कि कई लोग जान बचाने के लिए इमारत के पिछले हिस्से में मौजूद टॉयलेट में घुस गए, जहां पर दम घुटने से उनकी मौत हो गई। थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने कहा कि सभी शव बरामद किए गए हैं। बार में आग से जुड़ी 5 तस्वीरें… आग पर आधे घंटे में काबू, लेकिन तब तक बड़ा नुकसान हो चुका था रिपोर्ट्स के मुताबिक दमकलकर्मियों ने करीब आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया, लेकिन तब तक बड़ा नुकसान हो चुका था। यह बार बैंकॉक के चातुचक जिले में स्थित है। स्थानीय स्तर पर इसे रोंग बीयर ना लाट फ्राओ नाम से जाना जाता है। यह इलाके का लोकप्रिय रेस्तरां और मनोरंजन स्थल माना जाता है। आग बुझने के बाद की तस्वीरों में बार के बाहर बड़ी संख्या में बॉडी बैग रखे दिखाई दिए। पूरे इलाके को पुलिस ने घेर लिया। अंदर का फर्नीचर, दीवारें और छत पूरी तरह काली पड़ चुकी थीं। छत के कुछ हिस्से भी उखड़ गए। गवर्नर बोले- सजावट से तेजी से फैली आग बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सित्तिपुंत ने कहा कि पब की छत पर लगी ज्वलनशील सजावट की वजह से आग तेजी से फैली हो सकती है। उन्होंने बताया कि इमारत के आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) के पास कुछ लोग बेहोश मिले हैं। इससे आशंका है कि बाहर निकलने का रास्ता किसी तरह बाधित था। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन बातों की पुष्टि फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। मोटरसाइकिल चालक सुरिन जाइहार्न ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उसने जलते हुए पब से करीब पांच लोगों को बाहर निकलने में मदद की। उसने उनके शरीर पर लगी आग कपड़ों की मदद से बुझाई। सुरिन ने कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। मैंने कई लोगों को मरते देखा। जिन लोगों की मैंने मदद की, उनका क्या हुआ, मुझे नहीं पता।” फायर ब्रिगेड को सूचना देने वाले एक ड्राइवर ने थाई अखबार डेली न्यूज को बताया कि उसने दो लोगों को बचाने के लिए पब की खिड़कियां तोड़ दी थीं। थाईलैंड में पहले भी ऐसे हादसे हुए ———————————— ये खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला में फिर भूकंप के झटके, अब तक 1430 मौतें:करीब 3300 घायल, 51 हजार लापता; लोग खुद मलबा हटाकर अपनों को तलाश रहे दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में 25 जून को आए दो भूकंप के बाद स्थानीय समयानुसार शुक्रवार दोपहर को एक और भूकंप आया। देश के उत्तरी तट के पास आए इस भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, राजधानी कराकास और माराके में भी झटके महसूस किए गए। पूरी खबर पढ़ें…

प्रेम कहानी जिसे शब्दों ने लिखा, रंगों ने जिंदा रखा:'बणी-ठणी' क्या सिर्फ एक कल्पना है या वाकई कोई महिला थी? एपिसोड-1

बणी- ठणी कौन थी? ऐसा क्या था उस तस्वीर में जो राजस्थान की धरोहर बनी, जिसने किशनगढ़ शैली को दुनिया भर के कला जगत में पहचान दिलाई। जानते हैं राजा सावंत सिंह और बणी- ठणी की कहानी, जिनके प्रेम और भक्ति को कलाकार निहाल चंद ने अमर कर दिया- अठारहवीं सदी में राजपूताना का एक कोना- किशनगढ़। यहां के राजा सावंत सिंह केवल शासक नहीं, कवि और कृष्ण भक्त भी थे। यही वजह थी कि जहां अन्य दरबारों में तलवारों की खनक थी, किशनगढ़ में कविता, संगीत और भक्ति का मीठा शोर गूंजता था। यहां के राजा सावंत सिंह खुद ‘नागरी दास’ के छद्म नाम से कविताएं लिखते थे। उनकी रचनाओं में शब्द नहीं, भक्ति बहती थी और शायद यही वजह थी कि उनका मन राजपाट से ज्यादा कविता और कृष्ण में रमता था। यही माहौल बणी- ठणी और किशनगढ़ कला शैली के लिए उपजाऊ जमीन साबित हुआ। बणी-ठणी को दिल्ली से खरीदा गया था कहा जाता है बणी- ठणी को राजा सावंत सिंह की सौतेली मां, बंकावतजी के लिए बहुत छोटी उम्र में उस समय के शाहजहानाबाद यानी आज की पुरानी दिल्ली से खरीदा गया था। जिसके बाद उसे संगीत और गायन का प्रशिक्षण दिया गया। समय के साथ बणी- ठणी न सिर्फ गायन और संगीत में निपुण हो गई, बल्कि कविता लेखन में भी पारंगत हो गई। बणी-ठणी राजा सावंत सिंह की पासवान थीं किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार की सदस्य मीनाक्षी देवी के अनुसार, बणी-ठणी महाराजा सावंत सिंह की पासवान थीं। वे बहुत अच्छा लिखती थीं। वे राजा के साथ इसलिए जुड़ीं क्योंकि दोनों साथ में कविताएं लिखते थे। उनकी कविताएं आज भी मंदिर में गाई जाती हैं।
नई आवाज का जादू उस शाम महल में एक नई आवाज सुनाई दी, उस आवाज में कृष्ण भक्ति की ऐसी गहराई थी कि पूरा दरबार भक्ति में सराबोर हो गया। सावंत सिंह भी इस आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कर रहे थे। कौन है यह जिसकी आवाज में साक्षात सरस्वती का वास है? राजा ने जिज्ञासा के साथ पूछा। यह बणी- ठणी है, हमारे महल की नई सदस्य। ‘रसिक बिहारी’ के नाम से लिखी इनकी रचनाएं सिर्फ शब्द नहीं जादू हैं, बंकावत जी ने राजा को बणी- ठणी का परिचय दिया। राजा की नजर बणी- ठणी पर जैसे कुछ पल ठहर गयी। इस आवाज में गजब की मिठास और आकर्षण है। बणी- ठणी हम चाहेंगे कि आप हमारे दरबार में भी अपनी रचनाएं सुनाएं, ऐसा कहते हुए सावंत सिंह ने बणी- ठणी को और अधिक सुनने की इच्छा जाहिर कर दी। अब राजा रोज बणी- ठणी के कृष्ण भक्ति के मधुर संगीत और कविताएं सुनते, साथ ही उसमें अपनी रचनाएं भी जोड़ते। राजा सावंत और बणी- ठणी दोनों का कृष्ण भक्त होना उन्हें एक अनकही डोर से जोड़ रहा था। (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। फोटो व पेंटिंग आभार: किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार, चित्रकार, शहज़ाद अली शेरानी ) कल के एपिसोड में जानेंगे ‘नागरी दास’ और ‘रसिक बिहारी’ की भक्ति और प्रेम की जुगलबंदी…